जनसांख्यिकीय संकट से जूझते दक्षिण कोरिया में कुशल विदेशी कामगारों की मासिक आय 2,000 डॉलर के पार

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जनसांख्यिकीय संकट से जूझते दक्षिण कोरिया में कुशल विदेशी कामगारों की मासिक आय 2,000 डॉलर के पार

पेशेवर वीज़ा धारकों की आय का नया पड़ाव

सांख्यिकी मंत्रालय और न्याय मंत्रालय द्वारा जारी प्रवासियों के निवास और रोजगार की स्थिति पर 2025 के सर्वेक्षण के अनुसार, दक्षिण कोरिया में पेशेवर रोजगार वीज़ा रखने वाले आधे से अधिक विदेशी कामगार अब हर महीने 3 मिलियन वॉन (2,000 डॉलर) से अधिक कमाते हैं। 2017 से प्रवासी आबादी के रुझानों पर नज़र रख रहे इस व्यापक सर्वेक्षण से पता चलता है कि E-1 से E-7 तक के कार्य परमिट धारकों में 50 प्रतिशत से अधिक ने 3 मिलियन वॉन से अधिक की मासिक आय बताई। इस श्रेणी में प्रोफेसर (E-1), विदेशी भाषा के शिक्षक (E-2), शोधकर्ता (E-3), प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ (E-4), लाइसेंसधारी पेशेवर (E-5), कलाकार और प्रस्तुतकर्ता (E-6), तथा विशेष गतिविधियों में काम करने वाले लोग (E-7) शामिल हैं।

विषय-सूची
  1. पेशेवर वीज़ा धारकों की आय का नया पड़ाव
  2. दक्षिण कोरिया की जनसांख्यिकीय चुनौती की तात्कालिकता
  3. आंकड़ों में पेशेवरों की आय का लाभ
  4. कामकाजी परिस्थितियों का विरोधाभास
  5. नीतिगत बदलाव और वीज़ा सुधार
  6. भर्ती की लागत का बोझ
  7. कामगारों को बनाए रखने में व्यवस्थागत बाधाएं
  8. आवास और भौगोलिक संकेंद्रण
  9. मुख्य निष्कर्ष

आंकड़े विदेशी कामगारों के बीच आय में बड़ा अंतर दिखाते हैं। देश में सभी विदेशी कर्मचारियों में 50.2 प्रतिशत की मासिक कमाई 2 मिलियन से 3 मिलियन वॉन के बीच थी, जबकि 36.9 प्रतिशत ने 3 मिलियन वॉन से अधिक कमाए। हालांकि, वीज़ा के प्रकार के अनुसार आय का वितरण काफी अलग है। पेशेवर वीज़ा धारकों की कमाई जहां ऊंचे आय वर्गों में केंद्रित है, वहीं 68.9 प्रतिशत गैर-पेशेवर कामगारों ने 2 मिलियन से 3 मिलियन वॉन के बीच कमाया। इनमें खास तौर पर E-9 वीज़ा धारक शामिल हैं, जो आम तौर पर विनिर्माण, कृषि और मत्स्य पालन के क्षेत्रों में काम करते हैं। विवाह के आधार पर प्रवास वीज़ा धारकों (48.9 प्रतिशत) और वर्किंग विज़िट वीज़ा धारकों (42.8 प्रतिशत) की कमाई भी मुख्य रूप से 2 मिलियन से 3 मिलियन वॉन के दायरे में रही।

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दक्षिण कोरिया की जनसांख्यिकीय चुनौती की तात्कालिकता

कुशल विदेशी कामगारों की बढ़ती आय दक्षिण कोरिया के उच्च-कौशल वाले आव्रजन की ओर तेज़ी से बढ़ते रुझान को दिखाती है। इसके पीछे दुनिया की सबसे कम प्रजनन दर और तेजी से बूढ़ी होती आबादी है। हाल के अनुमानों के मुताबिक, अगर कदम नहीं उठाए गए तो कामकाजी उम्र की आबादी घटने के कारण 2050 के दशक तक देश की आर्थिक वृद्धि नकारात्मक हो सकती है। जनसांख्यिकीय गिरावट से निपटने के लिए सरकार ने 88.5 ट्रिलियन वॉन आवंटित किए हैं, लेकिन अतीत में इसी तरह के प्रयासों से मामूली नतीजे ही मिले हैं। ऐसे में विदेशी कामगारों की भर्ती राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।

