नई सीमाएं लागू होंगी, लेकिन बड़े विवाद अब भी अनसुलझे
ऑस्ट्रेलिया 1 जनवरी 2027 से संघीय राजनीतिक चंदे और चुनावी खर्च पर सीमा लागू करेगा। इसके तहत सालाना चंदे की सीमा 50,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और किसी राष्ट्रीय पार्टी के चुनावी खर्च की सीमा 90 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर होगी। हालांकि, कोई दानदाता पार्टी की अलग-अलग शाखाओं और अन्य राजनीतिक प्राप्तकर्ताओं में रकम बांटकर साल में 1.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक दे सकता है। इससे सीमा तय करने का ढांचा भी उतना ही अहम हो जाता है जितनी घोषित रकम।
विषय-सूची
- नई सीमाएं लागू होंगी, लेकिन बड़े विवाद अब भी अनसुलझे
- राइनहार्ट के समर्थन से चंदे और पहुंच पर उठे सवाल
- खुलासे की सीमा घटकर 5,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, रिपोर्टिंग भी तेज
- 50,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दानदाता की कुल सीमा क्यों नहीं
- सीट-आधारित सीमा से राष्ट्रीय पार्टी विज्ञापन की गुंजाइश
- सार्वजनिक वित्तपोषण से मौजूदा सांसदों की स्थिति बदलेगी
- कंपनी मंचों के भुगतान से चंदे की परिभाषा पर सवाल
- बाहरी प्रचारकों के मामले में प्रवर्तन की पुरानी चुनौती
- संवैधानिक चुनौती दोनों तरह की सीमाओं तक पहुंच सकती है
- जनवरी 2027 से पहले क्या होगा
- मुख्य बिंदु
ऑस्ट्रेलियाई निर्वाचन आयोग (AEC) ने अपनी वित्तपोषण सुधार संबंधी मार्गदर्शिका में लागू होने की तारीख की पुष्टि की है। संघीय वित्तपोषण और खुलासे के मौजूदा नियमों के दायरे में आने वाले लोगों और संगठनों के लिए संक्रमणकालीन नियम 1 जुलाई 2026 से शुरू होंगे। आयोग बदलाव के लिए नई रिपोर्टिंग प्रणाली, शैक्षणिक सामग्री और मार्गदर्शन तैयार कर रहा है।
निर्वाचन कानून संशोधन (निर्वाचन सुधार) अधिनियम 2025 फरवरी 2025 में लेबर और कोएलिशन के समर्थन से पारित हुआ। यह ऐसे संघीय तंत्र में चंदे की सीमा, खर्च पर रोक, तेज रिपोर्टिंग और अधिक सार्वजनिक वित्तपोषण लाता है, जहां पहले चंदे या चुनावी खर्च पर कोई सामान्य सीमा नहीं थी।
ये बदलाव खनन क्षेत्र की अरबपति जीना राइनहार्ट के वन नेशन को समर्थन, लगातार चुनावों में क्लाइव पामर के खर्च और प्रमुख पार्टियों के धन जुटाने वाले मंचों को कंपनियों से मिले भुगतान की जांच के बीच आए हैं। इन व्यवस्थाओं से अलग-अलग सवाल उठते हैं: राजनीति में कितना पैसा आ सकता है, मतदाता उसे कब देख सकते हैं और क्या पहुंच पाने के लिए किए गए भुगतान को चंदा माना जाना चाहिए।
सुधार के समर्थकों का तर्क है कि सीमा से धनी मददगारों पर निर्भरता घट सकती है। आलोचकों का कहना है कि कानून स्थापित पार्टियों को ऐसे वित्तीय विकल्प देता है जो निर्दलीय उम्मीदवारों और नए दलों को उपलब्ध नहीं हैं। AEC के मौजूदा मार्गदर्शन में लागू करने की समय-सारणी तय है, लेकिन निष्पक्षता, प्रवर्तन और संवैधानिक वैधता को लेकर विवाद जारी हैं।
राइनहार्ट के समर्थन से चंदे और पहुंच पर उठे सवाल
