ताज़ा आकलन में 305 घरों को नुकसान और 2 अरब रुपये की क्षति
10 अक्टूबर 2026 को दक्षिण बांग्का के दुसुन सेरडांग में लगी आग आसपास की जमीन से रिहायशी इलाके तक फैल गई। 11 अक्टूबर को पश्चिमी इंडोनेशियाई समयानुसार 20:10 बजे जारी प्रांतीय आपदा एजेंसी के प्रारंभिक अपडेट के मुताबिक, इससे 305 घर और 1,800 लोग प्रभावित हुए। अनुमानित नुकसान 2 अरब रुपये तक पहुंच गया। आग से 8.3 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ और दो राहत शिविरों में 500 लोगों के होने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
विषय-सूची
- ताज़ा आकलन में 305 घरों को नुकसान और 2 अरब रुपये की क्षति
- नुकसान के आंकड़े क्यों बदले
- सेरडांग में आग कैसे फैली
- आग बुझने के बाद भी दमकलकर्मी तैनात रहे
- दो राहत शिविरों में 500 लोग ठहरे
- आपातकालीन सहायता केंद्र तक भोजन, पानी और कपड़े पहुंचे
- डॉक्टरों ने झुलसने और आंखों में जलन का इलाज किया
- पढ़ाई और बिजली के लिए अलग इंतजाम जरूरी थे
- पुनर्निर्माण योजनाओं में जमीन और बाढ़ के खतरे पर ध्यान जरूरी
- आग लगने के कारण की जांच जारी
- मुख्य बातें
शाम का यह आंकड़ा पहले के 600 घरों और 2,400 लोगों के अनुमान से कम था। इससे पता चलता है कि अधिकारियों के नुकसान का आकलन करने के साथ आंकड़ों में कितना बड़ा बदलाव आया। शुरुआती जानकारी में कम से कम 288 घरों के नष्ट होने और 1,152 निवासियों के प्रभावित होने की बात कही गई थी। इनमें से किसी भी आंकड़े को अंतिम सूची नहीं माना जाना चाहिए।
आग इंडोनेशिया के बांग्का बेलितुंग द्वीपसमूह प्रांत के सिम्पांग रिम्बा जिले के जुलुतुंग II गांव के सेरडांग टोले में लगी। तेज हवाओं, सूखे हालात और लकड़ी के तख्तों से बने घरों के कारण पास की जमीन से आग बस्ती तक फैल गई। अधिकारियों ने किसी की मौत की खबर नहीं दी, हालांकि चिकित्सा दलों ने झुलसने और आंखों में जलन की शिकायत वाले निवासियों का इलाज किया।
रविवार, 11 अक्टूबर तक आग बुझा दी गई थी, लेकिन धुएं और जली हुई निर्माण सामग्री के बीच दमकलकर्मी आग ठंडी करने का काम जारी रखे हुए थे। आपातकालीन काम आग की जगह तक सीमित नहीं था: अधिकारी भोजन, पीने के पानी, आश्रय, चिकित्सा देखभाल और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के इंतजाम कर रहे थे। वहीं, आवास अधिकारियों ने यह जांच शुरू कर दी थी कि क्या कुछ परिवारों को ऐसे इलाकों से हटाया जाना चाहिए जहां बाढ़ का भी खतरा है।
नुकसान के आंकड़े क्यों बदले
प्रांतीय क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, जिसे BPBD के नाम से जाना जाता है, ने 11 अक्टूबर को कई अस्थायी आंकड़े जारी किए। सुबह 07:00 बजे के अपडेट में करीब 500 घर, 500 परिवार और 2,000 लोग प्रभावित बताए गए। 09:40 बजे तक एजेंसी 600 घरों, 600 परिवारों और 2,400 लोगों की जानकारी दे रही थी। 20:10 बजे के अपडेट में ये आंकड़े घटकर 305 घर, 450 परिवार और 1,800 लोग रह गए।
