बड़ी संख्या में जापानी प्रवासी थाईलैंड छोड़ रहे हैं
दशकों तक थाईलैंड जापानी कंपनियों के विस्तार का प्रमुख ठिकाना रहा। बैंकॉक के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कारखाने और क्षेत्रीय मुख्यालय बने, जबकि चाओ फ्राया नदी के किनारे और राजधानी के मध्यवर्ती इलाकों में प्रवासी समुदाय फले-फूले। जापानी प्रबंधकों, इंजीनियरों और उनके परिवारों ने इस देश में आरामदायक जीवन बसाया। उनके नियोक्ता उदार आवास भत्ते देते थे और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की फीस भरते थे। ये नियुक्तियां एक स्थिर और वैश्विक दृष्टि वाले करियर के शिखर का प्रतिनिधित्व करती थीं।
विषय-सूची
- बड़ी संख्या में जापानी प्रवासी थाईलैंड छोड़ रहे हैं
- धीमी वृद्धि और मंदी के जोखिम से जूझता थाईलैंड
- वैश्विक ऊर्जा संकट से एशिया का संकट गहराया
- बढ़ती लागत से टोक्यो ने बजट कसे
- प्रतिस्पर्धी दक्षिण-पूर्व एशिया में निवेश के परिदृश्य को बदल रहे हैं
- प्रवासी समुदाय के घटने का असर स्थानीय लोगों पर
- अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए संघर्षरत बैंकॉक
- मुख्य बिंदु
आज ये व्यवस्थाएं तेजी से बिखर रही हैं। जापानी कंपनियों ने लागत में आक्रामक कटौती के तहत बड़ी संख्या में प्रवासी कर्मचारियों को स्वदेश वापस भेजना शुरू कर दिया है। यह पलायन ऐसे बाजार से रणनीतिक वापसी को दर्शाता है, जो अब पहले जैसे लाभ की गारंटी नहीं देता। नियोक्ता अब धीमी वृद्धि से जूझती स्थानीय अर्थव्यवस्था, परिचालन खर्च बढ़ाने वाली मजबूत थाई बात मुद्रा और चीनी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपट रहे हैं। चीनी कंपनियों ने सस्ते वित्तपोषण और आक्रामक मूल्य निर्धारण के साथ क्षेत्र में अपना विस्तार किया है।
इस बदलाव से थाईलैंड में जापानी प्रवासियों की मौजूदगी में नाटकीय कमी आई है। पहले जहां जापानी समूह संयुक्त उपक्रमों और स्थानीय साझेदारियों की निगरानी के लिए विदेशों में कर्मचारियों की कई परतें तैनात रखते थे, वहीं अब कई कंपनियां छोटी टीमें या टोक्यो से दूरस्थ प्रबंधन पसंद कर रही हैं। यह बदलाव अस्थायी खर्च-कटौती से कहीं अधिक है। इससे ऐसे समय में जापानी कंपनियों की रणनीति में थाईलैंड की भूमिका का बुनियादी पुनर्मूल्यांकन झलकता है, जब दोनों देश गंभीर वित्तीय दबाव और अस्थिर वैश्विक बाजारों का सामना कर रहे हैं।
इसका असर लोगों पर पहले से दिखने लगा है। जापानी परिवारों के बच्चों को पढ़ाने वाले अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में दाखिले घटने लगे हैं और रियल एस्टेट एजेंट उन इलाकों में महंगे किराये के मकानों की घटती मांग की बात कह रहे हैं, जो लंबे समय से प्रवासियों के पसंदीदा रहे हैं। इन समुदायों की जरूरतें पूरी करने वाले स्थानीय कारोबारों, खास किराना दुकानों से लेकर गोल्फ क्लबों तक, में ग्राहकों की आवाजाही और कमाई घट रही है। कॉरपोरेट क्षेत्र के अनुभवी लोगों का कहना है कि कर्मचारियों को वापस बुलाने की मौजूदा लहर दो दशकों में देखी गई सबसे तेज है। प्रभावित लोगों के लिए वापसी के आदेश उदार विदेशी नियुक्तियों के दौर का अचानक अंत और सावधानी से बनाई गई करियर योजनाओं में बड़ा व्यवधान हैं।
धीमी वृद्धि और मंदी के जोखिम से जूझता थाईलैंड
