बंद करने के आदेशों से वन पर्यटन में निवेश जोखिम में
बांग्लादेश के पर्यावरण विभाग ने खुलना, बागेरहाट और सातखीरा में सुंदरबन के पास स्थित 24 रिसॉर्ट को संचालन बंद करने का आदेश दिया है। विभाग का कहना है कि ये पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी के बिना बनाए गए थे। चिन्हित संपत्तियों में खुलना के 18, बागेरहाट के दो और सातखीरा के चार रिसॉर्ट शामिल हैं। मालिकों को अपने निर्माण हटाने का निर्देश भी दिया गया है, हालांकि खबरों में इस बात को लेकर अंतर है कि सभी को 30 दिन मिले हैं या कुछ के लिए समयसीमा कम है।
विषय-सूची
- बंद करने के आदेशों से वन पर्यटन में निवेश जोखिम में
- अलग-अलग आंकड़ों और समयसीमाओं पर स्पष्टीकरण जरूरी
- किन रिसॉर्ट पर असर पड़ा है?
- उद्योग का विस्तार कितनी तेजी से हुआ?
- व्यापार लाइसेंस पर्यावरणीय मंजूरी नहीं है
- प्रदूषण से डॉल्फिन के आवास को खतरा
- मालिकों ने निवेश, कर और स्थानीय रोजगार का हवाला दिया
- रोजगार के आंकड़े लाभ के साथ अनिश्चितता भी दिखाते हैं
- कार्रवाई और नियमन का प्रस्तावित रास्ता
- मुख्य बिंदु
विवाद उन व्यवसायों को लेकर है जो ज्यादातर वन सीमा से बाहर ऐसी जमीन पर स्थापित किए गए हैं, जिसे मालिक निजी संपत्ति बताते हैं। कई रिसॉर्ट ग्राम परिषद के व्यापार लाइसेंस लेकर चलने लगे, लेकिन इन लाइसेंसों से पर्यावरणीय मंजूरी और जिला प्रशासन की स्वीकृति की अलग-अलग जरूरतें पूरी नहीं हुईं। मालिकों का कहना है कि उन्होंने ऐसी स्वीकृति प्रक्रिया के बीच काफी पैसा लगाया, जिसमें उनके स्थानों के लिए कोई व्यावहारिक रास्ता नहीं था।
पर्यावरण विभाग के खुलना संभागीय कार्यालय के निदेशक खोंडकर एमडी फजलुल हक ने कहा कि नोटिस के बाद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभाग ने कार्रवाई की।
"रिसॉर्ट प्राधिकरणों को कानून के अनुसार नोटिस दिए गए थे। कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर हमने उनका संचालन बंद करने का आदेश दिया है," खोंडकर एमडी फजलुल हक ने कहा।
इस कार्रवाई के साथ वन क्षेत्र के किनारे पर्यटन को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना मंजूरी निर्माण, प्रदूषण और संरक्षित जलमार्गों में अनियंत्रित आवाजाही हो रही है। उद्यमियों का कहना है कि एक स्थानीय अर्थव्यवस्था उभर रही है, जिससे कामगारों, नाव संचालकों और खाद्य सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को सहारा मिलता है। रोजगार के दावे और स्पष्ट नियमों की मांग, दोनों में से कोई भी यह तय नहीं करता कि अलग-अलग रिसॉर्ट वहां कानूनी रूप से बने रह सकते हैं या नहीं।
अलग-अलग आंकड़ों और समयसीमाओं पर स्पष्टीकरण जरूरी
संभागीय रिपोर्ट में 24 रिसॉर्ट की पहचान की गई है और निर्माण हटाने के लिए 30 दिन की समयसीमा बताई गई है। खुलना जिले की कार्रवाई के अधिक विस्तृत ब्यौरों के मुताबिक, 10 प्रतिष्ठानों को 30 दिन और आठ को 15 दिन दिए गए। यह अंतर अहम है, क्योंकि खुलना जिला कार्यालय के दायरे में आने वाली 18 संपत्तियां संभागीय कुल संख्या का केवल एक हिस्सा हैं।
