पत्थर में उकेरी गई मौन स्वीकारोक्ति
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन प्योंगयांग में बने एक नए भव्य परिसर के सामने रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ खड़े थे। ऊपर सैन्य विमानों की गर्जना गूंज रही थी और सफेद गुब्बारे आसमान में तैर रहे थे। यह समारोह विदेशों में सैन्य अभियानों के दौरान किए गए युद्ध कारनामों के स्मारक संग्रहालय के अनावरण का था। यह स्मारक प्योंगयांग के सबसे गोपनीय रहस्यों में से एक को सार्वजनिक रूप से पत्थर पर दर्ज करता है। पहली बार, इस गोपनीय शासन ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में अपने सैन्य हस्तक्षेप के पैमाने का ऐसा प्रमाण सामने रखा जिसे प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। विशाल ग्रेनाइट की दो दीवारों पर उकेरे गए नाम ऐसी कहानी बयान करते हैं, जिसे प्योंगयांग और मॉस्को ने कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया था। उपग्रह तस्वीरों और आधिकारिक फोटो के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि इन दीवारों पर यूक्रेनी बलों से रूस के कुर्स्क क्षेत्र को फिर से कब्जे में लेने के अभियानों में मारे गए करीब 2,304 सैनिकों के नाम हैं।
विषय-सूची
इस समारोह के समय में गहरा प्रतीकात्मक अर्थ था। यह उस दिन आयोजित हुआ जिसे रूसी अधिकारियों ने मॉस्को द्वारा कुर्स्क पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की पहली वर्षगांठ बताया। यह सीमावर्ती इलाका था, जहां यूक्रेन ने अगस्त 2024 में अचानक घुसपैठ की थी। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि इस अभियान में रूस की मदद के लिए कम से कम 11,000 उत्तर कोरियाई सैनिक भेजे गए थे। एक गुप्त सैन्य तैनाती को राष्ट्रीय गौरव के स्मारक में बदलकर किम ने संकेत दिया है कि मॉस्को के साथ गठबंधन अब सिर्फ लेन-देन का मामला नहीं रहा। यह हजारों युवा सैनिकों के खून से बना रिश्ता है।
आम उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए यह स्मारक एकजुटता का केंद्र और चेतावनी, दोनों है। सरकारी मीडिया ने मारे गए सैनिकों को पश्चिमी आक्रामकता के खिलाफ संप्रभुता की रक्षा करने वाले सच्चे देशभक्त बताया। शासन ने शोकाकुल परिवारों को उसी जिले में बने नए आवासीय परिसर में बसाना शुरू कर दिया है, ताकि मृतकों के बलिदान को राजधानी के भौतिक परिदृश्य का हिस्सा बनाया जा सके।
कितने लोग मारे गए? दीवारों पर दर्ज नाम
एक वाणिज्यिक पृथ्वी-अवलोकन कंपनी की उपग्रह तस्वीरों से पता चलता है कि प्योंगयांग के ह्वासोंग जिले में 52,000 वर्ग मीटर के इस परिसर का निर्माण अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था। दिसंबर तक इसकी कच्ची संरचना दिखाई देने लगी थी। मार्च तक बाहरी काम काफी हद तक पूरा हो गया था और पिछले महीने परिसर का भूदृश्य निर्माण भी पूरा हुआ। निर्माण की तेज रफ्तार बताती है कि शासन ने इस परियोजना को तत्काल प्राथमिकता दी।
इसका मुख्य प्रमाण स्मारक की दीवारें हैं। हर दीवार करीब 30 मीटर लंबी है। आधिकारिक तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि हर दीवार करीब 14 खंडों में बंटी है। इनमें से नौ खंडों पर नाम उकेरे गए हैं और हर खंड में लगभग 16 स्तंभ हैं। पूर्वी दीवार की विस्तृत तस्वीरों में एक स्तंभ पर आठ नाम दिखते हैं। गणना स्पष्ट है: 16 स्तंभ, नौ खंड और हर स्तंभ में आठ नाम, यानी प्रति दीवार 1,152 नाम। दोनों दीवारों पर कुल नाम करीब 2,304 होते हैं।
कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी के वरिष्ठ शोधकर्ता सोंगहाक चुंग इस आकलन से सहमत हैं। उनका कहना है कि स्मारक की दीवारों पर बेहद छोटे अक्षरों में नाम सघन रूप से लिखे गए हैं। सतह के क्षेत्रफल और लिखावट के घनत्व को देखते हुए, वहां दर्ज लोगों की संख्या कई हजार तक पहुंच सकती है। अधिक उच्च-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों के बिना सटीक संख्या तय नहीं की जा सकती, लेकिन स्मारक पर दर्ज नामों की संख्या दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा के पहले के अनुमानों से काफी मेल खाती है।
