कई युवा कोरियाई लोगों के लिए एक नौकरी काफी नहीं

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कई युवा कोरियाई लोगों के लिए एक नौकरी काफी नहीं

एन-जॉबर्स का उभार: युवा कोरियाई कामकाज की दुनिया को कैसे बदल रहे हैं

जब 30 वर्षीय किम शाम 6 बजे अपनी पूर्णकालिक मार्केटिंग की नौकरी खत्म करती हैं, तो उनका दिन बस आधा ही पूरा हुआ होता है। सप्ताह में तीन शाम, अक्सर सप्ताहांत पर भी, वह सियोल में भाग-दौड़ करते हुए मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों को अंग्रेज़ी पढ़ाने जाती हैं। उन्होंने कहा, "मैं सात साल से ट्यूशन पढ़ा रही हूं। अपनी मुख्य नौकरी से मिलने वाले 30 लाख वॉन (2,074 डॉलर) से मुझे लगता है कि मैं कभी घर नहीं खरीद पाऊंगी या परिवार शुरू नहीं कर पाऊंगी। अब भविष्य के लिए एक नौकरी करना काफी नहीं लगता।"

विषय-सूची
  1. एन-जॉबर्स का उभार: युवा कोरियाई कामकाज की दुनिया को कैसे बदल रहे हैं
  2. कई आय स्रोतों वाला देश
  3. जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दौर में गुजारे की रणनीतियां
  4. पारंपरिक करियर के रास्तों पर घटता भरोसा
  5. पैसे से आगे: संतुष्टि और नियंत्रण की तलाश
  6. एक से अधिक नौकरियां करने की कीमत
  7. वैश्विक संदर्भ और नियोक्ताओं की स्वीकार्यता
  8. उत्तर कोरिया का उलट उदाहरण: राज्य का नियंत्रण बनाम बाजार की आजादी
  9. कोरिया में कामकाज का भविष्य
  10. निष्कर्ष

32 वर्षीय ली एक बड़े समूह की कंपनी में सेल्सपर्सन हैं। रात में वह अपने लैपटॉप पर कोरियाई सौंदर्य उत्पादों को अमेज़न पर अपलोड और सूचीबद्ध करते हैं। यह काम नीरस है और प्लेटफॉर्म के मानक सख्त हैं, जिससे वह अक्सर तनाव में रहते हैं। फिर भी, उनका कहना है कि उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, "किराया, राशन और कभी-कभार बाहर खाना खाने के बाद बचत के लिए मुश्किल से कुछ बचता है। यह महत्वाकांक्षा की बात नहीं, जरूरत है।"

किम और ली कोई अपवाद नहीं हैं। कभी फ्रीलांसरों या बेरोजगारी के बीच काम खोज रहे लोगों से जुड़ी साइड जॉब अब दक्षिण कोरिया में युवावस्था की एक प्रमुख पहचान बन गई है। आर्थिक मजबूरियां, पारंपरिक दफ्तर व्यवस्था पर भरोसे की कमी और खुद को नए सिरे से गढ़ने या निजी सपने पूरे करने की इच्छा, "एन-जॉबर्स" के बढ़ते चलन को आगे बढ़ा रही हैं। यह शब्द एक से अधिक नौकरियां करने वालों के लिए इस्तेमाल होता है।

नौकरी पोर्टल इनक्रूट के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, कोरिया के करीब आधे कर्मचारी अब साइड जॉब करते हैं। इसमें भागीदारी 20 से 29 वर्ष के लोगों (55.2 प्रतिशत) और 30 से 39 वर्ष के लोगों (57 प्रतिशत) में सबसे अधिक है। यह चलन निजी अनुभवों तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस आंकड़ों में भी दिखता है, जो इस आर्थिक बदलाव की गहराई उजागर करते हैं।

आंकड़े अतिरिक्त आय पर बढ़ती निर्भरता की पुष्टि करते हैं। डेटा एवं सांख्यिकी मंत्रालय के माइक्रोडेटा के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक नियमित और अस्थायी, दोनों तरह के कर्मचारियों सहित दूसरी नौकरी करने वालों की संख्या 404,409 पहुंच गई। अल्पकालिक नौकरियां खोजने वाले प्लेटफॉर्म न्यूवर्कर द्वारा दिसंबर में 728 वयस्कों पर किए गए सर्वेक्षण में भी 49.5 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी तरह का साइड वर्क करने की बात कही, जबकि 50.5 प्रतिशत ने कहा कि वे ऐसा नहीं करते।