दूसरी रिपोर्टें इस क्रम से पूरी तरह मेल नहीं खाती थीं। सुबह 07:00 बजे के आकलन के एक विवरण में करीब 600 घर बताए गए, जबकि परिवारों और लोगों के आंकड़े क्रमशः 500 और 2,000 ही थे। पुलिस ने अलग से 350 जले हुए घरों की जानकारी दी, जबकि जिला आवास विभाग ने अपने प्रारंभिक आकलन में 305 प्रभावित घर दर्ज किए। इससे पहले की रिपोर्टों में दर्जनों घरों के प्रभावित होने की बात थी; आग के शुरुआती घंटों में यह संख्या 60 से अधिक बताई गई थी।
प्रांतीय BPBD के कार्यवाहक प्रमुख अगुस अफांदी ने माना कि अलग-अलग एजेंसियां अलग आंकड़े दे रही थीं। सुबह और शाम के आकलन के बीच कमी का विस्तृत कारण नहीं बताया गया। आंकड़ों में घरों के प्रभावित होने, जलने और नष्ट होने जैसे अलग-अलग विवरण भी हैं। इन श्रेणियों को अपने आप एक जैसा नहीं माना जा सकता।
पुनर्वास के लिहाज से घरों और परिवारों के बीच का अंतर अहम है। ताज़ा आंकड़े में 305 प्रभावित घरों में 450 परिवार बताए गए हैं। इसलिए केवल इमारतों की संख्या पर आधारित पुनर्निर्माण योजना से यह पता नहीं चलेगा कि कितने परिवारों को मदद की जरूरत है। अधिकारियों ने अभी तक नुकसान की गंभीरता का अंतिम ब्योरा जारी नहीं किया है और न ही बताया है कि परिवारों और इमारतों की संख्या का मिलान कैसे किया गया।
सेरडांग में आग कैसे फैली
BPBD ने आग लगने का समय शनिवार, 10 अक्टूबर को लगभग 15:10 बताया। उस समय बस्ती के पास जमीन पर आग लगी हुई थी। एजेंसी के मुताबिक, प्रांतीय प्रतिक्रिया दल को जमीन में लगी आग की सूचना मिली और अधिकारियों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद उसने कर्मियों और उपकरणों को तैयार किया।
पुलिस ने घरों के पास करीब चार हेक्टेयर पीटलैंड को आग का संभावित शुरुआती इलाका बताया। यह BPBD के बाद के आकलन में दर्ज 8.3 हेक्टेयर से अलग माप है, जिसमें आग से प्रभावित क्षेत्र शामिल था। इन दोनों आंकड़ों को एक ही चीज के परस्पर विरोधी अनुमान नहीं समझना चाहिए।
समय के बारे में रिपोर्टें अलग-अलग हैं। पुलिस की रिपोर्ट में घटना का समय 17:20 बताया गया, जबकि कुछ अन्य शुरुआती रिपोर्टों में आग की लपटें करीब 17:45 बजे दिखने की बात कही गई। ये समय आग के अलग-अलग चरणों से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने अब तक एक सर्वमान्य समयक्रम तय नहीं किया है। पुलिस की रिपोर्ट में नवंबर की तारीखों का भी उल्लेख है, जो उसमें दिए गए 10 अक्टूबर के विवरण और 10 से 11 अक्टूबर की व्यापक समय-सीमा से मेल नहीं खाता।
आपातकालीन अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य घटनाक्रम यह था:
- 10 अक्टूबर, लगभग 15:10: BPBD ने बस्ती के पास जमीन पर आग लगने का रिकॉर्ड दर्ज किया।
- 10 अक्टूबर, देर दोपहर: रिपोर्टों में लकड़ी के घरों के बीच आग तेजी से फैलने की बात कही गई।
- 10 अक्टूबर, 21:10: BPBD को अपडेट मिला कि सैकड़ों घर जल गए हैं।
- 10 अक्टूबर, 22:00: एक आपातकालीन अधिकारी ने बताया कि संयुक्त दल अब भी आग बुझा रहे थे।
- 11 अक्टूबर, तड़के: आग बुझने की सूचना दी गई, जिसके बाद आग ठंडी करने का काम जारी रहा।
