अमेज़न से भी पुराने प्राचीन वन
मलेशिया के उष्णकटिबंधीय वर्षावन पृथ्वी के सबसे पुराने जीवित पारिस्थितिक तंत्रों में शामिल हैं। इनकी आयु अक्सर लगभग 13 करोड़ वर्ष आंकी जाती है। यानी ये अमेज़न से भी पुराने हैं, जिसकी आयु आम तौर पर करीब 5.5 करोड़ वर्ष बताई जाती है। ये येलोस्टोन, सेरेन्गेटी और बान्फ जैसे प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थलों से भी पुराने हैं। तमन नेगारा और गुनुंग ताहान की ऊंची पर्वतशृंखलाओं जैसी जगहों पर जीवन की निरंतरता उस समय तक जाती है, जब डायनासोर धरती पर विचरते थे। यह असाधारण प्राचीनता केवल एक रोमानी कल्पना नहीं है। यह लंबे समय तक दक्षिण-पूर्व एशिया की जलवायु और भू-दृश्यों की असाधारण स्थिरता को दर्शाती है।
विषय-सूची
- अमेज़न से भी पुराने प्राचीन वन
- ये वर्षावन हिमयुगों में कैसे बचे रहे
- आज मलेशिया के वर्षावनों को क्या विशिष्ट बनाता है
- प्रायद्वीपीय मलेशिया के प्रमुख स्थल
- मलेशियाई बोर्नियो का वन्यजीव गढ़
- विज्ञान और खोज की जीवंत प्रयोगशाला
- प्राचीन पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव
- नतीजे देने वाली संरक्षण रणनीतियां
- लोग, आजीविका और पारिस्थितिकी पर्यटन
- यह मलेशिया से कहीं आगे क्यों मायने रखता है
- मुख्य बातें
यूरोप और उत्तरी अमेरिका के उलट, जहां हिमयुग के दौरान विशाल हिमचादरों ने बार-बार पारिस्थितिक तंत्रों को रगड़कर उनका स्वरूप बदल दिया, प्रायद्वीपीय मलेशिया और बोर्नियो भूमध्य रेखा के करीब स्थित हैं। जब हिमनद हजारों किलोमीटर उत्तर में आगे बढ़े, तब भी यह क्षेत्र गर्म और नम बना रहा। इस अंतर ने मलेशिया के वनों को हिमनदों से होने वाली सबसे भीषण क्षति से बचाया। जलवायु ठंडी पड़ने पर भी घाटियों, आड़ वाली ढलानों और नदी-गलियारों में गर्मी और नमी के छोटे क्षेत्र बने रहे। इन प्राकृतिक आश्रयों ने पौधों और जानवरों को परिस्थितियां सुधरने तक जीवित रहने की जगह दी, इसलिए वनों को बिल्कुल नए सिरे से शुरू नहीं करना पड़ा। लाखों वर्षों में उनकी जटिलता लगातार बढ़ती गई।
भूविज्ञान ने भी इसके लिए आधार तैयार किया। इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा सुंडा शेल्फ पर स्थित है, जो महाद्वीपीय भूपर्पटी का एक स्थिर भाग है। यहां के पर्वत, पर्वतशृंखलाएं और नदी-तंत्र जुरासिक और क्रिटेशियस काल में बने। प्राचीन भू-आकृतियों ने अलग-अलग ऊंचाइयों और मिट्टी के प्रकारों में स्थिर आवास बनाए। प्रमुख वृक्ष कुल, डिप्टेरोकार्प, ऊंची छतरियां बनाने लगा, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के वर्षावनों की पहचान हैं। समय और स्थिरता के साथ प्रजातियां ढलानों, घाटियों और पर्वत-शिखरों पर फैलती गईं और जैव विविधता का एक जीवंत भंडार बना, जो वैश्विक स्तर पर दुर्लभ है।
ये वर्षावन हिमयुगों में कैसे बचे रहे
