पूर्वी चीन सागर में जापान ने चीन के नए Y-9FQ पनडुब्बी-रोधी विमान को रोका, पहली बार हुआ सामना

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पूर्वी चीन सागर में जापान ने चीन के नए Y-9FQ पनडुब्बी-रोधी विमान को रोका, पहली बार हुआ सामना

नया पनडुब्बी-रोधी विमान सामने आया

28 मार्च, 2026 को जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JASDF) ने पूर्वी चीन सागर के ऊपर एक चीनी सैन्य विमान को रोकने के लिए लड़ाकू विमान रवाना किए। यह बीजिंग के सबसे उन्नत समुद्री गश्ती विमानों में से एक के साथ पहली पुष्ट मुठभेड़ थी। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवल एयर फोर्स (PLANAF) द्वारा संचालित इस विमान की पहचान Y-9FQ 'हाई न्यू 15' पनडुब्बी-रोधी युद्धक (ASW) विमान के रूप में हुई। यह चीन की पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। यह अवरोधन 3 सितंबर, 2025 को बीजिंग में विजय दिवस परेड के दौरान विमान के सार्वजनिक पदार्पण के महज सात महीने बाद हुआ। इससे जापानी रक्षा अधिकारियों और सैन्य पर्यवेक्षकों को इस उन्नत निगरानी विमान को पहली बार परिचालन स्थिति में देखने का मौका मिला।

विषय-सूची
  1. नया पनडुब्बी-रोधी विमान सामने आया
  2. तकनीकी क्षमताएं और सेंसर प्रणाली
  3. अवरोधन का परिचालन विवरण
  4. क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां और रणनीतिक संदर्भ
  5. बढ़ता हवाई तनाव और रडार तकनीक
  6. चीन के विशेष अभियान विमानों का नेटवर्क
  7. बढ़ते तनाव के बीच राजनयिक संबंध
  8. मुख्य बिंदु

जापान के रक्षा मंत्रालय के ज्वाइंट स्टाफ ने 30 मार्च को मुठभेड़ की तस्वीरें जारी कीं और अपने आधिकारिक बयान में विमान की बनावट का विवरण दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस अवरोधन में ऐसी क्षमताएं सामने आईं, जिन्हें पहले इस क्षेत्र में नहीं देखा गया था।

चीनी सैन्य गश्ती विमान (Y-9) की उड़ानों की पुष्टि पहले भी पूर्वी चीन सागर और अन्य क्षेत्रों के आसपास के हवाई क्षेत्र में हुई है। लेकिन इस बार देखे गए विमान की नाक (सबसे आगे के हिस्से) की बनावट पहले के विमानों से अलग है। आत्मरक्षा बलों ने ऐसे विमान की पुष्टि कर इसकी घोषणा पहली बार की है।

यह स्वीकारोक्ति चीनी समुद्री निगरानी क्षमताओं के विकास पर नजर रखने के लिहाज से इस मुठभेड़ के महत्व को रेखांकित करती है।

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तकनीकी क्षमताएं और सेंसर प्रणाली

शांक्सी एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन ने 2020 से Y-9FQ का विकास किया है। यह अपने पूर्ववर्ती Y-8Q से एक बड़ी छलांग है, जिसे KQ-200 नाम से भी जाना जाता है और जो चीन का पहला आधुनिक, विशेष रूप से समुद्री गश्त के लिए बनाया गया विमान था। दोनों विमानों में पूंछ पर लगा लंबा मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर (MAD) बूम है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव पहचानकर पनडुब्बियों का पता लगाता है। हालांकि, Y-9FQ में कई उन्नत तकनीकें हैं, जो इसकी निगरानी क्षमता को बेहतर बनाती हैं।

सबसे खास बात यह है कि Y-9FQ की लंबी नाक में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार लगा है। पारंपरिक यांत्रिक रडार लक्ष्य का पीछा करने के लिए एंटीना को भौतिक रूप से घुमाते हैं, जबकि AESA प्रणाली रडार किरणों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दिशा देने के लिए हजारों छोटे ट्रांसमिट और रिसीव मॉड्यूल का इस्तेमाल करती है। इस तकनीक से Y-9FQ एक साथ कई समुद्री और हवाई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) मोड के जरिये जमीन का नक्शा भी बना सकता है। नाक के पीछे बने एयर इनटेक इस उच्च-शक्ति वाले रडार को ठंडा रखते हैं। जापानी रक्षा अधिकारियों द्वारा जारी तस्वीरों में यह बनावट दिखाई देती है।

