महत्वपूर्ण खनिजों की नई भू-राजनीति से निपटना
सियोल ऐसा उच्च-दांव वाला संतुलन साध रहा है, जिसे इतनी सटीकता से निभाने की कोशिश बहुत कम औद्योगिक देश कर सकते हैं। बुधवार को दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने अमेरिकी विदेश विभाग में 54 देशों के प्रतिनिधियों के साथ खड़े होकर घोषणा की कि सियोल औपचारिक रूप से संसाधन भू-रणनीतिक सहभागिता मंच (FORGE) में शामिल हो गया है। अमेरिका के नेतृत्व वाला यह व्यापार समूह दुर्लभ मृदा तत्वों पर बीजिंग के दबदबे का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है। 24 घंटे के भीतर ही कोरिया के व्यापार मंत्रालय ने खनिजों के आयात में तेजी लाने और आपूर्ति में रुकावट रोकने के लिए चीनी अधिकारियों के साथ सीधी सरकारी हॉटलाइन और संयुक्त समिति बनाने की योजना घोषित की।
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यह स्पष्ट विरोधाभास रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में उन्नत विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद असहज वास्तविकता को दिखाता है। अल्पावधि में चीन से पूरी तरह अलग होना असंभव है, लेकिन दीर्घकालीन आर्थिक अस्तित्व के लिए आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना जरूरी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ऐसा तरजीही व्यापार क्षेत्र बनाने के प्रयास तेज किए हैं, जिसे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सहयोगी देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रस्तावित किया है। इसमें न्यूनतम मूल्य और समायोज्य शुल्क का इस्तेमाल कर बाजार में सस्ते चीनी खनिजों की बाढ़ से आपूर्ति शृंखलाओं को बचाया जाएगा। साथ ही, दक्षिण कोरिया जानता है कि दुनिया की दुर्लभ मृदा आपूर्ति का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल चीन की प्रसंस्करण सुविधाओं से गुजरता है। इससे ऐसी निर्भरता पैदा होती है जिसे केवल कूटनीतिक संबंधों में बदलाव से जल्दी दूर नहीं किया जा सकता।
दक्षिण कोरिया के लिए यह जोखिम खास तौर पर गंभीर है। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर उत्पादक होने के नाते, जो वैश्विक मेमोरी चिप का 60 प्रतिशत से अधिक बनाता है, और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के अग्रणी निर्माताओं का केंद्र होने के कारण, देश सभी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 99.7 प्रतिशत से अधिक शुद्ध आयात-निर्भरता रखता है। यह आंकड़ा कोरिया भूविज्ञान और खनिज संसाधन संस्थान के अनुसार है। देश अपने लिथियम हाइड्रॉक्साइड का लगभग 80 प्रतिशत और कैथोड के पूर्ववर्ती पदार्थों तथा कृत्रिम ग्रेफाइट का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीनी आपूर्तिकर्ताओं से मंगाता है। 2023 के मध्य में जब बीजिंग ने चिप निर्माण के अहम घटकों गैलियम और जर्मेनियम के निर्यात पर रोक लगाई, तो सियोल को समझ आया कि आपूर्ति में रुकावट कुछ ही हफ्तों में उसके प्रौद्योगिकी क्षेत्र को पंगु बना सकती है।
बीजिंग के साथ सहयोग के तरीके
सियोल के व्यापार, उद्योग और संसाधन मंत्रालय द्वारा घोषित विशिष्ट कदम दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण पर चीन के दबदबे की व्यावहारिक स्वीकृति हैं। प्रस्तावित सरकार-से-सरकार हॉटलाइन का मकसद ऐसे त्वरित संपर्क माध्यम बनाना है, जिनसे निर्यात प्रतिबंधों या नियामक बदलावों से दक्षिण कोरियाई विनिर्माताओं को खतरा होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। वहीं, संयुक्त परामर्श निकाय सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों और दीर्घकालीन आपूर्ति अनुबंधों पर काम करेगा।
उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान ने डेगू में दुर्लभ मृदा चुंबक बनाने वाली एक कंपनी के दौरे के दौरान इस नीति का कारण बताया। उन्होंने जोर दिया कि दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा औद्योगिक संसाधनों की सुरक्षा पर निर्भर करती है। सरकार सभी 17 दुर्लभ मृदा तत्वों को प्रमुख रणनीतिक खनिज घोषित करने का इरादा रखती है। इससे निगरानी और मांग के पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए नए सीमा शुल्क वर्गीकरण कोड बनाए जाएंगे। इसके अलावा, विकल्पी पदार्थ और प्रसंस्करण तकनीक विकसित करने के लिए सियोल मौजूदा औद्योगिक नवाचार निवेश कार्यक्रमों के तहत दुर्लभ मृदा अनुसंधान एवं विकास कोष बनाएगा।
ये कदम चीन के बढ़ते निर्यात नियंत्रणों की पृष्ठभूमि में उठाए गए हैं। अक्टूबर में बीजिंग ने दुर्लभ मृदा पर प्रतिबंध बढ़ाए, सेमीकंडक्टर उपयोगकर्ताओं पर अतिरिक्त जांच लागू की और पांच अन्य धातुओं को नियंत्रित सूची में जोड़ा। चीन के पास दुनिया के दुर्लभ मृदा भंडार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है और वह वैश्विक आपूर्ति का करीब 90 प्रतिशत प्रसंस्कृत करता है। इससे व्यापार विवादों में बीजिंग को जबरदस्त दबदबा मिलता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि बीजिंग ऐसे विशिष्ट समूह बनाने का विरोध करता है, जिनका मकसद अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार व्यवस्था को बाधित करना हो। उन्होंने कहा कि वैश्विक औद्योगिक आपूर्ति शृंखलाओं को स्थिर रखने की जिम्मेदारी सभी पक्षों की है।
अक्टूबर के प्रतिबंध सियोल के लिए उनके समय के कारण विशेष रूप से चिंताजनक थे। कुछ ही हफ्ते पहले दक्षिण कोरिया ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि दुर्लभ मृदा पर चीन का एकाधिकार वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अस्थिरता बढ़ा रहा है। जवाबी कार्रवाई करने या अलगाव तेज करने के बजाय सियोल ने ज्यादा जुड़ाव का रास्ता चुना। उसका आकलन है कि बीजिंग के साथ खुले संपर्क बनाए रखने से पूरी आपूर्ति बंद होने की आशंका घटेगी, जबकि वैकल्पिक स्रोत विकसित किए जा रहे हैं।
पश्चिमी गठबंधन में नेतृत्व
बीजिंग से संपर्क बढ़ाने के बावजूद दक्षिण कोरिया ने आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की अमेरिका-नीत पहल में केंद्रीय भूमिका संभाली है। खनिज सुरक्षा साझेदारी (MSP) का नाम बदलकर संसाधन भू-रणनीतिक सहभागिता मंच (FORGE) करना अंतरराष्ट्रीय खनिज कूटनीति में एक अहम बदलाव है। जून तक सियोल इस पहल की अध्यक्षता करने वाला पहला गैर-अमेरिकी देश है। यह बदलाव वैश्विक आपूर्ति शृंखला सुरक्षा में दक्षिण कोरिया के बढ़ते महत्व और पश्चिमी गठबंधनों तथा एशियाई आपूर्ति नेटवर्क, दोनों में उसकी अनूठी स्थिति को मान्यता देता है।
जून 2022 में स्थापित MSP ने सितंबर 2024 तक दुनिया भर में 32 परियोजनाओं को समर्थन देना शुरू कर दिया था। इनमें अफ्रीका में 13, अमेरिका महाद्वीप में 8 और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 6 परियोजनाएं शामिल थीं। दक्षिण कोरिया की POSCO International ने तंजानिया की महेंगे ग्रेफाइट परियोजना में 40 मिलियन डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई। यह ऐसा ठोस निवेश है जो इस साझेदारी को पहले के रूपरेखा समझौतों से अलग करता है। पहले महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत समेत 54 देशों के अधिकारियों की मेजबानी की, ताकि किसी एक देश को प्रमुख संसाधनों पर नियंत्रण का इस्तेमाल भू-राजनीतिक दबाव के रूप में करने से रोकने के प्रयासों में तालमेल हो सके।
वेंस ने मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान तरजीही व्यापार क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजनाएं रखीं। उन्होंने कहा कि समूह के सहयोगी देशों को वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव की परवाह किए बिना स्थिर कीमतों के जरिए तत्काल और टिकाऊ लाभ मिलेगा। इस व्यवस्था का लक्ष्य उत्पादन के हर चरण में महत्वपूर्ण खनिजों के संदर्भ मूल्य तय करना है। कीमतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए समायोज्य शुल्क का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, खबरों के अनुसार ट्रंप प्रशासन न्यूनतम कीमतों की गारंटी देने से पीछे हट रहा है, जिसकी मांग ऑस्ट्रेलिया और अन्य संसाधन-समृद्ध देशों ने नई खनन क्षमता में निवेश को उचित ठहराने के लिए की थी।
