सियोल के ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’: शहरी अकेलेपन से लड़ाई में एक नई साहसिक पहल

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सियोल के ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’: शहरी अकेलेपन से लड़ाई में एक नई साहसिक पहल

सियोल में अकेलेपन का संकट: शहर क्यों कर रहा है कार्रवाई

दक्षिण कोरिया की हलचल भरी राजधानी के बीचोंबीच एक शांत क्रांति चल रही है। करीब एक करोड़ लोगों का शहर सियोल एक बढ़ती महामारी का सामना कर रहा है, जो उसकी ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंटों और संकरी गलियों तक पहुंच चुकी है: अकेलापन। शहर के कुल घरों में अब लगभग 40% एकल-व्यक्ति परिवार हैं, और अध्ययनों के अनुमान के मुताबिक 1,30,000 से अधिक युवा लगभग पूरी तरह सामाजिक रूप से कटकर रह रहे हैं। इस संकट से सीधे निपटने के लिए सियोल महानगर सरकार ने व्यापक पहल शुरू की है। इस प्रयास के केंद्र में शहर के नए ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ हैं—ऐसे स्वागतयोग्य स्थान, जिन्हें शहर के फैलाव में अलग-थलग महसूस करने वाले लोगों को सुकून, जुड़ाव और अपनापन देने के लिए बनाया गया है।

विषय-सूची
  1. सियोल में अकेलेपन का संकट: शहर क्यों कर रहा है कार्रवाई
  2. ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ क्या हैं?
  3. ये स्टोर कैसे काम करते हैं?
  4. सियोल में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है?
  5. महामारी का असर
  6. अकेलेपन से निपटने की सियोल की व्यापक रणनीति
  7. हेल्पलाइन कैसे काम करती है?
  8. निजी अनुभव: अनपेक्षित जगहों पर जुड़ाव की तलाश
  9. विदेश से सीख: प्रेरणा और अनुकूलन
  10. तकनीक और डेटा की भूमिका
  11. चुनौतियां और आलोचनाएं: क्या सरकारी नीतियां अकेलापन दूर कर सकती हैं?
  12. झिझक और पहुंच
  13. व्यापक असर: क्या दूसरे शहरों के लिए बन सकता है मॉडल?
  14. संक्षेप में

29 वर्षीय ही-क्यंग उन 20,000 लोगों में से एक हैं, जिन्होंने मार्च में इन स्टोरों की शुरुआत के बाद से यहां का दौरा किया है। वह अकेली रहती हैं और परिवार से संपर्क टूट चुका है। दूसरों के साथ इंस्टेंट रैमेन का एक कटोरा साझा करने और बातचीत करने के साधारण-से अनुभव में उन्हें सुकून मिलता है। तेजी से हुए आधुनिकीकरण, महंगे आवास और बदलते पारिवारिक ढांचों ने जिस शहर में युवा और बुजुर्ग, दोनों तरह के कई निवासियों को दिशाहीन और अकेला छोड़ दिया है, वहां उनकी कहानी अनोखी नहीं है।

‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ क्या हैं?

सियोल के ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ आम पड़ोस की दुकानों जैसे नहीं हैं। यहां स्नैक्स और पेय पदार्थों की कतारों के बजाय, आगंतुकों को बैठकखाने जैसे आरामदायक स्थान मिलते हैं, जिनमें मसाज कुर्सियां, पैरों की स्पा सुविधाएं और साझा मेजें हैं। माहौल जानबूझकर घर जैसा रखा गया है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिकों या कल्याण केंद्रों से जुड़ी झिझक से बचा जा सके। यहां लोग साधारण खाना बना सकते हैं, फिल्म देख सकते हैं या बस दूसरों की मौजूदगी में चुपचाप बैठ सकते हैं। जो लोग बात करना चाहते हैं, उनके लिए सामाजिक कार्यकर्ता और परामर्शदाता मौजूद रहते हैं, लेकिन बातचीत करने का कोई दबाव नहीं है। कभी-कभी, दूसरों के बीच मौजूद रहना ही अकेलेपन की पीड़ा कम करने के लिए काफी होता है।

ये स्टोर उम्र या पृष्ठभूमि के भेद के बिना सभी के लिए खुले हैं। कुछ आगंतुक ऐसे बुजुर्ग निवासी हैं जिनका परिवार से संपर्क टूट चुका है, जबकि कुछ युवा वयस्क हैं जो ऐसे शहर में नए रिश्ते बनाने के लिए जूझ रहे हैं, जो भारी और बेगाना लग सकता है। सियोल की झुलसाने वाली गर्मियों में ये स्टोर आश्रय का काम भी करते हैं। यहां वातानुकूलन और आराम करने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध है, खासकर उन लोगों के लिए जो अन्यथा घर पर अलग-थलग रहते।

