दक्षिण कोरिया में कक्षा अध्यापकों के बदलाव 38.6% बढ़े, अधिक शिक्षक पद छोड़ने का अनुरोध कर रहे हैं

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South Korean Homeroom Teacher Replacements Rise 38.6% as More Teachers Ask to Step Down

कक्षा में लगभग दो-तिहाई बदलाव शिक्षकों की पहल पर

दक्षिण कोरिया के सरकारी प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूलों में 2023 से 2025 के दौरान शैक्षणिक सत्र के बीच 575 कक्षा अध्यापक बदले गए। 2020 से 2022 के दौरान यह संख्या 415 थी। 38.6% की यह बढ़ोतरी बताती है कि पूरे शैक्षणिक वर्ष किसी एक शिक्षक को कक्षा की जिम्मेदारी सौंपे रखना लगातार मुश्किल हो रहा है।

विषय-सूची
  1. कक्षा में लगभग दो-तिहाई बदलाव शिक्षकों की पहल पर
  2. एक कक्षा में छह बार बदले अध्यापक
  3. पहले के आंकड़े बढ़ोतरी दिखाते हैं, पर कुछ विसंगतियां भी हैं
  4. बाधा का बड़ा हिस्सा प्राथमिक स्कूलों में
  5. शिक्षक बदलने पर छात्रों को क्या खोना पड़ता है
  6. सुप्रीम कोर्ट: पहले दूसरे उपाय आजमाए जाएं
  7. शिकायतों और स्कूल नेतृत्व, दोनों पर सवाल
  8. शिक्षक अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रदर्शन
  9. वार्षिक अनुबंध वाले शिक्षकों को कक्षा अध्यापक की ज्यादा जिम्मेदारियां
  10. मुख्य बातें

शिक्षा मंत्रालय के ये आंकड़े पीपल पावर पार्टी के सांसद जियोंग सॉन्ग-गुक को सौंपे गए थे। इनके मुताबिक, हालिया बदलावों में से 369, यानी 64.2%, शिक्षकों के अनुरोध पर हुए। पिछले तीन वर्षों की तुलना में इस श्रेणी में 42.5% की बढ़ोतरी हुई, जब ऐसे 259 मामले दर्ज हुए थे। अभिभावकों के अनुरोध पर हुए बदलाव 156 से बढ़कर 206 हो गए, यानी 32.1% की वृद्धि।

यह अंतर अहम है। अभिभावकों की मांगें बढ़ रही हैं, लेकिन दर्ज बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा उन शिक्षकों के कारण है जिन्होंने कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारी छोड़ने का अनुरोध किया। दोनों अवधियों के बीच 160 अतिरिक्त बदलावों में से 110 शिक्षकों और 50 अभिभावकों की पहल पर हुए। इस तरह बढ़ोतरी में शिक्षकों की हिस्सेदारी 68.8% रही।

इन आंकड़ों में कक्षा की जिम्मेदारी में बदलाव गिने गए हैं, जरूरी नहीं कि शिक्षक ने नौकरी छोड़ दी हो। कक्षा अध्यापक का काम छोड़ने के बाद भी कोई शिक्षक उसी स्कूल में काम जारी रख सकता है। आंकड़ों से यह भी साबित नहीं होता कि हर बदलाव किसी दुर्भावनापूर्ण शिकायत के कारण हुआ।

कक्षा से जुड़े दो वृत्तांत कुछ शिक्षकों के पद छोड़ने के पीछे के दबाव को दिखाते हैं। जोंजू में पांचवीं कक्षा के एक समूह में कथित तौर पर एक साल के भीतर छह कक्षा अध्यापक बदले गए। दक्षिणी ग्योंगगी प्रांत के एक प्राथमिक स्कूल में भेदभाव और पक्षपात के बार-बार लगे आरोपों के बाद एक शिक्षक ने पद छोड़ने का अनुरोध किया। दोनों मामले दिखाते हैं कि एक परिवार से जुड़ा विवाद पूरी कक्षा की शिक्षा में निरंतरता को प्रभावित कर सकता है।

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एक कक्षा में छह बार बदले अध्यापक

