राष्ट्रीय दिवस के वादे से रणनीतिक पड़ताल तक
अक्टूबर 2025 में ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई ने ताइवान डोम, या टी-डोम, के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया। यह कई परतों वाली वायु रक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) से बढ़ते खतरों के खिलाफ द्वीप की रक्षा करना है। ताइवान के राष्ट्रीय दिवस समारोह के दौरान घोषित इस प्रस्ताव में आठ वर्षों में खर्च के लिए NT$1.25 ट्रिलियन (लगभग US$40 बिलियन) का विशेष रक्षा बजट शामिल है। इसका लक्ष्य 2030 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यह पहल एक व्यापक मिसाइल ढाल बनाने की ताइपे की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कोशिश है। इसके लिए इजराइल के आयरन डोम और अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम से प्रेरणा ली गई है। हालांकि, सैन्य विश्लेषकों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों ने इस अवधारणा की कई बड़ी कमजोरियां तेजी से उजागर की हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या यह प्रणाली संभावित चीनी सैन्य अभियान की विशिष्ट प्रकृति का सामना कर पाएगी।
विषय-सूची
टी-डोम का प्रस्ताव ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर बिगड़ते संबंधों और पीएलए के तेज होते आधुनिकीकरण के बीच आया है। बीजिंग ने एकीकरण के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार करने से स्पष्ट रूप से मना किया है। इस बीच, चीन की सैन्य क्षमताओं में उन्नत स्टील्थ विमान, विमानवाहक पोत और व्यापक मिसाइल भंडार शामिल होते जा रहे हैं। राष्ट्रपति लाई की परिकल्पना मौजूदा वायु रक्षा ढांचों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जोड़ने पर केंद्रित है। इसका मकसद रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू के शब्दों में एक "सेंसर-से-शूटर" नेटवर्क बनाना है, जो रडार पहचान प्रणालियों को सीधे मिसाइल बैटरियों से जोड़कर प्रतिक्रिया का समय घटाएगा।
चीनी अधिकारियों ने इस घोषणा पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने राष्ट्रपति लाई की रक्षा पहलों को खतरनाक रूप से उकसाने वाला बताया।
वह ताइवान की स्वतंत्रता के अलगाववादी भ्रम को बढ़ावा देते हैं। इससे एक बार फिर मुसीबत खड़ी करने वाले, खतरा पैदा करने वाले और युद्ध भड़काने वाले के रूप में उनका हठी स्वभाव उजागर होता है।
तकनीकी महत्वाकांक्षा के बावजूद, आलोचकों का कहना है कि टी-डोम की अवधारणा ताइवान के रणनीतिक माहौल और उससे प्रेरणा लेने वाले संघर्षों के बीच बुनियादी अंतर को नहीं समझती। इजराइल के आयरन डोम को कम दूरी के रॉकेट रोकने के लिए पहचान मिली है, लेकिन ताइवान के सामने खतरे का पैमाना, तकनीक और रणनीति बिल्कुल अलग हैं। पीएलए दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे उन्नत सेनाओं में से एक है। उसकी क्षमताएं उन गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों से कहीं आगे तक जाती हैं, जिनका सामना आमतौर पर इजराइली प्रणालियों से होता है।
आयरन डोम से तुलना क्यों भ्रामक है
टी-डोम को इजराइल के आयरन डोम के समान बताने वाली अवधारणा पर रक्षा विशेषज्ञों ने खास संदेह जताया है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) एक उन्नत, बहुस्तरीय वायु और मिसाइल रक्षा ढांचे के भीतर काम करती है, जहां आयरन डोम कई एकीकृत प्रणालियों में से केवल एक है। आयरन डोम खास तौर पर हमास और हिजबुल्लाह जैसे गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के इस्तेमाल में आने वाले कम दूरी के प्रक्षेपास्त्रों को निशाना बनाता है। इसमें लगभग US$50,000 कीमत वाली तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल होता है। लंबी दूरी के खतरों के लिए इजराइल एरो 2 और एरो 3 प्रणालियों पर निर्भर है, जबकि डेविड्स स्लिंग कम दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को रोकने का काम करता है।
