होर्मुज जलडमरूमध्य संकट ने उठाए कठोर कदम
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से पूर्वी एशिया के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति करने वाला समुद्री मार्ग बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में दक्षिण कोरिया दशकों की सबसे गंभीर ऊर्जा सुरक्षा चुनौती के मुहाने पर खड़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद तेज हुए संघर्ष ने मार्च की शुरुआत से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप कर दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ा है। सामान्य हालात में इस संकरे जलमार्ग से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। व्यवधान के चलते जहाजरानी लागत बढ़ी है और वैश्विक तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है।
विषय-सूची
कोरियाई सरकार ने राष्ट्रीय संसाधन सुरक्षा संकट चेतावनी को बढ़ाकर स्तर 2 कर दिया है। चार स्तरों वाली इस व्यवस्था में यह दूसरा स्तर है और संभावित आपूर्ति व्यवधानों को लेकर गंभीर चिंता का संकेत देता है। 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद यह पहली बार है जब सोल ने वाहनों के इस्तेमाल पर इतने व्यापक प्रतिबंध लगाने पर विचार किया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। संघर्ष में अब तक 1,340 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई भी शामिल हैं। इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करने वाले खाड़ी देशों को निशाना बनाकर ईरान के जवाबी हमले लगातार जारी हैं।
दक्षिण कोरिया की कमजोरी ऊर्जा के लिए आयात पर भारी निर्भरता से जुड़ी है। देश रोजाना करीब 28 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत करता है, जिसमें से लगभग आधा परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होता है। पर्याप्त घरेलू पेट्रोलियम भंडार वाले देशों के विपरीत, कोरिया अपना अधिकांश ईंधन आयात करता है। इस कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी उसकी आर्थिक स्थिरता और रोजमर्रा के कामकाज के लिए बड़ा खतरा है।
पांच-दिवसीय रोटेशन प्रणाली कैसे काम करती है
25 मार्च से जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय सार्वजनिक क्षेत्र में अनिवार्य पांच-दिवसीय वाहन रोटेशन प्रणाली लागू करेगा। यह अब तक की सबसे सख्त व्यवस्था होगी। इसमें नंबर प्लेट के अंतिम अंक के आधार पर वाहनों को पांच समूहों में बांटा जाएगा। हर समूह के वाहनों पर सप्ताह के एक तय दिन सड़क पर चलने की पाबंदी होगी। इस तरह सार्वजनिक क्षेत्र के 20 प्रतिशत वाहन रोजाना इस्तेमाल से बाहर रहेंगे।
सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के करीब 15 लाख वाहन इन नए प्रतिबंधों के दायरे में आएंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि इस कदम से रोजाना करीब 3,000 बैरल कच्चे तेल की बचत होगी। राष्ट्रीय खपत के मुकाबले यह कमी मामूली है, लेकिन अहम है। मंत्रालय ने नियमों के पालन पर कड़ी निगरानी का वादा किया है। उसने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और प्रतिबंधों का पालन न करने वाले सार्वजनिक संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
निजी क्षेत्र में विस्तार की आशंका
फिलहाल प्रतिबंध केवल सार्वजनिक वाहनों पर लागू हैं, लेकिन निजी वाहन मालिकों को आशंका है कि यह व्यवस्था उनके लिए भी बढ़ाई जा सकती है। सरकार ने इसे लागू करने के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए हैं: यदि राष्ट्रीय संसाधन संकट चेतावनी स्तर 3 तक पहुंचती है, तो निजी वाहनों के लिए भी रोटेशन प्रणाली अनिवार्य हो सकती है। इस संभावना से कोरियाई उपभोक्ताओं में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की दिलचस्पी फिर बढ़ी है। उन्हें पता है कि शून्य-उत्सर्जन वाले वाहन राशनिंग के दायरे के विस्तार के बाद भी बिना रोकटोक चल सकेंगे।
