विश्व बैंक ने थाईलैंड से 2037 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने का आग्रह किया

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विश्व बैंक ने थाईलैंड से 2037 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने का आग्रह किया

विकास का नया मॉडल अब क्यों अहम है

थाईलैंड निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। विश्व बैंक देश से अपनी विकास दिशा बदलने और विकास के नए इंजन तैयार करने का आग्रह कर रहा है, ताकि वह 2037 तक उच्च आय वाला देश बन सके। हाल के वर्षों में आर्थिक वृद्धि करीब 2 प्रतिशत पर अटकी रही है, जो आय तेजी से बढ़ाने और तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ कदम मिलाने के लिए जरूरी रफ्तार से काफी कम है। संस्था का संदेश स्पष्ट है: मजबूत पर्यटन, कम लागत वाले विनिर्माण और स्थिर व्यापार पर निर्भर पुराना मॉडल अब डिजिटल, ज्ञान-आधारित और जलवायु दबावों से जूझते दौर के लिए पर्याप्त नहीं है।

विषय-सूची
  1. विकास का नया मॉडल अब क्यों अहम है
  2. विकास की राह में क्या बाधा है
  3. थाईलैंड की वृद्धि के लिए विश्व बैंक की रूपरेखा
  4. मानव पूंजी और कौशल
  5. नवाचार और छोटे कारोबारों की भूमिका
  6. शहर और सार्वजनिक वित्त
  7. निवेश और लचीलेपन के लिए हरित बदलाव
  8. सेवा अर्थव्यवस्था को खोलना
  9. डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत, कौशल की कमी बाधा
  10. सरकार के कदम और मौद्रिक नीति का रुख
  11. क्षेत्रीय स्थिति और व्यापार रणनीति
  12. सफलता कैसी दिख सकती है
  13. मुख्य बिंदु

विश्व बैंक की ताजा सलाह प्रतिस्पर्धा के तीन रूपों—हरित, डिजिटल और सेवा क्षेत्र—और भविष्य की ओर उन्मुख पांच क्षेत्रों पर केंद्रित है। इन क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं, उन्नत और हरित विनिर्माण, नए सिरे से ‘विश्व की रसोई’ बनने की महत्वाकांक्षा के तहत कृषि व्यवसाय, टिकाऊ और वेलनेस पर्यटन तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था शामिल हैं। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए अधिक खुले और प्रतिस्पर्धी बाजार, कौशल का तेजी से उन्नयन और लचीलेपन में भारी निवेश जरूरी होगा। इसमें खास तौर पर जल और बाढ़ प्रबंधन शामिल है, जो समुदायों और कारखानों, दोनों की रक्षा करता है।

विश्व बैंक में थाईलैंड और म्यांमार की विभागीय निदेशक मेलिंडा गुड ने इस समय की तात्कालिकता और पुराने तरीकों की सीमाओं को इन शब्दों में बताया:

थाईलैंड को यहां तक पहुंचाने वाला तरीका उसे आगे उस मुकाम तक नहीं ले जा सकेगा।

थाईलैंड अक्टूबर 2026 में बैंकॉक में IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकें आयोजित करेगा। इस आयोजन में वैश्विक निवेशक और कंपनियों के वरिष्ठ नेता देश आएंगे। यह सुधारों, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और मानव पूंजी के उन्नयन में प्रगति दिखाने की एक तरह की समय-सीमा भी है, जो विकास के अगले अध्याय की नींव बन सकते हैं।

