चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना से ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

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Taiwan envoy warns of China's 'existential threat' in meeting with ...

आर्थिक संभावनाएं और राजनीतिक तनाव तय करते हैं जलडमरूमध्य के दोनों ओर के रिश्तों की दिशा

चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) ने बीजिंग और ताइपे के जटिल रिश्तों में एक नया अध्याय खोल दिया है। इस पर आई एक-दूसरे से बिल्कुल अलग प्रतिक्रियाएं आर्थिक अवसरों और संप्रभुता संबंधी चिंताओं के बीच गहराती खाई को उजागर करती हैं। इस महीने की शुरुआत में 14वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के चौथे सत्र में मंजूर इस विकास खाके में ताइवान को मुख्यभूमि के आर्थिक तंत्र में शामिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं। साथ ही, जलडमरूमध्य के पार रहने और काम करने वाले ताइवान के निवासियों को समान व्यवहार देने की बात कही गई है। यह दस्तावेज अगले पांच वर्षों के लिए देश का प्रमुख विकास खाका है, जिसमें तकनीकी आत्मनिर्भरता से लेकर घरेलू बाजार के विस्तार तक सब कुछ शामिल है। आर्थिक रणनीति में ताइवान से जुड़ी नीतियों का अहम स्थान है।

विषय-सूची
  1. आर्थिक संभावनाएं और राजनीतिक तनाव तय करते हैं जलडमरूमध्य के दोनों ओर के रिश्तों की दिशा
  2. ताइवान के उद्यमी एकीकरण के अवसरों को अपना रहे हैं
  3. बोर्डरूम से रोजमर्रा की जिंदगी तक: समान व्यवहार की नीतियां
  4. पिंगतान और साझा बाजार का प्रयोग
  5. संप्रभुता संबंधी चिंताएं और किनमेन का सवाल
  6. आर्थिक पहुंच के पीछे की रणनीति पर विश्लेषकों में बहस
  7. भू-राजनीतिक संदर्भ और भविष्य की दिशा
  8. मुख्य बिंदु

यह योजना ऐसे समय आई है जब भू-राजनीतिक संवेदनशीलता बढ़ी हुई है। मुख्यभूमि में काम कर रहे ताइवान के कारोबारी नेता नई नीतियों के तहत अपने दीर्घकालीन भविष्य को लेकर बढ़ता भरोसा जता रहे हैं, वहीं ताइपे के अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि बीजिंग आर्थिक प्रोत्साहनों के जरिए ताइवान की संप्रभुता कमजोर करने की कोशिश कर सकता है, खासकर अग्रिम मोर्चे के किनमेन और मात्सु द्वीपों के मामले में। धारणाओं का यह अंतर दिखाता है कि ताइवान को आर्थिक जुड़ाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच कितना मुश्किल संतुलन साधना होगा। राज्य परिषद के ताइवान मामलों के कार्यालय ने अगले पांच वर्षों को "मुख्यभूमि के विकास का महत्वपूर्ण चरण" बताया है, जो साथ ही "ताइवान के निवासियों और उद्यमों के लिए बड़े अवसरों का दौर" भी होगा। इस दृष्टिकोण में आर्थिक लाभों पर जोर है, जबकि राजनीतिक तनाव को कम करके दिखाया गया है।

इन नजरियों का अंतर बीजिंग के इरादों के बारे में दोनों पक्षों के बुनियादी तौर पर अलग आकलन को दर्शाता है। जलडमरूमध्य के पार पहले से कारोबार स्थापित कर चुके उद्यमियों के लिए यह योजना अनिश्चित दुनिया में निरंतरता का संकेत है। ताइपे के सुरक्षा अधिकारियों के लिए यह संप्रभुता के पारंपरिक विवादों से हटकर उस दिशा में संभावित बदलाव का संकेत है, जिसे एक वरिष्ठ अधिकारी ने "अधिकार-क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा" बताया। इसमें आर्थिक एकीकरण धीरे-धीरे दोनों पक्षों को अलग करने वाली राजनीतिक सीमाओं को धुंधला कर सकता है। वाणिज्य और सुरक्षा के बीच यही तनाव 15वीं पंचवर्षीय योजना के कार्यान्वयन के दौर को तय कर सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष सहयोग और टकराव के बीच की गुंजाइश में रास्ता तलाशेंगे।