विंडशील्ड के नीचे विमान में इलेक्ट्रो-विजुअल सिस्टम (EVS) है, जो उच्च-रिजॉल्यूशन ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड निगरानी की सुविधा देता है। इससे कम दृश्यता की स्थिति में भी चालक दल जहाजों की दृश्य पहचान कर सकता है। अन्य सेंसरों में दुश्मन के रडार संकेतों का पता लगाने और वर्गीकरण के लिए विंगटिप्स पर इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) एंटेना, कमान केंद्रों तक वास्तविक समय में डेटा भेजने के लिए विमान के मध्य हिस्से पर SATCOM एंटेना, और आने वाले खतरों से चालक दल को सचेत करने के लिए विमान के धड़ और पूंछ पर लगे नए मिसाइल अप्रोच वॉर्निंग सेंसर (MAWS) शामिल हैं। विमान के पेट पर लगा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल बॉल टर्रेट, अमेरिकी P-8A पोसाइडन में लगे टर्रेट जैसा है और विमान के नीचे 360 डिग्री निगरानी देता है।

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अवरोधन का परिचालन विवरण

JASDF की साउथवेस्ट एयर डिफेंस फोर्स ने अवरोधन अभियान का समन्वय किया और मियाज़ाकी प्रीफेक्चर के न्याताबारू एयर बेस से F-15J लड़ाकू विमान भेजे। यह पूर्वी चीन सागर के अवरोधन क्षेत्र के सबसे नजदीक स्थित एयर बेस है। इस बेस से F-15J संचालित करने वाला 305वां टैक्टिकल फाइटर स्क्वाड्रन जापान के दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों और एशियाई महाद्वीप के बीच के रणनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में हवाई क्षेत्र के उल्लंघनों का जवाब देने के लिए लगातार तैयार रहता है।

जापान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परिचालन मार्ग-मानचित्र के अनुसार, Y-9FQ ने पूर्वी चीन सागर के मध्य में घुमावदार उड़ान-पथ अपनाए और जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सीमा के पास उड़ान भरी। विमानन पर्यवेक्षकों ने कहा कि उड़ान-पथ से संकेत मिलता है कि विमान संभवतः इस क्षेत्र में अभियान चला रही जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JMSDF) की पनडुब्बी पर सक्रिय रूप से नजर रख रहा था। Y-9FQ के साथ एक पुराना Y-8 विमान भी था, जो नाक के नीचे बने गुंबद से पहचाना जाने वाला KQ-200 ASW संस्करण लगता है। दोनों विमानों की साथ मौजूदगी से संकेत मिलता है कि यह समन्वित अभियान था, जिसमें प्रशिक्षण या क्षमता का प्रदर्शन शामिल हो सकता है।

Y-9FQ जैसे पनडुब्बी-रोधी युद्धक विमान पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए कई सेंसरों का इस्तेमाल करते हैं। पूंछ पर लगा MAD बूम पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव मापकर धातु से बनी पनडुब्बियों का पता लगाता है। वहीं, पानी में गिराए जाने वाले ध्वनिक सेंसर सोनाबॉय प्रोपेलर की आवाज और मशीनों के कंपन सुनते हैं। AESA रडार सतह से बाहर निकले स्नॉर्कल या पेरिस्कोप का पता लगा सकता है और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली दृश्य पुष्टि करती है। कई सेंसरों का यह तरीका विमानों को समुद्र के विशाल क्षेत्रों की निगरानी करने देता है और विवादित जलक्षेत्रों में पानी के नीचे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्हें अहम बनाता है।

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क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां और रणनीतिक संदर्भ