अंतिम हिमनद अधिकतम लगभग 21,000 वर्ष पहले चरम पर था। ऊंचे अक्षांशों में हिमचादरें फैल गईं, समुद्र का स्तर 100 मीटर से अधिक गिर गया और स्थल-सेतुओं ने आज के मलेशिया, बोर्नियो, सुमात्रा और एशियाई मुख्यभूमि को जोड़ दिया। विस्तृत सुंडा शेल्फ में जलवायु उष्णकटिबंधीय बनी रही। मौसमी बारिश जारी रही और नम वन पहाड़ियों तथा आड़ वाले बेसिनों में टिके रहे। हिमनद इतने दक्षिण तक नहीं पहुंचे, इसलिए जहां उपयुक्त सूक्ष्म जलवायु मौजूद थी वहां वर्षावनों की संरचना बरकरार रही।
वैज्ञानिक उन छोटे क्षेत्रों को ‘शरणस्थल’ कहते हैं जहां प्रजातियां ठंडे या शुष्क दौर से बचकर निकल सकीं। मलेशिया में भरोसेमंद जलस्रोतों वाली घाटियां, बादलों की नमी सोखने वाली पर्वतीय ढलानें और नदियों के किनारे के वन प्राकृतिक नौकाओं की तरह काम आए। परिस्थितियां फिर गर्म और नम हुईं तो प्रजातियां दोबारा फैल गईं। सिकुड़ने और विस्तार के बार-बार हुए चक्रों ने जीवन का एक परतदार और लचीला जाल रचा।
यह इतिहास बताता है कि प्राचीन वंशावलियां आज भी क्यों फल-फूल रही हैं। मलेशिया मलायन टैपिर, कई प्रजातियों के धनेश, विशाल फूलों वाली रैफ्लेसिया और कीटभक्षी घटपर्णी पौधों का घर है। वन्य स्तनधारी, पक्षी, उभयचर, कीट और कवक तराई के वनों, पहाड़ी वनों, पर्वतीय वनों, पीट-दलदलों और मैंग्रोव के विविध क्षेत्रों में रहते हैं। पुराने पारिस्थितिक तंत्रों को विविधता और विशेष पारस्परिक संबंध विकसित करने का समय मिला। इसी वजह से यह क्षेत्र दुनिया के जैव विविधता के प्रमुख केंद्रों में से एक है।
आज मलेशिया के वर्षावनों को क्या विशिष्ट बनाता है
प्रायद्वीपीय मलेशिया और मलेशियाई बोर्नियो में जैव विविधता हर पैमाने पर अद्भुत है। केवल प्रायद्वीपीय मलेशिया में ही फूलदार पौधों की 15,000 से अधिक प्रजातियां हैं, और परिपक्व वर्षावन के एक हेक्टेयर में पेड़ों की 300 तक अलग-अलग प्रजातियां हो सकती हैं। मलेशियाई बोर्नियो में पक्षियों की कम से कम 600 प्रजातियां हैं, जिनमें धनेश की आठ प्रजातियां शामिल हैं। मलेशिया को धरती के विशाल जैव-विविधता वाले देशों में गिना जाता है। देश की नीति के तहत कम से कम आधी भूमि को वनाच्छादित रखने की प्रतिबद्धता है। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, मैंग्रोव, पीट-दलदलों, तराई के डिप्टेरोकार्प वनों और पहाड़ी तथा पर्वतीय वनों सहित देश का करीब 54.58 प्रतिशत क्षेत्र, यानी लगभग 1.805 करोड़ हेक्टेयर, वनाच्छादित है।
इस क्षेत्र के प्रसिद्ध वन्यजीवों में गंभीर रूप से संकटग्रस्त मलायन बाघ, एशियाई हाथी, बोर्नियन ओरंगुटान, सूंड वाला बंदर, बौना हाथी, मलायन भालू और धूमिल तेंदुआ शामिल हैं। डिप्टेरोकार्प जैसे विशाल वृक्षों की छतरियां 60 मीटर या उससे अधिक ऊंची हो सकती हैं, जबकि नीचे की परत में ऑर्किड, फर्न और अनेक स्थानिक पौधे उगते हैं। धनेश और प्राइमेट बीज फैलाते हैं, शिकारी शाकाहारी जीवों की संख्या नियंत्रित रखते हैं और असंख्य कीट फूलों का परागण करने तथा पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं। यह वर्षावन गहरे समय में विकसित हुई एक बारीकी से संतुलित व्यवस्था है।
प्रायद्वीपीय मलेशिया के प्रमुख स्थल