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ताइवान के उद्यमी एकीकरण के अवसरों को अपना रहे हैं

चीनी मुख्यभूमि में कारोबार कर रहे हजारों ताइवानी व्यवसायियों के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना अस्थिर वैश्विक माहौल के बीच स्थिरता जारी रहने का संकेत है। मुख्यभूमि में ताइवान निवेश उद्यम संघ के उपाध्यक्ष वू चिया-यिंग ने कहा कि यह योजना "जलडमरूमध्य के दोनों ओर एकीकृत विकास के लिए अधिक व्यापक और स्पष्ट खाका देती है।" उनका आकलन ताइवान के कारोबारी समुदाय में बढ़ती उस भावना को दर्शाता है कि राजनीतिक तनाव के बावजूद मुख्यभूमि जलडमरूमध्य के पार आर्थिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।

जॉनसन हेल्थ टेक कंपनी लिमिटेड चाइना के सीईओ एडवर्ड ली ने नीतिगत सुधारों को लेकर ठोस उम्मीदें जाहिर कीं, जो औद्योगिक सहयोग को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि जलडमरूमध्य के पार एकीकरण की नीतियों में और सुधार होगा, जिससे औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने और जलडमरूमध्य के दोनों ओर साझा बाजार विकसित करने में मदद मिलेगी।" साझा बाजार की यह परिकल्पना पारंपरिक व्यापार संबंधों से आगे बढ़कर समान पेशेवर मानकों और नियामक ढांचों को शामिल करती है, जो ताइवानी कंपनियों को मुख्यभूमि की कंपनियों के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएंगे।

योजना में "उच्च गुणवत्ता वाले विकास" पर जोर ने ताइवानी उद्यमियों की रणनीति में बदलाव को बढ़ावा दिया है। मुख्यभूमि में ताइवान निवेश उद्यम संघ के अध्यक्ष ली चेंग-होंग ने कहा कि ताइवानी कारोबार अब "केवल बाजार के आकार और लागत के फायदे पर ध्यान देने के बजाय नवाचार से मिलने वाले लाभों" को तेजी से प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव जलडमरूमध्य के पार आर्थिक रिश्तों के परिपक्व होने को दर्शाता है। ताइवानी कंपनियां खुद को महज विनिर्माता नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में स्थापित कर रही हैं।

कुछ खास क्षेत्रों को लक्षित नीतिगत समर्थन से फायदा होने की संभावना है। ली मिंग-हुई, जो लीहपाओ लाइफ साइंस (श्यामेन) बायोटेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड के महाप्रबंधक हैं, को उम्मीद है कि स्वस्थ चीन के निर्माण में तेजी लाने की योजना की मांग से उनके उद्योग को लाभ होगा। उन्होंने कहा, "यह योजना ताइवानी उद्यमियों और कारोबारों के लिए उद्योगों के उन्नयन के अवसर देती है और हमारे लिए बाजार का एक आशाजनक नया क्षेत्र खोलती है।" जैव प्रौद्योगिकी उन कई उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में से एक है, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी शामिल हैं। बीजिंग अपनी घरेलू क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए ताइवान की विशेषज्ञता हासिल करने की सक्रिय कोशिश कर रहा है।

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बोर्डरूम से रोजमर्रा की जिंदगी तक: समान व्यवहार की नीतियां

व्यापक आर्थिक रणनीति से आगे बढ़कर, 15वीं पंचवर्षीय योजना उन ताइवान निवासियों की व्यावहारिक चिंताओं पर भी ध्यान देती है जिन्होंने मुख्यभूमि को अपना घर बनाया है। दस्तावेज में उन नीतियों को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया गया है जिनके तहत ताइवान के लोगों को स्थानीय निवासियों के समान व्यवहार मिले। इसमें बच्चों की शिक्षा से लेकर चिकित्सा देखभाल और वित्तीय सेवाओं तक सब शामिल है।

वू चिया-यिंग ने इन नीतियों के व्यक्तिगत असर को रेखांकित करते हुए कहा कि श्यामेन में ताइवानी परिवारों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सहायता मिलती है, जिससे वे घरेलू चिंताओं से मुक्त होकर दीर्घकालीन विकास पर ध्यान दे पाते हैं। 2015 से जिआंगसू प्रांत में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे हंग ची-एन ने पाया कि वित्त और मानव संसाधन के मामले में समान व्यवहार से उनकी यह भावना मजबूत हुई कि "जलडमरूमध्य के दोनों ओर के लोग एक ही परिवार के हैं।"