विकास की राह में क्या बाधा है

अर्थशास्त्री अक्सर थाईलैंड की चुनौती को मध्यम आय के जाल के रूप में बताते हैं। यह उन देशों की स्थिति है जो निम्न आय स्तर से तेजी से बढ़े, लेकिन कमजोर उत्पादकता, सीमित नवाचार या बूढ़ी होती आबादी के कारण उच्च आय तक पहुंचने से पहले उनकी वृद्धि धीमी पड़ गई। थाईलैंड की स्थिति भी ऐसी ही है। उत्पादकता वृद्धि धीमी हुई है, निजी निवेश कमजोर पड़ा है और आबादी बूढ़ी हो रही है, जिससे श्रम आपूर्ति और सरकारी वित्त पर दबाव बढ़ता है। सीखने के नतीजे क्षेत्रीय अग्रणी देशों से पीछे हैं, शोध एवं विकास पर खर्च सीमित है और दक्षिण-पूर्व एशिया के समकक्ष देशों की तुलना में सेवा क्षेत्र अपेक्षाकृत बंद है।

डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत है, फिर भी थाई लोगों में से केवल करीब 5 प्रतिशत के पास मध्यवर्ती स्तर के डिजिटल कौशल हैं। यह असंगति कंपनियों के लिए नई तकनीक अपनाना और स्टार्टअप के लिए विस्तार करना कठिन बनाती है। विश्व बैंक का कहना है कि नए विकास का आधार अधिक मूल्यवर्धित गतिविधियां होनी चाहिए—चाहे वे सटीक विनिर्माण हों, जलवायु-अनुकूल कृषि या क्लाउड, डेटा, डिजाइन, गेमिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार योग्य सेवाएं।

वित्तीय दबाव भी दिखाई दे रहे हैं। कई वर्षों में पहली बार बैंक ऋण वृद्धि नकारात्मक हुई है। यह कमजोर मांग और खराब कर्ज बढ़ने के बीच सख्त ऋण मानकों का संकेत है। व्यापार तनाव और पर्यटन की कमजोर आमद के बीच विश्लेषकों ने विकास के अनुमान घटाए हैं। हाल में नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के बावजूद, बैंक ऑफ थाईलैंड ने जोर दिया है कि संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने में मौद्रिक नीति की भूमिका सीमित है।

बैंक ऑफ थाईलैंड के डिप्टी गवर्नर पिति दिसयातत ने इस मुद्दे को स्पष्ट रूप से रखा है:

मौद्रिक नीति की क्षमता सीमित है और समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इससे विकास बाधित न हो।

केंद्रीय बैंक और विश्व बैंक, दोनों का संदेश एक ही बात पर आकर मिलता है। उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले सुधारों के बिना अल्पकालिक प्रोत्साहन और ब्याज दरों में बदलाव से दीर्घकालीन विकास दर नहीं बढ़ेगी।

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थाईलैंड की वृद्धि के लिए विश्व बैंक की रूपरेखा

थाईलैंड के लिए विश्व बैंक की ‘सिस्टमैटिक कंट्री डायग्नोस्टिक अपडेट’ रिपोर्ट सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को जोड़ने वाली पांच प्राथमिकताएं तय करती है। इसमें मानव पूंजी मजबूत करना, अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी और नवोन्मेषी बनाना, माध्यमिक शहरों में विकास बढ़ाना, जलवायु-अनुकूल विकास और राजकोषीय संस्थानों तथा सार्वजनिक वित्त को मजबूत करना शामिल है। हर प्राथमिकता का लक्ष्य उत्पादकता बढ़ाना, असमानता घटाना और झटकों का सामना करने की क्षमता बनाना है।

मानव पूंजी और कौशल

प्रौद्योगिकी-समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिए थाईलैंड को सीखने के नतीजों में बड़ा सुधार करना होगा। विश्व बैंक शिक्षा पर अधिक और बेहतर लक्षित खर्च, पाठ्यक्रमों तथा श्रम बाजार की जरूरतों के बीच मजबूत तालमेल और डिजिटल तथा तकनीकी कौशल की कमी दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर पुनः कौशल प्रशिक्षण की सिफारिश करता है। इसमें उद्योग से जुड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रम, कामकाजी वयस्कों के लिए कम अवधि के माइक्रो-क्रेडेंशियल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। बेहतर बाल देखभाल, स्वास्थ्य सेवा और बुजुर्गों की देखभाल से, खासकर महिलाओं की, श्रम बल में भागीदारी बढ़ सकती है और जनसांख्यिकीय दबाव कम हो सकता है।

