दक्षिण-पूर्व एशिया की पर्यटन में वापसी: बदलाव के दौर से गुजरता क्षेत्र
कोविड-19 महामारी से पहले, दक्षिण-पूर्व एशिया दुनिया के सबसे गतिशील पर्यटन क्षेत्रों में से एक था। 2019 में छह प्रमुख बाज़ारों—थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस—ने 12.7 करोड़ से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया था, जिनमें अकेले थाईलैंड में करीब 4 करोड़ पर्यटक आए। हालांकि, महामारी ने इस रफ्तार पर अचानक ब्रेक लगा दिया। 2020 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या गिरकर महज़ 26 लाख रह गई, जिससे पर्यटन और आतिथ्य उद्योग पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान हुआ। अब, पांच साल बाद, इस क्षेत्र की बहाली तेज़ी से जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार और स्वरूप हर जगह एक जैसे नहीं हैं।
विषय-सूची
- दक्षिण-पूर्व एशिया की पर्यटन में वापसी: बदलाव के दौर से गुजरता क्षेत्र
- वियतनाम की तेज़ छलांग: बहाली से क्षेत्रीय अगुआई तक
- थाईलैंड: अब भी दिग्गज, लेकिन नई चुनौतियों का सामना
- मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया: स्थिर प्रगति और अलग-अलग रुझान
- फिलीपींस: रफ्तार वापस पाने में जूझता देश
- चीनी पर्यटकों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भूमिका
- नीतियां, टिकाऊपन और आगे की राह
- संक्षेप में
2024 तक दक्षिण-पूर्व एशिया में पर्यटकों की संख्या फिर बढ़कर 11.4 करोड़ हो गई—जो महामारी से पहले के स्तर का करीब 89 प्रतिशत है। लेकिन इस आंकड़े के पीछे अलग-अलग देशों की बदलती किस्मत, यात्रा के तौर-तरीकों में बदलाव और नए क्षेत्रीय अगुआओं की कहानी है। कभी उभरता सितारा रहा वियतनाम अब सबसे तेज़ी से उबरने वाला और क्षेत्र का तीसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला देश बन गया है। उसने सिंगापुर को पीछे छोड़ दिया है और मलेशिया तथा थाईलैंड के करीब पहुंच रहा है। वहीं, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे पारंपरिक पर्यटन केंद्रों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चीनी यात्रियों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भूमिका भी पर्यटन के परिदृश्य को नया रूप दे रही है।
वियतनाम की तेज़ छलांग: बहाली से क्षेत्रीय अगुआई तक
महामारी के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटन क्षेत्र में वियतनाम का उभार सबसे उल्लेखनीय बदलाव है। 2024 में देश ने 1.75 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया—यह 2019 के आंकड़े का 98 प्रतिशत था। इस तरह वियतनाम सिंगापुर से आगे निकल गया और केवल मलेशिया (2.5 करोड़) तथा थाईलैंड (3.5 करोड़) से पीछे रहा। यह तेज़ बहाली वियतनाम की मज़बूत वापसी के साथ-साथ उसकी नीतिगत रणनीति और बदलते पर्यटन प्रस्तावों का भी प्रमाण है।
वियतनाम की सफलता के पीछे कई कारण हैं:
- उदार वीज़ा नीतियां: वियतनाम ने वीज़ा छूट का दायरा तेज़ी से बढ़ाया है। अब 25 देशों के यात्रियों को वीज़ा-मुक्त प्रवेश मिलता है और अगस्त 2023 से सभी देशों के नागरिकों को तीन महीने का पर्यटक वीज़ा दिया जा रहा है। ई-वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश आसान और अधिक आकर्षक हुआ है।
