रूढ़िवादी ताकतों का अप्रत्याशित उभार
थाई प्रधानमंत्री आनुतिन चार्नवीराकुल ने थाईलैंड के मध्यावधि आम चुनाव में शानदार जीत का दावा किया है। उन्होंने उन जनमत सर्वेक्षणों को गलत साबित कर दिया, जिनमें प्रगतिशील विपक्ष की जीत का अनुमान लगाया गया था। करीब 95 प्रतिशत मतदान केंद्रों से नतीजे आने के बाद, आनुतिन की भूमजैथाई पार्टी ने 500 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में लगभग 192 सीटें हासिल कीं। यह 2023 में मिली सीटों से दोगुने से भी अधिक और अनुमानों से कहीं ज्यादा है।
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यह नतीजा तीन साल पहले की स्थिति से नाटकीय बदलाव दर्शाता है। तब सुधारवादी आंदोलन, जिसका अब प्रतिनिधित्व पीपुल्स पार्टी करती है, सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा था, लेकिन गैरनिर्वाचित सीनेटरों ने उसे सत्ता में आने से रोक दिया था। इस बार मतदाताओं ने रूढ़िवादी राजनीतिक व्यवस्था को स्पष्ट जनादेश दिया। भूमजैथाई ने संसद की करीब 40 प्रतिशत सीटें जीतीं, जबकि उसके मुख्य प्रतिद्वंद्वियों को भारी नुकसान हुआ।
यह चुनाव पिछले साल के अंत में कंबोडिया के साथ सीमा पर हुई जानलेवा झड़पों के बाद आर्थिक चिंताओं और बढ़ते राष्ट्रवाद की पृष्ठभूमि में हुआ। दिसंबर में गठबंधन टूटने के बाद आनुतिन ने मध्यावधि चुनाव की घोषणा की। उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्थिरता को लेकर मतदाताओं की चिंताएं व्यापक सुधार की मांग पर भारी पड़ेंगी। उनका दांव शानदार ढंग से सफल रहा। भूमजैथाई ने न केवल अपने पारंपरिक गढ़ों को बरकरार रखा, बल्कि उन इलाकों में भी पैठ बनाई जहां लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक परिवारों का दबदबा था।
बैंकॉक स्थित अपनी पार्टी के मुख्यालय में पत्रकारों से आनुतिन ने कहा, "आज भूमजैथाई की जीत सभी थाई लोगों की जीत है, चाहे आपने भूमजैथाई पार्टी को वोट दिया हो या नहीं। हमें थाई लोगों की पूरी क्षमता से सेवा करने के लिए हर संभव प्रयास करना होगा।"
यह नतीजा वर्षों में थाईलैंड में रूढ़िवादी दलों की पहली निर्णायक चुनावी जीत है। इससे उस राजनीतिक अस्थिरता के दौर का अंत हुआ, जिसमें तीन साल में तीन अलग-अलग प्रधानमंत्री बने। अल्पमत सरकार के गठन के 100 दिन भी पूरे होने से पहले संसद भंग कर रविवार का चुनाव कराने वाले आनुतिन अब दो दशक में दोबारा चुनाव जीतकर पद पर लौटने वाले पहले थाई प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में हैं।
राष्ट्रवाद और रणनीतिक समय
भूमजैथाई की जीत का पैमाना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अप्रत्याशित रहा। चुनाव से पहले के ज्यादातर सर्वेक्षणों में पीपुल्स पार्टी पहले स्थान पर थी। उसे अपनी पूर्ववर्ती मूव फॉरवर्ड पार्टी की 2023 की सफलता को आगे बढ़ाने की उम्मीद थी, जब उसने 151 सीटें जीती थीं। इसके बजाय, प्रगतिशील आंदोलन करीब 116 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कभी प्रभावशाली रही फेउ थाई पार्टी सिमटकर लगभग 74 सीटों पर आ गई।
कंबोडिया के साथ थाई सीमा पर महीनों तक चली लड़ाई के बाद राष्ट्रवाद को अपनाना आनुतिन की सफलता का अहम कारण बना। इस संघर्ष में आम नागरिकों की जान गई और सेना ने विवादित इलाकों पर नियंत्रण कर लिया। इससे प्रधानमंत्री को संप्रभुता की रक्षा करने वाले युद्धकालीन नेता के रूप में अपनी छवि पेश करने का मौका मिला। सीमा पर दीवार बनाने और स्वयंसेवी सैन्य कार्यक्रमों का विस्तार करने के वादों के साथ प्रचार करते हुए आनुतिन ने कड़ा रुख अपनाया, जो बाहरी खतरों को लेकर चिंतित मतदाताओं को पसंद आया।