- 11 अक्टूबर, 20:10: BPBD ने संशोधित आंकड़ा जारी किया, जिसमें 305 घर और 1,800 लोग प्रभावित बताए गए।
आग बुझने के बाद भी दमकलकर्मी तैनात रहे
दक्षिण बांग्का ने तीन दमकल गाड़ियां तैनात कीं। उन्हें प्रांतीय दलों, पुलिस, सेना और निवासियों का सहयोग मिला। प्रांतीय सार्वजनिक व्यवस्था और अग्निशमन सेवा के प्रमुख बुदी उतामा ने बताया कि संयुक्त अभियान में पहले आग बुझाने और निवासियों को सुरक्षित निकालने पर ध्यान दिया गया। तेज हवाओं और सीमित संसाधनों के कारण शुरुआती प्रयास मुश्किल था।
रिपोर्टों में आग बुझने का समय रविवार तड़के या रविवार सुबह बताया गया। पुलिस की रिपोर्ट में समय 00:30 दिया गया, हालांकि उसमें साथ में दी गई तारीखों के संदर्भ असंगत थे। BPBD और जिला अधिकारियों की इस बात पर सहमति थी कि लपटें बुझने के बाद भी आग ठंडी करने का काम जारी रहा।
आग ठंडी करने के दौरान जली हुई सामग्री की जांच की जाती है और जहां गर्मी बनी रहती है वहां पानी डाला जाता है। केवल लपटें दिखाई न देने का मतलब यह नहीं कि जगह सुरक्षित है। अगुस ने कहा कि क्षतिग्रस्त घरों में लकड़ी की बड़ी मात्रा के कारण लगातार निगरानी जरूरी थी। फिर से आग सुलगने का खतरा घटाने के लिए दमकलकर्मी और अन्य आपातकालीन कर्मी तैनात रहे।
गवर्नर हिदायत अर्सानी प्रभावित इलाके में पहुंचे और तत्काल राहत में सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन को प्राथमिकता दी। उन्होंने आग को इंडोनेशिया की इस तरह की सबसे बड़ी आपदा भी बताया। इस दावे के समर्थन में देशव्यापी तुलना पेश नहीं की गई, इसलिए इसे स्थापित रैंकिंग के बजाय गवर्नर का आकलन समझना चाहिए।
दो राहत शिविरों में 500 लोग ठहरे
11 अक्टूबर को 18:30 बजे BPBD ने SDN 7 सिम्पांग रिम्बा में 300 और अल मुहाजिरीन मस्जिद में 200 लोगों के होने का रिकॉर्ड दर्ज किया। यही कुल संख्या एजेंसी के 20:10 बजे के अपडेट में भी दी गई। अगुस ने कहा कि राहत शिविरों में जगह भर गई थी और BPBD, सामाजिक सेवा विभाग, पुलिस तथा सेना आश्रय के लिए अतिरिक्त स्थानों का इंतजाम करेंगे।
राहत शिविरों में रह रहे लोगों की संख्या आग से प्रभावित लोगों की संख्या से अलग है। कई निवासी दक्षिण बांग्का में अन्य जगहों पर रिश्तेदारों के यहां ठहरे, जबकि कुछ पालेंबांग लौट गए। राहत शिविर में न सोने के बावजूद इन परिवारों को नुकसान हुआ था।
पहले की रिपोर्टों में SDN 7 की कक्षाओं के भीतर करीब 60 लोगों के होने की जानकारी थी। यह आंकड़ा कक्षाओं में मौजूद लोगों का था, जरूरी नहीं कि स्कूल परिसर या टेंट में रहने वाले सभी लोगों का। इसलिए इसकी तुलना स्कूल के राहत शिविर में बाद में दर्ज 300 लोगों से सीधे नहीं की जानी चाहिए।
प्रांतीय सरकार और सामाजिक सेवा विभाग ने शनिवार रात सामुदायिक रसोई और राहत टेंट लगाए। जिला अधिकारियों ने कक्षाओं में ठहरे लोगों को नाश्ता भी बांटा और आगे सामुदायिक भोजन पकाने के इंतजाम किए। पुलिस ने अपनी सार्वजनिक रसोई शुरू करने की योजना की घोषणा की। ये आपातकालीन प्रतिक्रिया के अलग-अलग हिस्से थे, न कि इस बात का प्रमाण कि सभी प्रस्तावित रसोई पहले से चल रही थीं।
