चीन का व्यापक 2024 ऑडिट: राजकोषीय शासन के लिए निर्णायक मोड़
चीन की 2024 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं को दूर करने, हजारों अधिकारियों को अनुशासित करने और सार्वजनिक धन के प्रबंधन के प्रति देश के नजरिए में बदलाव लाने का व्यापक अभियान सामने आया है। राष्ट्रीय जन कांग्रेस की स्थायी समिति के समक्ष महालेखा परीक्षक होउ काई द्वारा पेश किए गए निष्कर्षों से सरकारी एजेंसियों, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों और निजी क्षेत्र में हलचल मच गई है। ये निष्कर्ष अतीत के कुप्रबंधन के पैमाने और जवाबदेही लागू करने के सरकार के संकल्प, दोनों को उजागर करते हैं।
विषय-सूची
- चीन का व्यापक 2024 ऑडिट: राजकोषीय शासन के लिए निर्णायक मोड़
- ऑडिट में क्या सामने आया?
- पेंशन निधि का दुरुपयोग: बढ़ती चिंता
- बुनियादी ढांचे और विशेष बॉन्ड निधि का कुप्रबंधन
- शिक्षा निधि: व्यापक अनियमितताएं और छात्रों पर असर
- सरकारी उद्यम और “ज़ॉम्बी कंपनियां”
- जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और जनकल्याण
- नियामकीय कार्रवाई: PwC और एवरग्रांडे घोटाला
- ऑडिट और लेखा उद्योग पर व्यापक असर
- ऑडिट निष्कर्षों पर चीन की क्या प्रतिक्रिया है?
- क्षेत्र-विशेष सुधार और व्यवस्थागत बदलाव
- चीन की अर्थव्यवस्था और समाज के लिए यह क्यों अहम है?
- विशेषज्ञों की राय: सुधार, निरोध और आगे की राह
- सारांश
रिपोर्ट के केंद्र में 654 अरब युआन (करीब 90 अरब डॉलर) से जुड़ी अनियमितताओं का निपटारा और 4,100 से अधिक लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई है। ऑडिट में केंद्र सरकार के 2024 के बजट के क्रियान्वयन, प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं और सरकारी स्वामित्व वाली संपत्तियों के प्रबंधन की जांच की गई। साथ ही, शिक्षा, पेंशन और ग्रामीण विकास जैसे जनकल्याण के लिए अहम क्षेत्रों में व्यवस्थागत समस्याएं भी उजागर हुईं।
ऑडिट में क्या सामने आया?
2024 का ऑडिट हाल के वर्षों के सबसे व्यापक ऑडिटों में से एक था। इसमें सरकारी गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत श्रृंखला की जांच की गई। अधिकारियों ने केंद्र और स्थानीय, दोनों स्तरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए देखा कि धन कैसे आवंटित और खर्च किया गया तथा कई मामलों में उसका दुरुपयोग कैसे हुआ। ऑडिट के निष्कर्ष चीन के राजकोषीय शासन में लगातार बनी चुनौतियों की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन यह भी दिखाते हैं कि सरकार अब उनका सीधे सामना करने के लिए पहले से अधिक तत्पर है।
पेंशन निधि का दुरुपयोग: बढ़ती चिंता
सबसे चौंकाने वाले खुलासों में से एक स्थानीय सरकारों द्वारा मूल पेंशन निधि का गबन था। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय (NAO) ने 25 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में 4.1 ट्रिलियन युआन (576.9 अरब डॉलर) की पेंशन निधि की समीक्षा की और पाया कि करीब 60.2 अरब युआन का अनुचित इस्तेमाल हुआ था। बढ़ते वित्तीय दबाव में स्थानीय अधिकारियों ने इन निधियों को सेवानिवृत्त लोगों की सहायता के बजाय कर्ज चुकाने जैसे कामों में लगा दिया। इससे न केवल चीन की वृद्ध होती आबादी की आर्थिक सुरक्षा कमजोर होती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गहरे राजकोषीय दबावों का भी संकेत मिलता है।
