चीन ने बेहद अहम सैन्य परेड में मिसाइलों और ड्रोन का प्रदर्शन किया, रूस और उत्तर कोरिया के साथ एकजुटता दिखाई

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चीन ने बेहद अहम सैन्य परेड में मिसाइलों और ड्रोन का प्रदर्शन किया, रूस और उत्तर कोरिया के साथ एकजुटता दिखाई

संदेश देने के लिए आयोजित परेड

चीन ने मध्य बीजिंग में वर्षों की अपनी सबसे बड़ी सैन्य परेडों में से एक आयोजित की। इसमें मिसाइलों, ड्रोन, लेजर हथियारों और बख्तरबंद वाहनों का प्रदर्शन किया गया, जिसका निशाना घरेलू दर्शकों से कहीं आगे था। इस भव्य आयोजन का रणनीतिक मकसद था। इसमें नए हथियारों और बड़े पैमाने पर जटिल प्रणालियां बनाने की चीन की क्षमता दिखाई गई, साथ ही रूस और उत्तर कोरिया के साथ राजनीतिक एकजुटता का संकेत भी दिया गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग हजारों लोगों की भीड़ के सामने रूस के व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन के साथ खड़े थे। दो दर्जन से अधिक विदेशी नेता शामिल हुए, जबकि अमेरिका और उसके प्रमुख सहयोगी इससे दूर रहे।

विषय-सूची
  1. संदेश देने के लिए आयोजित परेड
  2. चीन ने क्या दिखाया और यह क्यों अहम है
  3. अड्डों और जहाजों को निशाना बनाने वाली मिसाइलें
  4. लहरों के ऊपर और नीचे ड्रोन
  5. जमीनी और हवाई प्लेटफॉर्म
  6. खुले प्रदर्शन में परमाणु बल
  7. समुद्री योजना: विदेशी नौसेनाओं को दूर रखना
  8. कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और बदलती कमान संस्कृति
  9. युद्धक्षेत्र में ड्रोन क्या बदलाव लाते हैं
  10. कितना असली है और कितना तैयार
  11. मंच पर दिखी भू-राजनीति
  12. ताइवान और अमेरिकी बलों के लिए इसका क्या मतलब है
  13. अब आगे किन बातों पर नजर रखें
  14. मुख्य बातें

प्रदर्शित हथियारों से संकेत मिला कि चीन का ध्यान अमेरिका को रोकने और पूर्वी एशिया के सुरक्षा माहौल को अपने अनुकूल बनाने पर और केंद्रित हो रहा है। इसमें ताइवान के आसपास के जलक्षेत्र भी शामिल हैं। हाइपरसोनिक जहाज-रोधी मिसाइलें, अतिरिक्त बड़े पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों की नई पीढ़ी तियानआनमेन चौक से गुजरी। लड़ाकू विमानों ने आसमान में गर्जना की और पहली बार नई वायु रक्षा तथा अंतरिक्ष-संबंधी प्रणालियां दिखाई गईं।

सैनिकों और गणमान्य अतिथियों को संबोधित करते हुए शी ने इस मौके को राष्ट्रीय दृढ़ता और संकल्प का प्रमाण बताया। उन्होंने देश में लोगों का गौरव जगाने और विदेशों में चेतावनी देने की कोशिश की।

कमांडर-इन-चीफ और केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रमुख के रूप में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए शी ने भीड़ के सामने दुनिया में चीन की जगह को लेकर अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि देश प्रतिद्वंद्वियों से दबने वाला नहीं है।

चीनी राष्ट्र एक महान राष्ट्र है, जिसे कोई भी दबंग कभी डरा नहीं सकता।

यह परेड चीनी हथियार निर्माताओं के लिए वैश्विक प्रदर्शन मंच भी बनी। ग्लोबल साउथ के कई नेताओं की मौजूदगी में बीजिंग ने इस आयोजन के जरिए संभावित खरीदारों को आकर्षित करने और ऐसी साझेदारियां मजबूत करने की कोशिश की, जो वॉशिंगटन की रक्षा योजनाओं को जटिल बना सकती हैं।

