कम वेतन के बावजूद युवा सिंगापुरवासी तकनीक-संचालित खेती की ओर क्यों रुख कर रहे हैं

पढ़ने में 17 मिनट
कम वेतन के बावजूद युवा सिंगापुरवासी तकनीक-संचालित खेती की ओर क्यों रुख कर रहे हैं

नई पीढ़ी खेती के क्षेत्र में कदम रख रही है

सिंगापुर में खेती की पहचान मामूली वेतन, कम मुनाफे और आगे बढ़ने के सीमित अवसरों वाले क्षेत्र के रूप में है। फिर भी, युवाओं का एक छोटा समूह इसे अपना रहा है। उन्हें उम्मीद है कि स्वचालन, डेटा और उत्पादन के नए तरीके शहर में मछली और सब्जियां उगाने के तौर-तरीके बदल सकते हैं। 26 वर्षीय निकोलस ली अब चियान हू फिश फार्म में जलीय कृषि के क्षेत्र में काम करते हैं। वे मछलियों के स्वास्थ्य और पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए विश्वविद्यालय में पढ़े विज्ञान का इस्तेमाल करते हैं। 25 वर्षीय लियोनार्ड तेओ ने महामारी के दौरान छत पर सब्जियां उगाने की जगह बनाई और उसे एक छोटे खेत में बदल दिया। वर्टिकल ओशन्स में सहायक परियोजना प्रबंधक 29 वर्षीय क्रिस्टल लिम तकनीशियन से तरक्की करके विस्तार कार्यों की निगरानी करने वाली भूमिका तक पहुंचीं। वहीं, उनके 25 वर्षीय सहकर्मी लियोंग जिया शेंग का मानना है कि आधुनिक उपकरण खेती की सार्वजनिक छवि बदल सकते हैं। इन शुरुआती करियरों से पता चलता है कि यह क्षेत्र बदलाव के दौर से गुजर रहा है: खाद्य सुरक्षा की जरूरतें इसे आगे बढ़ा रही हैं, जबकि लागत का दबाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा इसे चुनौती दे रही है।

विषय-सूची
  1. नई पीढ़ी खेती के क्षेत्र में कदम रख रही है
  2. आज की खेती में क्या अलग है?
  3. जमीन और समुद्र में स्वचालन
  4. पैसा, पट्टे और बाजार की हकीकत
  5. खर्च का दबाव
  6. कौशल, वेतन और प्रतिभा को बनाए रखना
  7. वेतन, करियर के रास्ते और कौशल
  8. सरकारी रणनीति और लक्ष्य की समीक्षा
  9. नीतियां और परियोजनाएं
  10. नए विचार अपनाकर टिके रहने वाले स्टार्टअप और खेत
  11. नवाचार के उदाहरण
  12. युवा, धारणा और तकनीक का आकर्षण
  13. कक्षाओं और खेलों से असली खेतों तक
  14. क्या जमीन की कमी वाले शहर में सिंगापुर अधिक उत्पादन कर सकता है?
  15. घने शहर के लिए मॉडल
  16. एक नजर में

सिंगापुर अपने खाने का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, लेकिन आपूर्ति पर संकट आने पर स्थानीय खेत रक्षा की पहली पंक्ति बनते हैं। सरकार ने खाद्य लचीलेपन की रणनीति को बढ़ावा दिया है और किसानों को नए तरीके अपनाने में मदद के लिए कौशल ढांचे और अनुदान शुरू किए हैं। युवा कामगारों का कहना है कि यह सहायता मायने रखती है, लेकिन रोजमर्रा का काम चुनौतीपूर्ण है। किराया और उपयोगिता लागत ऊंची बनी हुई हैं, उपकरण महंगे हैं और स्थानीय उपज को सस्ते आयात से मुकाबला करना पड़ता है। इसके बावजूद, शहर का पेट भरने जैसे बुनियादी उद्देश्य के लिए विज्ञान और इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करने की संभावना कई लोगों को इस क्षेत्र में बनाए रखती है।

उनके कारण व्यावहारिक भी हैं और निजी भी। कुछ ऐसे करियर बनाना चाहते हैं जिनमें व्यावहारिक काम के साथ डेटा और जीवविज्ञान का मेल हो। दूसरे, बर्बादी घटाते हुए ताजगी और स्वाद बेहतर करने की इच्छा से प्रेरित हैं। कई लोगों को जलवायु के अनुकूल और कम जगह घेरने वाली खेती के जरिये देश में अधिक खाद्य उत्पादन करने के लंबे प्रयास में योगदान देने का अवसर दिखता है। यह व्यापक लक्ष्य उस काम को अर्थ देता है, जो पहली नजर में वित्त और तकनीक के केंद्र में एक सीमित दायरे का विकल्प लग सकता है।

आज की खेती में क्या अलग है?