हालिया खातों के मुताबिक, राइनहार्ट और उनके करीबी सहयोगियों ने बताए गए वित्त वर्ष के दौरान वन नेशन को नकद और अन्य मदद के रूप में 3 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक दिए। उन खातों के अनुसार, संबंधित सालाना खुलासे फरवरी 2027 से पहले आने की उम्मीद नहीं है। इसलिए इस कुल रकम को प्रकाशित चुनावी रिटर्न से स्थापित पूर्ण आंकड़ा नहीं, बल्कि बताई गई राशि माना जाना चाहिए।
समर्थन केवल नकद तक सीमित नहीं है। खबरों के मुताबिक, राइनहार्ट ने अप्रैल में पॉलीन हैनसन को 1.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक मूल्य का निजी विमान दिया। हैनसन और वन नेशन सांसद बार्नबी जॉयस भी उसी महीने पार्टी के धन जुटाने वाले कार्यक्रमों के बाद ब्रिस्बेन स्थित राइनहार्ट की हवेली में ठहरे।
वन नेशन अपना राष्ट्रीय मुख्यालय ब्रिस्बेन हवाई अड्डे के पास से स्प्रिंग हिल की उस कार्यालय इमारत में ले जाने की तैयारी कर रहा है, जिसे राइनहार्ट की संपत्ति निवेश कंपनी हैनराइन ने खरीदा है। इमारत का अनुमानित मूल्य करीब 8 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है, हालांकि यह खरीद की पुष्टि की गई कीमत नहीं है। इसकी पिछली दर्ज बिक्री 2003 में 2.4 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में हुई थी।
जॉयस का कहना है कि पार्टी बाजार दर पर किराया देगी। हैनकॉक प्रॉस्पेक्टिंग के प्रवक्ता ने इस बात से इनकार किया कि संपत्ति की व्यवस्था में रियायती आवास शामिल है:
हैनकॉक प्रॉस्पेक्टिंग के पास कई व्यावसायिक संपत्तियां हैं और यह इमारत उनमें से एक है। हैनकॉक किसी भी बाहरी किरायेदार को, चाहे वह राजनीतिक हो या नहीं, मुफ्त या रियायती जगह नहीं दे रही है।
व्यावसायिक किरायेदारी अपने आप में गलत काम का प्रमाण नहीं है। मकान मालिक के स्वामित्व वाली 8 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की इमारत उसके किरायेदार को दिए गए 8 मिलियन डॉलर के चंदे के बराबर भी नहीं है। समर्थन के पैमाने का आकलन करते समय यह अंतर अहम है।
हैनसन ने राइनहार्ट को अनौपचारिक नीति सलाहकार बताया है और वन नेशन की उस योजना का श्रेय उन्हें दिया है, जिसके तहत पेंशनभोगी अपनी पेंशन या स्वास्थ्य कार्ड गंवाए बिना काम कर सकेंगे। जलवायु कार्रवाई का विरोध और जीवाश्म ईंधन उद्योगों का समर्थन भी इस रिश्ते पर ध्यान खींचता है, हालांकि साझा नीतिगत रुख वित्तीय लेन-देन साबित नहीं करते।
अलग से, खबरों के मुताबिक हैनसन सीनेट के नियमों के तहत हैनकॉक प्रॉस्पेक्टिंग से मिले कई उड़ान उपहार घोषित करने में विफल रहीं। संसद में हितों की घोषणा और AEC के वित्तीय खुलासे अलग-अलग दायित्व हैं। चुनावी रिटर्न सार्वजनिक होने में देरी से संसद में अलग से घोषणा करने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
खुलासे की सीमा घटकर 5,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, रिपोर्टिंग भी तेज
AEC का खुलासे का अवलोकन, जिसे 1 अप्रैल 2026 को अपडेट किया गया, कहता है कि 1 जनवरी 2027 से सीमा 17,300 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से घटकर 5,000 डॉलर से अधिक हो जाएगी। यह 12,300 डॉलर की कमी, यानी करीब 71 प्रतिशत गिरावट है।