सितंबर 2025 में खुफिया एजेंसी ने कहा था कि करीब 2,000 उत्तर कोरियाई सैनिक मारे गए और 2,700 अन्य घायल हुए। फरवरी 2026 तक एजेंसी ने अपना आकलन संशोधित करते हुए कहा कि तैनात किए गए अनुमानित 11,000 सैनिकों में से करीब 6,000 मारे गए या घायल हुए। पश्चिमी और यूक्रेनी खुफिया स्रोतों के दूसरे अनुमानों में तैनाती की कुल संख्या इससे अधिक, 14,000 से 20,000 के बीच बताई गई है। कुछ अनुमानों के मुताबिक करीब 6,000 सैनिक मारे गए। प्योंगयांग और मॉस्को, दोनों ने आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इन अंतरों की वजह अलग-अलग गणना-अवधि, लड़ाकों और सहायक कर्मियों की अलग परिभाषाएं या युद्धक्षेत्र के आंकड़ों तक अलग-अलग पहुंच हो सकती है।
रूसी गणमान्य व्यक्ति और हमेशा साथ रहने के वादे
यह अनावरण समारोह उत्तर कोरियाई नेतृत्व का अकेला आयोजन नहीं था। समारोह के दौरान बेलौसोव किम के साथ खड़े थे। रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन भी इस कार्यक्रम के लिए प्योंगयांग पहुंचे। उनकी मौजूदगी से जाहिर हुआ कि मॉस्को इस गठबंधन को अस्थायी सुविधा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी मानता है। सरकारी मीडिया ने इस आयोजन को पश्चिम की आधिपत्यवादी साजिश के खिलाफ क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के पवित्र युद्ध का सम्मान बताया।
वोलोडिन ने कुर्स्क की मुक्ति के लिए किम को खुलकर धन्यवाद दिया और रूसी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले उत्तर कोरियाई बलों की सराहना की।
रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने समारोह के दौरान सीधे किम जोंग उन को संबोधित किया।
मुझे कुर्स्क की मुक्ति में आपके और कोरियाई जनता के भाईचारे के समर्थन के लिए, कॉमरेड किम जोंग उन, आपका आभार व्यक्त करने दीजिए।
बेलौसोव ने इससे आगे बढ़कर कहा। उन्होंने घोषणा की कि मॉस्को और प्योंगयांग ने सैन्य सहयोग को स्थिर और दीर्घकालिक आधार देने पर सहमति जताई है। 2027 से 2031 तक की अवधि को समेटने वाली द्विपक्षीय योजना पर इसी साल हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। उन्होंने कुर्स्क अभियान में हिस्सा लेने वाले उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूसी सैन्य सम्मान भी प्रदान किए। अलग-अलग बैठकों के दौरान किम ने रूसी प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि उत्तर कोरिया राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा हितों की रक्षा की रूसी संघ की नीति का हमेशा की तरह पूरा समर्थन करेगा। सरकारी मीडिया के मुताबिक, किम ने कहा कि रूस न्यायपूर्ण और पवित्र युद्ध में निश्चित रूप से जीत हासिल करेगा।
सोच-समझकर गढ़ी गई शहादत
इस स्मारक का शायद सबसे सिहराने वाला पहलू यह है कि यह पारंपरिक युद्ध में मारे गए सैनिकों से आगे बढ़कर किन बातों का सम्मान करता है। किम जोंग उन ने उन सैनिकों की सार्वजनिक रूप से सराहना की जिन्होंने यूक्रेनी बलों के हाथों पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को ग्रेनेड से उड़ा लिया। सरकारी मीडिया ने इसे आत्मघाती हमला बताया। इससे लंबे समय से चली आ रही उस आशंका की पुष्टि होती है कि प्योंगयांग अपने सैनिकों को आत्मसमर्पण के बजाय आत्महत्या करने का आदेश देता है।