पहांग, केलंतान और तेरेंगानु में लगभग 4,300 वर्ग किलोमीटर में फैला तमन नेगारा प्राचीन वर्षावन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। 1938 से संरक्षित इस क्षेत्र में छतरी-मार्ग, रात की सफारी, नदी यात्राएं और कठिन पदयात्राएं उपलब्ध हैं। इनमें ताहान पर्वत पर कई दिनों में पूरी होने वाली चढ़ाई भी शामिल है। जंगल के गहरे ज्ञान वाले स्थानीय समुदाय बातेक का इन भूमियों से सांस्कृतिक जुड़ाव है। पर्यटक आम तौर पर मार्च से सितंबर के बीच यात्रा की योजना बनाते हैं, जब मौसम प्रायः अधिक शुष्क रहता है।
प्रायद्वीपीय मलेशिया के अन्य प्रमुख स्थलों में पेराक का बेलुम तेमेंगोर क्षेत्र शामिल है, जहां इस बड़े परिसर में मलेशिया की धनेश की सभी 10 प्रजातियां पाई जाती हैं। जोहोर और पहांग की सीमा पर स्थित एंडाउ रोमपिन राष्ट्रीय उद्यान अपने ऊबड़-खाबड़ रास्तों, झरनों और पुराने तराई वनों के लिए जाना जाता है। ये क्षेत्र उन वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की झलक देते हैं जो पिछली जलवायु उथल-पुथल से बचकर निकले और आज भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढल रहे हैं।
मलेशियाई बोर्नियो का वन्यजीव गढ़
सबाह और सारावाक में मलेशियाई बोर्नियो में प्राचीन वन के कुछ आखिरी बड़े विस्तार मौजूद हैं। दानुम घाटी संरक्षण क्षेत्र तराई के वर्षावन पारिस्थितिकी के अध्ययन का एक प्रमुख स्थल है। अक्सर सबाह की ‘खोई हुई दुनिया’ कहलाने वाला मालियाउ बेसिन वन और झरनों से घिरे एक दुर्गम प्राकृतिक कटोरे की रक्षा करता है। सबाह का किनाबातांगन बाढ़-मैदान एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र और प्रमुख जैव विविधता क्षेत्र है। यह नदी-गलियारों में आवाजाही करने वाले हाथियों, सूंड वाले बंदरों और ओरंगुटानों के लिए जीवनरेखा है। सबाह में स्तनधारियों की करीब 215 प्रजातियां दर्ज हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत संरक्षण की चिंता का विषय हैं। यह दिखाता है कि समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र भी खंडित होने पर कितने नाजुक हो सकते हैं।
मलेशियाई बोर्नियो में संरक्षण पहलें अब आवासों को फिर से जोड़ने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। केरुआक प्रजाति गलियारा और केरुआक वर्जिन जंगल आरक्षित क्षेत्र जैसी परियोजनाएं वनखंडों को जोड़ने की कोशिश करती हैं, ताकि वन्यजीव भोजन और प्रजनन क्षेत्रों के बीच सुरक्षित रूप से आ-जा सकें। जेंटिंग प्रजाति गलियारा पहल सहित, पुराने बागानों की जमीन पर चल रहे पुनर्स्थापन प्रयास खराब हो चुकी भूमि को फिर से वन-मार्गों में बदल रहे हैं। ये परियोजनाएं नदी के किनारों को स्थिर करती हैं, कटाव घटाती हैं और स्थानीय मत्स्यपालन को सहारा देती हैं, जो आसपास के समुदायों, जिनमें ओरांग सुंगई यानी ‘नदी के लोग’ भी शामिल हैं, के लिए प्रोटीन का अहम स्रोत है।
विज्ञान और खोज की जीवंत प्रयोगशाला
