वैश्विक असर वाला बढ़ता प्रदूषण मामला
जमे हुए झींगे, लौंग और ब्रांडेड स्नीकर्स जैसे अलग-अलग उत्पादों के निर्यात में रेडियोधर्मी समस्थानिक सीज़ियम 137 के अंश मिलने के बाद इंडोनेशिया ने आपराधिक जांच शुरू की है। यूरोप और अमेरिका में सबसे पहले सामने आए इन मामलों के कारण उत्पाद वापस मंगाए गए और आयात संबंधी अलर्ट जारी हुए। इसके बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने व्यापक कार्रवाई की। अधिकारियों का कहना है कि मापे गए स्तरों से उपभोक्ताओं को तत्काल स्वास्थ्य जोखिम नहीं था। उनका यह भी कहना है कि इन घटनाओं ने जकार्ता के पश्चिम में स्थित एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र के भीतर और आसपास औद्योगिक निगरानी तथा स्क्रैप धातु और शिपिंग उपकरणों के प्रबंधन की कमजोरियां उजागर कीं।
विषय-सूची
- वैश्विक असर वाला बढ़ता प्रदूषण मामला
- जांचकर्ताओं के अनुसार चिकांडे में क्या हुआ
- हवा में फैली धूल और दूषित कंटेनर
- कितना विकिरण मिला और स्वास्थ्य के लिए इसका क्या अर्थ है
- स्क्रैप धातु में सीज़ियम 137 क्यों मिलता है
- आयातित या घरेलू स्क्रैप पर बहस
- व्यापार पर असर और नियामकों की प्रतिक्रिया
- अमेरिका और यूरोप के निरीक्षकों ने समस्या का पता कैसे लगाया
- मैदान में प्रदूषण की सफाई और नियंत्रण कैसे होता है
- निर्यातकों और आयातकों को अब क्या करना चाहिए
- एक नज़र में
जांच का केंद्र बेंटेन प्रांत का चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र है। जांचकर्ताओं ने प्रदूषण को स्क्रैप धातु गलाने वाली इस्पात निर्माता कंपनी पीटी पीटर मेटल टेक्नोलॉजी से जोड़ा है। सरकारी टास्क फोर्स के अधिकारियों का कहना है कि इस्पात संयंत्र की गतिविधियों से निकले वायुजनित कण संभवतः आसपास की इकाइयों की सतहों पर जम गए, जिनमें पीटी बहारी मकमूर सेजाती द्वारा संचालित झींगा प्रसंस्करण केंद्र भी शामिल है। औद्योगिक क्षेत्र में और उसके आसपास 20 से अधिक कारखानों में प्रदूषण के संकेत मिले। क्षेत्र के नौ कर्मचारियों के संपर्क में आने की पुष्टि हुई और उनका जकार्ता में इलाज किया गया। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र के भीतर सभी दूषित स्थलों को साफ कर दिया गया है।
इस मामले के सुराग बंदरगाहों पर मिली शुरुआती चेतावनियों तक पहुंचते हैं। डच निरीक्षकों ने इंडोनेशिया के शिपिंग कंटेनरों से विकिरण निकलते पाया और दूषित स्नीकर्स के बक्सों की जानकारी दी। अगस्त में, बड़े बंदरगाहों पर पहुंचे कंटेनरों में सीज़ियम 137 मिलने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ जमे हुए झींगों के लिए उपभोक्ता परामर्श जारी किया। बाद की जांच में एक अन्य निर्यातक के लौंग के नमूने में भी इस समस्थानिक की पुष्टि हुई। ये उत्पाद वापस मंगाए गए और संबंधित कंपनियों को अतिरिक्त माल भेजने से तब तक रोक दिया गया, जब तक वे यह साबित न कर दें कि प्रदूषण का स्रोत ठीक कर दिया गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार चिकांडे में क्या हुआ
जांचकर्ताओं ने घटनाओं की एक ऐसी कड़ी बताई है जो स्क्रैप धातु से शुरू होकर सूक्ष्म धूल पर खत्म होती है। सीज़ियम 137 एक मानव-निर्मित रेडियोन्यूक्लाइड है, जो परमाणु विखंडन से बनता है। उद्योग और चिकित्सा में यह आम तौर पर सीलबंद स्रोतों में पाया जाता है, अक्सर सीज़ियम क्लोराइड के रूप में। यदि कोई स्रोत स्क्रैप के प्रवाह में आ जाए और उसे पिघलाया जाए, तो भट्ठी के भीतर यह पदार्थ गैस या महीन कणों में बदल सकता है। ये कण आसपास के उपकरणों और इमारतों पर जम सकते हैं, साथ ही पैकेजों और शिपिंग कंटेनरों की सतहों पर भी बैठ सकते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया है कि यह स्थिति चिकांडे में मिले पैटर्न से मेल खाती है, जहां इस्पात संयंत्र से कुछ ही दूरी पर खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की इकाइयां हैं।