Y-9FQ का अवरोधन कोई अकेली घटना नहीं थी। इससे पहले वाले सप्ताह में जापानी बलों ने इसी व्यापक समुद्री क्षेत्र में रूसी सैन्य गतिविधियों में असामान्य तेजी पर नजर रखी थी। 27 मार्च को JASDF लड़ाकू विमानों ने दो रूसी Tu-142 लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमानों को रोका। ये विमान ओखोत्स्क सागर से जापान सागर की ओर जा रहे थे और अकिता प्रीफेक्चर के तट तक पहुंचे। इसी दौरान जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने बाल्ज़म श्रेणी के एक खुफिया जानकारी जुटाने वाले जहाज की निगरानी की, जो पानी को जोड़ने वाली त्सुगारू जलडमरूमध्य से गुजर रहा था।

शायद सबसे अधिक उकसावे वाली घटना 17 मार्च को हुई, जब Kh-47M2 किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस दो रूसी MiG-31 लड़ाकू विमानों ने जापान सागर के ऊपर उड़ान भरी। वे पांच विमानों के समूह का हिस्सा थे, जिसमें एक Il-78M टैंकर और दो Su-30 लड़ाकू विमान भी शामिल थे। उसी समय जापान के आत्मरक्षा बल इस क्षेत्र में रूसी नौसेना के उदालोय-III श्रेणी के एक विध्वंसक पर नजर रख रहे थे। किंझाल मिसाइल की गति मैक 5 से अधिक हो सकती है और यह परमाणु या पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है। जापानी क्षेत्र के पास इसकी तैनाती हवाई खतरों में बड़ी वृद्धि है।

ये घटनाएं क्षेत्र में चीन और रूस की समन्वित सैन्य गतिविधियों के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। 2019 से दोनों देशों ने जापान सागर और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर नौ संयुक्त रणनीतिक हवाई गश्त की हैं। सबसे हालिया गश्त दिसंबर 2025 में हुई थी। इन गश्तों में आमतौर पर रूसी Tu-95 बियर बमवर्षक और A-50 हवाई पूर्व चेतावनी विमान, चीनी H-6 बमवर्षकों और J-16 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरते हैं। बीजिंग और मॉस्को इन अभ्यासों को तीसरे देशों के खिलाफ लक्षित नहीं बताते, लेकिन ये अभियान उनकी बढ़ती सैन्य अंतरसंचालनीयता और क्षेत्रीय हवाई रक्षा नेटवर्क को चुनौती देने में साझा रुचि दर्शाते हैं।

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बढ़ता हवाई तनाव और रडार तकनीक

मार्च का अवरोधन दिसंबर 2025 की एक चिंताजनक घटना के बाद हुआ। उस समय विमानवाहक पोत लियाओनिंग से संचालित चीनी J-15 लड़ाकू विमानों ने ओकिनावा के पास JASDF के F-15 विमानों पर तीन घंटे के भीतर दो अलग-अलग मौकों पर रडार लॉक किया था। रडार लॉक तब होता है जब किसी लड़ाकू विमान का रडार निगरानी मोड से फायर-कंट्रोल मोड में जाता है और लक्ष्य तक मिसाइल को निर्देशित करने की तैयारी करता है। इससे निशाने पर आए विमान के कॉकपिट में तुरंत चेतावनी सक्रिय हो जाती है। यह कार्रवाई वास्तविक हथियार चलाने से ठीक पहले की शत्रुतापूर्ण मंशा मानी जाती है।

Y-9FQ और चीन के लड़ाकू विमानों में तेजी से इस्तेमाल हो रहे आधुनिक AESA रडार ऐसी शत्रुतापूर्ण मंशा का पता लगाना मुश्किल बना देते हैं। पुराने यांत्रिक रडारों को एक अलग सिंगल टारगेट ट्रैक मोड में जाना पड़ता है, जबकि AESA प्रणाली व्यापक निगरानी जारी रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक रूप से कई संकीर्ण किरणें दिशा दे सकती है। ये लो प्रोबेबिलिटी ऑफ इंटरसेप्ट (LPI) तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें तेजी से आवृत्ति बदलना और साइडलोब उत्सर्जन कम करना शामिल है। इनका उद्देश्य संकेतों को पृष्ठभूमि के शोर में मिलाना और पुराने रडार चेतावनी रिसीवरों की पकड़ से बचना है। इस तकनीकी बदलाव का मतलब है कि मिसाइल दागे जाने से पहले निशाने पर आए पायलटों को बहुत कम या बिल्कुल चेतावनी नहीं मिल सकती। इससे तनावपूर्ण हवाई मुठभेड़ों के दौरान गलत आकलन का खतरा बढ़ जाता है।

