पांच मिनट की जांच अब घर के करीब
थाईलैंड का लक्ष्य 2026 के अंत तक देशभर की 3,000 फार्मेसियों में स्थानीय स्तर पर विकसित किडनी जांच किट उपलब्ध कराना है। यह उस शोध कार्यक्रम का विस्तार है जिसका इस्तेमाल पहले से सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजनाओं में हो रहा है। इस पहल में नेशनल नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर (NANOTEC), नेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एजेंसी (NSTDA) और डिजिटल फार्मेसी कंपनी Arincare साथ आए हैं।
विषय-सूची
- पांच मिनट की जांच अब घर के करीब
- राष्ट्रीय आंकड़े क्या मापते हैं
- AL-Strip खतरे के संकेत का पता कैसे लगाता है
- दूसरी तकनीक संख्यात्मक नतीजे देती है
- एक अलग सामुदायिक अध्ययन के नतीजे
- सटीकता का मतलब हर मामले का पता लगना नहीं
- असामान्य नतीजे के बाद की जरूरी कड़ी
- फार्मेसियों से पहुंच और दवा संबंधी सलाह
- विस्तार के दो रास्ते, अलग-अलग समयसीमा
- लागत और लाभ का बेहतर आकलन बाकी
- मुख्य बातें
23 सितंबर, 2026 को हुए एक मंच पर थाईलैंड की किडनी फ्रेंड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष थानाफोन डोक्काएव ने बताया कि देश में क्रोनिक किडनी रोग से 1.1 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं, जबकि करीब 1,50,000 लोगों को किडनी प्रतिस्थापन उपचार मिल रहा है। उन्होंने चिकित्सा कर्मियों की कमी, आने-जाने के खर्च और लक्षण सामने आने से पहले जांच कराने में लोगों की हिचक को प्रमुख चुनौतियां बताया।
फार्मेसी योजना के केंद्र में AL-Strip से विकसित उत्पाद हैं। यह पेशाब में एल्ब्यूमिन नामक प्रोटीन की जांच करता है, जिसकी मौजूदगी किडनी को नुकसान का संकेत हो सकती है। NSTDA के अनुसार, इस तकनीक से करीब पांच मिनट में प्रारंभिक नतीजा मिलता है। Kitnee, KidnyCheck और RenAcc नाम के तीन व्यावसायिक उत्पाद फार्मेसियों और डिजिटल वितरण माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंचाने की योजना है।
यह लक्ष्य वितरण का है, इसकी पुष्टि नहीं कि 3,000 दुकानों में किट पहले से उपलब्ध हैं। थाईलैंड के एक अलग सामुदायिक अध्ययन के नतीजे यह भी दिखाते हैं कि सिर्फ उपलब्धता काफी नहीं: जांच के पात्र लोगों में से केवल 16% शुरुआती जांच के लिए आए और असामान्य नतीजे वाले लोगों में से केवल 55% ने पुष्टि के लिए आगे की जांच पूरी की।
इसलिए मुख्य चुनौती दोहरी है। थाईलैंड को जांच उन लोगों के करीब पहुंचानी होगी जो खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं, और असामान्य नतीजे को चिकित्सकीय मूल्यांकन से जोड़ना होगा। किट खतरे का संकेत दे सकती है, लेकिन अकेले इससे क्रोनिक किडनी रोग का निदान नहीं हो सकता और न ही यह सुनिश्चित होता है कि आगे उपचार मिलेगा।
राष्ट्रीय आंकड़े क्या मापते हैं
क्रोनिक किडनी रोग से प्रभावित 1.1 करोड़ से अधिक लोगों के अनुमान और स्वास्थ्य मंत्रालय के हेल्थ डेटा सेंटर (HDC) से जोड़े गए आंकड़ों में काफी अंतर है। 2026 के लिए HDC में दर्ज मरीजों की संख्या 1,321,111 बताई गई है, जो 2025 से 175,928 अधिक है।
इन आंकड़ों के अनुसार 2025 में मरीजों की संख्या 1,145,183 थी और 2026 में करीब 15.4% की वृद्धि हुई। 2026 के आंकड़ों में स्टेज 3 के 634,289, स्टेज 4 के 167,244 और स्टेज 5 के 82,051 मरीज शामिल हैं। इन तीनों समूहों में कुल 883,584 मरीज हैं, जो HDC में दर्ज कुल संख्या का करीब 66.9% है।