- विस्तृत हवाई संपर्क: नॉनस्टॉप उड़ानों की शुरुआत, जिसमें अमेरिका और वियतनाम के बीच पहली सीधी उड़ान भी शामिल है, ने नए बाज़ारों के द्वार खोले हैं। प्रस्तावित लॉन्ग थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से क्षमता और सुविधा में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
- लक्ज़री और टिकाऊ पर्यटन: वियतनाम का आतिथ्य क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है। यहां नए उच्चस्तरीय होटल खुल रहे हैं, मिशेलिन गाइड पहुंच चुकी है और टिकाऊ तथा अनुभव-आधारित यात्रा पर ध्यान दिया जा रहा है। दा नांग, न्हा ट्रांग और हो ची मिन्ह सिटी जैसे शहर पर्यावरण के प्रति जागरूक पर्यटकों के प्रमुख गंतव्य बन गए हैं, जबकि फु क्वोक द्वीप लक्ज़री पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
- लक्षित प्रचार और डिजिटल बदलाव: आक्रामक विपणन अभियान और ई-वीज़ा के लिए नए वेब पोर्टल ने वियतनाम को दुनिया भर के यात्रियों के लिए अधिक सुलभ और जाना-पहचाना बनाया है।
वियतनाम में पर्यटन का उछाल व्यापक है। केवल जनवरी 2025 में ही देश में 21 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए—जो पिछले साल की तुलना में 36.9 प्रतिशत अधिक है। चीन, दक्षिण कोरिया, भारत और पश्चिमी यूरोप से पर्यटकों की संख्या में खास तौर पर तेज़ बढ़ोतरी हुई है। फु क्वोक, हालोंग और दा नांग इस बढ़त की अगुआई कर रहे हैं। यहां विश्वस्तरीय समुद्र तट, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और एकीकृत मनोरंजन सुविधाएं मौजूद हैं। खासकर संपन्न भारतीय परिवारों के बीच डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन और लक्ज़री यात्रा में उछाल वियतनाम की छवि को कम बजट वाले गंतव्य से बदलकर उच्चस्तरीय अनुभवों के केंद्र के रूप में ढाल रहे हैं।
वियतनाम की महत्वाकांक्षा स्पष्ट है: अधिकारी 2025 में 2.2 से 2.3 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करना चाहते हैं और 2030 तक मलेशिया को पीछे छोड़कर क्षेत्र का दूसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला देश बनने का लक्ष्य रखते हैं। बुनियादी ढांचे, विपणन और नियामक सुधारों में निवेश के साथ देश खुद को थाईलैंड के लंबे समय से कायम पर्यटन वर्चस्व के लिए चुनौती के रूप में स्थापित कर रहा है।
थाईलैंड: अब भी दिग्गज, लेकिन नई चुनौतियों का सामना
थाईलैंड दक्षिण-पूर्व एशिया का शीर्ष पर्यटन गंतव्य बना हुआ है। 2024 में यहां 3.5 से 3.6 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए। हालांकि, बहाली की रफ्तार धीमी हुई है और देश को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है—खासकर चीनी पर्यटकों को आकर्षित करने में, जो कभी उसका सबसे बड़ा स्रोत बाज़ार थे।
महामारी से पहले हर साल 1.1 करोड़ से अधिक चीनी पर्यटक थाईलैंड आते थे। 2024 में यह संख्या केवल करीब 50 लाख रहने की उम्मीद है। थाईलैंड का पर्यटन प्राधिकरण (TAT) 2026 तक इसे 69 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। इस धीमी वापसी के पीछे कई कारण हैं:
- सुरक्षा और छवि से जुड़ी चिंताएं: नकारात्मक प्रचार, सोशल मीडिया पर चर्चा और सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण कुछ चीनी यात्रियों को थाईलैंड कम स्वागतपूर्ण लगने लगा है।
- भू-राजनीतिक और आर्थिक मुश्किलें: चीन की आर्थिक सुस्ती, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिशें और वियतनाम तथा जापान जैसे गंतव्यों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने चीनी पर्यटकों को दूसरे देशों की ओर मोड़ा है।