सिंगापुर के आईएसईएएस-युसुफ इशाक संस्थान की एसोसिएट फेलो टीता सेंगली ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं की प्राथमिकताएं काफी बदल गईं। उन्होंने कहा, "लोगों की प्राथमिकताएं सुधारों से हटकर स्थिरता की जरूरत पर आ गई हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की अनिश्चित विदेश नीति ने भी निरंतरता चाहने वाले थाई मतदाताओं को प्रभावित किया।
चुनाव प्रचार के दौरान आनुतिन ने अपनी पार्टी की पहचान को स्पष्ट रूप से देशभक्ति से जोड़ा। पार्टी के नीले रंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "भूमजैथाई पार्टी में हर किसी के दिल में राष्ट्रवाद है।" यह नीला रंग थाई राष्ट्रीय ध्वज में भी है। "आप रंग देख सकते हैं।"
इस रणनीति के तहत भूमजैथाई को उन रूढ़िवादी मतदाताओं का स्वाभाविक ठिकाना बताया गया, जो पहले सेना समर्थक दलों को वोट देते थे। साथ ही, आर्थिक और सुरक्षा मामलों में क्षमता का संदेश देने के लिए पार्टी ने सम्मानित तकनीकी विशेषज्ञों और अनुभवी स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ा।
सुधारवादी आंदोलन की राह बदली
नतीजों से पीपुल्स पार्टी को करारा झटका लगा। उसे 38 वर्षीय कारोबारी नत्थाफोंग रुएंगपन्यावुत के नेतृत्व में 2023 के प्रदर्शन को और बेहतर करने की उम्मीद थी। सेना के प्रभाव को सीमित करने और आर्थिक एकाधिकार तोड़ने की वकालत करने वाली इस पार्टी ने बैंकॉक में अपना दबदबा कायम रखा और सभी 33 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। हालांकि, प्रांतीय इलाकों और चोनबुरी, फुकेत तथा नोनथाबुरी जैसे दूसरे शहरी केंद्रों में उसे काफी नुकसान हुआ।
बांग कापी जिले में पार्टी मुख्यालय पर समर्थकों को संबोधित करते हुए नत्थाफोंग ने हार स्वीकार की और अपने समर्थकों से उम्मीद बनाए रखने का आग्रह किया।
उम्मीद मत खोइए। हमने लंबा सफर तय किया है।
पार्टी प्रमुख ने माना कि पीपुल्स पार्टी भूमजैथाई के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होगी और विपक्ष में बैठेगी। नत्थाफोंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अगर भूमजैथाई सरकार बना सकती है, तो हमें विपक्ष में बैठना होगा। हम सबसे पहले स्थान पर आने वाली पार्टी का सम्मान करने और सरकार बनाने के उसके अधिकार के सिद्धांत पर कायम हैं।"
विश्लेषकों ने प्रगतिशील दल की गिरावट के पीछे कई कारण बताए। पिछले सितंबर में फेउ थाई के दो प्रधानमंत्रियों को अदालतों द्वारा पद से हटाए जाने के बाद पार्टी ने आनुतिन को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया था। इससे रूढ़िवादी नेता को पद पर बने रहने का लाभ मिला और सुधारवादियों की अपनी वैचारिक शुद्धता कमजोर हुई। इसके अलावा, ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी का जमीनी नेटवर्क स्थापित प्रतिद्वंद्वियों से कमजोर रहा। इन्हीं क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहने वाले उम्मीदवार को जीत दिलाने वाली मतदान प्रणाली के जरिए संसद की 80 प्रतिशत सीटें तय होती हैं।
स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक मैथिस लोहतापनोन ने कहा, "इसकी जीत का पैमाना अप्रत्याशित था। शायद यह दिखाता है कि ज्यादा राष्ट्रवादी राजनीतिक माहौल और रूढ़िवादी मतदाताओं को एकजुट करने की इसकी क्षमता, दोनों ने इसके पक्ष में काम किया।"
