चीन की हाई-स्पीड रेल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, लेकिन कर्ज का पहाड़

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चीन की हाई-स्पीड रेल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, लेकिन कर्ज का पहाड़

चीन की हाई-स्पीड रेल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, लेकिन कर्ज का पहाड़

चीन का हाई-स्पीड रेल (HSR) नेटवर्क देश के तेज़ आधुनिकीकरण और तकनीकी क्षमता का प्रतीक है। दो दशकों से भी कम समय में चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी HSR प्रणाली बना ली है, जो करीब 50,000 किलोमीटर तक फैली है और अधिकांश बड़े शहरों को जोड़ती है। बुलेट ट्रेनें अब बीजिंग और शंघाई के बीच की दूरी महज़ चार घंटे में तय करती हैं, जबकि मैग्लेव के नए प्रोटोटाइप 600 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार तक पहुंच चुके हैं। लेकिन चमचमाते स्टेशनों और रिकॉर्ड तोड़ती ट्रेनों के पीछे यह नेटवर्क बढ़ती वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इससे इसकी दीर्घकालिक स्थिरता और आगे विस्तार की समझदारी पर सवाल उठ रहे हैं।

विषय-सूची
  1. चीन की हाई-स्पीड रेल: इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना, लेकिन कर्ज का पहाड़
  2. चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क कैसे बनाया?
  3. कर्ज और मुनाफ़ा: सतह के नीचे दरारें
  4. किराया बढ़ोतरी और सामाजिक असर
  5. इतनी सारी लाइनें घाटे में क्यों हैं?
  6. तुलना और सबक: क्या हाई-स्पीड रेल टिकाऊ है?
  7. सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
  8. संक्षेप में

चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क कैसे बनाया?

चीन की HSR यात्रा 2008 में पहली हाई-स्पीड यात्री रेल लाइन शुरू होने के साथ जोर-शोर से शुरू हुई। तब से सरकार ने नेटवर्क के विस्तार पर खरबों युआन खर्च किए हैं। 2021 तक 500,000 से अधिक आबादी वाले 93% शहर इससे जुड़ चुके थे। निर्माण की रफ्तार असाधारण रही है: अनुमान है कि 2025 तक नेटवर्क 50,000 किलोमीटर से अधिक लंबा हो जाएगा, जो जर्मनी, जापान और यूनाइटेड किंगडम के कुल HSR नेटवर्क से कहीं बड़ा होगा।

इस विस्तार के पीछे आर्थिक प्रोत्साहन, राष्ट्रीय गौरव और चीन की तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने की इच्छा का मेल था। सरकार ने HSR को घरेलू मांग बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और कम समृद्ध क्षेत्रों के विकास को गति देने का माध्यम माना। निवेश आकर्षित करने और अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े बढ़ाने के इच्छुक प्रांतीय प्रशासनों ने नई लाइनों और स्टेशनों के लिए भारी कर्ज लिया—यहां तक कि दूरदराज के उन इलाकों में भी, जहां यात्रियों की मांग सीमित थी।

चीन की रणनीति महत्वाकांक्षी थी: पहले निर्माण करो और उम्मीद रखो कि आर्थिक वृद्धि और बढ़ती आय से अंततः ट्रेनें भर जाएंगी। नतीजा ऐसा नेटवर्क है जो इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना भी है और बढ़ते वित्तीय दबाव का कारण भी।

कर्ज और मुनाफ़ा: सतह के नीचे दरारें

तकनीकी सफलता के बावजूद चीन का HSR नेटवर्क वित्तीय मुश्किलों से जूझ रहा है। इसकी संचालक कंपनी, चाइना स्टेट रेलवे ग्रुप ने 2023 में 3.3 अरब युआन (करीब 457 मिलियन डॉलर) का शुद्ध मुनाफ़ा दर्ज किया, जो उसके इतिहास का सबसे अच्छा परिचालन प्रदर्शन था। लेकिन यह मुनाफ़ा नेटवर्क के कर्ज के मुकाबले बहुत कम है। 2024 के अंत तक कर्ज 6.2 ट्रिलियन युआन (करीब 860 अरब डॉलर) तक पहुंच गया। तुलना के लिए, HSR विस्तार से जुड़ा कर्ज अब संकटग्रस्त रियल एस्टेट दिग्गज एवरग्रांडे ग्रुप के कर्ज से भी अधिक है।

