रूपपुर ने पहली परमाणु क्रिटिकैलिटी हासिल की, लेकिन बांग्लादेश के ग्रिड को बिजली देने से पहले अभी और परीक्षण बाकी

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Rooppur Reaches First Nuclear Criticality, but Bangladesh Grid Supply Still Awaits Tests

दोपहर 3:34 बजे नियंत्रित अभिक्रिया शुरू

बांग्लादेश के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की 1,200 मेगावाट क्षमता वाली पहली इकाई में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो गई है। यह कमीशनिंग का एक बड़ा पड़ाव है, लेकिन अभी राष्ट्रीय ग्रिड को बिजली की आपूर्ति शुरू नहीं हुई है। संयंत्र प्रबंधन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह प्रक्रिया रविवार को दोपहर 3:34 बजे पाबना के ईश्वरदी स्थित रूपपुर में शुरू हुई।

विषय-सूची
  1. दोपहर 3:34 बजे नियंत्रित अभिक्रिया शुरू
  2. पहली क्रिटिकैलिटी का असल मतलब
  3. हर चरण के लिए अलग अनुमति
  4. वाल्व की मरम्मत से दूर हुई पिछली देरी
  5. अप्रैल में ईंधन भरने से अक्टूबर की क्रिटिकैलिटी तक
  6. बिजली धीरे-धीरे बढ़ेगी, एक साथ पूरी क्षमता तक नहीं
  7. नवंबर और दिसंबर के अनुमान अभी लक्ष्य हैं
  8. दो रिएक्टर, रूसी वित्तपोषण और परियोजना की लंबी अवधि
  9. परियोजना पूरी होने पर क्या हासिल होगा
  10. मुख्य बातें

न्यूक्लियर पावर प्लांट कंपनी बांग्लादेश लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एमडी जाहेदुल हसन ने इसकी पुष्टि की और कहा कि रिएक्टर के महत्वपूर्ण माप निर्धारित सीमाओं के भीतर रहे। संयंत्र में मौजूद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव एमडी अनवर हुसैन ने कहा कि माप अपेक्षित डिजाइन मानों के अनुरूप थे और प्रक्रिया नियंत्रित परिस्थितियों में आगे बढ़ी।

इस उपलब्धि को पहली क्रिटिकैलिटी कहा जाता है। यह वह अवस्था है जब रिएक्टर नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखता है। यह बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा नियामक प्राधिकरण की उस अनुमति के बाद हासिल हुई, जिसके तहत इकाई 1 को कमीशनिंग के B-1 चरण से B-2 चरण में ले जाया गया। मौके पर रूसी विशेषज्ञ, बांग्लादेशी इंजीनियर और वैज्ञानिक तथा नियामक विशेषज्ञ मौजूद थे।

दो विवरणों में रविवार की इस उपलब्धि की तारीख 11 अक्टूबर बताई गई है, जबकि अधिक विस्तृत परिचालन विवरणों में दिन और सटीक समय का उल्लेख है, लेकिन कैलेंडर की तारीख नहीं दी गई। ग्रिड को बिजली देने की कोई पक्की तारीख तय नहीं हुई है। अनुमान 20 नवंबर से दिसंबर के आखिर तक के हैं। बांग्लादेश के अधिकारियों ने कहा है कि आगे की प्रगति परीक्षणों, प्रमाणपत्रों और नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगी।

पहली क्रिटिकैलिटी का असल मतलब

रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन से यूरेनियम के परमाणु टूटते हैं और गर्मी पैदा होती है। इस प्रक्रिया में न्यूट्रॉन भी निकलते हैं, जो दूसरे परमाणुओं का विखंडन करा सकते हैं। पहली क्रिटिकैलिटी पर रिएक्टर के नियंत्रण में यह श्रृंखला अभिक्रिया स्वयं चलने लगती है, शुरुआत में बहुत कम तापीय शक्ति पर।

इस संदर्भ में क्रिटिकैलिटी एक तकनीकी परिचालन अवस्था है, आपात स्थिति का वर्णन नहीं। यह पड़ाव स्थापित करता है कि रिएक्टर भविष्य में बिजली बनाने के लिए जरूरी अभिक्रिया को बनाए रख सकता है। इससे यह साबित नहीं होता कि पूरा संयंत्र अपनी निर्धारित क्षमता पर चलने के लिए तैयार है।