जोंजू के प्राथमिक स्कूल में अभिभावकों ने शिकायत की कि एक शिक्षक बच्चे को घूरता था या उसे बिना निगरानी के छोड़ देता था। नए शिक्षक आने के बाद भी शिकायतें जारी रहीं और कक्षा अध्यापक बार-बार बदलते रहे।

बताया गया कि दो अभिभावकों ने क्रमशः 113 और 61 बार शिकायत के लिए फोन किया, यानी कुल 174 कॉल। इस विवरण से यह साबित नहीं होता कि आरोप सही पाए गए थे। हालांकि, इससे पता चलता है कि छात्रों के बार-बार नए शिक्षकों के साथ तालमेल बिठाने के दौरान स्कूल को कितनी बार संपर्क का सामना करना पड़ा।

ग्योंगगी के शिक्षक को एक अभिभावक की लगातार शिकायतों का सामना करना पड़ा। अभिभावक का आरोप था कि उनके बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार हो रहा है, जबकि दूसरे बच्चों को तरजीह दी जा रही है। शिक्षक ने छात्रों के साथ भेदभाव करने से इनकार किया, लेकिन शिकायतें जारी रहीं। गंभीर तनाव झेलने के बाद शिक्षक ने पहले सेमेस्टर के अंत में कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारी छोड़ दी।

इन उदाहरणों में एक ही नतीजे तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते दिखते हैं। एक मामले में लगातार शिक्षक बदलने से शिकायतें बंद नहीं हुईं। दूसरे में शिक्षक ने राहत मांगी। इनमें से कोई भी विवरण इस बात का सबूत नहीं है कि शिक्षक बदलने का मतलब शिकायत जायज थी या मूल विवाद सुलझ गया था।

पहले के आंकड़े बढ़ोतरी दिखाते हैं, पर कुछ विसंगतियां भी हैं

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों की पहले जारी की गई एक रिपोर्ट में 2023 में कक्षा अध्यापकों के 203 बदलाव दर्ज हुए थे। इनमें 124 बदलाव शिक्षकों और 79 अभिभावकों के अनुरोध पर हुए थे। शिक्षकों के अनुरोध 2020 में दर्ज 54 मामलों से दोगुने से अधिक थे। पहले के आंकड़ों में जनवरी से जुलाई 2024 के बीच शिक्षकों के 55 और अभिभावकों के 33 अनुरोध भी दर्ज थे। यह अधूरा वर्ष है, इसलिए इसकी तुलना सीधे पूरे वर्ष से नहीं की जा सकती।

रिपोर्ट में दी गई संख्या इस प्रकार थी:

  • 2020: कुल 71 बदलाव, जिनमें शिक्षकों के 54 और अभिभावकों के 17 अनुरोध शामिल थे।
  • 2021: कुल 142 बदलाव, जिनमें शिक्षकों के 90 और अभिभावकों के 52 अनुरोध शामिल थे।
  • 2022: कुल 206 बदलाव, जिनमें शिक्षकों के 118 और अभिभावकों के 88 अनुरोध शामिल थे।
  • 2023: कुल 203 बदलाव, जिनमें शिक्षकों के 124 और अभिभावकों के 79 अनुरोध शामिल थे।
  • जनवरी से जुलाई 2024: कुल 88 बदलाव, जिनमें शिक्षकों के 55 और अभिभावकों के 33 अनुरोध शामिल थे।
  • 2023 से 2025: नए समेकित आंकड़ों में कुल 575 बदलाव दर्ज हैं, जिनमें शिक्षकों के 369 और अभिभावकों के 206 अनुरोध शामिल हैं।

दोनों रिपोर्टों के आंकड़ों में अंतर है। 2020 से 2022 के वार्षिक आंकड़ों का योग 419 है, जबकि नई तुलना में यह 415 दिया गया है। पहले की रिपोर्ट में शिक्षकों के अनुरोधों का योग 262 है, 259 नहीं; अभिभावकों के अनुरोधों का योग 157 है, 156 नहीं। इन अंतरों की कोई वजह नहीं बताई गई है। नया समेकित आंकड़ा 38.6% की बताई गई बढ़ोतरी का समर्थन करता है, लेकिन दोनों रिपोर्टों को पूरी तरह एक-समान आंकड़ा समूह नहीं मानना चाहिए।