मौजूदा सीमा के बारे में रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े हैं। एक में 16,900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बताया गया है, जबकि AEC के तारीख वाले मार्गदर्शन में 17,300 डॉलर है। आधिकारिक तुलना के लिए यहां बाद वाले आंकड़े का इस्तेमाल किया गया है। इन रकमों को एक ही सीमा के परस्पर बदल सकने वाले विवरण की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए।
जब कोई चंदा 5,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक होगा या एक कैलेंडर वर्ष में एक ही दानदाता से एक ही प्राप्तकर्ता को मिले चंदों का कुल योग इस रकम से अधिक होगा, तब खुलासा करना जरूरी होगा। इसलिए एक ही प्राप्तकर्ता को बार-बार छोटे भुगतान करके, हर भुगतान को सीमा से नीचे रखकर, रिपोर्टिंग से बचा नहीं जा सकेगा।
ये दायित्व पंजीकृत पार्टियों और उनकी राज्य शाखाओं, सांसदों, सीनेटरों, उम्मीदवारों, दानदाताओं तथा संबंधित संगठनों और बाहरी चुनाव प्रचारकों की कई श्रेणियों पर लागू होंगे। वित्तीय जानकारी चंदा-खुलासा नोटिस और सालाना रिटर्न के जरिए दी जाएगी।
सालाना रिपोर्टिंग कैलेंडर वर्ष के अनुसार होगी और वर्ष खत्म होने के आठ सप्ताह के भीतर रिटर्न देना होगा। किसी व्यक्ति के चंदे का नोटिस देने की समय-सीमा इस बात पर निर्भर करेगी कि प्राप्तकर्ता किस श्रेणी में आता है और भुगतान चुनाव अवधि में हुआ है या नहीं। तेज खुलासे का मतलब यह नहीं है कि हर भुगतान तुरंत सार्वजनिक हो जाएगा।
सिडनी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एमेरिटा ऐन टोमी का तर्क है कि प्रस्तावित 1,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से बढ़ाकर अंतिम सीमा 5,000 डॉलर करने के बाद भी, अलग-अलग प्राप्तकर्ताओं में 4,999 डॉलर के भुगतान बांटकर बड़ा, अघोषित वित्तपोषण संभव है। उनकी चिंता रकम को पूरे राजनीतिक नेटवर्क में बांटने की है, न कि एक ही प्राप्तकर्ता को बार-बार भुगतान करने की, जिसे जोड़कर गिना जाएगा।
50,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दानदाता की कुल सीमा क्यों नहीं
अंतिम राजनीतिक समझौते में चंदे की सीमा प्रस्तावित 20,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से बढ़ाकर 50,000 कर दी गई। इसमें जोड़कर गिनने के नियम हैं, जो किसी दानदाता की पार्टी की शाखा और उसके समर्थन वाले सांसदों, सीनेटरों या उम्मीदवारों को कुल मिलाकर दी जा सकने वाली रकम सीमित करते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि कोई दानदाता पूरे राष्ट्रीय दल को अधिकतम 50,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही दे सकता है। टोमी का आकलन है कि छह राज्यों, दो क्षेत्रों और संघीय स्तर पर अलग-अलग पंजीकृत शाखाओं वाली पार्टी एक दानदाता से सालाना 450,000 डॉलर प्राप्त कर सकती है: नौ शाखाएं गुणा 50,000 डॉलर।
अन्य पात्र प्राप्तकर्ताओं, जैसे संबंधित धन जुटाने वाले संगठनों और पार्टी के समर्थक बाहरी प्रचारकों को चंदे से और विकल्प बनते हैं। व्यापक सालाना दानदाता सीमाएं किसी खास राज्य या क्षेत्र से संबद्ध चंदों के लिए 250,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और राष्ट्रीय स्तर पर 1.6 मिलियन डॉलर हैं।
ये आंकड़े अलग-अलग पाबंदियां बताते हैं, किसी एक सीमा के प्रतिस्पर्धी अनुमान नहीं। 450,000 डॉलर राष्ट्रीय स्तर पर संगठित पार्टी की शाखाओं के आधार पर की गई गणना है। 1.6 मिलियन डॉलर अन्य सीमाओं के अधीन, सभी प्राप्तकर्ताओं पर लागू व्यापक सालाना अधिकतम सीमा है।