चीन ने क्या दिखाया और यह क्यों अहम है

वर्षों तक आलोचक चीनी सैन्य उपकरणों को पश्चिमी डिजाइनों की नकल बताते रहे। परेड से लगा कि वह दौर अब खत्म हो रहा है। प्रदर्शित प्रणालियों में मिसाइलों, मानवरहित प्रणालियों, नौसैनिक वायु रक्षा और बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों के विकास का व्यापक दायरा और तेज रफ्तार दिखी। विश्लेषकों ने आगाह किया कि कुछ प्रणालियां अभी भी प्रोटोटाइप हो सकती हैं या सीमित संख्या में तैनात होंगी। फिर भी, प्रदर्शित प्रणालियों की विविधता और संख्या से ऐसे रक्षा उद्योग का संकेत मिलता है, जो नए डिजाइन तेजी से और बड़ी संख्या में तैयार कर सकता है।

अड्डों और जहाजों को निशाना बनाने वाली मिसाइलें

सबसे उल्लेखनीय जोर लंबी दूरी तक हमले पर था। चीन ने नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल DF-61 के साथ आधुनिकीकृत DF-5C का प्रदर्शन किया। चीनी मीडिया के मुताबिक, यह मिसाइल अलग-अलग लक्ष्यों पर निशाना साधने वाले कई वारहेड ले जा सकती है। DF-31BJ नाम की मिसाइल ने भूमि-आधारित परमाणु बलों के विस्तार और संभावित साइलो तैनाती की ओर संकेत दिया। DF-26D, जहाज-रोधी संस्करण जिसे अक्सर गुआम किलर कहा जाता है, ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी अड्डों और विमानवाहक पोतों के समूहों को निशाना बनाने पर जोर दिखाया।

चीन ने जहाज-रोधी और जमीन पर हमले वाली क्रूज मिसाइलों को भी प्रमुखता दी। YJ-17, YJ-19 और YJ-20 समेत नई YJ श्रृंखला की मिसाइलों को तेज रफ्तार या हाइपरसोनिक खतरे के रूप में पेश किया गया, जिनका मकसद नौसैनिक रक्षा को भेदना है। इन प्रणालियों को अलग-अलग दिशाओं और ऊंचाइयों से पहुंचने के लिए बनाया गया है, जिससे उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। CJ-20A क्रूज मिसाइलों का एक रणनीतिक हमला समूह भी दिखाया गया, जो सटीक पारंपरिक हमलों में निरंतर निवेश का संकेत देता है।

हाइपरसोनिक उड़ान इसलिए अहम है कि ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना तेजी से चलने वाली और अप्रत्याशित ढंग से दिशा बदलने वाली मिसाइल रक्षकों के फैसले लेने का समय घटा सकती है। इससे जहाजों और अग्रिम अड्डों के लिए जोखिम बढ़ता है, भले ही हर नई मिसाइल अभी पूरी तरह सेवा में न आई हो।

लहरों के ऊपर और नीचे ड्रोन

मानवरहित प्रणालियों की प्रमुख भूमिका रही। 18 मीटर से अधिक लंबा, टॉरपीडो के आकार का AJX002 अतिरिक्त बड़ा मानवरहित पानी के भीतर चलने वाला वाहन संकेत देता है कि चीन पानी के नीचे निगरानी करने और संभवतः वहां अपना दबदबा कायम करने की महत्वाकांक्षा रखता है। HSU100 पानी के भीतर चलने वाला ड्रोन, बारूदी सुरंगों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाया गया एक अज्ञात सतही ड्रोन और अन्य रहस्यमय जलमग्न उपकरण कई स्तरों वाले समुद्री रोबोटिक्स कार्यक्रम की ओर इशारा करते हैं।

हवा में, स्टेल्थ GJ-11 फ्लाइंग-विंग और चालक दल वाले लड़ाकू विमानों के साथ काम करने के लिए बनाया गया लॉयल विंगमैन ड्रोन, मानव पायलटों को स्वायत्त सहयोगियों के साथ जोड़ने की कोशिश का संकेत देते हैं। बारूदी सुरंगें हटाने और घायलों को निकालने के लिए रिमोट से नियंत्रित बख्तरबंद छोटी गाड़ियां भी दिखाई गईं। ये सैन्य बल में रोबोटों के व्यापक इस्तेमाल का हिस्सा हैं।