परंपरागत रूप से, दक्षिण कोरिया ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) में श्रमिकों की कमी पूरी करने के लिए 17 एशियाई देशों के साथ सरकार-से-सरकार समझौतों के तहत रोजगार परमिट प्रणाली (EPS) पर भरोसा किया। इस प्रणाली के जरिए मुख्य रूप से विनिर्माण, निर्माण और कृषि क्षेत्रों के लिए कम-कौशल वाले कामगार आए। हालांकि, अनुमानों के मुताबिक 2025 से 2029 के बीच दक्षिण कोरिया में विज्ञान और इंजीनियरिंग के कम-से-कम 580,000 विशेषज्ञों की कमी होगी। इसके चलते देश अब उच्च शिक्षित पेशेवरों को आकर्षित करने की रणनीति अपना रहा है।

आंकड़ों में पेशेवरों की आय का लाभ

सर्वेक्षण के आंकड़े पेशेवर कौशल से मिलने वाले आर्थिक लाभ को दिखाते हैं। स्थायी निवासियों की कमाई सबसे अधिक रही: 59.3 प्रतिशत ने हर महीने 3 मिलियन वॉन से अधिक कमाए। इसके बाद पेशेवर कामगारों का स्थान रहा, जिनमें यह आंकड़ा 50.8 प्रतिशत था, जबकि विदेश में रहने वाले कोरियाई (F-4 वीज़ा धारक) 46.3 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इसके विपरीत, अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सबसे अधिक वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इनमें 51.2 प्रतिशत ने हर महीने 1 मिलियन से 2 मिलियन वॉन कमाए और 22 प्रतिशत ने बीते साल आर्थिक तंगी की जानकारी दी।

15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 1.69 मिलियन प्रवासियों की जनसांख्यिकीय तस्वीर एक युवा कामगार आबादी दिखाती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 20 से 29 वर्ष के लोगों का था, जो 30.9 प्रतिशत रहे। इसके बाद 30 से 39 वर्ष के लोग 27.5 प्रतिशत थे। कुल प्रवासी आबादी में पुरुषों का हिस्सा 57.9 प्रतिशत था। वे आम तौर पर रोजगार वीज़ा के जरिए देश में आए, जबकि 42.1 प्रतिशत महिलाएं अधिकतर विवाह के आधार पर प्रवास या पढ़ाई के लिए आईं।

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कामकाजी परिस्थितियों का विरोधाभास

कुशल कामगारों की आय बढ़ने के बावजूद, सर्वेक्षण विदेशी कामगारों के बीच काम के घंटों से जुड़ी लगातार बनी चुनौतियों को उजागर करता है। सभी विदेशी कामगारों में 58.1 प्रतिशत ने बताया कि वे हर सप्ताह 40 से 50 घंटे काम करते हैं, जो आम पूर्णकालिक कामकाजी समय के अनुरूप है। हालांकि, 17.8 प्रतिशत ने सप्ताह में 50 से 60 घंटे और 8.7 प्रतिशत ने 60 घंटे या उससे अधिक काम करने की बात कही। इससे पता चलता है कि कई प्रवासी कामगारों, खासकर गैर-पेशेवर क्षेत्रों में, के लिए लंबे काम के घंटे आम हैं।

हैरानी की बात है कि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद व्यापक असंतोष नहीं दिखा। सभी विदेशी कामगारों में से 68.7 प्रतिशत ने अपनी मौजूदा नौकरी से संतुष्टि जताई। E-9 गैर-पेशेवर कामगारों में संतुष्टि का स्तर खास तौर पर ऊंचा, 77 प्रतिशत रहा। पेशेवर कामगारों में यह 74.7 प्रतिशत था। केवल 10.8 प्रतिशत विदेशी कामगारों ने नौकरी बदलने की इच्छा जताई। उन्होंने कम वेतन और खतरनाक कामकाजी परिस्थितियों को इसकी मुख्य वजह बताया।

जब विशेष ज्ञान और तकनीक से लैस उच्च-कुशल विदेशी पेशेवर कोरिया आते हैं, तो बात सिर्फ आबादी बढ़ाने की नहीं होती। इससे उपभोक्ता खर्च भी बढ़ता है और श्रम उत्पादकता में सुधार, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता मज़बूत करने तथा औद्योगिक ढांचे को आगे बढ़ाने के जरिए अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव को अधिकतम किया जा सकता है।

कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की एक रिपोर्ट में कोरिया विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर किम डुक-पा ने विदेशी प्रतिभाओं के आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण करते हुए यह आकलन पेश किया। अध्ययन के मुताबिक, 1 मिलियन कुशल विदेशी कामगारों को आकर्षित करने से दक्षिण कोरिया की GDP में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है और कम-से-कम 145 ट्रिलियन वॉन (105 अरब डॉलर) का मूल्य जुड़ सकता है।