कर्मचारियों को वापस बुलाने का फैसला केवल कंपनियों के हिसाब-किताब पर आधारित नहीं है। थाईलैंड की घरेलू अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हुई है, जिससे वह भरोसा खत्म हो गया है जो पहले बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारियों को रखने का आधार था। कीआतनाकिन फत्रा फाइनेंशियल ग्रुप की आर्थिक शोध इकाई, केकेपी रिसर्च, ने 2026 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.3 प्रतिशत कर दिया है। इकाई ने महंगाई का अनुमान भी 0.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.0 प्रतिशत किया और चेतावनी दी कि तेल का झटका लंबे समय तक जारी रहा तो देश मंदी की ओर बढ़ सकता है।
जोखिम केवल आयातित कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व में जहाजरानी में बाधा से उर्वरकों की कमी और बढ़ सकती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा। प्लास्टिक और कपड़ा उद्योगों के लिए जरूरी पेट्रोरसायन कच्चे माल की आपूर्ति भी खतरे में है। महामारी के बाद से ही दबाव झेल रहे परिवारों की वित्तीय स्थिति बढ़ती कीमतों का मुकाबला करने के लिए बहुत कम गुंजाइश देती है। 2022 में महंगाई का उछाल महामारी के बाद बढ़ी मांग से कुछ हद तक नरम पड़ा था। इसके उलट, मौजूदा मंदी में उपभोक्ता कमजोर वित्तीय स्थिति और धुंधली संभावनाओं के साथ इस झटके का सामना कर रहे हैं।
थाईलैंड की आर्थिक योजना की बुनियाद पर्यटन से आने वाले पर्यटकों की संख्या घट रही है। केकेपी रिसर्च का अनुमान है कि यात्रा लागत बढ़ने से मांग घटेगी और 2026 में विदेशी पर्यटकों की संख्या 3.51 करोड़ से कम होकर 3.12 करोड़ रह जाएगी। इस साल की शुरुआत की रिपोर्टों में पहले ही पर्यटकों के आगमन में सालाना आधार पर नौ प्रतिशत की गिरावट दिखी थी, जबकि प्रमुख पर्यटन स्थलों के होटलों में कमरे भरने की दर घटकर दस प्रतिशत तक रह गई। अमेरिका, चीन, यूरोप और जापान समेत प्रमुख बाजारों में जहाजरानी लागत बढ़ने और मांग कमजोर होने से निर्यात भी प्रभावित हो रहा है।
सार्वजनिक ऋण जोखिम की एक और परत जोड़ता है। कमजोर वृद्धि और उपभोक्ता सब्सिडी की लागत से थाईलैंड का सार्वजनिक ऋण-जीडीपी अनुपात तय समय से पहले 70 प्रतिशत की सीमा पार कर सकता है। इससे सरकार के पास जवाबी कदम उठाने के लिए सीमित वित्तीय गुंजाइश बचेगी। कुल मिलाकर तस्वीर ऐसी अर्थव्यवस्था की है जो शक्तिशाली बाहरी और घरेलू विपरीत परिस्थितियों के बीच अपनी गति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
वैश्विक ऊर्जा संकट से एशिया का संकट गहराया
एशिया को जकड़े ऊर्जा संकट ने थाईलैंड की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईरान से जुड़े सैन्य संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से अधिकांश वाणिज्यिक जहाजरानी लगभग ठप हो गई है। इस संकरे मार्ग से समुद्र के रास्ते होने वाले वैश्विक कच्चे तेल के परिवहन का पांचवां हिस्सा, तरलीकृत प्राकृतिक गैस की खेप का पांचवां हिस्सा और दुनिया के कुल यूरिया व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा गुजरता है। यूरिया सबसे आम उर्वरक है। अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर थाईलैंड के लिए यह मार्ग बंद होना अर्थव्यवस्था के अस्तित्व के लिए खतरा है।
कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया में वैश्विक अर्थशास्त्र के प्रमुख जोसेफ कैपुर्सो ने स्थिति का गंभीर आकलन किया।
मध्य पूर्व के सभी संभावित परिदृश्यों में मौजूदा स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खराब स्थितियों में से एक है। हमारा अनुमान है कि हालात शांत होने से पहले और बिगड़ेंगे।
इसके असर पूरे क्षेत्र में तुरंत दिखे हैं। तेल वायदा कारोबार में कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई, जबकि खाड़ी देशों का उत्पादन मार्च 2025 के स्तर के मुकाबले लगभग एक करोड़ बैरल प्रतिदिन घट गया है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल की मात्रा युद्ध-पूर्व स्तर के दस प्रतिशत से भी कम रह गई है। थाईलैंड ने सभी पेट्रोलियम निर्यात पर रोक लगाई और वाहन चालकों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय ईंधन कोष से राशि खर्च की। अनुतिन चर्नविराकुल ने सरकारी अधिकारियों से लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल कर ऊर्जा बचाने को कहा, जबकि ईंधन की मांग घटाने के लिए सरकारी एजेंसियों को घर से काम करने का निर्देश दिया गया।
इस व्यवधान से थाई निर्यात भी फंस गया है। मध्य पूर्व के लिए भेजे जा रहे चावल की खेप बैंकॉक बंदरगाह पर अटक गई है और 80 हजार टन माल ले जा रहे जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे। जहाजरानी बीमा की बढ़ती लागत और विमान मार्ग रद्द होने से आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ रहा है और सेमीकंडक्टर से लेकर छुट्टियों के पैकेज तक हर चीज महंगी हो रही है। अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो कुछ ही महीनों में थाईलैंड की आर्थिक वृद्धि आधी रह सकती है। ऊर्जा की कीमतें चढ़ने के साथ बैंकॉक के सामने मुद्रास्फीतिजनित मंदी का खतरा है, जिसमें महंगाई बढ़ती है और वृद्धि ठहर जाती है।
बढ़ती लागत से टोक्यो ने बजट कसे
थाईलैंड जहां आयातित महंगाई और मुद्रा के दबाव से जूझ रहा है, वहीं जापान भी जीवनयापन की बढ़ती लागत से लड़ रहा है। नवंबर में खाद्य और ईंधन को छोड़कर महंगाई 3.0 प्रतिशत पहुंचने के बाद बैंक ऑफ जापान ने अपनी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाकर करीब 0.75 प्रतिशत कर दी, जो तीन दशकों का उच्चतम स्तर है। करीब तीन दशक की बेहद ढीली मौद्रिक नीति के बाद यह ऐतिहासिक बदलाव है, लेकिन इससे सरकारी कर्ज लेने की लागत भी बढ़ती है। ऐसे समय में टोक्यो भारी सार्वजनिक देनदारियों का प्रबंधन कर रहा है।
नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने महंगाई घटाने को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है, हालांकि ब्याज दर बढ़ाने को पहले "बेवकूफी भरा" कहने से केंद्रीय बैंक के साथ तनाव का संकेत मिलता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर मुद्रा को मजबूत करती हैं, लेकिन डॉलर और यूरो के मुकाबले येन अब भी अपेक्षाकृत कमजोर है और आयात लागत बढ़ा रहा है। जापानी कंपनियों के लिए घरेलू महंगाई, महंगे ऋण और कमजोर मुद्रा का यह मेल विदेशी परिचालनों में खर्च घटाने को आसान विकल्प बनाता है।
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में जापान अर्थशास्त्र के प्रमुख शिगेतो नागाई ने बताया कि केंद्रीय बैंक सावधानी से कदम उठा रहा है।