जमीनी और हवाई प्लेटफॉर्म

जमीन पर, नया Type 100 मुख्य युद्धक टैंक गुजरा। सरकारी मीडिया ने इसकी खूबियों को अत्यधिक बुद्धिमान बताया। खबरों के मुताबिक इसमें मानवरहित बुर्ज, उन्नत सेंसर, आने वाली मिसाइलों से सक्रिय सुरक्षा और चालक दल के लिए संवर्धित वास्तविकता के उपकरण हैं। वायु रक्षा खंड में चीन ने LY-1 निर्देशित ऊर्जा हथियार के साथ HHQ-9C, HQ-16C, HQ-10 और HQ-29 जैसी जहाज तथा जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें दिखाईं। चीनी मीडिया ने इन्हें अंतरिक्ष-संबंधी रक्षा की नई परत का हिस्सा बताया। हवाई प्रदर्शन में J-20 और विमानवाहक पोत से उड़ान भरने में सक्षम J-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, KJ-600 पूर्व चेतावनी विमान और Z-20T हमलावर हेलीकॉप्टर शामिल थे।

इनमें से कई प्रणालियों को एकीकृत नेटवर्क के रूप में जोड़ने की योजना है, जो विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी, लक्ष्य निर्धारण और हमले कर सके। विदेशी सेनाओं के लिए मुख्य संदेश यह था कि चीन एशिया में अमेरिकी शक्ति पहुंचाने की क्षमता को सहारा देने वाले जहाजों, विमानों और अड्डों को खतरे में डालना चाहता है।

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खुले प्रदर्शन में परमाणु बल

परेड में पहली बार चीन ने अपनी परमाणु त्रयी के तीनों हिस्सों को एक साथ पेश किया। एक ही गठन में जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें, पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलें और हवा से दागी जाने वाली प्रणाली दिखाई गईं। कई धुरियों वाले परिवाहक वाहन पर रखी बड़ी, तरल ईंधन से चलने वाली DF-5C मिसाइल के बारे में चीनी मीडिया ने कहा कि इसकी मारक दूरी 20,000 किलोमीटर से अधिक है। DF-61 भी दिखाई गई। इसके साथ DF-31BJ थी, जिसे विश्लेषक चीन की सड़क-गतिशील DF-31 का साइलो में तैनाती के अनुकूल संस्करण मानते हैं। चीन की बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों से जुड़ी JL-3 मिसाइल और हवा से दागी जाने वाली परमाणु क्षमता वाली प्रणाली के रूप में पेश की गई JL-1 भी दिखाई गई।

परमाणु त्रयी की अवधारणा किसी परमाणु शक्ति को अधिक भरोसेमंद प्रतिरोधक क्षमता देती है। साइलो या ट्रकों पर तैनात जमीन-आधारित मिसाइलें कुछ हमलों के बाद भी बच सकती हैं। पनडुब्बियां समुद्र में छिप सकती हैं, जिससे उन्हें निशाना बनाना मुश्किल होता है। विमान ऐसा लचीला विकल्प देते हैं, जिन्हें वापस बुलाया या दूसरी दिशा में भेजा जा सकता है। तीनों हिस्से दिखाकर बीजिंग ने अपने परमाणु बलों की बचाव-क्षमता और पहुंच पर भरोसा जताया।

बाहरी अनुमानों के मुताबिक, कुल परमाणु वारहेड की संख्या में चीन अब भी अमेरिका और रूस से काफी पीछे है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स का आकलन है कि चीन के पास अभी करीब 600 वारहेड हैं और यह संख्या बढ़ रही है। विश्लेषकों ने तीन बड़े मिसाइल साइलो क्षेत्रों का निर्माण दर्ज किया है, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 320 साइलो हैं। परेड में DF-31BJ की मौजूदगी ने अमेरिकी आकलनों को बल दिया कि चीन चाहे तो इनमें से कुछ साइलो में मिसाइलें तैनात कर सकता है। बीजिंग सरकार ने इन क्षेत्रों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम कहा है और वारहेड की संख्या भी नहीं बताती।