सियोल के अकेलेपन-विरोधी विभाग के प्रबंधक किम से-हॉन बताते हैं, “विचार यह है कि निष्क्रिय मेलजोल—सिर्फ एक जगह साझा करना—भी शहर में अकेलेपन की महामारी से निपटने में मदद कर सकता है। हम चाहते हैं कि लोग यहां सहज महसूस करें, उन पर बात करने या कुछ साबित करने का दबाव न हो।”

ये स्टोर कैसे काम करते हैं?

आने पर आगंतुकों से उनके मनोभाव और रहन-सहन की स्थिति के बारे में एक छोटा सर्वे भरने को कहा जाता है। इससे कर्मचारियों को गहरे अकेलेपन के जोखिम वाले लोगों की पहचान करने और उसी के अनुसार मदद देने में सहायता मिलती है। सुविधाएं जगह के अनुसार अलग-अलग होती हैं, लेकिन अक्सर इनमें शामिल हैं:

  • मुफ्त इंस्टेंट नूडल्स और स्नैक्स
  • मसाज कुर्सियां और पैरों की स्पा सुविधाएं
  • बोर्ड गेम और किताबें
  • फिल्म प्रदर्शन और समूह गतिविधियां
  • परामर्शदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता

कुछ स्टोर आगंतुक के अकेलेपन के आकलन के आधार पर भोजन देने की आवृत्ति भी तय करते हैं, ताकि जिन्हें सबसे अधिक जरूरत है, उन्हें अतिरिक्त देखभाल और ध्यान मिल सके।

सियोल में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है?

पिछले कुछ दशकों में दक्षिण कोरिया के तेज आर्थिक बदलाव ने समृद्धि और आधुनिकता तो लाई है, लेकिन पारंपरिक सामाजिक ढांचों को भी उलट-पुलट दिया है। बड़े परिवार छोटे हो गए हैं, विवाह और माता-पिता बनने की दर तेजी से गिरी है, और सियोल जैसे शहरों में जीवन-यापन का खर्च बहुत बढ़ गया है। नतीजतन, पहले से कहीं अधिक लोग अकेले रह रहे हैं और कई लोग उन सहारा देने वाले सामाजिक नेटवर्क से कट गए हैं, जो कभी उन्हें सुकून और साथ देते थे।

सियोल इंस्टीट्यूट के 2022 के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि एकल-व्यक्ति परिवारों में से 62% ने अकेलापन महसूस करने की बात कही, जबकि 13.6% को सामाजिक रूप से अलग-थलग माना गया। यह समस्या खास तौर पर युवा वयस्कों और बुजुर्गों में गंभीर है, लेकिन हर आयु और वर्ग के लोगों को प्रभावित करती है। देशभर में 2023 में अकेलेपन में हुई 3,600 से अधिक ‘अकेली मौतें’ दर्ज की गईं—ऐसे मामले जिनमें लोग अकेले मर जाते हैं और लंबे समय तक उनका पता नहीं चलता। यह आंकड़ा तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत को रेखांकित करता है।

सियोल आइसोलेशन प्रिवेंशन सेंटर की निदेशक ली सू-जिन कहती हैं, “सियोल में अकेलापन अब निजी बोझ नहीं रह गया है। हम अलग-अलग आयु समूहों में मानसिक स्वास्थ्य के संकट को देख रहे हैं। लेकिन कई लोगों, खासकर युवाओं और उम्रदराज पुरुषों के लिए, मदद पाने की कोई स्पष्ट जगह ही नहीं है।”

महामारी का असर

कोविड-19 महामारी ने सियोल के कई निवासियों के अकेलेपन की भावना को और बढ़ा दिया। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के उपायों के कारण लोगों को घरों में रहना पड़ा और काम, स्कूल या पड़ोस में होने वाली सामान्य बातचीत तक बंद हो गई। कुछ लोगों के लिए लंबे समय तक अकेले रहने का अनुभव अब भी बना हुआ है, जिससे पाबंदियां हटने के बाद भी दोबारा जुड़ना मुश्किल हो गया है।

सियोल के अकेलेपन-विरोधी कार्यक्रमों में से एक की प्रबंधक ली यू-जोंग कहती हैं, “शायद इसकी वजह महामारी थी। लोगों को अकेले रहने की आदत हो गई, और अब उस ढर्रे से बाहर निकलना मुश्किल है।”

