10,000 डॉलर का सवाल: ताइवान ने फिर कैसे हासिल की बढ़त
दो दशक से अधिक समय में पहली बार दक्षिण कोरिया आर्थिक समृद्धि के मामले में ताइवान से पीछे है, और यह अंतर अब काफी बढ़ने वाला है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य के अनुसार, पांच वर्षों के भीतर ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी कोरिया से 10,000 डॉलर से अधिक हो जाने का अनुमान है। यह उस बड़े उलटफेर को पक्का करेगा जिसकी शुरुआत 2025 में हुई, जब इस द्वीपीय देश ने इस पैमाने पर सियोल के 22 साल के दबदबे को समाप्त कर दिया।
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आईएमएफ के अनुमानों से दो अर्थव्यवस्थाओं के अहम मोड़ों पर अलग-अलग दिशाओं में जाने की साफ तस्वीर सामने आती है। बढ़ते कर्ज और मुद्रा पर दबाव के बीच दक्षिण कोरिया अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि ताइवान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मांग में अभूतपूर्व उछाल का लाभ उठाते हुए अपने एकीकृत सेमीकंडक्टर तंत्र के सहारे तेज वृद्धि दर्ज की है। इसके असर महज आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं। यह पूर्वी एशिया की उन आर्थिक ताकतों के क्रम में संभावित बदलाव का संकेत है, जो 2000 के शुरुआती वर्षों से लगभग स्थिर रहा है।
15 अप्रैल, 2026 को जारी आईएमएफ रिपोर्ट के आंकड़ों को बैंक ऑफ कोरिया और वित्तीय प्राधिकरणों ने संकलित किया है। इनके अनुसार, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच का अंतर इस साल 4,691 डॉलर से बढ़कर 2031 तक 10,082 डॉलर हो जाएगा। इस अवधि में ताइवान की वैश्विक रैंकिंग 32वें से 30वें स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है, जबकि 197 देशों में दक्षिण कोरिया 40वें से खिसककर 41वें स्थान पर आ जाएगा।
आंकड़ों में: बढ़ती आर्थिक खाई
विस्तृत अनुमान ताइवान के पक्ष में लगातार बेहतर होती दिशा दिखाते हैं। इस साल दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति जीडीपी 37,412 डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 36,227 डॉलर से मामूली 3.3 प्रतिशत की वृद्धि होगी। सियोल के 2028 में 40,695 डॉलर के साथ आखिरकार 40,000 डॉलर की प्रतीकात्मक सीमा पार करने का अनुमान है, लेकिन ताइवान की बड़ी बढ़त के कारण इस उपलब्धि का महत्व घट जाता है।
ताइवान के आंकड़े बिल्कुल अलग कहानी बताते हैं। इस साल उसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी 6.6 प्रतिशत बढ़कर 42,103 डॉलर पहुंचने का अनुमान है। वह पहले ही कोरिया से पहले 40,000 डॉलर का स्तर पार कर चुका है। 2029 तक ताइवान के 50,370 डॉलर के साथ 50,000 डॉलर के दौर में प्रवेश करने की उम्मीद है, जबकि कोरिया तब भी 40,000 डॉलर के करीब पहुंच रहा होगा। सियोल के लिए हर साल बढ़ता अंतर चिंता का विषय है: 2027 में यह 5,880 डॉलर, 2028 में 6,881 डॉलर, 2029 में 7,916 डॉलर और 2030 में 9,073 डॉलर होगा। अगले साल यह 10,000 डॉलर से अधिक हो जाएगा।
2031 के अंतिम अनुमान में ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 56,101 डॉलर और कोरिया की 46,019 डॉलर होगी। स्थानीय जीवन-यापन लागत के अंतर को ध्यान में रखने वाली क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर यह फर्क और भी बड़ा हो जाता है। इस साल ताइवान की पीपीपी-समायोजित प्रति व्यक्ति जीडीपी 98,051 डॉलर है, जबकि कोरिया की 68,624 डॉलर। अनुमान है कि 2031 तक ताइवान का आंकड़ा 124,000 डॉलर के करीब पहुंच जाएगा, जबकि कोरिया करीब 83,696 डॉलर पर रहेगा।
