चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगा दुर्लभ दोहरा झटका
जनवरी 2026 के मध्य में चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए 24 घंटे बेहद मुश्किल रहे। दो अलग-अलग प्रक्षेपण विफलताओं ने सरकारी और व्यावसायिक, दोनों तरह की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका दिया। ये दोनों विफलताएं 12 घंटे से भी कम अंतराल में हुईं। यह 2025 में चीन की रिकॉर्ड सफलताओं से एक तीखा विरोधाभास है और इसके बढ़ते प्रक्षेपण बेड़े की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। चीन 2026 में पहली बार इतिहास में 100 से अधिक प्रक्षेपण करने के आक्रामक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
विषय-सूची
- चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगा दुर्लभ दोहरा झटका
- लॉन्ग मार्च 3बी की विफलता: एक दुर्लभ चूक
- साझा तकनीक को लेकर चिंता
- रहस्यमय शिजियान-32 उपग्रह
- सेरेस-2 की पहली उड़ान विफलता में खत्म
- वाणिज्यिक महत्वाकांक्षाओं को रणनीतिक झटका
- विस्तार योजनाओं के बीच गैलेक्टिक एनर्जी को झटका
- रिकॉर्ड सफलता से अप्रत्याशित झटके तक
- परिचालन बढ़ाने की चुनौती
- रणनीतिक संदर्भ: अंतरिक्ष दौड़ और मेगाकॉन्स्टेलेशन
- मौजूदा प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
- अंतरराष्ट्रीय तनाव और अंतरिक्ष सुरक्षा
- निष्कर्ष
पहली घटना चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के दशकों पुराने भरोसेमंद रॉकेट लॉन्ग मार्च 3बी से जुड़ी थी। दूसरी घटना बीजिंग की निजी कंपनी गैलेक्टिक एनर्जी के विकसित किए नए वाणिज्यिक प्रक्षेपण यान सेरेस-2 की बहुप्रतीक्षित पहली उड़ान के दौरान हुई। दोनों विफलताओं में पेलोड पूरी तरह नष्ट हो गए। इनमें एक गोपनीय प्रायोगिक उपग्रह और करीब छह वाणिज्यिक उपग्रह शामिल थे, जिन्हें निम्न पृथ्वी कक्षा में पहुंचाया जाना था।
ये दोहरे झटके ऐसे समय लगे हैं जब चीन पश्चिमी देशों की अंतरिक्ष क्षमताओं की बराबरी करने के प्रयास तेज कर रहा है। देश ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ के पास 200,000 से अधिक उपग्रहों वाले मेगाकॉन्स्टेलेशन के लिए आवेदन दाखिल किए हैं। यह उसकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं का संकेत है, जिन्हें पूरा करने के लिए विश्वसनीय प्रक्षेपण क्षमता और विनिर्माण तथा तैनाती क्षमता में बड़े सुधार जरूरी हैं।
लॉन्ग मार्च 3बी की विफलता: एक दुर्लभ चूक
लॉन्ग मार्च 3बी ने 16 जनवरी को पूर्वी समयानुसार सुबह 11:55 बजे (1655 UTC) दक्षिण-पश्चिम चीन के शिचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से उड़ान भरी। शौकिया वीडियो से पता चला कि वायुक्षेत्र बंद करने संबंधी सूचनाओं के अनुरूप प्रक्षेपण तय समय पर हुआ था, लेकिन मिशन आगे बढ़ने के साथ ही कोई जानकारी नहीं आई। चीन एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन (CASC) ने उड़ान के करीब 12 घंटे बाद विफलता की पुष्टि की। उसने बताया कि रॉकेट के तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण शिजियान-32 उपग्रह नष्ट हो गया।
सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया कि “विशिष्ट कारण का आगे विश्लेषण और जांच की जा रही है”, लेकिन खराबी के बारे में बहुत कम जानकारी दी। अप्रैल 2020 में इंडोनेशिया के पलापा-एन1/नुसंतारा-2 उपग्रह के नुकसान के बाद लॉन्ग मार्च 3बी मिशन का यह पहला पूर्ण नुकसान है। उस घटना में भी तीसरे चरण की समस्या शामिल थी। करीब 300 प्रक्षेपणों में पूरे लॉन्ग मार्च परिवार की यह पहली स्पष्ट प्रक्षेपण विफलता प्रतीत होती है, जो इस रॉकेट के अब तक के असाधारण विश्वसनीयता रिकॉर्ड को रेखांकित करती है।
हाइपरगोलिक ईंधन से चलने वाला लॉन्ग मार्च 3बी, भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा के मिशनों के लिए चीन का प्रमुख प्रक्षेपण यान है। यह संचार, मौसम विज्ञान, सुदूर संवेदन और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाले उपग्रहों को ले जाता है। इस विफलता से टीजेएस प्रायोगिक श्रृंखला और तियानलियन रिले उपग्रहों जैसे अहम कार्यक्रमों के आगामी प्रक्षेपणों में देरी हो सकती है। ये उपग्रह मानव अंतरिक्ष उड़ानों और अन्य मिशनों के लिए संचार सहायता उपलब्ध कराते हैं।
साझा तकनीक को लेकर चिंता
मिशन योजनाकारों के लिए खास चिंता की बात यह है कि तटीय वेनचांग अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित होने वाला नया लॉन्ग मार्च 7ए रॉकेट अपना ऊपरी चरण लॉन्ग मार्च 3 श्रृंखला से लेता है। इस साझा डिजाइन के चलते शुक्रवार की विफलता 3बी और 7ए, दोनों रॉकेटों के निर्धारित प्रक्षेपणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसा तब तक हो सकता है जब तक जांचकर्ता यह पता न लगा लें कि समस्या साझा चरण के डिजाइन में थी या केवल इसी रॉकेट तक सीमित थी।
चीन के पास प्रक्षेपण के अन्य विकल्प भी हैं, जिनमें वेनचांग से उड़ान भरने वाला नया लॉन्ग मार्च 7ए शामिल है। लेकिन अगर 3बी/7ए के ऊपरी चरण वाले रॉकेटों को व्यापक रूप से उड़ान से रोकना पड़ा, तो चीन की भूस्थिर उपग्रह तैनाती योजनाओं के कार्यक्रम में दिक्कतें आएंगी। लॉन्ग मार्च 7ए में 3बी से लिया गया हाइड्रोजन-ऑक्सीजन ईंधन वाला ऊपरी चरण इस्तेमाल होता है। इसलिए इस जांच के तकनीकी निष्कर्ष कई प्रक्षेपण यानों को प्रभावित कर सकते हैं।
रहस्यमय शिजियान-32 उपग्रह
CASC ने शिजियान-32 उपग्रह और उसके निर्धारित मिशन के बारे में बहुत कम जानकारी दी, जो इस कार्यक्रम की पारंपरिक गोपनीयता के अनुरूप है। शिजियान श्रृंखला में कई तरह के उपग्रह शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल आम तौर पर प्रयोग करने, नई तकनीकों को परखने और कक्षा में परिचालन प्रक्रियाओं की पुष्टि के लिए किया जाता है। आधिकारिक विवरणों में शिजियान उपग्रहों को प्रायोगिक या बहुउद्देशीय बताया जाता है, लेकिन पश्चिमी रक्षा विश्लेषक अक्सर इस श्रृंखला को उच्चस्तरीय सिग्नल खुफिया या अंतरिक्ष-आधारित निगरानी तकनीकों के परीक्षण वाले मंचों के रूप में देखते हैं।
किसी भी गोपनीय उपग्रह का नुकसान वित्तीय और खुफिया, दोनों लिहाज से बड़ा झटका होता है, क्योंकि ऐसे पेलोड में अक्सर संवेदनशील तकनीकें होती हैं, जिन्हें विकसित करने और बदलने में कई साल लग सकते हैं। इस मिशन की विफलता ऐसे समय हुई है जब चीन अपने व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण प्रयासों के तहत अंतरिक्ष निगरानी और टोही क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है।
हाल के शिजियान मिशनों में लगातार अधिक उन्नत क्षमताएं दिखाई दी हैं। शिजियान-21 और शिजियान-25 नाम के दो अलग-अलग उपग्रह पिछले साल के अंत में भू-समकालिक कक्षा में अलग हुए। इससे पहले वे कई महीनों तक एक-दूसरे से जुड़े हुए प्रतीत हुए थे और कक्षा में ईंधन भरने के परीक्षण कर रहे थे। ये गतिविधियां उन्नत अंतरिक्ष संचालन और स्वायत्त मिलन क्षमताओं में चीन की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाती हैं।