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बाधा का बड़ा हिस्सा प्राथमिक स्कूलों में

2023 में दर्ज 203 बदलावों में से 125 प्राथमिक स्कूलों में हुए, जो कुल का 61.6% है। मिडिल स्कूलों में 36 और हाई स्कूलों में 42 बदलाव दर्ज हुए।

अभिभावकों के अनुरोधों में यह अंतर और भी स्पष्ट है। 2023 में ऐसे अनुरोधों के चलते प्राथमिक स्कूलों में 65, मिडिल स्कूलों में पांच और हाई स्कूलों में नौ बदलाव हुए। यानी अभिभावकों के अनुरोध पर हुए 79 बदलावों में से 65, लगभग 82.3%, प्राथमिक स्कूलों में हुए।

एक अलग विवरण में प्राथमिक स्कूलों के 125 बदलावों में से 65 को अभिभावकों के अनुरोध और 60 को शिक्षकों के पद छोड़ने से जुड़ा बताया गया है। उसी विवरण में 2023 के 124 स्वैच्छिक पद-त्याग को प्राथमिक स्कूलों का आंकड़ा कहा गया है, जबकि पहले की रिपोर्ट में 124 को प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूलों का कुल आंकड़ा बताया गया था। ये विवरण आपस में मेल नहीं खाते। 60 का आंकड़ा बताए गए प्राथमिक स्कूलों के कुल मामलों के अनुरूप है; 124 का आंकड़ा एक ही समय में उसी प्राथमिक स्कूल उपसमूह का आंकड़ा नहीं हो सकता।

प्राथमिक स्तर पर बदलाव अधिक होने की बात इसलिए अहम है क्योंकि वहां कक्षा अध्यापक की भूमिका ज्यादा व्यापक होती है। आम तौर पर एक शिक्षक कई विषय पढ़ाने के साथ कक्षा की दिनचर्या और छात्रों के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी भी संभालता है। मिडिल और हाई स्कूलों में विषय शिक्षक कक्षाएं लेते हैं, जबकि नियुक्त कक्षा अध्यापक समूह का प्रबंधन और छात्र-कल्याण से जुड़ा सहयोग देते हैं। इसलिए प्राथमिक स्तर पर कक्षा अध्यापक का जाना रोजमर्रा की पढ़ाई और उस रिश्ते, दोनों को बाधित कर सकता है जिसके जरिए छात्रों की जरूरतों को समझा जाता है।

शिक्षक बदलने पर छात्रों को क्या खोना पड़ता है

दक्षिण कोरिया की कक्षा अध्यापक प्रणाली 1950 के दशक में आधुनिक स्कूल व्यवस्था के विकास के साथ स्थापित हुई। इस भूमिका में हाजिरी और कक्षा प्रशासन से आगे की जिम्मेदारियां शामिल हैं। शिक्षक पढ़ाई में प्रगति, दोस्ती, व्यवहार और भावनात्मक बदलावों पर नजर रखते हैं और परिवारों के संपर्क में रहते हैं। माध्यमिक स्कूलों में वे करियर और आगे की पढ़ाई को लेकर मार्गदर्शन भी देते हैं।

इस काम के लिए समय के साथ जुटी जानकारी जरूरी होती है। नए शिक्षक को सीखना पड़ता है कि किन छात्रों को अतिरिक्त सहयोग चाहिए, कक्षा के भीतर रिश्ते कैसे हैं और अभिभावकों के साथ किन चिंताओं पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। छात्रों को फिर से भरोसा बनाना पड़ता है, कभी-कभी एक ही साल में बार-बार।

सुंगक्युंक्वान विश्वविद्यालय के शिक्षा विशेषज्ञ यांग जियोंग-हो ने कहा कि इन बदलावों का सबसे बड़ा खामियाजा अंततः छात्रों को भुगतना पड़ता है। उनके मुताबिक, अभिभावकों को शिकायत सुलझाने के सामान्य तरीके के रूप में कक्षा अध्यापक को बदलने की मांग नहीं करनी चाहिए। वहीं, यह भूमिका स्वीकार करने वाले शिक्षकों को अपने छात्रों की जिम्मेदारी निभाते रहने की कोशिश करनी चाहिए।