इसका लाभ सीधे तौर पर मिलता है। बुनियादी कौशल और डिजिटल दक्षता वाला कार्यबल कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाता है, स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने में मदद करता है और भरोसेमंद प्रतिभा तलाश रहे निवेशकों को आकर्षित करता है। इससे बैंकॉक के बाहर के क्षेत्र भी अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियों के केंद्र बन सकते हैं।

नवाचार और छोटे कारोबारों की भूमिका

नवाचार के लिए कंपनियों को निष्पक्ष और गतिशील बाजार चाहिए। विश्व बैंक प्रतिस्पर्धा के नियम मजबूत करने, कारोबार के लाइसेंस सरल बनाने और स्टार्टअप तथा लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए वित्त तक पहुंच बढ़ाने का आग्रह करता है। यदि पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार हो, प्रतिभा बढ़े और नीतियां नवाचार को प्रोत्साहित करें, तो थाईलैंड के डिजिटल स्टार्टअप हर साल 1.8 अरब डॉलर तक का वेंचर कैपिटल आकर्षित कर सकते हैं। सार्वजनिक शोध वित्तपोषण और शोध एवं विकास के लिए कर प्रोत्साहन कंपनियों को अधिक मूल्यवर्धित उत्पादों और प्रक्रियाओं की ओर प्रेरित कर सकते हैं।

साथ ही, डेटा, निजता और सीमा पार सेवाओं के लिए स्पष्ट और स्थिर नियम डिजिटल सेवा निर्यातकों को जरूरी निश्चितता देंगे। इसमें क्लाउड और डेटा सेंटरों के लिए आधुनिक ढांचा भी शामिल है, जहां प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में पहले से रुचि बढ़ रही है।

शहर और सार्वजनिक वित्त

माध्यमिक शहरों में विकास की संभावनाएं खोलना अधिक व्यापक और समावेशी विकास के लिए केंद्रीय महत्व रखता है। बेहतर परिवहन संपर्क, भरोसेमंद जल और बिजली आपूर्ति तथा क्षेत्र-आधारित निवेश योजनाएं पारंपरिक केंद्रों से बाहर कंपनियों को आकर्षित कर सकती हैं। इन स्थानीय योजनाओं के लिए ऐसा सार्वजनिक वित्त जरूरी है जो पारदर्शी और जवाबदेह हो तथा केंद्र और स्थानीय सरकारों के बीच अच्छी तरह समन्वित हो। विश्व बैंक मजबूत राजकोषीय संस्थानों के महत्व पर जोर देता है, जो सेवाएं पहुंचाने, क्षेत्रीय अंतर घटाने और निजी निवेश को आकर्षित करने में मदद करते हैं।

बाढ़ और सूखे का प्रबंधन इस एजेंडे के केंद्र में है। दीर्घकालीन विकास के लिए ऐसा बुनियादी ढांचा जरूरी है जो चरम मौसम के दौरान कारखानों को चालू, खेतों को उत्पादक और समुदायों को सुरक्षित रखे। पूर्वी आर्थिक गलियारे की जल प्रणालियों का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है। वे उद्योग और आसपास के इलाकों, दोनों की रक्षा करती हैं।

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निवेश और लचीलेपन के लिए हरित बदलाव