कोई निर्दलीय उम्मीदवार ऐसा शाखा नेटवर्क नहीं बना सकता और किसी खास दानदाता से सालाना 50,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक नहीं पा सकता। सामुदायिक निर्दलीय उम्मीदवारों की शिकायत का यह अहम आधार है: चंदे का एक ही घोषित नियम, उम्मीदवार के राष्ट्रीय पार्टी से जुड़े होने या न होने के आधार पर, धन जुटाने की क्षमता में बहुत बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।
सीट-आधारित सीमा से राष्ट्रीय पार्टी विज्ञापन की गुंजाइश
खर्च की व्यवस्था में प्रतिनिधि सभा के एक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव अभियान के लिए 800,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सीमा और राष्ट्रीय पार्टी के लिए 90 मिलियन डॉलर की अधिकतम सीमा है। सीनेट की अलग सीमाएं राज्य या क्षेत्र के अनुसार तय होती हैं। टोमी के विश्लेषण में न्यू साउथ वेल्स के लिए 9.2 मिलियन और तस्मानिया के लिए 1 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के उदाहरण दिए गए हैं।
मुख्य अंतर यह है कि विज्ञापन किसी खास निर्वाचन क्षेत्र को लक्ष्य करता है या सामान्य पार्टी विज्ञापन है। उनके विश्लेषण में बताए गए नियमों के तहत, उम्मीदवार या निर्वाचन क्षेत्र की पहचान करने वाला विज्ञापन स्थानीय सीमा में गिना जाएगा। पार्टी का प्रचार करने वाला, लेकिन किसी उम्मीदवार या निर्वाचन क्षेत्र की पहचान न करने वाला विज्ञापन उस निर्वाचन क्षेत्र की सीमा से बाहर रह सकता है, हालांकि उस पर पार्टी की व्यापक सीमा लागू होगी।
इसलिए पार्टी का उम्मीदवार स्थानीय अभियान के साथ नेतृत्व, नीतियों और पार्टी की छवि वाले राष्ट्रीय विज्ञापन से भी लाभ उठा सकता है। निर्दलीय का संदेश अपने उम्मीदवार होने से अधिक सीधे जुड़ा होता है, जिससे निर्वाचन क्षेत्र की सीमा के बाहर वैसा ही लाभ हासिल करना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले तीन राष्ट्रीय चुनावों में पामर का खर्च 260 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक रहा है। अन्य आंकड़े सीमित गतिविधियों या अवधियों के हैं: पिछले संघीय चुनाव में यूनाइटेड ऑस्ट्रेलिया पार्टी को दिए गए 117 मिलियन डॉलर और 2019 के चुनाव के बाद चर्चा में आया 60 मिलियन डॉलर का विज्ञापन अभियान। चंदा, विज्ञापन पर खर्च और कई चुनावों में कुल खर्च एक जैसे माप नहीं हैं।
90 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सीमा उस क्षेत्र में पाबंदी लगाएगी जहां पहले संघीय स्तर पर कोई सीमा नहीं थी। हालांकि, इसका व्यावहारिक असर इस पर निर्भर करेगा कि कौन-सा खर्च गिना जाएगा, चुनाव अभियान की अवधि क्या होगी और पार्टियों व अन्य संगठनों के खर्च को किस तरह माना जाएगा।
सार्वजनिक वित्तपोषण से मौजूदा सांसदों की स्थिति बदलेगी
सुधारों के तहत प्रति पात्र वोट सार्वजनिक चुनावी वित्तपोषण बढ़ाकर 5 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर किया गया है। मतदाता प्रतिनिधि सभा और सीनेट के लिए अलग-अलग वोट डालते हैं, इसलिए दोनों वोटों पर यह दर कुल 10 डॉलर हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर मतदाता की ओर से किसी एक पार्टी को अपने आप 10 डॉलर दिए जाएंगे।