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नीतिगत बदलाव और वीज़ा सुधार

हाई-टेक उद्योगों में श्रमिकों की भारी कमी को देखते हुए, दक्षिण कोरिया ने 2025 में टॉप-टियर वीज़ा शुरू किया। इसका लक्ष्य सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, सेकेंडरी बैटरी और डिस्प्ले क्षेत्रों की विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करना है। भविष्य में रोबोटिक्स और रक्षा क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाएगा। यह पहल पारंपरिक आव्रजन नीति से एक बड़ा बदलाव है, जो मुख्य रूप से कम-कौशल वाले श्रम पर केंद्रित थी।

87 नौकरी श्रेणियों में प्रमाणित विशेषज्ञता रखने वाले कुशल पेशेवरों के लिए बनाया गया E-7 वीज़ा IT, व्यवसाय प्रबंधन और वित्त जैसे क्षेत्रों को शामिल करता है। इस वीज़ा के लिए आवेदन 2023 में 2,000 से बढ़कर 35,000 हो गए। इससे संकेत मिलता है कि अब उद्योग के हर क्षेत्र में कामगारों की कमी है। हालांकि, कारोबार लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाणपत्र, विदेशी कामगार नियुक्त करने की आवश्यकता का प्रमाण, भाषा दक्षता के मानक और न्यूनतम आय सीमा जैसी सख्त शर्तें सीमित संसाधनों वाले SMEs और स्टार्टअप के लिए बड़ी बाधा हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने 2016 में K-स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज शुरू किया, जिसके तहत विदेशी उद्यमियों को बसने में सहायता, वीज़ा संबंधी मदद और कंपनी पंजीकरण में सहयोग दिया जाता है। इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए अधिकारी अगले साल अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक छात्र श्रेणी शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

भर्ती की लागत का बोझ

प्रवास से जुड़ी वित्तीय बाधाएं वीज़ा की शर्तों तक सीमित नहीं हैं। भर्ती लागत पर हुए अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक, कम-कौशल और अर्ध-कुशल कामगार विदेश में नौकरी पाने के लिए अक्सर कई महीनों की कमाई के बराबर शुल्क चुकाते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत यह लागत नियोक्ताओं को उठानी चाहिए। पेशेवर वीज़ा धारकों की भर्ती लागत आम तौर पर उनकी कमाई के अनुपात में कम होती है, लेकिन विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने ऐसे मामले दर्ज किए हैं जिनमें कुछ प्रवास मार्गों पर कामगारों ने भर्ती शुल्क के तौर पर 11 महीने तक की कमाई चुकाई।

2030 के सतत विकास लक्ष्यों में लक्ष्य 10.7 शामिल है। इसके तहत देशों को व्यवस्थित, सुरक्षित और ज़िम्मेदार प्रवास को आसान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। साथ ही यह मापा जाता है कि गंतव्य देश में मासिक आय के अनुपात में कर्मचारियों को भर्ती की लागत कितनी चुकानी पड़ती है। यह अंतरराष्ट्रीय ढांचा दक्षिण कोरिया के गैर-पेशेवर कामगारों के सामने बनी चुनौतियों को रेखांकित करता है। कुशल पेशेवरों की तुलना में उनकी कमाई के अनुपात में भर्ती लागत अधिक होती है।

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कामगारों को बनाए रखने में व्यवस्थागत बाधाएं

प्रतिभाओं को आकर्षित करने की नीतिगत पहलों के बावजूद, नीति के इरादे और उसके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। कोरियाई विश्वविद्यालयों से पढ़े विदेशी स्नातकों को वीज़ा बदलने की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें D-10 नौकरी खोजने वाले वीज़ा से E-7 कार्य वीज़ा और अंत में F-2-7 दीर्घकालिक निवास वीज़ा तक पहुंचने की प्रक्रिया शामिल है। नौकरशाही की जटिलता के साथ-साथ आय, शैक्षणिक योग्यता और कोरियाई भाषा दक्षता से जुड़ी शर्तों के कारण कई योग्य स्नातक अपने देश लौट जाते हैं।