जलवायु जोखिम पहले से ही थाईलैंड की अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। विश्व बैंक की ‘कंट्री क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट’ चेतावनी देती है कि अनुकूलन के मजबूत उपाय न होने पर बाढ़, गर्मी का दबाव, पानी की कमी और तटीय कटाव 2050 तक GDP को 7 से 14 प्रतिशत तक घटा सकते हैं। समझदारी भरे कदमों से देश इन जोखिमों को अवसरों में बदल सकता है। स्वच्छ ऊर्जा और परिवहन समय के साथ ऊर्जा लागत घटाते और हवा की गुणवत्ता सुधारते हैं। बेहतर जल और भूमि प्रबंधन आपदा से होने वाला नुकसान कम करते और कृषि उपज बढ़ाते हैं। कार्बन मूल्य निर्धारण और लगातार निवेश से थाईलैंड 2050 तक कार्बन तटस्थता और 2065 तक नेट जीरो के रास्ते पर आ सकता है। अनुकूलन और उत्सर्जन न्यूनीकरण के लक्ष्य पूरे करने के लिए अगले 25 वर्षों में करीब 219 अरब डॉलर की जरूरत होगी, जो संचयी GDP का लगभग 2.4 प्रतिशत है। यह राशि सार्वजनिक बजट, कार्बन राजस्व और निजी पूंजी से जुटाई जाएगी।

हरित अर्थव्यवस्था विकास का एक बाजार भी है। थाईलैंड ऊर्जा-कुशल एयर कंडीशनर का निर्यात करता है, वैश्विक सौर फोटोवोल्टिक मूल्य शृंखला में योगदान देता है और इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन का आधार बना रहा है। फिर भी, कुल निर्यात में हरित उत्पादों का हिस्सा छोटा है। व्यापार बाधाएं कम करने, शुल्कों में बदलाव, मंजूरियों में तेजी और कौशल विकास के नीतिगत कदम 2030 तक हरित निर्यात को GDP के करीब 23 प्रतिशत तक पहुंचा सकते हैं। इससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां बढ़ेंगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और जलवायु प्रौद्योगिकी कंपनियों का दायरा विस्तृत होगा।

कुछ न करने की कीमत बढ़ रही है। शोध में कृषि उत्पादन को कई अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका जताई गई है। समुद्र के बढ़ते तापमान से पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान के कारण मत्स्य क्षेत्र पर बड़ा जोखिम है। तापमान बढ़ने के साथ ठंडक के लिए खर्च लगातार बढ़ेगा और सदी के मध्य तक सालाना 11 से 17 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। बेहतर भूमि उपयोग के बिना जारी वनों की कटाई बाढ़ और कटाव का जोखिम बढ़ाएगी और प्राकृतिक पूंजी को नुकसान पहुंचाएगी। बड़ी बाढ़ सालाना GDP से कई प्रतिशत अंक घटा सकती है, जबकि तटीय कटाव से शहरों और पर्यटन पर लागत बढ़ रही है। केंद्रित योजना से इस रुझान को बदला जा सकता है। शुरुआती चेतावनी प्रणालियां, भूमि उपयोग के नियमों का सख्त पालन, वर्षा जल प्रबंधन के लिए हरित बुनियादी ढांचा और वनीकरण नुकसान घटा सकते हैं और राष्ट्रीय संपदा भी बढ़ा सकते हैं। अनुकूलन पर खर्च GDP के करीब 1.6 प्रतिशत तक हो सकता है। यह बड़ी लागत है, लेकिन इससे कहीं ज्यादा बड़े नुकसान रोके जा सकते हैं। पूर्वी आर्थिक गलियारे में जल के प्रति लचीलापन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे घरों और कारखानों, दोनों को सहारा मिलता है और निवेशकों को भरोसा होता है कि कामकाज सूखे के मौसम और अचानक आए तूफानों में भी जारी रह सकता है।

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सेवा अर्थव्यवस्था को खोलना

वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स से लेकर क्लाउड, कंटेंट और डिजिटल कारोबारी प्रक्रिया के निर्यात तक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ रहा है। क्षेत्रीय समकक्षों की तुलना में थाईलैंड का सेवा क्षेत्र अपेक्षाकृत बंद है। विश्व बैंक का कहना है कि चुनिंदा क्षेत्रों में विदेशी स्वामित्व की सीमाएं ढीली करने, मंजूरी की प्रक्रिया सरल बनाने और सेवाओं के लिए अधिक व्यापक प्रतिबद्धताओं वाले व्यापार समझौते करने से पूंजी, जानकारी और प्रतिस्पर्धा आएगी, जिससे गुणवत्ता बढ़ेगी और कीमतें घटेंगी। अधिक खुला सेवा बाजार थाई उद्यमियों को सिर्फ घरेलू बाजार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्लेटफॉर्म और उत्पाद बनाने में सक्षम करेगा।