प्रशासनिक वित्तपोषण की एक अलग व्यवस्था भी पार्टियों और निर्दलीय सांसदों को राष्ट्रमंडल संसद में उनके प्रतिनिधित्व के आधार पर सहायता देगी। इससे पहले से सीट रखने वालों और चुनाव जीतकर संसद में आने की कोशिश करने वालों के बीच एक और फर्क पैदा होता है।
टोमी पिछले चुनाव में मिले वित्तपोषण के आधार पर मिलने वाली अग्रिम चुनावी राशि को भी मौजूदा सांसदों के लिए लाभ बताती हैं। नए उम्मीदवारों और पार्टियों के पास पिछली पात्रता से मिलने वाली ऐसी रकम नहीं होती।
पार्टी के चुनावी खातों में नामित इकाई, यानी पार्टी के तय धन जुटाने वाले निकाय, से रकम स्थानांतरित की जा सकती है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, ऐसे हस्तांतरण पर बाहरी दानदाता के चंदे जैसी सीमा लागू नहीं होती, हालांकि चुनावी खर्च पर सीमा बनी रहती है। इससे पार्टियों को वित्त जुटाने का एक और रास्ता मिलता है, जो सीमित चंदे या कर्ज पर निर्भर निर्दलीय को उपलब्ध नहीं है।
यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर एमेरिटस ग्रेम ऑर ने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के उस कानूनी मॉडल की ओर ध्यान दिलाया है, जिसमें संसदीय पार्टियों और सांसदों को चंदा देने पर रोक है और प्रति वोट 14 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का सार्वजनिक वित्तपोषण बताया गया है। यह दर संघीय सुधार की 5 डॉलर की दर से 2.8 गुना है, लेकिन दोनों प्रणालियों की पात्रता और वित्तपोषण व्यवस्थाएं अलग हैं। यह घोषित दरों की तुलना है, इस बात का प्रमाण नहीं कि कुल सहायता सीधे बराबर है।
कंपनी मंचों के भुगतान से चंदे की परिभाषा पर सवाल
उपहारों पर लगी सीमा से पहुंच या सदस्यता दिलाने वाले भुगतानों को लेकर चिंता अपने आप दूर नहीं होती। प्रमुख पार्टियों के कारोबारी मंच कंपनियों से कार्यक्रमों में भाग लेने और राजनीतिक नेताओं से संपर्क के लिए शुल्क लेते हैं। ऐसे भुगतान चंदे के बजाय प्राप्तियों के रूप में दर्ज हो सकते हैं।
अमेजन ने छह वर्षों में 34 भुगतानों के जरिये लेबर और लिबरल की शाखाओं को कुल 538,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दिए, जिसमें 28 जून 2025 को संघीय लेबर को दिए गए 46,500 डॉलर शामिल हैं। 2021 के मध्य से उसने लेबर बिजनेस फोरम की सदस्यता फीस के रूप में 200,000 डॉलर से अधिक भी दिए। ये फीस चंदे के बजाय "अन्य प्राप्तियों" के रूप में वर्गीकृत की गईं।
2021 के मध्य से 2025 के मध्य तक अमेजन ने एनएसडब्ल्यू लेबर और एनएसडब्ल्यू लिबरल को क्रमशः 38,100 और 37,400 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दिए, यानी कुल 75,500 डॉलर। ये रकम दोनों प्रमुख दलों के साथ संपर्क के व्यापक रुझान का हिस्सा हैं, अपने आप में अनुचित निर्णय लेने का प्रमाण नहीं।
अमेजन के प्रवक्ता ने मंचों के भुगतान और सार्वजनिक निवेश घोषणाओं के बीच किसी संबंध से इनकार किया:
इन मंचों में अमेजन की भागीदारी लंबे समय से है। यह कहना गलत है कि ये भुगतान सार्वजनिक घोषणाओं के साथ तालमेल बिठाकर किए गए थे।