हालांकि, निरंतरता का मतलब यह नहीं कि हर परिस्थिति में शिक्षक को बनाए रखा जाए। सवाल यह है कि क्या शिक्षक को बदलना जरूरी है, या स्कूल कक्षा के जिम्मेदार व्यक्ति को हटाए बिना विवाद सुलझा सकता है। कक्षा अध्यापक बदलने की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट के रुख में भी यही अंतर दिखाई देता है।

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सुप्रीम कोर्ट: पहले दूसरे उपाय आजमाए जाएं

2023 में कक्षा अध्यापक को बदलने की मांग से जुड़े एक फैसले में दक्षिण कोरिया के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैध कारण के बिना बार-बार ऐसी मांग करना शैक्षणिक गतिविधियों में अनुचित दखल हो सकता है।

अदालत का तर्क था कि अगर शिक्षक के पढ़ाने के तरीके में समस्या हो, तब भी स्कूल को पहले यह देखना चाहिए कि क्या उन तरीकों में बदलाव से समस्या सुलझ सकती है। शिक्षक को बदलना असाधारण परिस्थितियों में पूरक उपाय होना चाहिए, जब वह अपना काम ठीक से नहीं कर सकता।

इस रुख का मतलब कक्षा में पढ़ाने के तरीके से जुड़ी शिकायतों को खारिज करना नहीं है। यह समस्या पर ध्यान देने की जरूरत और शिक्षक बदलने को तुरंत समाधान मान लेने के बीच अंतर करता है। किसी चिंता की जांच या शिक्षण के तरीकों में बदलाव जरूरी हो सकता है, लेकिन कक्षा अध्यापक को हटाना जरूरी नहीं।

क्षेत्रीय शिक्षा कार्यालयों के नियम भी शिक्षा से जुड़ी अपरिहार्य परिस्थिति आने पर शिक्षक बदलने की अनुमति देते हैं। शिक्षकों के अनुरोधों की बढ़ती संख्या स्कूल नेतृत्व के सामने एक और सवाल रखती है: जब शिक्षक कहे कि मौजूदा स्थिति असहनीय हो गई है, तो कक्षा में स्थिरता कैसे बनाए रखी जाए।

शिकायतों और स्कूल नेतृत्व, दोनों पर सवाल

कोरिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स एसोसिएशंस के शिक्षक अधिकार प्रभाग के प्रमुख किम डोंग-सोक ने स्वैच्छिक रूप से पद छोड़ने के कई मामलों के लिए छात्र मार्गदर्शन या स्कूल में हिंसा की जांच के दौरान बने दबाव को जिम्मेदार बताया। उन्होंने शिक्षकों के पद छोड़ने की वजह के बारे में संघ का नजरिया इस तरह रखा:

अधिकांश मामलों में निजी परिस्थितियों के बजाय बाहरी कारक जिम्मेदार होते हैं।

किम ने यह भी कहा कि इन जिम्मेदारियों को निभाते समय शिक्षकों पर बाल दुर्व्यवहार के झूठे आरोप लग सकते हैं। यह शिक्षकों पर पड़ने वाले दबावों के बारे में उनका आकलन है, न कि इस बात का निष्कर्ष कि सभी शिकायतें या दुर्व्यवहार की रिपोर्टें बेबुनियाद होती हैं।

कोरियन टीचर्स एंड एजुकेशनल वर्कर्स यूनियन की दक्षिण ग्योंगसांग शाखा के एक सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि कार्यस्थल का दबाव सिर्फ अभिभावकों से नहीं आता। सर्वेक्षण में 74.1% शिक्षकों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्हें कार्यस्थल पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इन जवाब देने वालों में 87.3% ने प्रिंसिपल या वाइस प्रिंसिपल और 19.8% ने अभिभावकों का उल्लेख किया। इन प्रतिशतों को एक-दूसरे से अलग, जोड़कर कुल नहीं मानना चाहिए। साथ ही, किसी एक प्रांत का सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी घटनाओं की व्यापकता साबित नहीं करता।

