शेल की खरीद और इसका महत्व
ऊर्जा और खनिज संसाधन उप मंत्री यूलियोट तंजुंग के अनुसार, शेल ने इंडोनेशिया की सरकारी ऊर्जा कंपनी पर्टामिना से 1,00,000 बैरल पेट्रोल खरीदने पर सहमति जताई है। यह सौदा ऐसे कई महीनों के बाद हुआ है, जब इंडोनेशिया भर के निजी ईंधन स्टेशनों पर पेट्रोल के कुछ ग्रेड उपलब्ध नहीं थे। सरकार ने इस साल निजी खुदरा विक्रेताओं के आयात कोटे सीमित कर दिए थे और फिर कंपनियों को अतिरिक्त आपूर्ति पर्टामिना के माध्यम से जुटाने का निर्देश दिया। इस बदलाव के चलते शेल, बीपी और वीवो के कई आउटलेट पर पेट्रोल की कमी हो गई, जबकि डीजल उपलब्ध रहा। अधिकारियों का कहना है कि अन्य निजी कंपनियों को बिक्री की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है। इसमें बीपी की ओर से इसी तरह 1,00,000 बैरल की खरीद और वीवो के लिए लगभग इतनी ही मात्रा की खेप शामिल है।
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इस व्यवस्था का उद्देश्य आयात के लिए एकल माध्यम बनाना है। इसके तहत पर्टामिना बेस पेट्रोल खरीदेगी, जिसे निजी कंपनियां अपने ब्रांड के उत्पादों की निर्धारित विशेषताओं के मुताबिक मिलाकर तैयार कर सकेंगी। शेल ने कहा है कि वह खरीद और गुणवत्ता के मानकों को बनाए रखते हुए सामान्य वितरण बहाल करना चाहती है। अगस्त के आखिर से कमी फैलने के बाद कंपनी ने साल की शुरुआत में ही कामकाज के घंटे और कर्मचारियों की संख्या में बदलाव किया था। यह खरीद और इसके पीछे की व्यापक व्यवस्था निजी पंपों को फिर से भरने तथा उन स्टेशनों पर लंबी कतारें घटाने की दिशा में ठोस कदम है, जहां कुछ समय के लिए पेट्रोल खत्म हो गया था।
नीतिगत बदलावों ने कैसे तैयार की जमीन
इंडोनेशिया ने 2004 में पर्टामिना का कानूनी एकाधिकार समाप्त कर दिया था, लेकिन खुदरा बिक्री और आयात में सरकारी कंपनी अब भी प्रमुख है। इस साल भंडार में असंतुलन रोकने के लिए सरकार ने निजी खुदरा विक्रेताओं के आयात को पिछले वर्षों की बिक्री से जुड़े स्तर तक सीमित किया। बाद में पर्टामिना के जरिए अधिक पेट्रोल मंगाने की अनुमति देकर इस पाबंदी में ढील दी गई। ऊर्जा अधिकारियों ने कहा कि इसका मकसद ईंधन की स्थिर आपूर्ति और लोगों की पहुंच सुनिश्चित करना है, साथ ही निजी कंपनियों को बिना सब्सिडी वाला पेट्रोल हासिल करने का रास्ता देना भी है। प्रतिस्पर्धा नियामक ने चेतावनी दी थी कि सख्त सीमाएं उपभोक्ताओं के विकल्प घटा सकती हैं और बाजार में पहले से मजबूत कंपनी को फायदा पहुंचा सकती हैं। इसी वजह से अधिकारियों ने साल खत्म होने से पहले अतिरिक्त आपूर्ति का रास्ता खोला।
सरकारी ब्रीफिंग में ऊर्जा मंत्री बालील लहादालिया ने बताया कि पर्टामिना बेस पेट्रोल खरीदेगी, जिसे निजी कंपनियां अपने ब्रांड और ग्रेड की जरूरतें पूरी करने के लिए खुद मिलाकर तैयार कर सकेंगी।
बालील लहादालिया ने कहा कि पर्टामिना कंपनियों को बिना एडिटिव मिलाया हुआ बेस ईंधन देगी, ताकि निजी कंपनियां खुद उसमें मिश्रण कर सकें।