राष्ट्रीय अनुमान और HDC की संख्या को एक-दूसरे के समान नहीं मानना चाहिए। पहला देश में रोग के कुल बोझ के रूप में पेश किया गया है, जबकि दूसरा स्वास्थ्य सूचना प्रणाली में दर्ज मरीजों की संख्या है। दोनों के बीच अंतर समझाने के लिए उनकी आबादी के दायरे और गणना के तरीकों की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है। रिपोर्टों में यह भी अंतर है कि 1.1 करोड़ का आंकड़ा आम तौर पर क्रोनिक किडनी रोग बताता है या उसके अंतिम चरण को। थानाफोन के बयान में यह आंकड़ा क्रोनिक किडनी रोग के लिए है, किडनी फेल होने वाले 1.1 करोड़ लोगों के लिए नहीं।
क्षेत्रीय आंकड़ों को लेकर भी ऐसी ही सावधानी जरूरी है। NSTDA के अनुसार, 2009 में थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में क्रोनिक किडनी रोग की व्यापकता 17% से 22% थी और 2022 में कुछ इलाकों में यह 26% तक पहुंच गई। ये आंकड़े क्षेत्र में गंभीर समस्या दिखाते हैं, लेकिन बाद का आंकड़ा चुने हुए इलाकों से जुड़ा है। इससे पूरे उत्तर-पूर्व में एकसमान वृद्धि साबित नहीं होती।
AL-Strip खतरे के संकेत का पता कैसे लगाता है
NSTDA की दिसंबर 2023 की घोषणा में AL-Strip को घर पर इस्तेमाल होने वाली गुणात्मक जांच बताया गया है। गुणात्मक जांच यह बताती है कि जांच का तय स्तर पार हुआ है या नहीं; यह कोई सटीक संख्यात्मक माप नहीं देती।
उस घोषणा के अनुसार, स्ट्रिप पेशाब में 20 माइक्रोग्राम प्रति मिलीलीटर से अधिक एल्ब्यूमिन होने पर संकेत देती है। इसमें बताया गया रंग-पैटर्न उच्च जोखिम दर्शाता है, जिसके लिए स्वास्थ्य केंद्र में विस्तृत जांच जरूरी है। एल्ब्यूमिन आमतौर पर अधिकतर रक्तप्रवाह में रहता है। पेशाब में इसकी मात्रा बढ़ना किडनी को नुकसान का शुरुआती संकेत हो सकता है, भले ही रक्त जांच में फिलहाल फिल्टर करने की क्षमता सामान्य दिखे।
फार्मेसी विस्तार पर एक रिपोर्ट में सीमा 20 मिलीग्राम प्रति मिलीलीटर बताई गई है। यह NSTDA के आधिकारिक विवरण में दी गई मात्रा से 1,000 गुना अधिक है और इसे समान निर्देश नहीं मानना चाहिए। जांच पढ़ने के समय पर भी रिपोर्टों में अंतर है: कहीं करीब पांच मिनट, तो कहीं पांच से 15 मिनट बताया गया है। ग्राहकों को शोध तकनीक के सामान्य विवरण के बजाय अपने स्वीकृत उत्पाद के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
दूसरी तकनीक संख्यात्मक नतीजे देती है
NANOTEC ने चिकित्सा पेशेवरों के लिए GO-Sensor Albumin Test भी विकसित किया है। AL-Strip के विपरीत, यह संख्यात्मक माप देता है। इसका नतीजा 10 से 30 मिनट में मिलता है और कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर देखा जा सकता है।
26 दिसंबर, 2023 को प्रकाशित NSTDA की थाई तकनीक संबंधी घोषणा के मुताबिक, यह उपकरण एक बार में एक नमूने की जांच करता है। इसमें ऐसा अभिकर्मक बताया गया है जिसकी संवेदनशीलता पारंपरिक जांचों से करीब 100 गुना है। उपकरण छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के बाहर जांच के लिए तैयार किया गया है। यह दावा अभिकर्मक की विश्लेषणात्मक संवेदनशीलता से जुड़ा है, इस बात का प्रमाण नहीं कि प्रणाली 100 गुना अधिक मरीजों का पता लगाती है।