मंत्रालय के अलग आंकड़ों में जनवरी 2020 से सितंबर 2023 तक शिक्षकों के खिलाफ उत्पीड़न की 748 रिपोर्टें दर्ज हुईं। इनमें से 523, यानी लगभग 69.9%, मामलों में कथित आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। आंकड़ों में हर मामले का नतीजा नहीं बताया गया है, लेकिन उनसे पता चलता है कि रिपोर्ट दर्ज होने पर आम तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई।

ग्योंगगी और दक्षिण ग्योंगसांग के शिक्षकों ने शिकायतों के डर से अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने और प्रशासकों से अपर्याप्त मदद मिलने की बात भी कही। इन विवरणों के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में स्कूल नेतृत्व की भूमिका अहम है: शिकायत सीधे शिक्षक को सौंप देने और उसका समाधान न करने से विवाद और कक्षा में बाधा, दोनों बने रह सकते हैं।

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शिक्षक अधिकारों और सुरक्षा के लिए प्रदर्शन

सियोल के सेओई प्राथमिक स्कूल में 2023 में 24 वर्षीय शिक्षक की आत्महत्या शिक्षकों के अधिकारों को लेकर देशव्यापी प्रदर्शनों का केंद्र बनी। इस मौत पर सार्वजनिक बहस में अभिभावकों के अत्यधिक हस्तक्षेप के आरोप भी शामिल थे।

पुलिस के निष्कर्षों और इन आरोपों के बीच फर्क करना जरूरी है। जांचकर्ताओं ने पाया कि कई अभिभावकों ने एक छात्र द्वारा दूसरे पर पेंसिल से हमला करने की घटना को लेकर शिक्षक से संपर्क किया था। पुलिस को मौखिक दुर्व्यवहार या जांच पर अभिभावकों के अवैध प्रभाव का सबूत नहीं मिला और मामला बिना आरोप तय किए बंद कर दिया गया। इस नतीजे से कामकाजी परिस्थितियों को लेकर व्यापक प्रदर्शन खत्म नहीं हुए।

बाद में नेशनल असेंबली के बाहर हुए एक प्रदर्शन में हजारों शिक्षकों ने बाल कल्याण अधिनियम और बाल दुर्व्यवहार अपराधों की सजा से जुड़े विशेष मामलों के अधिनियम में बदलाव की मांग की। आयोजकों का तर्क था कि भावनात्मक दुर्व्यवहार की कानूनी परिभाषा बहुत अस्पष्ट है और इससे छात्रों का मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों पर जवाबी शिकायतों का खतरा बनता है। उन्होंने कहा कि सेओई मामले के बाद शिक्षकों की सुरक्षा के लिए पांच कानून लागू किए जाने के बावजूद शिकायतें जारी रहीं।

कोरियन टीचर्स एंड एजुकेशन वर्कर्स यूनियन फेडरेशन की अध्यक्ष सॉन्ग सु-यॉन ने कहा कि छात्रों को अनुशासित करने पर शिक्षकों के खिलाफ भावनात्मक दुर्व्यवहार की रिपोर्ट दर्ज हो सकती है, जबकि ऐसा न करने पर लापरवाही के आरोप लग सकते हैं। प्रदर्शन में शिक्षकों के राजनीतिक अधिकारों की मांग भी की गई और स्थानीय शिक्षा अनुदान को घरेलू कर राजस्व से जोड़ने की व्यवस्था खत्म करने का विरोध किया गया।

इन विवरणों में प्रस्तावित कानूनी संशोधनों पर मतदान की तारीख नहीं दी गई है और यह भी स्थापित नहीं होता कि प्रस्ताव अपनाए जाएंगे या नहीं। तत्काल मांग वैध शैक्षणिक गतिविधियों, बाल संरक्षण से जुड़ी वास्तविक चिंताओं और शिक्षकों पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शिकायतों के बीच स्पष्ट सीमा तय करने की है।