ब्याज दर बढ़ाने का वास्तविक अर्थव्यवस्था पर असर देखने के लिए बैंक ऑफ जापान को समय चाहिए। अंतिम कदम उठाने से पहले यह अवधि शायद लगभग छह महीने की होगी।
यह अनिश्चितता कंपनियों को सीधे तौर पर सतर्क बना रही है। घरेलू मुनाफे का अंतर घटने और शेयरधारकों की ओर से दक्षता की मांग बढ़ने के बीच कंपनियां महंगे प्रवासी कर्मचारी पैकेजों के लिए धन देने से कतरा रही हैं। इसलिए बैंकॉक से कर्मचारियों को वापस बुलाना जापान की व्यापक वापसी का हिस्सा है, जिसमें विदेश में नियुक्तियों को रणनीतिक जरूरत के बजाय वैकल्पिक विलासिता माना जा रहा है। परंपरागत रूप से जापानी कंपनियां वैश्विक अनुभव दिलाने के लिए वरिष्ठ कर्मचारियों को विदेशी कार्यालयों में भेजती थीं, लेकिन अब हर बड़े बाजार में इस व्यवस्था को नाटकीय रूप से घटाया जा रहा है। जिन मध्य-स्तर के प्रबंधकों को कभी विदेश में नियुक्ति पदोन्नति का सामान्य चरण लगती थी, उनसे अब घरेलू मुख्यालय से क्षेत्रीय खातों का प्रबंधन करने को कहा जा रहा है।
प्रतिस्पर्धी दक्षिण-पूर्व एशिया में निवेश के परिदृश्य को बदल रहे हैं
थाईलैंड से वापसी अलग-थलग नहीं हो रही है। दक्षिण-पूर्व एशिया में निवेश के रुझान बदल रहे हैं और चीनी कंपनियां सरकारी समर्थन वाले वित्तपोषण तथा आक्रामक मूल्य निर्धारण के साथ अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। बैंकॉक, फुकेट और कुआलालंपुर में बीजिंग का आर्थिक प्रभाव बढ़ा है। इससे बाजार में भीड़ बढ़ी है और जापानी कंपनियों के लिए अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाना कठिन हो गया है। नतीजतन, मूल्य युद्ध से मुनाफे का अंतर घट रहा है और बड़ी प्रवासी प्रबंधन टीमों को उचित ठहराना मुश्किल हो रहा है।
इसी दौरान वियतनाम जापानी कंपनियों की रणनीति के लिए लगातार अधिक अहम बन गया है। परामर्शदाता कंपनी एबीम के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बढ़ती स्थानीय लागत और नीतिगत अड़चनों से जुड़ी दीर्घकालीन चुनौतियों के बावजूद, जापान के औद्योगिक उत्पादन के बड़े हिस्से को वियतनामी श्रमिक संभाल रहे हैं। जापानी विनिर्माताओं ने हो ची मिन्ह सिटी और हनोई के कारखानों में बड़े निवेश किए हैं और वह पूंजी वहां भेजी है जो पहले थाईलैंड में परिचालन के विस्तार में लग सकती थी।
संसाधनों का यह पुनर्वितरण जोखिम और मुनाफे का ठंडे दिमाग से किया गया आकलन दर्शाता है। मजबूत बात मुद्रा से थाईलैंड का निर्यात कम प्रतिस्पर्धी हो रहा है, जबकि ईंधन की कमी और पर्यटकों की घटती संख्या के बीच पर्यटन पर निर्भर सेवा क्षेत्र नाजुक दिख रहा है। सरकारी वित्तपोषण के सहारे चीनी प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचा कंपनियों ने बड़ी परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए जापानी कंपनियों से कम कीमत की पेशकश की है। इससे टोक्यो स्थित समूहों की प्रतिस्पर्धी स्थिति और कमजोर हुई है। जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण चीनी एयरलाइनों ने बैंकॉक और फुकेट के लिए उड़ानें भले घटाई हों, लेकिन चीनी औद्योगिक और प्रौद्योगिकी कंपनियां क्षेत्र में निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज हो रही है। टोक्यो और ओसाका के मुख्यालयों के लिए अब थाईलैंड में विस्तार के बजाय कारोबार समेटने का गणित अधिक अनुकूल दिख रहा है। नतीजतन, क्षेत्र में जापान अब थाई विनिर्माण या खुदरा कारोबार में पहला पसंदीदा विदेशी निवेशक नहीं रह गया है। क्षेत्रीय मुख्यालयों का दौरा करने वाले जापानी अधिकारी अब बैंकॉक में लंबे प्रवास के बजाय हो ची मिन्ह सिटी की छोटी यात्राओं को अधिक तरजीह दे रहे हैं।