यहां के खेत देहात के खुले मैदानों जैसे नहीं दिखते। वे ऊर्ध्वाधर रैकों में एक के ऊपर एक बने इनडोर कमरे, जलवायु नियंत्रित ग्रीनहाउस और सॉफ्टवेयर से जुड़े तटीय पिंजरे हैं। सेंसर, कैमरे और एल्गोरिदम पानी की रासायनिक स्थिति, तापमान, रोशनी, पोषक तत्वों और वृद्धि पर नजर रखते हैं। संचालक कम पानी, जमीन और ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए तेज और अधिक भरोसेमंद फसल के लिए परिस्थितियां समायोजित करते हैं। नियंत्रित वातावरण वाली खेती और आधुनिक जलीय कृषि का यही वादा है, और इससे खेतों में होने वाला काम तथा जरूरी कौशल, दोनों बदल रहे हैं।

जलीय कृषि में, पुनर्चक्रण प्रणालियां पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल करती हैं, जबकि खुद साफ होने वाले टैंक में अधिक घनत्व पर मछलियां पाली जाती हैं। इनडोर खेतों में पौधे ऊर्जा-कुशल एलईडी की कतारों के नीचे और कई परतों वाली संरचनाओं पर उगते हैं, जिन्हें गोदामों या छतों पर लगाया जा सकता है। स्वचालन से बीज बोने, पौधों को दूसरी जगह लगाने और फसल काटने जैसे काम होते हैं। इससे मानवीय भूल घटती है और एकरूपता बेहतर होती है। ये उपकरण प्रक्रिया से लोगों को हटाते नहीं हैं। वे उनकी भूमिकाएं बदलते हैं और ऐसे तकनीशियनों के लिए अवसर खोलते हैं जो डैशबोर्ड समझ सकें, उपकरणों की गड़बड़ियां दूर कर सकें और प्रणालियों को बेहतर ढंग से समायोजित कर सकें।

जमीन और समुद्र में स्वचालन

स्थानीय उदाहरण दिखाते हैं कि तौर-तरीके कितनी तेजी से बदल रहे हैं। ग्रोग्रेस कई परतों वाली संरचना और ड्राई हाइड्रोपोनिक्स के जरिये छोटी जगह में साल भर कई तरह की पत्तेदार सब्जियां उगाता है। 30 बाय 30 एक्सप्रेस अनुदान की मदद से विस्तार करने वाले गोफार्म में ऊर्ध्वाधर रैक, लगातार बहने वाले पोषक तत्वों की पतली परत और उन्नत ग्रो लाइट का इस्तेमाल होता है। यहां पारंपरिक तरीकों के मुकाबले बहुत कम पानी और बिजली खर्च करके रोजाना सैकड़ों किलोग्राम सब्जियां उगाई जाती हैं। मछली पालन के क्षेत्र में कंपनियां इनडोर पुनर्चक्रण प्रणालियां लगाती हैं, जो पानी को साफ और स्थिर रखती हैं। इससे बीमारियां घटाने और चारे को मछली के वजन में बदलने की क्षमता सुधारने में मदद मिलती है। ये प्रणालियां खेतों को उन औद्योगिक इलाकों में भी चलाना संभव बनाती हैं जहां जगह की कमी है।