समुद्री योजना: विदेशी नौसेनाओं को दूर रखना

नई प्रणालियों का एक प्रमुख मकसद पश्चिमी प्रशांत के कुछ हिस्सों में बाहरी नौसेनाओं का संचालन मुश्किल बनाना है। इस अवधारणा को अक्सर एंटी-एक्सेस और एरिया डिनायल कहा जाता है। इसमें जहाज-रोधी मिसाइलों, पनडुब्बियों, बारूदी सुरंगों, ड्रोन और वायु रक्षा के मेल से किसी हस्तक्षेप की कीमत बढ़ाई जाती है। YJ-17, YJ-19 और YJ-20 मिसाइलें DF-26D जैसी जमीन-आधारित बैलिस्टिक प्रणालियों की पूरक होंगी और विमानवाहक पोतों के हमला समूहों तथा रसद जहाजों के लिए कई स्तरों के खतरे पैदा करेंगी। YJ-18C जैसी जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलें बंदरगाहों, हवाई पट्टियों और रडार ठिकानों पर भी दबाव बढ़ाती हैं।

नौसैनिक वायु रक्षा भी प्रदर्शन का हिस्सा थी। कम दूरी की HQ-16C और HQ-10 मिसाइलों के साथ लंबी दूरी की HHQ-9C प्रणाली से संकेत मिलता है कि नौसेना सतही जहाजों के समूहों के लिए अधिक व्यापक सुरक्षा कवच बना रही है। तट पर दिखाई गई LY-1 निर्देशित ऊर्जा प्रणाली का समुद्र में भी परीक्षण किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि चीनी इंजीनियर ड्रोन और छोटी नौकाओं को नष्ट करने के लिए लेजर के इस्तेमाल पर प्रयोग कर रहे हैं।

सिंगापुर के एस. राजरत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में चीन की सशस्त्र सेनाओं के विद्वान जेम्स चार ने कहा कि समुद्री ड्रोन और मिसाइलों का मेल संकट के समय किसी बाहरी प्रतिक्रिया को जटिल बना सकता है।

उनके समुद्री ड्रोन और मिसाइलों का मेल ऐसा क्षेत्र बना देगा, जिसमें बाहरी नौसेनाएं हस्तक्षेप के लिए दाखिल तक नहीं हो पाएंगी।

हमलावर अभियानों के लिए Z-20T जैसे नए हेलीकॉप्टरों और J-35 जैसे विमानवाहक पोत से उड़ान भरने में सक्षम लड़ाकू विमानों की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि नौसेना तटीय रक्षा के साथ उभयचर और दूर-दराज के अभियानों की भी तैयारी कर रही है।

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और बदलती कमान संस्कृति

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर जोर दे रही है। लॉयल विंगमैन ड्रोन को टोह लेने, संचार बाधित करने और यहां तक कि आने वाली मिसाइलों का वार झेलने के लिए बनाया गया है, ताकि पायलट वाले लड़ाकू विमान ज्यादा समय तक सुरक्षित रह सकें। चीनी मीडिया में अक्सर रोबोट भेड़िए कहे जाने वाले चार पैरों के रोबोट शहरी इलाकों में टोह ले सकते हैं, सेंसर ले जा सकते हैं या बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों से गुजर सकते हैं। AJX002 जैसे पानी के नीचे चलने वाले वाहन दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं या चलायमान बारूदी सुरंगें बिछा सकते हैं। यह काफी हद तक हाल के युद्धों से मिले सबक दर्शाता है, जहां सस्ते ड्रोन ने महंगे बख्तरबंद वाहनों और वायु रक्षा की कमजोरियां उजागर की हैं।

परेड में नई टुकड़ियों ने इस दिशा की पुष्टि की। साइबरस्पेस इकाई और 2024 में गठित अलग सूचना सहायता बल ने आयोजन में मार्च किया। उनकी भूमिका नेटवर्क को मजबूत करना, डेटा को एकीकृत करना और तेजी से लक्ष्य तय करने में मदद देना है। चीन की सैन्य संस्कृति अमेरिकी व्यवस्था के मुकाबले अधिक केंद्रीकृत है। इससे सवाल उठता है कि फैसले लेने में स्वायत्तता कितनी दूर तक जाएगी। चीनी योजनाकार युद्धक्षेत्र के करीब तक एआई उपकरणों को ले जाने में सहज दिखते हैं। उनका मानना है कि अगर कमांडर को फैसले पलटने का अधिकार हो, तो तेजी लाभ देती है।

