जापान ने स्थायी निवास के लिए पांच साल के वीज़ा का सख्त नियम लागू किया
1 अप्रैल, 2027 से जापान में स्थायी निवास चाहने वाले विदेशी नागरिकों के पास अपने मौजूदा वीज़ा दर्जे के तहत अधिकतम पांच साल की निवास अवधि वाला वीज़ा होना अनिवार्य होगा। इससे एक दशक से चली आ रही उस प्रथा का अंत होगा, जिसके तहत तीन साल के निवास दर्जे को पर्याप्त माना जाता था। आव्रजन सेवा एजेंसी ने 24 फरवरी, 2026 को दिशानिर्देशों में संशोधन को अंतिम रूप दिया। इसके तहत आव्रजन नियंत्रण अधिनियम की तकनीकी आवश्यकताओं का सख्ती से पालन होगा, जिनकी 2012 से ढीली व्याख्या की जा रही थी।
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यह नीतिगत बदलाव 2012 में शुरू हुई उस ऐतिहासिक रियायत को समाप्त करता है, जब इंजीनियर, मानविकी और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के विशेषज्ञ, बिज़नेस मैनेजर और दीर्घकालिक निवासी सहित अधिकांश कार्य वीज़ा श्रेणियों के लिए अधिकतम निवास अवधि तीन से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई थी। उस समय आव्रजन अधिकारियों ने एक संक्रमणकालीन उपाय लागू किया था, जिसके तहत स्थायी निवास के आवेदनों में तीन साल के वीज़ा को “सबसे लंबी निवास अवधि” की शर्त पूरी करने वाला माना गया। दस साल से अधिक समय बाद यह प्रशासनिक लचीलापन आम चलन बन गया, हालांकि तकनीकी रूप से यह कानून के उस प्रावधान के विपरीत था, जिसमें उपलब्ध अधिकतम अवधि की मांग की गई है।
संशोधित दिशानिर्देशों के तहत इन श्रेणियों के आवेदकों को स्थायी निवास के कागज़ात जमा करने से पहले यह दिखाना होगा कि उनके पास पूरे पांच साल की अनुमति है। अत्यधिक कुशल पेशेवर श्रेणी, जिसमें पहले से आम तौर पर पांच साल की अवधि दी जाती है, इस विशिष्ट बदलाव से अप्रभावित रहेगी। हालांकि, इन आवेदकों को कारोबार की स्थिरता और कर अनुपालन से जुड़ी वीज़ा की मूल शर्तें पूरी करनी होंगी। आव्रजन अधिकारी निवास की स्थिरता, निरंतर रोजगार का इतिहास, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा का पूरा भुगतान तथा अच्छे आचरण के विस्तृत रिकॉर्ड सहित कई कारकों के आधार पर पांच साल का वीज़ा जारी करने का फैसला करते हैं। अनुपालन में छोटी-सी चूक भी पांच साल की अवधि देने से इनकार का कारण बन सकती है, जिससे नए ढांचे के तहत स्थायी निवास का आवेदन प्रभावी रूप से रुक सकता है।
सरकार ने 31 मार्च, 2027 तक की संक्रमणकालीन छूट अवधि तय की है। इस दौरान तीन साल के वीज़ा वाले लोगों को उनके वीज़ा की वैधता अवधि के भीतर स्थायी निवास के पहले फैसले के लिए अधिकतम अवधि वाला वीज़ा धारक माना जाता रहेगा। इस तारीख के बाद अधिकारी पांच साल की शर्त सख्ती से लागू करेंगे। इससे उन मध्यम अवधि के निवासियों के लिए बाधा काफी बढ़ जाएगी, जो वीज़ा नवीनीकरण की बाध्यता के बिना लंबे समय की स्थिरता चाहते हैं। निवासी कर या राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम का एक बार भी देर से भुगतान जांच के दौरान नकारात्मक मूल्यांकन का कारण बन सकता है। अनियमित आय वाले फ्रीलांसरों और स्वरोज़गार करने वालों के लिए यह विशेष चिंता का विषय है।
क्या दीर्घकालिक निवासियों के लिए भाषा परीक्षा अनिवार्य होगी?