नियंत्रण और सफाई में तेजी लाने के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों ने इस औद्योगिक क्षेत्र को गंभीर घटना क्षेत्र घोषित किया। राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी, सरकारी टास्क फोर्स और आपातकालीन दलों ने क्षेत्र का नक्शा बनाने, सतहों को साफ करने और चिकित्सकीय जांच करने का काम किया। अधिकारियों ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और निर्यातित वस्तुओं की जांच पर भरोसा बनाए रखने के लिए देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी सहित अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर रहा है।
हवा में फैली धूल और दूषित कंटेनर
सबूत बताते हैं कि समस्या का कम-से-कम कुछ हिस्सा केवल माल के भीतर नहीं, बल्कि बक्सों के साथ भी आगे बढ़ा। अमेरिकी जांच में कई शिपिंग कंटेनरों और पैकेजिंग पर विकिरण मिला। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने दूषित स्क्रैप कंटेनरों को फिर से निर्यात करने का आदेश दिया और आगे लोगों के संपर्क में आने से रोकने के लिए स्क्रैप पर नियंत्रण कड़े करने शुरू किए। एक मामले में, जकार्ता के बंदरगाह से स्क्रैप के 14 कंटेनर वापस भेजे गए। फिलीपींस से आए अतिरिक्त कंटेनरों को भी लौटाया जाना था। एक अन्य बंदरगाह पर निरीक्षकों ने अंगोला से आए जिंक पाउडर के आठ कंटेनर रोके, जिनकी जांच में सीज़ियम 137 की पुष्टि हुई। उन कंटेनरों को फिर से निर्यात कर दिया गया। बाद में बताया गया कि अगला कदम तय करने के लिए सरकारों की बातचीत के दौरान वे फिलीपींस के तट से दूर खड़े थे।
सीज़ियम 137 पर सरकारी टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाले इंडोनेशिया के खाद्य मामलों के समन्वय मंत्री ज़ुल्किफ़्ली हसन ने किसी भी उत्पाद के लिए दूषित कंटेनरों के दोबारा इस्तेमाल के जोखिम को लेकर चेतावनी दी।
हसन ने कहा: "अगर उन कंटेनरों का इस्तेमाल झींगा भेजने के लिए किया गया, तो झींगा दूषित हो सकता है। और अगर उनका दोबारा इस्तेमाल दूसरे सामान के लिए किया गया, तो यह खतरनाक है।"
कितना विकिरण मिला और स्वास्थ्य के लिए इसका क्या अर्थ है
अमेरिका के मामलों में मापे गए स्तर इस स्थिति को समझने में मदद करते हैं। इंडोनेशिया में प्रसंस्कृत झींगा की एक खेप के नमूनों में प्रति किलोग्राम 68 बेकरल (Bq/kg) सीज़ियम 137 मिला। बाद में, इंडोनेशिया के एक अलग निर्यातक की लौंग की अमेरिकी जांच में 732.43 Bq/kg मिला। खाद्य सुरक्षा संबंधी फैसलों के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन सीज़ियम 137 के लिए 1,200 Bq/kg का व्युत्पन्न हस्तक्षेप स्तर निर्धारित करता है। मिले स्तर इस सीमा से कम थे और अधिकारियों ने कहा कि इनसे उपभोक्ताओं को तत्काल खतरा नहीं था। फिर भी, नियामकों ने जोर दिया कि दूषित भोजन या सतहों के संपर्क में लंबे समय तक बार-बार आने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।
सीज़ियम 137 का अर्ध-जीवन लगभग 30 वर्ष है। यह भेदक गामा किरणें उत्सर्जित करता है, जिन्हें बंदरगाहों के मॉनिटर और हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों से आसानी से पहचाना जा सकता है। शरीर में यह समस्थानिक पोटैशियम की तरह व्यवहार करता है, इसलिए नरम ऊतकों में फैलता है। बहुत उच्च स्तर पर इसका तीव्र संपर्क खतरनाक हो सकता है, लेकिन इस मामले में चिंता लंबे समय तक कम स्तर के संपर्क को लेकर है। इसी वजह से नियामकों के लिए जांच, सफाई और पैकेजिंग व कंटेनरों को दोबारा दूषित होने से रोकना प्राथमिकताएं हैं।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने सार्वजनिक दिशानिर्देश में दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम को स्पष्ट रूप से बताया।