राज्य परिषद के ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता चेन बिनहुआ ने हाल ही में हुई प्रेस वार्ता में कार्यान्वयन के कुछ ठोस उपाय बताए। मुख्यभूमि फुजियान जलडमरूमध्य-पार एकीकृत विकास प्रदर्शन क्षेत्र के विकास में सहायता करेगी। इसके साथ ही पिंगतान, कुनशान और डोंगगुआन में सहयोग केंद्र भी विकसित किए जाएंगे। योग्य ताइवानी कंपनियों को मुख्यभूमि के शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि जलडमरूमध्य के पार पूंजी के प्रवाह को समर्थन देने के लिए कई स्तरों वाले वित्तीय बाजार विकसित किए जाएंगे।

योजना में जलडमरूमध्य के पार यात्रा आसान बनाने और पर्यटन आदान-प्रदान बहाल करने के अतिरिक्त उपायों का भी वादा किया गया है। इसमें युवाओं और जमीनी स्तर पर लोगों के आपसी संपर्क पर विशेष ध्यान होगा। ताइवानी उद्यमों को डिजिटल बदलाव के जरिए पारंपरिक उद्योगों का उन्नयन करने और मुख्यभूमि के नवाचार तंत्र का इस्तेमाल कर उभरते क्षेत्रों में विस्तार करने के लिए खास तौर पर प्रोत्साहित किया गया है। चेन ने कहा, "अगले पांच वर्ष, जो मुख्यभूमि के विकास का महत्वपूर्ण चरण हैं, ताइवान के निवासियों और उद्यमों के लिए बड़े अवसरों का दौर भी होंगे।"

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पिंगतान और साझा बाजार का प्रयोग

बीजिंग की एकीकरण रणनीति के केंद्र में फुजियान प्रांत का पिंगतान व्यापक प्रायोगिक क्षेत्र है। इसे 15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जलडमरूमध्य के पार "साझा बाजार" के परीक्षण स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। क्षेत्र के अधिकारियों ने व्यापार, निवेश और सूचना सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ताइवान की पूंजी के प्रवेश पर लगी पाबंदियों में अधिकतम ढील देने की महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की है।

पिंगतान की पार्टी कार्य समिति के उप सचिव वेन शुएलिन ने पेशेवर योग्यताओं, उद्यमों की साख और उत्पाद प्रमाणन को पारस्परिक मान्यता देने पर केंद्रित रणनीति की रूपरेखा दी। इस पहल का लक्ष्य कृषि और निर्माण जैसे उद्योगों में साझा मानकों को बढ़ावा देना है, ताकि क्षेत्र में कारोबार करने वाली ताइवानी कंपनियों के लिए निर्बाध नियामक माहौल बनाया जा सके।

पिंगतान में व्यापार का स्तर पहले ही काफी बढ़ चुका है। 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जलडमरूमध्य के पार व्यापार में सालाना औसतन 21.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह क्षेत्र ताइवानी कृषि और मत्स्य उत्पादों के लिए मुख्यभूमि के सबसे बड़े प्रवेश केंद्रों में से एक बन गया है, जबकि यहां का सीमा-पार ई-कॉमर्स कारोबार देश के शीर्ष स्तर पर है। पिंगतान प्रबंधन समिति के निदेशक हुआंग जियानबो ने बताया कि क्षेत्र के जलडमरूमध्य-पार पेशेवर योग्यता एकीकृत सेवा केंद्र ने करीब 6,000 ऐसे प्रमाणपत्र जारी किए हैं जिन्हें कई प्रांतों में मान्यता प्राप्त है।

आर्थिक एकीकरण की कोशिशों के साथ सामाजिक स्तर पर भी नए उपाय किए गए हैं। पिंगतान ने ताइवान के निवासियों के परमिट और यात्रा पास को पारस्परिक मान्यता देना शुरू किया है और मुख्यभूमि का एकमात्र जलडमरूमध्य-पार मध्यस्थता केंद्र स्थापित किया है। इन उपायों का उद्देश्य ताइवान के लोगों को स्थानीय जीवन और सामाजिक प्रशासन में अधिक गहराई से जुड़ने में मदद करना है। बीजिंग को उम्मीद है कि इस मॉडल को अन्य तटीय प्रांतों में भी दोहराया जा सकेगा।

