पूर्वी एशिया में ऐतिहासिक आर्थिक बदलाव
दो दशकों से अधिक समय में पहली बार ताइवान ने प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ दिया है। यह पूर्वी एशिया के आर्थिक शक्ति-संतुलन में एक अहम बदलाव है। यह उलटफेर ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया सुस्त अर्थव्यवस्था और कमजोर होती मुद्रा से जूझ रहा है, जबकि ताइवान अपने सेमीकंडक्टर उद्योग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वैश्विक तेजी से प्रेरित मजबूत विकास लहर पर सवार है। इस घटनाक्रम के साथ 22 वर्षों का वह दौर समाप्त हो गया है, जिसमें दक्षिण कोरिया ने अपने द्वीपीय पड़ोसी पर लगातार आर्थिक बढ़त बनाए रखी थी।
विषय-सूची
दक्षिण कोरिया के अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय तथा बैंक ऑफ कोरिया के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में देश की डॉलर में नाममात्र जीडीपी 1.87 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 0.5 प्रतिशत कम है। इसके परिणामस्वरूप, दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति जीडीपी 36,107 डॉलर रहने का अनुमान है, जो 2024 की तुलना में 116 डॉलर कम है। इसके विपरीत, ताइवान की सांख्यिकी एजेंसी का अनुमान है कि 2025 में उसकी प्रति व्यक्ति जीडीपी 38,748 डॉलर होगी। इस अंतर के साथ 2003 के बाद पहली बार ताइवान दक्षिण कोरिया से आगे निकल गया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट भी इस बदलाव की पुष्टि करती है। आईएमएफ का अनुमान है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में दक्षिण कोरिया की वैश्विक रैंकिंग 2024 के 34वें स्थान से गिरकर 2025 में 37वें स्थान पर आ जाएगी, जबकि ताइवान 38वें से 35वें स्थान पर पहुंच जाएगा। यह बदलाव महज आंकड़ों का उतार-चढ़ाव नहीं है, बल्कि मौजूदा वैश्विक माहौल में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन के बुनियादी अंतर को दर्शाता है।
अलग राहों के पीछे के कारण
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण निर्यात प्रदर्शन और मुद्रा मूल्यांकन की बिल्कुल अलग दिशाएं हैं। दोनों देश बड़े निर्यातक हैं, लेकिन हाल के दिनों में ताइवान ने निर्यात वृद्धि में दक्षिण कोरिया को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसकी बड़ी वजह सेमीकंडक्टर फाउंड्री बाजार में ताइवान का दबदबा है। यह क्षेत्र ताइवान की आर्थिक तेजी की रीढ़ बन गया है।
पिछले वर्ष ताइवान का निर्यात रिकॉर्ड 640.7 अरब डॉलर रहा, जो उससे पिछले वर्ष की तुलना में 34.9 प्रतिशत अधिक है। दक्षिण कोरिया ने भी 709.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड निर्यात का आंकड़ा दर्ज किया, लेकिन उसकी वृद्धि दर कहीं अधिक मामूली रही। ताइवान का निर्यात 165.8 अरब डॉलर बढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया के निर्यात में 26.1 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। इसका मतलब है कि ताइवान का निर्यात मूल्य दक्षिण कोरिया के निर्यात मूल्य के 90.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो महज एक साल पहले 69.5 प्रतिशत था। ताइवान की समग्र अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था के आकार की लगभग आधी है। ऐसे में निर्यात का यह उच्च स्तर उसकी प्रति व्यक्ति संपन्नता को बढ़ाने वाला अहम कारक है।
सेमीकंडक्टर और एआई की तेजी
ताइवान की कामयाबी के केंद्र में उसका सेमीकंडक्टर उद्योग है, जिसका नेतृत्व दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सेवाएं विकसित करने की वैश्विक होड़ ने ताइवान में बनने वाली उन्नत चिपों की मांग को बेहद बढ़ा दिया है। एनवीडिया, एएमडी और अमेजन जैसी अमेरिकी टेक कंपनियां स्थानीय तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाने के लिए द्वीप पर अरबों डॉलर लगा रही हैं और अनुसंधान केंद्र तथा डेटा सुविधाएं स्थापित कर रही हैं।
इस क्षेत्र की मजबूती ने ताइवान को वास्तविक जीडीपी में ठोस वृद्धि दर्ज करने में मदद की है। विश्लेषकों का अनुमान है कि एआई की तेजी के चलते 2025 में ताइवान की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.4 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। अगले वर्ष संभावित मंदी के बावजूद, प्रमुख वैश्विक निवेश बैंकों को उम्मीद है कि ताइवान की वृद्धि औसतन लगभग 4 प्रतिशत रहेगी, जो दक्षिण कोरिया की अनुमानित लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक है।