एजेंसी ने कहा: "लंबे समय तक बार-बार कम खुराक के संपर्क में आने (उदाहरण के लिए, समय के साथ दूषित भोजन या पानी के सेवन से) के बाद चिंता का मुख्य स्वास्थ्य प्रभाव कैंसर का बढ़ा हुआ जोखिम है, जो शरीर की जीवित कोशिकाओं के भीतर डीएनए को नुकसान पहुंचने से होता है।"
स्क्रैप धातु में सीज़ियम 137 क्यों मिलता है
इंडोनेशिया में परमाणु ऊर्जा रिएक्टर या हथियार कार्यक्रम नहीं है। नागरिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सीज़ियम 137 पहुंचने के संभावित स्रोत पुराने चिकित्सा या औद्योगिक उपकरण हैं, जिनमें सीलबंद रेडियोधर्मी स्रोतों का उपयोग होता है। इनमें औद्योगिक गेज, रेडियोग्राफी उपकरण और स्तर या घनत्व मापने वाले मीटर शामिल हैं। जब ऐसा स्रोत नियामकीय नियंत्रण से बाहर होकर स्क्रैप के कारोबार में पहुंच जाता है, तो उसे अनाथ स्रोत कहा जाता है। यदि अनाथ स्रोत को इस्पात की भट्ठी में पिघलाया जाए, तो भट्ठी और आसपास के वातावरण में व्यापक प्रदूषण फैल सकता है और सामान तथा कंटेनरों की सतहों पर ऐसे अवशेष रह सकते हैं जिन्हें जांच में पकड़ा जा सके। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने कहा कि चिकांडे के इस्पात संयंत्र की भट्ठी के अंदर सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया, जो इस सिद्धांत का समर्थन करता है कि रेडियोधर्मी स्क्रैप को पिघलाया गया था।
आयातित या घरेलू स्क्रैप पर बहस
अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए दो संभावित रास्तों की जांच की है कि रेडियोधर्मी पदार्थ संयंत्र में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में कैसे पहुंचा। जांच की एक दिशा आयातित स्क्रैप की ओर इशारा करती है। इंडोनेशियाई निरीक्षकों ने बंदरगाहों पर स्क्रैप के कई दूषित कंटेनर मिलने के बाद उन्हें फिर से निर्यात करने का आदेश दिया था। एक अन्य मत, जिसे संसदीय सुनवाई के दौरान उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समर्थन दिया, यह है कि स्क्रैप देश के भीतर से आया हो सकता है, संभवतः अनुपयोगी चिकित्सा उपकरणों से, और फिर संयंत्र को बेचा गया। अधिकारियों ने कहा कि कंपनी का प्रबंधन चीन लौट गया है, जिससे पूछताछ और दस्तावेजों की समीक्षा मुश्किल हुई है, और पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज किया है। सरकार ने स्क्रैप की खेपों पर नियंत्रण कड़ा किया और औद्योगिक क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों तथा सामान की जांच शुरू की। अधिकारियों ने कहा कि 1,500 से अधिक कर्मचारियों की संपर्क में आने के लिए जांच की गई, नौ की रिपोर्ट सकारात्मक आई और उनका इलाज हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित 20 से अधिक संयंत्रों में सफाई पूरी हो चुकी है और बाकी स्थलों का अनुवर्ती सर्वेक्षण किया जाना है।
व्यापार पर असर और नियामकों की प्रतिक्रिया
खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसका असर तेजी से पड़ा। अमेरिकी नियामकों ने पीटी बहारी मकमूर सेजाती द्वारा प्रसंस्कृत झींगे के लिए आयात अलर्ट जारी किए। बाद में, जांच में सीज़ियम 137 की पुष्टि होने पर पीटी नैचुरल जावा स्पाइस की लौंग की खेप को भी चिह्नित किया गया। खुदरा विक्रेताओं और आयातकों ने प्रभावित उत्पाद वापस मंगाए और उनका निपटान किया। विकिरण के अंश वाले जूतों की खेप जांच के लिए इंडोनेशिया लौटा दी गई। यूरोप में डच अधिकारियों ने कंटेनरों को रोका और दूषित स्नीकर्स की जानकारी दी। इन निष्कर्षों के बाद व्यापक जांच शुरू हुई और बेंटेन के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े शिपिंग कंटेनरों की कड़ी पड़ताल की गई।