यह व्यवस्था कोरिया के पुराने अनुभव पर आधारित है। सरकार ने आखिरी बार 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान तेल संकट के बीच निजी क्षेत्र के लिए अनिवार्य वाहन रोटेशन लागू किया था। मौजूदा नियम सिर्फ सार्वजनिक वाहनों पर लागू हैं, हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि फिलहाल निजी क्षेत्र की भागीदारी स्वैच्छिक है। आर्थिक असर कम करने के लिए अधिकारियों ने देश की तेल की सबसे बड़ी 50 उपभोक्ता कंपनियों से ऊर्जा बचत योजनाएं बनाने को कहा है। खपत घटाने के लक्ष्य हासिल करने वाले संगठनों को प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इसके अलावा, सार्वजनिक संस्थानों और बड़ी कंपनियों से अस्थायी रूप से काम के घंटे बदलने को कहा गया है, ताकि दिनभर में यातायात का दबाव समान रूप से बंटे और व्यस्त समय की भीड़ तथा उससे होने वाली ईंधन की बर्बादी घटे।
शून्य-उत्सर्जन वाहनों को रणनीतिक छूट
नए प्रतिबंधों के बीच हाइड्रोजन ईंधन सेल और बैटरी वाले इलेक्ट्रिक वाहन स्पष्ट रूप से छूट के लाभार्थी बनकर उभरे हैं। सरकार ने इन शून्य-उत्सर्जन तकनीकों को रोटेशन नियमों से स्पष्ट रूप से बाहर रखा है। नंबर प्लेट के अंक चाहे जो हों, ये वाहन बिना किसी प्रतिबंध के चल सकेंगे। आपूर्ति संकट के दौरान यह नीति स्वच्छ वाहन मालिकों को तत्काल और ठोस लाभ देती है, साथ ही वैकल्पिक ईंधन तकनीकों के प्रति कोरिया की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।
यह छूट हाइड्रोजन से चलने वाले और पूरी तरह इलेक्ट्रिक, दोनों तरह के वाहनों पर समान रूप से लागू होती है। दोनों ही पेट्रोलियम आधारित ईंधन पर निर्भर नहीं हैं। ईंधन सेल के जरिए संपीड़ित हाइड्रोजन गैस को बिजली में बदलने वाले हाइड्रोजन वाहनों को यह छूट इसलिए मिली है क्योंकि वे आयातित कच्चे तेल के बजाय देश में उत्पादित किए जा सकने वाले हाइड्रोजन पर निर्भर हैं। बिजली ग्रिड से ऊर्जा लेने वाले बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन भी पेट्रोल और डीजल की उस कमी से अप्रभावित रहते हैं, जो पारंपरिक परिवहन के लिए खतरा बनी हुई है।
मौजूदा हरित वाहन प्रोत्साहनों के साथ यह नीति तालमेल बेड़े संचालकों और निजी खरीदारों के बीच इन्हें अपनाने की रफ्तार बढ़ा सकता है। कोरियाई सरकार ने सब्सिडी, कर लाभ और बुनियादी ढांचे में निवेश के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया है। मौजूदा संकट इनके फायदों में एक नया पहलू जोड़ता है: ऊर्जा सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भरता। जहां पारंपरिक इंजन वाले वाहनों के मालिकों को हफ्ते में एक दिन वाहन न चला पाने की आशंका है, वहीं इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहन चालक पूरी तरह आ-जा सकेंगे।
जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों के मालिकों को ईंधन राशनिंग की चिंता होनी चाहिए, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को ऐसी कोई चिंता नहीं है।
ऑस्ट्रेलियाई नीति विश्लेषकों की यह टिप्पणी उन देशों में उभरती स्थिति को दर्शाती है, जो आपूर्ति की ऐसी ही कमजोरियों का सामना कर रहे हैं। यह छूट दिखाती है कि परिवहन का विद्युतीकरण दो लक्ष्यों को पूरा करता है: पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए व्यापक कदम
वाहनों का रोटेशन व्यापक आपातकालीन रणनीति का सिर्फ एक हिस्सा है। कोरियाई अधिकारियों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का इंतजाम करने के साथ ही मध्य पूर्वी आपूर्ति पर निर्भरता घटाने के कदम भी उठाए हैं। विदेश मंत्री चो ह्यून ने तत्काल कूटनीतिक संपर्क करते हुए ओमान के अपने समकक्ष बद्र बिन हमद अल बुसैदी से तरलीकृत प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की खरीद में मदद मांगी है। इससे पहले उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से विवादित जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देने की अपील की थी।
घरेलू बिजली उत्पादन के मोर्चे पर सरकार ने अनुकूल वायु गुणवत्ता वाले दिनों में कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर लगी पाबंदियां ढीली करने की योजना बनाई है। इससे भी अहम यह है कि अधिकारी रखरखाव के लिए बंद पांच परमाणु रिएक्टरों को जल्द चालू करने पर जोर दे रहे हैं। ये रिएक्टर एलएनजी की खपत घटाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एलएनजी की आपूर्ति पर भी तेल जैसे जोखिम हैं, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा निर्यात का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी के आसपास केंद्रित है।