व्यावहारिक कदमों में पेशेवर सेवाओं के लिए सरल लाइसेंस, सीमा पार डेटा प्रवाह के स्पष्ट नियम, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश की तेज मंजूरी तथा लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स के ढांचे का आधुनिकीकरण शामिल हैं। इनसे टेलीमेडिसिन और बुजुर्गों की देखभाल से लेकर डिजिटल डिजाइन स्टूडियो और फिनटेक तक, हर क्षेत्र को लाभ होगा; थाईलैंड के पास इन क्षेत्रों में पहले से प्रतिभा और ग्राहक मौजूद हैं।

मेलिंडा गुड ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस अवसर को रेखांकित करते हुए थाईलैंड से निकट भविष्य के रुझानों को स्थायी ताकत में बदलने का आग्रह किया:

थाईलैंड को हरित और डिजिटल बनना होगा, विश्व की रसोई बनना होगा, डिजिटल सेवाओं में नेतृत्व करना होगा और उच्च मूल्यवर्धित सेवा क्षेत्र विकसित करने होंगे।

डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत, कौशल की कमी बाधा

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी कई बुनियादी तत्व थाईलैंड में मौजूद हैं। मोबाइल ब्रॉडबैंड व्यापक रूप से उपलब्ध है, PromptPay लोकप्रिय तत्काल भुगतान प्रणाली है और राष्ट्रीय डिजिटल पहचान से सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है। वैश्विक क्लाउड प्रदाता डेटा सेंटरों में निवेश कर रहे हैं। यदि प्रतिभा तैयार हो और नियम स्पष्ट हों, तो ये डेटा सेंटर क्षेत्रीय सेवा केंद्र की नींव बन सकते हैं।

कौशल की कमी सबसे बड़ी बाधा है। कार्यबल के केवल छोटे हिस्से के पास मध्यवर्ती या उन्नत डिजिटल कौशल हैं, जिससे उत्पादकता और नए औजार अपनाने की क्षमता सीमित होती है। स्कूल सुधार और वयस्कों के कौशल उन्नयन को जोड़ने वाला राष्ट्रीय कार्यक्रम यह स्थिति बदल सकता है। विश्वविद्यालय, तकनीकी कॉलेज और निजी बूटकैंप सॉफ्टवेयर, डेटा विश्लेषण, डिजाइन, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स रखरखाव और हरित तकनीक में छोटे, एक-दूसरे से जुड़ सकने वाले प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम दे सकते हैं। नियोक्ता ऐसे प्रशिक्षण के अवसर बढ़ा सकते हैं जिनमें कर्मचारी काम करते हुए सीखें और कमाएं। छात्रवृत्तियां और मध्य-करियर वजीफे कम आय वाले कर्मचारियों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

प्रतिभा का आधार बढ़ने पर स्टार्टअप की संख्या भी बढ़ेगी। विश्लेषकों का अनुमान है कि कौशल, निवेशक सुरक्षा और नियामकीय स्पष्टता का उचित मेल होने पर थाईलैंड के स्टार्टअप हर साल करीब 1.8 अरब डॉलर का वेंचर निवेश आकर्षित कर सकते हैं। शुरुआती चरण के कोषों को समर्थन देने वाले पूंजी बाजार सुधार, स्टॉक विकल्पों के सरल नियम और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा लागू करने से संस्थापकों को कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। खुले सेवा व्यापार के साथ थाई कंपनियां ASEAN और उससे आगे डिजिटल कंटेंट, सॉफ्टवेयर और कारोबारी सेवाएं बेच सकेंगी।

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सरकार के कदम और मौद्रिक नीति का रुख