अधिकारियों ने राष्ट्रीय आयात योजना में उपलब्ध अप्रयुक्त गुंजाइश का भी जिक्र किया। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, हाल के महीनों में पर्टामिना की डाउनस्ट्रीम इकाई के पास लगभग 75.2 लाख किलोलीटर अप्रयुक्त आयात कोटा उपलब्ध था, जिसका इस्तेमाल निजी ब्रांडों को ईंधन देने के लिए किया जा सकता था। इसमें से कुछ मात्रा से साल के अंत तक निजी खुदरा विक्रेताओं की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि बीपी को आपूर्ति के लिए अक्टूबर के आखिर में व्यवस्था की गई थी और वीवो ने भी खेपें ली हैं। शेल की 1,00,000 बैरल की खरीद इन कदमों के बाद हुई है। उप मंत्री ने समझौते और तय डिलीवरी स्थल तक परिवहन की पुष्टि की।
गुणवत्ता की चिंताएं, इथेनॉल की मात्रा और मानकों का महत्व
तकनीकी मानकों और दस्तावेजों से जुड़ी दिक्कतों के कारण कई निजी खुदरा विक्रेता आयातित खेपों के शुरुआती प्रस्तावों पर सहमत नहीं हुए। वीवो ने पहले 1,00,000 बैरल की खेप का एक हिस्सा लेने पर सहमति जताई, लेकिन जांच में पेट्रोल में लगभग 3.5 प्रतिशत इथेनॉल मिलने के बाद वह पीछे हट गया। यह मात्रा पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की इंडोनेशिया की नियामकीय अधिकतम सीमा से कम थी, लेकिन कुछ निजी ब्रांडों के प्रीमियम ग्रेड उत्पाद मानकों से मेल नहीं खाती थी। बाद में कंपनी को लगभग 1,00,000 बैरल की अलग खेप मिली। बीपी ने प्रस्तावित खेप के लिए उद्गम प्रमाणपत्र मांगा, ताकि पुष्टि हो सके कि ईंधन किसी प्रतिबंधित उत्पादक से नहीं आया है। इन सवालों के चलते शुरुआती भंडार भरने की प्रक्रिया धीमी हुई, लेकिन बाद के सौदों की शर्तें स्पष्ट करने में मदद मिली।
सरकार की व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती है कि पर्टामिना तैयार ब्रांडेड उत्पादों के बजाय बेस पेट्रोल आयात करे। बेस पेट्रोल ऐसा परिष्कृत ईंधन है जो खुदरा विक्रेता के अपने विशेष एडिटिव मिलाने से पहले तय ऑक्टेन स्तर (उदाहरण के लिए RON 92) पर खरा उतरता है। एडिटिव में इंजेक्टर साफ रखने वाले डिटर्जेंट, जंग से बचाने वाले पदार्थ या घर्षण कम करने वाले तत्व शामिल हो सकते हैं। उत्पाद की पहचान के लिए हर ब्रांड के रंग या डाई संबंधी अलग मानक भी हो सकते हैं। बिना एडिटिव वाला बेस ईंधन देकर पर्टामिना निजी कंपनियों को उसे अपने ब्रांड के मानकों के अनुसार मिलाने और फिर अपने उत्पाद के रूप में बेचने की अनुमति देती है।
ग्राहकों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण अहम बना हुआ है। अधिकारियों ने कहा है कि निजी कंपनियों को दी जाने वाली खेपों की संयुक्त जांच होती है। डिलीवरी से पहले एक स्वतंत्र सर्वेक्षक मात्रा और प्रमुख मानकों की जांच करता है। इस प्रक्रिया से उन चिंताओं का समाधान करने में मदद मिलती है, जो इस साल की शुरुआत में पर्टामिना के खिलाफ भ्रष्टाचार जांच के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सार्वजनिक बहस के दौरान सामने आई थीं। पर्टामिना ने किसी भी गलत काम से इनकार किया और अधिक पारदर्शिता का वादा किया। निजी ब्रांड, जिनकी वृद्धि लगातार अच्छी गुणवत्ता वाले ईंधन पर निर्भर करती है, ग्राहकों को आश्वस्त करने के लिए जांच और स्पष्ट दस्तावेजों पर जोर दे रहे हैं।
