जावा के तट पर आकार लेती नई दीवार
मध्य जावा के उत्तरी तट पर बसे बेदोनों गांव में कई सुबह सुश्री पंगेस्टुति घुटनों तक समुद्री पानी में खड़ी होकर खाना बनाती हैं। ज्वारीय बाढ़ वर्षों से उनके घर में घुसती रही है। उन्हें उम्मीद है कि राहत सेमारंग और देमाक के बीच बन रही 6.7 किलोमीटर लंबी संरचना से मिल सकती है। सेमारंग-देमाक समुद्री दीवार का इस्तेमाल टोल रोड के रूप में भी होगा। इसका निर्माण लगभग आधा पूरा हो चुका है और इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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इस तटीय सुरक्षा व्यवस्था के शुरुआती हिस्सों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। छोटी नावों से मछली पकड़ने वाले मछुआरों का कहना है कि निर्माण शुरू होने के बाद से उनकी पकड़ में भारी गिरावट आई है। नियमित रूप से पानी में डूबने वाले घरों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि यह अवरोध बहुत पहले बन जाना चाहिए था। उनका शहर, सेमारंग, जावा के उत्तरी तट के उन कई शहरों में से एक है जो दशकों तक भूजल का भारी दोहन किए जाने के बाद धंस गया है। जमीन धंसने और समुद्र का स्तर बढ़ने पर बाढ़ का पानी और दूर तक अंदर आता है और लंबे समय तक ठहरता है।
इंडोनेशिया अब इससे बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। सरकार की योजना जावा के उत्तरी तट के बड़े हिस्से में, पश्चिम में बैंटन से लेकर पूर्वी जावा के ग्रेसिक तक, एक विशाल समुद्री दीवार बनाने की है। अंतिम डिजाइन के आधार पर दीवार और उससे जुड़ी सुरक्षा संरचनाएं करीब 500 से 700 किलोमीटर तक फैल सकती हैं; कुछ प्रस्तावों में इसकी लंबाई लगभग 900 किलोमीटर तक रखने की बात है। इसकी लागत दसियों अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो कुछ आकलनों में 80 अरब डॉलर तक है। निर्माण में 15 से 20 साल लगेंगे। योजना, वित्तपोषण और निर्माण की निगरानी के लिए नई उत्तर जावा तट समुद्री दीवार प्राधिकरण की स्थापना की गई है। साथ ही, उन क्षेत्रीय योजनाओं के बीच समन्वय भी इसका काम होगा जिन पर 1990 के दशक के मध्य से किसी न किसी रूप में चर्चा होती रही है। अधिकारियों का कहना है कि वे हर जगह एक जैसा डिजाइन लागू नहीं करेंगे। जकार्ता और सेमारंग जैसे शहरी इलाकों में इंजीनियरिंग से बने अवरोध, पंप और पोल्डर प्रणालियां बनाई जाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में तटबंध, योजनाबद्ध ढंग से लोगों को दूसरी जगह बसाना और मैंग्रोव का पुनरुद्धार शामिल हो सकता है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे एक सीधी सच्चाई है। जावा का उत्तरी तट घनी आबादी वाला आर्थिक गलियारा है। तट के पास करीब 5 करोड़ लोग रहते हैं। यहां दर्जनों औद्योगिक क्षेत्र, बंदरगाह और लॉजिस्टिक केंद्र भी हैं। इस घनी आबादी के चलते कदम उठाने और कुछ न करने, दोनों के दांव बहुत बड़े हैं। सवाल यह नहीं है कि लोगों की रक्षा की जाए या नहीं, बल्कि यह है कि ऐसा कैसे किया जाए जिससे समुदाय, पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्थाएं टिकाऊ बनी रहें।
जावा में जमीन क्यों धंस रही है और बाढ़ क्यों आ रही है
वैज्ञानिक अक्सर जावा के उत्तरी तट पर हो रही घटनाओं को दोहरे असर के रूप में देखते हैं। एक ओर वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि है। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने बताया है कि 1990 के दशक की शुरुआत से समुद्र का स्तर हर साल औसतन करीब 4.3 मिलीमीटर बढ़ा है और हाल के वर्षों में इसकी रफ्तार तेज हुई है। दूसरी ओर जमीन का धंसना है, जिसका असर समुद्र के बढ़ते स्तर से कहीं अधिक हो सकता है। जकार्ता, पेकालोंगन, सेमारंग और देमाक जैसे शहरों में हुए अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ जिलों में जमीन हर साल कई सेंटीमीटर धंस रही है, जो मौजूदा वैश्विक समुद्र-स्तर वृद्धि से कम से कम नौ गुना तेज है। कुछ जगहों पर तट के सापेक्ष जलस्तर दो मीटर तक बढ़ चुका है।
जमीन धंसने के कई कारण हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण उद्योगों, व्यावसायिक परिसरों और भरोसेमंद पाइप से मिलने वाले पानी की सुविधा से वंचित घरों द्वारा भूजल का लगातार दोहन है। जब जलभृतों से पानी उनके फिर से भरने की रफ्तार से तेज निकाला जाता है, तो मिट्टी और रेत की परतें दब जाती हैं और सतह धंसने लगती है। भारी इमारतों और सड़कों के कारण समस्या और बढ़ती है। उत्तरी तट के कई मोहल्ले नरम जलोढ़ मिट्टी पर भी बसे हैं, जो भार पड़ने पर दब जाती है। इसके साथ ज्वारीय उफान, बरसात के मौसम में नदियों का तेज बहाव और तूफानी लहरें मिलकर लंबे समय तक जलभराव की स्थिति पैदा करती हैं।