ताइवान इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के निदेशक गॉर्डन सन ने हाल के वर्षों में ताइवान को मिले विशिष्ट लाभों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक तनाव के कारण आपूर्ति शृंखलाओं में आए बदलाव, महामारी के दौरान डिजिटल परिवर्तन की तेज रफ्तार और उच्च प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग तथा एआई की मांग में लगातार विस्तार से ताइवान को लाभ हुआ है।
दक्षिण कोरिया की आर्थिक चुनौतियां
ताइवान की अर्थव्यवस्था जहां तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दक्षिण कोरिया को एक साथ कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने उसके आर्थिक प्रदर्शन को कमजोर किया है। देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर लगातार चार वर्षों से 3 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। पिछले वर्ष वृद्धि दर घटकर केवल 1 प्रतिशत रह गई, जो 2020 में महामारी के कारण आई गिरावट के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन है।
दक्षिण कोरिया की डॉलर में जीडीपी को नीचे खींचने वाला एक अहम कारक कोरियाई वॉन की कमजोरी है। पिछले वर्ष औसत विनिमय दर उससे पिछले वर्ष की तुलना में 4.3 प्रतिशत कमजोर हुई। मुद्रा के मूल्य में इस गिरावट का मतलब है कि स्थानीय मुद्रा में अर्थव्यवस्था बढ़ने पर भी डॉलर में बदलने पर उसका मूल्य घट जाता है। 2021 से अब तक वॉन में मापी गई जीडीपी लगभग 29 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन इसी अवधि में डॉलर में जीडीपी केवल 7 प्रतिशत बढ़ी।
दक्षिण कोरिया के सामने कुछ ऐसी संरचनात्मक समस्याएं भी हैं, जिन्हें अल्पावधि में दूर करना कठिन है। देश की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है और यहां दुनिया की सबसे कम प्रजनन दरों में से एक है। कामकाजी आबादी में गिरावट से दीर्घकाल में आर्थिक क्षमता को खतरा है। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल, जहाज और मेमोरी चिप के क्षेत्र में देश की पारंपरिक मजबूती को वैश्विक व्यापार की अस्थिरता और तकनीकी ठहराव की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि राजनीतिक अनिश्चितताएं और अमेरिका की शुल्क नीतियों जैसे बाहरी जोखिम दक्षिण कोरियाई निर्यात की संभावनाओं को धुंधला कर रहे हैं। जनसांख्यिकीय और औद्योगिक चुनौतियों से निपटने के लिए तेज संरचनात्मक सुधारों की कमी ने ताइवान की केंद्रित तकनीकी गतिशीलता की तुलना में दक्षिण कोरिया को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान में डाल दिया है।
विनिमय दरों की भूमिका
इन रैंकिंग में मुद्रा का मूल्य निर्णायक भूमिका निभाता है। कोरियाई वॉन जहां काफी कमजोर हुआ है, वहीं नया ताइवानी डॉलर जापानी येन और कोरियाई वॉन की तुलना में बहुत धीमी गति से गिरा है। यह सापेक्ष स्थिरता डॉलर में बदलने पर ताइवान की जीडीपी का मूल्य बनाए रखने में मदद करती है। वॉन की लगातार कमजोरी से दक्षिण कोरिया के लिए कच्चे माल के आयात की लागत बढ़ती है और उसके उत्पादों की कीमत संबंधी प्रतिस्पर्धात्मकता घटती है।
शिनहान बैंक के अर्थशास्त्री पैक सोक-ह्योन ने जीडीपी की गणना पर विनिमय दर के उल्लेखनीय असर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि घरेलू खपत में सुधार की देरी जैसे कारक भी इस स्थिति में योगदान देते हैं, लेकिन डॉलर में जीडीपी के आंकड़ों में गिरावट के पीछे वॉन का अवमूल्यन एक प्रमुख कारण है।
आगे की राह: भविष्य की दिशा
मौजूदा अनुमानों से संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में ताइवान और दक्षिण कोरिया के बीच का अंतर बढ़ने की संभावना है। दक्षिण कोरिया से पहले ताइवान प्रति व्यक्ति जीडीपी के 40,000 डॉलर के प्रतीकात्मक मुकाम तक पहुंच सकता है। चीन गणराज्य का राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग अनुमान लगाता है कि 2026 में ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 40,921 डॉलर होगी। कुछ अनुमानों के अनुसार, 2030 तक ताइवान 50,000 डॉलर के दायरे में पहुंच सकता है।
इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया के 40,000 डॉलर के मुकाम पर बाद में पहुंचने की उम्मीद है। अगर मुद्रा कमजोर बनी रहती है, तो यह 2028 या उसके बाद हो सकता है। आईएमएफ ने शुरुआत में अनुमान लगाया था कि दक्षिण कोरिया 2027 में यह मुकाम हासिल कर लेगा, लेकिन अब उसने इस समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है। यह देरी उस मजबूत विकास गति को बहाल करने में देश के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करती है।