खुलना जिला पर्यावरण कार्यालय के सहायक निदेशक एमडी हारुन उर राशिद ने कहा कि उसकी कार्रवाई धांगमारी, कैलाशगंज और बानिशांता में हुई। उन्होंने बताया कि चिला, बैद्यामारी और चांदपाई बागेरहाट में आते हैं, इसलिए वहां के रिसॉर्ट की जानकारी उनके कार्यालय के पास नहीं थी। एक अलग रिपोर्ट में 24 के बजाय 23 रिसॉर्ट और कॉटेज को नोटिस दिए जाने का जिक्र है। इस अंतर को स्पष्ट करने वाली कोई मिलान की गई सूची उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्टों में बताई गई घटनाओं का क्रम इस प्रकार है:
- 30 सितंबर: पहले नोटिस पा चुके रिसॉर्टों के आवेदन मांगे गए दस्तावेज जमा नहीं किए जाने के कारण खारिज कर दिए गए। आठ नए रिसॉर्ट को अलग से सात दिन के भीतर स्वीकार्य स्थानों पर स्थानांतरित होने को कहा गया।
- 4 अक्टूबर: संचालन बंद करने के लिखित निर्देश जारी किए गए। खुलना की विस्तृत रिपोर्टों के मुताबिक, 10 रिसॉर्ट को निर्माण हटाने के लिए 30 दिन और आठ को 15 दिन दिए गए।
- 6 अक्टूबर, 2026: तारीख वाली एक रिपोर्ट में खुलना के आदेशों और मोबाइल अदालतों, बिजली कनेक्शन काटने तथा अदालती मुकदमों के जरिए संभावित कार्रवाई का जिक्र था।
- बंद करने के नोटिसों के बाद: आगे की रिपोर्टों में विज्ञापन जारी रहने और सरकारी हस्तक्षेप की उद्यमियों की अपील का उल्लेख किया गया।
तारीखों को लेकर सावधानी जरूरी है। ज्यादातर रिपोर्टें बिना वर्ष बताए 30 सितंबर और 4 अक्टूबर की तारीखें देती हैं, जबकि एक पर स्पष्ट रूप से 6 अक्टूबर, 2026 की प्रकाशन तारीख है। बताया गया 4 अक्टूबर का कदम उस सात दिन की अवधि पूरी होने से पहले भी आता है, जो 30 सितंबर से शुरू हुई थी। इन विसंगतियों के चलते अलग-अलग नोटिस देखे बिना सभी अंतिम समयसीमाओं की भरोसेमंद गणना नहीं की जा सकती।
किन रिसॉर्ट पर असर पड़ा है?
खुलना की रिपोर्टों में लगातार 18 रिसॉर्ट की पहचान की गई है, जिनमें से ज्यादातर डाकोप उपजिला में हैं। ये क्षेत्रीय कुल 24 रिसॉर्ट का तीन-चौथाई हैं। बागेरहाट के दो और सातखीरा के चार रिसॉर्ट इस सूची में हैं।
- खुलना: अरण्यछाया, अरण्यबाड़ी, केउराबन, मायाबन, गहन, द फॉरेस्ट रिट्रीट, निकुंज वैली, ला सिल्वा कॉटेज, बोनबीबी, सुंदरी, इरावती, बोनमाली, गोलकानन, पियाली, मैंग्रोव, जंगलबाड़ी, बोनोबास और बोनलोटा इको कॉटेज।
- बागेरहाट: टाइगर पॉइंट और बादाबन।
- सातखीरा: बरशा रिसॉर्ट, सुशीलन रिसॉर्ट, ओशन पैराडाइज और चौथा नाम, जिसे अलग-अलग रिपोर्टों में परिषद और प्रसाद पैराडाइज लिखा गया है।
नामों को लेकर एक और समस्या है। उद्योग की शुरुआत से जुड़ी रिपोर्टों में मुंशीगंज, सातखीरा में टाइगर पॉइंट नामक एक रिसॉर्ट का जिक्र है, जिसे गैर-सरकारी संगठन सुशीलन ने 2009 में स्थापित किया था। क्षेत्रीय बंदी सूची में टाइगर पॉइंट को बागेरहाट में रखा गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि एक ही नाम वाले ये अलग व्यवसाय हैं या स्थान का उल्लेख गलत है। कई रिसॉर्ट के नामों की वर्तनी भी रिपोर्टों में अलग-अलग है।
उद्योग का विस्तार कितनी तेजी से हुआ?