सेरेस-2 की पहली उड़ान विफलता में खत्म
लॉन्ग मार्च 3बी की विफलता के 12 घंटे से भी कम समय बाद गैलेक्टिक एनर्जी को अपने लंबे समय से टल रहे सेरेस-2 रॉकेट की पहली उड़ान में झटका लगा। सेरेस-2 ने 16 जनवरी को पूर्वी समयानुसार रात 11:08 बजे (17 जनवरी को 0408 UTC) उत्तर-पश्चिम चीन के जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से उड़ान भरी। गैलेक्टिक एनर्जी ने पहली उड़ान के नुकसान की पुष्टि करते हुए कहा कि एक गड़बड़ी हुई है और उसके विशिष्ट कारण की जांच की जा रही है।
कंपनी ने मिशन में शामिल सभी पक्षों से “दिल से माफी” मांगी और ग्राहकों तथा साझेदारों पर पड़े असर को स्वीकार किया। माना जा रहा है कि इस उड़ान में करीब छह उपग्रह सवार थे। इनमें हार्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स का अल्ट्रा-फ्लैट डिस्क उपग्रह लिलैक-3 शामिल था।
सेरेस-2 प्रक्षेपण यान को गैलेक्टिक एनर्जी के पहले के सेरेस-1 रॉकेट का बड़ा उन्नत संस्करण माना जा रहा था। इसकी क्षमता 500 किलोमीटर ऊंचाई वाली निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 1,600 किलोग्राम पहुंचाने की थी, जो छोटे सेरेस-1 की 400 किलोग्राम की LEO क्षमता से काफी अधिक है। यह प्रक्षेपण छोटे सेरेस-1 की सफल वापसी उड़ान के ठीक एक दिन बाद हुआ। नवंबर में विफलता के बाद सेरेस-1 ने शानदोंग प्रांत के तट से दूर एक परिवर्तित बजरे से उड़ान भरी थी।
वाणिज्यिक महत्वाकांक्षाओं को रणनीतिक झटका
उद्योग पर नजर रखने वालों का कहना है कि लॉन्ग मार्च 3बी, चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी का पुराना भरोसेमंद रॉकेट है, जबकि सेरेस-2 की विफलता चीन के तेजी से उभरते निजी एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए अधिक रणनीतिक झटका है। गैलेक्टिक एनर्जी ने सेरेस-2 को अपनी सेरेस-1 श्रृंखला के बड़े और अधिक सक्षम उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया था। उसका लक्ष्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वाणिज्यिक प्रक्षेपण मांग में बड़ा हिस्सा हासिल करना और अंतरराष्ट्रीय छोटे उपग्रह प्रक्षेपण प्रदाताओं से मुकाबला करना था।
100 टन वजनी, चार चरणों वाले इस प्रक्षेपण यान में ठोस प्रणोदक वाले तीन मुख्य चरण और तरल ईंधन वाला एक ऊपरी चरण था। यह कंपनी के लिए तकनीक में बड़ी छलांग थी। छह वाणिज्यिक उपग्रहों के साथ इसका नष्ट होना इस क्षेत्र में निजी प्रक्षेपण क्षमता को तेजी से बढ़ाने के अंतर्निहित जोखिमों को उजागर करता है।
सेरेस-2 की विफलता के वित्तीय नतीजे गंभीर हैं। इस श्रेणी के ऐसे प्रक्षेपण यानों के विकास पर आम तौर पर कई सौ मिलियन युआन (करीब 42 मिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक खर्च आता है। छह उपग्रहों का नुकसान चीनी अंतरिक्ष स्टार्टअप को सहारा देने वाले वाणिज्यिक बीमा और उद्यम पूंजी बाजारों पर और दबाव डालता है।
विस्तार योजनाओं के बीच गैलेक्टिक एनर्जी को झटका