मलेशिया के प्राचीन वन अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख स्थल भी हैं। पेनांग हिल पर कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ साइंसेज और यूनिवर्सिटी साइंस मलेशिया के वैज्ञानिकों वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने वनों और जलधाराओं की जैव विविधता का व्यापक सर्वेक्षण किया। इस काम में मलेशिया में वन-छतरी की जैव विविधता का अध्ययन करने का पहला संगठित प्रयास शामिल था, क्योंकि उष्णकटिबंधीय जीव-जगत का बड़ा हिस्सा जमीन से काफी ऊपर रहता है। शोधकर्ताओं ने पेड़ों की छतरियों के अलग-अलग स्तरों से नमूने इकट्ठा किए और भविष्य के अध्ययन के लिए आधार-आंकड़े तैयार करने हेतु पत्तियों को वनस्पति संग्रहालयों में सुरक्षित रखा। समय के साथ पत्तियों की बनावट, रंध्रों और स्थिर कार्बन समस्थानिकों की तुलना करके शोधकर्ता यह जान सकते हैं कि तापमान, वर्षा और कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में बदलाव पर पेड़ कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। द हैबिटैट में छतरी-मार्ग जैसी शैक्षणिक सुविधाएं आम लोगों को वन की उन परतों का अनुभव कराती हैं, जहां पहले केवल वैज्ञानिक पहुंच पाते थे। वहीं स्थानीय साझेदार इस व्यापक भू-दृश्य को यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे हैं।
ध्वनि सुनने की तकनीक भी संरक्षण का स्वरूप बदल रही है। जैव-ध्वनिकी में मौसमरोधी रिकॉर्डर का इस्तेमाल कर वन के ध्वनि-दृश्य को दर्ज किया जाता है: भोर में गिब्बन की पुकार से लेकर धनेश के पंखों की फड़फड़ाहट और शाम को कीटों तथा मेंढकों के सामूहिक स्वर तक। कई प्रजातियों की पुकार विशिष्ट होती है, इसलिए रिकॉर्डिंग वन्यजीवों पर नजर रखने का गैर-हस्तक्षेपी तरीका देती है। यह तरीका बड़े क्षेत्रों में और लंबे समय तक बहुत कम मानवीय दखल के साथ काम कर सकता है, खासकर जब उपकरण सौर ऊर्जा से चलते हों और दूर से आंकड़े भेज सकें। सबाह में सेफ एकॉस्टिक्स प्रोजेक्ट जैसी पहलें अक्षत वनों की तुलना कटे हुए वनों और बागानों से करने के लिए ध्वनि-संग्रह तैयार कर रही हैं। पेनांग में भी इसी तरह का काम समय के साथ हो रहे बदलावों का दस्तावेजीकरण कर रहा है।
ध्वनि से मिले आंकड़ों का कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ मेल बढ़ रहा है। एल्गोरिदम आरी या ट्रकों की आवाज पहचानना सीख सकते हैं और संभावित अवैध गतिविधियों के बारे में वन रक्षकों को सतर्क कर सकते हैं। हाथियों के आवास वाले क्षेत्रों में ध्वनि संकेतों और आवाजाही के पैटर्न पर आधारित पूर्वानुमान मॉडल समुदायों को चेतावनी दे सकते हैं कि हाथियों के झुंड बागानों के पास आ रहे हैं। इससे संघर्ष घटता है और हाथी भी सुरक्षित रहते हैं। बड़े पैमाने पर ध्वनि की निगरानी आग या सूखे के बाद तनाव का संकेत देने वाली असामान्य खामोशी भी पकड़ सकती है। इस तरह ध्वनि ऐसे सबूत में बदल जाती है जो जमीन पर संरक्षण और पुनर्स्थापन से जुड़े फैसलों का मार्गदर्शन करते हैं।
प्राचीन पारिस्थितिक तंत्र पर दबाव