आपातकालीन सहायता केंद्र तक भोजन, पानी और कपड़े पहुंचे
दक्षिण बांग्का के रीजेंट रिजा हेरदाविद प्रभावित निवासियों से मिले और कहा कि जिला उनकी जरूरतों और सरकार की क्षमता के अनुसार मदद देगा। पहले से बांटी जा रही सहायता में भोजन, साफ पानी और इस्तेमाल लायक कपड़े शामिल थे। जिला प्रशासन की बताई अन्य आपातकालीन सामग्री में दवाइयां, गद्दे, बिस्तर और सामुदायिक रसोई की सुविधाएं थीं।
उप-रीजेंट देब्बी वीटा देवी ने कहा कि प्रतिक्रिया में अग्निशमन, स्वास्थ्य सेवाएं और रसद शामिल थीं। वह और कई विभागाध्यक्ष शनिवार रात से घटनास्थल पर थे। उन्होंने निवासियों से शांत रहने और कर्मियों के निर्देश मानने को कहा, ताकि आपातकालीन काम और राहत वितरण व्यवस्थित रूप से हो सके।
BPBD के राहत सामग्री संग्रह केंद्र के मुताबिक वहां मिनरल वाटर की 231 पेटियां, अंडों की 90 ट्रे, कपड़ों के 79 पैकेट, मास्क के 150 डिब्बे और दस्तानों के 10 डिब्बे मिले। सूची में 242 बोरियां भी दर्ज थीं, लेकिन उनमें क्या था यह नहीं बताया गया। एजेंसी ने भोजन, कपड़े, दवाइयां, बच्चों की जरूरी सामग्री और महिलाओं के काम आने वाली चीजों के और दान की अपील की।
पुलिस की प्रतिक्रिया में 170 संयुक्त कर्मी शामिल थे, जिन्हें प्रांतीय पुलिस का सहयोग मिला। दक्षिण बांग्का के पुलिस प्रमुख अगुस आरिफ विजयांतो ने बताया कि दलों में परामर्श कर्मी, सामुदायिक पुलिस अधिकारी, चिकित्सा कर्मचारी और फॉरेंसिक पहचान अधिकारी शामिल थे। उनके काम में विस्थापित परिवारों की मदद से लेकर आग की जगह पर सहायता देना तक शामिल था।
डॉक्टरों ने झुलसने और आंखों में जलन का इलाज किया
क्रियोपंतिंग पायूंग क्षेत्रीय सामान्य अस्पताल के निदेशक हिमावन सेतियांतो ने बताया कि स्वास्थ्य प्रतिक्रिया में सिम्पांग रिम्बा, पुलाउ बेसार और पायूंग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल थे। चिकित्सा कर्मचारी बारी-बारी से काम कर रहे थे। प्रभावित निवासियों के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र और दवाइयों का इंतजाम किया गया था।
उनके अपडेट के समय तक कर्मचारियों ने झुलसने और आंखों में जलन की शिकायतों का इलाज किया था। उन्होंने कहा कि दूसरी बीमारियों के लक्षण नहीं मिले थे। तीव्र श्वसन संक्रमण और दस्त के खतरे पर नजर रखी जा रही थी, लेकिन उनके फैलने की पुष्टि नहीं हुई थी। क्षतिग्रस्त बस्ती के आसपास धुआं, राख और जलने से बचा अवशेष अब भी चिंता का विषय थे।
हिमावन ने निवासियों से जले हुए इलाके के पास मास्क पहनने की अपील की और राहत शिविरों में साफ पानी तुरंत पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों पर खास ध्यान देना होगा। विस्थापन के दौरान पानी पीने के साथ-साथ साफ-सफाई के लिए भी जरूरी था।