भरोसा बहाल करने के लिए अमेरिका ने एक ऐसे अधिकार का उपयोग किया, जिसके तहत वह निर्दिष्ट उत्पादों और क्षेत्रों के लिए आयात प्रमाणन अनिवार्य कर सकता है। इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों से आने वाली झींगा और लौंग की खेपों को अब प्रवेश से पहले रेडियोधर्मी-मुक्त प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। इंडोनेशिया का समुद्री मामलों और मत्स्य मंत्रालय निर्यात कंटेनरों की जांच कर रहा है और अमेरिकी नियामकों के साथ सहमति से प्रमाणपत्र जारी कर रहा है। टास्क फोर्स ने जांच में सकारात्मक पाए गए कारोबारों को लाल सूची में रखा, जिनमें पीटी बहारी मकमूर सेजाती और पीटी नैचुरल जावा स्पाइस शामिल हैं। मान्यता प्राप्त किसी तीसरे पक्ष से सत्यापन मिलने के बाद ही वे फिर से व्यापार कर सकेंगी। जावा और लैंपुंग जैसे क्षेत्रों को पीली सूची में रखकर वहां जांच तेज की गई है।
इंडोनेशिया का कहना है कि कड़ी जांच के साथ अमेरिका को झींगा निर्यात फिर शुरू हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि सैकड़ों कंटेनरों की जांच की गई और सौ से अधिक को रवाना होने की मंजूरी मिली। इंडोनेशियाई झींगे का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है, इसलिए दोनों सरकारें व्यापार जारी रखने और समस्या की पुनरावृत्ति रोकने के लिए काम कर रही हैं। प्रमाणन, बंदरगाहों पर विकिरण की निगरानी और शिपिंग कंटेनरों पर सावधानीपूर्वक नियंत्रण का उद्देश्य दूषित सतहों के उपभोक्ताओं तक पहुंचने का जोखिम कम करना है।
अमेरिका और यूरोप के निरीक्षकों ने समस्या का पता कैसे लगाया
आधुनिक बंदरगाहों पर कंटेनरों के प्रवेश द्वारों से गुजरते समय उनकी जांच के लिए स्थिर और मोबाइल विकिरण संसूचकों का उपयोग किया जाता है। छोटे संकेत आम होते हैं और अक्सर हानिरहित होते हैं, क्योंकि कई पदार्थों से पृष्ठभूमि विकिरण निकलता है। जब अलार्म लगातार बजें या तय सीमा से अधिक संकेत मिले, तो निरीक्षक हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरणों से दूसरी जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर माल या पैकेजिंग के नमूने लेते हैं। अमेरिकी मामलों में निरीक्षकों ने गामा विकिरण का स्रोत कंटेनरों की दीवारों और पैकेजिंग में खोजा, फिर चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित एक प्रसंस्करण केंद्र के जमे हुए झींगों तक पहुंचे। एक अन्य निर्यातक की लौंग के नमूनों को दुकानों तक पहुंचने से पहले रोककर जांचा गया।
अटलांटिक के दूसरी ओर, डच अधिकारियों ने स्नीकर्स ले जा रहे एक कंटेनर में विकिरण पाया। इससे उत्पाद वापस मंगाए गए और जूतों की खेपों की नए सिरे से जांच शुरू हुई। ये अलग-अलग जांच आधुनिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के एक अहम पहलू को दिखाती हैं। दूषित कंटेनर एक माल से दूसरे माल तक जा सकता है। यदि उसे अलग रखकर साफ न किया जाए, तो वह उन वस्तुओं तक भी प्रदूषण के अंश फैला सकता है जो मूल घटना वाले क्षेत्र से कभी गुजरी ही न हों।
मैदान में प्रदूषण की सफाई और नियंत्रण कैसे होता है
इंडोनेशियाई अधिकारियों ने चिकांडे में नियंत्रित क्षेत्र बनाया, ताकि विकिरण का नक्शा तैयार किया जा सके और उसे सुरक्षित स्तर तक घटाया जा सके। राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने पोर्टेबल संसूचकों से क्षेत्र की जांच की, अधिक विकिरण वाले स्थानों को चिह्नित किया और उपयुक्त तरीकों से सतहों की सफाई की। सफाई से निकले कचरे को एक तय प्रक्रिया के तहत संभाला गया और सुरक्षित स्थान पर अस्थायी भंडारण में रखा गया। सरकार ने इस्पात संयंत्र के इलाके को दूषित सामान और उपकरणों के लिए पृथक रखने का स्थान भी घोषित किया, ताकि वे सामान्य आवाजाही में न आएं। कणों को क्षेत्र से बाहर फैलने से रोकने के लिए औद्योगिक परिसर में आने-जाने वाले वाहनों की जांच की गई।