एशिया की पारंपरिक आर्थिक महाशक्ति जापान, दोनों पड़ोसियों से पीछे है। इस साल उसकी अनुमानित प्रति व्यक्ति जीडीपी 35,703 डॉलर है। 2029 तक इसके केवल 40,398 डॉलर पहुंचने की उम्मीद है, जो कोरिया के मुकाबले एक साल बाद होगा। 2031 तक जापान का आंकड़ा 43,038 डॉलर रहने का अनुमान है। हालांकि, जापान पर कोरिया की थोड़े समय की बढ़त से खास राहत नहीं मिलती, क्योंकि बड़ी चुनौती ताइवान की तेज होती वृद्धि है।
चिप का अंतर: एआई से ताइवान को क्यों फायदा
ताइवान की आर्थिक रफ्तार के पीछे वैश्विक सेमीकंडक्टर सुपर-साइकिल है, खास तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बुनियादी ढांचे की विस्फोटक मांग। दोनों देश दुनिया के प्रमुख चिप उत्पादकों में हैं, लेकिन मौजूदा तकनीकी परिदृश्य में उनके औद्योगिक ढांचे में अहम अंतर है।
ताइवान ने फाउंड्री क्षेत्र में दबदबा कायम किया है और Nvidia, Apple तथा AMD जैसी कंपनियों के लिए उन्नत प्रोसेसर बनाता है। दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC), एआई से प्रेरित उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग चिप की मांग की सबसे बड़ी लाभार्थी बन गई है। फाउंड्री मॉडल से ताइवान को डिजाइन में सहयोग से लेकर उन्नत पैकेजिंग तक, एआई की पूरी आपूर्ति शृंखला में मूल्य हासिल करने का मौका मिलता है।
इसके उलट, दक्षिण कोरिया ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी सफलता मुख्य रूप से मेमोरी चिप, खासकर डीआरएएम और नैंड फ्लैश स्टोरेज के दम पर हासिल की है। कोरिया सेंटर फॉर इंटरनेशनल फाइनेंस के अनुसार, कोरिया के 60 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर निर्यात मेमोरी उत्पादों से आते हैं। एआई प्रणालियों के लिए जरूरी होने के बावजूद, मेमोरी चिप की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव रहता है और चीनी निर्माताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे लाभ का मार्जिन घटता है।
केसीआईएफ के शोधकर्ताओं ने हालिया विश्लेषण में इन संरचनात्मक अंतरों को रेखांकित किया। ताइवान का पूरी तरह एकीकृत सेमीकंडक्टर तंत्र एआई की बढ़ती मांग पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। इसमें कच्चे वेफर के उत्पादन से लेकर उन्नत पैकेजिंग और परीक्षण तक सब शामिल है। वहीं, कोरिया को आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और मेमोरी उत्पादन से आगे अपना औद्योगिक आधार बढ़ाने में अब भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
वृद्धि दरों का अंतर इन संरचनात्मक वास्तविकताओं को दर्शाता है। मार्च के अंत में संकलित केसीआईएफ के आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख वैश्विक निवेश बैंक 2026 में ताइवान की आर्थिक वृद्धि औसतन 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगा रहे हैं। कुछ ही सप्ताह पहले यह अनुमान 6.2 प्रतिशत था, जिसे उम्मीद से मजबूत एआई मांग के चलते बढ़ाया गया। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया के लिए वृद्धि दर 2 प्रतिशत के करीब पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ अनुमान इसे 1 प्रतिशत के आसपास रखते हैं, जबकि पिछले साल ताइवान की वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत रही थी।
मुद्रा और कर्ज: कोरिया की बढ़ती चुनौतियां
