थाई ई-कॉमर्स के नेता कड़े नियम क्यों चाहते हैं
थाईलैंड में ई-कॉमर्स के नेता सरकार से ऑनलाइन बिकने वाले सस्ते आयातित सामान पर नियंत्रण कड़ा करने की अपील कर रहे हैं। वे ऐसा नियम चाहते हैं जो डिजिटल मार्केटप्लेस पर 100 डॉलर से कम कीमत वाले विदेशी उत्पादों की बिक्री रोक दे। वे एक राष्ट्रीय डिजिटल सीमा शुल्क प्रणाली भी चाहते हैं, जो प्रमुख प्लेटफॉर्म से सीधे जुड़ी हो, ताकि खरीदारी के समय करों और शुल्कों की गणना और भुगतान किया जा सके। इसका मकसद स्थानीय उत्पादकों की रक्षा करना, उत्पाद मानकों को बेहतर बनाना और खरीदारों के लिए सीमा शुल्क को अनुमानित रखना है।
विषय-सूची
- थाई ई-कॉमर्स के नेता कड़े नियम क्यों चाहते हैं
- नेताओं के प्रस्ताव क्या हैं
- इंडोनेशिया की तर्ज पर ऑनलाइन बिक्री के लिए 100 डॉलर की न्यूनतम कीमत
- चेकआउट पर कर और एकीकृत डिजिटल सीमा शुल्क संपर्क
- प्लेटफॉर्म का आचरण, अपने ब्रांड और भुगतान प्रणालियां
- कम मूल्य के आयात पर नया शुल्क कैसे काम करेगा
- VAT और आयात शुल्क की व्याख्या
- मुक्त व्यापार क्षेत्र और नियामक तालमेल
- थाई नीति-निर्माताओं के लिए इंडोनेशिया क्यों अहम है
- उपभोक्ताओं और छोटे विक्रेताओं के लिए क्या दांव पर है
- तेजी से बढ़ा बाजार अब सख्त नियमों के दौर में
- अनुचित व्यवहार पर नजर रख रहे प्रतिस्पर्धा नियामक
- प्लेटफॉर्मों के लिए डेटा और पंजीकरण संबंधी दायित्व
- थाईलैंड में सामान बेचने वाले कारोबारों को अभी क्या करना चाहिए
- मुख्य बातें
यह पहल सीमा शुल्क विभाग की उस योजना के साथ आई है, जिसके तहत 1 जनवरी से 1,500 बाट से कम मूल्य वाले पार्सल पर आयात शुल्क लगना शुरू होगा। कम मूल्य की खेपें अक्सर शुल्क दिए बिना देश में आ जाती थीं, जिसका कारण निगरानी का बंटा हुआ ढांचा था। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि इस खामी को दूर करने से कर व्यवस्था में निष्पक्षता बढ़ेगी, थाई ब्रांडों और कारखानों को समर्थन मिलेगा और नियमों का पालन करने वाले विक्रेताओं को नुकसान पहुंचाने वाले बेहद सस्ते सामान की बाढ़ पर अंकुश लगेगा।
इस पहल का समर्थन करने वालों में थाई ई-कॉमर्स एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष पवूत पोंगवितायापानु शामिल हैं। वे शुल्क में बदलाव के पक्ष में हैं और सीमा शुल्क की हर प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ सुरक्षा तथा गुणवत्ता नियमों का सख्त पालन चाहते हैं। ए-कॉमर्स के समूह मुख्य कार्यकारी पॉल श्रीवोराकुल का तर्क है कि सीमा शुल्क से सीधे जुड़कर प्लेटफॉर्म आधिकारिक कर-संग्रहकर्ता बनें। इससे प्रशासनिक बोझ सरकार से हटेगा और खरीदारों को डिलीवरी के समय अचानक शुल्क नहीं देना पड़ेगा। एसोसिएशन के एक अन्य मानद अध्यक्ष थानावत मालाबुप्पा ने मुक्त व्यापार क्षेत्रों में सामान के साथ कैसा व्यवहार होगा, इस पर स्पष्टता की मांग की है। वे उत्पाद मानकों और चिकित्सकीय मंजूरियों के लिए प्लेटफॉर्म तथा थाई नियामकों के बीच बेहतर तालमेल चाहते हैं। उनका अनुमान है कि 1 लाख करोड़ बाट के ई-कॉमर्स बाजार से 10 अरब बाट तक का नया राजस्व मिल सकता है।