इस उन्नत बहुस्तरीय नेटवर्क की क्षमताओं की भी लंबे समय तक दबाव पड़ने पर सीमाएं सामने आई हैं। 2025 में ईरान के हमलों के दौरान आईडीएफ ने 86 प्रतिशत अवरोधन दर बताई, जो आम तौर पर 90 प्रतिशत से अधिक रहती है। उस समय बड़ी संख्या में ड्रोन के साथ क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से संतृप्ति हमले किए गए थे। अप्रैल 2024 में ईरान के तीव्र हमलों का मुकाबला करने के लिए इजराइल को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जॉर्डन की मदद लेनी पड़ी। इससे जाहिर हुआ कि बड़े पैमाने पर किए गए हमलों के सामने तकनीकी रूप से श्रेष्ठ नेटवर्क भी दबाव में आ जाते हैं।
मुख्यभूमि चीन के रक्षा प्रकाशनों ने भी ताइवान के प्रस्ताव की आलोचना की है। चीनी सैन्य पत्रिका ऑर्डनेंस इंडस्ट्री साइंस टेक्नोलॉजी में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, पीएलए की क्षमताओं के सामने टी-डोम में बुनियादी ढांचागत कमजोरियां हैं। विश्लेषण का अनुमान है कि ताइवान की प्रणाली में अमेरिका-निर्मित पैट्रियट PAC-2 और PAC-3 प्रणालियां, स्वदेशी तियेन कुंग II से IV इंटरसेप्टर और नेशनल एडवांस्ड सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (NASAMS) शामिल होंगे। कम ऊंचाई पर रक्षा के लिए इनके साथ एवेंजर प्रणालियां और स्टिंगर मिसाइलें भी होंगी। तकनीकी रूप से यह विविध प्रणालियों का समूह है, लेकिन रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या इनके एकीकरण से पीएलए के समन्वित अभियान का मुकाबला करने के लिए जरूरी निर्बाध तालमेल हासिल हो पाएगा।
पीएलए के बहु-क्षेत्रीय संतृप्ति हमले की चुनौती
ताइवान के सामने मौजूद बुनियादी खतरा इजराइल के सुरक्षा माहौल से गुणात्मक रूप से अलग है। पीएलए इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन के संयुक्त हमले कर सकती है कि वे बिंदु-रक्षा प्रणालियों को पंगु कर दें। सैन्य खुफिया आकलन के मुताबिक, संघर्ष के शुरुआती चरण में वायु रक्षा संसाधनों को छकाने के लिए भ्रामक लक्ष्य भेजे जा सकते हैं। इसके बाद खास ठिकानों पर सटीक हमले किए जा सकते हैं। डोंगफेंग श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा, चीन के पास व्यापक रॉकेट तोपखाना भी है। इसमें वीशी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रणालियां शामिल हैं, जो ताइवानी ठिकानों पर भारी मात्रा में गोलाबारी कर सकती हैं।
पीएलए का आधुनिक सिद्धांत "बुद्धिमत्ता-आधारित युद्ध" पर जोर देता है, जिसमें वितरित संवेदन और तेज निर्णय-प्रक्रियाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल शामिल है। यह बदलाव शहरी युद्ध के लिए खास तौर पर तैयार स्वायत्त युद्ध प्रणालियों तक फैला है। पीएलए से जुड़ी संस्थाओं के शोध से पता चलता है कि ऐसे घातक स्वायत्त ड्रोन झुंड विकसित किए जा रहे हैं, जो स्वयं-संगठित एल्गोरिदम की मदद से कमजोर संचार वाले माहौल में काम कर सकते हैं। ये प्रणालियां प्रमुख नेताओं के खिलाफ "खोजो और मारो" अभियान चला सकती हैं और जाम होने या कमान नेटवर्क से संपर्क टूटने पर भी काम जारी रख सकती हैं।
मिसाइल रक्षा के लिए इसके गंभीर नतीजे हैं। बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ के लिए तैयार पारंपरिक इंटरसेप्टर के सामने तब नई जटिलताएं पैदा होती हैं, जब उन्हें ऐसे स्वायत्त ड्रोन झुंडों का सामना करना हो जो इंसानी दखल के बिना लक्ष्यों की प्राथमिकता बदल सकते हैं। इसके अलावा, पीएलए की साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं टी-डोम के संचालन के लिए जरूरी एकीकृत कमान नेटवर्क के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हैं। 2025 में चीन का सैन्य एआई निवेश अनुमानित US$84 बिलियन से US$98 बिलियन के बीच है। इससे संकेत मिलता है कि ताइवान के प्रस्तावित रक्षा नेटवर्क के एल्गोरिद्मिक केंद्र को निशाना बनाने की उसकी क्षमताएं उन्नत हो सकती हैं।