पूर्णकालिक दफ्तर कर्मचारियों में खास तौर पर 48.4 प्रतिशत ने अपनी मुख्य नौकरी के अलावा अतिरिक्त काम करने की बात कही। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े वास्तविक पैमाने को कम दिखा सकते हैं, क्योंकि कई कर्मचारी संभावित नतीजों के डर से नियोक्ताओं को अपनी दूसरी आय के स्रोत बताने से हिचकते हैं।

कई आय स्रोतों वाला देश

साइड जॉब करने वाले युवा कोरियाई लोगों की संख्या बढ़ने के साथ ही इस बाजार में विविधता भी बढ़ी है। अवसर डिजिटल कौशल या निजी रुचियों के अनुरूप हैं और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन, दोनों माध्यमों में उपलब्ध हैं। इनमें शादी में मेहमान के तौर पर एक बार शामिल होने के लिए पैसे लेना, निजी शैक्षणिक कोचिंग देना और स्मार्टफोन से कमाई करना शामिल है। फोन पर विज्ञापन देखने, इंटरनेट ब्राउज़ करने और पैदल चलने से भी थोड़ी-बहुत कमाई की जा सकती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक इस्तेमाल के साथ कई लोग अतिरिक्त आय के लिए यूट्यूब सामग्री बनाने, ब्लॉग लिखने या ऑनलाइन स्टोर चलाने की ओर भी रुख कर रहे हैं। ब्लॉग पोस्ट करके अतिरिक्त 10 लाख वॉन कमाने वाली 34 वर्षीय ली जी-वॉन ने कहा, "सोशल मीडिया ने इस विविधता को तेज किया है। यह बाजार और सीखने के मंच, दोनों की तरह काम करता है। कर्मचारी ऐप के जरिए कमाई, डिजिटल बिक्री की रणनीतियों और सामग्री बनाने के तरीके साझा करते हैं, जिससे ज्यादा लोग कम बाधाओं वाले अतिरिक्त आय के विकल्प आजमाने के लिए प्रेरित होते हैं।"

इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सामग्री से कमाई करने की रणनीतियों का वादा करने वाली पोस्ट आम हैं। सफल लोग अक्सर किताबें प्रकाशित करते हैं या अपना निजी ब्रांड बनाते हैं और विशिष्ट समुदायों में छोटी-मोटी हस्तियां बन जाते हैं। एक फ्लिया मार्केट सर्वेक्षण के मुताबिक, सबसे लोकप्रिय कामों में सोशल मीडिया सामग्री बनाना, जैसे ब्लॉग या यूट्यूब (20.2 प्रतिशत), शामिल है। इससे औसतन करीब 6,20,000 वॉन प्रति माह की कमाई होती है।

जीवन-यापन की बढ़ती लागत के दौर में गुजारे की रणनीतियां

तो इस उछाल के पीछे क्या है? विशेषज्ञ आधिकारिक महंगाई के आंकड़ों और लोगों के रोजमर्रा के अनुभव के बीच अंतर की ओर इशारा करते हैं। पिछले साल उपभोक्ता कीमतों में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो पांच साल में सबसे कम थी, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च इससे कहीं ज्यादा बढ़े हुए महसूस होते हैं।

औद्योगिक एवं श्रम नीति संस्थान के निदेशक किम सुंग-ही ने कहा, "वेतन वृद्धि की रफ्तार जीवन-यापन की लागत में बढ़ोतरी के साथ कदम नहीं मिला पा रही है।" उन्होंने कहा, "इसीलिए ज्यादा कर्मचारी 'मुख्य नौकरी के साथ साइड जॉब' को अपना सामान्य तरीका बना रहे हैं," और अनुमान जताया कि यह चलन लंबे समय में श्रम जगत को बदल सकता है।

किम की इस व्याख्या को केबी फाइनेंशियल ग्रुप का शोध भी समर्थन देता है। उसके मुताबिक, वेतन पाने वाले 2,000 कर्मचारियों में से 54.8 प्रतिशत साइड जॉब कर रहे थे, जो 2022 के इसी सर्वेक्षण से 12.8 प्रतिशत अंक ज्यादा है। इसकी सबसे आम वजहों में आपात स्थितियों के लिए बचत करना (38.7 प्रतिशत), खाली समय का इस्तेमाल (18.7 प्रतिशत) और जीवन-यापन के खर्च पूरे करना (13.2 प्रतिशत) शामिल थीं।

