मलबे को निकालना तलाश का अहम हिस्सा बना
इंडोनेशिया में Virgo Transport 8 नौका हादसे में 82 लोगों की मौत हुई है और 53 अब भी लापता हैं। बचावकर्मी मलबे को निकालने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उसके भीतर तलाश फिर शुरू की जा सके। बचाव अभियान का ताजा दिनांकित अपडेट 7 अक्टूबर, 2026 का है। इसके अनुसार, 13 सितंबर को जावा सागर में नौका के पलटने के समय उसमें सवार 243 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से 108 जीवित बच गए थे।
विषय-सूची
- मलबे को निकालना तलाश का अहम हिस्सा बना
- हादसे और तलाश का घटनाक्रम
- जीवित बचे लोगों ने अंधेरे और चेतावनी न मिलने की बात कही
- बड़ा बचाव अभियान और तट पर इंतजार करते परिवार
- मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े क्यों बदले
- गोताखोरों ने पीड़ितों के शव निकाले, लेकिन खतरे बढ़ते गए
- मलबा निकालने की योजना है, लेकिन शुरुआत की पुष्टि नहीं
- पुलिस कप्तान और कंपनी की भूमिका की जांच कर रही है
- जहाज और उसकी स्थिति के बारे में क्या पता है
- मुख्य बिंदु
पुलिस ने लापरवाही और हादसे में कथित संलिप्तता के आरोप में कप्तान और संचालक PT Virgo Karya Shipping के तीन प्रतिनिधियों को हिरासत में लिया है। 8 अक्टूबर के एक बयान में उनकी हिरासत की घोषणा की गई। कंपनी अक्टूबर में प्रस्तावित मलबा निकालने के अभियान की तैयारी कर रही थी। अभियान पूरा होने या हादसे के कारण पर कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है।
नौका इंडोनेशियाई बोर्नियो के पूर्वी कालीमंतान के सुरबाया से दक्षिण कालीमंतान के बंजारमासिन जा रही थी। शुरुआती खबरों में खराब मौसम, नौका के अचानक झुकने और अंधेरे में यात्रियों के बाहर निकलने का जिक्र था। शुरुआती आंकड़े में छह मौतें और करीब 129 लोगों के लापता होने की बात थी। हफ्तों तक चली तलाश, शवों की बरामदगी और पहचान की प्रक्रिया के दौरान ये आंकड़े बदलते रहे।
21 दिन के अभियान के बाद 3 अक्टूबर को पानी के भीतर तलाशी रोक दी गई। बचाव अधिकारियों ने अस्थिर मलबे के भीतर मौजूद खतरों और शवों की बिगड़ती हालत का हवाला दिया। दक्षिण, मध्य और पश्चिम कालीमंतान में समुद्र की सतह और तटरेखाओं पर तलाश जारी रही।
बंजारमासिन के क्लास ए खोज और बचाव कार्यालय के प्रमुख इ पुतु सुदायना ने बताया कि नौका के भीतर अब भी मौजूद लोगों तक पहुंचने में टीमों को किस बाधा का सामना करना पड़ रहा है।
"गोताखोरी के प्रयास रोक दिए गए हैं। हम अब भी जहाज को निकालने का इंतजार कर रहे हैं," उन्होंने कहा।
परिवारों के लिए यह फर्क अहम है: गोताखोरी रोकने का मतलब तलाश खत्म होना नहीं था, लेकिन नौका के भीतर पहुंच अब मालिक, बीमा कंपनियों और मलबा निकालने वाले ठेकेदार से जुड़े एक अलग अभियान पर निर्भर थी।
हादसे और तलाश का घटनाक्रम
नौका 12 सितंबर को सुरबाया से रवाना हुई थी और अगले दिन दोपहर तक बंजारमासिन पहुंचने की उम्मीद थी। रवाना होने के समय को लेकर खबरें अलग-अलग हैं: समुद्री निगरानी की जानकारी के मुताबिक यह पश्चिमी इंडोनेशियाई समयानुसार सुबह 10:33 बजे रवाना हुई, बाद की एक खबर में समय सुबह 6:52 बजे बताया गया, जबकि जीवित बचे फाइसाल ने करीब सुबह 10 बजे रवाना होने की बात कही। इन बयानों में सामंजस्य नहीं बैठाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि 13 सितंबर को मध्य इंडोनेशियाई समयानुसार करीब रात 2 बजे मासालेम्बो के पास संपर्क टूट गया था। एक अन्य शुरुआती खबर में आखिरी ज्ञात स्थिति बंजारमासिन से करीब 150 किलोमीटर दक्षिण में बताई गई और कहा गया कि अधिकारियों को सुबह 4:10 बजे संकट की पहली सूचना मिली। जीवित बचे लोगों के अनुमान के मुताबिक नौका करीब रात 12:15 बजे से 1 बजे के बीच पलटने लगी थी।