मांग कैसे बदली और निजी स्टेशनों पर पेट्रोल क्यों खत्म हुआ
2025 में निजी स्टेशनों पर मांग बढ़ी, क्योंकि अधिक वाहन चालकों ने शेल, बीपी, वीवो और अन्य कंपनियों से बिना सब्सिडी वाला पेट्रोल लेना शुरू किया। पर्टामिना के 92 ऑक्टेन उत्पाद में कम ग्रेड के घटक मिलाने के आरोपों के बाद यह रुझान और तेज हुआ। कंपनी ने इन आरोपों को खारिज किया। पर्टामिना के स्टेशनों पर सब्सिडी वाले पेट्रोल की खरीद के लिए क्यूआर कोड पंजीकरण की नई जरूरतों ने भी कुछ वाहन चालकों को निजी ब्रांडों की ओर मोड़ा, जो ऊंचे ऑक्टेन ग्रेड पर ध्यान देते हैं। हालांकि, निजी खुदरा विक्रेताओं के आयात को पिछले साल की बिक्री से 10 प्रतिशत अधिक तक सीमित किया गया था। मांग उम्मीद से तेजी से बढ़ी, जिससे कुछ कंपनियों का कोटा साल खत्म होने से काफी पहले ही पूरा हो गया और वे अपने स्तर पर अतिरिक्त खेप नहीं मंगा सकीं।
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, साल के मध्य तक बिना सब्सिडी वाले ग्रेड की बिक्री में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निजी कंपनियों की इन ग्रेडों की सालाना बिक्री में लगभग 91 प्रतिशत उछाल का अनुमान था। बिना सब्सिडी वाले पेट्रोल बाजार में पर्टामिना की हिस्सेदारी घटकर करीब 85 प्रतिशत रह गई, जो 2024 में लगभग 89 प्रतिशत थी। भंडार घटने पर निजी खुदरा विक्रेताओं ने जून में आयात की अतिरिक्त गुंजाइश मांगी। मंत्रालय ने जब पर्टामिना के जरिए आयात का रास्ता खोला, तो खेपें आने लगीं, लेकिन निजी स्टेशनों पर अस्थायी रूप से पेट्रोल खत्म होने से रोकने के लिए यह रफ्तार पर्याप्त नहीं थी। पेट्रोल की आपूर्ति बहाल होने का इंतजार करते हुए कुछ जगहों पर कई दिनों तक केवल डीजल बेचा गया।
1,00,000 बैरल का वाहन चालकों के लिए क्या मतलब है
एक लाख बैरल में लगभग 1.59 करोड़ लीटर पेट्रोल होता है (1 बैरल में 159 लीटर होते हैं)। इंडोनेशिया में आम यात्री कार के टैंक में एक बार में 40 से 50 लीटर ईंधन आता है। इसलिए शेल जितनी मात्रा खरीद रही है, वितरण के बाद उससे कई लाख बार टैंक भरने की जरूरत पूरी हो सकती है। जिन स्टेशनों पर कुछ ग्रेड का पेट्रोल खत्म हो गया था, उनके लिए यह एक उल्लेखनीय राहत है। इससे पूरे निजी खुदरा तंत्र, जो कई शहरों में फैला है, की आपूर्ति अकेले स्थिर नहीं होगी, लेकिन सबसे गंभीर कमी घटेगी और अतिरिक्त खेपों के आने तक समय मिलेगा।
समानांतर आयात से पहले ही मदद मिली है। पर्टामिना के जरिए 1,00,000 बैरल खरीदने के बाद बीपी ने अपना भंडार फिर से भरा। शुरुआती मानक संबंधी विवादों के बाद वीवो ने भी लगभग इतनी ही मात्रा की नई खेपें लेना शुरू कर दिया है। खेपों के अलग-अलग समय पर पहुंचने से निजी स्टेशनों का भंडार धीरे-धीरे बहाल होना चाहिए। अगस्त के आखिर से जिन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने के नोटिस लगे हैं, वहां फिर से पेट्रोल उपलब्ध हो सकेगा। हर ग्रेड की उपलब्धता ब्रांड और स्थान के अनुसार अलग होगी, क्योंकि हर कंपनी अलग उत्पादों और क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है।
निकट अवधि में आपूर्ति का परिदृश्य