सुंदरबन के पास व्यावसायिक रिसॉर्ट विकास की शुरुआत 2009 से मानी जाती है, जब सुशीलन ने मुंशीगंज में उन लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था की, जो जंगल से जुड़े काम करते थे, शोधकर्ता थे या दानदाता संस्थाओं और सरकारी विभागों के प्रतिनिधि थे। गैर-सरकारी संगठन बरसा के स्वामित्व वाला बरशा रिसॉर्ट 2011 में शुरू हुआ। 2015 में दानदाताओं की मदद से डाकोप में 10 रिसॉर्ट स्थापित किए गए। बताया जाता है कि उस समूह में से केवल गोलकानन खुला रहा।
हाल के वर्षों में विस्तार कहीं तेज रहा। खुलना विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों के आधारभूत अध्ययन में अध्ययन क्षेत्र में 2018 में तीन इको कॉटेज दर्ज किए गए और 2021 तक संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। 2023 तक वहां 74 कमरों और 260 पर्यटकों के ठहरने की क्षमता वाले 12 रिसॉर्ट गिने गए। संपत्तियों की यह संख्या 2018 से चार गुना थी।
अनुमानित पर्यटक यात्राओं की संख्या 2018 में करीब 370 से बढ़कर 2023 में 7,562 हो गई, यानी लगभग 20 गुना। अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि 2024 के अंत तक 20 कॉटेज में 560 पर्यटकों के ठहरने की क्षमता होगी, जो 2023 की क्षमता से दोगुने से अधिक है। इस अनुमान में 58 कमरों वाले आठ नए कॉटेज और सात मौजूदा संपत्तियों में जोड़े जा रहे 42 कमरे शामिल थे। यह एक अनुमान है, इस बात की पुष्टि नहीं कि हर कमरा बनकर तैयार हो गया।
जून 2024 की एक अलग रिपोर्ट में खुलना और सातखीरा में 14 स्थापित रिसॉर्ट और आठ निर्माणाधीन रिसॉर्ट गिने गए। एक अन्य रिपोर्ट में कम से कम 21 चालू रिसॉर्ट और कॉटेज तथा 10 और निर्माणाधीन बताए गए। ये आंकड़े अलग-अलग समय और स्थानों से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें एक ही सतत जनगणना नहीं मानना चाहिए।
व्यापार लाइसेंस पर्यावरणीय मंजूरी नहीं है
रिपोर्टों के मुताबिक, सुंदरबन की सीमा से 10 किलोमीटर तक फैले आसपास के इलाके को 1999 में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया था। ऐसे क्षेत्र में पर्यावरणीय संवेदनशीलता के कारण उन गतिविधियों पर पाबंदियां लगाई जाती हैं जो उसकी प्राकृतिक स्थिति को नुकसान पहुंचाती हैं। वन सीमा के बाहर होने से कोई संपत्ति अपने-आप इन पाबंदियों से बाहर नहीं हो जाती।
बताया गया है कि बंदी के पत्रों में बांग्लादेश पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1995 और 2010 में हुए उसके संशोधन तथा संबंधित नियमों का हवाला दिया गया है। फजलुल हक ने विभाग का रुख स्पष्ट शब्दों में बताया।
"पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में कोई रिसॉर्ट नहीं चलाया जा सकता," उन्होंने कहा।
मालिकों का तर्क है कि उन्होंने राष्ट्रीय पर्यटन नीति 2010 का पालन किया। वे इसके अनुच्छेद 3.2.2 का हवाला देते हैं, जिसमें सुंदरबन के आसपास टिकाऊ इकोटूरिज्म को बढ़ावा दिया गया है और पर्यावरण तथा वन विभागों के साथ समन्वय से इको लॉज, वॉचटावर और पैदल रास्ते जैसी सुविधाएं विकसित करने की बात है। नीति में दी गई यह दिशा किसी व्यक्तिगत पर्यावरणीय मंजूरी या निर्माण स्वीकृति के बराबर नहीं है।
