परिचय: कोरियाई श्रम जगत का नया दौर
दक्षिण कोरिया का श्रम परिदृश्य कई दशकों के अपने सबसे बड़े बदलाव से गुजर रहा है। 24 अगस्त, 2025 को नेशनल असेंबली ने भारी बहुमत से तथाकथित ‘येलो एनवेलप विधेयक’—यानी ट्रेड यूनियन एंड लेबर रिलेशंस एडजस्टमेंट एक्ट (TULRAA) में संशोधन—पारित किया। मार्च 2026 में लागू होने वाले इस कानून का मकसद उपठेका कर्मचारियों, अनियमित श्रमिकों और प्लेटफॉर्म कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाकर श्रम बाजार में गहराई से जमी असमानताओं को दूर करना है। साथ ही, यह कंपनियों को हड़ताल से हुए नुकसान के लिए यूनियनों से हर्जाना मांगने से रोकता है। विधेयक का पारित होना श्रमिक कार्यकर्ताओं के 20 साल के अभियान का परिणाम है और इससे श्रमिकों, नियोक्ताओं तथा राज्य के बीच संबंधों का समीकरण पहले ही बदलने लगा है।
विषय-सूची
- परिचय: कोरियाई श्रम जगत का नया दौर
- येलो एनवेलप विधेयक क्या है?
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुकदमों से कानून तक
- प्रमुख प्रावधान: कानून श्रम संबंधों को कैसे बदलता है
- 1. “कर्मचारी” और “नियोक्ता” की विस्तृत परिभाषाएं
- 2. श्रम विवादों और हड़तालों का विस्तृत दायरा
- 3. कंपनियों के हर्जाने के दावों पर रोक
- 4. उपठेका और प्लेटफॉर्म कर्मियों को सीधे बातचीत का अधिकार
- तत्काल असर: यूनियन गतिविधियों में तेजी
- मामले का अध्ययन: आईटी क्षेत्र और प्लेटफॉर्म आधारित काम
- कारोबार जगत का विरोध: अनिश्चितता और बढ़ती लागत की आशंका
- लघु और मध्यम उद्यमों पर खास चिंता
- कानूनी और नीतिगत विश्लेषण: विशेषज्ञों की राय
- सरकार की प्रतिक्रिया: बदलाव के दौर का प्रबंधन
- व्यापक मायने: क्या श्रम बाजार अधिक न्यायसंगत होगा?
- अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
- संक्षेप में
येलो एनवेलप विधेयक क्या है?
येलो एनवेलप विधेयक, TULRAA के अनुच्छेद 2 और 3 में संशोधनों के एक पैकेज को कहा जाता है। इसका उपनाम उन पीले लिफाफों से आया है जिनका इस्तेमाल नागरिकों ने 2009 की हड़ताल के बाद भारी-भरकम मुकदमों का सामना कर रहे स्सांगयोंग मोटर के कर्मचारियों को चंदा भेजने के लिए किया था। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का उद्देश्य है:
- “कर्मचारी” और “नियोक्ता” की कानूनी परिभाषाओं का दायरा बढ़ाना,
- श्रम विवाद के दायरे का विस्तार करना,
- औद्योगिक कार्रवाई से हुए नुकसान के लिए यूनियनों और श्रमिकों की जवाबदेही सीमित करना या उनसे छूट देना,
- उपठेका और प्लेटफॉर्म कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियनों को उन मूल कंपनियों से सीधे बातचीत करने का अधिकार देना, जिनका कामकाजी स्थितियों पर पर्याप्त नियंत्रण है।
ये बदलाव खास तौर पर उन उद्योगों के लिए अहम हैं जहां उपठेके की कई परतें हैं, जैसे जहाज निर्माण, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और तेजी से बढ़ती प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुकदमों से कानून तक
येलो एनवेलप विधेयक की जड़ें 1990 के दशक तक जाती हैं, जब सरकारी निर्देश में कंपनियों को हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ एक औजार के तौर पर दीवानी मुकदमे इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इसके बाद हर्जाने के दावों की बाढ़ आ गई और कई यूनियन सदस्यों पर आर्थिक तबाही का खतरा मंडराने लगा। 2009 में स्सांगयोंग मोटर की हड़ताल, जिसमें 2,600 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी चली गई और यूनियन पर 300 अरब वॉन से ज्यादा का मुकदमा किया गया, देशव्यापी विवाद का केंद्र बन गई। कर्मचारियों और उनके परिवारों की मुश्किलों पर लोगों में उपजे आक्रोश ने येलो एनवेलप अभियान को जन्म दिया। इस अभियान ने चंदा जुटाया और कानूनी सुधार के समर्थन को मजबूत किया।