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अगले चरणों में परमाणु प्रक्रिया को बिजली बनाने वाले उपकरणों से जोड़ा जाएगा। रिएक्टर की गर्मी से भाप बनाई जाएगी, जो जनरेटर से जुड़ी टरबाइन को चलाएगी। ग्रिड को बिजली देने से पहले इस पूरी प्रक्रिया के हर हिस्से की जांच जरूरी है।

ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन एक अलग चरण है। इसमें जरूरी परिचालन स्थितियों के तहत जनरेटर को राष्ट्रीय बिजली प्रणाली से जोड़ा जाता है। इसलिए परमाणु अभिक्रिया शुरू करना, बिजली बनाना और उस बिजली को ग्रिड तक पहुंचाना अलग-अलग पड़ाव हैं। रूपपुर ने इनमें से पहला पड़ाव हासिल किया है; आगे के चरणों के लिए परीक्षण और मंजूरी अभी बाकी हैं।

हर चरण के लिए अलग अनुमति

बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा नियामक प्राधिकरण ने पहले के परीक्षणों की समीक्षा के बाद गुरुवार को B-2 कमीशनिंग लाइसेंस मंजूर किया। बताया गया है कि मंजूरी के दस्तावेज उसी शाम बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा आयोग को सौंपे गए। नियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष एमडी महमूदुल हसन ने कहा कि ईंधन भरने और सफल परीक्षणों के बाद B-1 चरण पूरा हुआ था।

B-2 की अनुमति से इकाई 1 में नियंत्रित विखंडन अभिक्रिया शुरू हो सकी। इससे परिचालन के सभी अगले चरणों की मंजूरी नहीं मिलती। हसन ने कहा कि B-2 के दौरान परीक्षण जारी रहेंगे और इकाई को ग्रिड तक बिजली पहुंचाने के चरण में ले जाने से पहले अलग-अलग C और D लाइसेंस लेने होंगे।

हुसैन ने कहा कि बाकी काम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुरक्षा दिशानिर्देशों और नियामक की शर्तों के अनुरूप पूरा करना होगा। बिजली उत्पादन और ग्रिड से जुड़ने के चरण में जाने से पहले जरूरी प्रमाणपत्र और मंजूरियां हासिल करनी होंगी।

इस क्रम में फैसले का आधार सिर्फ लक्ष्य तारीख नहीं, बल्कि परीक्षणों के नतीजे होंगे। पहली क्रिटिकैलिटी पर निर्धारित सीमा में रहे माप शुरुआती चरण की सफलता का प्रमाण हैं। लेकिन वे रिएक्टर के व्यवहार, नियंत्रण उपकरणों, सुरक्षा प्रणालियों और बिजली बनाने वाले उपकरणों की आगे की जांचों की जगह नहीं लेते।

वाल्व की मरम्मत से दूर हुई पिछली देरी

सुरक्षा वाल्वों से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण कमीशनिंग में दो महीने से अधिक की देरी हुई थी। खामी दूर करने के लिए रूसी विशेषज्ञ रूपपुर आए थे। एक विवरण के मुताबिक, मरम्मत 30 सितंबर को पूरी हुई। नियामक की अनुमति मिलने से पहले स्वचालित दबाव राहत वाल्व उपकरणों के सफल परीक्षण किए गए।

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रिपोर्टों में वाल्वों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी है। एक विस्तृत विवरण में महत्वपूर्ण उपकरण के एक सुरक्षा वाल्व की खराबी का जिक्र है, जबकि दूसरे में कहा गया है कि कमीशनिंग के दौरान दो सुरक्षा वाल्व ठीक से काम नहीं कर रहे थे। दोनों विवरणों में रूसी तकनीकी सहायता और B-2 लाइसेंस जारी होने से पहले सफल परीक्षणों की बात कही गई है।