NSTDA की दोनों घोषणाओं में तकनीक की तैयारी का स्तर अलग-अलग बताया गया है। अंग्रेजी संस्करण दोनों तकनीकों को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 8 पर रखता है, जबकि थाई संस्करण स्तर 7 से 9 की सीमा बताता है। ये स्तर व्यावहारिक इस्तेमाल की दिशा में हुई प्रगति बताते हैं। इनमें से कोई भी विवरण नैदानिक प्रदर्शन के प्रमाण या इस आकलन का विकल्प नहीं है कि जांच कार्यक्रम से मरीजों के नतीजे बेहतर होते हैं या नहीं।
थाई घोषणा में AL-Strip तकनीक पाने वाली तीन कंपनियों के नाम Innosus, Medbiosyn और Hilife Health हैं। बाद में फार्मेसी विस्तार की योजना में Kitnee, KidnyCheck और RenAcc व्यावसायिक उत्पादों के नाम दिए गए हैं, लेकिन हर ब्रांड को संबंधित कंपनी से स्पष्ट रूप से नहीं जोड़ा गया। इनका विकास प्रयोगशाला के काम से उत्पादन तक की प्रगति दिखाता है, हालांकि कीमत और तुलनात्मक प्रदर्शन की जानकारी नहीं दी गई है।
एक अलग सामुदायिक अध्ययन के नतीजे
2025 में प्रकाशित सामुदायिक जांच अध्ययन थाईलैंड में पेशाब के एल्ब्यूमिन की जांच के बारे में उपयोगी प्रमाण देता है। हालांकि इसमें फार्मेसी विस्तार में बताए गए तीन उत्पादों के बजाय Albii नाम की अलग, स्थानीय रूप से विकसित स्ट्रिप का मूल्यांकन किया गया था।
शोधकर्ताओं ने 1 फरवरी से 31 मार्च, 2022 के बीच समुत साखोन प्रांत के बान फेओ जिले के 17 उप-जिला स्वास्थ्य कार्यालयों में 2,307 प्रतिभागियों को शामिल किया। ये ऐसे वयस्क थे जिन्हें पहले किडनी रोग का निदान नहीं हुआ था, लेकिन जिन्हें मधुमेह या उच्च रक्तचाप था अथवा जिनकी उम्र कम से कम 60 वर्ष थी। इसलिए नतीजे अधिक जोखिम वाले समूह से जुड़े हैं, थाईलैंड के सभी निवासियों के प्रतिनिधि नमूने से नहीं।
शोधकर्ताओं को 489 प्रतिभागियों में एल्ब्यूमिन्यूरिया, अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन दर में कमी या दोनों मिले। अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन दर (eGFR) रक्त में क्रिएटिनिन के आधार पर की गई गणना है, जो बताती है कि किडनी रक्त को कितनी अच्छी तरह फिल्टर करती है। इन 489 प्रतिभागियों में से 406, यानी 83%, को एल्ब्यूमिन्यूरिया था, जबकि उनका eGFR सामान्य था। अन्य 60 में एल्ब्यूमिन्यूरिया के बिना eGFR कम था और 23 में दोनों असामान्यताएं थीं।
यह विभाजन बताता है कि पेशाब और रक्त की जांच के उद्देश्य अलग-अलग हैं। केवल फिल्टर करने की क्षमता में कमी पर निर्भर कार्यक्रम उन 406 प्रतिभागियों में मिले खतरे के संकेत को नहीं पकड़ पाता। दूसरी ओर, सिर्फ एल्ब्यूमिन की जांच से फिल्टर करने की क्षमता में कमी वाले हर व्यक्ति का पता नहीं चलता।
शोधपत्र में 2,307 में से 489 प्रतिभागियों को 20.3% बताया गया है, हालांकि इन संख्याओं से गणना करने पर आंकड़ा करीब 21.2% आता है। संख्याओं में इस असंगति से बताया गया विभाजन नहीं बदलता, लेकिन व्यापकता का आंकड़ा दोहराते समय सावधानी जरूरी है।
सटीकता का मतलब हर मामले का पता लगना नहीं
पेशाब में एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन अनुपात (UACR) की प्रयोगशाला जांच से तुलना करने पर Albii की संवेदनशीलता 70%, विशिष्टता 97% और सटीकता 92% थी। UACR में पेशाब के एल्ब्यूमिन की तुलना क्रिएटिनिन से की जाती है, जिससे पेशाब की सांद्रता में अंतर का हिसाब रखने में मदद मिलती है। अध्ययन में 30 मिलीग्राम प्रति ग्राम या उससे अधिक UACR को एल्ब्यूमिन्यूरिया माना गया।