कड़े नियमों के समर्थक इसे ऐसे बाजार के लिए नई शुरुआत बताते हैं, जो तेजी और कम कीमतों के दम पर बढ़ा है, लेकिन अब गुणवत्ता, घोषित न किए गए करों और आयात पर निर्भरता को लेकर बढ़ती चिंताओं का सामना कर रहा है। उन्हें छोटी आयातित वस्तुओं की कीमतों में अल्पकालीन बढ़ोतरी की आशंका है, लेकिन उनका मानना है कि बदलाव से खर्च स्थानीय उत्पादों की ओर जाएगा, नियमों का पालन बढ़ेगा और उपभोक्ताओं तथा विक्रेताओं का भरोसा मजबूत होगा।
नेताओं के प्रस्ताव क्या हैं
चर्चा में शामिल प्रस्तावों के तीन मुख्य हिस्से हैं। पहला, इंडोनेशिया जैसी व्यवस्था लागू करना, जो एक तय कीमत से कम के आयातित सामान की ऑनलाइन बिक्री रोकती है। दूसरा, डिलीवरी शुल्क चुकाए जाने (DDP) की व्यवस्था के तहत खरीद के समय कर वसूलना, ताकि खरीदार खरीदने से पहले पूरी कीमत देख सकें। तीसरा, बड़े प्लेटफॉर्म के लिए आचरण के मानक तय करना, जिनमें कीमतों में हेरफेर पर रोक, अपने ब्रांड के उत्पाद बेचने पर अंकुश और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकने वाली भुगतान प्रणालियों पर पाबंदियां शामिल हैं।
इंडोनेशिया की तर्ज पर ऑनलाइन बिक्री के लिए 100 डॉलर की न्यूनतम कीमत
हाल के वर्षों में इंडोनेशिया ने घरेलू विक्रेताओं की मदद के लिए ई-कॉमर्स नियमों में बड़े बदलाव किए। अधिकारियों ने ऑनलाइन बिकने वाले विदेशी सामान के लिए 100 डॉलर की न्यूनतम कीमत तय की, कम मूल्य के आयात नियमों में मौजूद खामियां घटाईं और सोशल कॉमर्स की उन गतिविधियों पर अंकुश लगाया जो सामग्री और खुदरा बिक्री के बीच की सीमा धुंधली करती थीं। वहां के अधिकारियों ने कपड़े, जूते, सौंदर्य प्रसाधन और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई उपभोक्ता वस्तुओं पर आयात शुल्क भी बढ़ाया। प्लेटफॉर्म और सीमा पार विक्रेताओं के लिए संदेश साफ था: मानक बेहतर करें और कम लागत वाले आयात को कर-मुक्त या कम कर वाली वस्तुओं की तरह बेचना बंद करें।
इसी तरह की न्यूनतम कीमत के समर्थक थाई अधिकारियों का कहना है कि इससे बेहद सस्ती वस्तुओं की बाढ़ कम होगी। इनमें से कई गुणवत्ता जांच से बच निकलती हैं, उन पर थाई भाषा का लेबल नहीं होता या उनका मूल्य गलत बताया जाता है। इस सीमा से सारे आयात नहीं रुकेंगे। इससे बहुत कम कीमत वाला सामान पारंपरिक खुदरा बिक्री की ओर जाएगा या स्थानीय स्तर पर खरीदना जरूरी होगा, जबकि अधिक कीमत वाली वस्तुओं की बिक्री कड़े नियमों के पालन के साथ जारी रह सकेगी।
चेकआउट पर कर और एकीकृत डिजिटल सीमा शुल्क संपर्क
एक प्रमुख मांग यह है कि प्रमुख मार्केटप्लेस और सोशल कॉमर्स संचालकों को एकीकृत सीमा शुल्क प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि करों और शुल्कों का आकलन वास्तविक समय में हो और चेकआउट पर भुगतान लिया जा सके। DDP व्यवस्था के तहत विक्रेता या प्लेटफॉर्म आयात शुल्क और मूल्य वर्धित कर समेत सामान की कुल पहुंच कीमत की गणना करके अग्रिम भुगतान लेता है। इसके बाद कुरियर बिना किसी अचानक शुल्क के सामान पहुंचाते हैं। इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता बढ़ती है, नियामकों को जांच-पड़ताल का बेहतर रिकॉर्ड मिलता है और आखिरी चरण की डिलीवरी में अनौपचारिक भुगतान की गुंजाइश घटती है।
अधिकारियों का कहना है कि प्लेटफॉर्म यह भूमिका निभाने के लिए सबसे उपयुक्त हैं, क्योंकि वे पहले से भुगतान, उत्पाद संबंधी जानकारी और शिपिंग विवरण संभालते हैं। उन्हें कर-संग्रहकर्ता बनाने से लाखों छोटे पार्सल संसाधित करने वाले सीमा शुल्क अधिकारियों का काम भी घटेगा। इस व्यवस्था को चलाने के लिए शुल्क दरों और उत्पाद वर्गीकरण का भरोसेमंद डेटाबेस तथा सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म के लिए एक साझा इंटरफेस जरूरी होगा।