ऊर्जा अधिकारियों का कहना है कि निजी कंपनियां अपनी मांग की मात्रा पर्टामिना की खुदरा इकाई को बताती हैं। इसके बाद यह इकाई तय तकनीकी मानकों के अनुरूप खेपों की व्यवस्था करती है। लक्ष्य है कि इंडोनेशियाई बंदरगाहों पर पहुंचने के कुछ ही दिनों के भीतर ईंधन निजी नेटवर्क तक पहुंच जाए। मिश्रण की प्रक्रिया सरल है। पर्टामिना तय ऑक्टेन स्तर वाला बिना एडिटिव का बेस पेट्रोल देती है, निजी ब्रांड उसमें अपने डिटर्जेंट और प्रदर्शन बढ़ाने वाले मिश्रण डालते हैं और इससे तैयार उत्पाद पंप पर ग्राहकों की अपेक्षाओं के अनुरूप होता है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रीय ईंधन भंडार की स्थिति अब भी मजबूत है। पर्टामिना ने कहा है कि उसके पास पेट्रोल की मांग के लगभग 18 से 21 दिनों के लिए भंडार है। इससे निजी खुदरा विक्रेताओं के कुछ इलाकों में आपूर्ति बाधित होने पर भी व्यापक बाजार सुरक्षित रहता है। अब मुख्य जोखिम समन्वय का है। खेपों को समय पर पहुंचना, संयुक्त जांच में खरा उतरना और खुदरा केंद्रों तक कुशलता से भेजा जाना जरूरी है। सरकार ने एकल माध्यम वाली व्यवस्था को साल के अंत में सीमित आयात कोटे के लिए होड़ से बचते हुए आपूर्ति स्थिर बनाए रखने का तरीका बताया है।
इस बहस में प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं भी शामिल हैं। इंडोनेशिया के प्रतिस्पर्धा नियामक ने चेतावनी दी है कि निजी आयात पर सख्त सीमाएं उपभोक्ताओं के विकल्प घटाती हैं और पर्टामिना की बड़ी बाजार हिस्सेदारी को और मजबूत कर सकती हैं। नीति निर्माता इसके जवाब में कहते हैं कि मौजूदा व्यवस्था अप्रत्याशित मांग और दस्तावेजी दिक्कतों के बीच एक व्यावहारिक कदम है और निजी कंपनियों को अब पर्याप्त मात्रा में ईंधन हासिल करने का कारगर रास्ता मिल गया है। शेल की 1,00,000 बैरल की खरीद दिखाती है कि शर्तें तय होने और जांच पर पहले से सहमति बनने पर यह व्यवस्था तेजी से ईंधन पहुंचा सकती है।
मुख्य बातें
- निजी स्टेशनों पर कमी घटाने के लिए शेल ने पर्टामिना से 1,00,000 बैरल पेट्रोल खरीदने पर सहमति जताई।
- इंडोनेशिया ने निजी आयात कोटे सीमित किए, फिर कंपनियों के लिए पर्टामिना के जरिए आयात का रास्ता खोला।
- बीपी ने अक्टूबर के आखिर में 1,00,000 बैरल खरीदे। शुरुआती जांच संबंधी विवादों के बाद वीवो भी ऐसी ही खेपें ले रहा है।
- सरकार बिना एडिटिव वाला बेस पेट्रोल दे रही है, ताकि निजी ब्रांड खुद उसमें मिश्रण कर सकें।
- अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्यक्रम के लिए पर्टामिना के पास लगभग 75.2 लाख किलोलीटर अप्रयुक्त आयात कोटा उपलब्ध था।
- 2025 में निजी मांग तेजी से बढ़ी। बिना सब्सिडी वाली बिक्री में लगभग 19 प्रतिशत वृद्धि हुई और निजी कंपनियों की बिक्री करीब 91 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
- इथेनॉल की मात्रा और दस्तावेजों सहित मानकों से जुड़े सवालों के कारण कुछ शुरुआती खेपों में देरी हुई।
- पर्टामिना के अनुसार, देश के पास 18 से 21 दिनों के लिए पेट्रोल भंडार है। निजी नेटवर्क का भंडार चरणबद्ध तरीके से फिर भरा जा रहा है।