दबाव राहत वाल्व जरूरत पड़ने पर दबाव छोड़कर उसे नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनका सही ढंग से काम करना संयंत्र की सुरक्षा जांचों का हिस्सा है। मरम्मत और उसके बाद हुए परीक्षण बताते हैं कि सितंबर तक नियोजित चरण हासिल करने की पिछली उम्मीद क्यों पूरी नहीं हुई।

परीक्षणों के बाद मिली अनुमति से पहली क्रिटिकैलिटी की तत्काल बाधा दूर हुई। हालांकि, इससे कमीशनिंग का बाकी काम खत्म नहीं हुआ। अभिक्रिया के परीक्षण के दौरान संयंत्र अधिकारी रिएक्टर के माप, सुरक्षा प्रणालियों और नियंत्रण उपकरणों पर नजर रख रहे हैं।

अप्रैल में ईंधन भरने से अक्टूबर की क्रिटिकैलिटी तक

पहली अभिक्रिया महीनों की तैयारी के बाद शुरू हुई, न कि एक ही बार में किए गए स्टार्टअप से। ईंधन भरने का काम अप्रैल में शुरू हुआ था। सबसे विस्तृत विवरण में इसकी शुरुआत की तारीख 28 अप्रैल बताई गई है। 9 अक्टूबर तक संयंत्र प्रबंधन ने कहा था कि 300 से अधिक परीक्षण पूरे हो चुके हैं और ईंधन भरने का काम खत्म हो गया है।

उपलब्ध विवरणों से पता चलता है कि वाल्व की समस्या ने तैयारी में किस तरह बाधा डाली और उसके समाधान के बाद नियामक की मंजूरी मिली:

  • 28 अप्रैल: विस्तृत लाइसेंसिंग विवरण के अनुसार, इकाई 1 में ईंधन भरना शुरू हुआ।
  • 30 सितंबर: एक परिचालन विवरण के अनुसार, रूसी विशेषज्ञों ने सुरक्षा वाल्वों की मरम्मत पूरी की।
  • 9 अक्टूबर: संयंत्र प्रबंधन ने कहा कि ईंधन भरना और 300 से अधिक परीक्षण पूरे हो चुके हैं।
  • पहली क्रिटिकैलिटी से पहले वाले गुरुवार को: नियामक ने B-2 चरण में जाने और विखंडन शुरू करने की अनुमति दी।
  • रविवार को दोपहर 3:34 बजे: इकाई 1 में पहली नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हुई। दो विवरणों में तारीख 11 अक्टूबर बताई गई है।

अधिकारियों ने कहा कि अभिक्रिया की स्थिरता जांचने में कई दिन लगेंगे। परियोजना अधिकारियों ने यह भी अनुमान लगाया कि पहली क्रिटिकैलिटी समेत कमीशनिंग चरण में 30 से 40 दिन लग सकते हैं। यह अनुमान मौजूदा परीक्षण चरण का है, नियमित परिचालन के लिए जरूरी सभी परीक्षणों के पूरा होने का नहीं।

बिजली धीरे-धीरे बढ़ेगी, एक साथ पूरी क्षमता तक नहीं

रूपपुर की पहली इकाई की निर्धारित विद्युत क्षमता 1,200 मेगावाट है, लेकिन शुरुआती परिचालन योजना में इससे बहुत कम बिजली उत्पादन की बात है। एक विवरण में शुरुआत में 300 मेगावाट की आपूर्ति का अनुमान है। यह इकाई की निर्धारित क्षमता का 25% होगा, पूरी क्षमता नहीं।

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एक अन्य परिचालन विवरण के अनुसार, बिजली उत्पादन क्षमता के लगभग 3% से शुरू होकर ग्रिड को बिजली देने से पहले 20% से 30% तक बढ़ेगा। इकाई की 1,200 मेगावाट क्षमता के हिसाब से ये आंकड़े शुरुआत में लगभग 36 मेगावाट और बाद के चरण में 240 से 360 मेगावाट के बराबर हैं। 300 मेगावाट का अलग से बताया गया अनुमान इसी बाद वाली सीमा में आता है।