रिपोर्टों में नियमों को लेकर अधिकारियों के अलग-अलग बयान भी सामने आते हैं। जून 2024 की रिपोर्ट में खुलना के पर्यावरण निदेशक बताए गए एमडी इकबाल हुसैन ने कहा कि ईसीए दिशा-निर्देश आसपास के 10 किलोमीटर के भीतर निर्माण पर रोक लगाते हैं। बाद की एक रिपोर्ट में खुलना के सहायक निदेशक परवेज अहमद ने कहा कि पर्यावरण कानून के अनुसार बना ढांचा अपने-आप में अपराध नहीं था, लेकिन इन संचालकों ने नियमों का पालन नहीं किया और नुकसान पहुंचाया। कोई विस्तृत कानूनी निर्णय यह तय नहीं करता कि प्रभावित रिसॉर्ट मंजूरी पाने के लिए क्या रास्ता अपना सकते हैं।
प्रदूषण से डॉल्फिन के आवास को खतरा
रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 10 रिसॉर्ट धांगमारी नहर के किनारे हैं, जिसे गंगा और इरावदी डॉल्फिनों के लिए अभयारण्य घोषित किया गया है। पर्यटकों की नावें इस नहर से गुजरती हैं, कभी-कभी बिना अनुमति के भी। रिपोर्टों में तेज संगीत, जनरेटर, अत्यधिक रोशनी और पास के जलमार्गों में गंदा पानी छोड़े जाने का जिक्र है।
अन्य आरोपों में पेड़ों की कटाई, आर्द्रभूमि को भरना और निजी जमीन तथा बांग्लादेश जल विकास बोर्ड की जमीन पर निर्माण शामिल हैं। पहले की रिपोर्टों में एक रिसॉर्ट के लिए जलाशय को रेत से भरने और प्लास्टिक कचरा जलाने का जिक्र था। बताया जाता है कि इको कॉटेज के रूप में प्रचारित कुछ ढांचों के भीतर कंक्रीट है, जबकि बाहर बांस, लकड़ी और गोलपाटा ताड़ की सामग्री लगाई गई है। केवल इको नाम रख देने से पर्यावरणीय प्रदर्शन साबित नहीं होता।
सुंदरबन पश्चिम वन प्रभाग के संभागीय वन अधिकारी ए जे डी एम हसनुर रहमान ने कहा कि वन विभाग के लिए सीधे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करना मुश्किल था, क्योंकि रिसॉर्ट निजी संपत्ति पर और वन सीमा से ठीक बाहर थे। हालांकि, उन्होंने जंगल में अनियंत्रित प्रवेश, शोर, रात में रोशनी और प्लास्टिक कचरे को वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बताया।
मालिक इस विवरण के कुछ हिस्सों से असहमत हैं। बोनलोटा और निकुंज रिसॉर्ट के मालिक सुदीप्ता गेइन ने कहा कि उनके व्यवसाय न तो जंगल को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां करते हैं और न ही मेहमानों को उसमें ले जाते हैं। दूसरी रिपोर्टों में आरोप है कि जून से अगस्त तक प्रवेश पर लगी पाबंदी के दौरान भी कुछ संचालक जंगल की सैर कराते रहे। ये आरोप अपने-आप हर नामित रिसॉर्ट पर लागू नहीं किए जाने चाहिए, लेकिन इनसे नावों की आवाजाही और पर्यटकों का व्यवहार, निर्माण मंजूरी से अलग, निगरानी के मुद्दे बन जाते हैं।
मालिकों ने निवेश, कर और स्थानीय रोजगार का हवाला दिया
इरावती और बोनमाली के मालिक तथा रिसॉर्ट मालिक संघ के आयोजन सचिव जुबैर हीरा ने कहा कि उन्होंने हर संपत्ति पर 1.25 करोड़ टका खर्च किए। इरावती में निवेश चार साल के दौरान किया गया, जबकि बोनमाली एक साल से भी कम पुराना था। उन्होंने कहा कि कुछ अन्य मालिकों ने 2 करोड़ से 3 करोड़ टका तक निवेश किया है।