प्रवासी समुदाय के घटने का असर स्थानीय लोगों पर
जापानी परिवारों के जाने का असर बोर्डरूम से बाहर तक पड़ रहा है। वर्षों से प्रवासियों के खर्च से स्थानीय कारोबारों का एक पूरा तंत्र चलता रहा है। इसमें जापानी भाषा के प्रीस्कूल, पारंपरिक जापानी भोजन परोसने वाले रेस्तरां, महंगे अपार्टमेंट परिसर और गोल्फ क्लब शामिल हैं। कंपनी की ओर से विदेश भेजे गए कर्मचारियों की संख्या घटने के साथ इन प्रतिष्ठानों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। मध्य बैंकॉक के रियल एस्टेट एजेंटों का कहना है कि जापानी निवासियों के पसंदीदा रहे इलाकों में प्रीमियम कॉन्डोमिनियम और तीन बेडरूम वाले मकानों की मांग साफ तौर पर घटी है। मकान मालिकों को किराया कम करना पड़ रहा है या छोटी अवधि के पट्टे स्वीकार करने पड़ रहे हैं।
जापानी छात्रों की बड़ी संख्या वाले अंतरराष्ट्रीय स्कूल पहले ही अपने बजट और कक्षा के आकार में बदलाव कर रहे हैं। आयातित समुद्री भोजन और चावल की शराब में विशेषज्ञता रखने वाली मोहल्ले की दुकानों में भी नियमित ग्राहक कम हो गए हैं। इस पलायन से प्रवासी परिवारों के लिए चालक, घरेलू सहायक और प्रशासनिक सहायक के रूप में काम करने वाले थाई कर्मचारी भी प्रभावित हैं। परिवारों के खर्च घटाने या देश छोड़ने से इनमें से कई कर्मचारियों के काम के घंटे घट गए हैं या उन्हें सीधे नौकरी से निकाल दिया गया है। खाना पकाने, सफाई और बच्चों की देखभाल करने वाले सेवा कर्मचारी अब सिकुड़ते श्रम बाजार में काम तलाश रहे हैं। परिचित चेहरे देश छोड़ रहे हैं, इसलिए चैरिटी गोल्फ टूर्नामेंट और कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की पहलों में भी भागीदारी घट गई है।
कंपनियों की इस वापसी का मानवीय पहलू एक सीधी सच्चाई दिखाता है। जब बहुराष्ट्रीय नियोक्ता तय करते हैं कि कोई बाजार बहुत महंगा या जोखिम भरा हो गया है, तो इसका झटका स्थानीय सेवा अर्थव्यवस्था में तेजी से फैलता है। जापानी प्रवासी ओसाका या नागोया लौट रहे हों, लेकिन उनके जाने की लहरें राजधानी की खुदरा दुकानों और उपनगरीय शॉपिंग मॉल तक महसूस की जा रही हैं। थाई और जापानी समुदायों को जोड़ने वाले पुराने सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और कारोबारी संघों के आयोजन भी घट रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर दोनों देशों को जोड़ने वाला सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। कुछ सामुदायिक नेताओं को चिंता है कि ये संस्थागत रिश्ते कमजोर पड़ गए तो उन्हें फिर से बनाने के लिए वर्षों का नया निवेश और भरोसा चाहिए होगा। स्थानीय विश्वविद्यालयों में जापानी भाषा की कक्षाओं में भी दाखिले घटने की खबर है।
अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए संघर्षरत बैंकॉक