वीज़ा अवधि की शर्तों के अलावा, सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी स्थायी निवास के मानदंडों में बुनियादी बदलावों पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। इनमें जापानी भाषा में दक्षता के अनिवार्य मानक और नागरिक जीवन में एकीकरण के अनिवार्य कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। 2026 की शुरुआत में औपचारिक रूप दिए जाने और संभवतः 2027 तक लागू होने की उम्मीद वाले इन प्रस्तावों के तहत आवेदकों को मानकीकृत परीक्षा के ज़रिए संवाद करने की क्षमता दिखानी होगी और जापानी संस्कृति, कानूनी व्यवस्था तथा सामाजिक दायित्वों से जुड़ा प्रशिक्षण पूरा करना होगा। ये बदलाव मौजूदा व्यवस्था से बड़ा बदलाव होंगे, जिसमें मुख्य रूप से आर्थिक योगदान और नियमों के पालन का आकलन किया जाता है। जापान के आव्रजन इतिहास में पहली बार सांस्कृतिक समायोजन को औपचारिक मानदंड बनाया जा सकता है।
फिलहाल स्थायी निवास के फैसलों में आचरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आम तौर पर दस साल से अधिक का निवास और राष्ट्रीय हितों में योगदान देखा जाता है, लेकिन भाषा की कोई सख्त शर्त नहीं है। प्रस्तावित बदलावों के तहत संभवतः जापानी भाषा प्रवीणता परीक्षा जैसी परीक्षा पास करनी होगी, हालांकि शुरुआती चर्चाओं में दक्षता का स्तर और परीक्षा का प्रारूप तय नहीं हुआ है। सत्तारूढ़ पार्टी के सूत्रों का कहना है कि इन शर्तों का मकसद स्थानीय समुदायों में भाषा की बाधा से पैदा होने वाली प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि निवासी दुभाषिया सेवाओं पर निर्भर हुए बिना चिकित्सा, कानूनी और आपातकालीन परिस्थितियों से निपट सकें। यह चर्चा विदेशी निवासियों और नगरपालिका कार्यालयों के बीच संवाद संबंधी कठिनाइयों की कई खबरों के बाद शुरू हुई है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि ये समस्याएं निवासियों की क्षमताओं के बजाय अपर्याप्त सहायता सेवाओं के कारण पैदा होती हैं।
आव्रजन नीति विशेषज्ञ और कोकुशिकान विश्वविद्यालय की प्रोफेसर एरिको सुज़ुकी ने इन प्रस्तावों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की।
स्थायी निवासी वे लोग हैं जिन्होंने जापान में अपना जीवन बसाया है। सबसे स्थिर कानूनी दर्जा माने जाने वाले दर्जे को रद्द करना गंभीर मामला है और इस पर बहुत सावधानी से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर छूट को व्यापक प्रशासनिक विवेक वाले दिशानिर्देशों पर निर्भर रखने के बजाय कानून में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से यह भी आग्रह किया कि आचरण के मूल्यांकन के साथ-साथ जापान में जन्मे होने जैसे व्यक्तिगत पहलुओं पर भी विचार करें।
आव्रजन शुल्क में भारी बढ़ोतरी की तैयारी
पात्रता के सख्त मानदंडों के साथ जापान सरकार आव्रजन से जुड़े शुल्कों में भारी बढ़ोतरी की योजना बना रही है। कुछ शुल्क मौजूदा स्तर से 500 से 900 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। मंत्रिमंडल ने 2025 के अंत में आव्रजन नियंत्रण कानून में संशोधन के विधेयक को मंजूरी दी। इसके तहत वैधानिक शुल्क की अधिकतम सीमा ¥10,000 से बढ़ाकर ¥300,000 की जाएगी। 1982 के बाद यह पहला मौका है। यह बदलाव आव्रजन सेवाओं के वित्तपोषण के तरीके में बुनियादी फेरबदल करेगा और वैश्विक मानकों के अनुरूप होने के साथ व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए राजस्व भी जुटाएगा।