- 12 सितंबर: Virgo Transport 8 सुरबाया से बंजारमासिन के लिए रवाना हुई।
- 13 सितंबर: नौका जावा सागर में पलट गई। शुरुआती अपडेट में छह मौतें और 100 से अधिक लोगों के बचने की खबर थी।
- 24 सितंबर: Basarnas ने 108 लोगों के जीवित बचने, 42 मौतों और 93 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी।
- 25 सितंबर: पुलिस ने कप्तान अरिएफ युनियांतो को हिरासत में लिया।
- 2 अक्टूबर: मृतकों की संख्या 80 बताई गई; 108 लोग जीवित बचे थे और 55 लापता थे।
- 3 अक्टूबर: Basarnas ने 21 दिन बाद पानी के भीतर तलाश रोक दी; संचालक ने अक्टूबर में मलबा निकालने की योजना घोषित की।
- 4 अक्टूबर: पुलिस ने कंपनी के तीन प्रतिनिधियों को हिरासत में लिया।
- 6 और 7 अक्टूबर: बचाव अपडेट में 82 मौतें, 108 लोगों के बचने और 53 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई।
- 8 अक्टूबर: पुलिस ने चारों संदिग्धों और उन पर लागू कानूनी धाराओं का सार्वजनिक रूप से ब्यौरा दिया।
इन तारीखों से पता चलता है कि अभियान समुद्र में लोगों को बचाने से बदलकर पीड़ितों के शव बरामद करने और उनकी पहचान करने पर केंद्रित हो गया, जबकि इसके साथ ही आपराधिक जांच भी आगे बढ़ी।
जीवित बचे लोगों ने अंधेरे और चेतावनी न मिलने की बात कही
कई जीवित बचे लोगों ने बताया कि जब ज्यादातर यात्री सो रहे थे, तब नौका तेजी से झुकने लगी। 26 वर्षीय फाइसाल मध्य कालीमंतान में ताड़ के तेल के बागान में काम करने जा रहे थे। उन्होंने याद किया कि ऐशट्रे गिरा, कुर्सियां उलट गईं और नौका के निचले बाएं हिस्से से तेज आवाज आई। इसके बाद नौका और ज्यादा झुकने लगी।
फाइसाल के मुताबिक संकट मध्य इंडोनेशियाई समयानुसार रात करीब 12:15 बजे शुरू हुआ। उन्होंने लाइफ जैकेट पकड़ी और नौका के ऊंचे हिस्से पर टिके रहे, जबकि लोग पानी में मौजूद नौकाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को बात करते समय उनके 16 दोस्तों में से 11 को बचा लिया गया था और पांच लापता थे।
पालंगकाराया के ट्रक चालक आगुस ने कहा कि सोने के कमरे में रहते हुए एक अन्य चालक ने उन्हें सतर्क किया। लाइफबोट की ओर भागने से पहले उन्होंने जो सुना, उसे बताते हुए कहा:
"जब मेरी आंख खुली, तो कोई घोषणा नहीं हुई थी। मैंने सिर्फ अपने दोस्तों से सुना कि जहाज झुक रहा है," उन्होंने कहा।
ट्रक चालक आरी ने भी कहा कि उन्होंने कोई अलार्म नहीं सुना। चालक दल के सदस्य अकमल को जहाज का हॉर्न सिर्फ एक बार सुनाई दिया, उससे पहले कोई चेतावनी नहीं मिली। अकमल ने बताया कि लाइफ जैकेट पहनकर वह चार अन्य लोगों के साथ 12 किलोग्राम के LPG सिलिंडर को पकड़े समुद्र में 10 घंटे तक रहे, जिसके बाद कोयला ढोने वाली एक टगबोट ने उन्हें बचाया।