प्लेटफॉर्म का आचरण, अपने ब्रांड और भुगतान प्रणालियां
उद्योग जगत के नेता ऐसे आचरण को सीमित करने वाले नियम भी चाहते हैं, जिसे वे अनुचित मानते हैं। उनकी मांगों में प्लेटफॉर्मों को तीसरे पक्ष के विक्रेताओं से प्रतिस्पर्धा करते हुए अपने ब्रांड के उत्पाद बेचने पर रोक, एल्गोरिदम से कीमतों को प्रभावित करने पर कड़ा नियंत्रण और मार्केटप्लेस संचालन तथा भुगतान के बीच सख्त अलगाव शामिल हैं। उनका तर्क है कि एकीकृत भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल विक्रेताओं को बांधकर रखने या छिपे हुए शुल्क लगाने के लिए किया जा सकता है, खासकर जब इनके साथ पसंदीदा लॉजिस्टिक्स सेवाएं भी जुड़ी हों।
कम मूल्य के आयात पर नया शुल्क कैसे काम करेगा
थाईलैंड ने 2024 के मध्य में कम मूल्य के आयात पर मूल्य वर्धित कर की छूट हटाकर छोटे पार्सल पर कर व्यवस्था पहले ही कड़ी कर दी है। सीमा शुल्क विभाग ने अब अगला कदम उठाने के संकेत दिए हैं: 1 जनवरी से 1,500 बाट से कम मूल्य के सामान पर आयात शुल्क लगाना। VAT वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य पर लगाया जाने वाला व्यापक उपभोग कर है। आयात शुल्क आयातित वस्तुओं के सीमा शुल्क मूल्य पर लगाया जाने वाला कर है और इसकी दर उत्पाद के अनुसार बदलती है।
VAT और आयात शुल्क की व्याख्या
सीमा शुल्क की गणना में CIF नामक माप का उपयोग होता है। इसमें वस्तु की कीमत, माल ढुलाई और बीमा की एक छोटी राशि शामिल होती है, जिसे अक्सर लागत का 1 प्रतिशत माना जाता है। आयात शुल्क, उत्पाद के Harmonized System (HS) कोड के आधार पर लागू टैरिफ दर से CIF को गुणा करके निकाला जाता है। इसके बाद CIF और आयात शुल्क के योग पर VAT दर लगाकर VAT की गणना की जाती है। शुल्क लागू होने पर कम कीमत वाले पार्सल की कुल लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से प्लेटफॉर्म चेकआउट के समय पूरी राशि की गणना और प्रदर्शन करना चाहते हैं।
दरें HS कोड पर निर्भर करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन और खाद्य पदार्थों पर अलग-अलग शुल्क दरें लागू होती हैं और कुछ वस्तुओं के लिए आयात परमिट या मंजूरी जरूरी होती है। सौंदर्य प्रसाधन, सप्लीमेंट, चिकित्सा उपकरण और खाद्य पदार्थों के लिए आम तौर पर थाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मंजूरी लेनी होती है। थाई औद्योगिक मानकों को पूरा न करने वाले उत्पाद रोके जा सकते हैं और विनियमित श्रेणियों में अक्सर थाई भाषा में लेबल लगाना जरूरी होता है।
मुक्त व्यापार क्षेत्र और नियामक तालमेल
अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि मुक्त व्यापार क्षेत्रों के रास्ते भेजे गए सामान पर नया शुल्क किस तरह लागू होगा। मुक्त व्यापार क्षेत्र एक निर्दिष्ट इलाका होता है, जहां विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और अन्य गतिविधियां होती हैं। वहां सामान को घरेलू बाजार में प्रवेश करने तक कर और सीमा शुल्क संबंधी विशेष छूट मिलती है। अगर नया शुल्क घरेलू खपत के लिए थाईलैंड में आने वाले सभी कम मूल्य के सामान