भौगोलिक सीमाएं इन चुनौतियों को और बढ़ाती हैं। द्वीप होने के कारण नाकेबंदी की स्थिति में ताइवान तक फिर से आपूर्ति पहुंचाना मुश्किल होगा। इंटरसेप्टर का भंडार खत्म होने पर विवादित हालात में उसकी भरपाई लगभग असंभव हो जाएगी। फाउंडेशन फॉर द डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के विश्लेषण के मुताबिक, चीन की नाकेबंदी से ताइवान का तरलीकृत प्राकृतिक गैस का भंडार 11 दिनों के भीतर खत्म हो सकता है। आठवें सप्ताह तक बिजली उत्पादन क्षमता घटकर 20 प्रतिशत रह जाएगी, जिससे लंबे समय तक रक्षा अभियान चलाने के लिए जरूरी आर्थिक आधार कमजोर पड़ जाएगा।
बजट की हकीकत और तकनीकी अड़चनें
वित्तीय सीमाएं शायद टी-डोम को साकार करने में सबसे तात्कालिक बाधा हैं। इजराइल का सालाना रक्षा बजट US$33.7 बिलियन है, जबकि ताइवान का मौजूदा बजट केवल US$18.9 बिलियन है। अलग-अलग इंटरसेप्टर की लागत में अंतर लंबे समय तक रक्षा बनाए रखने की आर्थिक चुनौतियां दिखाता है। आयरन डोम की तामिर मिसाइलों की कीमत लगभग US$50,000 प्रति मिसाइल है, जबकि डेविड्स स्लिंग में इस्तेमाल होने वाली स्टनर मिसाइल की कीमत करीब US$1 मिलियन प्रति इकाई है। अप्रैल 2024 में ईरान के हमले के दौरान ही इजराइल ने अपेक्षाकृत कम समय के अभियान में अनुमानतः US$1 बिलियन के रक्षात्मक हथियार खर्च किए।
ताइवान का प्रस्तावित NT$1.25 ट्रिलियन का विशेष बजट बड़ा जरूर है, लेकिन इससे केवल टी-डोम ही नहीं, बल्कि ड्रोन उत्पादन, मोबाइल मिसाइल प्रणालियों और नौसैनिक बारूदी सुरंगों के भंडार जैसी व्यापक असममित क्षमताओं का भी खर्च उठाना होगा। राष्ट्रपति लाई का प्रशासन 2028 तक ड्रोन उत्पादन क्षमता बढ़ाकर हर महीने 15,000 इकाइयां करने का लक्ष्य रखता है। इसके लिए चीनी कलपुर्जों से हटकर आपूर्ति शृंखला में बड़ा बदलाव करना होगा। खर्च का बोझ खरीद तक सीमित नहीं है; इसमें रखरखाव, कर्मियों का प्रशिक्षण और पीएलए की बदलती क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर के लगातार अद्यतन भी शामिल हैं।
तकनीकी एकीकरण से भी अतिरिक्त जटिलताएं पैदा होती हैं। विविध प्रणालियों, रडार नेटवर्क और कमान ढांचे के बीच वास्तविक तालमेल हासिल करने के लिए लंबे परीक्षण की जरूरत होती है। इजराइल को अपनी मिलती-जुलती प्रणालियों का पूरा एकीकरण करने से पहले कई वर्षों तक उनमें सुधार करना पड़ा। ताइवान के मामले में यह सवाल बना हुआ है कि क्या सैन्यकर्मियों के पास युद्ध के दौरान इतनी जटिल एकीकृत प्रणालियां चलाने की जरूरी क्षमता है, खासकर तब जब हवाई, समुद्री, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों को एक साथ निशाना बनाने वाले हमले हों।
राजनीतिक गतिरोध और घरेलू विरोध
घरेलू राजनीति भी इसे लागू करना मुश्किल बना रही है। राष्ट्रपति लाई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के पास 113 सदस्यीय विधान युआन में केवल 51 सीटें हैं। इससे संसद में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं है और विपक्ष बजट संबंधी उपायों को रोक सकता है। विपक्षी दलों के सांसदों का कहना है कि टी-डोम प्रस्ताव में तकनीकी जरूरतों और संचालन के मापदंडों का पर्याप्त विवरण नहीं है। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि मिसाइल ढाल पर जरूरत से ज्यादा खर्च करने के लिए शिक्षा, सामाजिक कल्याण और सरकार के अन्य अहम कामों के बजट में कटौती करनी पड़ सकती है।