ये बयान यात्रियों के अनुभव बताते हैं, हादसे का अंतिम कारण नहीं। Basarnas प्रमुख मोहम्मद स्याफिई ने कहा कि जीवित बचे लोगों की गवाही राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा समिति को दी जाएगी। KNKT के नाम से जानी जाने वाली यह समिति हादसे के कारण की जांच और सुरक्षा संबंधी सिफारिशें करने के लिए जिम्मेदार है। Basarnas ने इस जांच को पीड़ितों को खोजने और निकालने की अपनी जिम्मेदारी से अलग बताया।
बड़ा बचाव अभियान और तट पर इंतजार करते परिवार
शुरुआती तलाश में करीब 280 कर्मी, जहाज, एक हेलिकॉप्टर और Basarnas, नौसेना तथा समुद्री पुलिस के संयुक्त कार्यबल को लगाया गया था। बाद के एक अपडेट में पांच विमान और 17 जहाजों का जिक्र था, जिनमें नौसेना के युद्धपोत भी शामिल थे। जावा सागर में मौजूद अन्य जहाजों से यात्रियों के कोई निशान मिलने पर सूचना देने को कहा गया था।
स्याफिई ने बताया कि तलाश क्षेत्र को छह हिस्सों में बांटा गया था और टीमों ने पहले समुद्र में तैर रहे लोगों पर ध्यान केंद्रित किया। पता लगाए गए मलबे के आसपास गोताखोरों और पानी के भीतर काम करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल भी प्रस्तावित था।
शुरुआती तलाश की प्राथमिकताओं के बारे में स्याफिई ने कहा:
"हमने छह क्षेत्रों में बांटे गए हिस्सों में बचाव अभियान को पूरी क्षमता से चलाने का फैसला किया है। प्राथमिकता समुद्र में तैर रहे पीड़ितों की तलाश को दी जाएगी," उन्होंने कहा।
Basarnas के वीडियो में लोगों को नारंगी रंग की लाइफ राफ्ट से बचाकर दूसरे जहाज पर प्राथमिक उपचार देते हुए दिखाया गया। मालवाहक ट्रक चालक अहमद सुपांडी को MV Haida ने बचाया था। उनकी पत्नी मिसना को जब उनके सुरक्षित होने की खबर मिली, तो वह रो पड़ीं।
अन्य परिवारों को ऐसी पुष्टि नहीं मिली। रुस्मिलावती अपने आठ रिश्तेदारों की जानकारी लेने बंजारमासिन बंदरगाह पहुंचीं। वे जावा में इस्लामी विद्वानों की कब्रों पर जियारत करके लौट रहे थे। वहां जाने के लिए उन्होंने हवाई यात्रा की थी और वापसी के लिए नौका चुनी थी। सुरबाया के तंजुंग पेराक बंदरगाह पर फ्रेडी अपने छोटे भाई स्टीवी मनुहुआ की खबर पाने की कोशिश कर रहे थे। स्टीवी चालक दल के सदस्य थे और कीबोर्ड बजाकर यात्रियों का मनोरंजन करते थे।
मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े क्यों बदले
नवीनतम आंकड़ों में सूची में दर्ज सभी 243 लोगों का हिसाब शामिल है: 108 जीवित बचे, 82 की मौत हुई और 53 लापता हैं। लापता लोग नौका में सवार कुल संख्या के करीब 22 प्रतिशत हैं। शुरुआती अपडेट में सूची के अनुसार नौका पर 213 यात्री और चालक दल के 30 सदस्य बताए गए थे, हालांकि बाद की कुछ खबरों में पूरे समूह के लिए यात्री शब्द का इस्तेमाल हुआ।
शुरुआती खबरों के आंकड़े अलग-अलग थे। एक रिपोर्ट में छह मौतें, 107 लोगों के बचाव और 130 लोगों के लापता होने की जानकारी थी। पहली खबर में उद्धृत Basarnas के शुरुआती अपडेट में छह मौतें, 108 लोगों को निकालने और करीब 129 लोगों के लापता होने का जिक्र था। दोनों आंकड़ों का कुल जोड़ 243 है, लेकिन इनमें जीवित बचे लोगों और लापता लोगों की संख्या में एक-एक का अंतर है।
14 सितंबर को मध्य इंडोनेशियाई समयानुसार दोपहर 3:30 बजे Basarnas के एक अपडेट में एक और आंकड़ा दिया गया: 109 लोग जीवित बचे, छह की मौत हुई और 128 लापता थे। इसमें कहा गया कि 86 लोग त्रिसक्ति बंदरगाह पहुंचे थे, एक व्यक्ति स्यामसुदीन नूर वायुसेना अड्डे पहुंचा था और 28 लोगों को निकालने का काम जारी था। बाद के अपडेट में जीवित बचे लोगों की संख्या लगातार 108 बताई गई। इस अंतर की कोई वजह नहीं बताई गई।