औद्योगिक ढांचे के अलावा, दक्षिण कोरिया बढ़ते राजकोषीय दबावों का सामना कर रहा है, जो भविष्य की वृद्धि को सीमित कर सकते हैं। आईएमएफ की फिस्कल मॉनिटर रिपोर्ट का अनुमान है कि कोरिया का सरकारी कर्ज-जीडीपी अनुपात इस साल के 54.4 प्रतिशत से बढ़कर अगले साल 56.6 प्रतिशत हो जाएगा। यह उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के औसत से अधिक होगा जिनकी मुद्रा वैश्विक आरक्षित मुद्रा नहीं है।
अर्थशास्त्रियों को कर्ज का यह रुझान इसलिए चिंतित करता है क्योंकि कर्ज आर्थिक विस्तार से तेज बढ़ रहा है। 2020 से कोरिया की नाममात्र जीडीपी औसतन सालाना 5.3 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि राष्ट्रीय कर्ज में हर साल 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ है कि कर्ज का बोझ उसे चुकाने की अर्थव्यवस्था की क्षमता से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। आईएमएफ को यह रुझान 2031 तक जारी रहने की उम्मीद है, जब कर्ज-जीडीपी अनुपात 63.1 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा।
आरक्षित और गैर-आरक्षित मुद्रा वाली अर्थव्यवस्थाओं का यह अंतर यहां खास मायने रखता है। अमेरिका, जापान और ब्रिटेन जैसे जी7 देशों का कर्ज अनुपात 120 से 130 प्रतिशत है, लेकिन उनकी मुद्राएं वैश्विक आरक्षित मुद्राएं हैं। इससे बाहरी झटकों के दौरान उन्हें पूंजी के पलायन और विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलती है। कोरिया के पास यह सुरक्षा नहीं है, इसलिए वह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील है।
मुद्रा की चाल ने भी कोरिया के नाममात्र जीडीपी आंकड़ों पर दबाव डाला है। इस साल डॉलर के मुकाबले वॉन का मूल्य ताइवानी डॉलर की तुलना में दोगुने से भी अधिक गिरा है, जिससे डॉलर में मापे गए कोरियाई उत्पादन का मूल्य घटा है। महंगाई भी एक और बाधा है। 2026 में कोरिया की महंगाई दर 2.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो आम तौर पर तय 2 प्रतिशत के लक्ष्य से थोड़ी अधिक और उसकी आर्थिक वृद्धि दर से ऊंची है। ताइवान में कीमतें स्थिर हैं। वहां महंगाई दर केवल 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो लक्ष्य से कम है। इससे ऊंची वृद्धि और नियंत्रित कीमतों का दुर्लभ मेल बनता है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: सबकॉन्ट्रैक्टर बनने का जोखिम
अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि संरचनात्मक सुधारों के बिना कोरिया को प्रौद्योगिकी की श्रेणी में स्थायी रूप से दूसरे दर्जे पर जाने का जोखिम है। नोमुरा सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री पार्क जंग-वू ने मेमोरी सेमीकंडक्टर पर कोरिया की जरूरत से ज्यादा निर्भरता पर दो टूक आकलन दिया।
अगर एआई के दौर में कोरिया केवल मेमोरी सेमीकंडक्टर के निर्यात पर निर्भर रहा, तो वह ताइवानी कंपनियों का सबकॉन्ट्रैक्टर बनने का जोखिम उठाएगा। वृद्धि बनाए रखने के लिए कोरिया को अपने सेमीकंडक्टर और एआई तंत्र का विस्तार करना होगा। तकनीकी क्षेत्र को समर्थन देने के लिए वित्तीय निवेश मजबूत किया जाना चाहिए। वेंचर कैपिटल पर केंद्रित विशेष वित्तीय मध्यस्थों के जरिये वित्तपोषण बढ़ाना, पूंजी को कुशलता से सही जगह पहुंचाने में अहम होगा।