तट के कुछ हिस्सों में बाढ़ से बचाव के इंतजाम पहले से मौजूद हैं। इनमें तटबंध, पंप और पोल्डर शामिल हैं, जो पानी को रोकते हैं और फिर कम ज्वार के समय उसे समुद्र में छोड़ते हैं। ये प्रणालियां तभी काम करती हैं जब जलनिकासी नालियां खुली रहें, पंपों का रखरखाव हो और नदियों का पानी समुद्र तक पहुंच सके। नदी के मुहाने पर गाद जमने या संरचनाओं से पानी का बहाव रुकने पर अंदरूनी इलाकों में बाढ़ अधिक बार और ज्यादा नुकसानदेह हो सकती है। इसलिए किसी भी नए अवरोध का डिजाइन बनाते समय यह देखना जरूरी है कि तट की पूरी लंबाई में नदियों, आर्द्रभूमियों और समुद्र के बीच पानी और तलछट का आवागमन कैसे होता है।
जकार्ता खाड़ी से देमाक तक की योजना
प्रस्तावित विशाल समुद्री दीवार जकार्ता खाड़ी के आसपास एक दशक पहले शुरू किए गए प्रयासों और सेमारंग-देमाक अवरोध जैसी हालिया परियोजनाओं पर आधारित है। अकेले जकार्ता वाले हिस्से को बनाने में आठ से दस साल लग सकते हैं और इसकी अनुमानित लागत 8 से 10 अरब डॉलर है। सरकार का कहना है कि पूर्व और पश्चिम के अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक बनाई जाएगी। घनी आबादी या अधिक मूल्य वाले इलाकों में योजना के तहत इंजीनियरिंग से बनी समुद्री दीवारें, तूफानी लहरों को रोकने वाले अवरोध, द्वार, पंप स्टेशन और बेहतर जलनिकासी व्यवस्था बनाई जाएगी। कम आबादी वाले इलाकों में अधिकारियों के मुताबिक घरों और खेतों को अंदरूनी इलाकों में स्थानांतरित किया जा सकता है और मैंग्रोव बहाल किए जा सकते हैं। मैंग्रोव लहरों की ऊर्जा घटाते हैं और तलछट को रोककर प्राकृतिक रूप से जमीन बनाने में मदद करते हैं। कुछ क्षेत्रों में तट से भीतर की ओर चौड़े, ऊंचे तटबंध बनाए जाएंगे, ताकि महत्वपूर्ण जिले सूखे रहें।
योजना के दायरे और जटिलता को संभालने के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उत्तरी तट कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालने वाला नया प्राधिकरण बनाया। सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल दिदित हेरदियावान अशाफ को इस एजेंसी का प्रमुख नियुक्त किया गया। उन्हें प्रांतों और मंत्रालयों के बीच योजनाओं, बजट और निर्माण का समन्वय करने तथा परिस्थितियां बदलने पर डिजाइन में फेरबदल करने का जिम्मा सौंपा गया है। प्राधिकरण का इरादा जकार्ता की लंबे समय से चर्चित NCICD योजना समेत पहले किए गए अध्ययनों को एक साथ समेटने और ऐसी मास्टरप्लान तैयार करने का है जिसमें परियोजनाओं के क्रम तय किए जाएं और हर स्थान पर अलग-अलग विकल्पों के लाभ-हानि तौले जाएं।
इसके लिए कई स्रोतों से वित्त जुटाया जाएगा। सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया है और एशिया तथा यूरोप के साझेदारों से रुचि जताने का आह्वान किया है। इंडोनेशिया की सरकारी निवेश एजेंसी को ऐसे ढांचों की संभावना तलाशने का काम सौंपा गया है जिनमें आय देने वाली संपत्तियां, भूमि-मूल्य से होने वाले लाभ और ऐसी साझेदारियां शामिल हों जो सुरक्षा संरचनाओं की लागत, संचालन और रखरखाव में मदद कर सकें। राष्ट्रीय योजना समुद्री दीवार को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने वाली एक प्रमुख परियोजना के रूप में पेश करती है, जो महत्वपूर्ण परिवहन और औद्योगिक गलियारों की भी रक्षा करेगी।
समर्थकों ने सुरक्षा और जीवन रक्षा का तर्क दिया
वरिष्ठ अधिकारी इस परियोजना को तटवर्ती लोगों की रक्षा के लिए नैतिक और व्यावहारिक जिम्मेदारी बताते हैं। उनका कहना है कि सवाल यह नहीं है कि ठोस बुनियादी ढांचे का असर होगा या नहीं, बल्कि यह है कि कुछ न करने या बहुत कम करने का विकल्प लाखों लोगों को रोजाना खतरे में छोड़ देगा या नहीं। वे खाद्य सुरक्षा का भी हवाला देते हैं, क्योंकि जावा के उत्तरी तट के बड़े हिस्से में धान के खेत, जलीय कृषि के तालाब और मछुआरा समुदाय बसे हैं।
बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय विकास के प्रभारी समन्वय मंत्री अगुस हरिमूर्ति युधोयोनो ने कहा है कि यह योजना जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढलने और तटीय समुदायों को सुरक्षित रखने के एक बड़े राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है। समुद्री दीवार का लक्ष्य बताने के बाद उन्होंने इसकी वजह कंक्रीट से आगे तक जाती हुई बताई।