कई नाकाम कोशिशों और राष्ट्रपति के दो वीटो के बाद, राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन से यह विधेयक आखिरकार 2025 में पारित हुआ। कानून के पारित होने पर श्रमिक संगठनों ने जश्न मनाया, जबकि कारोबारी संगठनों और रूढ़िवादी नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया।
प्रमुख प्रावधान: कानून श्रम संबंधों को कैसे बदलता है
येलो एनवेलप विधेयक दक्षिण कोरिया के श्रम कानून के ढांचे में कई बड़े बदलाव लाता है:
1. “कर्मचारी” और “नियोक्ता” की विस्तृत परिभाषाएं
पहले केवल प्रत्यक्ष नियोक्ताओं के लिए यूनियनों से बातचीत करना अनिवार्य था। नए कानून में “नियोक्ता” की परिभाषा का विस्तार करके इसमें किसी भी ऐसी इकाई को शामिल किया गया है जो कर्मचारी के काम या कामकाजी परिस्थितियों पर पर्याप्त और विशिष्ट नियंत्रण रखती हो। इसका मतलब है कि यदि मूल कंपनियां रोजगार की प्रमुख शर्तें तय करती हैं, तो केवल उपठेकेदार ही नहीं, वे भी श्रम संबंधी बातचीत के लिए जवाबदेह हो सकती हैं।
इसी तरह, “कर्मचारी” की परिभाषा में ऐसे किसी भी व्यक्ति को शामिल किया गया है जो किसी और के कारोबार के लिए श्रम देता है या यूनियन बनाता है अथवा उसमें शामिल होता है। इससे प्लेटफॉर्म कर्मियों, फ्रीलांसरों और स्वरोजगार करने वालों को स्पष्ट रूप से दायरे में लाया गया है। ये समूह ऐतिहासिक रूप से पारंपरिक श्रम सुरक्षा से बाहर रहे हैं।
2. श्रम विवादों और हड़तालों का विस्तृत दायरा
कानून श्रम विवाद की परिभाषा को बढ़ाकर इसमें वेतन और काम के घंटों के अलावा प्रबंधन के फैसलों—जैसे पुनर्गठन, बड़े पैमाने पर छंटनी, कारखानों को दूसरी जगह ले जाना और कारोबार बंद करना—को भी शामिल करता है। ऐसे फैसलों के खिलाफ हड़तालें, जिन्हें पहले गैरकानूनी माना जाता था, अब वैध औद्योगिक कार्रवाई मानी जाएंगी। यह बदलाव उन असुरक्षित स्थिति वाले कर्मचारियों के लिए खास तौर पर अहम है, जिनकी रोजगार स्थिति में अचानक बदलाव का खतरा सबसे अधिक रहता है।
3. कंपनियों के हर्जाने के दावों पर रोक
पुरानी व्यवस्था के सबसे विवादास्पद पहलुओं में से एक था कि हड़ताल के दौरान हुए नुकसान के लिए कंपनियां यूनियनों और अलग-अलग कर्मचारियों पर भारी-भरकम हर्जाने के मुकदमे कर सकती थीं। येलो एनवेलप विधेयक इस चलन पर रोक लगाता है:
- नियोक्ताओं को यूनियनों को डराने या उनका काम बाधित करने के इरादे से हर्जाना मांगने से रोककर,
- हर्जाना तय करने से पहले अदालतों के लिए आनुपातिकता, हर व्यक्ति की भूमिका और उसकी आर्थिक स्थिति पर विचार करना अनिवार्य करके,
- अलग-अलग कर्मचारियों के बीच जवाबदेही का बंटवारा केवल तभी संभव करके, जब गलती के ठोस सबूत हों,
- “आत्मरक्षा” का सिद्धांत लागू करके: यदि नियोक्ता के गैरकानूनी आचरण से कर्मचारियों को बचाने का हड़ताल ही एकमात्र तरीका था, तो हर्जाना माफ होगा।
यूनियनों को पूरी तरह जवाबदेही से छूट नहीं मिलती, लेकिन नियोक्ताओं के लिए मुकदमा करना अब कहीं कठिन होगा और हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के आर्थिक रूप से बर्बाद होने का जोखिम काफी कम हो जाएगा।
4. उपठेका और प्लेटफॉर्म कर्मियों को सीधे बातचीत का अधिकार