नेटवर्क की अधिकांश आय यात्री किरायों से आती है, क्योंकि हाई-स्पीड ट्रेनें माल ढुलाई के लिए उपयुक्त नहीं हैं। फिर भी, केवल कुछ ही लाइनें—मुख्य रूप से बीजिंग-शंघाई और ग्वांगझोउ-शेनझेन जैसे समृद्ध तटीय क्षेत्रों में—मुनाफ़ा कमाती हैं। खासकर अंतर्देशीय प्रांतों के अधिकतर मार्ग कम यात्रियों और रखरखाव की ऊंची लागत के कारण घाटे में चलते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, 2023 के अंत तक नेटवर्क की केवल करीब 6% लाइनें ही मुनाफ़े में थीं।

परिचालन मुनाफ़ा होने पर भी निर्माण के दौरान लिया गया भारी कर्ज इसमें शामिल नहीं होता। ताइपे स्थित चुंग-हुआ इंस्टीट्यूशन फॉर इकोनॉमिक रिसर्च के सहायक शोधकर्ता वांग कुओ-चेन ने बताया, “टिकट की कीमतें बढ़ाने से केवल सामान्य आय बढ़ सकती है, लेकिन अचल संपत्तियों में निवेश का घाटा पूरा नहीं होगा, जिसकी भरपाई रियल एस्टेट से होनी चाहिए। हालांकि, चीन का आवास बाजार सुस्त है और हाई-स्पीड रेल को सहारा देने की स्थिति में नहीं है।”

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चाइना रेलवे सरकारी बैंकों और ब्रोकरेज कंपनियों को बॉन्ड बेचकर अपने विस्तार के लिए धन जुटाती है। इससे सरकार आधिकारिक राष्ट्रीय कर्ज बढ़ाए बिना उधार ले पाती है। “छिपे हुए कर्ज” की इस रणनीति ने तेज़ विस्तार को संभव बनाया है, लेकिन इसके चलते वित्तीय जोखिम सार्वजनिक क्षेत्र में बंट जाते हैं और उनका पता लगाना तथा प्रबंधन करना कठिन हो जाता है।

किराया बढ़ोतरी और सामाजिक असर

जून 2024 में चाइना रेलवे ने चार प्रमुख हाई-स्पीड मार्गों पर किराए में 20% से 40% तक बढ़ोतरी की घोषणा की। इनमें मुनाफ़े में चलने वाली बीजिंग-ग्वांगझोउ और शंघाई-कुनमिंग लाइनें भी शामिल थीं। नेटवर्क शुरू होने के बाद की यह सबसे बड़ी किराया बढ़ोतरी बढ़ती परिचालन लागत की भरपाई करने और घाटे वाले मार्गों को सब्सिडी देने के लिए की गई थी। यह व्यापक आर्थिक दबावों को भी दर्शाती है: धीमी अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट बाजार में गिरावट के बीच स्थानीय सरकारों की आय घट रही है और कर्ज बढ़ रहा है।

किराया बढ़ोतरी से जनता में आलोचना हुई है और सामाजिक बहिष्कार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कारोबारी यात्री और श्वेतपोश कर्मचारी—जिन्हें अक्सर उनके नियोक्ता यात्रा खर्च की भरपाई कर देते हैं—बढ़ी हुई लागत उठा सकते हैं, लेकिन कई आम चीनी लोगों के लिए हाई-स्पीड रेल का सफर लगातार महंगा होता जा रहा है। शोध के अनुसार, कम आय के कारण करीब एक-चौथाई आबादी HSR का इस्तेमाल नहीं करती। वसंतोत्सव जैसे व्यस्त यात्रा समय में कई प्रवासी मजदूर धीमी और सस्ती ट्रेनों को चुनते हैं, क्योंकि हाई-स्पीड रेल का किराया एक या दो दिन की मजदूरी के बराबर हो सकता है।

डोयिन और वीबो जैसे सोशल मीडिया मंचों पर लोगों ने नाराज़गी जताई है। एक टिप्पणीकार ने लिखा, “दौलत से मेरा कोई लेना-देना नहीं, लेकिन सारी तकलीफें मुझे भी झेलनी पड़ती हैं।” चेंगदू से ताइवान आईं लेखिका लिन लिंग ने कहा, “वेतन घट रहे हैं और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं; ऐसे में कीमतें बढ़ाना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।”