कुओमिनतांग के 31 सांसदों को हटाने के लिए अभियान चल रहे हैं। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी को उम्मीद है कि इनसे सीटों का समीकरण बदल सकता है। हालांकि, ऐसा राजनीतिक बदलाव होने तक विशेष रक्षा बजट प्रक्रियागत देरी में फंसा रहेगा। यह विधायी गतिरोध द्वीप के आसपास पीएलए के बढ़ते सैन्य अभ्यासों के बीच है। इनमें पूर्वी चीन सागर में लिओनिंग विमानवाहक पोत के हालिया अभियान और सीमा पार करने की लगातार अवैध घटनाएं शामिल हैं। ताइवान का कोस्ट गार्ड प्रशासन इन्हें संभावित संज्ञानात्मक युद्ध अभियान बताता है, जिनका मकसद तटीय सुरक्षा पर भरोसा कमजोर करना है।
तटरक्षक बल ने छोटी नौकाओं का पता लगाने के लिए एआई-सक्षम निगरानी नेटवर्क के वास्ते अतिरिक्त धन मांगा है। उसका कहना है कि संभावित घुसपैठियों को ले जाने वाली रबर की डिंगियों का पारंपरिक रडार से पता लगाना लगभग असंभव है। राष्ट्रपति लाई के शपथग्रहण की वर्षगांठ जैसी राजनीतिक रूप से अहम तारीखों पर हुई इन घटनाओं से समन्वित प्रयासों के संकेत मिलते हैं। इनका मकसद ताइवान की रक्षा तैयारियों को परखना हो सकता है, जबकि धन आवंटन पर विधायी बहस जारी है।
रक्षा की नई सोच: असममित विकल्प
रक्षा विशेषज्ञों का तर्क तेजी से बढ़ रहा है कि ताइवान को तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी स्वतंत्र प्रणालियों के बजाय टिके रहने की क्षमता, सैन्य बलों को फैलाकर तैनात करने और लंबे समय तक प्रतिरोध पर प्राथमिकता देनी चाहिए। इस दृष्टिकोण को अक्सर "साही रणनीति" कहा जाता है। इसमें चीन की सैन्य ताकत की बराबरी करने की कोशिश के बजाय, आक्रमण की कीमत इतनी बढ़ाना शामिल है कि वह बेहद महंगा साबित हो। ताइवान के पूर्व चीफ ऑफ जनरल स्टाफ ली शी-मिन ने इस सिद्धांत को "बड़ी संख्या में छोटी चीजों" के इस्तेमाल के रूप में बताया है। यानी ऐसी सस्ती मोबाइल प्रणालियां, जो हमलावर के संसाधनों की भारी कीमत बढ़ाते हुए खुद टिके रहने की क्षमता सुधारें।
2025 की राष्ट्रीय रक्षा रिपोर्ट में इसी सोच से मेल खाती प्राथमिकताएं दी गई हैं। इसमें बड़ी संख्या में ड्रोन खरीदने के साथ मोबाइल जहाज-रोधी और विमान-रोधी बैटरियों पर जोर है। वेलिंगटन कू ने संकेत दिया है कि ताइवान 2026 में पुरानी इकाइयों को हटाकर उनकी जगह ड्रोन इकाइयां तैनात करेगा। टैंक और तोपखाने की बटालियनों को मानवरहित प्रणालियों के गठन में बदला जाएगा। यह बदलाव मानता है कि बड़ी वायु रक्षा बैटरियों जैसे स्थिर और अधिक मूल्य वाले ठिकाने पीएलए के शुरुआती हमलों की चपेट में आ सकते हैं। इसके विपरीत, बिखरी हुई मोबाइल सेनाएं हमले झेलकर भी युद्ध क्षमता बनाए रख सकती हैं।
रणनीतिक विकल्पों में नागरिक सुरक्षा को रक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर है। टी-डोम प्रस्ताव में मजबूत आश्रय स्थल और लोगों को सुरक्षित निकालने की योजनाएं शामिल हैं। इससे पता चलता है कि ताइवान की घनी शहरी आबादी और एक जगह केंद्रित ढांचे की सुरक्षा के लिए केवल मिसाइलें रोकना काफी नहीं है। "समूचे समाज की रक्षा" की अवधारणा नागरिक ढांचे में मजबूती फैलाती है, ताकि लगातार हमले के बीच शासन, संचार और चिकित्सा सेवाएं जारी रह सकें। लंबे संघर्ष को झेलने की ताइवान की क्षमता तय करने में समाज की यह मजबूती, तकनीकी अवरोधन दरों से अधिक निर्णायक साबित हो सकती है।
क्षेत्रीय विश्लेषकों के मुताबिक, अधिक समझदारी भरा दृष्टिकोण एकीकरण, टिकाऊ क्षमता और किफायती प्रणालियों पर जोर देगा। इससे कई क्षेत्रों में पीएलए के अभियानों को जटिल बनाया जा सकेगा, साथ ही लंबे और तीव्र संघर्ष को झेलने के लिए राजनीतिक सहमति और संस्थागत तैयारी सुनिश्चित होगी। महंगी और तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी प्रणालियों को अकेले समाधान मानकर उनमें निवेश करने के बजाय, नीतियों को ऐसी क्षमताओं पर ध्यान देना चाहिए जो शुरुआती हमलों के बाद भी बची रहें और कमजोर परिस्थितियों में काम करती रहें।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