पर लागू होता है, तो मुक्त व्यापार क्षेत्र से घरेलू बाजार में छोड़े गए पार्सल के लिए स्पष्ट नियम जरूरी होंगे, ताकि भ्रम या दुरुपयोग न हो। नेता सीमा शुल्क, राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म नियामक, मानक तय करने वाली संस्थाओं और स्वास्थ्य नियामक के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था भी मजबूत करना चाहते हैं, ताकि उत्पादों पर प्रतिबंध, उनकी वापसी और मंजूरी की जानकारी वास्तविक समय में मार्केटप्लेस तक पहुंचे।
थाई नीति-निर्माताओं के लिए इंडोनेशिया क्यों अहम है
इंडोनेशिया का अनुभव दिखाता है कि आयात के लिए न्यूनतम कीमत और ऑनलाइन बिक्री पर कड़े नियंत्रण का क्या असर हो सकता है। जकार्ता ने ऑनलाइन बिकने वाले आयातित सामान के लिए 100 डॉलर की न्यूनतम कीमत तय की, संचालकों के स्थानीय नियमों का पालन करने तक सोशल कॉमर्स की सुविधाओं पर रोक लगाई और छोटे कारोबारों को संरक्षण देने के लिए प्रमुख उपभोक्ता श्रेणियों में शुल्क बढ़ाए। इस व्यवस्था का मकसद बेहद सस्ता आयातित सामान डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाना, प्लेटफॉर्मों से कारोबारियों और उत्पादों की जांच कराना और स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का अवसर देना है।
इंडोनेशिया का रास्ता सावधानी बरतने की सीख भी देता है। तस्करी और गलत घोषणा पूरी तरह खत्म नहीं हुईं और बड़े मार्केटप्लेस से आगे बढ़कर छोटे सोशल चैनलों पर भी निगरानी करनी पड़ी। उत्पादों की स्पष्ट परिभाषा जरूरी थी, ताकि आयातित कच्चे माल पर निर्भर कारोबार उन नियमों की चपेट में न आएं जो तैयार उत्पादों के लिए बनाए गए थे। इसी तरह की न्यूनतम कीमत पर विचार कर रही थाई एजेंसियों ने भी ऐसे जोखिमों और डेटा विश्लेषण तथा एजेंसियों के बीच तालमेल की जरूरत को रेखांकित किया है।
उपभोक्ताओं और छोटे विक्रेताओं के लिए क्या दांव पर है
थाई उपभोक्ताओं के लिए निकट भविष्य का असर सीधा है। कुछ सस्ती आयातित वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी और व्यवस्था में बदलाव के दौरान शिपिंग में अधिक समय लग सकता है। सस्ते आयात पर निर्भर कम आय वाले खरीदारों पर इसका असर पड़ सकता है। समर्थकों का तर्क है कि इसके बदले स्पष्ट लाभ मिलेंगे, जिनमें अधिक सुरक्षित उत्पाद, नकली सामान की कम लिस्टिंग और स्थानीय विनिर्माण, खुदरा व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स में रोजगार की बेहतर सुरक्षा शामिल है।
छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों को ऐसी नुकसानदेह मूल्य निर्धारण और सब्सिडी वाले उत्पादन मॉडल से राहत मिल सकती है, जिन्होंने उनके मुनाफे पर दबाव डाला है। अगर प्लेटफॉर्म चेकआउट पर कर वसूलें और उत्पादों की ज्यादा सख्त जांच करें, तो स्थानीय विक्रेताओं के लिए अधिक समान शर्तों पर प्रतिस्पर्धा करना संभव होगा। कीमतों का अंतर घटने से थाई उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है।
जोखिम बने हुए हैं। विक्रेता खेप को छोटे सोशल कॉमर्स चैनलों के जरिए भेज सकते हैं, सीमा से नीचे रहने के लिए पार्सल बांट सकते हैं या उत्पादों का विवरण छिपा सकते हैं। अधिकारी इन तरीकों पर निगरानी बढ़ा रहे हैं। कई एजेंसियों के संयुक्त अभियान में घटिया सामान, थाई भाषा के गलत लेबल, नामधारी कंपनियों के ढांचे और एक देश से दूसरे देश के रास्ते माल भेजने की योजनाओं को निशाना बनाया गया है। हाल की कार्रवाई में हजारों अवैध लिस्टिंग हटाई गईं और कम मूल्य के पार्सल पर शुल्क भुगतान सुनिश्चित किया गया, जबकि नामधारी कारोबारों की जांच का दायरा बढ़ा है।