सेरेस-2 का नुकसान गैलेक्टिक एनर्जी की महत्वाकांक्षी विकास रणनीति के लिए बड़ा झटका है। कंपनी अपने पहले तरल प्रणोदक प्रक्षेपण यान पैलस-1 की पहली उड़ान की तैयारी भी कर रही है। इसे LEO में करीब 8,000 किलोग्राम पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे कंपनी बड़े वाणिज्यिक उपग्रह तैनाती ठेके हासिल करने की दौड़ में उतर सकेगी। इसके अलावा, कंपनी ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की दिशा में शुरुआती कागजी प्रक्रिया दाखिल की है, जो विस्तार के लिए सार्वजनिक पूंजी बाजारों से धन जुटाने की उसकी मंशा दिखाती है।
गैलेक्टिक एनर्जी ने हाल में क्षेत्रीय ग्राहकों के लिए मिशन में अधिक लचीलापन देने के वास्ते जमीन और समुद्र, दोनों से प्रक्षेपण करने की अपनी क्षमता का जिक्र किया था। सेरेस-2 की विफलता से ठीक एक दिन पहले शानदोंग प्रांत के तट से समुद्र के ऊपर से कंपनी के सेरेस-1एस रॉकेट का सफल प्रक्षेपण इस क्षमता का प्रमाण था। इसने चार तियानची तारामंडल उपग्रहों को कक्षा में पहुंचाया। सफलता और विफलता का यह साथ-साथ होना मौजूदा एशिया-प्रशांत अंतरिक्ष दौड़ की अस्थिर प्रकृति दिखाता है, जहां तेज रफ्तार से बार-बार प्रक्षेपण अब आम होते जा रहे हैं।
भारत के इसरो और जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के उभरते निजी खिलाड़ियों समेत क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धी इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि चीन अपनी क्षेत्रीय प्रक्षेपण सूची में दबदबा बनाए रखने के लिए इन तकनीकी बाधाओं को कैसे दूर करता है। भारत को भी इसी सप्ताह की शुरुआत में विफलता का सामना करना पड़ा था। एक गड़बड़ी के चलते पीएसएलवी-सी62 रॉकेट और 16 उपग्रह नष्ट हो गए थे। यह पूरे क्षेत्र के प्रक्षेपण प्रदाताओं के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है।
रिकॉर्ड सफलता से अप्रत्याशित झटके तक
ये दोहरी विफलताएं 2025 में चीन के असाधारण प्रदर्शन के बिल्कुल उलट हैं। उस साल देश ने 92 कक्षीय प्रक्षेपण के प्रयास किए और केवल दो विफलताएं हुईं। रिकॉर्ड वाले उस साल में नए प्रक्षेपण यानों की सफल पहली उड़ानें शामिल थीं और चीन ने दिखाया था कि वह अपने लगातार जटिल और महत्वाकांक्षी होते अंतरिक्ष कार्यक्रम का संचालन कर सकता है। अब जनवरी 2026 में 12 घंटे के भीतर देश को दो नुकसान हुए हैं। इससे सवाल उठे हैं कि क्या गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी, तेजी से बढ़ते प्रक्षेपण कार्यक्रम के साथ कदम मिला पाए हैं।
चीन की 2025 की अंतरिक्ष गतिविधियों के व्यापक विश्लेषण के अनुसार, यह साल अंतरिक्ष तक पहुंच को लेकर देश के दृष्टिकोण में बुनियादी बदलाव का प्रतीक था। सरकारी, सैन्य और वाणिज्यिक मिशनों के सहारे पूरे साल 300 से अधिक अंतरिक्ष यान कक्षा में भेजे गए। निजी कंपनियों ने पहले से बड़ी भूमिका निभाई और 16 वाणिज्यिक प्रक्षेपणों के प्रयास किए, जिनमें से अधिकांश सफल रहे। यह एक परिपक्व होते तंत्र को दर्शाता है, जो अब पूरी तरह सरकारी ठेकेदारों की छाया में नहीं है।
परिचालन बढ़ाने की चुनौती
2025 में चीन की प्रक्षेपण गति को “पूरी तरह औद्योगिक” बताया गया था। वेनचांग, जिउक्वान, ताइयुआन और शिचांग से अक्सर मिशनों के बीच केवल कुछ दिनों के अंतराल पर रॉकेट उड़ान भरते थे। ऐसी परिचालन लय के लिए सिर्फ रॉकेट ही नहीं, बल्कि परिष्कृत लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षित कर्मचारी और जमीन पर तेजी से दोबारा तैयारी की क्षमता भी जरूरी होती है। जनवरी 2026 की विफलताएं बताती हैं कि विश्वसनीयता बनाए रखते हुए इस तेज रफ्तार को कायम रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, भले ही चीन का अंतरिक्ष कार्यबल लगातार अधिक अनुभवी हो रहा हो।
