थाईलैंड के नए शराब कानून में क्या बदला
थाईलैंड ने शराब पीने वालों को सतर्क कर दिया है। शराब नियंत्रण अधिनियम (संशोधन संख्या 2) बी.ई. 2568 (2025) 8 नवंबर को लागू हुआ। इसके तहत शराब पीने के समय, जुर्माने के दायरे में आने वालों और मादक पेय पदार्थों के विपणन के नियम सख्त किए गए हैं। बड़े पैमाने पर पहली बार, प्रतिबंधित समय या निषिद्ध स्थानों पर शराब पीने या परोसे जाने पर लोगों को जुर्माना भरना पड़ सकता है। जुर्माना 10,000 बाट तक हो सकता है। इस सुधार के तहत अब सिर्फ विक्रेताओं को ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
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देश में दशकों से दोपहर के समय शराब की खुदरा बिक्री पर पाबंदी लागू है। ज्यादातर दुकानों को दोपहर 2 बजे से 5 बजे के बीच शराब बेचने की अनुमति नहीं है। नया तरीका इससे आगे जाता है: प्रतिबंधित समय शुरू होने के बाद भी पीते रहने पर लोगों को दंडित किया जा सकता है, भले ही शराब उस समय से ठीक पहले खरीदी गई हो। इस कानून में थाईलैंड के अब तक के कुछ सबसे कड़े विपणन प्रतिबंध भी शामिल हैं। मशहूर हस्तियों और इन्फ्लुएंसर्स के प्रचार पर रोक है और शराब के विज्ञापनों में सिर्फ तथ्यात्मक जानकारी दी जा सकती है।
इसमें कुछ छूट भी हैं। मनोरंजन स्थल अधिनियम 1966 के तहत आने वाले लाइसेंस प्राप्त मनोरंजन स्थल, उचित लाइसेंस वाले होटल, प्रमाणित पर्यटन प्रतिष्ठान और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के लाउंज अपनी तय अनुमतियों के तहत शराब परोस सकते हैं। हालांकि, इन श्रेणियों में न आने वाले कई रेस्तरां को चिंता है कि नियमों की सख्त व्याख्या से दोपहर और देर रात का कारोबार प्रभावित होगा।
कब और कहां शराब पीने पर पाबंदी है
थाईलैंड में ज्यादातर दुकानों के लिए शराब बेचने का कानूनी समय 11:00 से 14:00 और 17:00 से 24:00 बजे तक है। इन समयावधियों के बाहर ज्यादातर दुकानों और सुपरमार्केट में शराब खरीदने पर पाबंदी है। संशोधन के तहत, प्रतिबंधित समय में शराब पीने या परोसे जाने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून में बताए गए निषिद्ध स्थानों पर शराब पीने वालों पर भी जुर्माना हो सकता है। लाइसेंस प्राप्त मनोरंजन स्थलों, होटलों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के यात्री क्षेत्रों जैसे छूट प्राप्त परिसरों में उनके परमिट के अनुसार शराब परोसी जा सकती है।
दोपहर का समय और आधी रात की सीमा
दोपहर 14:00 से 17:00 बजे तक की अवधि रोजमर्रा के खरीदारों के लिए सबसे स्पष्ट पाबंदी बनी हुई है। नए नियमों के तहत इस समय-सीमा से ठीक पहले और बाद के मिनट भी अहम हैं। यदि कोई ग्राहक 14:00 बजे से पहले पेय मंगाता है और 14:00 बजे के बाद भी पीता रहता है, तो इसे नियम का उल्लंघन माना जा सकता है। ज्यादातर दुकानों पर आधी रात की सीमा के साथ भी ऐसा ही जोखिम है। छूट प्राप्त परिसरों के बाहर 24:00 बजे के बाद देर रात शराब पीने पर भी जुर्माना लग सकता है।
निषिद्ध स्थान
यह कानून उन जगहों पर शराब पीने पर भी रोक लगाता है जहां इसकी मनाही है। इन स्थानों की सूची थाई नियमों में तय है और इसमें परिवहन के साधन तथा कुछ सार्वजनिक स्थान शामिल हैं। हाल के नियम बदलावों के तहत ट्रेनों में शराब खरीदना, रखना या पीना गैरकानूनी हो गया है। ऐसे स्थानों या अन्य प्रतिबंधित जगहों पर शराब पीने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है, भले ही दिन का समय अन्यथा कानूनी हो।
इन सीमाओं से उन आगंतुकों को भ्रम हो सकता है जो मानते हैं कि रेस्तरां या कैफे में शराब पीना हमेशा सुरक्षित है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि प्रतिबंधित समय में रेस्तरां की नीति के बारे में कर्मचारियों से पूछें और आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय तय समय-सीमा से पहले शराब पीना बंद कर दें।
विज्ञापनों पर सख्ती और कंपनियों पर जुर्माना
इस संशोधन का निशाना शराब के विपणन के आधुनिक तरीके हैं। अधिकारियों ने ‘विपणन संचार’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर इसमें जानकारी को प्रचारित, प्रस्तुत या प्रसारित करने के लगभग किसी भी ऐसे काम को शामिल किया है जिससे लोग शराब पीने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इसमें सीधे विज्ञापन, जनसंपर्क, बिक्री प्रचार, प्रायोजन, कार्यक्रम और गैर-मादक उत्पादों पर ब्रांड नाम या प्रतीकों का इस्तेमाल भी शामिल है, यदि प्रस्तुति को शराब के ब्रांड के प्रचार के रूप में समझा जा सकता हो। प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों में सिर्फ तथ्यात्मक जानकारी या मंत्रालय के नियमों के तहत अनुमत जनहित की जानकारी दी जा सकती है।