युद्धक्षेत्र में ड्रोन क्या बदलाव लाते हैं

ड्रोन फैसले लेने की समयसीमा घटा देते हैं। वे एक जगह मंडराकर निगरानी कर सकते हैं और फिर कुछ ही सेकंड में मिसाइलों या तोपखाने तक लक्ष्य के निर्देशांक पहुंचा सकते हैं। ड्रोन के झुंड वायु रक्षा की शुरुआती मिसाइलों को भी व्यर्थ कर सकते हैं। लेकिन इसके साथ रखरखाव की जरूरत और संचार बाधित किए जाने का जोखिम भी आता है। जैसे-जैसे चीन और मानवरहित प्रणालियां जोड़ता है, उनकी मरम्मत, सॉफ्टवेयर अपडेट और समन्वय का काम बढ़ता है। परेड में मौजूद विश्लेषकों ने कहा कि रोबोटिक्स कार्यक्रमों की बड़ी संख्या भारी निवेश दिखाती है, लेकिन उनकी लागत और मरम्मत का बोझ भी काफी हो सकता है।

कितना असली है और कितना तैयार

चीन के ताकत दिखाने वाले संदेश के साथ कुछ सावधानियां भी जुड़ी हैं। परेड में ट्रक पर दिखाई गई हर प्रणाली बड़ी संख्या में तैनात नहीं है या युद्ध के लिए पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। कुछ मिसाइलों और ड्रोन को चलते हुए नहीं दिखाया गया। चीन की पिछली परेडों में भी ऐसी प्रणालियां शामिल रही हैं, जिन्हें पूरी तरह विकसित होने में वर्षों लगे। दुनिया भर में होने वाले सैन्य प्रदर्शनों में यह असामान्य नहीं है, लेकिन इससे याद रहता है कि किसी प्रोटोटाइप को डिजाइन करना और उसे बड़े पैमाने पर तैनात करना अलग-अलग चुनौतियां हैं।

ताइपे स्थित एसोसिएशन ऑफ स्ट्रैटेजिक फोरसाइट के शोधकर्ता चीह चुंग ने आगाह किया कि कुछ नए उपकरण अब भी सैन्य इकाइयों में शुरुआती चरण में हो सकते हैं।

कुछ हथियारों की इकाइयों में तैनाती अब भी सीमित हो सकती है, तैनाती के दौरान उनका मैदानी परीक्षण चल रहा हो सकता है और वे अभी पूरी तरह मानकीकृत या बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार न हों।

सिंगापुर के सुरक्षा विश्लेषक अलेक्जेंडर नील ने कहा कि कुछ प्रणालियां अभी पूरी तरह विकसित न होने के बावजूद विदेशी रक्षा योजनाकारों को परेड की कई बातों पर गौर करना होगा।

चीन हर मोर्चे पर तकनीकी प्रगति और सैन्य ताकत का संदेश दे रहा था। प्रतिद्वंद्वी देशों के रक्षा योजनाकारों के सामने सचमुच कई बातों पर विचार करने की चुनौती है।

नील ने यह भी कहा कि प्रदर्शन का कुछ हिस्सा संभावित ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए था।

मुझे लगता है कि इसमें चीन की इस तकनीक को दूसरी सेनाओं को बेचने की उत्सुकता का पहलू भी है... आखिर यहां कुछ दिखावटी तामझाम भी था।

हर सेना को नए डिजाइन और उन्हें इस्तेमाल करने में सक्षम प्रशिक्षित, एकीकृत इकाइयों के बीच की दूरी पाटनी पड़ती है। अमेरिकी सेना में अक्सर निचले स्तर के अधिकारियों को अधिक स्वतंत्रता दी जाती है, जिससे युद्ध में वह अधिक फुर्तीली हो सकती है। चीन की अधिक केंद्रीकृत व्यवस्था उत्पादन और लामबंदी तेज कर सकती है, लेकिन लड़ाई अराजक होने पर तुरंत बदलती परिस्थितियों के मुताबिक कदम उठाना धीमा पड़ सकता है। असल प्रदर्शन का फैसला इसी संतुलन से होगा।