मैक्वेरी टेक्नोलॉजी ग्रुप ने 2000 से लेबर और लिबरल की राज्य तथा संघीय शाखाओं को 2.2 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दिए हैं। कंपनी का कहना है कि वह खुलासे के नियमों का पालन करती है और मंजूरियों, सरकारी फैसलों या नीतिगत नतीजों के बदले राजनीतिक समर्थन नहीं देती।
डेटा सेंटर की एक अन्य कंपनी, विरिडिस ग्रीन ने अक्टूबर 2025 में क्वींसलैंड की लिबरल नेशनल पार्टी को 20,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का चंदा दिया और मंत्रियों तथा अधिकारियों तक पैरवी के लिए क्वींसलैंड के पूर्व मुख्यमंत्री रॉब बोरबिज को नियुक्त किया। इन उदाहरणों में धन जुटाने और पैरवी के जरिए पहुंच पाने के अलग मुद्दे जुड़े हैं। इनसे यह साबित नहीं होता कि भुगतानों के कारण अनुकूल फैसले लिए गए।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी क्लैंसी मूर ने उद्योग की ओर से राजनीतिक धन जुटाने और पैरवी के इस्तेमाल की आलोचना की है। नियमन का मुख्य सवाल यह है कि कोई भुगतान सीमा के अधीन चंदे की श्रेणी में आता है या नहीं, न कि सिर्फ यह कि आखिरकार पैसा किसी पार्टी तक पहुंचता है या नहीं। घोषित अधिकतम सीमाएं अकेले सदस्यता या व्यावसायिक व्यवस्थाओं के हर प्रकार का व्यवहार तय नहीं करतीं।
बाहरी प्रचारकों के मामले में प्रवर्तन की पुरानी चुनौती
पैरवी समूहों के चुनाव अभियान खर्च की सीमा 11.25 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है, जबकि केवल नीतिगत मुद्दों तक सीमित विज्ञापन पर सीमा नहीं लग सकती। इसलिए किसी नीति के पक्ष में दलील देने और उम्मीदवार का प्रचार या विरोध करने के बीच का फर्क प्रवर्तन के लिए अहम होगा।
यह समस्या संघीय सुधार से पहले से मौजूद है। एनएसडब्ल्यू की संसदीय समिति की 2011 की विधेयक जांच में यह देखा गया था कि क्या पार्टी से संबद्ध संगठनों के खर्च को पार्टी के खर्च के साथ जोड़ना चाहिए और क्या केवल मतदाता सूची में दर्ज लोगों को चंदा देने की अनुमति होनी चाहिए।
रिपोर्ट में दर्ज है कि 2009 और 2010 में एनएसडब्ल्यू के संशोधनों ने पार्टियों को चंदे की सीमा 5,000 और उम्मीदवारों को 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तय की थी। उनमें संपत्ति विकासकर्ताओं, तंबाकू और शराब कंपनियों तथा जुआ कारोबार से चंदे पर रोक भी थी। ये ऐतिहासिक एनएसडब्ल्यू आंकड़े हैं, मौजूदा संघीय सीमाएं नहीं।
समिति ने सिफारिश की थी कि जब संबद्ध संगठन का खर्च सीधे पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील करे या पार्टी के अनुरोध अथवा उसके साथ सहयोग में किया गया हो, तो उसे पार्टी के खर्च के साथ जोड़ा जाए। समिति संबद्ध संगठन के स्वतंत्र चुनाव प्रचार के अधिकार को, जिसमें पार्टी के खिलाफ अभियान भी शामिल है, बनाए रखना चाहती थी।
उसने यह भी सिफारिश की थी कि सदस्यों वाले संगठनों को मौजूदा सीमाओं के भीतर नीतिगत अभियानों के लिए रकम जुटाने की अनुमति दी जाए और सदस्य की सहमति से पार्टी की संबद्धता फीस को मामूली प्रशासनिक खर्च तक सीमित रखा जाए। सबक स्पष्ट हैं: नियामकों को समन्वित चुनावी गतिविधि और स्वतंत्र पैरवी के बीच, तथा असली सेवा-शुल्क और फीस के रूप में छिपाए वित्तीय समर्थन के बीच फर्क करना होगा।
संवैधानिक चुनौती दोनों तरह की सीमाओं तक पहुंच सकती है