शायद सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उपठेका या प्लेटफॉर्म कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियनें मूल कंपनी से बातचीत की मांग कर सकती हैं, बशर्ते उसका कामकाजी स्थितियों पर पर्याप्त नियंत्रण हो। इससे उन उद्योगों की पुरानी समस्या का समाधान करने की कोशिश की गई है जहां बड़े समूह वेतन और सुरक्षा मानक तय करते हैं, लेकिन छोटे कारोबारों को उपठेका देकर जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।
मिसाल के तौर पर, जहाज निर्माण उद्योग में एक ही समूह के शिपयार्ड में दर्जनों उपठेकेदार काम करते हैं। नए कानून के तहत, अगर मूल कंपनी रोजगार की प्रमुख शर्तें तय करती है, तो उसे अब बातचीत की मेज पर आना होगा।
तत्काल असर: यूनियन गतिविधियों में तेजी
कानून पारित होने के बाद दक्षिण कोरिया में उपठेकेदारों की यूनियनों ने मांगों की झड़ी लगा दी है। हुंडई स्टील में यूनियन से जुड़े उपठेका कर्मचारियों ने सीधे बातचीत और हर्जाने के मुकदमों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रदर्शन किए। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में उपठेका कर्मचारियों की यूनियन ने बकाया वेतन के विवाद में दखल देने की मांग की। नेवर, SK hynix और बड़े डिपार्टमेंट स्टोर समूहों में भी ऐसी ही कार्रवाइयों की खबरें आई हैं।
श्रमिक संगठन इस कानून को शक्ति के असंतुलन को दूर करने की लंबे समय से लंबित कोशिश मानते हैं। कोरियन कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस के मुताबिक, यह विधेयक “कार्यकर्ताओं के दो दशकों के बलिदान का नतीजा” और श्रमिक अधिकारों की ऐतिहासिक उपलब्धि है।
मामले का अध्ययन: आईटी क्षेत्र और प्लेटफॉर्म आधारित काम
येलो एनवेलप विधेयक का असर पारंपरिक विनिर्माण तक सीमित नहीं है। आईटी क्षेत्र में नेवर की सहायक कंपनियों की सहायक इकाइयों के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियनों ने प्रबंधन से बातचीत की मांग को लेकर रैलियां की हैं। डिलीवरी चालक और गिग अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लोगों जैसे प्लेटफॉर्म कर्मियों को अब कानून में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इससे वे उन कंपनियों से बातचीत की मांग कर सकते हैं जो वेतन तय करने वाले एल्गोरिदम और काम बांटने की प्रणालियों को नियंत्रित करती हैं।
अधिकारों के इस विस्तार का असर उन उद्योगों में भी दिखने की उम्मीद है जो लचीले और अनियमित श्रम पर निर्भर रहे हैं। कंपनियों को काम करने वाले लोगों के साथ अधिक सीधे तौर पर जुड़ना होगा।
कारोबार जगत का विरोध: अनिश्चितता और बढ़ती लागत की आशंका
श्रमिक संगठनों ने कानून के पारित होने का स्वागत किया है, लेकिन कारोबारी नेताओं और विदेशी निवेशकों ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। कोरिया एंटरप्राइजेज फेडरेशन और कोरिया चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री समेत छह बड़े उद्योग संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर विधेयक की निंदा की। उनका कहना है कि:
- “नियोक्ता” की विस्तृत परिभाषा से श्रम विवादों का प्रबंधन कठिन हो सकता है और कार्यस्थल का अनुशासन बिगड़ सकता है,
- प्रबंधन के लगभग सभी फैसलों के खिलाफ हड़ताल संभव हो सकती है,
- कानूनी अनिश्चितता से कंपनियों के फैसले ठप पड़ सकते हैं, खासकर जटिल आपूर्ति श्रृंखलाओं वाले उद्योगों में,
