उत्तर कोरिया का नौसैनिक दांव: अमेरिकी प्रशांत ठिकानों के लिए खतरा बने विध्वंसक पोत का परीक्षण
उत्तर कोरिया ने अब तक की अपनी सबसे उन्नत नौसैनिक हथियार प्रणाली का नाटकीय रूप से लाइव-फायर प्रदर्शन किया। देश के पश्चिमी तट के पास चोए ह्योन श्रेणी के विध्वंसक पोत से रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलें और जहाज-रोधी हथियार दागे गए। अप्रैल 2026 के इस अभ्यास में पोत की एकीकृत युद्ध प्रणालियों की क्षमता परखी गई और ऐसी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया, जो प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बदलने का खतरा पैदा करती हैं। इससे पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने उन परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों की मारक दूरी में आ सकते हैं, जिन्हें मोबाइल समुद्री मंचों से दागा जा सकता है।
विषय-सूची
कोरियाई जन सेना की नौसेना ने परिचालन परिस्थितियों में विध्वंसक पोत के उन्नत हथियारों और चालक दल के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए समन्वित हमले का परिदृश्य तैयार किया। अभ्यास के दौरान दो रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलें दो घंटे से अधिक समय तक उड़ीं, जबकि तीन जहाज-रोधी मिसाइलें 30 मिनट से अधिक समय तक हवा में रहीं। सरकारी मीडिया के अनुसार, उन्होंने बेहद सटीक निशाने से अपने लक्ष्य भेदे। यह प्रदर्शन प्योंगयांग के महत्वाकांक्षी नौसैनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम में एक अहम पड़ाव है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य ऐतिहासिक रूप से तटीय रक्षा पर केंद्रित नौसेना को खुले समुद्र में दूर तक शक्ति दिखाने में सक्षम बल में बदलना है, जो कोरियाई प्रायद्वीप से काफी दूर तक काम कर सके।
युद्धपोतों की नई श्रेणी
चोए ह्योन उत्तर कोरिया की नौसैनिक पोत-रचना में बड़ा बदलाव दर्शाता है। लगभग 144 मीटर लंबा और अनुमानित 5,000 टन विस्थापन वाला यह निर्देशित-मिसाइल विध्वंसक पोत प्योंगयांग के जहाज-निर्माण केंद्रों में अब तक बना सबसे बड़ा सतही लड़ाकू पोत है। इसे पहली बार 25 अप्रैल 2025 को नाम्पो के वाणिज्यिक बंदरगाह से जलावतरण किया गया था। इसकी बाहरी बनावट चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के उन्नत विध्वंसक पोतों से कुछ हद तक मिलती-जुलती है, हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि इसकी वास्तविक युद्ध क्षमता संभवतः समकक्ष देशों से पीछे है।
इस विध्वंसक पोत की ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण प्रणाली में अलग-अलग व्यास वाले 74 सेल हैं। इस व्यवस्था से पोत एक ही मंच से कई तरह के हथियार दाग सकता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विश्लेषण के अनुसार, इनमें से 44 सेल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए हैं, जबकि 30 बड़े सेल क्रूज़ मिसाइलों और सामरिक बैलिस्टिक हथियारों के लिए हैं। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बयानों के अनुसार, इस शस्त्रागार में हाइपरसोनिक रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलें और परमाणु आयुध से लैस सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं।