तकनीकी बदलाव खेती को डेटा-समृद्ध करियर के रूप में भी पेश कर सकता है। युवा कामगारों को आकर्षित करने के लिए यह बदलाव मायने रखता है। इससे संकेत मिलता है कि यह काम अब केवल शारीरिक श्रम तक सीमित नहीं है और इसमें विज्ञान, इंजीनियरिंग तथा डिजिटल उपकरणों का प्रशिक्षण फायदेमंद है। सिंगापुर खाद्य एजेंसी और शिक्षा क्षेत्र के साझेदार जलीय कृषि संचालन, खेतों में स्वचालन और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में करियर के रास्ते तय करने वाले कौशल ढांचे पर काम कर रहे हैं। इससे तरक्की के रास्ते अधिक स्पष्ट होते हैं, जिन्हें युवा कर्मचारी अक्सर नौकरी में बने रहने का फैसला करते समय तलाशते हैं।

विज्ञापन

पैसा, पट्टे और बाजार की हकीकत

नए उपकरण होने के बावजूद खर्च और कमाई का हिसाब बैठाना मुश्किल है। खासकर बिजली, किराया और श्रम की लागत बहुत अधिक है। उपज बढ़ाने वाले उपकरणों की कीमत वसूल होने में कई साल लग सकते हैं। लियोनार्ड तेओ ने खुद खेती करना सीखा और अपनी उपज ऑनलाइन बेचते हैं, लेकिन उन्हें जल्द मुनाफे की उम्मीद नहीं है। उनके विकल्प 2027 में खत्म होने वाले पट्टों से प्रभावित हैं, जिससे विस्तार और लंबे समय में लागत वसूल करने वाले निवेश की योजना सीमित हो जाती है। सब्जियों के कई खेतों को ऐसी ही समयसीमा का सामना करना पड़ता है और जमीन का पट्टा कितने समय तक रहेगा, इस बारे में अनिश्चितता सुधार के फैसले धीमे कर सकती है।

आयात से प्रतिस्पर्धा लगातार एक चुनौती बनी हुई है। विदेशों के उत्पादकों को सस्ती जमीन और श्रम का फायदा मिलता है, और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था कीमतें नीचे रखती है। स्थानीय खेत, चाहे कितने ही कुशल हों, शायद ही हर उत्पाद की सबसे सस्ती आयातित कीमत से मुकाबला कर पाते हैं। इसलिए वे ताजगी, भरोसेमंद आपूर्ति, स्वाद और टिकाऊपन के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते हैं। सीधे बिक्री और सदस्यता आधारित मॉडल मददगार हैं। इसी तरह, उन होटलों, रेस्तरां और खुदरा विक्रेताओं के साथ काम करना भी, जो स्थिर और नजदीकी आपूर्ति को अहमियत देते हैं। साझा ब्रांडिंग और मिलकर विपणन करने से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचना और न्यूनतम ऑर्डर की मात्रा पूरी करना आसान हो सकता है।

खर्च का दबाव

उपयोगिता और पूंजी की लागत वित्तीय दबाव की मुख्य वजह हैं। जलवायु नियंत्रण और पानी के संचार में बिजली खर्च होती है। खाद्य-उत्पादन के मानकों पर खरे उतरने वाली सुविधाएं बनाना और उनका रखरखाव महंगा है। बड़ी प्रणालियों को नियमित रखरखाव और कुशल तकनीशियनों की जरूरत होती है। कुछ खेत पानी का इस्तेमाल घटाकर, सरल उपकरण चुनकर और विस्तार टालकर खर्च कम करते हैं, लेकिन इससे उत्पादन सीमित हो सकता है। आम तौर पर मुनाफा अधिक उत्पादकता, कम बर्बादी, बेहतर बिक्री माध्यमों और अनुकूल शर्तों पर वित्त मिलने के मेल से आता है। इन चीजों के बिना, लगन और दक्षता से होने वाला लाभ भी तय लागतों के सामने कम पड़ सकता है।

विज्ञापन

कौशल, वेतन और प्रतिभा को बनाए रखना

शुरुआती स्तर का वेतन अक्सर इंजीनियरिंग या वित्त में नए स्नातकों को मिलने वाले वेतन से कम होता है, जिससे कर्मचारियों को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। क्रिस्टल लिम बताती हैं कि युवा कर्मचारी उत्साह के साथ आते हैं, लेकिन आगे बढ़ने के अवसर कम देखकर चले जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इस क्षेत्र में करियर के विकल्पों की कमी है। आज खेती में मशीनरी के रखरखाव, डेटा विश्लेषण, जैव-सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और उत्पाद विकास जैसी भूमिकाएं भी शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या खेत पर्याप्त विस्तार कर सकते हैं, ताकि अधिक मूल्य वाली भूमिकाएं और तरक्की के स्पष्ट रास्ते बन सकें।