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संप्रभुता संबंधी चिंताएं और किनमेन का सवाल

कारोबारी नेता जहां आर्थिक अवसरों का स्वागत कर रहे हैं, वहीं ताइवान की सरकार 15वीं पंचवर्षीय योजना को लेकर काफी आशंकित है, खासकर किनमेन और मात्सु के बारे में बीजिंग के इरादों को लेकर। ताइवान के नियंत्रण वाले ये द्वीप चीन के तट के ठीक पास हैं। किनमेन अपने सबसे नजदीकी बिंदु पर फुजियान प्रांत से महज दो किलोमीटर दूर है, जिससे वह बीजिंग के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।

सुरक्षा आकलनों से परिचित अधिकारियों के मुताबिक, ताइपे इस बात पर खास नजर रख रहा है कि क्या योजना में इन अग्रिम मोर्चे के द्वीपों के साथ आर्थिक एकीकरण को गहरा करने का कोई उल्लेख है। चीन लंबे समय से किनमेन के प्रति प्रोत्साहन और दबाव, दोनों की नीति अपनाता आया है। इसमें उसके जलक्षेत्र में तटरक्षक बल की लगातार घुसपैठ के साथ-साथ द्वीपों को मुख्यभूमि के करीब लाने के लिए गैस, बिजली और पानी की आपूर्ति की पेशकश भी शामिल है। पिछली कुओमिन्तांग सरकार के दौरान ही पानी की आपूर्ति का समझौता हो गया था, जिससे बुनियादी ढांचे पर ऐसी निर्भरता पैदा हुई है जिसे मौजूदा नीति-निर्माता चिंता का विषय मानते हैं।

जलडमरूमध्य के पार के रिश्ते संप्रभुता के पुराने विवादों से बदलकर अधिकार-क्षेत्र की होड़ बन सकते हैं।

नाम न छापने की शर्त पर बात कर रहे ताइवान के एक वरिष्ठ अधिकारी की यह चेतावनी इस आशंका को दर्शाती है कि बीजिंग औपचारिक विलय किए बिना किनमेन पर वास्तविक प्रशासनिक नियंत्रण हासिल करने के लिए आर्थिक एकीकरण का इस्तेमाल कर सकता है। क्षेत्र के एक अन्य अधिकारी ने भी ऐसी ही चिंता जताई कि चीन नए आर्थिक खाके के जरिए द्वीपों पर "वास्तविक प्रशासनिक अधिकार" जमाने की कोशिश कर सकता है।

कुछ खास बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने इन आशंकाओं को और बढ़ाया है। किनमेन तक चीन का निर्माणाधीन पुल ताइपे के लिए बड़ी चिंता है। अगले साल खुलने वाला नया श्यामेन हवाई अड्डा भी चिंता का विषय है, जो अपने सबसे नजदीकी बिंदु पर किनमेन से महज करीब तीन किलोमीटर दूर है। ताइवान के अधिकारियों को चिंता है कि गहरा एकीकरण संप्रभुता को धीरे-धीरे कमजोर कर सकता है। एक अधिकारी ने चेतावनी दी, "अगर उन्होंने [किनमेन पर] हमला करने की हिम्मत की, तो हम अगले क्रीमिया बन जाएंगे।" यह 2014 में यूक्रेनी क्षेत्र पर रूस के कब्जे की ओर इशारा था।

किनमेन की कुओमिन्तांग सांसद जेसिका चेन ने माना कि चीन द्वीपों के साथ आर्थिक एकीकरण बढ़ाना चाहता है, लेकिन जोर देकर कहा कि "किनमेन चीन गणराज्य का क्षेत्र है। इस पर अधिकार-क्षेत्र चीन गणराज्य का है, इसमें कोई संदेह नहीं।" उनका बयान जलडमरूमध्य के पार के रिश्तों को संभालने में जरूरी नाजुक राजनीतिक संतुलन को रेखांकित करता है, जहां आर्थिक व्यावहारिकता का टकराव राष्ट्रीय पहचान से होता है।