आपूर्ति शृंखला की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सबकॉन्ट्रैक्टर बनने की चेतावनी खास महत्व रखती है। जैसे-जैसे स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और डेटा सेंटर में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, अधिक मूल्य उन्नत लॉजिक चिप और विशेष एआई प्रोसेसर में केंद्रित हो रहा है। इन क्षेत्रों में ताइवान की बाजार हिस्सेदारी मजबूत है। मेमोरी चिप जरूरी तो हैं, लेकिन वे एक सामान्यीकृत उत्पाद श्रेणी हैं, जहां कोरियाई कंपनियों को कीमतों पर लगातार प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ती है।
केसीआईएफ के शोधकर्ता किम मी-सुंग और ली ची-हून ने जोर दिया कि अंतर कम करने में समय और बड़े संरचनात्मक बदलाव लगेंगे। उन्होंने कहा कि कोरिया का निर्यात ढांचा तेजी से असंतुलित हो रहा है। एक ही उत्पाद श्रेणी पर भारी निर्भरता अर्थव्यवस्था को किसी खास क्षेत्र की मंदी के जोखिम में डालती है।
ताइवान की नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल के प्रमुख येह चुन-ह्सिएन ने अपने द्वीप की प्रगति का श्रेय टीएसएमसी की जबरदस्त सफलता और चिप पर निर्भर उद्योगों की तेजी से बढ़ती मांग को दिया। मेमोरी पर कोरिया की निर्भरता के उलट, ताइवान का तंत्र डिजाइन कंपनियों, उपकरण आपूर्तिकर्ताओं और पैकेजिंग सेवाओं तक फैला है। इससे ऐसे नेटवर्क प्रभाव पैदा होते हैं जो उसकी प्रतिस्पर्धी बढ़त को और मजबूत करते हैं।
एक दौर का अंत: कोरिया की 22 साल की बढ़त
2025 का उलटफेर पूर्वी एशिया के आर्थिक संबंधों में ऐतिहासिक मोड़ था। 2003 में अपने पड़ोसी को पीछे छोड़ने के बाद से कोरिया लगातार 22 वर्षों तक प्रति व्यक्ति जीडीपी में ताइवान से आगे रहा था। यह स्थान गंवाने का असर कोरिया की नीतिगत चर्चाओं में गहराई से महसूस किया गया, जहां ताइवान के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता का पैमाना रही है।
जब पिछली बार ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी कोरिया से अधिक थी, तब वैश्विक अर्थव्यवस्था आज से बिल्कुल अलग थी। स्मार्टफोन नहीं थे, सोशल मीडिया शुरू नहीं हुआ था और चीन का आर्थिक प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित था। खास तौर पर प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दबदबे के दम पर ताइवान की बढ़त फिर कायम होने से यह सवाल उठता है कि क्या कोरिया की औद्योगिक नीतियां प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था और एआई के बदलाव के अनुरूप पर्याप्त रूप से ढली हैं।
अक्टूबर 2025 में स्थिति औपचारिक रूप से बदली, जब आईएमएफ के आंकड़ों में ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 11.1 प्रतिशत बढ़कर 37,827 डॉलर और कोरिया की 0.8 प्रतिशत घटकर 35,962 डॉलर दर्ज हुई। यह अंतर ऐसे समय आया जब कोरिया ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल और जहाज निर्माण समेत अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में मजबूत बना हुआ था। इससे जाहिर होता है कि अब राष्ट्रीय आर्थिक प्रदर्शन पर सेमीकंडक्टर का कितना निर्णायक असर है।
एशिया के व्यापक संदर्भ में दोनों अर्थव्यवस्थाएं सिंगापुर और मकाऊ जैसे शहर-राज्यों से पीछे हैं। सिंगापुर 94,480 डॉलर प्रति व्यक्ति के साथ क्षेत्र में सबसे आगे है और मकाऊ 74,920 डॉलर पर है। हांगकांग 56,840 डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है। नई व्यवस्था में ताइवान पूर्वी एशिया में चौथे और कोरिया पांचवें स्थान पर होगा, जबकि जापान छठे स्थान पर रहेगा।
क्या कोरिया अंतर कम कर सकता है?