बैंकॉक स्थित थाईलैंड फ्यूचर थिंक टैंक के राजनीतिक वैज्ञानिक नापोन जटुसरिपितक ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान अपनी स्थिति नरम करने की पीपुल्स पार्टी की कोशिश से उसकी पहचान कमजोर हुई होगी। उन्होंने कहा, "केवल वैचारिक नजरिये से देखें तो पार्टी की पहचान कुछ धुंधली हुई है। उसके मुख्य समर्थक, खासकर युवा, जो विचारधारा के आधार पर पार्टी को वोट देने के इच्छुक थे, इस बार उतने उत्साहित नहीं हैं।"
शिनावात्रा परिवार का राजनीतिक दबदबा ढहा
दो दशकों से थाई राजनीति पर हावी अरबपति शिनावात्रा परिवार के समर्थन वाली फेउ थाई पार्टी ने हाल के दशकों का अपना सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन किया। पार्टी ने थाकसिन शिनावात्रा के भतीजे योडचानन वोंगसावत को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था। उसकी सीटों की संख्या 2023 के 141 से घटकर लगभग 74 रह गई। उत्तर और पूर्वोत्तर के उसके पारंपरिक गढ़ भूमजैथाई और अन्य प्रतिद्वंद्वियों के हाथ चले गए।
इस पतन के पीछे कंबोडिया संघर्ष से निपटने में पिछली सरकार की विफलता और पिछले सितंबर में परिवार के मुखिया थाकसिन शिनावात्रा का जेल जाना, दोनों कारण रहे। पार्टी प्रमुख और थाकसिन की बेटी पैतोंगतार्न शिनावात्रा को सीमा संकट से जुड़े नैतिकता उल्लंघनों के कारण पद छोड़ना पड़ा। घटनाओं की इसी शृंखला ने आनुतिन को सत्ता तक पहुंचाया।
नतीजों के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में फेउ थाई के मौजूदा नेता जुलापन अमोर्नविवत ने कहा, "हमें जनता की आवाज का सम्मान करना होगा।" हार के बावजूद योडचानन ने आशावादी रुख अपनाया और कहा कि उन्हें मिले समर्थन से हौसला मिला है।
शिनावात्रा परिवार की राजनीतिक मशीन का कमजोर पड़ना उस दौर के अंत का संकेत हो सकता है, जिसमें परिवार या उसके सहयोगियों के छह लोकलुभावन प्रधानमंत्रियों को तख्तापलट और अदालती फैसलों के जरिए सत्ता से हटाया गया। जो इलाके वर्षों से भरोसेमंद रूप से लाल माने जाते थे, वे नीले हो गए। भूमजैथाई ने स्थानीय प्रभावशाली नेताओं और राजनीतिक परिवारों को अपने पक्ष में लाने में सफलता पाई।
थम्मनत प्रोमपाओ के नेतृत्व वाली और रूढ़िवादी हितों से जुड़ी क्लाथम पार्टी को फेउ थाई के पतन से खासा लाभ हुआ। उसने दक्षिण और उत्तर में लगभग 56 सीटें हासिल कीं। पार्टी की बढ़त का एक कारण 2024 के आखिर में निष्कासित किए गए पूर्व पलांग प्रचारथ पार्टी के 20 सांसदों को अपने साथ लेना था। इससे चुनावी दौर में उसे संसद में बड़ा समूह मिला।
मतदाता चाहते हैं संविधान में बदलाव
संसदीय चुनाव के साथ ही थाई नागरिकों ने 2017 के सैन्य शासन में तैयार संविधान को बदलने के सवाल पर ऐतिहासिक जनमत संग्रह में हिस्सा लिया। आलोचकों का कहना है कि यह संविधान गैरलोकतांत्रिक संस्थाओं, जिनमें गैरनिर्वाचित सीनेट भी शामिल है, के हाथों में सत्ता केंद्रित करता है। रूढ़िवादी भूमजैथाई पार्टी को निर्णायक जीत दिलाने के बावजूद, मतदाताओं ने लगभग दो-तिहाई बहुमत से संवैधानिक सुधार का समर्थन किया। शुरुआती मतगणना में करीब 65 प्रतिशत लोगों ने नया संविधान तैयार करने के पक्ष में वोट दिया।
इस नतीजे से अगली सरकार के सामने जटिल स्थिति पैदा हो गई है। आनुतिन ने पारंपरिक संस्थाओं की रक्षा के वादे पर चुनाव लड़ा था, लेकिन जनमत संग्रह का स्पष्ट जनादेश उनके प्रशासन को संविधान फिर से लिखने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बाध्य करता है। इसे अपनाने से पहले दो और जनमत संग्रह कराने होंगे। 1932 में निरंकुश राजतंत्र के अंत के बाद से थाईलैंड में 20 संविधान लागू हो चुके हैं। ज्यादातर बदलाव सैन्य तख्तापलट के बाद हुए।