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आर्थिक पहुंच के पीछे की रणनीति पर विश्लेषकों में बहस

व्यापार नीति और बुनियादी ढांचे के विकास के तकनीकी विवरणों के पीछे बीजिंग के अंतिम इरादों को लेकर एक गहरी रणनीतिक बहस है। नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के मानद प्रोफेसर मिंग जुझेंग ने चेतावनी दी है कि 15वीं पंचवर्षीय योजना में "कमजोर करने के लिए एकीकरण" की रणनीति छिपी है, जिसका मकसद सैन्य टकराव के बजाय आर्थिक निर्भरता के जरिए ताइवान को अपने में समेटना है।

यह महज प्रचार नहीं है, बल्कि एक आर्थिक जाल है, जिसका मकसद ताइवान को बीजिंग से बांधना है। ताइवान को इस छिपे हुए जहर से सतर्क रहना चाहिए।

मिंग इस तरीके की शुरुआत 2023 के उस निर्देश से जोड़ते हैं, जिसमें फुजियान प्रांत को जलडमरूमध्य-पार एकीकृत विकास प्रदर्शन क्षेत्र बनाने में समर्थन दिया गया था। उनका तर्क है कि बीजिंग पारंपरिक संयुक्त मोर्चा-आधारित आर्थिक पहुंच से हटकर एक व्यवस्थित एकीकृत विकास मॉडल अपना रहा है, जिसमें व्यापार और निवेश के जरिए ताइवान की स्वायत्तता को भीतर से कमजोर किया जाता है। यह रणनीति ग्वांगडोंग प्रांत के साथ हांगकांग को जोड़ने वाली ग्रेटर बे एरिया पहल से मिलती-जुलती है। आलोचकों की नजर में यह परिधीय क्षेत्रों को केंद्र के नियंत्रण में लाने का तरीका है।

संभावित तनाव बढ़ने की समय-सीमा को लेकर मतभेद हैं। कुछ पश्चिमी विश्लेषकों ने अटकल लगाई है कि 2027, जब चीन के सैन्य आधुनिकीकरण के लक्ष्य अपने चरम पर पहुंचने हैं, एकीकरण की अंतिम समय-सीमा हो सकती है। हालांकि, 15वीं पंचवर्षीय योजना में ताइवान को लेकर कोई समय-सीमा, अल्टीमेटम या दबाव डालने वाला कार्यक्रम नहीं है। इसके बजाय इसमें स्थिरता और शांतिपूर्ण एकीकरण पर जोर दिया गया है। इंस्टीट्यूट फॉर चाइना-अमेरिका स्टडीज के विश्लेषण के मुताबिक, योजना की भाषा "दृढ़ है, लेकिन जान-बूझकर तनाव बढ़ाने से बचती है और आसन्न संघर्ष के पश्चिमी आख्यानों का सीधे खंडन करती है।"

बीजिंग के असल इरादों पर बहस जलडमरूमध्य के पार के रिश्तों के भविष्य को लेकर व्यापक अनिश्चितता दर्शाती है। ताइवानी उद्यमी जहां योजना को समृद्धि का रास्ता मानते हैं, वहीं सुरक्षा विश्लेषक इसे खुले युद्ध के बिना राजनीतिक अधीनता का संभावित माध्यम देखते हैं। मिंग का कहना है कि अगर किनमेन और मात्सु में एकीकरण सफल रहा, तो इससे "हांगकांग जैसा प्रदर्शन मॉडल" बन सकता है, जो ताइवान की पहचान को कमजोर करेगा और अंततः मुख्य द्वीप तक फैल सकता है।

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भू-राजनीतिक संदर्भ और भविष्य की दिशा

15वीं पंचवर्षीय योजना गहरी वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आई है। अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और दुनिया भर में आपूर्ति शृंखलाओं का पुनर्गठन हो रहा है। बीजिंग के लिए घरेलू बाजार के विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर इस आकलन को दर्शाता है कि आंतरिक मजबूती बदलती बाहरी परिस्थितियों से अधिक भरोसेमंद राष्ट्रीय ताकत देती है।