संवेदनशीलता बताती है कि जांच मापी जा रही स्थिति का कितनी बार पता लगाती है। 70% संवेदनशीलता का अर्थ है कि जिन प्रतिभागियों का प्रयोगशाला UACR एल्ब्यूमिन्यूरिया की सीमा पर या उससे ऊपर था, उनमें से करीब 30% की पहचान स्ट्रिप से नहीं हुई। विशिष्टता बताती है कि जिन लोगों में यह स्थिति नहीं है, उनमें जांच कितनी बार सही नकारात्मक नतीजा देती है। इसलिए अधिक सटीकता को इस गारंटी के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए कि स्ट्रिप का नकारात्मक नतीजा किडनी रोग को खारिज करता है।
उसी अध्ययन में इस्तेमाल हुई सामान्य पेशाब-प्रोटीन डिपस्टिक के मुकाबले एल्ब्यूमिन स्ट्रिप ने बेहतर प्रदर्शन किया। प्रोटीन डिपस्टिक की संवेदनशीलता 51%, विशिष्टता 93% और सटीकता 86% थी। एल्ब्यूमिन स्ट्रिप की संवेदनशीलता 19 प्रतिशत अंक अधिक थी, जो शुरुआती असामान्यताओं की तलाश करने वाले कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण अंतर है।
शोधपत्र के अनुसार, Albii को थाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मंजूरी मिली थी और पेशाब डालने के कम से कम 10 मिनट बाद नतीजा पढ़ना चाहिए। यह निर्देश AL-Strip के पांच मिनट वाले विवरण से अलग है और बताता है कि उत्पादों और उनके प्रमाणों को अलग-अलग रखना जरूरी है। Albii के मापे गए प्रदर्शन को अपने आप Kitnee, KidnyCheck या RenAcc पर लागू नहीं किया जा सकता।
असामान्य नतीजे के बाद की जरूरी कड़ी
बान फेओ में 14,393 लोग अध्ययन के पात्र थे, लेकिन शुरुआती जांच में केवल 2,307 शामिल हुए। लोगों को डाक से निमंत्रण भेजे गए और एक महीने तक स्थानीय मीडिया में प्रचार किया गया। 16% की भागीदारी दर दिखाती है कि सामुदायिक जांच उपलब्ध कराने भर से अधिकतर पात्र लोग जांच कराने के लिए तैयार नहीं हो जाते।
जिन लोगों में एल्ब्यूमिन्यूरिया या eGFR में कमी थी, उनके लिए शोधकर्ताओं ने तीन महीने बाद दोबारा जांच की व्यवस्था की, ताकि पता चल सके कि असामान्यताएं बनी हुई हैं या नहीं। असामान्य नतीजे वाले लोगों में से केवल 55% ने पुष्टि के लिए जांच कराई। असामान्यताओं का बने रहना अहम है, क्योंकि एक बार की जांच का नतीजा संदिग्ध बीमारी का संकेत देता है, जबकि क्रोनिक किडनी रोग के लिए समस्या के समय के साथ जारी रहने का प्रमाण चाहिए।
जिन लोगों में एल्ब्यूमिन्यूरिया या फिल्टर करने की क्षमता में लगातार कमी थी, उन्हें जिला अस्पताल के किडनी क्लिनिक जाने की सलाह दी गई। जांच, पुष्टि और चिकित्सकीय देखभाल का यह क्रम वह हिस्सा है जिसकी जगह खुदरा वितरण नेटवर्क नहीं ले सकता। लेखकों ने इसे लागू करने और इसकी लागत-प्रभावशीलता पर आगे शोध की सिफारिश की।
फार्मेसी विस्तार की चर्चा में फार्मेसी की जानकारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में रेफरल से जोड़ने की बात शामिल है। हालांकि, रेफरल की पूरी प्रक्रिया, पुष्टि के लिए जांच का खर्च कौन देगा और ग्राहकों के देखभाल तक पहुंचने की निगरानी कैसे होगी, इसका विवरण नहीं दिया गया है। इन्हीं उपायों से तय होगा कि किट की बिक्री बढ़ने से इलाज पहले शुरू होता है या नहीं।
फार्मेसियों से पहुंच और दवा संबंधी सलाह
Arincare के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थिरा कनोक्कनजारात ने ऐसे मंच का वर्णन किया जो माल-सूची प्रबंधन, फार्मासिस्टों और फार्मेसियों को जोड़ता है। कंपनी का कहना है कि उसके नेटवर्क में 6,000 से अधिक फार्मेसियां और 12,000 से अधिक फार्मासिस्ट हैं। इसलिए 3,000 दुकानों का लक्ष्य बताए गए नेटवर्क के आधे से भी कम है; यह हर जुड़ी हुई दुकान में किट पहुंचाने की प्रतिबद्धता नहीं है।