ऐसा करने के प्रयास जारी हैं। उद्योग के साथ मिलकर विकसित किए गए कृषि-खाद्य कौशल ढांचे का उद्देश्य खेतों में स्वचालन, जलीय कृषि में मछलियों का स्वास्थ्य और कृषि विज्ञान जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण का मार्गदर्शन करना है। उच्च शिक्षा संस्थान ऐसे कार्यक्रम और इंटर्नशिप बढ़ा रहे हैं जो विद्यार्थियों को खेतों और कृषि-तकनीकी कंपनियों से जोड़ते हैं। मकसद ऐसा कार्यबल तैयार करना है जो जीवविज्ञान और कोडिंग, दोनों में सहज हो, और यह दिखाना है कि आधुनिक कृषि एक लंबा करियर हो सकती है, न कि कुछ समय के लिए चुना गया रास्ता।

वेतन, करियर के रास्ते और कौशल

जब कर्मचारियों को बढ़ती जिम्मेदारी और प्रबंधन या विशेषज्ञ भूमिकाओं तक पहुंचने का रास्ता दिखता है, तो उन्हें बनाए रखना आसान होता है। स्वचालन उत्पादकता बढ़ाकर और दोहराव वाले कामों से लोगों को मुक्त करके इसमें मदद कर सकता है, ताकि वे प्रक्रिया इंजीनियरिंग, उत्पाद गुणवत्ता या बिक्री से जुड़ी परियोजनाएं संभाल सकें। कुछ खेत ऐसी टीमें बना रहे हैं जो संचालन और ग्राहकों के बीच सेतु का काम करती हैं। इनमें जीवविज्ञान समझने वाले वही लोग यह तय करने में भी मदद करते हैं कि उत्पाद बाजार तक कैसे पहुंचे। सीखने और नेतृत्व करने की गुंजाइश चाहने वाले युवा पेशेवरों को ऐसी मिली-जुली भूमिकाएं आकर्षक लगती हैं।

सरकारी रणनीति और लक्ष्य की समीक्षा

सिंगापुर ने कभी 2030 तक अपनी पोषण संबंधी जरूरतों का 30 प्रतिशत उत्पादन करने की योजना बनाई थी। अब इस लक्ष्य की समीक्षा हो रही है, क्योंकि यह क्षेत्र बिजली की ऊंची कीमतों, निवेशकों की बदलती रुचि और जमीन की सीमाओं का सामना कर रहा है। कुल खपत में स्थानीय उत्पादन का हिस्सा अब भी 10 प्रतिशत से कम है, फिर भी वैश्विक संकटों से बचाव के लिए यह मायने रखता है। व्यापक खाद्य सुरक्षा रणनीति में करीब 187 स्रोतों से विविध आयात, जरूरत पड़ने पर बढ़ाए जा सकने वाले स्थानीय उत्पादन और नवाचार करने वाली खाद्य कंपनियों की भूमिका बनी हुई है।

सरकारी अधिकारी खेतों को टिके रहने और बढ़ने में मदद देने के लिए सहायता में बदलाव कर रहे हैं। 2021 में शुरू की गई 60 मिलियन डॉलर की एग्री फूड क्लस्टर ट्रांसफॉर्मेशन फंड योजना का उद्देश्य तकनीक अपनाने के जरिये क्षमता और सामर्थ्य बढ़ाना है। हाल के सुधारों में विपणन, ब्रांडिंग और फसल कटाई से पहले तथा बाद के कामों के लिए सुविधाओं की लागत शामिल की गई है। अब परियोजनाओं की अधिकतम अवधि लंबी है, जिससे खेतों को नई प्रणालियां सीखने के लिए ज्यादा समय मिलता है। सुंगेई तेंगा और लिम चू कांग में उन उत्पादकों के लिए जमीन की नई निविदाओं की योजना है, जो मजबूत कारोबारी योजनाएं दिखा सकें। वहीं, 2026 से पूर्वी जोहोर जलडमरूमध्य में जलीय कृषि के और स्थल खुलेंगे। लक्ष्य वहां समुद्री खाद्य का उत्पादन बढ़ाकर सालाना करीब 6,700 टन तक पहुंचाना है।