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मंच पर दिखी भू-राजनीति

दुनिया का ध्यान खींचने वाली तस्वीर में शी, पुतिन और किम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। तीनों पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साथ दिखे। यह दृश्य महज समारोह से बढ़कर संदेश दे रहा था। यूक्रेन पर हमले के बाद रूस चीन पर अधिक निर्भर हो गया है। उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार दिए हैं और अलग-थलग पड़ने से राहत चाहता है। बीजिंग में तीनों देशों की एकजुटता ने संकेत दिया कि तनाव बढ़ने पर अमेरिका को अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वित दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

परेड के बाद रूसी मीडिया ने खबर दी कि पुतिन ने किम से दो घंटे से अधिक मुलाकात की और उन्हें रूस आने का न्योता दिया। मेहमानों की व्यापक सूची में ईरान और म्यांमार के नेता तथा पाकिस्तान के अधिकारी शामिल थे। पश्चिमी देशों के नेता शामिल नहीं हुए। इस अंतर ने प्रशांत महासागर के दोनों ओर मजबूत होते समानांतर गुटों की तस्वीर को और उभारा।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस दृश्य को शत्रुतापूर्ण गठजोड़ बताया।

कृपया व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं दें, क्योंकि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

शी ने मेहमान नेताओं के लिए भोज रखा और अपने संबोधन में राष्ट्रवादी स्वर अपनाया। उन्होंने सैनिकों से कहा कि चीन का उत्थान रोका नहीं जा सकता। सरकारी मीडिया ने परमाणु त्रयी को देश का रणनीतिक तुरुप का पत्ता कहा। इस मुहावरे का मकसद घरेलू दर्शकों के सामने शांत आत्मविश्वास दिखाना और विरोधियों को दो बार सोचने की चेतावनी देना था।

ताइवान और अमेरिकी बलों के लिए इसका क्या मतलब है

प्रदर्शित प्रणालियों को इस तरह बनाया गया है कि चीन के पास या ताइवान की मदद में काम कर रही अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के जोखिम बढ़ें। DF-26D और YJ श्रृंखला के जहाज-रोधी हथियार लंबी दूरी से विमानवाहक पोतों को निशाना बनाने के लिए बनाए गए हैं। जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलें उन हवाई अड्डों, बंदरगाहों और रडार ठिकानों को निशाना बना सकती हैं, जो शुरुआती चेतावनी और रसद आपूर्ति में मदद करते हैं। पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन संभावित मार्गों पर टोह ले सकते हैं या बारूदी सुरंगें बिछा सकते हैं।

प्रतिरोध इस बात पर निर्भर करता है कि चीन इनमें से कितने हथियार तैनात कर सकता है और लड़ाई में वे कितनी देर तक काम करने की स्थिति में रहेंगे। अमेरिका और उसके सहयोगी भी अपने जवाबी उपायों में निवेश कर रहे हैं। इनमें जहाजों पर लेजर और बेहतर मिसाइल रक्षा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और धोखे के लक्ष्य शामिल हैं। अलग-अलग जगहों पर सैन्य ठिकाने फैलाने की रणनीति, मजबूत आश्रय और हवाई पट्टियों की तेजी से मरम्मत शुरुआती हमलों से होने वाले नुकसान को सीमित कर सकती है। पनडुब्बियां अमेरिका का अहम लाभ बनी रहेंगी। उनका पता लगाना मुश्किल है और वे अप्रत्याशित दिशाओं से हमला कर सकती हैं।

सैन्य संचालन की संस्कृति भी मायने रखती है। अमेरिकी इकाइयां अक्सर मिशन कमान का अभ्यास करती हैं, जिसमें संचार टूटने पर कनिष्ठ अधिकारियों को तेजी से हालात के मुताबिक कदम उठाने की छूट होती है। चीन की इकाइयों का प्रशिक्षण और अभ्यास बेहतर हो रहा है, लेकिन उसकी अधिक केंद्रीकृत व्यवस्था में युद्धक्षेत्र पर अचानक बदलावों की गुंजाइश कम हो सकती है। चीन की ताकत संख्या, औद्योगिक उत्पादन और तेजी से आधुनिक हो रहे डिजाइनों में है। इन खूबियों को युद्धक्षेत्र में असरदार क्षमता में बदला जा सकता है या नहीं, दोनों पक्षों के योजनाकारों के लिए यही मुख्य सवाल है।