चीन के साथ बातचीत जारी रखते हुए FORGE का नेतृत्व करने से दक्षिण कोरिया को अनूठी कूटनीतिक स्थिति मिली है। विदेश मंत्री चो ह्यून ने वॉशिंगटन में जोर देकर कहा कि सियोल साझेदारों के बीच समन्वय बढ़ाएगा और आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा के लिए परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करेगा। इसी दौरान सियोल के व्यापार मंत्रालय ने बीजिंग के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत की। इस दोहरी नीति में सावधानीपूर्वक संतुलन जरूरी है, ताकि वॉशिंगटन या बीजिंग में से किसी को नाराज किए बिना खनिजों की स्थिर आपूर्ति में सियोल के मूल हित को आगे बढ़ाया जा सके।
आपूर्ति नेटवर्क का विस्तार
पश्चिमी गठबंधनों या चीनी आपूर्ति में से किसी एक को चुनने के बजाय दक्षिण कोरिया कई महाद्वीपों में सक्रिय रूप से वैकल्पिक स्रोत विकसित कर रहा है। सरकार ने विदेशों में खदानें विकसित करने वाली स्थानीय कंपनियों की मदद के लिए 250 अरब वॉन (लगभग 172 मिलियन डॉलर) का सरकारी कोष आवंटित किया है। विदेशों में संसाधन विकास के लिए नीतिगत ऋण इस साल बढ़ाकर 46.2 मिलियन डॉलर किए जा रहे हैं, जो 2025 में 26.6 मिलियन डॉलर थे। सरकारी वित्तपोषण का कवरेज अनुपात 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत किया जाएगा, जिससे राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में निजी निवेश का जोखिम घटेगा।
इन वैकल्पिक साझेदारियों में ऑस्ट्रेलिया सबसे विकसित है। दोनों देशों की 2021 की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत ऑस्ट्रेलियाई खनन कंपनी Pilbara Minerals और दक्षिण कोरियाई इस्पात दिग्गज POSCO ने दक्षिण कोरिया में लिथियम हाइड्रॉक्साइड संयंत्र पूरा किया। यह संयंत्र पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की खदानों से आए स्पोड्यूमीन सांद्रण का प्रसंस्करण करता है। इस संयुक्त उद्यम से ऐसी एकीकृत आपूर्ति शृंखला बनती है जो चीनी प्रसंस्करण सुविधाओं को दरकिनार करती है। इसी तरह, Wesfarmers Chemicals ने LG Energy Solution को 85,000 टन तक लिथियम सांद्रण की आपूर्ति का समझौता किया, जबकि Australian Strategic Materials ने चियोंगजू स्थित अपने Korean Metals Plant में प्रसंस्कृत भारी दुर्लभ मृदा धातुओं की पहली व्यावसायिक बिक्री सुनिश्चित की।
अक्टूबर में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने महत्वपूर्ण खनिजों पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत निवेश के बदले अमेरिका को ऑस्ट्रेलियाई दुर्लभ मृदा खनिजों तक पहुंच मिलेगी। इससे तीन देशों के बीच ऐसा संपर्क बना है जिससे अमेरिकी आपूर्ति शृंखला में काम कर रहे दक्षिण कोरियाई विनिर्माताओं को लाभ होता है। ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण कोरिया साझेदारी इस मायने में खास है कि यह साझा रणनीतिक इरादे को खनन, शोधन और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग में बदल सकती है।
दक्षिण पूर्व एशिया में दक्षिण कोरिया दुर्लभ मृदा आपूर्ति में विविधता लाने के लिए वियतनाम और लाओस के साथ साझेदारी की कोशिश कर रहा है। दुनिया के दुर्लभ मृदा तत्वों के भंडार का लगभग 18 प्रतिशत वियतनाम में है, जबकि निकेल भंडार का 5 प्रतिशत फिलीपींस में और वैश्विक निकेल भंडार का करीब 22 प्रतिशत इंडोनेशिया में है। हालांकि, प्रसंस्करण क्षमता की कमी, कमजोर नियमन और पुरानी शोधन तकनीक जैसी संरचनात्मक चुनौतियां फिलहाल इस क्षेत्र की निवेश आकर्षित करने की क्षमता को सीमित करती हैं। दक्षिण कोरिया और आसियान ने जुलाई 2024 में महत्वपूर्ण खनिज प्रबंधन पर 5.6 मिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की। इसके तहत 2028 तक क्षमता-विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