अधिकारियों ने कहा कि सफाई के दौरान अधिक प्रदूषित स्थानों के पास रहने वाले लोगों को दूसरी जगह भेजा गया। स्वास्थ्य टीमों ने निवासियों और कर्मचारियों की जांच की, मापने योग्य संपर्क वाले नौ लोगों की पहचान की और इलाज व अनुवर्ती जांच के बाद उन्हें स्वस्थ घोषित किया। अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित था और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था कायम है। उन्होंने कहा कि देश निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय कर रहा है और जांच जारी रहने तक बंदरगाहों पर कड़े नियंत्रण लागू रहेंगे।
निर्यातकों और आयातकों को अब क्या करना चाहिए
कंपनियां जटिल आपूर्ति श्रृंखला के हर पहलू को नियंत्रित नहीं कर सकतीं, लेकिन व्यावहारिक कदमों से जोखिम घटा सकती हैं। भारी उद्योगों के पास स्थित निर्यातकों को संयंत्र के प्रवेश द्वारों और माल चढ़ाने वाले स्थानों पर नियमित विकिरण जांच करनी चाहिए। आसपास किसी घटना की सूचना मिलने पर पैकेजिंग वाले क्षेत्रों की सतहों से साधारण नमूने लेने की प्रक्रिया भी शुरू करनी चाहिए। कंटेनरों के पहचान नंबर दर्ज रखें और प्रदूषण से जुड़े बक्सों को स्वतंत्र जांच में खरा उतरने तक दोबारा इस्तेमाल न करें। प्रक्रिया में यथासंभव देर से उत्पादों की पैकेजिंग सीलबंद करें और औद्योगिक चिमनियों के पास खुले में भंडारण कम रखें। आपूर्तिकर्ताओं और लॉजिस्टिक्स साझेदारों से पुष्टि लें कि स्क्रैप, पैलेट और कंटेनरों का भंडारण या प्रसंस्करण प्रभावित क्षेत्र में नहीं हुआ है। ऐसे रिकॉर्ड रखें जिनसे माल के स्रोत का जल्दी पता लगाया जा सके। कर्मचारियों को विकिरण अलार्म की अप्रत्याशित आवाज या रेडियोधर्मी स्रोत का संकेत देने वाले असामान्य लेबल पहचानने और उनकी सूचना देने का प्रशिक्षण दें। यदि किसी चीज की जांच सकारात्मक आए, तो उसे अलग रखें, राष्ट्रीय नियामकों को सूचित करें और सफाई या निपटान से पहले निर्देश मांगें।
एक नज़र में
- झींगा, लौंग और स्नीकर्स समेत निर्यातित वस्तुओं में सीज़ियम 137 मिलने के बाद इंडोनेशिया की पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज किया।
- जांचकर्ताओं ने प्रदूषण का स्रोत चिकांडे औद्योगिक क्षेत्र के उस इस्पात संयंत्र को बताया, जहां स्क्रैप धातु गलाया जाता है।
- क्षेत्र में और उसके आसपास 20 से अधिक इकाइयों की जांच में प्रदूषण मिला और उनकी सफाई की गई।
- नौ कर्मचारियों या निवासियों के संपर्क में आने की पुष्टि हुई और उनका इलाज किया गया।
- प्रदूषण पैकेजिंग और शिपिंग कंटेनरों तक पहुंचा, यही एक अहम वजह थी कि अलग-अलग श्रेणियों के सामान प्रभावित हुए।
- अमेरिकी जांच में झींगे में 68 Bq/kg और लौंग में 732.43 Bq/kg सीज़ियम 137 मिला। दोनों स्तर एफडीए की 1,200 Bq/kg हस्तक्षेप सीमा से कम थे।
- अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य को तत्काल खतरा नहीं था, लेकिन वे लंबे समय तक बार-बार संपर्क में आने को लेकर आगाह करते हैं।
- इंडोनेशिया ने स्क्रैप पर नियंत्रण कड़ा किया और दूषित स्क्रैप कंटेनरों को फिर से निर्यात करने का आदेश दिया।
- अमेरिका अब इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों से आने वाले झींगे और लौंग के लिए रेडियोधर्मी-मुक्त प्रमाणपत्र मांगता है। लाल सूची वाली कंपनियों की अतिरिक्त जांच होती है।
- अमेरिका को झींगा निर्यात फिर शुरू हो गया है। सैकड़ों कंटेनरों की जांच हुई और सौ से अधिक को मंजूरी मिली।
- इंडोनेशिया आईएईए और अमेरिकी एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है। समस्या की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी जारी रखने की योजना है।