टोमी का तर्क है कि पार्टियों, निर्दलीय उम्मीदवारों और नए प्रवेशकर्ताओं के साथ असमान व्यवहार संघीय व्यवस्था को हाई कोर्ट में चुनौती के दायरे में ला सकता है। एक अलग रिपोर्ट में संवैधानिक चुनौती जारी होने की बात कही गई है, लेकिन मुकदमे का नाम, सुनवाई की तारीख या फैसला नहीं बताया गया। इस विश्लेषण को अदालत का यह निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए कि कानून अमान्य है।
यहां प्रासंगिक संवैधानिक सिद्धांत राजनीतिक संवाद की निहित स्वतंत्रता है। ऑस्ट्रेलिया में अधिकारों का कोई सामान्य संवैधानिक घोषणापत्र नहीं है, लेकिन हाई कोर्ट ने यह माना है कि संसद सीधे जनता द्वारा चुनी जाए, इस आवश्यकता से राजनीतिक संवाद को संरक्षण मिलता है। यह संरक्षण सरकार की पाबंदियों को सीमित करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि चंदे या खर्च की हर सीमा असंवैधानिक है।
टोमी इस मुद्दे को कई अदालती मामलों की कड़ी में रखती हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेलीविजन बनाम कॉमनवेल्थ (1992), यूनियन्स एनएसडब्ल्यू बनाम एनएसडब्ल्यू (नंबर 1) (2013), मैक्लॉय बनाम न्यू साउथ वेल्स (2015) और ब्राउन बनाम तस्मानिया (2017) शामिल हैं। उनकी चिंता यह है कि व्यवस्था अपने प्रतिबंधों को किस आधार पर उचित ठहराती है और क्या राजनीतिक भागीदारों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करती है।
संशोधनों में कहा गया है कि चंदे और खर्च की सीमाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर लागू होने के लिए बनाई गई हैं। उनके विश्लेषण के अनुसार, इस जुड़ाव के कारण सफल चुनौती से दोनों तरह के प्रावधान प्रभावित हो सकते हैं, न कि एक बचा रहे और दूसरा हट जाए।
एनएसडब्ल्यू समिति ने भी चेतावनी दी थी कि बिना संशोधन लागू करने पर 2011 के उसके प्रस्तावित प्रतिबंधों को संवैधानिक चुनौती मिल सकती है। उसने नतीजा हाई कोर्ट पर छोड़ दिया था। संघीय विवाद का समाधान भी केवल सीमाएं होने से नहीं होगा; उनका ढांचा और अमल अहम हैं।
जनवरी 2027 से पहले क्या होगा
रिपोर्टों के मुताबिक, मूल योजना के तहत व्यवस्था जुलाई 2026 में लागू होनी थी, लेकिन अमल की कठिनाइयों के कारण तारीख आगे बढ़ाई गई। AEC के मौजूदा मार्गदर्शन में लागू होने की तारीखों का अंतर स्पष्ट है: संक्रमणकालीन नियम जुलाई में शुरू होंगे, जबकि नई वित्तपोषण और खुलासा संबंधी बाध्यताएं जनवरी में लागू होंगी।
- फरवरी 2025: संसद ने लेबर और कोएलिशन के समर्थन से निर्वाचन कानून संशोधन (निर्वाचन सुधार) अधिनियम 2025 पारित किया।
- 1 अप्रैल 2026: AEC ने खुलासे संबंधी अपने अवलोकन को 5,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की सीमा और कैलेंडर वर्ष की रिपोर्टिंग जरूरतों के साथ अपडेट किया।
- 1 जुलाई 2026: मौजूदा व्यवस्था के दायरे में आने वाले प्रतिभागियों के लिए संक्रमणकालीन नियम शुरू होंगे।
- 1 जनवरी 2027: मूल सुधार और प्रस्तावित नई वित्तपोषण एवं खुलासा प्रणाली शुरू होगी।
- फरवरी 2027: हालिया खातों के मुताबिक, मौजूदा सालाना खुलासा व्यवस्था के तहत संबंधित चंदों का प्रकाशन तब तक होने की उम्मीद है।