संयंत्र प्रबंधन ने रिएक्टर की शक्ति को क्रमशः 37% तक बढ़ाने की योजना का भी जिक्र किया है। यह आंकड़ा रिएक्टर की शक्ति बढ़ाने से जुड़ा है, इसे सीधे विद्युत उत्पादन का आंकड़ा नहीं मानना चाहिए। तापीय शक्ति यानी रिएक्टर से पैदा होने वाली गर्मी और जनरेटर से मिलने वाली विद्युत शक्ति अलग-अलग माप हैं।

ग्रिड से जुड़ने के बाद, अलग-अलग उत्पादन स्तरों पर प्रायोगिक परिचालन सात से आठ महीने तक जारी रह सकता है। विवरणों में इस अवधि की शुरुआत को लेकर थोड़ा अंतर है: कुछ में इसे प्रायोगिक उत्पादन शुरू होने से जोड़ा गया है, तो कुछ में ग्रिड कनेक्शन से। किसी भी विवरण में पहली बार बिजली देने को पूरी क्षमता पर नियमित परिचालन की तत्काल शुरुआत नहीं बताया गया है।

नवंबर और दिसंबर के अनुमान अभी लक्ष्य हैं

रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलेक्सी लिखाचेव ने नवंबर की समय-सीमा का अनुमान दिया है। एक विवरण के मुताबिक, यह लक्ष्य नवंबर के आखिर के आसपास का है। उन्होंने यह बात 9 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम के साथ बैठक में कही थी।

संभावित समय के बारे में लिखाचेव ने कहा:

हम नवंबर के आखिर के आसपास का लक्ष्य रख रहे हैं।

एक अलग विवरण में उसी मंत्री के साथ मॉस्को में हुई बैठक का जिक्र है और लिखाचेव के हवाले से 20 नवंबर से नवंबर के आखिर तक बिजली उत्पादन का अनुमान दिया गया है। एक अन्य विवरण कहता है कि मॉस्को की बैठक शुक्रवार को हुई थी और उसमें जल्द से जल्द ग्रिड को प्रायोगिक बिजली देने का आश्वासन दर्ज किया गया। इस तरह रिपोर्टों में बयानों की जगह और संदर्भ को लेकर, साथ ही यह अनुमान उत्पादन का है या ग्रिड कनेक्शन का, अंतर है।

बांग्लादेश की ओर से परियोजना अधिकारियों ने B-2 की मंजूरी के बाद दिसंबर के आखिर में ग्रिड को प्रायोगिक बिजली देने की उम्मीद जताई। नियामक अध्यक्ष हसन ने कहा कि सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे होने पर साल के अंत तक आपूर्ति शुरू हो सकती है। मंत्रालय के एक अनाम अधिकारी ने उत्पादन के लिए 20 नवंबर की संभावित तारीख बताई।

हालांकि, हुसैन ने ग्रिड को बिजली देने की तारीख की पुष्टि नहीं की। इसलिए इन अनुमानों को सफल कमीशनिंग पर निर्भर लक्ष्य माना जाना चाहिए, तय आपूर्ति कार्यक्रम नहीं। इन विवरणों में C और D लाइसेंस जारी करने की कोई विशिष्ट तारीख घोषित नहीं की गई है।

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दो रिएक्टर, रूसी वित्तपोषण और परियोजना की लंबी अवधि

रूपपुर का निर्माण रूसी तकनीकी और वित्तीय सहयोग से ईश्वरदी में पद्मा नदी के किनारे किया जा रहा है। इसमें दो VVER-1200 रिएक्टर हैं, जिनमें से प्रत्येक की विद्युत क्षमता 1,200 मेगावाट निर्धारित है। दोनों की कुल नियोजित क्षमता 2,400 मेगावाट है। रोसाटॉम की सहायक कंपनी एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट इन रिएक्टरों का निर्माण कर रही है।

रूस उपकरण, परमाणु ईंधन और इंजीनियरिंग सहायता दे रहा है। एक विवरण में रूसी सरकारी ऋण 11.9 अरब अमेरिकी डॉलर बताए गए हैं, जबकि परियोजना की अनुमानित लागत 12.8 अरब डॉलर तक है। इन आंकड़ों के आधार पर ऋण अनुमानित लागत का करीब 93% है। अन्य विवरणों में परियोजना की लागत लगभग 13 अरब डॉलर बताई गई है।