सरकार ने अर्थव्यवस्था का रूप बदलने की पहल के संकेत दिए हैं। वित्त मंत्री पिचाई चुनहवाचीरा ने पांच स्तंभों की रूपरेखा रखी है: उत्पादन को इलेक्ट्रिक वाहन और हरित ऊर्जा जैसे भविष्य के उद्योगों की ओर मोड़ना, आधुनिक तकनीकों से कृषि उत्पादकता बढ़ाना, बेहतर बुनियादी ढांचे और सेवाओं के जरिए पर्यटन का उन्नयन करना, जल प्रबंधन से लेकर लॉजिस्टिक्स तक अहम बुनियादी ढांचा तैयार करना और मानव पूंजी को आगे बढ़ाना। राजकोषीय ढांचे में रोजगार सृजन और प्रतिस्पर्धा कार्यक्रमों के लिए धन रखा गया है। विकास को समर्थन देने के लिए बजट घाटे की योजना है, साथ ही कर्ज को प्रबंधनीय स्तर पर रखने का लक्ष्य है। सार्वजनिक ऋण GDP के करीब 60 प्रतिशत पर है। अधिकारियों का कहना है कि मजबूत विकास के साथ इसे स्थिर किया जा सकता है।

नीति निर्माता स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव का मार्गदर्शन करने के लिए कार्बन मानक और क्रेडिट प्रणाली भी तैयार कर रहे हैं। साथ ही, वे कर्ज पुनर्गठन के साधनों और छोटे कर्जदारों के लिए लक्षित राहत पर काम कर रहे हैं। उद्देश्य बदलाव के दौर में कमजोर परिवारों को राहत देना है, लेकिन जरूरी पुनर्गठन की रफ्तार धीमी किए बिना।

ब्याज दरों पर, बैंक ऑफ थाईलैंड ने हाल के फैसलों में नीतिगत दर घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि आगे कोई कटौती तभी होगी जब आर्थिक परिदृश्य स्पष्ट रूप से और काफी कमजोर पड़े या कोई अप्रत्याशित झटका लगे। उनका जोर है कि कमजोर विकास मुख्यतः संरचनात्मक समस्याओं को दिखाता है, मौद्रिक समर्थन की कमी को नहीं। ऋण में गिरावट, गैर-निष्पादित कर्ज में वृद्धि और कमजोर मुद्रास्फीति इस ओर संकेत करते हैं कि अर्थव्यवस्था को निकट भविष्य के समर्थन के साथ उत्पादकता सुधारों की भी जरूरत है।

डिप्टी गवर्नर पिति दिसयातत ने गतिविधियों को बाधित होने से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक के दृष्टिकोण पर भी जोर दिया:

समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इससे विकास बाधित न हो।

क्षेत्रीय स्थिति और व्यापार रणनीति

बाहरी झटकों ने आर्थिक परिदृश्य को जटिल बनाया है। बड़े व्यापार साझेदारों के साथ तनाव और उनके शुल्क निर्यात घटा सकते हैं और विकास को चोट पहुंचा सकते हैं। कुछ परिदृश्यों में साल की दूसरी छमाही में प्रदर्शन नरम रहने का संकेत है। पर्यटन में सुधार हुआ है, लेकिन अलग-अलग स्रोत बाजारों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में असमानता है। चीनी पर्यटकों की संख्या को पिछले उच्च स्तर तक लौटने में समय लग सकता है। ये रुझान विविध व्यापार समझौतों की जरूरत को मजबूत करते हैं, खासकर ऐसे समझौतों की जो सेवाओं, डिजिटल व्यापार और निवेश की बाधाएं घटाएं। डेटा और डिजिटल सेवाओं के लिए नियम-आधारित ढांचा थाई कंपनियों को क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार का मंच देगा।

दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड की भौगोलिक स्थिति अब भी एक रणनीतिक संपत्ति है। बुनियादी ढांचे और जल सुरक्षा में लगातार सुधार हो तो पूर्वी आर्थिक गलियारा उन्नत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्र बन सकता है। स्वास्थ्य और वेलनेस से लेकर संरक्षण से जुड़े इको-टूरिज्म तक, उन्नत पर्यटन अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है और देश भर के छोटे कारोबारों को सहारा दे सकता है।