चिंताजनक अनुमानों के बावजूद, कोरिया के कुछ अधिकारी आईएमएफ के आंकड़ों की जरूरत से ज्यादा व्याख्या करने के प्रति आगाह करते हैं। योजना और बजट मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि आईएमएफ के कर्ज संबंधी आंकड़े हर साल संशोधित होने वाली राजकोषीय प्रबंधन योजनाओं पर आधारित हैं और नीतिगत कदमों के अनुसार बदल सकते हैं। अधिकारी ने जोर दिया कि जी20, जी7 और यूरोपीय संघ के औसत के मुकाबले कोरिया का अनुमानित कर्ज स्तर अब भी अपेक्षाकृत कम है।
आईएमएफ की निदेशक चोई जी-यंग ने भी कोरिया के कर्ज वर्गीकरण को लेकर चिंता कम करते हुए कहा कि पिछले फिस्कल मॉनिटर अनुमानों की तुलना में कर्ज अनुपात का अनुमान वास्तव में घटा है। उन्होंने हाल के वर्गीकरण को चेतावनी के रूप में देखने को अतिप्रतिक्रिया बताया और कहा कि मध्यम अवधि के राजकोषीय घाटे के अनुमान भी कम किए गए हैं।
हालांकि, संरचनात्मक अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि केवल राजकोषीय समायोजन से औद्योगिक क्षेत्र की बुनियादी चुनौती हल नहीं होगी। फाउंड्री सेवाओं और एआई चिप डिजाइन में विविधता लाने की कोरिया की कोशिशें ताइवान के मजबूत तंत्र के मुकाबले अभी शुरुआती दौर में हैं। कोरिया की सेमीकंडक्टर दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix को मेमोरी में विश्वस्तरीय क्षमता हासिल है, लेकिन वे लॉजिक चिप और फाउंड्री सेवाओं में वैसा दबदबा कायम नहीं कर पाई हैं।
वेंचर कैपिटल का माहौल भी एक और बाधा है। विशेष वित्तीय मध्यस्थों की पार्क जंग-वू की सिफारिश कोरिया के स्टार्टअप तंत्र की एक जानी-पहचानी कमजोरी को उजागर करती है। ताइवान को जहां सिलिकॉन वैली की आपूर्ति शृंखलाओं और वेंचर नेटवर्क से गहरा जुड़ाव हासिल है, वहीं कोरिया की वित्तपोषण व्यवस्था परंपरागत रूप से बड़े समूहों को तरजीह देती रही है। इससे एआई नवाचार की अगली लहर को आगे बढ़ा सकने वाले चुस्त स्टार्टअप पीछे रह जाते हैं।
निष्कर्ष
- ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी (42,103 डॉलर) के 2031 तक कोरिया (37,412 डॉलर) से 10,000 डॉलर से अधिक हो जाने का अनुमान है (56,101 डॉलर बनाम 46,019 डॉलर)
- 2025 में 22 वर्षों में पहली बार ताइवान ने कोरिया को पीछे छोड़ा और इस पैमाने पर सियोल की लंबे समय से चली आ रही बढ़त समाप्त हुई
- इस अंतर की वजह एआई चिप उत्पादन में ताइवान का एकीकृत फाउंड्री तंत्र का दबदबा और मेमोरी चिप (डीआरएएम) में कोरिया का संकेंद्रण है
- ताइवान की अर्थव्यवस्था सालाना 7-8% बढ़ रही है, जबकि कोरिया को 2% तक पहुंचने में संघर्ष करना पड़ रहा है। पिछले साल ताइवान की वृद्धि दर कोरिया से आठ गुना अधिक थी
- कोरिया का सरकारी कर्ज (सालाना 9%) अर्थव्यवस्था (5.3%) से तेजी से बढ़ रहा है। अगले साल कर्ज-जीडीपी अनुपात 56% से अधिक होने का अनुमान है
- वैश्विक रैंकिंग में बदलाव होगा: 2031 तक ताइवान 32वें से 30वें स्थान पर पहुंचेगा, जबकि कोरिया 40वें से 41वें स्थान पर खिसकेगा
- अर्थशास्त्रियों की चेतावनी है कि मेमोरी सेमीकंडक्टर से आगे विविधता लाने में नाकाम रहने पर कोरिया ताइवान का "सबकॉन्ट्रैक्टर" बन सकता है
- क्रय शक्ति समता की तुलना में अंतर और बड़ा है: फिलहाल ताइवान 98,051 डॉलर और कोरिया 68,624 डॉलर पर है