दिसंबर की घटनाओं के बाद जापानी रक्षा अधिकारियों ने बीजिंग के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए कदम उठाने की मांग की। चीनी नौसेना के प्रवक्ता वांग शुएमेंग ने दिसंबर 2025 की घटनाओं को लेकर जापान के बयान को खारिज करते हुए दावा किया कि जापानी विमानों ने चीन के प्रशिक्षण अभियान में बाधा डाली थी।

हाल ही में चीनी नौसेना के विमानवाहक पोत लियाओनिंग के समूह ने मियाको जलडमरूमध्य के पूर्व में समुद्री और हवाई क्षेत्र में नियमित विमानवाहक-आधारित लड़ाकू विमान उड़ान प्रशिक्षण किया। प्रशिक्षण क्षेत्रों की घोषणा पहले ही कर दी गई थी। इस दौरान जापानी आत्मरक्षा बलों के विमान बार-बार पास आए और चीनी नौसेना के प्रशिक्षण वाले समुद्री और हवाई क्षेत्र में बाधा डाली। इससे चीन की ओर सामान्य प्रशिक्षण गंभीर रूप से बाधित हुआ और उड़ान सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हुआ।

किसका पक्ष अधिक सच है, यह अलग बात है। ऐसी मुठभेड़ों की बढ़ती आवृत्ति पूर्वी चीन सागर के व्यस्त हवाई क्षेत्र में तनाव बढ़ने के खतरनाक जोखिम को उजागर करती है।

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चीन के विशेष अभियान विमानों का नेटवर्क

Y-9FQ, शांक्सी Y-9 परिवहन विमान पर आधारित विशेष अभियान विमानों के व्यापक समूह का सिर्फ एक हिस्सा है। यह बहुउपयोगी विमान KJ-500 और KJ-700 हवाई पूर्व चेतावनी और नियंत्रण (AEW&C) विमानों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक खुफिया और सिग्नल खुफिया जानकारी जुटाने के लिए बने कम से कम पांच संस्करणों का आधार है। KJ-500 और KJ-700, दोनों की नाक Y-9FQ जैसी लंबी है। इससे समान रडार संरचना और सेंसर एकीकरण का संकेत मिलता है।

इस मानकीकरण से चीन को दो अलग-अलग रणनीतिक लाभ मिलते हैं। पहला, इससे परिचालन में वैकल्पिक क्षमता बनी रहती है। किसी विमान के नुकसान की भरपाई ऐसे विमानों के बड़े भंडार से की जा सकती है, जिनमें समान पुर्जे और रखरखाव प्रक्रियाएं इस्तेमाल होती हैं। दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इन विमानों में डेटा लिंकिंग और खुफिया, निगरानी और टोही (ISR) क्षमताओं का मानकीकरण बीजिंग को पूरे क्षेत्र की लगातार स्थिति-जागरूकता देता है। Y-9FQ जब किसी पनडुब्बी या सतह के जहाज का पता लगाता है, तो उसका डेटा तुरंत लड़ाकू विमानों के अभियानों का समन्वय कर रहे KJ श्रेणी के हवाई पूर्व चेतावनी विमानों तक या विरोधी के संचार का विश्लेषण कर रहे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विमानों तक पहुंच सकता है।

अमेरिकी नौसेना और उसके सहयोगी इसी तरह की कई भूमिकाओं में P-8A पोसाइडन का इस्तेमाल करते हैं। यह लंबी दूरी की समुद्री गश्त, पनडुब्बी-रोधी युद्ध और सहायक विद्युतचुंबकीय संवेदन का काम करता है। Y-9FQ का सामने आना बताता है कि चीन पहली द्वीप श्रृंखला पर नजर रखने और अपने बढ़ते पनडुब्बी बेड़े की रक्षा के लिए ऐसी ही क्षमताएं चाहता है। इस बेड़े में परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और उन्नत हमला पनडुब्बियां शामिल हैं, जो चीनी तटों से काफी दूर तक अभियान चला सकती हैं।

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बढ़ते तनाव के बीच राजनयिक संबंध