2019 से चीन के प्रक्षेपणों की संख्या हर साल बढ़ी है। 2025 में यह रुझान नई ऊंचाई पर पहुंचा और फिलहाल इसके थमने के संकेत कम हैं। उम्मीद है कि देश इस साल पहली बार 100 से अधिक प्रक्षेपण करेगा। CASC का अकेले लक्ष्य 2025 के 73 सरकारी प्रक्षेपणों से बढ़कर 2026 में 100 से अधिक तक पहुंचने का है। वाणिज्यिक प्रक्षेपण भी चीन की कुल गतिविधियों में और इजाफा करेंगे। इनमें लैंडस्पेस का झूचुए-3, स्पेस पायनियर का तियानलोंग-3, आईस्पेस का हाइपरबोला-3, डीप ब्लू एयरोस्पेस का नेबुला-1, गैलेक्टिक एनर्जी का पैलस-1 और ओरिएंस्पेस का ग्रैविटी-2 जैसे नए, संभावित रूप से पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यानों की उड़ानें शामिल हैं।
रणनीतिक संदर्भ: अंतरिक्ष दौड़ और मेगाकॉन्स्टेलेशन
ये विफलताएं चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए खास तौर पर संवेदनशील समय पर हुई हैं। देश अमेरिका के नेतृत्व वाले स्टारलिंक तारामंडल और अन्य वैश्विक उपग्रह नेटवर्कों की बराबरी के लिए कक्षा में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। चीन ने हाल में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के पास सीटीसी-1 और सीटीसी-2 नाम के दो तारामंडलों में करीब 200,000 उपग्रहों को शामिल करने के आवेदन दाखिल किए। चीनी सरकार के समर्थन वाले इन तारामंडलों में से प्रत्येक में 96,714 उपग्रह होंगे, जिन्हें असाधारण रूप से 3,660 कक्षाओं में फैलाया जाएगा।
तुलना के लिए, आज कक्षा में करीब 14,300 सक्रिय उपग्रह हैं, जिनमें से लगभग 9,400 कुछ ही कक्षाओं में काम कर रहे स्पेसएक्स स्टारलिंक के उपग्रह हैं। स्पेसएक्स ने ITU के पास 42,000 तक उपग्रह प्रक्षेपित करने के आवेदन किए हैं। सिक्योर वर्ल्ड फाउंडेशन की विक्टोरिया सैमसन का कहना है कि चीन का विशाल आवेदन कक्षा में स्पेक्ट्रम अधिकार सुरक्षित करने की एक तरह की “जमीन हथियाने की कवायद” हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा प्रक्षेपण क्षमता को देखते हुए इन तैनाती लक्ष्यों को हासिल करना लगभग असंभव लगता है।
सात साल में 200,000 उपग्रह तैनात करने के लिए चीन को हर हफ्ते 500 से अधिक उपग्रह प्रक्षेपित करने होंगे। इसके लिए हर साल सैकड़ों, बल्कि हजारों प्रक्षेपण करने पड़ सकते हैं। यह चीन की प्रक्षेपण क्षमता में वृद्धि के सबसे महत्वाकांक्षी अनुमानों से भी कहीं अधिक है। हालांकि, यह आवेदन मेगाकॉन्स्टेलेशन क्षेत्र में चीन की रणनीतिक मंशा को जरूर उजागर करता है। इसमें खास तौर पर अंतरिक्ष इंटरनेट कंपनियों की रुचि है, जो करोड़ों या दसियों करोड़ उपयोगकर्ताओं वाले बाजारों तक पहुंचना और सूचना के वैश्विक प्रवाह पर नियंत्रण पाना चाहती हैं।
मौजूदा प्रतिस्पर्धी परिदृश्य
वाणिज्यिक और रणनीतिक, दोनों अंतरिक्ष क्षेत्रों में चीन को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना है। जनवरी 2026 की शुरुआत में, इन दोहरी विफलताओं से पहले, चीन ने लॉन्ग मार्च 6ए रॉकेट की मदद से याओगान-50 (01) उपग्रह को असामान्य रूप से अत्यधिक प्रतिगामी कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। इसके बाद लॉन्ग मार्च 8ए ने गुओवांग निम्न पृथ्वी कक्षा मेगाकॉन्स्टेलेशन के लिए नौ उपग्रह ले जाकर उड़ान भरी। उम्मीद है कि इस तारामंडल में अंततः करीब 13,000 उपग्रह होंगे।