मौत न होने की बार-बार दी गई जानकारी से चोटों और लगातार बनी स्वास्थ्य जरूरतों की अहमियत कम नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों ने घायलों की पूरी संख्या जारी नहीं की थी और परिवारों के घरों से दूर रहने के दौरान चिकित्सा सहायता जारी थी।
पढ़ाई और बिजली के लिए अलग इंतजाम जरूरी थे
दक्षिण बांग्का के शिक्षा प्रमुख अंसोरी ने कहा कि प्रभावित बच्चों को सीधे छुट्टी पर नहीं भेजा जाएगा। शिक्षा विभाग छात्रों की संख्या गिन रहा था और उनकी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई का इंतजाम कर रहा था। विकल्पों में आधिकारिक वर्दी के बिना स्कूल आने की अनुमति देना और बच्चों के स्कूल न पहुंच पाने पर शिक्षकों को राहत केंद्रों तक भेजना शामिल था।
विभाग ने उन बच्चों के लिए स्कूल की सामग्री का भी इंतजाम किया था जिनका सामान आग में खो गया था। प्रभावित छात्रों की संख्या की घोषणा अभी नहीं हुई थी। अंसोरी ने कहा कि समुदाय और स्कूलों की स्थिति के अनुसार इंतजाम बदले जाएंगे।
बिजली कंपनी PLN ने घटना की शुरुआत से ही नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए कर्मियों को भेजा। PLN की बांग्का बेलितुंग क्षेत्रीय इकाई की महाप्रबंधक इरा सावित्री ने कहा कि आपूर्ति चरणों में बहाल करने से पहले दलों ने क्षतिग्रस्त उपकरणों की जांच की। निवासियों से खुले या लटकते तारों से दूर रहने और खुद बिजली की मरम्मत न करने को कहा गया। खतरे की सूचना PLN Mobile या PLN 123 संपर्क केंद्र के जरिए दी जा सकती थी।
बिजली सेवा को लेकर समय और जगह के अनुसार जानकारी अलग-अलग थी। बुदी ने शनिवार रात बिजली गुल होने और संचार सिग्नल काम न करने की बात कही, जबकि रिजा ने बाद में बताया कि आग लगने के कई घंटे बाद भी प्रभावित निवासी PLN की बिजली इस्तेमाल कर सकते थे। इनमें से कोई भी बयान यह साबित नहीं करता कि पूरे सेरडांग में बिजली बिना रुकावट जारी रही। प्रांतीय विधानसभा के अध्यक्ष दिदित श्री गुजाया ने भी बिजली कर्मचारियों की प्रतिक्रिया की सराहना की।
पुनर्निर्माण योजनाओं में जमीन और बाढ़ के खतरे पर ध्यान जरूरी
दक्षिण बांग्का के आवास और बस्ती क्षेत्र विभाग की कार्यवाहक प्रमुख वीरा द्वि सेता ने कहा कि जिन घरों को गंभीर नुकसान हुआ है, उन्हें नए सिरे से बनाने का प्रस्ताव दिया जाएगा। उनके विभाग की प्रारंभिक गिनती में 305 प्रभावित घर थे, जो BPBD के शाम के ताज़ा आंकड़े से मेल खाती थी। हालांकि आकलन अभी जारी था।
निर्माण से पहले अधिकारी घरों और जमीन, दोनों की प्रशासनिक स्थिति की जांच करने की योजना बना रहे थे। विभाग गांव सरकार के साथ मिलकर मालिकाना रिकॉर्ड और पुनर्वास के लिए गांव की जमीन के संभावित इस्तेमाल की जांच कर रहा था। नए घर मौजूदा इलाके में या किसी दूसरी जगह बनाए जा सकते थे।
पुनर्वास पर विचार इसलिए हो रहा था क्योंकि गांव सरकार ने सेरडांग के कुछ हिस्सों को बाढ़ की आशंका वाला बताया था। इसलिए पुनर्वास के फैसले में आग से नष्ट हुए घरों को बदलने से आगे की बातें भी शामिल हैं। अधिकारियों को यह भी तय करना है कि क्या निवासियों के लौटने के लिए वही जगहें उपयुक्त हैं।