शायद सबसे अहम बात यह है कि चोए ह्योन में रूस की पैंटसिर-एम वायु रक्षा प्रणाली लगी है। उत्तर कोरियाई सेवा में इस उन्नत निकटवर्ती रक्षा हथियार की यह पहली तैनाती है। पैंटसिर को हेलिकॉप्टरों, मानवरहित हवाई वाहनों और क्रूज़ मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है। इससे प्योंगयांग और मॉस्को के बीच पर्याप्त सैन्य-तकनीकी सहयोग के संकेत मिलते हैं। इस विध्वंसक पोत में चरणबद्ध ऐरे रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और 127 मिमी की मुख्य नौसैनिक तोप भी है, जो बहुस्तरीय रक्षा और हमले की क्षमता तैयार करती है।
संयुक्त राष्ट्र कमान, संयुक्त बल कमान और कोरिया में अमेरिकी सेना के कमांडर जनरल जेवियर टी. ब्रनसन ने सहयोगी देशों के अभ्यासों की रक्षात्मक प्रकृति पर जोर देते हुए बदलते खतरे के माहौल को स्वीकार किया।
यूएफएस एक रक्षात्मक अभ्यास है, जिसका उद्देश्य हमारी तैयारी बेहतर करना, हमारी संयुक्त क्षमताओं को परखना और हमारे सहयोगी तथा यूएनसी के साथ निर्बाध तालमेल कायम करना है। तैयार रहने का कोई विकल्प नहीं है। आज लड़ने और आक्रामकता को रोकने की हमारी क्षमता सीधे इस बात पर निर्भर करती है कि हम आज किस तरह अभ्यास करते हैं।
जनरल ने उल्ची फ्रीडम शील्ड 25 के संदर्भ में ये टिप्पणियां कीं। अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह बड़ा संयुक्त अभ्यास 18 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक चला और सभी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान पर केंद्रित था।
दोहरी हमले की क्षमता और परमाणु एकीकरण
हालिया परीक्षण ने दिखाया कि यह विध्वंसक पोत जमीन और समुद्र पर एक साथ हमले कर सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन और रूस की नौसेनाओं के अलावा ऐसी संयुक्त क्षमता बहुत कम देखने को मिलती है। सतही पोतों से लंबी दूरी तक जमीन पर हमला करने वाली क्रूज़ मिसाइलें दुनिया में अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं। इसलिए उत्तर कोरिया की इस तकनीक तक पहुंच क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से खास मायने रखती है।
सरकारी मीडिया ने रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलों के प्रक्षेपण को खास तौर पर रेखांकित किया। प्योंगयांग इस शब्द का इस्तेमाल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम प्रणालियों के लिए करता है। बताया गया कि मिसाइलें 7,869 से 7,920 सेकंड तक उड़ीं और कम ऊंचाई पर उड़ान भरती रहीं। उनका उड़ान मार्ग इलाके की बनावट का अनुसरण करने के लिए तैयार किया गया था, ताकि पारंपरिक रडार की पकड़ से बचा जा सके। इन हथियारों में आम तौर पर टर्बोफैन इंजन और जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली होती है, जिसे उपग्रह से मिलने वाले अपडेट से मदद मिलती है। हालिया सुधारों में इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान वाले माहौल में सटीकता बनाए रखने के लिए जामिंग-रोधी क्षमता पर ध्यान दिया गया है।
क्रूज़ मिसाइलों के साथ जिन जहाज-रोधी मिसाइलों का परीक्षण किया गया, वे उड़ान के अंतिम चरण में सक्रिय रडार खोजक का इस्तेमाल करती हैं। इससे वे चलते हुए नौसैनिक लक्ष्यों को खुद पहचान सकती हैं। यह दोहरी क्षमता चोए ह्योन को दुश्मन के बेड़ों के खिलाफ समुद्री कार्रवाई और सैन्य ठिकानों तथा रसद केंद्रों समेत स्थिर जमीनी लक्ष्यों पर रणनीतिक हमलों के बीच तेजी से भूमिका बदलने में सक्षम बनाती है।