गुओवांग परियोजना व्यावसायिक और रणनीतिक, दोनों रूपों में स्टारलिंक को चीन का सीधा जवाब है। अनुमान है कि इन उपग्रहों का द्रव्यमान अपेक्षाकृत अधिक होगा। इससे संकेत मिलता है कि संचार के अलावा नेविगेशन, सुदूर संवेदन और अधिक रणनीतिक इस्तेमाल के लिए अंतरिक्ष स्थिति-जागरूकता जैसे कार्यों के पेलोड भी इनमें हो सकते हैं। अब कक्षा में गुओवांग के 145 परिचालन उपग्रह हैं। इसका संचालक 2027 तक कक्षा में 400 उपग्रह पहुंचाने की योजना बना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और अंतरिक्ष सुरक्षा
अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा सिर्फ व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं है। जनवरी की शुरुआत में चीनी प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेताया था कि वाणिज्यिक उपग्रह तारामंडलों, खासकर स्पेसएक्स के स्टारलिंक का तेजी से और बिना नियमन के विस्तार, वैश्विक कक्षीय स्थिरता के लिए “स्पष्ट सुरक्षा जोखिम” पैदा करता है। बयान में 2021 की घटनाओं का जिक्र किया गया था, जब स्टारलिंक उपग्रहों से बचने के लिए तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन को “एहतियाती टक्कर-परिहार नियंत्रण” करना पड़ा था।
चीन की चेतावनी में टकराव के जोखिमों का मुख्य कारण प्रभावी अंतरराष्ट्रीय नियमों की कमी को बताया गया। प्रतिनिधि ने विशेष रूप से कहा कि “कक्षा नियंत्रण की क्षमता से वंचित विकासशील देशों द्वारा संचालित अंतरिक्ष यानों के लिए... यह निस्संदेह एक बड़ा जोखिम है।” यह कूटनीतिक तनाव ऐसे समय है जब चीन अपने प्रतिद्वंद्वी मेगाकॉन्स्टेलेशन का विस्तार तेज कर रहा है और सरकार समर्थित चिएनफान (जी60) तथा गुओवांग परियोजनाओं की तैनाती बढ़ रही है।
निष्कर्ष
- जनवरी 2026 में चीन को 12 घंटे के भीतर दो अलग-अलग प्रक्षेपण विफलताओं का सामना करना पड़ा: शिजियान-32 उपग्रह ले जा रहा लॉन्ग मार्च 3बी और गैलेक्टिक एनर्जी के वाणिज्यिक सेरेस-2 रॉकेट की पहली उड़ान
- तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण लॉन्ग मार्च 3बी विफल हुआ। अप्रैल 2020 के बाद इस रॉकेट प्रकार का यह पहला पूर्ण नुकसान और करीब 300 प्रक्षेपणों में पूरे लॉन्ग मार्च परिवार की पहली स्पष्ट विफलता है
- शिजियान-32 एक गोपनीय प्रायोगिक पेलोड था, जिसके चीन के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और संभावित रूप से सिग्नल खुफिया कार्यक्रम का हिस्सा होने का अनुमान है
- सेरेस-2 की विफलता में करीब छह वाणिज्यिक उपग्रह नष्ट हुए और यह चीन के निजी एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए झटका है
- इन विफलताओं से पहले 2025 में चीन ने 92 कक्षीय प्रक्षेपण प्रयासों और केवल दो विफलताओं के साथ रिकॉर्ड बनाया था। उस साल नए प्रक्षेपण यानों की पहली उड़ानें भी सफल रहीं
- इन झटकों के बावजूद चीन 2026 में पहली बार 100 से अधिक प्रक्षेपण करने का लक्ष्य रखता है
- दोनों विफलताओं की जांच चल रही है। साझा तकनीकी घटकों के कारण संबंधित प्रक्षेपण यानों पर भी असर पड़ सकता है
- ये झटके चीन की महत्वाकांक्षी मेगाकॉन्स्टेलेशन योजनाओं के बीच आए हैं। चीन ने ITU के पास करीब 200,000 उपग्रहों के लिए आवेदन दाखिल किए हैं
- ये नुकसान औद्योगिक स्तर पर प्रक्षेपण गतिविधियां बढ़ाते हुए विश्वसनीयता कायम रखने की चुनौतियों को उजागर करते हैं