- श्रम लागत में बढ़ोतरी और संभावित देरी से विनिर्माण, वाहन, जहाज निर्माण और इस्पात क्षेत्रों में कोरिया की प्रतिस्पर्धात्मकता को खतरा हो सकता है।
अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स इन कोरिया (AMCHAM) जैसे विदेशी कारोबारी समूहों ने भी चिंता जताई है। AMCHAM के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेम्स किम ने कहा कि “एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कारोबारी केंद्र के रूप में कोरिया की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए लचीला श्रम वातावरण जरूरी है।” GM Korea समेत कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने संकेत दिया है कि कारोबारी माहौल कम अनुमानित हुआ तो वे देश में अपने कामकाज की फिर से समीक्षा कर सकती हैं।
लघु और मध्यम उद्यमों पर खास चिंता
लघु और मध्यम उद्यम (SMEs), जो अक्सर खुद भी उपठेकेदार के तौर पर काम करते हैं, खासे चिंतित हैं। कई को डर है कि किसी एक आपूर्तिकर्ता की हड़ताल से आपस में गहराई से जुड़ी उत्पादन श्रृंखलाओं पर असर पड़ सकता है और बड़े पैमाने पर कामकाज बाधित हो सकता है। कुछ कारोबारी नेताओं का कहना है कि कौन नियोक्ता माना जाएगा, इस बारे में कानून की अस्पष्टता से भ्रम और अनचाहे नतीजे पैदा हो सकते हैं।
कानूनी और नीतिगत विश्लेषण: विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि येलो एनवेलप विधेयक उन रुझानों को कानून का रूप देता है जो कोरियाई अदालतों में पहले से उभर रहे थे। अदालतों ने विशेष प्रकार के कामगारों और प्लेटफॉर्म कर्मियों के यूनियन बनाने तथा सामूहिक बातचीत करने के अधिकारों को लगातार मान्यता दी है। यह कानून स्पष्टता और एकरूपता लाता है, लेकिन साथ ही ऐसे नए कानूनी सवाल भी खड़े करता है जिनका संभवतः अदालतों में परीक्षण होगा।
मिसाल के तौर पर, “नियोक्ता” की विस्तृत परिभाषा के चलते मूल कंपनियों को उपठेका यूनियनों से बातचीत करनी पड़ सकती है, भले ही उनके बीच कोई सीधा अनुबंध न हो। अदालतों को तय करना होगा कि कामकाजी स्थितियों पर “पर्याप्त और विशिष्ट नियंत्रण” का क्या अर्थ है। इसका मानक उद्योग और परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है।
कानून “शांति दायित्वों” की प्रथा भी खत्म करता है। पहले इसके तहत सामूहिक समझौतों में शामिल मुद्दों पर यूनियनों को हड़ताल करने से रोका जाता था। अब यूनियनें ऐसे समझौतों की व्याख्या या अमल से असहमत होने पर हड़ताल कर सकती हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया: बदलाव के दौर का प्रबंधन
भ्रम और टकराव की आशंका को देखते हुए सरकार ने कानून लागू होने से पहले छह महीने की संक्रमण अवधि घोषित की है। इस दौरान श्रमिकों, कारोबार और सरकार के प्रतिनिधियों वाली एक टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो:
- कार्यस्थलों से सुझाव जुटाएगी,
- नियोक्ता और श्रम विवाद की परिभाषाओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करेगी,
- श्रम ढांचे की कई परतों वाले उद्योगों में बातचीत के लिए मौके पर सहायता देगी,
- गैरकानूनी श्रम व्यवहारों की जांच समेत नियमों के अनुपालन की निगरानी और उसे लागू करेगी।
श्रम मंत्रालय जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त बातचीत के मॉडल को आजमाने की योजना बना रहा है, ताकि औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखते हुए उपठेका कर्मचारियों की सुरक्षा की जा सके।
व्यापक मायने: क्या श्रम बाजार अधिक न्यायसंगत होगा?