किम जोंग उन ने साफ कहा है कि इस श्रेणी के विध्वंसक पोत परमाणु आयुध से लैस सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें ले जाएंगे। इनके लिए खास तौर पर बड़े व्यास वाले कई ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण सेल तैयार किए गए हैं। इससे समुद्र-आधारित परमाणु हमला मंच बनता है, जो संभावित विरोधियों के लिए पहले हमला करने की गणना को जटिल कर देता है। स्थिर जमीनी प्रक्षेपकों के उलट, मोबाइल समुद्री मंच अपनी जगह बदलते रहने से बच निकलने की क्षमता रखते हैं। इससे उत्तर कोरिया को जवाबी हमले की क्षमता मिल सकती है, जो प्रतिरोधक स्थिरता को मजबूत करने के साथ-साथ संकट के दौरान तनाव बढ़ने का जोखिम भी बढ़ाती है।
नौसैनिक बेड़े का विस्तार
उत्तर कोरिया का नौसैनिक आधुनिकीकरण फिलहाल परीक्षणों से गुजर रहे एक पोत तक सीमित नहीं है। किम जोंग उन ने मौजूदा पांच-वर्षीय योजना के दौरान हर साल दो विध्वंसक पोत बनाने की सार्वजनिक प्रतिबद्धता जताई है। लक्ष्य आने वाले वर्षों में ऐसे दस और पोत नौसेना में शामिल करना है। यह निर्माण दर अमेरिकी नौसेना के मौजूदा विध्वंसक पोत निर्माण से अधिक होगी। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या उत्तर कोरिया जमीनी बलों का आधुनिकीकरण और परमाणु कार्यक्रम जारी रखते हुए इतना महत्वाकांक्षी जहाज-निर्माण कार्यक्रम चला सकता है।
इस श्रेणी के दूसरे पोत, जिसका नाम कांग गोन है, को 21 मई 2025 को चोंगजिन जहाज निर्माण केंद्र में जलावतरण की नाकाम कोशिश के दौरान नुकसान पहुंचा था। उसे उठाकर लगभग 50 मील उत्तर में राजिन जहाज निर्माण केंद्र ले जाया गया, जहां 12 जून को दोबारा सफलतापूर्वक जलावतरण किया गया। तीसरा विध्वंसक पोत फिलहाल नाम्पो के जहाज निर्माण केंद्र में बन रहा है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इसके अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। किम ने चौथे पोत की योजनाओं की भी समीक्षा की है, जिससे संकेत मिलता है कि प्योंगयांग अलग-अलग प्रायोगिक पोतों के बजाय समन्वित विध्वंसक बेड़ा बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।
क्योंगनाम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लिम उल-चुल ने तेज होती निर्माण योजना का विश्लेषण करते हुए कहा:
तीसरे और चौथे विध्वंसक पोत का जिक्र बताता है कि उत्तर कोरिया अलग-अलग पोतों को तैनात करने के बजाय विध्वंसक बेड़ा बनाने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। शुरुआती परीक्षण सफल माने जाने के बाद आम तौर पर अगले पोतों का निर्माण तेजी से होता है।
शायद इससे भी अहम बात यह है कि किम ने मार्च 2026 में पुष्टि की कि 8,000 टन का एक और बड़ा विध्वंसक पोत विकसित किया जा रहा है। साथ ही, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों पर काम जारी है। देश ने दिसंबर 2025 में अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी का खुलासा किया था, जो सतही बेड़े के विस्तार का पूरक है। ये सभी कार्यक्रम मिलकर खुले समुद्र में काम करने में सक्षम विश्वसनीय नौसेना बनाने के प्योंगयांग के संकल्प को दर्शाते हैं। यह नौसेना मध्य और पूर्वी प्रशांत में अभियान चला सकती है और हवाई के साथ-साथ आगे चलकर अमेरिकी मुख्य भूभाग के लक्ष्यों के लिए भी खतरा बन सकती है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक मायने
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम विध्वंसक पोतों का उभरना अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के सामने मौजूद खतरों की तस्वीर को बुनियादी रूप से बदल देता है। सैन्य विश्लेषकों का व्यापक आकलन है कि चोए ह्योन श्रेणी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी समुद्री प्रभुत्व के लिए गंभीर चुनौती है। इसकी जमीन पर हमला करने की क्षमता विशेष रूप से पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों के लिए खतरा पैदा करती है। परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के आयुध वाली बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों की मिश्रित खेप दागने की इसकी क्षमता मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए लक्ष्य चुनना जटिल बना देती है।