अकेलेपन से निपटने की सियोल की व्यापक रणनीति

सुविधा स्टोर इस बड़ी मुहिम का सिर्फ एक हिस्सा हैं। 2024 के अंत में, महापौर ओह से-हून ने ‘अकेलापन-मुक्त सियोल’ पहल की घोषणा की। यह पांच साल का 451.3 अरब वॉन (करीब 326 मिलियन डॉलर) का कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य अकेलेपन और सामाजिक अलगाव के मूल कारणों से निपटना है। योजना में शामिल हैं:

  • ‘अकेलेपन को अलविदा 120’ 24/7 हेल्पलाइन, जहां तुरंत परामर्श और सहायता मिलती है
  • ‘नॉक नॉक 24 प्लेटफॉर्म’, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन परामर्श उपलब्ध कराता है; इसमें फोन पर बात करने में असहज लोगों के लिए एआई चैटबॉट भी शामिल हैं
  • ‘सियोल 365 चैलेंज प्रोग्राम’, जो कार्यक्रमों और अंक-आधारित पुरस्कार व्यवस्था के जरिए सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है
  • मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं और जिलों में स्थित कल्याण केंद्रों का विस्तार
  • प्रशासनिक डेटा और डिलीवरी प्लेटफॉर्मों के साथ साझेदारी के जरिए अलग-थलग लोगों की सक्रिय पहचान
  • बागवानी, सामूहिक सैर और शौकिया क्लब जैसी समुदाय-निर्माण गतिविधियां
  • ‘अकेलेपन के बिना एक सप्ताह’ और अलगाव से उबर चुके लोगों की बातचीत सहित जन-जागरूकता अभियान

इन प्रयासों का लक्ष्य अकेलेपन के हर चरण में लोगों तक पहुंचना है—उन लोगों से लेकर जो अभी अलग-थलग महसूस करने लगे हैं, उन लोगों तक जो पहले से संकट में हैं। शहर का नजरिया समग्र है, जिसमें रोकथाम, शुरुआती हस्तक्षेप और लोगों को समुदाय में फिर से शामिल करना शामिल है।

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हेल्पलाइन कैसे काम करती है?

अप्रैल 2025 में शुरू हुई ‘अकेलेपन को अलविदा 120’ हेल्पलाइन ने छह सप्ताह में ही 3,000 से अधिक कॉल दर्ज कर अपना सालाना लक्ष्य पार कर लिया है। प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा संचालित यह सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध है और तत्काल मदद के साथ-साथ उन लोगों को बाद में फोन भी करती है जिन्हें लगातार सहायता की जरूरत होती है। जो लोग फोन पर बात नहीं करना चाहते, उनके लिए चैटबॉट के जरिए चैट पर परामर्श और संबंधित सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है।

शहर के आंकड़ों के मुताबिक, कॉल करने वालों में 59% अधेड़ उम्र के वयस्क, 32% युवा और 8% बुजुर्ग हैं। फोन करने के कारण अलग-अलग हैं—दोस्ती को लेकर परेशान किशोरों से लेकर, परिवार टूटने या कारोबार में नाकामी के बाद अवसाद से जूझ रहे अधेड़ उम्र के वयस्कों तक। यह हेल्पलाइन अकेलापन महसूस करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए खुली है। कोई अपने मित्र, परिवार के सदस्य या पड़ोसी की भलाई को लेकर चिंतित हो, तो वह भी संपर्क कर सकता है।

निजी अनुभव: अनपेक्षित जगहों पर जुड़ाव की तलाश

कई आगंतुकों के लिए ये सुविधा स्टोर जीवनरेखा बन गए हैं। 53 वर्षीय ओम मी-ही को अपने जिले के समाचार-पत्र से स्थानीय स्टोर के बारे में पता चला। वह अकेली रहती हैं और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों से जूझ रही हैं। उन्होंने पाया कि घर पर रहने से स्थिति और बिगड़ती है। वह कहती हैं, “ऐसी जगह होने से बाहर निकलना आसान हो जाता है। कभी-कभी, बस दूसरों के बीच रहने से मुझे बेहतर महसूस होता है।”

51 वर्षीय ली वॉन-ते अपने इलाके में नए हैं और अभी लोगों से जान-पहचान बढ़ा रहे हैं। वह लगभग हर दिन अपनी सैर के दौरान स्टोर आते हैं। उन्हें वहां आराम करने और लोगों के बीच रहने का मौका पसंद है, भले ही वह हमेशा उनसे बात न करें। वह कहते हैं, “अभी मेरे बहुत करीबी दोस्त नहीं हैं, लेकिन मुझे ऐसी जगह पर आराम कर पाना अच्छा लगता है।”