सफलता कैसी दिख सकती है

सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर थाईलैंड स्थिरता से समझौता किए बिना ऊंची विकास दर की ओर बढ़ सकता है। उत्पादकता बढ़ाने, सेवा क्षेत्र खोलने और कौशल उन्नत करने से वेतन बढ़ेगा और अधिक लचीली नौकरियां बनेंगी। बेहतर बाल देखभाल और पारिवारिक नीतियों से महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी बढ़ेगी, जिससे कार्यबल और घरेलू आय, दोनों का विस्तार होगा। थाईलैंड के लिए विश्व बैंक के अर्थशास्त्री वरुनथॉर्न पुथोंग ने पूरे समाज के साझा प्रयास की जरूरत पर जोर दिया:

बेहतर भविष्य केवल अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं के काम पर निर्भर नहीं करता, इसके लिए सभी के सामूहिक प्रयास की जरूरत है।

2030 तक और उसके बाद सफलता के मापने योग्य संकेतों में हरित और उच्च-प्रौद्योगिकी निर्यात का बढ़ता हिस्सा, अधिक प्रतिस्पर्धी और नवोन्मेषी छोटे कारोबार, निवेश आकर्षित करने वाले मजबूत माध्यमिक शहर और बाढ़ तथा सूखे के जोखिम घटाने वाला जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा शामिल होंगे। इन स्तंभों के मजबूत होने पर 2037 तक उच्च आय वाला देश बनने का लक्ष्य पहुंच के भीतर होगा।

मुख्य बिंदु

  • विश्व बैंक ने थाईलैंड से 2037 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए हरित, डिजिटल और सेवा क्षेत्रों में विकास के नए इंजन तैयार करने का आग्रह किया
  • हाल के वर्षों में GDP की करीब 2 प्रतिशत वृद्धि, उच्च आय बनने की महत्वाकांक्षा के लिए अक्सर जरूरी बताई जाने वाली 5 प्रतिशत की रफ्तार से कम है
  • पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएं, उन्नत और हरित विनिर्माण, कृषि व्यवसाय, टिकाऊ और वेलनेस पर्यटन तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था शामिल हैं
  • सुधारों की रूपरेखा मानव पूंजी, नवाचार और प्रतिस्पर्धा, माध्यमिक शहरों के विकास, जलवायु लचीलेपन और मजबूत सार्वजनिक वित्त पर केंद्रित है
  • मजबूत कनेक्टिविटी और डिजिटल पहचान प्रणालियों के बावजूद केवल करीब 5 प्रतिशत थाई लोगों के पास मध्यवर्ती स्तर के डिजिटल कौशल हैं
  • बेहतर कौशल और नीतिगत समर्थन मिलने पर स्टार्टअप सालाना करीब 1.8 अरब डॉलर का वेंचर कैपिटल आकर्षित कर सकते हैं
  • अनुकूलन के बिना जलवायु जोखिम 2050 तक GDP को 7 से 14 प्रतिशत घटा सकते हैं, जबकि सहायक नीतियों से 2030 तक हरित निर्यात GDP के करीब 23 प्रतिशत तक पहुंच सकता है
  • अनुकूलन और उत्सर्जन न्यूनीकरण के लिए 25 वर्षों में अनुमानित 219 अरब डॉलर, यानी संचयी GDP का करीब 2.4 प्रतिशत, जरूरी होगा
  • सरकार की योजना EV और हरित ऊर्जा, कृषि उन्नयन, पर्यटन की गुणवत्ता, जल और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे तथा मानव पूंजी पर केंद्रित है
  • बैंक ऑफ थाईलैंड की मौद्रिक नीति सहायक बनी हुई है। उसका जोर है कि दीर्घकालीन विकास दर बढ़ाने के लिए सिर्फ ब्याज दरों में कटौती नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं
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