नीतियां और परियोजनाएं

मछली पालन की एक समस्या विदेशों से आने वाली असमान गुणवत्ता की छोटी मछलियों के कारण मृत्यु दर का ऊंचा होना रही है। इससे निपटने के लिए एशियाई सीबास और समुद्री तिलापिया के राष्ट्रीय प्रजनक मछली केंद्र बनाए जा रहे हैं, जो भरोसेमंद गुणवत्ता की छोटी मछलियां उपलब्ध कराएंगे। इससे जीवित रहने और बढ़ने की दर में सुधार होना चाहिए, जिससे खेतों की आय और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। बिक्री के मोर्चे पर, अधिकारी खेतों को दीर्घकालीन खरीदार तय करने और बड़े खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचने तथा पैमाना हासिल करने के लिए साझा ब्रांड के तहत बेचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। खेती की जमीन कुल भूभाग का करीब 1 प्रतिशत है। लिम चू कांग में 390 हेक्टेयर का उच्च तकनीक वाला कृषि-खाद्य केंद्र, जिसकी घोषणा 2020 में हुई थी, इसे लागू करने का सबसे अच्छा तरीका तय किए जाने तक टल गया है। आज घोषित प्राथमिकता केवल बड़े लक्ष्यों पर नहीं, बल्कि वित्तीय व्यवहार्यता और उत्पादकता पर है।

विज्ञापन

नए विचार अपनाकर टिके रहने वाले स्टार्टअप और खेत

कई उत्पादक नए उत्पादों और कारोबारी मॉडलों को आजमा रहे हैं। ग्रोग्रेस ने तीन साल तक क्षमता विकसित करने के बाद सीधे बिक्री में काफी बढ़ोतरी की है। अब वह होटल समूहों को अधिक विविधता देने के लिए दूसरे खेतों के साथ काम कर रहा है, जिससे ऐसे ऑर्डर की मात्रा पूरी करने में मदद मिलती है जिन्हें कोई एक खेत अकेले पूरा नहीं कर सकता। ब्लू ओशन एक्वाकल्चर टेक्नोलॉजी, जिसे पहले सरकारी वित्तपोषण मिला था, खुद साफ होने वाले टैंकों वाली इनडोर पुनर्चक्रण प्रणाली का इस्तेमाल करती है और अब खाद्य निर्माण तथा उपकरण डिजाइन के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही है। खाने के लिए तैयार मछली के उत्पाद, जैसे फिले, सूप और नूडल्स, भंडारण अवधि बढ़ाते हैं और भरपूर फसल होने पर भंडार को संभालने में मदद करते हैं।

ये कदम केवल विविधता लाने तक सीमित नहीं हैं। इनसे नकदी प्रवाह स्थिर होता है और उत्पाद डिजाइन से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन तक ऐसी भूमिकाएं बनती हैं, जो युवा कर्मचारियों को आकर्षित करती हैं। ये खरीदारों के साथ नजदीकी रिश्ते भी बनाते हैं, जो छोटे बाजार में बहुत अहम है। कहानी में तकनीक की भूमिका है, लेकिन सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जो खेत साझा ब्रांड के तहत विपणन करते हैं या मिलकर एक नाम से बिक्री करते हैं, वे उन बड़े खुदरा विक्रेताओं और संस्थागत रसोईघरों तक पहुंच सकते हैं, जो छोटे आपूर्तिकर्ताओं के साथ शायद ही कारोबार करते हैं।

नवाचार के उदाहरण

ऊर्ध्वाधर खेत कई परतों वाले रैक लगाकर समान फर्श क्षेत्र में ज्यादा उत्पादन करते हैं। पोषक तत्वों की पतली परत पहुंचाने से पानी का इस्तेमाल घटता है। बुद्धिमान रोशनी पौधों की वृद्धि के अलग-अलग चरणों के अनुसार प्रकाश का रंग और तीव्रता समायोजित करती है। जलीय कृषि में सॉफ्टवेयर ऑक्सीजन, पीएच और अमोनिया पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत हवा देने या छानने की प्रक्रिया में बदलाव कर सकता है। ये प्रणालियां खेती को पूर्वानुमेय और मापने योग्य बनाती हैं, जो वित्त और प्रतिभा को आकर्षित करने का आधार है। कोड और सेंसर के साथ बड़े हुए युवा कामगार इस माहौल में संचालन बेहतर करने के स्पष्ट तरीके देख सकते हैं।