शवों की बरामदगी और पहचान की प्रक्रिया में भी अलग-अलग आंकड़े शामिल हैं। 6 अक्टूबर तक दक्षिण कालीमंतान पुलिस की आपदा पीड़ित पहचान टीम को 80 शव बैग मिले थे। उनमें से 65 लोगों की पहचान हो चुकी थी और 15 के DNA मिलान का इंतजार था। ये आंकड़े पहचान के काम का ब्यौरा देते हैं, इन्हें बचाव एजेंसी के 82 मौतों के आंकड़े के बराबर नहीं मानना चाहिए।
सेरुयान के पानी में मिले दो पीड़ितों, पामेकासन के 40 वर्षीय सुरोसो और बान्युवांगी के 44 वर्षीय सोनी मार्ता अंडिका की पहचान चिकित्सकीय विशेषताओं और निजी सामान के जरिए की गई। इनके मिलान में परिवारों से मिली जानकारी की मदद ली गई। शव दफनाने के लिए परिवारों को सौंप दिए गए। अन्य शवों की पहचान के लिए DNA तुलना की जरूरत थी, जो तब पहचान स्थापित कर सकती है जब चेहरा देखकर या सामान के जरिए पहचान करना संभव न हो।
गोताखोरों ने पीड़ितों के शव निकाले, लेकिन खतरे बढ़ते गए
तलाश के 12वें दिन, 24 सितंबर को Basarnas ने बताया कि 150 लोग मिल चुके थे: 108 जीवित और 42 मृत। अभियान के निदेशक रियर एडमिरल युधि ब्रमांतो ने कहा कि 243 लोगों की सूची के हिसाब से करीब 93 लोग अब भी नौका के भीतर हो सकते हैं। यह लापता लोगों की संभावित स्थिति का अनुमान था, इस बात की पुष्टि नहीं कि सभी 93 मलबे में थे।
उस दिन गोताखोरी के तीन अभियानों में 14 पीड़ितों के शव निकाले गए: पहले अभियान में सात, दोपहर 12:13 बजे एक और दोपहर 3:05 बजे छह। डॉफिन हेलिकॉप्टर 3601 और 3604 ने शवों को बाहर निकाला। नौसेना के जहाज KRI Sultan Iskandar Muda पर मौजूद पैंथर HS 1311 ने भी सहायता की।
पानी के भीतर तलाश के चरण के आखिर तक Basarnas ने बताया कि गोताखोर 50 शव निकाल चुके थे। टीमें आम तौर पर दिन में चार या पांच बार गोता लगाती थीं और हर टीम में पांच सदस्य होते थे। नौका के भीतर मलबा खिसक सकता था या ढह सकता था, गाद के कारण दृश्यता कम थी और नुकीली वस्तुओं तथा तेल से अतिरिक्त खतरा था। अधिकारियों ने बताया कि स्कूबा से हर गोते में गहराई पर काम करने का समय 20 मिनट से कम रखना पड़ता था।
मलबे की गहराई को लेकर खबरें अलग-अलग हैं। एक रिपोर्ट में इसकी गहराई 24 मीटर बताई गई, जबकि दूसरी में कहा गया कि करीब 450 मीटर खिसकने के बाद यह 21 से 29 मीटर की गहराई में पहुंच गया। गोताखोरी की स्थितियों से जुड़ी एक खबर में 27 मीटर का भी जिक्र था। इन मापों में सामंजस्य नहीं बैठाया गया, लेकिन अधिकारियों ने लगातार बताया कि मलबे की स्थिति बदल रही थी और वह अस्थिर था।
Basarnas ने चेतावनी दी कि शवों को निकालने के प्रयास से उनकी हालत और बिगड़ सकती है। अक्टूबर की शुरुआत तक एजेंसी ने मौजूदा परिस्थितियों में पानी के भीतर शव निकालने के काम को अप्रभावी माना। इसके बाद तलाश समुद्र की सतह और तटरेखा पर केंद्रित रही, हालांकि अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन तक कोई नया शव या पीड़ित नहीं मिला।
मलबा निकालने की योजना है, लेकिन शुरुआत की पुष्टि नहीं