स्थायी निवास के आवेदन का मौजूदा शुल्क ¥10,000 है। 2026 की गर्मियों तक सरकार के अंतिम अध्यादेश के आधार पर यह बढ़कर ¥100,000 से ¥200,000 के बीच हो सकता है। वीज़ा नवीनीकरण और दर्जा बदलने का शुल्क, जो अभी ¥6,000 है, बढ़कर ¥30,000 या ¥40,000 हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक कर भी हर बार जापान से रवाना होने पर ¥1,000 से बढ़कर ¥3,000 होने वाला है। यह शुल्क जापान छोड़ने वाले सभी लोगों पर लागू होगा, चाहे उनकी राष्ट्रीयता या ठहरने की अवधि कुछ भी हो। 1982 के बाद वैधानिक शुल्क की अधिकतम सीमा में यह पहला बदलाव है। उस साल तय की गई ¥10,000 की कानूनी सीमा ने चार दशक से अधिक समय तक शुल्क तय करने की गुंजाइश सीमित रखी।
एक से अधिक वीज़ा धारकों वाले परिवारों पर इसका वित्तीय असर काफी बढ़ जाएगा। कामकाजी माता-पिता, जीवनसाथी और दो बच्चों वाले परिवार को नई शुल्क व्यवस्था के तहत एक साथ नवीनीकरण कराने पर ¥160,000 या इससे अधिक चुकाने पड़ सकते हैं। मध्यम आय वाले लोगों के लिए यह बड़ा बोझ होगा और जापान में लंबे समय तक बसने के फैसले को प्रभावित कर सकता है। यह उन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के कामगारों के लिए खास तौर पर अहम है, जो खुदरा व्यापार, खाद्य सेवा, बुज़ुर्गों की देखभाल और निर्माण जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की गंभीर कमी पूरी करते हैं।
न्याय मंत्री हिरोशी हिरागुची ने कहा कि शुल्क बढ़ाने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी नागरिक आव्रजन प्रक्रियाओं, निवास प्रबंधन, डिजिटलीकरण और एकीकरण सहायता सेवाओं से जुड़ी लागत में उचित अनुपात में योगदान दें। सरकार का तर्क है कि मौजूदा शुल्क पश्चिमी देशों की तुलना में काफी कम हैं। उसने कहा कि अमेरिका में समान आव्रजन लाभों के लिए आम तौर पर काफी अधिक शुल्क लिया जाता है, जबकि ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी दीर्घकालिक निवास के शुल्क अधिक हैं।
स्थायी निवास रद्द करने के नए अधिकार
संशोधित आव्रजन नियंत्रण और शरणार्थी मान्यता कानून अप्रैल 2027 से लागू होगा। इसके तहत आव्रजन अधिकारियों को कुछ अनुपालन संबंधी चूकों पर स्थायी निवास रद्द करने का अभूतपूर्व अधिकार मिलेगा। इससे इस दर्जे से पारंपरिक रूप से जुड़ी सुरक्षा में बुनियादी बदलाव होगा। आव्रजन सेवा एजेंसी ने 29 सितंबर, 2025 को विस्तृत प्रवर्तन दिशानिर्देश जारी किए। इनमें उन परिस्थितियों को स्पष्ट किया गया है जिनमें दीर्घकालिक निवासियों को अनिश्चितकालीन रूप से रहने का अधिकार खोना पड़ सकता है। कुछ मामलों में तत्काल निर्वासन के बजाय दर्जे को सशर्त निवास में बदलने की प्रक्रिया भी तय की गई है।
स्थायी निवास रद्द किए जाने के मुख्य कारणों में कर, निवासी कर या सामाजिक बीमा अंशदान का जानबूझकर भुगतान न करना शामिल है। इसमें पेंशन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भी शामिल हैं। एजेंसी ने “जानबूझकर भुगतान न करने” का निर्धारण करने के लिए दो सख्त शर्तें तय की हैं। पहली, व्यक्ति बीमारी, प्राकृतिक आपदा या बेरोज़गारी जैसी अपरिहार्य परिस्थितियों के अभाव में भी भुगतान न करे। दूसरी, व्यक्ति भुगतान की बाध्यता से अवगत होने के बावजूद भुगतान से इनकार करे। दस्तावेज़ों से साबित होने वाली कठिनाई के कारण भुगतान न कर पाने वाले या जिन्हें भुगतान के आधिकारिक नोटिस मिले ही नहीं, उन्हें इन सख्त उपायों से छूट रहेगी।
चोरी, हमला या कारावास की सज़ा वाले अन्य अपराधों में दोषसिद्धि के साथ-साथ निवास कार्ड का नवीनीकरण न कराने या निर्वासन के आदेश का पालन न करने जैसी प्रशासनिक चूक भी दर्जा रद्द करने की कार्यवाही शुरू करा सकती है। खास बात यह है कि कानून में संक्रमणकालीन प्रावधान नहीं हैं। इसका मतलब है कि अप्रैल 2027 से पहले जमा हुए बकाया कर्ज़ के कारण भी दर्जा खो सकता है, यदि मामला “दुर्भावनापूर्ण” व्यवहार की कसौटी पर खरा उतरे। इसमें ¥100,000 से अधिक की बड़ी रकम का बार-बार बकाया या भविष्य में भुगतान से बचने की स्पष्ट मंशा के सबूत शामिल हैं।