कुछ आगंतुक शुरुआत में दूसरों से बातचीत करने या उनके साथ खाना खाने से हिचकते हैं, लेकिन कर्मचारी उन्हें बस एक जगह साझा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। समय के साथ, कई लोग खुलने लगते हैं और छोटी-छोटी दयालुता तथा साझा अनुभवों में सुकून पाते हैं। ली इन-सुक जैसी स्वयंसेविकाएं—जो तलाक के बाद खुद भी अकेलेपन के दौर से उबरीं—अब केंद्रों में काम करती हैं और अकेलेपन से बाहर आने की राह शुरू कर रहे लोगों को धैर्य और सहारा देती हैं।

कुछ लोग आते हैं और शुरुआत में अजनबियों से बात नहीं करते, लेकिन धीरे-धीरे, इस जगह के अभ्यस्त होने पर, वे सहज होकर अपनी बातें साझा करने लगते हैं। मेरे लिए यह केंद्र सच्चे मानवीय जुड़ाव का प्रतीक है—ऐसी चीज जिसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।

— ली इन-सुक, स्वयंसेवी परामर्शदाता

विदेश से सीख: प्रेरणा और अनुकूलन

सियोल की रणनीति ब्रिटेन और जापान की ऐसी ही पहलों से प्रेरित है, जहां सामाजिक अलगाव (जापान में जिसे ‘हिकिकोमोरी’ कहा जाता है) जनस्वास्थ्य की बड़ी चिंता बन चुका है। दोनों देशों में, उन लोगों तक पहुंचने के लिए सामुदायिक स्थानों और हेल्पलाइन का उपयोग किया गया है, जो पारंपरिक कल्याण व्यवस्था की नजर से छूट सकते हैं। इन मॉडलों को कोरियाई समाज की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप ढालकर सियोल को उम्मीद है कि वह ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहे दूसरे शहरों के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा।

हालांकि, विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि हर जगह लागू होने वाला कोई एक समाधान नहीं है। अकेलापन बेहद निजी अनुभव है, जिसे व्यक्ति की परिस्थितियां और सांस्कृतिक अपेक्षाएं आकार देती हैं। इवा वूमन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ब्यॉन गुम-सॉन कहती हैं, “अकेलापन सिर्फ जुड़ाव से कम नहीं होता, रिश्तों में निरंतरता भी जरूरी है। आपको महसूस होना चाहिए कि आप किसी के लिए मायने रखते हैं और आपके गायब हो जाने पर उसे इसका एहसास होगा।”

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तकनीक और डेटा की भूमिका

सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान के लिए सियोल का आइसोलेशन प्रिवेंशन सेंटर कल्याण कार्यालयों, उपयोगिता सेवा कंपनियों और डिलीवरी सेवाओं के साथ डेटा साझा करने के समझौतों का उपयोग करता है। अलगाव के संकेत—जैसे डाक का जमा होते जाना या बार-बार अकेले के लिए खाने का ऑर्डर देना—संपर्क अभियान शुरू कर सकते हैं, जिनमें फोन कॉल, घर पर मुलाकात या डिजिटल संदेश शामिल हैं। शहर लोकप्रिय ऐप्स जैसे डांगगुन मार्केट (करॉट) का भी उपयोग कर रहा है। इस ऐप पर शौक आधारित हजारों सामाजिक समूह हैं, जो बिना दबाव के लोगों को मेलजोल के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

कुछ लोगों के लिए ये डिजिटल समुदाय शहर द्वारा संचालित औपचारिक कार्यक्रमों की तुलना में अधिक टिकाऊ सामाजिक रिश्ते देते हैं। पड़ोस के क्लबों में भागीदारी 2023 के बाद से बीस गुना बढ़ी है, जो लोगों की अपनी शर्तों पर जुड़ने की बढ़ती चाह दिखाती है।

चुनौतियां और आलोचनाएं: क्या सरकारी नीतियां अकेलापन दूर कर सकती हैं?