2025 में पहली बार विदेशी स्नातकों के बीच रोजगार का आंकड़ा 30 प्रतिशत तक पहुंचा, जो 11.7 प्रतिशत की वृद्धि थी। फिर भी देश को उन्हें बनाए रखने में कठिनाई हो रही है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों में केवल 19 प्रतिशत STEM विषयों में पढ़ाई करते हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया ने तय समय से दो साल पहले 300,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को देश में लाने का लक्ष्य हासिल कर लिया, लेकिन उच्च शिक्षा और रोजगार प्रणालियों के बीच नीतिगत तालमेल की कमी के कारण कई छात्र लंबे समय तक कामगारों में योगदान नहीं दे पाते।

कार्यस्थल पर अधिकार भी चिंता का विषय हैं। विदेशी कामगार रोजगार अधिनियम और श्रम मानक अधिनियम सुरक्षा देते हैं, लेकिन इनका पालन कराने में असंगति बनी हुई है। विदेशी कामगारों ने कोरियाई सहकर्मियों की तुलना में कम वेतन, खराब रहने की परिस्थितियों और वेतन मिलने में देरी या वेतन न मिलने के अनुभव बताए हैं। गैर-पेशेवर कामगारों में केवल 2 प्रतिशत ने परिवार के साथ रहने की जानकारी दी। अधिकतर सहकर्मियों के साथ छात्रावास या साझा आवास में रहते थे, जबकि सभी प्रवासियों में 48.6 प्रतिशत परिवार के साथ रहते थे।

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आवास और भौगोलिक संकेंद्रण

सर्वेक्षण में राजधानी क्षेत्र में विदेशी निवासियों का बड़ा संकेंद्रण सामने आया। कुल 57.5 प्रतिशत प्रवासी सियोल, इंचियोन या ग्योंगगी प्रांत में रहते थे, जो महानगरीय क्षेत्र में केंद्रित आर्थिक अवसरों को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों में 47.7 प्रतिशत राजधानी क्षेत्र में रहते थे। यह डेगू और उत्तर ग्योंगसांग प्रांत में रहने वाले छात्रों के संयुक्त हिस्से (11.3 प्रतिशत) से चार गुना से भी अधिक था।

आवास की स्थिति वीज़ा की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग थी। अधिकांश प्रवासी (58.5 प्रतिशत) अलग मकानों या बहु-इकाई आवासों में रहते थे, जबकि 20 प्रतिशत अपार्टमेंट और 13.2 प्रतिशत छात्रावासों में रहते थे। दक्षिण कोरिया में लगभग 14.1 प्रतिशत प्रवासियों के पास अपना घर था। हालांकि, बीते वर्ष 12.9 प्रतिशत प्रवासियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सबसे आम समस्याएं थीं: खर्च के कारण इलाज न करा पाना (36.2 प्रतिशत), उपयोगिता बिल समय पर न चुका पाना (29.4 प्रतिशत) और पढ़ाई का खर्च जुटाने में कठिनाई (25 प्रतिशत)।

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मुख्य निष्कर्ष

  • पेशेवर वीज़ा धारकों (E-1 से E-7) में 50 प्रतिशत से अधिक अब हर महीने 3 मिलियन वॉन (2,000 डॉलर) से अधिक कमाते हैं। सभी विदेशी कामगारों में यह आंकड़ा 36.9 प्रतिशत है
  • दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर दुनिया में सबसे कम है और अनुमान है कि 2025 से 2029 के बीच उसे विज्ञान और इंजीनियरिंग के 580,000 अतिरिक्त विशेषज्ञों की ज़रूरत होगी
  • विदेशी कामगारों में 26.5 प्रतिशत सप्ताह में 50 घंटे से अधिक काम करते हैं, फिर भी कुल मिलाकर 68.7 प्रतिशत नौकरी से संतुष्ट हैं। गैर-पेशेवर कामगारों में संतुष्टि का आंकड़ा 77 प्रतिशत है
  • नया टॉप-टियर वीज़ा सेमीकंडक्टर और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की विशिष्ट प्रतिभाओं को लक्षित करता है, जबकि K-स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज का उद्देश्य विदेशी उद्यमियों को देश में बनाए रखना है
  • कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार, 1 मिलियन कुशल विदेशी कामगारों की भर्ती से दक्षिण कोरिया की GDP में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है
  • वीज़ा बदलने की जटिल प्रक्रिया, भाषा की शर्तें और आवास की लागत जैसी व्यवस्थागत बाधाएं कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों और कुशल कामगारों को लंबे समय तक देश में बनाए रखने में रुकावट डालती हैं
  • 90 प्रतिशत से अधिक विदेशी निवासी एशियाई देशों से आते हैं। जातीय कोरियाई चीनी कुल प्रवासी आबादी का 29.9 प्रतिशत और वियतनामी नागरिक 16 प्रतिशत हैं
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