इन्फ्लुएंसर्स की पोस्ट और मशहूर हस्तियों के प्रचार पर रोक है। ऐसे ब्रांड-निर्माण अभियानों पर भी प्रतिबंध है जिनमें सामाजिक या जनहित गतिविधियों का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि शराब पीने को बढ़ावा मिले। इस तरीके का उद्देश्य उन खामियों को बंद करना है जिनके जरिए कंपनियां बोतल या गिलास दिखाए बिना अपने शराब ब्रांड को दान कार्यक्रमों या जीवनशैली से जुड़ी सामग्री के साथ जोड़ती हैं।
कारोबारियों पर कितना भारी जुर्माना
नए विपणन और प्रचार नियमों का उल्लंघन करने वाले उत्पादकों, आयातकों और विक्रेताओं पर 500,000 बाट तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों का पालन करने तक रोजाना 50,000 बाट तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है। गंभीर मामलों में प्रवर्तन अधिकारी अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद करने का आदेश दे सकते हैं, अन्य अधिकारियों को सूचित कर सकते हैं और आबकारी कर अधिनियम के तहत लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की सिफारिश कर सकते हैं। इसका उद्देश्य नियमों के उल्लंघन की लागत बढ़ाना है, ताकि बड़ी कंपनियां जुर्माने को कारोबार के नियमित खर्च की तरह न लें।
जनस्वास्थ्य के लक्ष्य और प्रवर्तन के तरीके
अधिकारियों का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य अत्यधिक शराब पीने और उससे होने वाले नुकसान, जिनमें देर रात अव्यवस्था और चोटें शामिल हैं, को कम करना है। उपभोक्ताओं को भी जवाबदेह बनाने का मकसद उन परिसरों में नियमों का पालन बढ़ाना है जो प्रतिबंधित समय में भी शराब परोसने की कोशिश करते हैं। कानून यह भी स्पष्ट करता है कि विक्रेता और शराब बेचने से पहले पहचान-पत्र देख सकते हैं और ग्राहक के नशे की स्थिति का आकलन कर सकते हैं। रोग नियंत्रण विभाग से नशे की स्थिति का आकलन करने के मानदंड और विक्रेताओं के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों की अधिसूचना जारी करने की उम्मीद है।
इस संशोधन से उम्र की पुष्टि करने वाली वेंडिंग मशीनों के इस्तेमाल का रास्ता खुलता है। विक्रेता ऐसी मशीनों के जरिए शराब बेच सकेंगे जो खरीदार की जानकारी की पुष्टि करें और शराब नियंत्रण समिति की तय शर्तें पूरी करें। समिति और संबंधित मंत्रालयों के पास कानून लागू होने की तारीख से विस्तृत नियम जारी करने के लिए एक साल है। ये नियम तय करेंगे कि ये प्रणालियां व्यवहार में कैसे काम करेंगी।
प्रवर्तन कौन करेगा
नियम लागू कराने की जिम्मेदारी आम तौर पर जनस्वास्थ्य अधिकारियों, आबकारी अधिकारियों और पुलिस की होती है। ये अधिकारी कारोबारों का निरीक्षण कर सकते हैं, विज्ञापनों और प्रचार की समीक्षा कर सकते हैं और जुर्माना लगा सकते हैं। प्रतिबंधित समय में या निषिद्ध स्थानों पर शराब पीते पाए गए लोगों पर मौके पर ही जुर्माना लगाया जा सकता है। रसीदों और समय-मुद्राओं से यह दिखाने में मदद मिल सकती है कि पेय कब खरीदा गया था, लेकिन तय समय के बाद शराब पीते रहने पर नए नियमों के तहत फिर भी जुर्माना लग सकता है। आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को दोपहर के प्रतिबंधित समय और दुकानें बंद होने के वक्त अधिक जांच की उम्मीद रखनी चाहिए।
जमीनी स्तर पर कारोबारियों की प्रतिक्रिया
रेस्तरां और रात्रिकालीन मनोरंजन कारोबार चलाने वालों का कहना है कि नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा, इसे लेकर अनिश्चितता है। व्यस्त इलाकों के मालिकों को दोपहर की बिक्री में तेज गिरावट और समय-सीमा से अनजान ग्राहकों के साथ टकराव की आशंका है। कुछ लोगों को डर है कि दिशानिर्देश स्पष्ट न हुए तो नीति के कारण चुनिंदा ढंग से नियम लागू करने की गुंजाइश पैदा हो सकती है।
थाई रेस्तरां संघ के अध्यक्ष चानोन कोएतचारोएन ने कहा कि इस बदलाव का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा और इससे उन प्रतिष्ठानों को नुकसान होगा जिन्हें छूट नहीं मिली है। समय-सीमा के बाद नियम कैसे लागू होगा, यह समझाने के लिए उन्होंने एक सरल उदाहरण दिया।