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अब आगे किन बातों पर नजर रखें

तीन पहलुओं पर करीबी नजर रखनी होगी। पहला है उत्पादन। अगर YJ-19, YJ-17 और अन्य मिसाइलें छोटे बैच से निकलकर व्यापक तैनाती तक पहुंचती हैं, तो जहाजों और अड्डों के जोखिम का आकलन बदल जाएगा। दूसरा है एकीकरण। साइबरस्पेस और सूचना इकाइयों को दबाव में सेंसर, हथियार प्रणालियों और फैसला लेने के औजारों को एक सुसंगत ढांचे में जोड़ना होगा। तीसरा है निर्यात। परेड बिक्री का मंच भी बनी। पश्चिमी हथियारों के सस्ते विकल्प तलाश रहे देश चीनी ड्रोन, वायु रक्षा या बख्तरबंद वाहन चुन सकते हैं। इससे बीजिंग का प्रभाव बढ़ेगा और नई आपूर्ति शृंखलाएं बनेंगी।

चीन ने 1979 के बाद से कोई युद्ध नहीं लड़ा है, लेकिन 1990 के दशक से उसका रक्षा बजट कई गुना बढ़ा है और वह ताइवान के पास अक्सर सैन्य अभ्यास करता है। परेड का मकसद नागरिकों को भरोसा दिलाना था कि देश मजबूत है और प्रतिद्वंद्वियों को चेताना था कि कोई भी संघर्ष महंगा पड़ेगा। इन हथियारों में से कई को अब भी वास्तविक परिस्थितियों में खुद को साबित करना है। हालांकि, रुझान साफ है। चीन मिसाइलों और मानवरहित प्रणालियों पर दांव लगा रहा है, ताकि विरोधियों को अपने तटों से दूर रखा जा सके और पूरे क्षेत्र में अहम ठिकानों को निशाने के दायरे में लाया जा सके।

मुख्य बातें

  • शी जिनपिंग ने बीजिंग में बड़ी परेड की अध्यक्षता की, जिसमें हाइपरसोनिक जहाज-रोधी मिसाइलें, नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें और कई तरह के ड्रोन तथा लेजर हथियार दिखाए गए।
  • रूस के व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन, शी के साथ खड़े हुए। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों को निशाना बनाकर दिखाई गई राजनीतिक एकजुटता थी।
  • चीन ने परमाणु त्रयी के तीनों हिस्से दिखाए, जिनमें DF-61, DF-5C, DF-31BJ, JL-3 और हवा से दागी जाने वाली JL-1 शामिल थीं।
  • नई YJ श्रृंखला की जहाज-रोधी मिसाइलें और DF-26D विमानवाहक पोतों तथा गुआम जैसे अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई हैं।
  • मानवरहित प्रणालियों की प्रमुख मौजूदगी रही। इनमें अतिरिक्त बड़ा AJX002 पानी के भीतर चलने वाला ड्रोन, स्टेल्थ लड़ाकू ड्रोन GJ-11 और चार पैरों वाले रोबोट शामिल थे।
  • HHQ-9C, HQ-16C और HQ-10 जैसी नौसैनिक वायु रक्षा प्रणालियां तथा LY-1 लेजर चीनी बेड़े के लिए कई परतों वाला सुरक्षा कवच बनाने की कोशिश दिखाते हैं।
  • Type 100 मुख्य युद्धक टैंक पहली बार दिखाया गया। इसमें मानवरहित बुर्ज, सक्रिय सुरक्षा और उन्नत सेंसर हैं।
  • नई साइबरस्पेस और सूचना सहायता इकाइयों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सेंसर और हथियार प्रणालियों को जोड़ने की कोशिश पर जोर दिया।
  • विश्लेषकों ने आगाह किया कि कुछ प्रणालियों की तैनाती सीमित हो सकती है या उनका मैदानी परीक्षण चल रहा हो सकता है। उनका एकीकरण और प्रशिक्षण अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।
  • चीन के हमलावर सैन्य तंत्र का जवाब देने की तैयारी के बीच अमेरिका के पास पानी के नीचे युद्ध और लचीली कमान में अब भी बढ़त है।
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