सियोल में यह दबाव खास तौर पर तीव्र है, जहां उपभोक्ता कीमतें ऊंची हैं और आवास की लागत आसमान छू रही है। रियल एस्टेट 114 के अनुसार, जुलाई में एक अपार्टमेंट की औसत कीमत 1.46 अरब वॉन थी। सियोल में एक औसत कर्मचारी का सालाना वेतन करीब 4.8 करोड़ वॉन है। साधारण गणना से पता चलता है कि 30 साल तक पूरा वेतन बचाने पर भी घर खरीदना मुश्किल से ही संभव होगा।

जैसा कि किम और ली ने पहले बताया, कई वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सियोल के महंगे माहौल में गुजारा करना कठिन है। इस वित्तीय हकीकत ने बुनियादी जीवन स्तर बनाए रखने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए साइड जॉब को विकल्प से ज्यादा जरूरत बना दिया है।

पारंपरिक करियर के रास्तों पर घटता भरोसा

वित्तीय दबाव के अलावा, विशेषज्ञों का कहना है कि एन-जॉबर्स का बढ़ता चलन इस बात में बदलाव दिखाता है कि युवा कोरियाई काम को किस नजर से देखते हैं। घरों की ऊंची कीमतों, स्थिर वेतन और नौकरी की अनिश्चितता ने उस पारंपरिक भरोसे को कमजोर किया है कि वफादारी और लंबे कामकाजी घंटे स्थिरता का इनाम दिलाएंगे।

स्थानीय थिंक टैंक 20s लैब के 20 और 30 वर्ष की उम्र के 850 दफ्तर कर्मचारियों पर किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, 36.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे प्रबंधकीय पद पर पदोन्नति नहीं चाहते। कई लोगों ने पदोन्नति से जुड़े तनाव, काम के बोझ और प्रदर्शन के दबाव को अपनी अनिच्छा की वजह बताया।

काम पर अधिक अधिकार पाने की स्पष्ट अनिच्छा नौकरी खोजने वाले प्लेटफॉर्म जॉब कोरिया के 2023 के युवा कर्मचारियों पर किए गए सर्वेक्षण में भी सामने आई। सर्वेक्षण में शामिल 54.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे कार्यकारी पद पर पदोन्नति नहीं चाहते।

किम ने कहा, "पिछली पीढ़ियों के उलट, आज युवा कर्मचारी जानते हैं कि वे सोशल मीडिया या ई-कॉमर्स के जरिए दफ्तर के बाहर भी कमाई कर सकते हैं। काम पर ज्यादा जिम्मेदारी लेना अब स्थिर भविष्य बनाने का सबसे अच्छा या एकमात्र तरीका नहीं माना जाता।"

यह चलन कोरिया तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में जेन ज़ी एक से अधिक नौकरियां करने के चलन की अगुवाई कर रही है। कंतर के 10,000 कर्मचारियों पर फरवरी 2023 में किए गए वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, जेन ज़ी के 40 प्रतिशत कर्मचारी कम से कम दो भूमिकाओं में काम कर रहे हैं। यह दिखाता है कि युवा पीढ़ियां काम और करियर विकास को लेकर बुनियादी तौर पर अपना नजरिया बदल रही हैं।

पैसे से आगे: संतुष्टि और नियंत्रण की तलाश

कुछ लोगों के लिए साइड जॉब की वजह सिर्फ आर्थिक गुजारा नहीं है। एन-जॉबर्स का एक बढ़ता समूह कई नौकरियों को आत्म-विकास, निजी ब्रांड बनाने या लंबे समय के सपने पूरे करने का रास्ता मानता है।

सियोल में रहने वाले 27 वर्षीय पेशेवर ने कहा, "मुझे एहसास हुआ कि कंपनी ही सब कुछ नहीं है और मुझे खुद में निवेश करने की जरूरत है।" उनका यूट्यूब चैनल है, जिसके करीब 27,000 सब्सक्राइबर हैं। उन्होंने कहा, "केवल मेरी मुख्य नौकरी भविष्य की तैयारी के लिए काफी नहीं है। अपने साइड वर्क के जरिए मैं वित्तीय स्थिरता बना रहा हूं और नए अनुभव हासिल कर रहा हूं।"