MedEx के जरिए वितरण और फार्मेसी में ऑर्डर देने में मदद मिलने की योजना है। Arincare ऐसी जानकारी और साधन भी उपलब्ध कराना चाहती है, जिनसे फार्मासिस्ट किट समझा सकें और ग्राहकों को सलाह दे सकें। NSTDA के रैपिड टेस्ट कार्यक्रम की निदेशक डॉ. दीनपेन जापरुंग के अनुसार, लक्ष्य केवल उत्पाद दुकानों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उसका लगातार इस्तेमाल और दोबारा ऑर्डर सुनिश्चित करना भी है।
NANOTEC की निदेशक डॉ. उरात्चा रुक्टानोनचाई का कहना है कि इस सहयोग का उद्देश्य शोध और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को पहले से मौजूद बाजार माध्यमों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता आम लोगों के व्यावहारिक इस्तेमाल की है, न कि तकनीक विकसित करने पर ही रुक जाने की।
थाईलैंड की कम्युनिटी फार्मेसी एसोसिएशन की अध्यक्ष फार्मासिस्ट फेंतिपा काएवकेत्थोंग फार्मेसियों की अहमियत की एक और वजह बताती हैं: ग्राहकों में मोटापे, पहले से मौजूद बीमारियों या दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े ऐसे जोखिम हो सकते हैं जिनकी उन्हें जानकारी न हो। उन्होंने नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) का जिक्र किया, जो दर्द निवारक दवाओं का आम वर्ग है। ये कुछ मिश्रित दवा पैकों और पारंपरिक तैयारियों में भी हो सकती हैं।
उनके अनुसार, शारीरिक श्रम करने वाले लोग काम जारी रखने के लिए दर्द की दवाएं खरीदते हैं, लेकिन किडनी पर संभावित जोखिम से अनजान रहते हैं। पहले से मौजूद बीमारियों, लक्षणों, सप्लीमेंट और दवाओं पर बातचीत से जांच केवल खरीद-बिक्री तक सीमित रहने के बजाय अधिक उपयोगी हो सकती है। हालांकि, फार्मेसी का लक्ष्य या कंपनी के नेटवर्क का आकार यह साबित नहीं करता कि कितने लोग जांच पूरी करेंगे या उपचार पाएंगे।
विस्तार के दो रास्ते, अलग-अलग समयसीमा
फार्मेसी परियोजना से पहले खोन केन में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल शुरू हुई थी। 5 जून, 2025 को उच्च शिक्षा मंत्रालय, NANOTEC/NSTDA, प्रांतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यालय और प्रांतीय प्रशासनिक संगठन ने किडनी जांच तथा मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं पर काम के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस पहल का लक्ष्य प्रांतीय प्रशासनिक संगठन के अधीन 248 उप-जिला स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षण और किट का इस्तेमाल था। ये केंद्र 26 जिलों में हैं। इसके लिए 2028 तक देशभर में विस्तार का लक्ष्य रखा गया। यह समयसीमा सार्वजनिक स्वास्थ्य पायलट से जुड़ी है और इसे 2026 के अंत तक 3,000 फार्मेसी दुकानों तक पहुंचने के अलग लक्ष्य से नहीं मिलाना चाहिए।
- 2021: NANOTEC ने उत्तर-पूर्वी थाईलैंड के CKDNET रोकथाम कार्यक्रम में मदद के लिए जांच किट बनाना शुरू किया।
- फरवरी से मार्च 2022: बान फेओ के अलग अध्ययन में 2,307 प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
- दिसंबर 2023: NSTDA ने AL-Strip और GO-Sensor के विवरण प्रकाशित किए, जिनमें शुरुआती सामुदायिक इस्तेमाल भी शामिल था।
- 5 जून, 2025: खोन केन के साझेदारों ने 248 उप-जिला केंद्रों से जुड़ा समझौता किया।
- 23 सितंबर, 2026: फार्मेसी सहयोग पेश किया गया, जिसके तहत 2026 के अंत तक 3,000 दुकानों का लक्ष्य रखा गया।