परियोजना की मौजूदा लागत का अनुमान बांग्लादेशी मुद्रा में 1,38,686 करोड़ टका, यानी करीब 1.387 ट्रिलियन टका है। लागत में लगभग 26,000 करोड़ टका, यानी 260 अरब टका की बढ़ोतरी का कारण डॉलर की विनिमय दर में वृद्धि बताया गया है। इस बढ़ोतरी का विवरण देने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदार के साथ हुआ समझौता परियोजना अवधि बढ़ने भर से लागत बढ़ाने की अनुमति नहीं देता।

परियोजना की मूल समय-सीमा दिसंबर 2025 थी। दो बार समय बढ़ाए जाने के बाद अब इसे जून 2028 तक कर दिया गया है, यानी 30 महीने की बढ़ोतरी। यह प्रशासनिक समय-सीमा पहली इकाई के ग्रिड से जुड़ने की संभावित तारीख से अलग है। इसे पहली बार बिजली आपूर्ति की तारीख का अनुमान नहीं माना जाना चाहिए।

परियोजना पूरी होने पर क्या हासिल होगा

नियोजित 2,400 मेगावाट क्षमता पर रूपपुर से बांग्लादेश की बिजली मांग का 12% तक पूरा होने की उम्मीद है। यह पूरे संयंत्र के पूरा होने का अनुमान है, पहली क्रिटिकैलिटी या इकाई 1 से शुरुआती 300 मेगावाट आपूर्ति का योगदान नहीं।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है कि शुरुआती 300 मेगावाट का अनुमान इकाई 1 की क्षमता का एक चौथाई और दोनों इकाइयों की संयुक्त क्षमता का आठवां हिस्सा होगा। इन विवरणों में दूसरी इकाई के स्टार्टअप का कार्यक्रम नहीं दिया गया है, इसलिए इकाई 1 की प्रगति को पूरे स्टेशन की पक्की समय-सारणी नहीं माना जा सकता।

लिखाचेव ने यह भी कहा कि परियोजना के विस्तार पर चर्चा हुई है, लेकिन अंतिम फैसला बांग्लादेश की सरकार और जनता का होगा। विस्तार की कोई मंजूर योजना, अतिरिक्त क्षमता का आंकड़ा या निर्णय की समय-सीमा नहीं बताई गई।

फिलहाल तात्कालिक काम सीमित है: रिएक्टर के स्थिर व्यवहार की पुष्टि करना, बाकी परीक्षण पूरे करना, अगले लाइसेंस लेना और जनरेटर को ग्रिड से जोड़ने की तैयारी करना। पहली क्रिटिकैलिटी बांग्लादेश में परमाणु बिजली उत्पादन की दिशा में ठोस प्रगति है, लेकिन पहली आपूर्ति का समय और मात्रा अब भी इन चरणों पर निर्भर है।

मुख्य बातें

  • रूपपुर की इकाई 1 में रविवार को दोपहर 3:34 बजे पहली नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हुई।
  • अधिकारियों के अनुसार रिएक्टर के माप निर्धारित सीमाओं के भीतर रहे। बिजली की आपूर्ति अभी शुरू नहीं हुई है।
  • B-2 लाइसेंस मौजूदा कमीशनिंग चरण की अनुमति देता है। C और D के लिए अलग मंजूरियां अभी बाकी हैं।
  • सुरक्षा वाल्वों की खराबी के कारण मरम्मत और सफल परीक्षणों से पहले कमीशनिंग में दो महीने से अधिक की देरी हुई।
  • बिजली उत्पादन और ग्रिड आपूर्ति के अनुमान 20 नवंबर से दिसंबर के आखिर तक हैं; ग्रिड कनेक्शन की कोई तारीख पक्की नहीं है।
  • अलग-अलग उत्पादन स्तरों पर प्रायोगिक परिचालन सात से आठ महीने तक जारी रह सकता है।
  • दोनों नियोजित इकाइयों की कुल क्षमता 2,400 मेगावाट है। परियोजना की समय-सीमा अब जून 2028 तक है और मौजूदा लागत का अनुमान 1,38,686 करोड़ टका है।
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