मंगोलिया विविधता लाने के लिए एक और संभावित गलियारा है, जो सियोल से महज 2,000 किलोमीटर दूर है। चीन और रूस के बीच स्थित इस स्थलरुद्ध देश के पास पर्याप्त खनिज संपदा है, लेकिन खनन क्षमता बढ़ाने के लिए उसे विकास सहायता की जरूरत है। दक्षिण कोरिया ने 2018 से 2024 के बीच औसतन 53 मिलियन डॉलर सालाना की आधिकारिक विकास सहायता दी है और नवंबर 2023 में दुर्लभ धातु सहयोग समिति बनाई। ऐसा लगता है कि सियोल का मानना है कि विकास सहायता देने से निकाले गए खनिजों से बने उत्पादों का दक्षिण कोरिया को निर्यात प्रोत्साहित होगा। हालांकि, भौगोलिक स्थिति मंगोलिया की उपयोगिता सीमित करती है, क्योंकि उसके सभी निर्यात को चीन या रूस के रास्ते गुजरना होगा और इस कारण वे तीसरे देशों के राजनीतिक दबाव के दायरे में आ सकते हैं।
घरेलू मजबूती और पुनर्चक्रण
यह मानते हुए कि केवल बाहरी स्रोतों में विविधता लाने से जोखिम खत्म नहीं होगा, सियोल घरेलू स्तर पर मजबूत कदम उठा रहा है। फरवरी में लागू हुआ राष्ट्रीय संसाधन सुरक्षा पर विशेष अधिनियम शुरुआती चेतावनी प्रणाली लेकर आया, प्रमुख संसाधनों का भंडार रखना अनिवार्य किया और संकट के समय सरकार को मूल्य नियंत्रण तथा आपूर्ति आवंटन समेत आपात कदम उठाने के अधिकार दिए। अधिकारी 33 खनिजों को आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण घोषित करेंगे। इनमें इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरियों के लिए जरूरी 10 खनिजों को रणनीतिक खनिज के रूप में वर्गीकृत कर प्राथमिकता से निगरानी की जाएगी।
पुनर्चक्रण इस रणनीति का अहम हिस्सा बनकर उभरा है। दक्षिण कोरिया के पास महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण के लिए व्यापक रोडमैप है। दीर्घकालीन योजना रखने वाले देशों में वह चीन और यूरोपीय संघ के साथ केवल तीन में से एक है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, पुनर्चक्रण का विस्तार करने से 2050 तक नए खनिजों के उत्पादन की जरूरत 25 से 40 प्रतिशत तक घट सकती है और खनन निवेश में 600 से 800 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। सरकार का लक्ष्य पुनर्चक्रित सामग्री से मिलने वाले महत्वपूर्ण खनिजों का हिस्सा 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 20 प्रतिशत से अधिक करना है। अनुमान है कि 2040 तक बैटरी पुनर्चक्रण उद्योग का वैश्विक वार्षिक राजस्व 95 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा।
सरकारी कोरिया माइन रिहैबिलिटेशन एंड मिनरल रिसोर्सेज कॉरपोरेशन लंबे समय से महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार संभालता आ रहा है। यह एशिया में व्यापक रुझान का हिस्सा है, जिसमें मार्च 2020 में अपनाई गई जापान की अंतरराष्ट्रीय संसाधन रणनीति भी शामिल है। ये भंडार अचानक लगने वाले निर्यात प्रतिबंधों या भू-राजनीतिक व्यवधानों के खिलाफ सुरक्षा देते हैं। दक्षिण कोरिया अपने भंडारण की क्षमता भी बढ़ा रहा है और आपूर्ति संकट की तैयारी के लिए आठ दिन में वितरण करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित कर रहा है। यह पारंपरिक खरीद प्रक्रिया से काफी तेज है।
इसके अलावा, सियोल सामग्री की खपत घटाने के लिए तकनीकी नवाचार पर काम कर रहा है। सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण में दुर्लभ मृदा के विकल्प विकसित करने और नियामक सुधारों तथा नई सुविधाओं के लिए सब्सिडी के जरिए पुनर्चक्रण तकनीक को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी है। ये प्रयास अमेरिका और जापान की मिलती-जुलती रणनीतियों के अनुरूप हैं और आपूर्ति की सीमाओं के गैर-भूवैज्ञानिक समाधान पर तीनों देशों के सहयोग के अवसर पैदा करते हैं।
रणनीतिक गणना
दक्षिण कोरिया की दोहरी नीति महाशक्ति प्रतिस्पर्धा के दौर में आर्थिक सुरक्षा की जटिल समझ को दर्शाती है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय सहयोग पर RAND Corporation के विश्लेषण में संयुक्त भंडारण पहल, खनिज अदला-बदली समझौते और विदेशों में खनन परियोजनाओं के लिए साझा संसाधन जुटाने के अवसरों की पहचान की गई है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि बाधाएं अब भी हैं। इनमें बैटरी और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में दक्षिण कोरियाई तथा जापानी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और गहरा आर्थिक एकीकरण मुश्किल बनाने वाले ऐतिहासिक मतभेद शामिल हैं।