33 वर्षीय किम सोल-निम शाम करीब 6 बजे अपनी मुख्य नौकरी से घर लौटने के बाद अस्पतालों और कानूनी फर्मों के लिए ब्लॉग लिखती हैं। वह रोजाना एक से चार घंटे साइड वर्क करती हैं और अतिरिक्त आय के रूप में हर महीने 6,00,000 से 8,00,000 वॉन (430-575 डॉलर) कमाती हैं। उन्होंने द कोरिया हेराल्ड से कहा, "साइड जॉब करने की सबसे बड़ी वजह पैसा है। मेरी मुख्य नौकरी का वेतन जीवन-यापन के खर्चों के लिए अपर्याप्त नहीं है, लेकिन सियोल में घर खरीदने के लिए यह कहीं से भी काफी नहीं है।"

दूसरे लोग साइड जॉब को असंतोषजनक मुख्य पेशे से अपनी पसंद के दूसरे काम में सुरक्षित ढंग से जाने का तरीका मानते हैं। कोरिया की शीर्ष समूह कंपनियों में से एक में काम करने वाली 37 वर्षीय इंजीनियर ने वर्षों में कई तरह के साइड जॉब आजमाए हैं। वह ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ब्रंच पर आमटुन नाम से लिखती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने बहुत मेहनत की, लेकिन एक दिन मुझे हकीकत का एहसास हुआ। मैं कॉरपोरेट दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही थी, लेकिन अचानक मन में खालीपन महसूस हुआ।"

उन्होंने गंगवॉन प्रांत में 8 करोड़ वॉन में एक मरम्मत की जरूरत वाला मकान खरीदा और उसे एयरबीएनबी में बदल दिया। इससे उन्हें सालाना करीब 70 से 80 लाख वॉन की कमाई होती है। उन्होंने कहा, "यह ऐसा काम था जिसे मैं सचमुच पसंद करती थी और जिसे सार्थक मानती थी, इसलिए मुझे उतनी थकान महसूस नहीं हुई।"

एक से अधिक नौकरियां करने की कीमत

लेकिन दूसरी और तीसरी नौकरी करने की बढ़ती प्रवृत्ति की कीमत भी चुकानी पड़ती है। कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर सेफ्टी एंड हेल्थ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, युवा एन-जॉबर्स अब औसतन 58.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं और कुछ के काम के घंटे करीब 97 तक पहुंच जाते हैं। यह सामान्य कामकाजी समय से काफी ज्यादा है और स्वास्थ्य तथा खुशहाली को लेकर चिंता पैदा करता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे दक्षिण कोरिया में पहले से ही आम बर्नआउट की समस्या बढ़ सकती है, स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और पारिवारिक तथा सामाजिक रिश्ते कमजोर हो सकते हैं। सप्ताह में करीब 100 घंटे काम करने के लंबे समय के नतीजों में शारीरिक थकावट, हृदय रोग का बढ़ता जोखिम, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और रिश्तों में तनाव शामिल हैं।

योंगनाम विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के प्रोफेसर हियो चांग-देओक ने कहा, "कई नौकरियों के जरिए आय अधिकतम करने की कोशिश ऐसे समाज में पीछे छूट जाने की चिंता दिखाती है, जहां आर्थिक ताकत सबसे अहम है। लेकिन लंबे कामकाजी घंटे उत्पादकता घटा रहे हैं और रिश्तों पर दबाव डाल रहे हैं। हमें यह देखना होगा कि कर्मचारियों का वेतन उनके श्रम के मूल्य को पर्याप्त रूप से दर्शाता है या नहीं।"

कोरिया लेबर इंस्टीट्यूट ने कम वेतन वाली नौकरियों और साइड जॉब करने के बीच संबंध को रेखांकित किया। उसके विश्लेषण में सामने आया कि साइड जॉब करने वाले लोग औसतन 13,000 वॉन (9.42 अमेरिकी डॉलर) प्रति घंटे कमाते हैं, जबकि केवल मुख्य नौकरी पर निर्भर लोगों की प्रति घंटे की कमाई 16,000 वॉन (11.59 अमेरिकी डॉलर) है। यह अंतर इस चलन के पीछे के आर्थिक दबावों को उजागर करता है।