उत्तर कोरियाई सैन्य संस्कृति में पकड़े जाने को देशद्रोह माना जाता है। सैनिकों को गहन वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें आत्मसमर्पण को राज्य और सत्तारूढ़ पार्टी के साथ अक्षम्य विश्वासघात बताया जाता है। इसी सोच के कारण युद्धक्षेत्र में ऐसा व्यवहार देखने को मिला जिसने कोरियाई पीपुल्स आर्मी पर नजर रखने वाले अनुभवी पर्यवेक्षकों को भी चौंका दिया।
स्मारक समारोह के दौरान दिए गए भाषण में किम जोंग उन ने इन आत्मघाती हमलों को वफादारी का चरम बताया।
बिना किसी मुआवजे की उम्मीद किए उनका आत्मबलिदान और पुरस्कार की अपेक्षा किए बिना उनकी निष्ठा। यही हमारी सेना की सर्वोच्च वफादारी की परिभाषा है।
इस नीति के सबूत सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं हैं। सियोल की राष्ट्रीय खुफिया सेवा को मारे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों के पास से ऐसे ज्ञापन मिले, जो इन चरम आदेशों की ओर इशारा करते हैं। इस साल की शुरुआत में यूक्रेन की हिरासत में मौजूद उत्तर कोरिया के सिर्फ दो ज्ञात युद्धबंदियों में से एक का वीडियो सामने आया। उस सैनिक ने कैमरे पर अफसोस जताते हुए कहा कि बाकी सभी ने खुद को उड़ा लिया, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। खबरों के मुताबिक, दोनों युद्धबंदियों ने दक्षिण कोरिया में बसने की इच्छा जताई है।
किम ने सीधे हमलों में या छर्रे लगने से मारे गए सैनिकों की भी प्रशंसा की। उन्होंने उन्हें पार्टी का वफादार योद्धा और देशभक्त बताया। सामूहिक मौत को सामूहिक वफादारी के रूप में पेश करके शासन भारी नुकसान को स्वीकार्य दिखाने और घरेलू नियंत्रण के लिए उसे राजनीतिक पूंजी में बदलने की कोशिश कर रहा है।
स्मारक की बनावट
विदेशों में सैन्य अभियानों के दौरान किए गए युद्ध कारनामों का स्मारक संग्रहालय सिर्फ नामों की दीवार नहीं है। यह बलिदान और सामाजिक व्यवस्था को लेकर सरकारी प्रचार को मजबूत करने के लिए यादगारों का सावधानी से रचा गया एक पदानुक्रम है। कोरियाई शोध कंपनी एसआई एनालिटिक्स ने परिसर में स्मरण का एक श्रेणीबद्ध ढांचा पहचाना है।
असाधारण वीरता दिखाने वाले सैनिकों को अलग-अलग समाधि-पत्थरों वाली बाहरी कब्रें दी गई हैं। अन्य सैनिकों की स्मृति केंद्रीय इमारत के भीतर रखे कलशों के जरिए संजोई गई है। अप्रैल की शुरुआत में ली गई उपग्रह तस्वीरों में कब्रिस्तान के पश्चिमी हिस्से में करीब 140 और पूर्वी हिस्से में 138 कब्रें दिखती हैं। यानी लगभग 278 लोगों के लिए चिह्नित कब्रें हैं। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एनालिसिस के पूर्व शोधकर्ता किम जिन-मू ने कहा कि बाहर दफन लोगों में बरामद शव, वरिष्ठ अधिकारी या आत्मबलिदान के लिए विशेष सम्मान पाने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
कब्रिस्तान के बीच स्थित धूसर इमारत तीन मंजिला अस्थि-कलश गृह लगती है। शोधकर्ता सोंगहाक चुंग के मुताबिक, इसकी पूरी दीवार अवशेष रखने के लिए जालीदार खानों से भरी हुई दिखती है। कार्यालयों और प्रदर्शनी स्थलों को छोड़ भी दें, तो अंदर का यह भंडार कम से कम 1,000 लोगों के अवशेष रख सकता है। इससे संकेत मिलता है कि सम्मानित मृतकों में से अधिकतर को दफनाने के बजाय उनकी राख के रूप में रखा गया है।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय का कहना है कि यह पुष्टि करना मुश्किल है कि मारे गए सभी सैनिकों को दीवारों पर स्मरण किया गया है या नहीं। हालांकि, शोधकर्ता किम का मानना है कि कुर्स्क में मारे गए सभी उत्तर कोरियाई सैनिकों के नाम उकेरे जाने की पूरी संभावना है। उनका कहना है कि यह स्मारक राज्य के लिए बलिदान देने वालों को सम्मानित करने और जनता का समर्थन बनाए रखने के लिए बनाया गया है। नाम छोड़ देने से शोकाकुल परिवारों में असंतोष फैलने और परियोजना के उद्देश्य को नुकसान पहुंचने का जोखिम हो सकता है।
कुर्स्क अभियान और उसके बाद