इस संदर्भ में ताइवान नीति आर्थिक अवसर भी है और राजनीतिक जरूरत भी। योजना की घरेलू प्राथमिकताओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत विनिर्माण का औद्योगिक उन्नयन शामिल है। ये क्षेत्र ताइवान की उच्च-प्रौद्योगिकी क्षमताओं के साथ स्वाभाविक तालमेल बनाते हैं। एप्पल और टेस्ला जैसी कंपनियों को कलपुर्जे देने वाली डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स समेत ताइवानी कंपनियां पहले से ही मुख्यभूमि की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों के साथ साझेदारी तलाश रही हैं। यह उन औद्योगिक परस्पर निर्भरताओं का उदाहरण है जिन्हें बीजिंग बढ़ावा देना चाहता है।

फिर भी दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक असंतुलन लगातार बढ़ रहा है। चीन की दीर्घकालीन योजना राजनीतिक बदलावों के बावजूद स्थिर रहती है, जबकि ताइवान को अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ आर्थिक जुड़ाव और अमेरिका समेत सहयोगी देशों से सुरक्षा गारंटी के बीच रास्ता निकालना पड़ता है। भू-राजनीतिक समीकरण में वाशिंगटन की केंद्रीय भूमिका के बावजूद 15वीं पंचवर्षीय योजना में अमेरिका का उल्लेख न होना संकेत देता है कि बीजिंग अपनी ताइवान रणनीति को घरेलू मामला मानता है, जिसे बाहरी बातचीत के बजाय आंतरिक एकीकरण से सुलझाया जाना है।

मुख्यभूमि में पहले से रह रहे हजारों ताइवानी निवासियों के लिए एकीकरण के व्यावहारिक लाभ महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ताइवान में परिवार से जुड़े रहने के साथ श्यामेन चांग गंग अस्पताल में पारंपरिक चीनी चिकित्सा का अभ्यास करने वाले चिकित्सा पेशेवर चांग यांग-यांग, जलडमरूमध्य के पार संपर्कों का मानवीय चेहरा हैं। उनके लिए श्यामेन और उनके गृहनगर के बीच 20 मिनट की फेरी यात्रा, जो उनके बचपन में एक घंटे से अधिक समय लेती थी, ऐसी प्रगति का प्रतीक है जो राजनीतिक विवादों से परे है।

क्या ऐसे व्यक्तिगत संपर्क संप्रभुता को लेकर बुनियादी मतभेद को पाट सकते हैं, यही जलडमरूमध्य के पार के रिश्तों का मुख्य सवाल है। 15वीं पंचवर्षीय योजना खाके से निकलकर अमल में आ रही है। ऐसे में दोनों पक्ष यह परखेंगे कि क्या आर्थिक एकीकरण और राजनीतिक अलगाव साथ-साथ रह सकते हैं, या अंततः दोनों में से किसी एक को पीछे हटना होगा।

मुख्य बिंदु

  • चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) जलडमरूमध्य के पार आर्थिक एकीकरण और मुख्यभूमि में ताइवान के निवासियों के साथ समान व्यवहार पर जोर देती है।
  • ताइवान के कारोबारी नेता योजना को लेकर काफी आश्वस्त हैं और इसे गहरे औद्योगिक सहयोग तथा मुख्यभूमि के बाजारों तक पहुंच का खाका मानते हैं।
  • फुजियान प्रांत के पिंगतान व्यापक प्रायोगिक क्षेत्र को "साझा बाजार" के परीक्षण स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां ताइवान की पूंजी पर पाबंदियां ढीली होंगी और पेशेवर योग्यताओं को पारस्परिक मान्यता दी जाएगी।
  • ताइवान के सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किनमेन और मात्सु को लक्षित आर्थिक एकीकरण की कोशिशें संप्रभुता को कमजोर कर सकती हैं और बीजिंग का "वास्तविक प्रशासनिक नियंत्रण" स्थापित कर सकती हैं।
  • विश्लेषकों में इस बात पर बहस है कि योजना वास्तविक आर्थिक साझेदारी है या "कमजोर करने के लिए एकीकरण" की ऐसी रणनीति, जिसका मकसद आर्थिक निर्भरता के जरिए ताइवान को राजनीतिक रूप से बीजिंग से बांधना है।
  • योजना में एकीकरण के लिए कोई खास समय-सीमा नहीं है। इसमें दबाव डालने वाली समय-सीमाओं के बजाय स्थिरता और शांतिपूर्ण विकास पर जोर दिया गया है।
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