युवा, धारणा और तकनीक का आकर्षण

दुनिया भर में कई युवा अब भी खेती को गंदा, कम तकनीक वाला और कम वेतन का काम मानते हैं। खाद्य प्रणालियों में डिजिटल उपकरणों के तेजी से फैलने के साथ यह धारणा बदल रही है। इनमें उपग्रह से फसलों पर नजर रखने से लेकर किसानों को उपकरणों और खरीदारों से जोड़ने वाले मोबाइल प्लेटफॉर्म तक शामिल हैं। कृषि में युवाओं की भागीदारी पर शोध बार-बार एक ही रुझान दिखाता है। प्रशिक्षण, वित्त और किफायती उपकरण जब मूल्य श्रृंखला की वास्तविक भूमिकाओं से जुड़ते हैं, तो भागीदारी बढ़ती है। इन भूमिकाओं में प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, उत्पाद डिजाइन और उपकरणों का रखरखाव भी शामिल है। सिंगापुर से आ रही कहानी भी इसी दिशा से मेल खाती है।

स्थानीय पहल शुरुआती रुचि जगाने के लिए संस्कृति और शिक्षा का भी इस्तेमाल करती हैं। विद्यार्थियों को स्मार्ट खेतों और फैक्टरी तकनीक केंद्रों के दौरे कराए जाते हैं, जहां स्वचालन और टिकाऊ उत्पादन के बीच का संबंध दिखाया जाता है। रचनात्मक समूह डिजिटल गेम और संवर्धित वास्तविकता के अनुभव विकसित कर रहे हैं, जो शहर के बच्चों को घर और स्कूल में बागवानी तथा खाद्य उत्पादन से जोड़ते हैं। एक कार्यक्रम का लक्ष्य खेल, सीखने और वास्तविक किट के मेल से दशक के अंत तक एशिया-प्रशांत के 10 लाख बच्चों को व्यावहारिक बागवानी में शामिल करना है। ये पहुंच संबंधी प्रयास भले ही मछली के टैंकों और ऊर्ध्वाधर रैकों से दूर लगें, लेकिन वे ऐसे भावी कार्यबल की नींव रखते हैं जो विज्ञान और मिट्टी, दोनों के साथ सहज हो।

कक्षाओं और खेलों से असली खेतों तक

यह प्रशिक्षण श्रृंखला मायने रखती है। इंटर्नशिप विद्यार्थियों को खेतों में ले जाती हैं, जहां वे पढ़ाई में सीखी बातों को असली उपकरणों और जीवित प्रणालियों पर लागू कर सकते हैं। जीवविज्ञान, डेटा और यांत्रिक प्रणालियों में कौशल रखने वाले स्नातकों को अब संचालन, रखरखाव, परीक्षण और यहां तक कि सॉफ्टवेयर से जुड़ी भूमिकाएं मिल रही हैं। समय के साथ, यह मेल कम शुरुआती वेतन और प्रतिभा को बनाए रखने की जरूरत के बीच तनाव घटा सकता है। कुशल टीम उत्पादन बढ़ाती है और बर्बादी घटाती है, जिससे मुनाफे में सुधार होता है और बेहतर वेतन की गुंजाइश बनती है। जैसे-जैसे अधिक खेत टिके रहेंगे और विस्तार करेंगे, करियर के रास्ते व्यापक होंगे और कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

क्या जमीन की कमी वाले शहर में सिंगापुर अधिक उत्पादन कर सकता है?