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विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किराया बढ़ने से सामाजिक बहिष्कार और गहरा सकता है। सार्वजनिक धन और कर्ज से इस प्रणाली को चलाया जा रहा है, लेकिन नियमित इस्तेमाल का खर्च केवल अपेक्षाकृत संपन्न लोग ही उठा सकते हैं। सरकार दुविधा में है: वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए किराया बढ़ाने से आम नागरिकों की पहुंच से यह सेवा बाहर हो सकती है, जबकि किराया कम रखने से वित्तीय घाटा और बढ़ता कर्ज जारी रहेगा।

इतनी सारी लाइनें घाटे में क्यों हैं?

चीन के HSR नेटवर्क की वित्तीय मुश्किलों की जड़ उसका तेज़ और राजनीतिक लक्ष्यों से प्रेरित विस्तार है। प्रोत्साहन पैकेजों के तहत कई नई लाइनें और स्टेशन दूरदराज या कम आबादी वाले इलाकों में बनाए गए, जहां लागत-लाभ के आकलन या दीर्घकालिक मांग पर बहुत कम ध्यान दिया गया। 2010 के बाद से कम यात्री संख्या के कारण 20 से अधिक हाई-स्पीड रेल स्टेशन बंद किए जा चुके हैं या इस्तेमाल में नहीं हैं, खासकर अंतर्देशीय प्रांतों में।

हाई-स्पीड रेल का निर्माण और रखरखाव महंगा है। एक किलोमीटर पटरी बिछाने में 120 से 130 मिलियन युआन खर्च होते हैं, जो पारंपरिक रेल की तुलना में करीब तीन गुना है। बुनियादी ढांचे का रखरखाव बेहद सटीक मानकों के अनुसार करना पड़ता है और ट्रेनों की भी बार-बार महंगी देखरेख जरूरी है। पारंपरिक रेल से अलग, HSR माल नहीं ढो सकती, इसलिए उसकी आय केवल यात्री किरायों तक सीमित रहती है।

बीजिंग जियाओतोंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर झाओ जियान ने कहा, “अगर केंद्र सरकार के तय मानकों के अनुसार आकलन किया जाए, तो कई नई HSR लाइनें नहीं बननी चाहिए थीं।” उन्होंने यह भी कहा कि विनिर्माण क्षेत्र की महाशक्ति चीन को माल ढुलाई की अधिक क्षमता चाहिए, जो HSR उपलब्ध नहीं करा सकती।

अक्सर मुनाफ़े से अधिक राजनीतिक लक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई। स्थानीय सरकारों ने HSR को आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने और संपत्ति के दाम बढ़ाने का तरीका माना। इससे जरूरत से ज्यादा निवेश हुआ और ऐसे स्थानों पर स्टेशन बने जहां पहुंचना मुश्किल था या आबादी कम थी। रियल एस्टेट बाजार के ढहने के बाद इनमें से कई स्टेशन अब खाली पड़े हैं और स्थानीय सरकारें उनके निर्माण के लिए लिए गए कर्ज चुकाने में संघर्ष कर रही हैं।

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तुलना और सबक: क्या हाई-स्पीड रेल टिकाऊ है?

चीन का HSR अनुभव ऐसे ही प्रोजेक्ट पर विचार कर रहे दूसरे देशों के लिए अहम सबक देता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में हाई-स्पीड रेल योजनाओं की ऊंची लागत, कम यात्री संख्या और पर्यावरणीय लाभों पर सवाल उठाए गए हैं। कैटो इंस्टीट्यूट के एक विश्लेषण के अनुसार, हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए अलग बुनियादी ढांचा चाहिए, जिसका इस्तेमाल माल ढुलाई या अन्य कामों के लिए नहीं किया जा सकता। इससे वे राजमार्गों या पारंपरिक रेल की तुलना में कम लागत-प्रभावी बन जाती हैं।

चीन में HSR पर जोर देने की वजह से पारंपरिक रेल प्रणालियों की उपेक्षा हुई है, जिससे देश के लॉजिस्टिक्स संतुलन पर असर पड़ा है। HSR ने दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने, यात्रा का समय घटाने और चीनी तकनीक का प्रदर्शन करने जैसे निर्विवाद सामाजिक और विकासात्मक लाभ दिए हैं, लेकिन इससे व्यावसायिक लाभ कमाने की उम्मीद अब भी पूरी नहीं हुई है। केवल सबसे व्यस्त लाइनें मुनाफ़े में हैं और उनसे भी शुरुआती निवेश की भरपाई में दशकों लगने की आशंका है।

कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि नेटवर्क का मूल्य वित्तीय नहीं, बल्कि सामाजिक पैमाने पर आंका जाना चाहिए। HSR ने लोगों की आवाजाही आसान की है, क्षेत्रीय असमानताएं घटाई हैं और राष्ट्रीय गौरव की भावना दी है। हालांकि, कर्ज बढ़ने और आर्थिक विकास धीमा पड़ने के साथ सरकार पर आगे विस्तार के बजाय वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता देने का दबाव बढ़ रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

जोखिमों को देखते हुए चीनी अधिकारियों ने HSR विस्तार पर लगाम कसनी शुरू कर दी है। खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गैर-जरूरी नई लाइनों पर रोक लगाने का आदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अधूरी परियोजनाएं आवास की कीमतों को और गिरा सकती हैं और कर्ज तथा कम इस्तेमाल का दुष्चक्र पैदा कर सकती हैं। सरकार ने नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की मंजूरी के मानदंड भी सख्त किए हैं और मजबूत अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों तथा स्पष्ट मांग वाली परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

नेटवर्क की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए चाइना रेलवे ने समय-सारिणी में बदलाव किए हैं, दूरदराज के क्षेत्रों में किराया घटाया है और अपनी सहायक कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करके निजी निवेश जुटाने की कोशिश की है। हालांकि, इन कदमों से कर्ज का बोझ खास तौर पर कम होने या घाटे वाली लाइनों के मुनाफ़े में आने की संभावना नहीं है। सुधार के सुझावों में किराया और बढ़ाना, स्टेशनों की संख्या घटाना तथा प्रशासन बेहतर करना शामिल है, लेकिन इन उपायों को लागू करना राजनीतिक रूप से संवेदनशील और कठिन है।

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इन चुनौतियों के बावजूद चीन का HSR नेटवर्क बढ़ता जा रहा है। 2025 के लिए 2,600 किलोमीटर और पटरी बिछाने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि यात्रियों और माल की बढ़ती आवाजाही से आय बढ़ेगी और चीनी HSR तकनीक के निर्यात से नए अवसर मिलेंगे। फिर भी बुनियादी सवाल बना हुआ है: क्या दुनिया की सबसे बड़ी हाई-स्पीड रेल प्रणाली वित्तीय रूप से टिकाऊ बन सकती है, या यह महत्वाकांक्षा और अति-विस्तार का महंगा प्रतीक बनी रहेगी?

संक्षेप में

  • चीन का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा है। इसकी पटरियां करीब 50,000 किलोमीटर तक फैली हैं और 2025 में इसके 50,000 किलोमीटर से अधिक होने की योजना है।
  • नेटवर्क पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। 2024 के अंत तक कुल देनदारियां 6.2 ट्रिलियन युआन (करीब 860 अरब डॉलर) तक पहुंच गई थीं।
  • मुख्य रूप से तटीय शहरों की कुछ ही लाइनें मुनाफ़े में हैं। कम यात्रियों और रखरखाव की ऊंची लागत के कारण अधिकतर मार्ग घाटे में चलते हैं।
  • हाल में किराए बढ़ाने का मकसद बढ़ती लागत की भरपाई करना है, लेकिन इससे आम चीनी लोगों के लिए HSR का सफर महंगा हो सकता है और सामाजिक बहिष्कार बढ़ सकता है।
  • दूरदराज के इलाकों में कई स्टेशन कम इस्तेमाल हो रहे हैं या छोड़ दिए गए हैं, जो जरूरत से ज्यादा निवेश और राजनीतिक लक्ष्यों से प्रेरित विस्तार को दर्शाता है।
  • सरकार नई परियोजनाओं की मंजूरी सख्त कर रही है और सुधारों की तलाश में है, लेकिन वित्तीय स्थिरता अब भी दूर है।
  • चीन की HSR प्रणाली सामाजिक और विकासात्मक लाभ देती है, लेकिन उसका व्यावसायिक प्रतिफल सीमित है। इससे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश के भविष्य पर सवाल उठते हैं।
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