नोमुरा सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री पार्क जंग-वू ने संभावित विकास दरों का गंभीर आकलन पेश किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की आर्थिक विकास क्षमता 2 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है, जबकि ताइवान की विकास क्षमता 3 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना है। अगर ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो दोनों देशों के बीच आय का अंतर लगातार बढ़ता रहेगा।
"प्रति व्यक्ति जीडीपी में यह उलटफेर मुख्य रूप से कमजोर वॉन और सेमीकंडक्टर से जुड़े कुछ विकृत प्रभावों को दर्शाता है, इसलिए इसकी व्याख्या जरूरत से ज्यादा निराशावादी होकर नहीं करनी चाहिए। फिर भी, कोरिया को ताइवान की हालिया गति के पीछे मौजूद नीतिगत समर्थन और कंपनियों की निवेश रणनीतियों का बारीकी से अध्ययन करना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि उनसे क्या सीखा जा सकता है।"
— जू वॉन, हुंडई रिसर्च इंस्टीट्यूट में आर्थिक अनुसंधान के उपनिदेशक
आंकड़ों से आगे: संदर्भ और बारीकियां
प्रति व्यक्ति जीडीपी की रैंकिंग आर्थिक सेहत का एक अहम संकेतक है, लेकिन विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि इसे समृद्धि या जीवन स्तर का एकमात्र पैमाना नहीं मानना चाहिए। प्रति व्यक्ति जीडीपी एक औसत आंकड़ा है, जो आय असमानता को छिपा सकता है और स्थानीय जीवन-यापन की लागत या महंगाई को ध्यान में नहीं रखता।
दिलचस्प बात यह है कि ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी अधिक होने के बावजूद दक्षिण कोरिया और जापान में औसत वेतन ताइवान से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि ताइवान की अर्थव्यवस्था, खासकर तकनीकी क्षेत्र में, भारी संपत्ति तो पैदा कर रही है, लेकिन उसका वितरण अलग हो सकता है। इकनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के निक मारो ने बताया कि क्षेत्र के बाकी हिस्सों की तुलना में ताइवान में वेतन का स्तर अब भी अपेक्षाकृत कम है, जिसका अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, प्रति व्यक्ति रैंकिंग में आबादी का आकार अब भी गणितीय रूप से निर्णायक कारक है। दक्षिण कोरिया की आबादी लगभग 5.17 करोड़ है, जो ताइवान की 2.34 करोड़ आबादी से दोगुने से भी अधिक है। यह बड़ा हर, प्रति व्यक्ति गणना में दक्षिण कोरिया को संरचनात्मक नुकसान में डालता है, भले ही कुल आकार में उसकी अर्थव्यवस्था बड़ी हो। कुल मिलाकर, दक्षिण कोरिया की नाममात्र जीडीपी अब भी ताइवान की जीडीपी से लगभग दोगुनी है।
ताइवान के निवासियों ने यह भी कहा है कि सेमीकंडक्टर की तेजी के लाभ समाज में समान रूप से महसूस नहीं किए जा रहे हैं। कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि तकनीकी उद्योग फल-फूल रहा है, लेकिन सेवा क्षेत्र और औसत वेतन महंगाई के साथ कदम नहीं मिला पाए हैं, जिससे विकास के असंतुलित होने का एहसास पैदा हुआ है। इसी तरह, दक्षिण कोरिया की चुनौतियां भी ऐसी नहीं हैं जिन्हें दूर न किया जा सके। देश के पास अब भी उल्लेखनीय औद्योगिक ताकत और अत्यधिक कुशल कार्यबल है।
निष्कर्ष
प्रति व्यक्ति जीडीपी में ताइवान का दक्षिण कोरिया से आगे निकलना एक ऐतिहासिक घटना है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर और एआई क्षेत्रों के बढ़ते महत्व का संकेत देती है। यह दिखाता है कि ताइवान ने तकनीकी आपूर्ति शृंखला में अपनी स्थिति का लाभ उठाकर तेजी से संपत्ति अर्जित की है। दक्षिण कोरिया के लिए यह बदलाव उसके मौजूदा आर्थिक मॉडल की कमजोरियों और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के असर को लेकर एक चेतावनी है।
- 2003 के बाद पहली बार ताइवान प्रति व्यक्ति जीडीपी में दक्षिण कोरिया से आगे निकल गया है। ताइवान का आंकड़ा लगभग 38,066 डॉलर और दक्षिण कोरिया का 37,430 डॉलर है।
- इस बदलाव के पीछे ताइवान का रिकॉर्ड सेमीकंडक्टर निर्यात और तेजी से बढ़ता एआई क्षेत्र है, जबकि दक्षिण कोरिया की वृद्धि धीमी पड़ रही है और उसकी मुद्रा कमजोर है।
- ताइवान का निर्यात लगभग 35 प्रतिशत बढ़ा, जो दक्षिण कोरिया की निर्यात वृद्धि से काफी अधिक है।
- कोरियाई वॉन का मूल्य 4 प्रतिशत से अधिक गिरा, जिससे दक्षिण कोरिया के आर्थिक उत्पादन का डॉलर में मूल्य कम हो गया।
- अनुमान है कि दक्षिण कोरिया से पहले, 2026 में ताइवान की प्रति व्यक्ति जीडीपी 40,000 डॉलर की सीमा पार कर जाएगी।
- जीडीपी में बढ़त के बावजूद दक्षिण कोरिया में औसत वेतन ताइवान से अधिक है, जो संपत्ति के वितरण में अंतर को दर्शाता है।