ऑर ने सुधारों को "कुछ न होने से बेहतर" और कानून के करीब 250 पन्नों को "जटिल" बताया। उनकी चिंता है कि छोटे राजनीतिक संगठन और स्वयंसेवक ऐसे नियमों को समझने में संघर्ष कर सकते हैं, जबकि अच्छी आर्थिक स्थिति वाले भागीदार उन्हें समझने के लिए विशेषज्ञ सलाह ले सकते हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वन नेशन को राइनहार्ट के समर्थन ने प्रमुख पार्टियों को सीमा लागू होने से पहले अधिक समय देने का कारण दिया। प्रमुख पार्टियों के अनाम नेताओं ने इस व्याख्या को खारिज किया। यह विवादित आकलन है, देरी का स्थापित कारण नहीं; घोषित वजह अमल की तैयारियां हैं।
चुनावी खर्च पर सीमा लगाने की मांग का पुराना इतिहास है। 2019 के अपने सुधार प्रस्ताव में ग्रैटन इंस्टीट्यूट ने ऑस्ट्रेलियन इलेक्शन स्टडी के एक निष्कर्ष का हवाला दिया था, जिसके अनुसार 74 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई मानते थे कि सरकार में बैठे लोग अपना ही ध्यान रखते हैं। संस्थान ने 2018 के डेमोक्रेसी 2025 सर्वे का भी हवाला दिया, जिसमें चुनावी खर्च की सीमा को सबसे अधिक समर्थित सुधार बताया गया था।
एक अलग सर्वेक्षण में 226 संघीय राजनेताओं में से 98 ने जवाब दिया और उत्तरदाताओं में तीन-चौथाई ने खर्च की सीमा का समर्थन किया। यह जवाब देने वालों के समर्थन का प्रमाण है, पूरी संसद के तीन-चौथाई का नहीं। ग्रैटन ने अन्य राजनीतिक अभिव्यक्ति को बिना रोक छोड़े, पार्टियों और बाहरी समूहों के सशुल्क विज्ञापनों पर प्रतिबंध केंद्रित करने का प्रस्ताव दिया था।
फिलहाल प्राथमिकता अमल की है: स्पष्ट मार्गदर्शन, काम करने वाला रिपोर्टिंग पोर्टल और चंदे, प्राप्तियों तथा चुनावी गतिविधियों के साथ एकसमान व्यवहार। संवैधानिक विवाद, निर्दलीय उम्मीदवारों की व्यावहारिक स्थिति और समन्वित खर्च को पकड़ते हुए वास्तविक नीतिगत पैरवी को सीमित न करने की क्षमता जैसे सवाल अब भी अनसुलझे हैं।
मुख्य बिंदु
- संघीय चंदे और चुनावी खर्च के सुधार 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे; संक्रमणकालीन नियम 1 जुलाई 2026 से शुरू होंगे।
- खुलासे की सीमा 17,300 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से घटकर 5,000 डॉलर से अधिक होगी।
- 50,000 डॉलर की चंदा सीमा के साथ शाखाओं के चंदे जोड़कर गिनने के नियम और राष्ट्रीय स्तर पर दानदाता की 1.6 मिलियन डॉलर की सालाना अधिकतम सीमा भी लागू होगी।
- राष्ट्रीय पार्टियों के चुनावी खर्च की सीमा 90 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर होगी और निर्वाचन क्षेत्र के अभियानों की सीमा 800,000 डॉलर होगी।
- सामान्य पार्टी विज्ञापन, कारोबारी मंचों से मिली प्राप्तियां और स्वतंत्र नीतिगत अभियान नियमों पर विवाद के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
- राइनहार्ट के वन नेशन को समर्थन में कथित तौर पर एक विमान शामिल है, जबकि पार्टी का कहना है कि वह ब्रिस्बेन में उनकी कंपनी की संपत्ति के लिए बाजार दर पर किराया देगी।
- सार्वजनिक वित्तपोषण बढ़ेगा, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि नए उम्मीदवारों की तुलना में मौजूदा सांसदों को वित्तीय लाभ बना रहेगा।
- संवैधानिक चुनौती की खबर है, लेकिन सुनवाई की तारीख या फैसले का उल्लेख नहीं है।