इस स्मारक को समझने के लिए उस अभियान को समझना जरूरी है, जिसने इसे भर दिया। अगस्त 2024 में यूक्रेनी बलों ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में सीमा पार अचानक हमला किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार था जब विदेशी सैनिकों ने रूस के संप्रभु क्षेत्र पर कब्जा किया। इस घुसपैठ से रसद केंद्रों को खतरा पैदा हुआ और क्रेमलिन को काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
मॉस्को ने उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती बढ़ाकर अपनी रक्षा मजबूत की। सैनिकों के स्थानांतरण की पहली खबरें अक्टूबर 2024 में सामने आईं। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी ने शुरुआत में करीब 1,500 सैनिकों की आवाजाही दर्ज की। बाद में कुल तैनाती का अनुमान 11,000 से 20,000 तक पहुंच गया। इन बलों को कुर्स्क ओब्लास्त में लड़ाई के लिए तैनात किया गया और खबरों के मुताबिक, उन्होंने पड़ोसी सुमी ओब्लास्त में ड्रोन अभियानों और तोपखाने के लिए लक्ष्य पहचानने में भी मदद की। रूस ने अगस्त 2025 तक कुर्स्क पर पूरा नियंत्रण फिर से हासिल करने की घोषणा की, हालांकि सीमावर्ती इलाकों में लड़ाई जारी रही।
जवाबी हमले में उत्तर कोरियाई इकाइयों को भारी नुकसान हुआ। आधुनिक ड्रोन युद्ध का सीमित अनुभव, कठोर कमान व्यवस्था और रूसी बलों के साथ संवाद की बाधाओं ने हताहतों की संख्या बढ़ाने में भूमिका निभाई। तैनात सभी सैनिक सीधे युद्ध में नहीं लगे थे। दिसंबर 2025 में किम जोंग उन ने इंजीनियरों की 528वीं रेजिमेंट का घर लौटने पर स्वागत किया। इस रेजिमेंट ने कुर्स्क में बारूदी सुरंगें हटाने और पुनर्निर्माण का काम किया था। उस समारोह में किम ने इंजीनियरिंग इकाई के नौ सैनिकों की हृदयविदारक मौतों का दुर्लभ उल्लेख किया। विश्लेषकों ने इसे ऐसा नपा-तुला खुलासा माना जिसका मकसद बलिदान स्वीकार करते हुए जोखिम को कम करके दिखाना था।
सैनिकों के अलावा, उत्तर कोरिया ने कुर्स्क के पुनर्निर्माण में मदद के लिए हजारों नागरिक कामगार भेजने का वादा भी किया। यह उस व्यापक ढर्रे का हिस्सा है जिसके तहत प्योंगयांग हथियारों और सैनिकों के साथ-साथ मजदूर भी विदेश भेजता है। अक्सर उनकी मजदूरी राज्य तक पहुंचाने की व्यवस्था होती है।
खून से बना गठबंधन
यह स्मारक सिर्फ अतीत की ओर नहीं देखता। यह उस भविष्य की नींव रखता है जिसे प्योंगयांग और मॉस्को सक्रिय रूप से गढ़ रहे हैं। जून 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और किम ने एक संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें किसी भी देश के खिलाफ आक्रमण होने पर एक-दूसरे को सैन्य सहायता देने का वादा किया गया। किम ने इसे अब तक का सबसे मजबूत समझौता बताया। उसी साल नवंबर में उत्तर कोरिया ने इस संधि की पुष्टि की।
प्योंगयांग को इससे काफी लाभ मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया को अनाज की बड़ी खेप, विदेशी मुद्रा, उन्नत उपग्रह तकनीक और सैन्य तकनीकी सहायता मिली। एक अनुमान के मुताबिक, सैनिकों की मदद और हथियारों के बदले क्रेमलिन ने 14.4 अरब डॉलर तक का भुगतान किया हो सकता है। हथियारों में तोपखाने के गोले, रॉकेट और मिसाइलें शामिल थीं, जिनकी आपूर्ति 2023 से की जा रही है। कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रही अर्थव्यवस्था के लिए यह व्यवस्था जीवनरेखा का काम करती है।
सहयोग लगातार गहरा रहा है। बेलौसोव की यात्रा में 2027 से 2031 तक की द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना पर चर्चा हुई। पश्चिमी विश्लेषकों को आशंका है कि इसके तहत उत्तर कोरिया रूस को बैलिस्टिक मिसाइलों के पुर्जे दे सकता है और बदले में रूसी परमाणु पनडुब्बियों के डिजाइन या अन्य उन्नत तकनीक हासिल कर सकता है। इस तरह के आदान-प्रदान से पूर्वोत्तर एशिया का सुरक्षा परिदृश्य बदल सकता है और प्योंगयांग के परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रमों पर लगाम लगाने की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं।