इन आपस में जुड़ी चुनौतियों के बीच थाईलैंड की सरकार ने आम नागरिकों पर बोझ घटाने के लिए राहत उपाय शुरू किए हैं। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने हाल ही में थाई हेल्प्स थाई अभियान शुरू किया। देशव्यापी इस पहल के तहत चलती-फिरती विक्रेता गाड़ियों, सामुदायिक दुकानों और थाईलैंड पोस्ट सेवा केंद्रों के जरिये जरूरी सामान छूट पर दिया जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य एक महीने की अवधि में 40 लाख से अधिक परिवारों तक पहुंचना और सार्वजनिक खर्च में कम से कम 28 करोड़ थाई बात की बचत करना है।
उद्घाटन समारोह में अनुतिन ने इस पहल को बाजार के दबावों का सीधा जवाब बताया। उन्होंने कहा कि मोबाइल विक्रेता सामान्य बाजार भाव से कम कीमत पर सामान बेचते हैं और नागरिकों से गुणवत्ता में बदलाव की चिंता किए बिना अपनी जरूरत भर खरीदने का आग्रह किया। यह परियोजना तीन हजार से अधिक मोबाइल वाहनों और सैकड़ों डाक बिक्री केंद्रों के नेटवर्क के जरिये 12 आपूर्तिकर्ताओं की 14 जरूरी उपभोक्ता वस्तुएं दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाती है, जहां किफायती उत्पाद आसानी से नहीं मिलते।
ये उपाय अल्पकालीन राहत तो देते हैं, लेकिन जापानी कंपनियों को दूर करने वाली संरचनात्मक ताकतों पर इनका खास असर नहीं होगा। पाम तेल और डिटर्जेंट पर अस्थायी छूट न तो मजबूत मुद्रा का रुख पलट सकती है, न होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल सकती है और न ही रातोंरात निवेशकों का भरोसा बहाल कर सकती है। विश्लेषकों की चेतावनी है कि प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार के लिए ठोस सुधार नहीं हुए तो थाईलैंड की अधिक विदेशी पूंजी कम लागत और कम लॉजिस्टिक अड़चनों वाले पड़ोसी देशों में जा सकती है।
जापान में घरेलू महंगाई से मुकाबले, मध्य पूर्व से उठे ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के तेज होने से थाईलैंड के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल बन गया है। बैंकॉक के नीति-निर्माता थाईलैंड को जापानी निवेश का प्रमुख केंद्र बनाए रखने के लिए समय रहते बदलाव कर पाएंगे या नहीं, यह अब भी खुला सवाल है। फिलहाल रुझान आशावाद और विस्तार के बजाय सावधानी और संकुचन के पक्ष में है।
मुख्य बिंदु
- दोनों देशों में आर्थिक दबाव के चलते लागत घटाने के व्यापक उपायों के तहत जापानी कंपनियां थाईलैंड से प्रवासी कर्मचारियों को वापस बुला रही हैं।
- थाईलैंड में मंदी का जोखिम है। 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 1.3 प्रतिशत कर दिया गया है और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच पर्यटन में तेज गिरावट की आशंका है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और मध्य पूर्व के बाजारों के लिए भेजे जा रहे चावल समेत थाई निर्यात बाधित हुए हैं।
- जापान के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरें 30 साल के उच्चतम स्तर तक बढ़ा दी हैं, जबकि महंगाई 3 प्रतिशत के करीब है। इससे कंपनियां विदेशों में खर्च घटा रही हैं।
- चीनी कंपनियां क्षेत्र में अपना विस्तार कर रही हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और जापानी निवेशक दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख केंद्र के रूप में थाईलैंड की भूमिका पर फिर से विचार कर रहे हैं।
- जापानी प्रवासी समुदाय तेजी से घटने से बैंकॉक के स्थानीय कारोबारों और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में मांग कम हो रही है।