वैश्विक संदर्भ और नियोक्ताओं की स्वीकार्यता

यह चलन सिर्फ कोरिया तक सीमित नहीं है। वीज़ा के शोध के मुताबिक, जेन ज़ी के 45 प्रतिशत लोगों के पास अब साइड जॉब है और इनमें एक-तिहाई से अधिक (37 प्रतिशत) के पास एक से ज्यादा साइड जॉब हैं। वीज़ा के अनुसार, जेन ज़ी के बीच चल रहे साइड जॉब कारोबारों के तीन सबसे आम प्रकार ई-कॉमर्स (34 प्रतिशत), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का काम (25 प्रतिशत) और निजी जुनून से जुड़े प्रोजेक्ट (19 प्रतिशत) हैं।

साइड जॉब करने वाले जेन ज़ी के करीब सात में से दस (69 प्रतिशत) लोगों ने अतिरिक्त आय कमाने के मुख्य उद्देश्य से अपना व्यवसाय शुरू किया। साइड जॉब से उनकी औसत मासिक कमाई 218.60 पाउंड है। हालांकि, वीज़ा के मुताबिक एक-चौथाई से अधिक (27 प्रतिशत) लोगों ने अपना उद्यम किसी जुनून को तलाशने के लिए शुरू किया, जबकि लगभग इतनी ही संख्या (26 प्रतिशत) ने अपने कौशल को और निखारने के लिए ऐसा किया।

अहम बात यह है कि कई नियोक्ता कर्मचारियों के साइड जॉब को अब अधिक स्वीकार करने लगे हैं। कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के टेपर स्कूल ऑफ बिजनेस में उद्यमिता की सहायक शिक्षण प्रोफेसर मेरेडिथ मेयर ग्रेली बताती हैं, "महामारी से पहले कर्मचारी ऐसी किसी भी बात पर खुलकर चर्चा करने से हिचकते थे, जो पूर्णकालिक नौकरी से उनकी ऊर्जा हटा सकती थी, यहां तक कि बच्चों की देखभाल पर भी। लेकिन अब कंपनियां अपने कर्मचारियों की गहरी जरूरतों और इच्छाओं को लेकर अधिक संवेदनशील और ग्रहणशील हैं, और इसमें जुनून से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।"

उत्तर कोरिया का उलट उदाहरण: राज्य का नियंत्रण बनाम बाजार की आजादी

पड़ोसी उत्तर कोरिया की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। समाजवादी देश में सोशलिस्ट पैट्रियॉटिक यूथ लीग (एसपीवाईएल) ने हाल ही में "एकबेओरी" काम करने वाले युवाओं से अपने निर्धारित कार्यस्थलों पर रिपोर्ट करने की मांग की और ऐसा न करने पर उन्हें सामूहिक कार्य ब्रिगेड में भेजने की धमकी दी।

एकबेओरी तथाकथित 8.3 काम जैसा है। इसमें लोग निजी आर्थिक गतिविधि करने के लिए अपने आधिकारिक कार्यस्थलों को तय रकम देते हैं और कागजों पर ही वहां काम करते हैं। उत्तर कोरिया में बहुत से लोग इस तरह का काम करते हैं, क्योंकि आधिकारिक कार्यस्थल अक्सर वेतन देने या राशन उपलब्ध कराने में नाकाम रहते हैं।

युवाओं ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया और कहा कि निर्धारित कार्यस्थल "सिर्फ कागजों पर हकीकत हैं"। उनका कहना है, "वे हमें वेतन नहीं देते, इसलिए काम पर आने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमें पैसे कमाने के लिए अपने कारोबार का सामान ढोना पड़ता है।"

युवतियों का यहां तक कहना है कि "अब एसपीवाईएल बहुत पाबंदियां लगाने लगा है, इसलिए शादी करके कारोबार करना ही बेहतर होगा।" उन्हें यह बेहतर विकल्प लगता है क्योंकि शादी के बाद निर्धारित कार्यस्थल छोड़ने पर वे काम पर आने के दबाव के बिना बाजार में आधिकारिक रूप से कारोबार कर सकती हैं।