- 2028: खोन केन पहल के देशभर में विस्तार की तय समयसीमा।
खोन केन की सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी सलीनी वाइयानोन के अनुसार, प्रांत में हर साल किडनी रोग के 30,000 से अधिक मरीज होते हैं। इनमें 2,978 को हेमोडायलिसिस और करीब 1,700 को पेरिटोनियल डायलिसिस मिलता है। डायलिसिस पाने वाले इन दोनों समूहों में कुल करीब 4,678 लोग हैं। यह उपचार व्यवस्था पर बोझ दिखाता है, जिसे रोकथाम के प्रयास कम करना चाहते हैं।
लागत और लाभ का बेहतर आकलन बाकी
NSTDA की 2023 की घोषणाओं में डायलिसिस का खर्च प्रति व्यक्ति सालाना 200,000 बहत तक बताया गया है। बाद की रिपोर्टों में सरकारी खर्च 15 अरब से बढ़कर 20 अरब बहत होने की बात है, यानी एक तिहाई वृद्धि। लेकिन बजट के वर्ष नहीं बताए गए और यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों आंकड़े बिल्कुल समान सेवाओं को शामिल करते हैं या नहीं। इसलिए इनसे फार्मेसी कार्यक्रम की सालाना बचत का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
पहले का इस्तेमाल फिर भी एक शुरुआती आधार देता है। NSTDA के अनुसार, खोन केन विश्वविद्यालय और नेशनल हेल्थ सिक्योरिटी ऑफिस के साझेदारों द्वारा संचालित CKDNET ने 1,000 से अधिक लोगों की जांच की। थाई घोषणा में इससे जुड़े आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का मूल्य 7.87 मिलियन बहत बताया गया है। अंग्रेजी घोषणा में 7.87 बहत लिखा है। आधिकारिक संस्करणों के बीच यह अंतर अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
खरीद संबंधी प्रगति पर भी घोषणाओं में अंतर है। थाई संस्करण कहता है कि दोनों तकनीकों में से एक को थाई इनोवेशन सूची में शामिल किया गया था, जिससे सरकारी खरीद में मदद मिलती है। अंग्रेजी संस्करण में सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करने की बात है। इनमें से कोई भी यह स्थापित नहीं करता कि आने वाली फार्मेसी किट ग्राहकों को मुफ्त मिलेंगी या देशभर में सार्वजनिक बीमा के तहत आएंगी।
अगला घोषित पड़ाव 2026 के अंत तक वितरण का लक्ष्य है। खुदरा कीमत, फिलहाल भाग ले रही दुकानों की संख्या, फार्मेसियों का भौगोलिक फैलाव और पुष्टि के लिए जांच तक पहुंचाने की वित्तपोषित व्यवस्था अभी नहीं बताई गई है। सफलता का आकलन करने के लिए केवल उन दुकानों की गिनती से अधिक उपयोगी होगा यह मापना कि कितने लोग जांच कराते हैं, दोबारा जांच पूरी करते हैं और असामान्य नतीजों के बाद उपचार पाते हैं।
मुख्य बातें
- NANOTEC, NSTDA और Arincare का लक्ष्य 2026 के अंत तक 3,000 फार्मेसियों में किडनी जांच किट पहुंचाना है।
- NSTDA के अनुसार, AL-Strip पेशाब में एल्ब्यूमिन की जांच करती है और करीब पांच मिनट में प्रारंभिक नतीजा देती है।
- आधिकारिक सीमा 20 माइक्रोग्राम प्रति मिलीलीटर से अधिक है, न कि एक रिपोर्ट में बताया गया 20 मिलीग्राम प्रति मिलीलीटर।
- Albii पर हुए एक अलग अध्ययन में संवेदनशीलता 70% और विशिष्टता 97% पाई गई। ये नतीजे अपने आप दूसरे ब्रांड पर लागू नहीं किए जा सकते।
- बान फेओ में जांच के पात्र निवासियों में से केवल 16% जांच के लिए आए और असामान्य नतीजे वाले लोगों में से 55% ने पुष्टि की जांच पूरी की।
- खोन केन के 248 केंद्रों वाले पायलट का देशभर में विस्तार करने का अलग लक्ष्य 2028 है।
- फार्मेसी कार्यक्रम की कीमतें, कवरेज और रेफरल की विस्तृत व्यवस्था अभी तय नहीं बताई गई है।