समुद्र-आधारित मंचों की गतिशीलता प्रतिरोधक स्थिरता के लिए खास मुश्किलें पैदा करती है। भूमिगत साइलो में रखी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों या ज्ञात क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर चलने वाले सड़क-मोबाइल प्रक्षेपकों के उलट, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चलने वाले विध्वंसक पोत रडार की क्षितिज सीमा और भौगोलिक आड़ में छिपे रहते हुए लक्ष्यों के पास पहुंच सकते हैं। यह छिपकर काम करने की क्षमता उत्तर कोरिया को जवाबी हमले की ताकत देती है और पहले हमला करने के विकल्पों पर भरोसा घटाती है। इससे संकट के दौरान प्योंगयांग का हौसला बढ़ सकता है और इरादों की गलत व्याख्या से अनजाने में तनाव बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया एक ऐसी रणनीति विकसित करता दिख रहा है, जिसका उद्देश्य विरोधियों की पहुंच रोकना और किसी क्षेत्र पर उनकी कार्रवाई सीमित करना है। इसमें जमीन-आधारित बैलिस्टिक मिसाइलें, समुद्र-आधारित क्रूज़ मिसाइलें और भविष्य में पनडुब्बी से दागी जाने वाली प्रणालियां शामिल हैं। इस विविध शस्त्रागार से विरोधियों को एक साथ कई क्षेत्रों से आने वाले खतरों से रक्षा करनी पड़ती है। इससे खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही संसाधनों पर दबाव पड़ता है और रक्षात्मक योजना बनाना जटिल हो जाता है।
शिक्षाविद ने कहा कि उत्तर कोरिया मध्य पूर्व के संघर्षों समेत दुनिया के रणनीतिक ध्यान भटकने का फायदा उठाकर हथियारों का विकास तेज करता दिख रहा है। अप्रैल 2026 में लगातार हुए परीक्षणों, जिनमें 11 मार्च को एक के बाद एक किए गए क्रूज़ मिसाइल परीक्षण और 12 अप्रैल का दोहरा हमला प्रदर्शन शामिल हैं, से परिचालन क्षमता को तेजी से परखने की कोशिशों का संकेत मिलता है। इसका उद्देश्य शुरुआती परिचालन क्षमता हासिल करना है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी स्रोत
चोए ह्योन श्रेणी की उन्नत तकनीक ने विदेशी तकनीकी सहायता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों और स्वतंत्र विश्लेषकों को विध्वंसक पोत के विकास में रूस की भागीदारी का संदेह है। इसकी वजहों में पैंटसिर-एम वायु रक्षा प्रणाली का एकीकरण और किम जोंग उन का 2023 में व्लादिवोस्तोक दौरा शामिल है, जहां उन्होंने रूसी प्रशांत बेड़े के युद्धपोत देखे थे। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण को समर्थन देने के लिए उत्तर कोरिया की हथियार आपूर्ति से प्योंगयांग और मॉस्को के बीच बढ़ते सैन्य-तकनीकी सहयोग का पता चलता है। इससे संभावित तकनीकी हस्तांतरण के संकेत भी मिलते हैं, जो उत्तर कोरियाई नौसैनिक आधुनिकीकरण को तेज कर सकता है।
स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों ने चोए ह्योन और चीन के टाइप 055 या टाइप 052डी विध्वंसक पोतों के साथ-साथ दक्षिण कोरिया की सेजोंग दवांग श्रेणी के डिजाइन में समानताएं बताई हैं। हालांकि, तकनीकी अंतर को देखते हुए उनकी सीधी नकल की संभावना कम लगती है। इसके बजाय, उत्तर कोरियाई इंजीनियर कई स्रोतों से मिले प्रभावों को मिलाकर प्रणालियों को देश की अपनी उत्पादन क्षमता के अनुरूप ढालते दिखते हैं।