रूस भी अपना स्मारक बना रहा है। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मार्च में कुर्स्क क्षेत्र में दोनों देशों के बीच युद्धकालीन भाईचारे के सम्मान में स्मारक बनाने का वादा किया था। उत्तर कोरिया में मॉस्को के राजदूत प्योंगयांग में शिलान्यास समारोह में शामिल हुए। दोनों देशों की ओर से उठाए गए ये कदम संकेत देते हैं कि दोनों राजधानियां इस गठबंधन को अस्थायी नहीं, स्थायी मानती हैं।
अगली पीढ़ी को लामबंद करना
मृतकों को स्मारक में जगह देते हुए भी प्योंगयांग उनकी जगह लेने के लिए और सैनिक तैयार कर रहा है। राजधानी में आयोजित समाजवादी देशभक्त युवा लीग की 11वीं कांग्रेस में किम जोंग उन ने 14 से 30 वर्ष की आयु के नागरिकों को राज्य के लक्ष्यों की अगुआई करने वाला वर्ग बताया। सत्तारूढ़ पार्टी ने युवाओं की वफादारी को रूस में तैनाती से सीधे जोड़ा। उसने लिखा कि विदेशों में अभियानों के लिए भेजे गए युवा सैनिक देश के सम्मान की रक्षा करते हुए बम और आग की लपटें बन गए हैं।
इस संदेश के दो मकसद हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चेतावनी देता है कि उत्तर कोरिया अपने सैनिकों की भरपाई कर सकता है। देश के भीतर यह ऐसे समय वैचारिक नियंत्रण कसता है जब किम ने विदेशी सांस्कृतिक प्रभाव पर पाबंदियां बढ़ाई हैं। दक्षिण कोरियाई संगीत, फिल्में और बोलचाल की भाषा सुनना या देखना अब गंभीर राजनीतिक अपराध माना जाता है। शासन चाहता है कि अगली पीढ़ी व्यक्तिगत अस्तित्व से अधिक राज्य के प्रति वफादारी को अहमियत दे।
यह भर्ती अभियान किम की कम उम्र की बेटी के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी बढ़ने के दौरान चल रहा है। माना जाता है कि उनकी बेटी का नाम जू ए है। राजवंशीय निरंतरता को सैन्य बलिदान से जोड़कर शासन परिवारों को खून और सम्मान के जरिए राज्य से बांधने की कोशिश कर रहा है। किम के लिए यह स्मारक सिर्फ मृतकों को श्रद्धांजलि नहीं है। यह पश्चिमी दबाव के खिलाफ अवज्ञा के नए दौर का स्मारक है, जिसे पूर्वी यूरोप के मैदानों में उनके सैनिकों की जान देकर सुरक्षित किया गया है।
जानने योग्य बातें
- उत्तर कोरिया ने रूस के लिए कुर्स्क क्षेत्र में लड़ते हुए मारे गए सैनिकों के सम्मान में प्योंगयांग में स्मारक का अनावरण किया। स्वतंत्र विश्लेषण के मुताबिक, इसकी दीवारों पर करीब 2,300 नाम उकेरे गए हैं।
- दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी का अनुमान है कि रूस में 11,000 से 20,000 उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात किए गए थे। स्रोत और तारीख के आधार पर, कुल हताहतों में मारे गए सैनिकों की संख्या करीब 2,000 से 6,000 तक बताई जाती है।
- रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव और स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन अनावरण समारोह में शामिल हुए और 2031 तक दीर्घकालिक सैन्य सहयोग योजनाओं की घोषणा की।
- किम जोंग उन ने पकड़े जाने से बचने के लिए ग्रेनेड से खुद को मारने वाले सैनिकों की प्रशंसा की। इससे आत्मसमर्पण के बजाय आत्महत्या करने की युद्धक्षेत्र नीति की पुष्टि हुई।
- इस परिसर में स्मारक दीवारें, करीब 278 कब्रों वाला कब्रिस्तान और 1,000 से अधिक अस्थि-कलश रखने की क्षमता वाला कलश गृह शामिल हैं। यहां पूर्व सैनिकों और शोकाकुल परिवारों के लिए नए आवास भी बनाए गए हैं।
- माना जाता है कि सैन्य मदद के बदले उत्तर कोरिया को खाद्य सामग्री, धन, तकनीकी सहायता और संभवतः अरबों डॉलर मिले हैं।
- रूस ने कुर्स्क में जवाबी स्मारक बनाने का वादा किया है, जबकि उत्तर कोरिया 14 साल तक की उम्र के युवाओं को भविष्य में विदेशों में सैन्य तैनाती के लिए तैयार करता दिख रहा है।