- यात्रा के तौर-तरीकों में बदलाव: चीनी यात्री अब बड़े टूर समूहों के बजाय अकेले या छोटे समूहों में यात्रा करने की ओर अधिक झुक रहे हैं। वे पारंपरिक पर्यटन केंद्रों से आगे नए अनुभवों की तलाश में हैं।
थाईलैंड लक्षित विपणन, हवाई मार्गों के विस्तार और MICE (बैठकें, प्रोत्साहन यात्राएं, सम्मेलन और प्रदर्शनियां), लक्ज़री यात्रा तथा डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे उच्च-मूल्य वाले विशिष्ट बाज़ारों को आकर्षित करने के प्रयासों से जवाब दे रहा है। सरकार द्विपक्षीय संबंध मज़बूत करने और सुरक्षा को लेकर धारणा सुधारने पर भी काम कर रही है। इन कोशिशों के बावजूद महामारी से पहले जितनी संख्या में चीनी पर्यटकों की वापसी की संभावना अभी दूर है।
इस बीच, आर्थिक स्थिरता के लिए पर्यटन पर थाईलैंड की निर्भरता धीमी बहाली को चिंता का विषय बनाती है। देश अत्यधिक विकास और पर्यावरण पर बढ़ते दबाव जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा है। फुकेट और चियांग माई जैसे गंतव्यों में चरम मौसम और मौसमी धुंध यात्रा के फैसलों को लगातार प्रभावित कर रही है।
मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया: स्थिर प्रगति और अलग-अलग रुझान
मलेशिया चुपचाप महामारी से पहले के प्रदर्शन के करीब पहुंच रहा है। 2024 में यहां 2.5 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए—जो 2019 के शिखर से थोड़ा ही कम है। दिनभर के लिए आने वाले पर्यटकों (मुख्य रूप से सिंगापुर से) को शामिल करने पर मलेशिया कुल पर्यटक आवाजाही में थाईलैंड से आगे निकल जाता है और यह संख्या 3.8 करोड़ तक पहुंचती है। हालांकि, कम समय के लिए सीमा पार से आने वाले यात्रियों का अनुपात अधिक होने के कारण प्रति पर्यटक आर्थिक लाभ उन देशों से कम है जहां पर्यटक लंबे समय तक ठहरते हैं।
सिंगापुर, जो लंबे समय से व्यापार और अवकाश यात्रा का क्षेत्रीय केंद्र रहा है, वहां भी लगातार बहाली दिख रही है। सुरक्षा, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और कार्यक्रमों के समृद्ध कैलेंडर की प्रतिष्ठा के दम पर 2025 में शहर-राज्य में पर्यटकों की संख्या 1.65 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है। उच्च-मूल्य वाले पर्यटन और कारोबारी यात्राओं पर सिंगापुर के ध्यान ने उसे क्षेत्र के अन्य हिस्सों में दिखी अस्थिरता से कुछ हद तक बचाया है।
विशाल द्वीपसमूह और बाली जैसे प्रसिद्ध गंतव्यों वाला इंडोनेशिया अपेक्षाकृत धीमी गति से उबर रहा है। 2025 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या 1.4 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है। यह 2017 के स्तर के बराबर होगा, लेकिन महामारी से पहले के शिखर से अब भी कम रहेगा। इंडोनेशिया के लिए यह धीमी रफ्तार अप्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे अत्यधिक विकास, प्रदूषण और अधिक टिकाऊ पर्यटन मॉडल की ज़रूरत जैसी पुरानी समस्याओं से निपटने का समय मिलेगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका कम-ज्ञात गंतव्यों को भी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच पहचान दिला रही है।
फिलीपींस: रफ्तार वापस पाने में जूझता देश