ओकायामा प्रान्त में चीनी निवासियों के समूह का नेतृत्व करने वाले कत्सुनोरी र्यू ने इस सख्ती को लेकर चिंता जताई।
इससे हमारी चिंताएं कम नहीं होतीं, क्योंकि हमने खुद देखा है कि आव्रजन अधिकारी विदेशियों के साथ कितनी सख्ती कर सकते हैं। जापान में काम कर रहे और अपने बच्चों तथा पोते-पोतियों के लिए स्थायी निवास पाने की उम्मीद रखने वाले अत्यधिक कुशल पेशेवर खास तौर पर चिंतित हैं।
प्रोफेसर सुज़ुकी ने कानून की आलोचना करते हुए कहा कि मानवीय आधार पर छूट के लिए स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा देने के बजाय यह प्रशासनिक विवेक पर निर्भर करता है। उनका कहना था कि नौकरशाही की व्याख्या के अधीन व्यापक दिशानिर्देशों के बजाय स्थायी निवास रद्द करने के लिए स्पष्ट विधायी मानक होने चाहिए। यह खास तौर पर इसलिए ज़रूरी है क्योंकि लंबे समय से रह रहे लोगों की परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं और उन्होंने दशकों में परिवार तथा कारोबार बसाए हो सकते हैं।
व्यवसायों और कामगारों की सख्त निगरानी
ये नीतिगत बदलाव व्यक्तिगत आवेदकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेशी श्रमिकों की भर्ती कराने वाले नियोक्ताओं और स्टाफिंग एजेंसियों पर भी लागू होंगे। तत्काल प्रभाव से इंजीनियर, मानविकी विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के दर्जे वाले विदेशी नागरिकों को भेजने वाली एजेंसियों और उनकी ग्राहक कंपनियों को औपचारिक वचनपत्र जमा करना होगा। इसमें पुष्टि करनी होगी कि कर्मचारी केवल अपने अधिकृत वीज़ा वर्ग के अनुरूप काम करेंगे। सरकार इन पेशेवर वीज़ा की व्याख्या भी सख्त कर रही है, ताकि उनका दुरुपयोग रोका जा सके और अत्यधिक कुशल कामगारों को ऐसे अनुचित श्रम वर्गों में न धकेला जाए जिनसे वेतन या काम की परिस्थितियां प्रभावित हों।
निर्दिष्ट कुशल कामगारों सहित विदेशी नागरिकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को, खास तौर पर वेतन की चोरी या भुगतान न करने के मामलों में, ऐसे कामगारों को स्वीकार करने पर पांच साल का प्रतिबंध झेलना होगा। यह दंड पूरे कारोबारी संस्थान की वीज़ा प्रायोजन क्षमता पर लागू होगा। इससे नियोक्ताओं के लिए नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा और उन कामगारों की स्थिति अस्थिर हो सकती है जिनका निवास दर्जा नियोक्ता के प्रायोजन पर निर्भर है।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए सरकार प्रवेश के समय अपने-आप मिलने वाली काम की अनुमति खत्म करने की योजना बना रही है। इसके बजाय साप्ताहिक काम के घंटों और रोजगार की स्थितियों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। फिलहाल, अपने दर्जे से बाहर की गतिविधियों में शामिल होने की वैध अनुमति वाले छात्र स्कूल के दौरान सप्ताह में 28 घंटे और छुट्टियों में दिन में आठ घंटे तक काम कर सकते हैं। नई व्यवस्था का मकसद अवैध श्रम शोषण रोकना और उन चिंताओं का समाधान करना है कि शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल अनधिकृत रोजगार के माध्यम के रूप में हो रहा है।
जापान यात्रा इलेक्ट्रॉनिक अनुमति प्रणाली को 31 मार्च, 2029 तक पूरी तरह लागू करने की योजना है। इसके तहत 74 देशों के वीज़ा-मुक्त यात्रियों को प्रवेश से पहले मंज़ूरी लेनी होगी, जिससे अल्पकालिक यात्रियों की जांच के स्तर बढ़ेंगे। अधिकारी माय नंबर पहचान प्रणाली के ज़रिए राष्ट्रीय और स्थानीय सरकारों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था भी बेहतर करना चाहते हैं, ताकि निवासी विदेशी नागरिकों के बीच कर बकाया, चिकित्सा खर्च का भुगतान न होना और लाभ पाने के लिए धोखाधड़ी का पता लगाया जा सके।