हीरा के मुताबिक, व्यापार लाइसेंस शुल्क 4,000 से 5,000 टका, जिला प्रशासन की अनुमति के आवेदन के समय 58,000 टका, औसतन 20,000 टका मासिक वैट और सालाना आयकर देना पड़ता है। ये उनके बताए आंकड़े हैं। कर और आवेदन शुल्क चुकाने से यह साबित नहीं होता कि पर्यावरण संबंधी अलग-अलग जरूरतें पूरी की गई थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि मंजूरी के लिए अग्निशमन और पर्यावरण लाइसेंस जरूरी थे। उनके मुताबिक, अग्निशमन सेवा ने मालिकों से कहा कि उन इलाकों में लाइसेंस जारी नहीं किए जा सकते, जिसके बाद उन्होंने रिसॉर्ट और कमरों में अग्निशमन उपकरण लगाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण अधिकारियों ने बताया कि ईसीए के भीतर मंजूरी नहीं दी जा सकती। इनमें से किसी भी मुद्दे का समाधान दस्तावेजों में दर्ज नहीं है।
हीरा ने सवाल उठाया कि रिसॉर्ट को मंजूरी क्यों नहीं मिल सकती, जबकि उनके दावे के मुताबिक मोंगला ईपीजेड और रामपाल ताप विद्युत संयंत्र जैसी सुविधाएं उसी 10 किलोमीटर के क्षेत्र में हैं। यहां उन सुविधाओं के स्थान और मंजूरी की शर्तों की पुष्टि नहीं है, इसलिए यह दावा समान कानूनी व्यवहार साबित नहीं कर सकता। उनका व्यापक आर्थिक तर्क है कि रिसॉर्ट रोजगार और स्थानीय दुकानों तथा किसानों से खरीद के जरिए जंगल पर निर्भर आजीविका के विकल्प देते हैं।
रोजगार के आंकड़े लाभ के साथ अनिश्चितता भी दिखाते हैं
सुंदरबन रिसॉर्ट मालिक संघ के सचिव और जंगलबाड़ी मैंग्रोव रिसॉर्ट के प्रबंध निदेशक जकारिया हुसैन शाओन ने प्रधानमंत्री को लिखे खुले पत्र में कहा कि वन क्षेत्र के किनारे लगभग 17 किलोमीटर के दायरे में रिसॉर्टों में 153 लोग काम करते हैं, जिनमें 135 स्थानीय निवासी हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक, कर्मचारियों में स्थानीय निवासियों की हिस्सेदारी करीब 88 प्रतिशत है।
पत्र में 58 संबंधित छोटे व्यवसायों का भी हिसाब दिया गया, जिनमें दुकानें, नाव सेवाएं, परिवहन, खाद्य सामग्री आपूर्तिकर्ता और पोल्ट्री कारोबार शामिल हैं। इसमें कहा गया कि बानिशांता और कैलाशगंज यूनियनों के तीन वार्डों के लगभग 7,300 निवासियों में से बड़ी संख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन से जुड़ी है। इसमें भाग लेने वाले निवासियों की सटीक संख्या या रोजगार का कोई स्वतंत्र आकलन नहीं दिया गया।
ये आंकड़े हीरा के इस दावे से अलग पैमाने के हैं कि हर रिसॉर्ट में 20 से 25 स्थानीय कर्मचारियों की जरूरत होती है। संभव है कि ये अलग समूहों या अवधियों के आंकड़े हों, लेकिन इस अंतर की व्याख्या नहीं की गई है। इसलिए उनके अनुमान को सभी 24 संपत्तियों पर लागू करके क्षेत्रीय रोजगार का भरोसेमंद कुल आंकड़ा नहीं निकाला जा सकता।
लाभ का आकलन करते समय स्वामित्व भी अहम है। पहले की रिपोर्टों में बताया गया था कि कई नए कॉटेज में बाहर की पर्यटन कंपनियों ने निवेश किया, कभी-कभी 15 से 20 साल की लीज पर ली गई जमीन पर। गोलकानन को एक अलग मॉडल बताया गया, जिसमें जंगल पर निर्भर आठ स्थानीय परिवारों को आय का लाभ मिलता है। स्थानीय रोजगार, स्थानीय स्वामित्व और साझा व्यावसायिक आय, समुदाय की भागीदारी के अलग-अलग पैमाने हैं।
कार्रवाई और नियमन का प्रस्तावित रास्ता
बंदी के नोटिसों के बाद भी सोशल मीडिया पर विज्ञापन और छूट के प्रचार जारी रहने की खबरें हैं। कुछ विज्ञापनों में कथित तौर पर जंगल में अनधिकृत प्रवेश को बढ़ावा दिया गया। विज्ञापनों से पता चलता है कि व्यवसाय ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सूची में शामिल हर रिसॉर्ट खुला रहा या उसके ढांचे नहीं हटाए गए।