दक्षिण कोरिया के श्रम बाजार में लंबे समय से गहरी खाई रही है। बड़े कारोबारी समूहों के नियमित कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, ऊंचा वेतन और मजबूत यूनियनों का लाभ मिलता है, जबकि अनियमित, उपठेका और प्लेटफॉर्म कर्मियों को कम वेतन, कमजोर प्रतिनिधित्व और कानूनी सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ता है। येलो एनवेलप विधेयक का मकसद रोजगार के प्रकार की परवाह किए बिना सभी कर्मचारियों को संगठन बनाने, सामूहिक बातचीत करने और हड़ताल करने के अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का अवसर देकर इस खाई को पाटना है।
अगर यह सफल रहा, तो कानून श्रम संबंधों के अधिक परिपक्व और कम टकरावपूर्ण मॉडल की राह खोल सकता है। अत्यधिक मुकदमों पर रोक और बातचीत के स्पष्ट ढांचे से उन टकराव-प्रधान तरीकों पर निर्भरता घट सकती है जिन्होंने दशकों तक कोरियाई श्रम संबंधों को परिभाषित किया है। हालांकि, औद्योगिक कार्रवाई और कानूनी विवाद बढ़ने का जोखिम बना हुआ है, खासकर तब जब नई परिभाषाओं और जिम्मेदारियों को व्यवहार में परखा जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
गिग अर्थव्यवस्था और असुरक्षित रोजगार की चुनौतियों से जूझ रहे दूसरे देश भी दक्षिण कोरिया के इस कदम पर करीबी नजर रख रहे हैं। प्लेटफॉर्म कर्मियों को स्पष्ट रूप से शामिल करने और कंपनियों के हर्जाने के दावों पर रोक लगाने वाला यह कानून एक मिसाल कायम करता है, जो अन्य देशों में श्रम नीति पर चल रही बहसों को प्रभावित कर सकती है।
संक्षेप में
- येलो एनवेलप विधेयक दक्षिण कोरिया के श्रम कानून में ऐतिहासिक संशोधन है। यह उपठेका कर्मचारियों, अनियमित श्रमिकों और प्लेटफॉर्म कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाता है।
- कानून “कर्मचारी” और “नियोक्ता” की परिभाषाओं का दायरा बढ़ाता है और यूनियनों को कामकाजी स्थितियों पर नियंत्रण रखने वाली मूल कंपनियों से सीधे बातचीत का अधिकार देता है।
- छंटनी और पुनर्गठन जैसे प्रबंधन के फैसलों के खिलाफ हड़तालें अब कानूनी हैं। साथ ही, यूनियनों और कर्मचारियों से हर्जाना मांगने पर कंपनियों के लिए नई पाबंदियां लागू होंगी।
- कारोबारी समूहों और विदेशी निवेशकों ने कानूनी अनिश्चितता, बढ़ती लागत और कोरिया के निवेश माहौल को लेकर चिंता जताई है।
- सरकार दिशा-निर्देश तैयार करने और मौके पर बातचीत में मदद के लिए टास्क फोर्स के साथ छह महीने की संक्रमण अवधि लागू कर रही है।
- कानून की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कैसे लागू किया जाता है और क्या यह औद्योगिक स्थिरता बनाए रखते हुए कोरिया में श्रम क्षेत्र की गहरी खाई को कम कर सकता है।