प्राकृतिक सुंदरता और जीवंत संस्कृति के बावजूद फिलीपींस महामारी से पहले की पर्यटन रफ्तार हासिल करने में संघर्ष कर रहा है। 2024 में देश में केवल 54 लाख अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आए—जो 2019 की कुल संख्या का महज़ 66 प्रतिशत था। इस धीमी बहाली के पीछे कई कारण हैं:
- सीमित हवाई संपर्क: क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में फिलीपींस के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कम हैं, जिससे कई यात्रियों के लिए वहां पहुंचना अधिक कठिन हो जाता है।
- वीज़ा और नियामक अड़चनें: जटिल वीज़ा आवश्यकताओं और नौकरशाही प्रक्रियाओं ने कुछ संभावित पर्यटकों को आने से रोका है।
- पड़ोसी देशों से प्रतिस्पर्धा: वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया अपने पर्यटन प्रस्तावों और विपणन का विस्तार कर रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा फिलीपींस के लिए और कड़ी हो गई है।
इस रुझान को पलटने के लिए फिलीपींस हवाई मार्गों का विस्तार करने, वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बोराके तथा पलावन जैसे पारंपरिक पर्यटन केंद्रों से आगे नए गंतव्यों को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है। हालांकि, पूरी बहाली की राह अब भी कठिन है।
चीनी पर्यटकों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की भूमिका
चीनी यात्री लंबे समय से दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटन उद्योग की रीढ़ रहे हैं। क्षेत्र की पूरी बहाली के लिए उनकी वापसी अहम है, लेकिन परिदृश्य बदल रहा है। 2023 में चीन के फिर से खुलने से उम्मीद जगी थी, लेकिन जारी आर्थिक चुनौतियों, व्यापार तनावों और बदलती यात्रा प्राथमिकताओं ने उन उम्मीदों को सीमित किया है।
नए रुझानों में सबसे अहम है शियाओहोंगशू (जिसे अक्सर “चीन का इंस्टाग्राम” कहा जाता है) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों का प्रभाव। 30 करोड़ से अधिक मासिक उपयोगकर्ताओं के साथ शियाओहोंगशू युवा चीनी पर्यटकों के लिए यात्रा संबंधी जानकारी का प्रमुख स्रोत बन गया है। इस पर उपयोगकर्ताओं की लिखी समीक्षाएं, यात्रा सुझाव और आकर्षणों की चुनी हुई सूचियां मिलती हैं। इस प्लेटफॉर्म ने:
- चीनी पर्यटकों को दक्षिण-पूर्व एशिया के कम-ज्ञात गंतव्यों, जैसे लाओस और इंडोनेशिया के दूरदराज़ हिस्सों की ओर आकर्षित किया है।
- अनोखे अनुभवों की तलाश कर रहे चीनी यात्रियों से स्थानीय कारोबारों को सीधे जोड़कर उनकी बहाली में मदद की है।
- “दाका” पर्यटन को बढ़ावा दिया है, जिसमें यात्री सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए तस्वीरों के लिहाज़ से आकर्षक जगहें खोजते हैं। कभी-कभी इससे अनुभव की गुणवत्ता या सुरक्षा प्रभावित होती है।
शियाओहोंगशू और ऐसे ही दूसरे प्लेटफॉर्म यात्रा के नए रुझानों को बढ़ावा दे रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सहारा दे रहे हैं, लेकिन वे चुनौतियां भी पैदा करते हैं। सुंदरता और तस्वीरों पर ज़ोर देने से कुछ जगहों पर भीड़ बढ़ सकती है और सुरक्षा जोखिम भी पैदा हो सकते हैं, जैसा कि इंडोनेशिया के इजेन ज्वालामुखी से जुड़ी घटनाओं में देखा गया। इसके जवाब में प्लेटफॉर्म सुरक्षा चेतावनियां जोड़ रहे हैं और जिम्मेदार पर्यटन को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