पीपुल्स पार्टी के नेता नत्थाफोंग ने नई संसद से जनमत संग्रह के नतीजे का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "मैं सभी 500 भावी सांसदों से आग्रह करता हूं कि वे जनता के इस फैसले का सम्मान करें।"
2014 के तख्तापलट के बाद सैन्य शासन में लिखा गया 2017 का संविधान, संवैधानिक अदालत सहित गैरनिर्वाचित संस्थाओं को व्यापक अधिकार देता है। अदालत पहले भी पार्टियों को भंग कर चुकी है और नेताओं को पद संभालने से प्रतिबंधित कर चुकी है। सुधार की प्रक्रिया रूढ़िवादी सरकार और विपक्षी प्रगतिशील दलों के बीच टकराव का मुख्य मुद्दा बनने की संभावना है। प्रगतिशील दल सीनेट और राजशाही के विशेषाधिकारों से संबंधित धाराओं में संशोधन चाहते हैं।
नापोन जटुसरिपितक ने कहा कि चुनाव जीतने वाली पार्टी का संवैधानिक सुधार की दिशा पर असाधारण प्रभाव होगा। उन्होंने मतदान से पहले कहा था, "मेरा मानना है कि अगला चुनाव जीतने वाली पार्टी का संवैधानिक सुधार की दिशा पर असाधारण प्रभाव पड़ेगा, चाहे हम सैन्य शासकों द्वारा तैयार संविधान से दूर जाएं या नहीं।"
स्थिर सरकार बनाने की चुनौती
भूमजैथाई को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन उसकी बड़ी बढ़त से गठबंधन वार्ता में आनुतिन को खासा फायदा है। करीब 192 सीटों के साथ, प्रधानमंत्री चुनने के लिए 500 सदस्यीय सदन में जरूरी 251 वोटों तक पहुंचने के लिए पार्टी को लगभग 60 और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। 2023 के उलट, अब गैरनिर्वाचित सीनेट प्रधानमंत्री के चुनाव में हिस्सा नहीं लेती। इससे निर्वाचित सरकारों के सामने पहले मौजूद एक बड़ी बाधा हट गई है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि आनुतिन छोटी पार्टियों से समर्थन जुटाएंगे, जिन्होंने कुल मिलाकर करीब 117 सीटें जीती हैं। इनमें 56 सीटों वाली क्लाथम भी शामिल है। पिछले साल फेउ थाई के खिलाफ आनुतिन की रणनीति के बावजूद, उसके साथ गठबंधन की संभावना बनी हुई है, हालांकि इसके लिए गहरे वैचारिक मतभेदों को सुलझाना होगा।
भूमजैथाई के महासचिव चाइचानोक चिदचोब ने कुछ शर्तों के साथ विभिन्न दलों के साथ काम करने की इच्छा जताई। पीपुल्स पार्टी के बारे में उन्होंने कहा, "मुझे उनके कई विचार पसंद हैं, लेकिन हमारी कुछ शर्तें होंगी। मेरे लिए जरूरी है कि वे राजपरिवार को लेकर अपना रुख स्पष्ट करें। राजशाही-विरोधी ये सारी बातें बंद होनी चाहिए।"
चुनाव आयोग के पास नतीजों को प्रमाणित करने के लिए 60 दिन हैं। इसके बाद संसद को 15 दिनों के भीतर बैठक कर अध्यक्ष और प्रधानमंत्री का चुनाव करना होगा। पीपुल्स पार्टी ने स्पष्ट रूप से भूमजैथाई सरकार में शामिल होने से इनकार किया है, इसलिए नई सरकार को करीब 116 सीटों वाली मजबूत विपक्षी पार्टी का सामना करना होगा।
नापोन जटुसरिपितक ने कहा, "लंबे समय में पहली बार, संभव है कि हमारे पास ऐसी सरकार हो जिसके पास शासन करने की पर्याप्त प्रभावी ताकत हो। हम तकनीकी विशेषज्ञों, रूढ़िवादी अभिजात वर्ग और पारंपरिक राजनेताओं के बीच एक ऐसी साझेदारी देख रहे हैं, जो सुविधा के लिए बनी है।"
आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियां
गठबंधन संभालने के अलावा, नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। कभी दक्षिण-पूर्व एशिया की विकास की धुरी रही थाई अर्थव्यवस्था ठहराव का सामना कर रही है। पिछले साल सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर केवल 1.5 प्रतिशत रही, जो इस क्षेत्र में सबसे कम थी। घरेलू कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि पर्यटकों की संख्या अब भी महामारी से पहले के उच्चतम स्तर से नीचे है। इससे आर्थिक चिंता का माहौल बना है, जिसने मतदाताओं के व्यवहार को प्रभावित किया।