टी-डोम पहल अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा की गतिशीलता को प्रभावित करती है। यह पारंपरिक सुरक्षा दुविधा का उदाहरण है, जिसमें एक पक्ष की रक्षात्मक मजबूती दूसरे पक्ष को आक्रामक जवाबी कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। बीजिंग अमेरिका की गोल्डन डोम परियोजना की आलोचना कर चुका है, जबकि साथ ही अपनी अंतरिक्ष-आधारित सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खास तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी मिसाइल रक्षा पहलें गंभीर रणनीतिक चुनौतियां खड़ी करती हैं। इससे संकेत मिलता है कि चीन ताइवान की रक्षात्मक मजबूती को व्यापक घेराबंदी ढांचे का हिस्सा मानता है।
सैन्य दृष्टि से, पीएलए परतदार रक्षा को भेदने के लिए खास तौर पर हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और विकिरण-रोधी मिसाइलों का विकास तेज कर सकती है। कूटनीतिक स्तर पर बीजिंग क्षेत्रीय साझेदारों पर दबाव बढ़ा सकता है, खासकर उन देशों पर जो ताइवान की रक्षात्मक पहलों का समर्थन करते हैं। साथ ही, वह ताइपे की तैयारियों को विदेशी प्रभाव से प्रेरित उकसावा बताता है। इस गतिशीलता से ताइवान जलडमरूमध्य में हथियारों की होड़ तेज होने का जोखिम है, जिससे उसी स्थिरता को नुकसान पहुंच सकता है जिसे टी-डोम बनाए रखना चाहता है।
वाशिंगटन का नजरिया इन समीकरणों को और जटिल बनाता है। ताइवान की रक्षा के लिए दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों का समर्थन PORCUPINE Act और Taiwan Assurance Implementation Act जैसे कानूनों में दिखता है। फिर भी, अमेरिकी रणनीतिक योजना इस बात को रेखांकित करती है कि दृढ़ संकल्प वाले पीएलए अभियान के खिलाफ ताइवान की रक्षा करना कितना जटिल है। टी-डोम आत्मनिर्भरता दिखाने की ताइपे की कोशिश है, लेकिन इसकी सफलता अंततः व्यापक क्षेत्रीय रक्षा ढांचों के साथ तालमेल और संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप के प्रतिरोधक असर पर निर्भर करेगी।
संक्षिप्त तथ्य
- अक्टूबर 2025 में घोषित ताइवान की टी-डोम योजना में इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित NT$1.25 ट्रिलियन (US$40 बिलियन) की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली की परिकल्पना है।
- इस प्रणाली का लक्ष्य विमान, ड्रोन और मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए पैट्रियट मिसाइलों, स्वदेशी तियेन कुंग इंटरसेप्टर, NASAMS और एआई-सक्षम कमान नेटवर्क को एकीकृत करना है।
- चीनी सैन्य विश्लेषण ने प्रस्तावित ढांचे में "गंभीर कमजोरियों" की पहचान की है, खासकर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों के संतृप्ति हमलों के खिलाफ।
- इजराइल का US$33.7 बिलियन का रक्षा बजट ताइवान के US$18.9 बिलियन बजट से काफी बड़ा है। वहीं, एक बड़ा अवरोधन अभियान लगभग US$1 बिलियन का पड़ सकता है।
- राष्ट्रपति लाई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के पास 113 में से केवल 51 विधायी सीटें हैं। इससे विशेष रक्षा बजट पर गतिरोध पैदा हुआ है और इसे लागू करने में देरी हो रही है।
- रक्षा विशेषज्ञ महंगी एकीकृत मिसाइल ढाल के बजाय मोबाइल मिसाइल प्रणालियों और बड़ी संख्या में ड्रोन इकाइयों समेत असममित "साही रणनीति" की क्षमताओं को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।
- पीएलए स्वायत्त ड्रोन झुंड और एआई-सक्षम लक्ष्य निर्धारण प्रणालियां विकसित कर रही है, जिन्हें संतृप्ति रणनीति के जरिए पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों पर हावी होने के लिए तैयार किया गया है।