PT Virgo Karya Shipping ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय Protection and Indemnity बीमा कंपनियों से बातचीत के बाद अक्टूबर में मलबा निकालने की योजना है। P&I बीमा में आम तौर पर जहाज मालिक की देनदारियां, जिनमें कुछ दावे और मलबा हटाने का खर्च शामिल होता है, कवर होती हैं। इस मामले में बीमा कंपनियों के साथ तालमेल और ठेकेदार नियुक्त करना तैयारी का हिस्सा था।
कंपनी के प्रवक्ता सिमसन फ्रांसिस्कुस रिही ने 3 अक्टूबर को कहा कि योजना को परिवहन मंत्रालय, Basarnas और बंदरगाह मास्टर तथा बंदरगाह प्राधिकरण की मंजूरी मिल गई थी। उन्होंने कहा कि ठेकेदार चुन लिया गया है, हालांकि एक अन्य खबर में कहा गया कि विकल्प सीमित कर दिए गए हैं। दोनों खबरों के अनुसार, अनुबंध पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए थे और प्रशासनिक काम बाकी था।
रिही ने प्रस्तावित अभियान को संचालक की जिम्मेदारी बताया:
"यह हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा है," उन्होंने कहा।
बंजारमासिन के क्लास I बंदरगाह मास्टर और बंदरगाह प्राधिकरण कार्यालय के प्रमुख हेरि पुरवांतो ने कहा कि परिवहन मंत्री ने कंपनी को नौका तुरंत निकालने का आदेश दिया है। बचाव अधिकारियों ने शिपिंग पर 2008 के कानून संख्या 17 का हवाला दिया, जिसके तहत मालिकों को नौवहन सुरक्षा में बाधा बनने वाले मलबे या डूबे माल को हटाना होता है।
नौका को उठाने या स्थिर करने का एक अलग बचाव उद्देश्य भी था: टीमों को उन जगहों तक अधिक सुरक्षित पहुंच देना, जहां गोताखोर अब तलाश नहीं कर पा रहे थे। त्रिसक्ति बंदरगाह पर इंतजार कर रहे परिवारों ने भी मलबा निकालने की मांग की। अक्टूबर के अपडेट में अभियान शुरू करने की कोई निश्चित तारीख, ठेकेदार के साथ हस्ताक्षरित समझौते या काम पूरा होने की समयसीमा की पुष्टि नहीं हुई थी।
पुलिस कप्तान और कंपनी की भूमिका की जांच कर रही है
हिरासत में लिए गए चार संदिग्ध हैं: कप्तान अरिएफ युनियांतो, जिन्हें पुलिस ने AY के रूप में पहचाना, और कंपनी के तीन प्रतिनिधि: एजेंट LBA, संचालन प्रबंधक RH और सुरबाया शाखा के महाप्रबंधक YR। सभी को दक्षिण कालीमंतान पुलिस की हिरासत सुविधा में रखा गया था।
पुलिस ने कप्तान को 25 सितंबर और कंपनी के प्रतिनिधियों को 4 अक्टूबर को हिरासत में लिया। घोषित हिरासत अवधि कप्तान के लिए 14 अक्टूबर और बाकी तीन के लिए 23 अक्टूबर तक थी। ये हिरासत की तारीखें हैं, मुकदमे की घोषित तारीखें नहीं।
राष्ट्रीय पुलिस के जन सूचना ब्यूरो के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल ट्रुनोयुदो विस्नु अंडिको ने कहा कि जांचकर्ता कथित लापरवाही, मिलीभगत और सहायता की जांच कर रहे हैं। जांच के दायरे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा:
"हमारी जांच सिर्फ जहाज चलाने में सीधे तौर पर शामिल लोगों तक सीमित नहीं है। जांचकर्ताओं ने मामले में कंपनी की भूमिका की भी पड़ताल की है," अंडिको ने कहा।
जांचकर्ता शिपिंग पर 2008 के कानून संख्या 17 की धारा 302(3), दंड संहिता की धारा 474(3) और भागीदारी तथा सहायता से जुड़ी 2023 के कानून संख्या 1 की धाराएं 20 और 21 लागू कर रहे हैं। संदिग्ध का दर्जा दोष साबित नहीं करता। आरोपों की कानूनी प्रक्रिया में जांच होनी बाकी है और अदालत का कोई फैसला घोषित नहीं किया गया है।