सुविधा स्टोरों और हेल्पलाइन की शुरुआती सफलता के बावजूद, कुछ विद्वान और नागरिक सवाल उठाते हैं कि क्या सरकारी हस्तक्षेप अकेलेपन जैसी निजी और जटिल स्थिति से सचमुच निपट सकता है। सार्वजनिक नीतियां जुड़ाव के अवसर तो बना सकती हैं, लेकिन अकेलेपन की भावना को अंततः वही व्यक्ति पहचान और स्वीकार कर सकता है जो इसे महसूस कर रहा है।

प्रोफेसर ब्यॉन कहती हैं, “अकेलेपन का मतलब अकेले होना नहीं है। कुछ लोगों के लिए एकांत आजादी है, तो दूसरों के लिए पीड़ा। सरकारें व्यवहार का पता लगा सकती हैं, लेकिन अकेलेपन की भावना को उसी व्यक्ति को स्वीकार करना होगा जो इसे महसूस कर रहा है।”

शहर के अधिकारी इन सीमाओं को मानते हैं। ली सू-जिन कहती हैं, “सियोल शहर जानता है कि वह अर्थपूर्ण रिश्ते बना नहीं सकता। हम जो कर सकते हैं, वह है जरूरी आधार तैयार करना। जब लोगों को एहसास हो कि वे मुश्किल में हैं, तब हम उन्हें आगे बढ़ने के विकल्प दे सकते हैं।”

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झिझक और पहुंच

इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य अकेलेपन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद मांगने से जुड़ी झिझक कम करना है। स्टोरों को क्लीनिक या कल्याण केंद्रों के बजाय परिचित और स्वागतयोग्य जगहों के रूप में पेश करके, शहर उन लोगों तक पहुंचने की उम्मीद करता है जो शर्मिंदगी या संकोच के कारण मदद लेने से बच सकते हैं। ये स्टोर कम आय वाले निवासियों के लिए भी सुलभ बनाए गए हैं और गर्मियों के महीनों में मुफ्त भोजन तथा वातानुकूलित जगह उपलब्ध कराते हैं।

किम से-हॉन कहते हैं, “हम चाहते हैं कि लोगों को लगे कि मदद मांगना ठीक है और वे जिस स्थिति से गुजर रहे हैं, उसमें वे अकेले नहीं हैं।”

व्यापक असर: क्या दूसरे शहरों के लिए बन सकता है मॉडल?

दुनियाभर में शहरीकरण तेज होने के साथ, अधिक से अधिक शहर छोटे होते परिवारों, बढ़ती जीवन-यापन लागत और बदलते कामकाजी तौर-तरीकों के सामाजिक असर से जूझ रहे हैं। ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ के साथ सियोल का प्रयोग दिखाता है कि स्थानीय सरकारें अकेलेपन की चुनौती से रचनात्मक ढंग से कैसे निपट सकती हैं। भौतिक स्थानों, डिजिटल संपर्क और समुदाय-निर्माण गतिविधियों को मिलाकर, शहर सुरक्षा का एक बहुस्तरीय जाल बना रहा है, जो अलगाव के लक्षणों और मूल कारणों, दोनों पर ध्यान देता है।

हालांकि इन कार्यक्रमों के दीर्घकालीन असर का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन निवासियों की भारी प्रतिक्रिया ऐसे स्थानों की गहरी जरूरत दिखाती है जहां लोग बिना किसी शर्त के बस साथ रह सकें। एक आगंतुक के शब्दों में, “जब घर दमघोंटू लगने लगे, तो यह अपनापन पाने की जगह है।”

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संक्षेप में

  • सियोल के ‘स्नेहिल सुविधा स्टोर’ शहर में अकेलेपन और सामाजिक अलगाव से निपटने के लिए बनाए गए अभिनव सामुदायिक स्थान हैं।
  • यह पहल कई वर्षों के व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसमें हेल्पलाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और समुदाय-निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।
  • सियोल के घरों में अब लगभग 40% एकल-व्यक्ति परिवार हैं और अनुमान है कि 1,30,000 से अधिक युवा सामाजिक रूप से अलग-थलग हैं।
  • ये स्टोर सभी उम्र के लोगों को आकर्षित करते हैं और यहां बिना झिझक आने का माहौल, मुफ्त भोजन, आराम की सुविधाएं तथा परामर्शदाताओं की सहायता उपलब्ध है।
  • लोगों के निजी अनुभव दिखाते हैं कि ये स्थान आगंतुकों को सुकून, जुड़ाव और अपनापन देकर उनके जीवन में बदलाव ला सकते हैं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक नीतियां जुड़ने के अवसर बना सकती हैं, लेकिन अकेलेपन से उबरने के लिए व्यक्ति की भागीदारी और रिश्तों में निरंतरता जरूरी है।
  • तेजी से शहरीकरण और बढ़ते अलगाव के बीच, ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे दूसरे शहरों के लिए सियोल की रणनीति संभावित मॉडल के तौर पर देखी जा रही है।
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