यह विरोध दोनों कोरियाओं के बीच बुनियादी अंतर को उजागर करता है। दक्षिण कोरिया के युवा बाजार की आजादी के तहत आय के कई स्रोत अपना सकते हैं, जबकि उत्तर कोरिया के लोग ऐसी गतिविधियों पर राज्य के दमन का सामना करते हैं, जो उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता देती हैं।

कोरिया में कामकाज का भविष्य

दक्षिण कोरिया बूढ़ी होती आबादी और धीमी पड़ती आर्थिक वृद्धि से जूझ रहा है। ऐसे में एन-जॉबर्स के उभार ने कठिन सवाल खड़े किए हैं। सवाल सिर्फ काम को लेकर नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या एक पूर्णकालिक नौकरी अब भी वह सुरक्षा दे सकती है जिसका वह कभी वादा करती थी।

चुंग-आंग विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के मानद प्रोफेसर ली ब्योंग-हून ने कहा कि इस चलन के पीछे आर्थिक और सांस्कृतिक, दोनों तरह के कारण हैं। उन्होंने कहा, "पहला, लोग अपनी मुख्य नौकरी से मिलने वाली आय या उसके अर्थ से संतुष्ट नहीं होते और कुछ नया करने की तैयारी के लिए साइड जॉब करते हैं। दूसरा, लोग अब मुख्य नौकरी को जीवनभर का करियर नहीं मानते। जब उन्हें सही समय लगेगा, वे नौकरी छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।"

ली ने समाज में इसकी गहरी जड़ों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, "कोरिया की शिक्षा व्यवस्था लोगों को यह समझने में मदद नहीं करती कि उन्हें क्या पसंद है। इसलिए कई लोग कामकाजी दुनिया में आने के बाद ही ये सवाल पूछना शुरू करते हैं।"

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल सहित तकनीकी बदलाव रोजगार के परिदृश्य को लगातार बदल रहे हैं, इसलिए इस चलन में तेजी आने की उम्मीद है। ली ने कहा, "20वीं सदी के उलट, आज नौकरियां कम सुरक्षित हैं और एआई जैसी तकनीकी प्रगति से बाधित होती हैं। संभव है कि ज्यादा लोग जीवनभर एक ही कंपनी में टिके रहने के बजाय नौकरी के अवसरों के अनुसार जगह बदलें।"

निष्कर्ष

एन-जॉबर्स का उभार महज एक आर्थिक चलन नहीं है। यह इस बात में पीढ़ीगत बदलाव को दर्शाता है कि युवा कोरियाई काम, जीवन और वित्तीय सुरक्षा को किस तरह देखते हैं। जहां कई लोग महंगी अर्थव्यवस्था में मजबूरी के कारण ऐसा कर रहे हैं, वहीं दूसरे संतुष्टि तलाश रहे हैं और पारंपरिक रास्तों से बाहर अपना करियर बना रहे हैं।

यह चलन जारी रहा तो कंपनियों और नीति-निर्माताओं, दोनों को इस पर फिर से विचार करना पड़ सकता है कि समाज में काम को किस तरह व्यवस्थित किया जाता है, उसका कितना भुगतान होता है और उसे कितना महत्व दिया जाता है। आर्थिक गुजारे और जीवन की गुणवत्ता के बीच संतुलन भविष्य में कोरिया के श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • 20 और 30 वर्ष की उम्र के कोरियाई कर्मचारियों में करीब आधे (48.4-55.2 प्रतिशत) अब साइड जॉब करते हैं
  • एन-जॉबर्स औसतन 58.7 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं, जबकि कुछ के काम के घंटे 97 तक पहुंच जाते हैं
  • मुख्य वजहों में आर्थिक मजबूरी (82.5 प्रतिशत), करियर बदलना (38.7 प्रतिशत) और खाली समय का इस्तेमाल (18.7 प्रतिशत) शामिल हैं
  • लोकप्रिय साइड जॉब में सोशल मीडिया सामग्री बनाना (20.2 प्रतिशत), ई-कॉमर्स और ट्यूशन पढ़ाना शामिल हैं
  • युवा कर्मचारी पारंपरिक करियर की सीढ़ी को तेजी से नकार रहे हैं; 36.7 प्रतिशत प्रबंधकीय पदों से बचना चाहते हैं
  • यह चलन आर्थिक दबावों और काम के प्रति पीढ़ीगत नजरिए में बदलाव, दोनों को दर्शाता है
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