सातखीरा पर्यावरण कार्यालय के सहायक निदेशक सोमेन मैत्रा ने कहा कि जिले के चार रिसॉर्ट पहले के नोटिसों के बावजूद वर्षों से वैध अनुमति या पर्यावरणीय मंजूरी के बिना चल रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेटों और मोबाइल अदालतों के जरिए कार्रवाई की जाएगी। खुलना में बताए गए नोटिसों में बिजली कनेक्शन काटने और अदालती मुकदमों की चेतावनी भी थी। क्षेत्रीय स्तर पर बंदी की कोई पूरी हो चुकी कार्रवाई या ध्वस्तीकरण का कुल आंकड़ा पुष्ट नहीं है।
उद्यमी टिकाऊ इकोटूरिज्म दिशा-निर्देश, मंजूरी के लिए एकल सेवा केंद्र, विभागों के बीच समन्वय और मौजूदा निवेश की कानूनी समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनकी अपील विनियमित संचालन का रास्ता मांगती है, यह पुष्टि नहीं करती कि बंदी के आदेश वापस ले लिए गए हैं।
खुलना विश्वविद्यालय के वानिकी एवं काष्ठ प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर और प्रकृति पर्यटन के शोधकर्ता डॉ. वासिउल इस्लाम ने सुझाव दिया कि रिसॉर्ट कहां चल सकते हैं, यह तय करने से पहले वन पर उनके प्रभाव का आकलन किया जाए। उन्होंने पर्यटकों की वहन क्षमता तय करने की भी मांग की। इसका अर्थ है यह निर्धारित करना कि किसी स्थान पर पर्यावरण को अस्वीकार्य नुकसान पहुंचाए बिना कितने पर्यटक आ सकते हैं, न कि उपलब्ध कमरों की संख्या को पर्यटन की सुरक्षित सीमा मान लेना।
उद्योग के अपने संघ ने भी कमियों को स्वीकार किया है। पहले की रिपोर्टों में इसके महासचिव बताए गए इमनुल इस्लाम ने माना कि सभी नियमों का ठीक से पालन नहीं हुआ और कचरा प्रबंधन को चुनौती बताया। कुल मिलाकर, प्रस्तावों में स्थान, गंदे पानी, नावों की आवाजाही और पर्यटकों की सीमा से जुड़े फैसलों की जरूरत सामने आती है। किसी स्वीकृत दिशा-निर्देश, मंजूरी की समयसीमा या तय सुनवाई की खबर नहीं है।
मुख्य बिंदु
- क्षेत्रीय बंदी आदेश में 24 रिसॉर्ट के नाम हैं: खुलना के 18, बागेरहाट के दो और सातखीरा के चार।
- खुलना की विस्तृत रिपोर्टों में 10 रिसॉर्ट को निर्माण हटाने के लिए 30 दिन और आठ को 15 दिन दिए गए हैं; सभी के लिए एक समान समयसीमा नहीं है।
- रिपोर्टों में कुल संख्या, कुछ संपत्तियों के नाम और नोटिसों के घटनाक्रम को लेकर अंतर है।
- विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में 2018 के तीन रिसॉर्ट के मुकाबले 2023 में 12 रिसॉर्ट गिने गए, जबकि अनुमानित यात्राएं 370 से बढ़कर 7,562 हो गईं।
- अधिकारी मंजूरी की कमी, प्रदूषण और जंगल में अनियंत्रित आवाजाही का हवाला देते हैं। मालिक नुकसानदेह गतिविधियों के आरोपों से असहमत हैं और नियमन के तहत मंजूरी प्रक्रिया चाहते हैं।
- उद्यमियों के एक पत्र में रिसॉर्टों में 153 नौकरियों का दावा किया गया है, जिनमें 135 स्थानीय निवासियों के पास हैं। पत्र में 58 संबंधित छोटे व्यवसायों का भी जिक्र है।
- क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई का कोई पुष्ट नतीजा, मिलाई गई अंतिम समयसीमा या रिसॉर्टों के संचालन जारी रखने के लिए मंजूरी का स्वीकृत रास्ता रिपोर्ट नहीं किया गया है।