तेजी से बढ़ा बाजार अब सख्त नियमों के दौर में
थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे सक्रिय डिजिटल बाजारों में से एक है। 4.3 करोड़ से अधिक लोग ऑनलाइन खरीदारी करते हैं, अधिकांश लेनदेन मोबाइल उपकरणों से होते हैं और सीमा पार ऑर्डर ई-कॉमर्स कारोबार का लगभग एक-तिहाई हैं। फैशन, व्यक्तिगत देखभाल, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य पदार्थ प्रमुख श्रेणियां हैं। Shopee और Lazada जैसे मार्केटप्लेस एक जीवंत तंत्र का आधार हैं, जिसमें घरेलू खुदरा विक्रेता, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स की विशेष साइटें तथा तेजी से बढ़ता सोशल कॉमर्स भी शामिल है।
नियमन भी बाजार की रफ्तार से कदम मिला रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म सेवा संबंधी डिक्री इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन विकास एजेंसी (ETDA) को बड़े प्लेटफॉर्म से डेटा मांगने, उपभोक्ता शिकायतों पर कार्रवाई करने और नियमों का पालन न करने वाले संचालकों को निलंबित करने का अधिकार देती है। नीति-निर्माता अब ज्यादा लेनदेन संभालने वाले प्रभावशाली मार्केटप्लेस और सोशल प्लेटफॉर्म के लिए अतिरिक्त दायित्व तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावों में थाईलैंड में कानूनी इकाई के रूप में पंजीकरण, विस्तृत परिचालन रिपोर्ट देना, विक्रेताओं की पहचान सत्यापित करना, उत्पादों की स्पष्ट जानकारी दिखाना और असुरक्षित या अवैध सामान के लिए सूचना तथा हटाने की प्रक्रिया शामिल है। ETDA को पहले ही एक हजार से अधिक प्लेटफॉर्म संचालकों से अनुपालन संबंधी जानकारी मिल चुकी है।
अनुचित व्यवहार पर नजर रख रहे प्रतिस्पर्धा नियामक
व्यापार प्रतिस्पर्धा आयोग ने छोटे विक्रेताओं पर दबाव डालने वाले व्यवहार पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा भी तैयार किया है। योजना के तहत अत्यधिक या आपसी तालमेल से बढ़ाए गए शुल्कों पर रोक लगेगी, प्लेटफॉर्म एक ही डिलीवरी साझेदार का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे, विज्ञापन खर्च से जुड़ी अनुचित रैंकिंग सीमित होगी और विक्रेता डेटा के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। मसौदे में रैंकिंग और सिफारिश प्रणालियों के कामकाज में पारदर्शिता की मांग भी है और विक्रेताओं को लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं में से चुनने की स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव है। अधिकारियों को उम्मीद है कि परामर्श के बाद नए नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा और प्रतिस्पर्धा कानून के तहत दंड का प्रावधान होगा।
प्लेटफॉर्मों के लिए डेटा और पंजीकरण संबंधी दायित्व