मलेशिया के वर्षावनों की प्राचीनता उन्हें संकटों से अछूता नहीं बनाती। बोर्नियो में बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में वन विनाश तेजी से बढ़ा और नई सहस्राब्दी में भी जारी रहा। विश्लेषण बताते हैं कि 1973 से 2015 के बीच बोर्नियो का करीब आधा वर्षावन नष्ट हो गया। सबाह और सारावाक में 2002 से 2019 के बीच प्राथमिक वनों का हिस्सा लगभग 17.9 प्रतिशत घटा। इसके मुख्य कारण वन कटाई, बागानों के लिए भूमि परिवर्तन और आग हैं। वन साफ होने पर मिट्टी का कटाव होता है, उसकी उर्वरता घटती है और नदियां भारी मात्रा में तलछट बहाकर ले जाती हैं। वनखंडों का टूटना बड़े आवासों को छोटे, अलग-थलग टुकड़ों में बांट देता है, जो दूर-दूर तक घूमने वाले स्तनधारियों की व्यवहार्य आबादी को सहारा नहीं दे सकते। शिकार का दबाव और वन्यजीवों का व्यापार तनाव बढ़ाते हैं, जबकि जलवायु परिवर्तन के कारण लू और सूखा पड़ने का जोखिम बढ़ता है। इससे पीट-दलदलों में आग लगने की आशंका भी बढ़ जाती है।
ताड़ का तेल इस कहानी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, दोनों के केंद्र में है। मलेशिया और इंडोनेशिया मिलकर वैश्विक बाजार की करीब 87 प्रतिशत आपूर्ति करते हैं। ताड़ के तेल का उपयोग खाद्य पदार्थों, घरेलू सामान, सौंदर्य प्रसाधनों और जैव ईंधन में होता है। इससे कई उत्पादकों की आय बढ़ी है और रोजगार को भी बड़ा सहारा मिला है। साथ ही, बड़े पैमाने पर भूमि परिवर्तन आवासों के विनाश और विखंडन का प्रमुख कारण रहा है। शोध के अनुसार, 2000 के बाद बोर्नियो में साफ किए गए वनों के बड़े हिस्से में ऑयल पाम दोबारा लगाया गया। एक विश्लेषण में पाया गया कि 2000 से 2018 के बीच साफ किए गए वनों का करीब 39 प्रतिशत हिस्सा बागानों में बदल दिया गया। चुनौती यह है कि लोगों की आजीविका को ऐसे भूमि-प्रबंधन के साथ जोड़ा जाए जिससे बाकी बचे प्राचीन वन सुरक्षित खड़े रहें।
नतीजे देने वाली संरक्षण रणनीतियां
संरक्षण का दायरा अब अलग-थलग उद्यानों से आगे बढ़कर उन नेटवर्कों और गलियारों तक जा रहा है जो पूरे भू-दृश्य को आपस में जोड़ते हैं। 2007 में शुरू की गई त्रिराष्ट्रीय हार्ट ऑफ बोर्नियो पहल का लक्ष्य संरक्षित क्षेत्रों और टिकाऊ वन-प्रबंधन के जरिए मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्रुनेई में अक्षत वनों के एक बड़े भूभाग को सुरक्षित रखना है। सबाह में जमीनी स्तर पर केरुआक प्रजाति गलियारा और हुतान जैसे साझेदारों के नेतृत्व में समुदाय-आधारित वनीकरण परियोजनाएं किनाबातांगन नदी के किनारे वनखंडों को जोड़ रही हैं। स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाने से कटाव घटता है, नदी-धाराएं स्थिर रहती हैं, पानी की गुणवत्ता सुधरती है और मत्स्यपालन पर निर्भर समुदायों को बेहतर पकड़ मिलती है। जेंटिंग हाईलैंड्स में क्षेत्रीय कार्यक्रम, प्रकृति फोटोग्राफी और युवा वन-रक्षक गतिविधियां जागरूकता बढ़ा रही हैं। वहीं छोटे वनस्पति पौधे थिस्मिया लिमकोकथायी की हालिया खोज दिखाती है कि कितनी जैव विविधता की खोज और रक्षा अभी बाकी है। इस गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति को सुरक्षित रखने के लिए ऊतक संवर्धन पर काम चल रहा है।