आनुतिन ने चुनाव प्रचार में उपभोक्ता सब्सिडी कार्यक्रमों और बिजली की दरें घटाने जैसे लोकलुभावन वादे किए। उन्होंने परिवारों से जुड़ी बड़ी कंपनियों के नियंत्रण वाले आर्थिक एकाधिकार तोड़ने का वादा भी किया। हालांकि, अपने अभिजात समर्थकों के हितों के खिलाफ ढांचागत सुधार लागू करना मुश्किल हो सकता है। अर्थशास्त्रियों ने चेताया है कि थाईलैंड को "एशिया का बीमार आदमी" बनने से रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने होंगे।
विदेश नीति के मोर्चे पर भी जटिल चुनौतियां हैं। कंबोडिया के साथ सीमा विवाद मौजूदा संघर्षविराम के बावजूद सुलझा नहीं है। भूमि सीमा चौकियां अब भी बंद हैं और विवादित इलाकों को लेकर तनाव बना हुआ है। आनुतिन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सेना को सीमा पर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने की अनुमति दी है और उकसावे की स्थिति में जवाबी हमले का वादा किया है।
थाईलैंड को अपने सबसे पुराने सहयोगी अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन भी साधना होगा। चीन के साथ उसके गहरे आर्थिक संबंध हैं। आनुतिन के अपने पूर्वज भी ग्वांगडोंग प्रांत से जुड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि थाईलैंड किसी एक पक्ष का साथ नहीं देगा। उन्होंने सभी साझेदारों के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखते हुए नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया है।
इसके अलावा, सरकार को पड़ोसी देशों से चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क और म्यांमार में जारी संकट से निपटना होगा। वहां हाल में हुए चुनावों की व्यापक रूप से नाजायज बताकर आलोचना की गई है। आनुतिन ने कहा है कि थाईलैंड म्यांमार के सभी पक्षों से बातचीत करेगा और आसियान के माध्यम से मानवीय सहायता की पहुंच तथा क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देगा।
मुख्य बातें
- भूमजैथाई पार्टी ने थाईलैंड की 500 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में करीब 192 सीटें जीतीं। इससे प्रधानमंत्री आनुतिन चार्नवीराकुल को अगली सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश मिला
- प्रगतिशील पीपुल्स पार्टी करीब 116 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। 2023 में उसे 151 सीटें मिली थीं। अब वह विपक्ष में बैठेगी
- शिनावात्रा परिवार के समर्थन वाली फेउ थाई पार्टी सिमटकर करीब 74 सीटों पर आ गई। दशकों में उसका यह सबसे खराब प्रदर्शन है
- मतदाताओं ने सैन्य शासन में तैयार 2017 के संविधान को नए सिरे से लिखने के प्रस्ताव को करीब दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी दी
- चुनाव का नतीजा उन सर्वेक्षणों के विपरीत रहा, जिनमें प्रगतिशील आंदोलन की जीत का अनुमान था। कंबोडिया के साथ सीमा संघर्ष के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर मतदाताओं की चिंताओं का इसमें असर दिखा
- आनुतिन ने अल्पमत सरकार के गठन के 100 दिन से भी कम समय बाद मध्यावधि चुनाव कराया। उनका दांव था कि राष्ट्रवादी भावना रूढ़िवादी समर्थन को एकजुट करेगी
- नई सरकार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना होगा, जिनमें सकल घरेलू उत्पाद की 1.5 प्रतिशत वृद्धि और घरेलू कर्ज का रिकॉर्ड स्तर शामिल है
- गठबंधन वार्ता में क्लाथम जैसी छोटी पार्टियां शामिल हो सकती हैं। प्रधानमंत्री चुनने के लिए जरूरी 251 वोटों तक पहुंचने के लिए भूमजैथाई को करीब 60 अतिरिक्त सीटों की जरूरत है