घटती आबादी के बीच नीतिगत तनाव
जापान के गंभीर जनसांख्यिकीय संकट के बीच ये प्रतिबंधात्मक कदम सामने आए हैं। इससे आर्थिक ज़रूरतों और आव्रजन नियंत्रण की प्राथमिकताओं के बीच साफ तनाव दिखता है। 2025 के अंत में विदेशी निवासियों की संख्या रिकॉर्ड 4.13 मिलियन तक पहुंच गई, जबकि कामकाजी उम्र की आबादी हर साल करीब 500,000 घट रही है। इसके बावजूद सरकार विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थायी रूप से बसने की राह में ऊंची बाधाएं भी खड़ी कर रही है। यह नीतिगत पैकेज जापानी समाज का स्थायी सदस्य बनने के रास्ते खोलने के बजाय राजस्व और निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया गया दिखता है।
जापान में लंबे समय से रह रहे विदेशी नागरिकों ने प्रतिबंधात्मक नीतियों और जनसांख्यिकीय ज़रूरतों के बीच दिख रहे विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया है। जापान में 15 साल से रह रहीं रूसी कंटेंट क्रिएटर आशिया ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि वेतन का स्तर तुलनीय अर्थव्यवस्थाओं से काफी कम होने के बावजूद वीज़ा शुल्क को पश्चिमी देशों के बराबर करने का क्या तर्क है। उन्होंने कहा कि नीतिगत माहौल में सभी विदेशी नागरिकों के साथ एक जैसा व्यवहार बढ़ रहा है, चाहे उनका वीज़ा वर्ग, रोजगार में योगदान या निवास की अवधि कुछ भी हो। इससे वैश्विक प्रतिभाओं के लिए जापान की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह ढांचा मानवीय आधार पर छूट के लिए स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा के बजाय प्रशासनिक विवेक पर बहुत अधिक निर्भर करता है। उनका तर्क है कि स्थायी निवास रद्द करने के लिए व्यापक दिशानिर्देशों पर आधारित फैसलों के बजाय स्पष्ट विधायी मानक होने चाहिए। यह खास तौर पर इसलिए ज़रूरी है क्योंकि लंबे समय से रह रहे लोगों की परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं और उन्होंने दशकों में परिवार तथा कारोबार बसाए हो सकते हैं। अचानक लागत बढ़ने और आय के स्थिर रहने से जापान वैश्विक प्रतिभाओं के लिए कम आकर्षक हो सकता है, जिन्हें लाने की बात वह करता है। ऐसा उस समय हो रहा है जब अहम उद्योगों में श्रमिकों की कमी बढ़ रही है।
मुख्य बिंदु
- 1 अप्रैल, 2027 से स्थायी निवास के आवेदकों के पास पांच साल का वीज़ा होना अनिवार्य होगा। इससे 2012 से लागू तीन साल के दर्जे को स्वीकार करने की प्रथा खत्म होगी
- छूट अवधि 31 मार्च, 2027 तक रहेगी। मौजूदा तीन साल के वीज़ा धारक सख्त नियम लागू होने से पहले वर्तमान शर्तों के तहत आवेदन कर सकेंगे
- सरकार स्थायी निवास के आवेदकों के लिए जापानी भाषा की अनिवार्य दक्षता परीक्षा और एकीकरण कार्यक्रमों पर विचार कर रही है
- आव्रजन शुल्क दस गुना तक बढ़ सकते हैं। स्थायी निवास के आवेदन पर ¥100,000 से ¥300,000 तक खर्च हो सकता है, जबकि नवीनीकरण शुल्क बढ़कर ¥40,000 हो सकता है
- अप्रैल 2027 से नए कानूनों के तहत कर बकाया, आपराधिक दोषसिद्धि या आव्रजन उल्लंघन पर स्थायी निवास रद्द किया जा सकेगा
- विदेशी कामगारों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कारोबारों पर अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को रखने के लिए पांच साल का प्रतिबंध लगेगा। स्टाफिंग एजेंसियों को नियमों के पालन का वचनपत्र जमा करना होगा
- 2025 में विदेशी निवासियों की संख्या रिकॉर्ड 4.13 मिलियन पहुंच गई। यह बढ़ती राष्ट्रीय श्रमिक कमी के बीच प्रतिबंध सख्त किए जाने के साथ हुआ है