एलएनजी की खरीद में चुनौतियां दक्षिण कोरिया के लिए खास तौर पर गंभीर हैं, क्योंकि बिजली उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं, दोनों में यह ईंधन इस्तेमाल होता है। तेल के विपरीत, जिसकी आपूर्ति में होर्मुज जलडमरूमध्य तत्काल बाधा बना हुआ है, एलएनजी की आपूर्ति भी भौगोलिक संकेंद्रण के ऐसे ही जोखिमों का सामना करती है। संकट के दौरान कोयला उपयोग पर लगी पाबंदियां अस्थायी रूप से ढीली करना और परमाणु रिएक्टरों को फिर चालू करना दिखाता है कि सरकार ने पर्यावरणीय लक्ष्यों के मुकाबले ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अस्तित्व का संकट आने पर जरूरी जटिल संतुलन का यह समझौता एक उदाहरण है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ परिवहन की ओर बदलाव
दक्षिण कोरिया के आपातकालीन कदम परिवहन के विद्युतीकरण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े व्यापक वैश्विक रुझानों को उजागर करते हैं। यह संकट दिखाता है कि भू-राजनीतिक घटनाएं पेट्रोलियम पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए कितनी तेजी से खतरा बन सकती हैं। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भर परिवहन प्रणालियों की कमजोरी को लेकर दुनिया भर के नीति संस्थानों के तर्कों की पुष्टि होती है।
ऑस्ट्रेलिया में, जहां सरकार पेट्रोल और डीजल की 90 प्रतिशत आपूर्ति आयात करती है, सुपरपावर इंस्टीट्यूट ने ‘प्रदूषणकर्ता भुगतान करे’ शुल्क का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन जुटाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव तेज करना है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रचुर नवीकरणीय संसाधनों वाले देशों को अपनी सौर और पवन ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल हरित हाइड्रोजन और कृत्रिम ईंधन बनाने में करना चाहिए। इससे घरेलू पेट्रोलियम के लगातार दुर्लभ होते भंडार खोजने की कोशिश के बजाय वास्तविक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
स्वच्छ वाहनों को राशनिंग से छूट देने की दक्षिण कोरियाई नीति यूरोपीय संघ, अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर की ओर से लागू किए गए प्रोत्साहनों जैसी है। इन देशों ने परिवहन क्षेत्र के उत्सर्जन घटाने के साथ ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान करने के लिए हरित ईंधन अनिवार्य किए हैं और वित्तीय प्रोत्साहन दिए हैं। प्रभावी प्रोत्साहनों की कमी के कारण परिवहन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जन घटाने का विरोध करता रहा है, लेकिन आपूर्ति संकट बाजार को मजबूत संकेत देते हैं।
कोरिया का मॉडल बताता है कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा योजना में परिवहन के विद्युतीकरण को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही, विमानन और लंबी दूरी की जहाजरानी जैसे उन क्षेत्रों के लिए हरित हाइड्रोजन को भी बढ़ावा देना होगा, जहां बैटरी तकनीक का इस्तेमाल मुश्किल है। हाइड्रोजन और बायोमास से बने हरित तरल ईंधन उन क्षेत्रों में पारंपरिक ईंधन की जगह इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जहां परिवहन का विद्युतीकरण आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है।
निष्कर्ष
- होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच दक्षिण कोरिया ने 25 मार्च से नंबर प्लेट के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के 15 लाख वाहनों के लिए सख्त पांच-दिवसीय रोटेशन प्रणाली लागू की है। इससे रोजाना 3,000 बैरल तेल बचाने का लक्ष्य है।
- हाइड्रोजन ईंधन सेल और बैटरी वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को इन प्रतिबंधों से पूरी छूट मिली है। इससे शून्य-उत्सर्जन वाहन मालिकों को आने-जाने में तत्काल लाभ मिलता है।
- संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के तहत ओमान से वैकल्पिक तेल और एलएनजी आपूर्ति तथा ईरान से सुरक्षित मार्ग की गारंटी मांगी गई है।
- घरेलू कदमों में एलएनजी की खपत घटाने के लिए पांच परमाणु रिएक्टर फिर चालू करना और कोयला बिजली उत्पादन पर पाबंदियां ढीली करना शामिल है। परिवहन ईंधन राशनिंग भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
- यह छूट नीति स्वच्छ वाहनों को अपनाने और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के बीच वैश्विक रूप से बढ़ते संबंध को मजबूत करती है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में बदलाव तेज हो सकता है।