वार्षिक अनुबंध वाले शिक्षकों को कक्षा अध्यापक की ज्यादा जिम्मेदारियां

स्टाफिंग का एक अलग रुझान दिखाता है कि मंत्रालय के आंकड़ों में अंशकालिक बताए गए शिक्षक बढ़ती संख्या में कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद जिन सॉन-मि द्वारा सार्वजनिक किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में उनकी हिस्सेदारी 15.6% थी, जबकि 2022 में 14.8% और 2021 में 11.1% थी।

दो वर्षों में यह 4.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी है। क्षेत्रीय स्तर पर बुसान में यह हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 21.3% रही, जबकि उत्तर और दक्षिण ग्योंगसांग प्रांतों में 18.5% थी।

ये शिक्षक आम तौर पर सालाना अनुबंध पर काम करते हैं और उन्हें स्थायी शिक्षकों को मिलने वाले प्रोत्साहन या वेतन वृद्धि नहीं मिल सकती। रिपोर्ट में दी गई श्रेणी रोजगार व्यवस्था से जुड़ी है, इसलिए इसका यह अर्थ नहीं कि इसमें शामिल हर शिक्षक कक्षा में कम घंटे काम करता है। बताया गया है कि शिक्षा अधिकारियों से जुड़े कानून के तहत उन्हें बड़ी जिम्मेदारी वाले पर्यवेक्षकीय पदों पर नियुक्त करने पर रोक है। हालांकि, केवल स्टाफिंग के आंकड़े यह साबित नहीं करते कि किसी खास कक्षा अध्यापक की नियुक्ति उस प्रावधान का उल्लंघन करती है।

स्टाफिंग के आंकड़े यह नहीं दिखाते कि अनुबंध पर होने के कारण बदलावों में बढ़ोतरी हुई। वे यह जरूर संकेत देते हैं कि कक्षा में निरंतरता बनाए रखने की जिम्मेदारी का बढ़ता हिस्सा कम सुरक्षित रोजगार व्यवस्था वाले शिक्षकों पर है।

दूसरी व्यवस्थाएं निरंतरता के लिए अलग तरीके अपनाती हैं। बताया जाता है कि जापान में एक ही कक्षा के छात्रों की जिम्मेदारी कई शिक्षकों के बीच बांटने का चलन बढ़ रहा है, जबकि ब्रिटेन के कुछ माध्यमिक स्कूलों में एक ही ट्यूटर कई वर्षों तक छात्रों के समूह के साथ रहता है। कोई आंकड़ा यह नहीं बताता कि इनमें से किसी तरीके से दक्षिण कोरिया में बदलाव कम होंगे या नहीं। जियोंग सॉन्ग-गुक ने शिक्षकों को दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के कारण कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारी छोड़ने से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की है, लेकिन इन्हें लागू करने की कोई खास समय-सीमा नहीं बताई गई है।

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मुख्य बातें

  • सरकारी स्कूलों में 2023 से 2025 के बीच कक्षा अध्यापकों के 575 बदलाव दर्ज हुए, जबकि उससे पहले के तीन वर्षों में यह संख्या 415 थी।
  • हालिया बदलावों में से 369 शिक्षकों के अनुरोध पर हुए। यह कुल बदलावों का 64.2% और दोनों अवधियों के बीच हुई बढ़ोतरी का 68.8% है।
  • 2023 में दर्ज 203 बदलावों में से 125 प्राथमिक स्कूलों में हुए। अभिभावकों के अनुरोध पर हुए 79 बदलावों में से 65 प्राथमिक स्कूलों में थे।
  • पहले के वार्षिक आंकड़ों और नए समेकित आंकड़ों में मामूली अंतर है; इसकी कोई वजह नहीं दी गई है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां दूसरे उपाय समस्या सुलझा सकते हों, वहां कक्षा अध्यापक को बदलने से पहले स्कूलों को वे उपाय आजमाने चाहिए।
  • शिक्षक दुर्व्यवहार से जुड़े कानूनों को स्पष्ट करने और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से बेहतर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। विधायी मतदान की तारीख तय नहीं है।
  • अंशकालिक बताए गए शिक्षकों को सौंपी गई कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारियों की हिस्सेदारी 2021 के 11.1% से बढ़कर 2023 में 15.6% हो गई।
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