मलेशियाई बोर्नियो के शोध से यह भी पता चलता है कि कटे हुए वन अब भी उच्च संरक्षण मूल्य रखते हैं। मूल वन, कटे हुए वन और ऑयल पाम क्षेत्रों में स्तनधारियों की तुलना करने वाले एक अध्ययन में पाया गया कि कटे हुए क्षेत्रों में बहुत छोटे पैमाने पर प्रजातियों की समृद्धि कम हो सकती है, लेकिन अलग-अलग स्थलों को मिलाकर देखें तो विविधता अक्सर अधिक होती है। पारिस्थितिकी विज्ञानी इसे बीटा विविधता कहते हैं, यानी अलग-अलग स्थानों के बीच प्रजातियों की संरचना में अंतर। पूरे भू-दृश्य के स्तर पर देखें तो बड़े कटे हुए वन पुराने वनों जैसी स्तनधारी प्रजातियों के समुदायों को सहारा दे सकते हैं, बशर्ते शिकार नियंत्रित हो और आगे भूमि परिवर्तन रोका जाए। नीति के लिए यह नतीजा महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि बदले हुए वनों के बड़े इलाकों को अक्षत बनाए रखना, उन्हें बागानों में बदलने से जैव विविधता के लिए कहीं बेहतर है।
लोग, आजीविका और पारिस्थितिकी पर्यटन
स्थानीय समुदाय पीढ़ियों से इन वनों के साथ रहते आए हैं। प्रायद्वीपीय मलेशिया के ओरांग अस्ली, जिनमें तमन नेगारा से जुड़े बातेक समुदाय भी शामिल हैं, खाद्य पौधों, औषधीय जड़ी-बूटियों, वन्यजीवों के व्यवहार और मौसमी चक्रों का ऐसा ज्ञान रखते हैं जो पाठ्यपुस्तकों में नहीं मिलता। फैसले लेने में उनकी भागीदारी और परंपरागत अधिकारों का सम्मान टिकाऊ संरक्षण के लिए जरूरी है। औद्योगिक वन कटाई और तेल निकालने की गतिविधियों ने कुछ समुदायों को विस्थापित किया है और बीमारियां भी फैलाई हैं, जिससे स्वास्थ्य और संस्कृति दोनों को खतरा है। मजबूत सुरक्षा उपाय, साझा प्रबंधन और लाभों का उचित बंटवारा संरक्षण को समुदायों की खुशहाली के साथ जोड़ सकते हैं।
पारिस्थितिकी पर्यटन संरक्षण और आजीविका के बीच एक व्यावहारिक सेतु बन सकता है। प्रायद्वीपीय मलेशिया में पर्यटक तमन नेगारा के छतरी-मार्ग पर चलते हैं, गुफाओं का पता लगाते हैं, केलेह अभयारण्य तक नदी यात्रा करते हैं और उन गाइडों से सीखते हैं जो जानवरों के पदचिह्नों और पक्षियों की पुकार की पहचान बताते हैं। बोर्नियो में सेपिलोक ओरंगुटान पुनर्वास की झलक देता है, जबकि दानुम घाटी संरक्षण क्षेत्र और मालियाउ बेसिन विश्वस्तरीय वर्षावन अनुभव उपलब्ध कराते हैं। सारावाक का गुनुंग मुलु राष्ट्रीय उद्यान अपने कार्स्ट शिखरों और शाम को चमगादड़ों के झुंड के निकलने के दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। पेराक का बेलुम तेमेंगोर क्षेत्र हाउसबोट और वन-पगडंडियों से वन्यजीव देखने का अवसर देता है। जेंटिंग हाईलैंड्स ने प्रकृति-पगडंडियों को अपने आप में आकर्षण के रूप में पेश किया है। थिस्मिया लिमकोकथायी की खोज सावधानीपूर्वक अन्वेषण के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करती है। शोधकर्ताओं, स्थानीय समूहों और निजी साझेदारों के सहयोग से प्रकृति का दस्तावेजीकरण जमीन पर बेहतर संरक्षण में बदला जा सकता है।
जिम्मेदार यात्रा संरक्षण को मजबूत कर सकती है। स्थानीय गाइड चुनना, कचरा न फैलाना, चिह्नित रास्तों पर चलना और वन्यजीवों का सम्मान करना, पर्यटन के प्रभाव को कम रखने में मदद करता है। पर्यटकों का खर्च गाइडों, शोध और उद्यान प्रबंधन में रोजगार को सहारा देता है, जिससे खड़े वन साफ की गई भूमि से अधिक मूल्यवान बनते हैं।