जगह सबसे बड़ी बाधा है। पारंपरिक खेत सिंगापुर के बड़े भूभाग को कभी नहीं घेर पाएंगे। इसका जवाब ऊर्ध्वाधर संरचनाओं, नियंत्रित वातावरण और पुनर्चक्रण प्रणालियों के जरिये प्रति वर्ग मीटर और प्रति लीटर पानी में उत्पादन बढ़ाना है। शहर के स्तर पर, योजनाकार खेतों को समूहों में व्यवस्थित कर रहे हैं, ताकि वे कचरे और पानी के शोधन की सुविधाएं साझा करें और उप-उत्पादों को आगत के रूप में इस्तेमाल करने जैसे चक्रीय तरीकों को बढ़ावा मिले। उत्पादन को प्रसंस्करण और पैकेजिंग के साथ एक ही जगह रखने से परिवहन कम होता है और उपज खराब होने की संभावना घटती है।

विदेशों में उन्नत ग्रीनहाउस के डिजाइन इस बात की झलक देते हैं कि इंजीनियरिंग और कृषि के मेल से क्या संभव है। इंग्लैंड में एक बड़ा कांचघर रोबोटिक प्रणालियों, घूमने वाली उत्पादन संरचनाओं और परिसर में ही ऊर्जा पुनर्प्राप्ति का इस्तेमाल करके रोशनी और जलवायु पर कड़ा नियंत्रण रखते हुए फल उगाता है। सेंसर संसाधनों के इस्तेमाल का मार्गदर्शन करते हैं और रोबोट फसल काटने तथा कीट नियंत्रण जैसे कामों में मदद करते हैं। ये सभी मॉडल सिंगापुर की परिस्थितियों के अनुकूल नहीं होंगे, लेकिन दिशा स्पष्ट है। सॉफ्टवेयर, स्वच्छ ऊर्जा, सटीक सिंचाई और पादप विज्ञान मिलकर घने शहरों में भी संसाधनों का इस्तेमाल घटा सकते हैं और गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं।

घने शहर के लिए मॉडल

सिंगापुर की रणनीति में विविध स्रोतों से आयात, लचीला स्थानीय उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है। इस रणनीति के केंद्र में युवा किसानों की भूमिका है। वे स्वचालित प्रणालियां चला सकते हैं, प्रक्रिया की कमजोरियां पहचान सकते हैं और नए उत्पाद तथा बिक्री के रास्ते तैयार कर सकते हैं। उनका करियर तभी टिकाऊ होगा, जब खेत स्थिर खरीदारों, मजबूत संचालन और सुधार के लिए पूंजी तक पहुंच वाले आर्थिक रूप से टिकाऊ उद्यम बनेंगे। इसे संभव बनाने में नीति, शिक्षा और निजी पहल, सभी की भूमिका है।

एक नजर में

  • कम वेतन और अन्य क्षेत्रों से कम मुनाफे के बावजूद, युवा सिंगापुरवासी विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए खेती में आ रहे हैं।
  • आधुनिक खेत कम जमीन और पानी में उत्पादन बढ़ाने के लिए सेंसर, कई परतों वाले रैक और पुनर्चक्रण वाली जलीय कृषि प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं।
  • ऊंची लागत और कम अवधि के पट्टों से मुनाफा कमाना कठिन होता है, जिससे खेतों को बिक्री और ब्रांडिंग में सहयोग करना पड़ता है।
  • कम शुरुआती वेतन और तरक्की के सीमित अवसर प्रतिभाओं को हतोत्साहित करते हैं, इसलिए करियर के स्पष्ट रास्ते और प्रशिक्षण प्राथमिकता हैं।
  • सरकार 30 बाय 30 लक्ष्य की समीक्षा कर रही है और अनुदान, खेतों के लिए नई जगहों तथा मछलियों की प्रमुख प्रजातियों के प्रजनक केंद्रों के जरिये सहायता बढ़ा रही है।
  • नए विचार अपनाने वाले खेत नकदी प्रवाह सुधारने और नई भूमिकाएं बनाने के लिए खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थों, साझा विपणन और उपकरण डिजाइन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं।
  • शिक्षा और डिजिटल पहुंच कार्यक्रमों के जरिये धारणाएं बदलने की कोशिश हो रही है। इनमें विद्यार्थियों को स्मार्ट खेती और घर पर बागवानी से परिचित कराना शामिल है।
  • जमीन बहुत महंगी होने के कारण, संसाधनों का इस्तेमाल कम रखते हुए स्थानीय उत्पादन बढ़ाने में ऊर्ध्वाधर खेती और इनडोर जलीय कृषि अहम बनी हुई हैं।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है