वीरा ने कहा कि आवास प्रस्ताव एक अलग प्रक्रिया के तहत तैयार होगा और इसके लिए आपदा स्थिति की औपचारिक घोषणा जरूरी होगी। इसे अन्य आवास कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाएगा। निर्माण की समय-सीमा, पुनर्वास की पुष्टि की गई जगह, स्वीकृत आवास बजट या लाभार्थियों की अंतिम सूची की घोषणा नहीं हुई थी।
व्यापक नुकसान का आकलन भी पूरा नहीं हुआ था। BPBD ने स्विफ्टलेट पक्षियों के 50 प्रभावित भवन दर्ज किए। इन इमारतों में उन पक्षियों को रखा जाता है जिनके घोंसले काटे जाते हैं। सार्वजनिक सुविधाओं को हुए नुकसान की गिनती जारी थी। 2 अरब रुपये का अनुमान अस्थायी था और इसके साथ विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया था।
आग लगने के कारण की जांच जारी
प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता अगुस सुगियारसो ने कहा कि संयुक्त पुलिस दल आग लगने के कारण की जांच कर रहा था और घटनास्थल का मुआयना करेगा। अधिकारियों ने लगातार बताया कि आग पास की जमीन से फैली, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि जमीन में आग किसने लगाई या इसके लिए कोई जिम्मेदार था भी या नहीं।
कुछ रिपोर्टों में जमीन जलने की बात कही गई, जबकि दूसरी रिपोर्टों में पीटलैंड में लगी आग का जिक्र था। पुलिस प्रमुख अगुस आरिफ विजयांतो ने सूखे मौसम में निवासियों को जमीन साफ करने के लिए आग न लगाने की चेतावनी दी और आग के किसी भी नए स्थान की तुरंत सूचना देने की अपील की। यह रोकथाम का संदेश था, न कि इस घटना के लिए जानबूझकर जमीन साफ करने को जिम्मेदार ठहराने वाला निष्कर्ष।
अधिकारियों ने आगे नुकसान का सत्यापन करने, आग की जगह की जांच, निकासी के लिए अतिरिक्त जगह और आवास संबंधी दस्तावेज तैयार करने की बात कही। हताहतों और संपत्ति के नुकसान की अंतिम सूची, जांच के नतीजे या पुनर्निर्माण सहायता की मंजूरी के लिए कोई समय-सीमा नहीं दी गई। जिला विधायक दियान सेरसानावती ने भी घटनास्थल पर निवासियों की मदद करते हुए आपातकाल के दौरान सरकारी सहायता की मांग की थी।
मुख्य बातें
- 10 अक्टूबर को लगी आग पास की जमीन से फैलकर सेरडांग के मुख्यतः लकड़ी से बने रिहायशी घरों तक पहुंची।
- 11 अक्टूबर को 20:10 बजे के BPBD के ताज़ा अपडेट में 305 प्रभावित घर, 450 परिवार और 1,800 लोग दर्ज किए गए।
- पहले के आंकड़े 600 घरों और 2,400 लोगों तक पहुंचे थे। सभी आंकड़े अस्थायी थे।
- 8.3 हेक्टेयर क्षेत्र में अनुमानित नुकसान 2 अरब रुपये था। स्विफ्टलेट पक्षियों के 50 भवन भी प्रभावित हुए।
- अधिकारियों ने किसी की मौत की सूचना नहीं दी। चिकित्सा दलों ने झुलसने और आंखों में जलन का इलाज किया।
- SDN 7 और अल मुहाजिरीन मस्जिद में 500 लोगों के ठहरने का रिकॉर्ड था, जबकि कई अन्य रिश्तेदारों के यहां रहे।
- आग ठंडी करने, राहत बांटने, पढ़ाई के वैकल्पिक इंतजाम और बिजली सुरक्षा जांच का काम जारी रहा।
- आग लगने का कारण, नुकसान के अंतिम आंकड़े और पुनर्निर्माण या पुनर्वास की व्यवस्था तय नहीं हुई थी।