यह मलेशिया से कहीं आगे क्यों मायने रखता है
प्राचीन वर्षावन धरती की बुनियादी प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। उष्णकटिबंधीय वन पृथ्वी की सतह के केवल करीब 6 प्रतिशत हिस्से में फैले हैं, फिर भी उनमें ज्ञात प्रजातियों के आधे से अधिक का निवास है। उनके पेड़ भारी मात्रा में कार्बन जमा करते हैं, वाष्पोत्सर्जन के जरिए हवा को ठंडा रखते हैं और क्षेत्रों में बारिश बनने में मदद करते हैं। मलेशिया में वनाच्छादित जलग्रहण क्षेत्र जल-प्रवाह को नियंत्रित कर नीचे की ओर बाढ़ का जोखिम घटाते हैं। पेड़ों की जड़ें ढलानों और मिट्टी को थामती हैं, जिससे तीव्र तूफानों के दौरान भूस्खलन की आशंका कम होती है। मैंग्रोव लहरें तोड़कर और तलछट रोककर तटीय समुदायों को तूफानी ज्वार से बचाते हैं।
वर्षावनों में विज्ञान और चिकित्सा के लिए भी अपार संभावनाएं हैं। आधुनिक दवाओं के एक चौथाई से अधिक का संबंध ऐसे यौगिकों से है जो पहली बार पौधों में पाए गए थे, लेकिन उष्णकटिबंधीय पौधों की केवल करीब एक प्रतिशत प्रजातियों की औषधीय उपयोग के लिए जांच हुई है। वन खोने का मतलब है संभावनाएं खोना, चाहे वे विज्ञान, खाद्य सुरक्षा या जलवायु के प्रति लचीलेपन से जुड़ी हों। मलेशिया के प्राचीन वर्षावनों को अक्षत रखना एक ऐसी जीवंत व्यवस्था की रक्षा करता है जो स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाती है और वैश्विक स्थिरता में योगदान देती है।
मुख्य बातें
- मलेशिया के वर्षावन करीब 13 करोड़ वर्ष पुराने हैं और अमेज़न से भी प्राचीन हैं।
- भूमध्यरेखीय जलवायु और प्राकृतिक शरणस्थलों ने इस क्षेत्र को उन हिमनदीय बदलावों से बचाया, जिन्होंने उत्तर के कई वनों को मिटा दिया।
- सुंडा शेल्फ की प्राचीन भूगर्भीय संरचना ने प्रजातियों के लंबे समय तक विकसित होने के लिए स्थिर आवास उपलब्ध कराए।
- प्रायद्वीपीय मलेशिया में फूलदार पौधों की 15,000 से अधिक प्रजातियां हैं और प्रति हेक्टेयर 300 तक वृक्ष प्रजातियां मिल सकती हैं।
- मलेशियाई बोर्नियो ओरंगुटान, बौने हाथी, सूंड वाले बंदर, मलायन भालू और धनेश की आठ प्रजातियों का घर है।
- मलेशिया में मैंग्रोव, पीट-दलदल, तराई के डिप्टेरोकार्प वन तथा पहाड़ी और पर्वतीय वनों सहित देश का 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है।
- 1970 के दशक के बाद से बोर्नियो के बड़े वन क्षेत्र वन कटाई, बागानों के विस्तार और आग के कारण नष्ट हुए हैं।
- सबाह में वन्यजीव गलियारों और पुनर्स्थापन परियोजनाओं से ऐसे रास्ते फिर बन रहे हैं जो वन्यजीवों और स्थानीय मत्स्यपालन को सहारा देते हैं।
- जैव-ध्वनिकी और अन्य तकनीकें जैव विविधता पर नजर रखने तथा खतरों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर कम प्रभाव वाले साधन देती हैं।
- शिकार और बागानों में रूपांतरण से बचाए जाने पर कटे हुए वन भी उच्च संरक्षण मूल्य बनाए रखते हैं।