यह रणनीति तत्काल पूरी तरह अलग होने की सीमाओं को भी स्वीकार करती है। अमेरिका ने वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है और Project Vault बनाया है। यह 12 अरब डॉलर का रणनीतिक खनिज भंडार है, जिसे 2 अरब डॉलर की निजी पूंजी और अमेरिकी निर्यात-आयात बैंक से मिले 10 अरब डॉलर के ऋण से वित्तपोषित किया गया है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया के पास ऐसी आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त घरेलू खनिज संसाधन नहीं हैं। देश की आठ दिन में वितरण करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और बढ़ती भंडारण क्षमता भौगोलिक तथा भूवैज्ञानिक सीमाओं को देखते हुए निर्भरता से बचाव की अधिकतम व्यावहारिक सीमा है।
अक्टूबर में चीन द्वारा निर्यात नियंत्रण बढ़ाए जाने से जरूरत से ज्यादा निर्भरता का जोखिम सामने आया, लेकिन यह भी दिखा कि बीजिंग पूरी तरह आपूर्ति रोकने के बजाय नपा-तुला दबाव बनाना पसंद करता है। कूटनीतिक और वाणिज्यिक संपर्क बनाए रखते हुए पश्चिमी आपूर्ति-विविधीकरण प्रयास की अध्यक्षता करके सियोल सबसे बुरे हालात का जोखिम घटाने और दीर्घकालीन मजबूती बनाने की कोशिश कर रहा है। इस नीति के लिए वॉशिंगटन और बीजिंग, दोनों के साथ संबंधों को लगातार संभालना जरूरी है, जबकि दोनों को संदेह है कि सियोल दूसरे पक्ष के खेमे के प्रति कितना प्रतिबद्ध है।
आने वाले महीने इस संतुलनकारी रणनीति की व्यवहार्यता की परीक्षा लेंगे। जून तक FORGE की अध्यक्षता करते हुए दक्षिण कोरिया को आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की ठोस प्रगति दिखानी होगी, साथ ही चीनी आयात भी बनाए रखने होंगे, जिन पर उसका सेमीकंडक्टर और बैटरी उद्योग फिलहाल निर्भर है। राष्ट्रीय सुरक्षा की कड़ी निगरानी के लिए नामित 17 महत्वपूर्ण खनिज वे सीमा-रेखाएं हैं, जिनकी आपूर्ति में रुकावट से तत्काल आर्थिक नुकसान हो सकता है। सफलता से दक्षिण कोरिया रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में संसाधन सुरक्षा का आदर्श बन सकता है। विफलता यह दिखा सकती है कि आपूर्ति शृंखलाओं को हथियार बनाए जाने पर भू-राजनीतिक तटस्थता की कीमत असहनीय हो सकती है।
मुख्य बातें
- चीन पर निर्भरता घटाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले व्यापार समूह में शामिल होने के एक दिन बाद ही दक्षिण कोरिया ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए चीन के साथ हॉटलाइन और संयुक्त समिति बनाने की घोषणा की।
- जून तक सियोल संसाधन भू-रणनीतिक सहभागिता मंच (FORGE) की अध्यक्षता करेगा। खनिज सुरक्षा साझेदारी के बाद यह पहल की अध्यक्षता करने वाला वह पहला गैर-अमेरिकी देश होगा।
- सरकार ने 17 महत्वपूर्ण खनिजों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी घोषित किया है और विदेशों में खनन परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए 250 अरब वॉन (172 मिलियन डॉलर) आवंटित करेगी।
- दक्षिण कोरिया का लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, लाओस और मंगोलिया के साथ साझेदारी के जरिए 2030 तक महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता 80 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत करना है।
- देश का लक्ष्य 2030 तक पुनर्चक्रित महत्वपूर्ण खनिजों का हिस्सा कुल आपूर्ति के 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत से अधिक करना है। राष्ट्रीय संसाधन सुरक्षा पर विशेष अधिनियम के तहत नए भंडारण नियम भी लागू किए जा रहे हैं।
- दुर्लभ मृदा भंडार का लगभग 60 प्रतिशत और प्रसंस्करण क्षमता का 90 प्रतिशत हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। उसके निर्यात प्रतिबंधों से दक्षिण कोरिया के सेमीकंडक्टर और बैटरी उद्योगों को खतरा है।