आपराधिक जांच और KNKT की सुरक्षा जांच के उद्देश्य अलग हैं। पुलिस संभावित अपराधों और जिम्मेदारी की पड़ताल कर रही है, जबकि परिवहन सुरक्षा जांच का मकसद यह पता लगाना है कि हादसा कैसे हुआ और ऐसी आपदा दोबारा रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
जहाज और उसकी स्थिति के बारे में क्या पता है
Virgo Transport 8 ऐसी नौका थी, जिस पर वाहन चढ़ाए और उतारे जा सकते थे। इसे आम तौर पर रोल ऑन/रोल ऑफ नौका कहा जाता है। इसकी लंबाई करीब 119 मीटर और चौड़ाई 21 मीटर थी। इसे 1987 में बनाया गया था और इसका मालिकाना हक PT Virgo Karya Shipping के पास था। बाद की एक खबर में कहा गया कि नौका पर 243 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के साथ 89 वाहन भी थे।
परिवहन मंत्री दुदी पुरवागंधी ने कहा कि नौका की क्षमता 500 लोगों की थी और उसमें क्षमता से अधिक लोग नहीं थे। उसमें सवार 243 लोग घोषित क्षमता का करीब 49 प्रतिशत थे। हालांकि, क्षमता से कम लोगों की मौजूदगी से वाहनों की लोडिंग, स्थिरता, मौसम की स्थिति या आपातकालीन प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिलता।
खबरों के मुताबिक कप्तान ने बचावकर्मियों को बताया कि नौका झुकने और पलटने से पहले उसकी दाईं तरफ, यानी आगे की दिशा में देखते हुए दाहिनी ओर, लहरें टकराई थीं। परिवहन अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि वे प्राकृतिक, तकनीकी और मानवीय कारणों की जांच कर रहे हैं। हादसे के कारण पर कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं हुआ है।
यह हादसा 17,000 से अधिक द्वीपों वाले देश में हुआ, जहां नौका से यात्रा का खर्च हवाई यात्रा के मुकाबले 75 प्रतिशत तक कम हो सकता है। खबरों में अगस्त तक समुद्र में कम से कम 601 दुर्घटनाओं और 2020 से 2026 के बीच जहाजों से जुड़ी 111 दुर्घटनाओं के एक अलग सरकारी आंकड़े का जिक्र था। परिभाषाओं और दायरे का मिलान किए बिना इन आंकड़ों की तुलना दुर्घटनाओं की आवृत्ति के एक ही पैमाने के रूप में नहीं की जा सकती।
हाल की अन्य घटनाओं में मदुरा द्वीप के पास नौका में आग लगने से पांच लोगों की मौत और जुलाई में पोलासी द्वीप के पश्चिम में KM Nurul Salsa का डूबना शामिल है। उस हादसे में 58 लोग बच गए, तीन के शव मिले और 14 लापता रहे। Virgo Transport 8 के मामले में काम अभी बाकी है: 53 लोगों का पता लगाना, पहचान की प्रक्रिया पूरी करना, मलबा निकालना और नौका पलटने की वजह का पता लगाना।
मुख्य बिंदु
- Virgo Transport 8 13 सितंबर, 2026 को सुरबाया से बंजारमासिन जाते समय पलट गई।
- 7 अक्टूबर के बचाव अपडेट के अनुसार, नौका में सवार 243 लोगों में से 82 की मौत हुई, 108 जीवित बचे और 53 लापता थे।
- मलबे के भीतर बचाव की मुश्किल परिस्थितियों और खतरों के कारण 3 अक्टूबर को पानी के भीतर तलाश रोक दी गई।
- दक्षिण, मध्य और पश्चिम कालीमंतान में समुद्र की सतह और तटरेखाओं पर तलाश जारी रही।
- संचालक ने अक्टूबर में मलबा निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन शुरुआत या काम पूरा होने की कोई निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं हुई।
- पुलिस ने कथित अपराधों के संबंध में कप्तान और कंपनी के तीन प्रतिनिधियों को हिरासत में लिया; दोष का कोई निष्कर्ष घोषित नहीं हुआ।
- हादसे के कारण की जांच जारी थी। जीवित बचे लोगों की गवाही KNKT की सुरक्षा जांच में मदद के लिए दी जानी थी।