इस विध्वंसक पोत की युद्ध प्रणालियों में मित्र या शत्रु पहचान प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक सहायता उपकरण और पहचान तथा निशाना बनाए जाने का खतरा घटाने के लिए बने प्रतिरोधक उपकरण शामिल हैं। हेलिकॉप्टर या मानवरहित हवाई वाहन संभालने में सक्षम उड़ान डेक पोत की निगरानी पहुंच को उसके अपने सेंसरों की क्षमता से आगे बढ़ाता है। व्यापक टोही नेटवर्क से जुड़ने पर यह दूरस्थ हमलों के लिए लक्ष्य तय करने में मदद कर सकता है।
चुनौतियां और सीमाएं
प्रभावशाली विशिष्टताओं के बावजूद चोए ह्योन की वास्तविक युद्ध तैयारी को लेकर अहम सवाल बने हुए हैं। निर्माण और परीक्षण की तेज रफ्तार के साथ जटिल सतही युद्धपोत चलाने का उत्तर कोरिया का सीमित अनुभव चालक दल के प्रशिक्षण और प्रणालियों के एकीकरण में कमियों की आशंका पैदा करता है। शत्रुता शुरू होने के बाद सतही युद्धपोतों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना आसान होता है। इससे भीषण युद्ध में इन महंगे संसाधनों के बचने की क्षमता पर संदेह पैदा होता है।
विध्वंसक बेड़े को बनाए रखने के लिए जरूरी संसाधन भी उत्तर कोरिया की सीमित अर्थव्यवस्था पर दबाव डालते हैं। सेना, नौसेना और परमाणु बलों का एक साथ आधुनिकीकरण बजट पर ऐसा दबाव बना सकता है जिसे कायम रखना मुश्किल हो, खासकर इसलिए कि नौसैनिक युद्ध में अत्याधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका होती है। बड़े सतही लड़ाकू पोतों को व्यापक रसद सहायता, उन्नत रखरखाव सुविधाओं और उच्च प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत होती है, जिनकी व्यवस्था करना प्योंगयांग के लिए कठिन हो सकता है।
हालांकि, शासन के नजरिये से उन्नत विध्वंसक पोत चलाने का राजनीतिक प्रतीकात्मक महत्व इन लागतों को उचित ठहरा सकता है। किम जोंग उन सत्ता में अपने पंद्रहवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं और अपने पिता तथा दादा जैसी विरासत बनाने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। नौसेना को तटीय रक्षा बल से खुले समुद्र में काम करने में सक्षम बल में बदलना ऐसी उपलब्धि होगी जिसे किम जोंग इल या किम इल सुंग हासिल नहीं कर पाए। इसकी वास्तविक सैन्य उपयोगिता चाहे जो हो, घरेलू प्रचार के लिए यह एक बड़ा लाभ है।
जानने योग्य बातें
- उत्तर कोरिया के चोए ह्योन श्रेणी के विध्वंसक पोत ने अप्रैल 2026 में लाइव-फायर परीक्षण किए और समन्वित हमले के प्रदर्शन में रणनीतिक क्रूज़ मिसाइलें तथा जहाज-रोधी हथियार दागे।
- 5,000 टन का यह पोत 74 ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण सेल से लैस है, जो हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें और संभावित रूप से परमाणु आयुध वाले हथियार दाग सकते हैं।
- किम जोंग उन ने हर साल दो विध्वंसक पोत बनाने का आदेश दिया है। लक्ष्य पांच साल में दस और पोत बनाना है। इसके साथ 8,000 टन की अगली श्रेणी भी विकसित की जा रही है।
- इस विध्वंसक पोत में रूस की पैंटसिर-एम वायु रक्षा प्रणाली और उन्नत चरणबद्ध ऐरे रडार लगे हैं, जो विदेशी तकनीकी सहायता के संकेत देते हैं।
- समुद्र-आधारित परमाणु हथियार मंच विरोधियों के लिए पहले हमला करने के विकल्प जटिल बनाते हैं और ऐसे मोबाइल प्रक्षेपकों से अमेरिकी प्रशांत ठिकानों को खतरा पहुंचाते हैं, जिनका पता लगाना कठिन है।
- उत्तर कोरिया सतही विध्वंसक पोतों के साथ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां भी तैनात करने की योजना बना रहा है, जिससे उसका समुद्री परमाणु प्रतिरोधक बल विविध होगा।