नीतियां, टिकाऊपन और आगे की राह
महामारी ने पर्यटन पर अत्यधिक निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की कमज़ोरियां उजागर कीं। दक्षिण-पूर्व एशिया के फिर से उभरने के साथ नीति-निर्माता और उद्योग जगत के नेता अधिक मज़बूत और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं। प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
- क्षेत्र-आधारित बहाली: एशियाई विकास बैंक और अन्य संस्थानों की रिपोर्टें पर्यटन, कृषि-प्रसंस्करण और डिजिटल व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित सहायता देने की ज़रूरत पर ज़ोर देती हैं। बहु-पक्षीय कार्यबलों और क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूती के लिए अहम माना जा रहा है।
- टिकाऊ और समावेशी पर्यटन: स्वास्थ्य और स्वच्छता, आस-पास के गंतव्यों की यात्रा तथा पर्यावरण के लिहाज़ से टिकाऊ तौर-तरीकों पर ज़ोर बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, वियतनाम और मलेशिया पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और टिकाऊ आतिथ्य को बढ़ावा देने में अग्रणी हैं।
- डिजिटल बदलाव: विपणन और संचालन, दोनों में डिजिटल तकनीक को तेज़ी से अपनाने से कारोबार नए बाज़ारों तक पहुंच रहे हैं और यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढाल रहे हैं।
- क्षेत्रीय एकीकरण: साझा आसियान वीज़ा बनाने की कोशिशें अब तक राजनीतिक मतभेदों और प्रतिस्पर्धा के तनावों के कारण सफल नहीं हो पाई हैं, लेकिन गहरा सहयोग दीर्घकालीन लक्ष्य बना हुआ है।
तूफान, बाढ़ और धुंध जैसी चरम मौसमी घटनाएं यात्रा के रुझानों को लगातार प्रभावित कर रही हैं। इनके कारण जलवायु के प्रभावों को झेल सकने वाले बुनियादी ढांचे और संकट प्रबंधन की मांग भी बढ़ रही है। इन चुनौतियों के अनुरूप ढलने की क्षेत्र की क्षमता ही उसके पर्यटन के भविष्य को आकार देगी।
संक्षेप में
- दक्षिण-पूर्व एशिया में पर्यटन की बहाली मज़बूत है, लेकिन असमान है। वियतनाम क्षेत्र का सबसे तेज़ी से बढ़ता और तीसरा सबसे अधिक देखा जाने वाला देश बनकर उभरा है।
- वियतनाम की सफलता के पीछे उदार वीज़ा नीतियां, विस्तृत हवाई संपर्क, लक्ज़री और टिकाऊ पर्यटन के विकल्प तथा आक्रामक डिजिटल विपणन हैं।
- थाईलैंड शीर्ष गंतव्य बना हुआ है, लेकिन चीनी पर्यटकों को आकर्षित करने और टिकाऊपन से जुड़ी चिंताओं से निपटने में उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- मलेशिया और सिंगापुर में बहाली स्थिर है, जबकि इंडोनेशिया की धीमी वापसी अत्यधिक विकास और पर्यावरण संबंधी समस्याओं से निपटने में मदद कर सकती है।
- सीमित संपर्क और नियामक अड़चनों के कारण फिलीपींस पीछे है।
- चीनी यात्री और शियाओहोंगशू जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म यात्रा के तौर-तरीकों को नया रूप दे रहे हैं और स्थानीय कारोबारों को सहारा दे रहे हैं, लेकिन उनसे नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं।
- अधिक मज़बूत पर्यटन उद्योग बनाने के लिए नीति-निर्माता क्षेत्र-आधारित बहाली, टिकाऊपन, डिजिटल बदलाव और क्षेत्रीय सहयोग पर ध्यान दे रहे हैं।
- दक्षिण-पूर्व एशिया में पर्यटन का भविष्य बदलाव के अनुरूप ढलने, नवाचार करने और विकास को टिकाऊपन तथा समावेशिता के साथ संतुलित रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।