थाई उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देने वाले विदेशी प्लेटफॉर्मों से अधिक अपेक्षाएं की जा रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बड़े संचालकों को थाईलैंड में पंजीकृत कार्यालय और एक नामित स्थानीय संपर्क रखना पड़ सकता है। साथ ही उन्हें लेनदेन के मूल्य, सकल आय और ग्राहकों की संख्या की समय पर रिपोर्ट देनी पड़ सकती है। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाले प्लेटफॉर्मों को अवैध लिस्टिंग पर बेहतर निगरानी, कारोबारियों की पहचान का सत्यापन और नियामकों के साथ डेटा साझा करना होगा। मकसद है कि प्लेटफॉर्म के संचालन के पैमाने के अनुरूप जवाबदेही तय हो।
थाईलैंड में सामान बेचने वाले कारोबारों को अभी क्या करना चाहिए
- हर उत्पाद का सही HS कोड तय करें और उस पर लागू शुल्क दर जांचें।
- थाई मानकों और मंजूरियों का पालन सुनिश्चित करें। इसमें सौंदर्य प्रसाधन, सप्लीमेंट, चिकित्सा उपकरण और खाद्य पदार्थों के लिए थाई FDA की मंजूरी भी शामिल है।
- चेकआउट पर डिलीवरी शुल्क चुकाए जाने (DDP) के तहत भुगतान लेने की तैयारी करें, ताकि खरीदार पूरी पहुंच कीमत देख सकें।
- शुल्क और VAT की गणना स्वचालित करने के लिए सीमा शुल्क डेटा लिंक से जुड़ें या सीमा शुल्क एजेंट के साथ साझेदारी करें।
- शिपिंग और कर शुल्क स्पष्ट रूप से दिखाएं और डिलीवरी के समय अचानक शुल्क लगाने से बचें।
- लॉजिस्टिक्स और भुगतान संबंधी मार्केटप्लेस नीतियों की समीक्षा करें और ऐसी व्यवस्थाओं से बचें जो वाहक चुनने की स्वतंत्रता सीमित करती हों।
- निगरानी करें कि मुक्त व्यापार क्षेत्रों से घरेलू बाजार में छोड़े गए सामान पर नियम किस तरह लागू होंगे।
- जहां जरूरी हो वहां थाई भाषा के लेबल और मूल्य तथा मूल स्थान की सटीक घोषणाओं के लिए लिस्टिंग की जांच करें।
- व्यावसायिक चालान, पैकिंग सूची, एयर वेबिल, मूल प्रमाणपत्र और जरूरी लाइसेंस समेत सभी दस्तावेज तैयार रखें।
- बिक्री बढ़ने और स्थानीय मौजूदगी की नियामकीय जरूरत पड़ने पर आयातक-ए-रिकॉर्ड की सेवा लेने या स्थानीय इकाई स्थापित करने पर विचार करें।
मुख्य बातें
- थाई उद्योग के नेता ऑनलाइन बिकने वाले विदेशी सामान के लिए 100 डॉलर की न्यूनतम कीमत चाहते हैं, जो सीधे तौर पर इंडोनेशिया की व्यवस्था से प्रेरित है।
- सीमा शुल्क विभाग 1 जनवरी से 1,500 बाट से कम मूल्य वाले पार्सल पर आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। कम मूल्य के आयात पर VAT पहले से लागू है।
- प्लेटफॉर्म एकीकृत डिजिटल सीमा शुल्क लिंक के जरिए चेकआउट पर कर वसूलेंगे, जिससे डिलीवरी के समय अचानक शुल्क नहीं लगेगा।
- प्रस्तावों में प्लेटफॉर्म के व्यवहार पर अंकुश भी शामिल है, जैसे अपने ब्रांड के सामान की बिक्री पर रोक और भुगतान प्रणालियों पर कड़ा नियंत्रण।
- समर्थकों को छोटी आयातित वस्तुओं की कीमतों में अल्पकालीन बढ़ोतरी की आशंका है, लेकिन वे थाई छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अधिक निष्पक्ष बाजार और उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित उत्पादों की उम्मीद करते हैं।
- अधिकारी घटिया आयात, गलत लेबलिंग और नामधारी कंपनी योजनाओं के खिलाफ कार्रवाई बढ़ा रहे हैं।
- ETDA और प्रतिस्पर्धा नियामक प्लेटफॉर्म डेटा, पंजीकरण, विक्रेता सत्यापन और लॉजिस्टिक्स चुनने की स्वतंत्रता पर कड़े नियम लागू करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
- थाईलैंड में सामान बेचने वाले कारोबारों को DDP मूल्य निर्धारण, सख्त नियमों के पालन और अधिक स्पष्ट सीमा शुल्क दस्तावेजों के लिए तैयारी करनी चाहिए।