ये सैन्य मुठभेड़ चीन और जापान के बिगड़ते राजनयिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हो रही हैं। Y-9FQ के अवरोधन के ठीक दो दिन बाद, 30 मार्च को, बीजिंग ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के एक सहयोगी पर ताइवान के दौरे के बाद प्रतिबंध लगाए। चीन ताइवान को अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है। ये प्रतिबंध स्वशासित द्वीप को लेकर जारी तनाव में एक और टकराव का बिंदु हैं। जापान और अमेरिका ने संभावित चीनी आक्रामकता के खिलाफ ताइवान की रक्षा में मदद करने का वादा किया है।

चीन के समुद्री गश्ती विमान अक्सर जापान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) की सीमाओं की पड़ताल करते हैं। यह क्षेत्रीय जलसीमा से आगे तक फैला हवाई क्षेत्र है, जहां अज्ञात विमानों पर नजर रखकर उनकी पहचान की जाती है। अंतरराष्ट्रीय कानून में ADIZ की परिभाषा नहीं है और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने वाले सैन्य विमानों के लिए अपनी पहचान बताना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। फिर भी, बिना सूचना इन क्षेत्रों में प्रवेश करने पर वायु रक्षा बलों को अनिवार्य रूप से लड़ाकू विमान रवाना करने पड़ते हैं। पूर्वी चीन सागर में Y-9FQ की मौजूदगी, उस व्यापक क्षेत्र में जहां जापानी पनडुब्बियां नियमित प्रशिक्षण करती हैं, संकेत देती है कि बीजिंग जापान की पानी के भीतर की क्षमताओं पर नजर रखना और संभवतः उन्हें चुनौती देना चाहता है।

जापान के रक्षा मंत्रालय ने क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र की लगातार निगरानी जारी रखने का वादा किया है। अधिकारियों ने 28 मार्च के अवरोधन पर बयान देते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

रक्षा मंत्रालय और आत्मरक्षा बल हमारे देश के आसपास सैन्य गतिविधियों की जानकारी जुटाते रहेंगे और 24 घंटे सतर्कता तथा निगरानी करेंगे। साथ ही, हवाई क्षेत्र के उल्लंघनों से निपटने के लिए सभी संभव उपाय किए जाएंगे।

चीन जहां Y-9FQ जैसे उन्नत विमान तैनात कर रहा है और रूस किंझाल मिसाइलों से लैस लड़ाकू विमानों तथा खुफिया जहाजों के साथ उकसावे वाली उड़ानें जारी रखे हुए है, वहीं पूर्वी चीन सागर के ऊपर का हवाई क्षेत्र दुनिया के सबसे अधिक सैन्यीकृत और संभावित रूप से अस्थिर क्षेत्रों में बना हुआ है।

मुख्य बिंदु

  • जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने 28 मार्च, 2026 को पूर्वी चीन सागर के ऊपर चीन के Y-9FQ 'हाई न्यू 15' पनडुब्बी-रोधी विमान को रोका। इस उन्नत विमान के साथ यह पहली पुष्ट मुठभेड़ थी।
  • सितंबर 2025 में बीजिंग की विजय दिवस परेड में सार्वजनिक पदार्पण करने वाले Y-9FQ में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार, इलेक्ट्रो-विजुअल सिस्टम और पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर लगा है।
  • उड़ान के दौरान Y-9FQ के साथ एक पुराना Y-8/KQ-200 ASW विमान भी था। Y-9FQ ने जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के पास उड़ान भरी और संभवतः एक जापानी पनडुब्बी पर नजर रखी।
  • यह अवरोधन क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों वाले सप्ताह के दौरान हुआ। इसमें रूसी Tu-142 गश्ती उड़ानें, बाल्ज़म श्रेणी के जासूसी जहाज का आवागमन और इससे पहले किंझाल हाइपरसोनिक मिसाइलों से लैस MiG-31 विमानों की उड़ानें शामिल थीं।
  • चीन और रूस ने 2019 से अब तक नौ संयुक्त रणनीतिक हवाई गश्त की हैं, जो क्षेत्र में उनकी बढ़ती सैन्य अंतरसंचालनीयता दर्शाती हैं।
  • ताइवान दौरों के बाद बीजिंग ने 30 मार्च, 2026 को जापानी प्रधानमंत्री के एक सहयोगी पर प्रतिबंध लगाए। सैन्य तनाव के बीच इससे राजनयिक संबंध और बिगड़े।
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