बुनियादी ढांचे और विशेष बॉन्ड निधि का कुप्रबंधन
ऑडिट में विशेष बॉन्ड और केंद्र सरकार के बजट से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल में भी गंभीर समस्याएं सामने आईं। बुनियादी ढांचे की 522 परियोजनाओं के लिए निर्धारित करीब 28 अरब युआन (3.9 अरब डॉलर) या तो खर्च नहीं किए गए या फिर अनधिकृत कामों में लगाए गए। इसके अलावा, परियोजनाओं की धीमी प्रगति के कारण केंद्र के बजट से किए गए 41 अरब युआन से अधिक के निवेश का इस्तेमाल नहीं हुआ। कुछ मामलों में परियोजनाओं को उनकी कुल नियोजित लागत से भी अधिक धन मिला, जो कमजोर निगरानी और योजना की कमियों को दर्शाता है।
ये निष्कर्ष बीजिंग के सामने एक अहम चुनौती उजागर करते हैं: राजकोषीय प्रोत्साहन का मकसद आर्थिक सुधार को गति देना है, खासकर संपत्ति बाजार में गिरावट और बाहरी व्यापार दबावों के बीच, लेकिन कुप्रबंधन और उच्च गुणवत्ता वाली, व्यावहारिक परियोजनाओं की कमी ऐसे उपायों की प्रभावशीलता को कम करती है। सोसाइटी जेनरल एसए में ग्रेटर चाइना की अर्थशास्त्री मिशेल लैम ने कहा, “कई वर्षों के अत्यधिक निवेश के बाद योग्य परियोजनाएं ढूंढना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।”
शिक्षा निधि: व्यापक अनियमितताएं और छात्रों पर असर
चीन के दीर्घकालिक विकास के लिए अहम शिक्षा क्षेत्र भी जांच से अछूता नहीं रहा। ऑडिट में ग्रामीण छात्रों के पौष्टिक भोजन कार्यक्रमों और व्यापक शैक्षिक विकास के लिए रखी गई निधि के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का खुलासा हुआ। केवल हुनान प्रांत में ही भोजन दिए जाने के दिनों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर लाखों युआन के फर्जी दावे किए गए। इस धन का दुरुपयोग कर्मचारियों के कल्याण पर हुआ या इसे वेतन के लिए इस्तेमाल किया गया। शान्शी, युन्नान, हैनान, शानदोंग और अन्य प्रांतों में भी ऐसी ही समस्याएं मिलीं, जहां धन मिलने में देरी हुई, उसका गबन हुआ या नियमों का पालन न करने वाली खरीद पर खर्च किया गया।
ग्रामीण स्कूल भोजन कार्यक्रम की निधि के प्रबंधन में अनियमितताओं के लिए कुल मिलाकर 1,200 से अधिक लोगों को दंडित किया गया और सुधारात्मक कार्रवाई में 4 अरब युआन (550 मिलियन डॉलर) से अधिक की राशि शामिल थी। इसके परिणाम सीधे दिखाई दिए: स्कूलों को धन मिलने में देरी या अपर्याप्त राशि, किंडरगार्टन के लिए सब्सिडी न मिलना और हजारों छात्रों का वित्तीय सहायता या उचित पोषण से वंचित रह जाना।
सरकारी उद्यम और “ज़ॉम्बी कंपनियां”
ऑडिट में सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों (SOEs) को भी निशाना बनाया गया और सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल एवं प्रबंधन पर ध्यान दिया गया। पाया गया कि 24 क्षेत्रों में कुछ सरकारी उद्यमों ने सार्वजनिक धन के 37 अरब युआन अपने पास रोक रखे थे, मुख्य रूप से परिपक्व हो रहे कर्ज और कर्मचारियों के वेतन चुकाने के लिए। इससे 11.2 अरब युआन का परोक्ष (छिपा हुआ) कर्ज बना। रिपोर्ट में तथाकथित “ज़ॉम्बी कंपनियों”—यानी सरकार की मदद से घाटे में चलने के बावजूद टिकाए रखी गई कंपनियों—को कर्ज देना बंद करने की मांग की गई और कर्ज प्रबंधन तथा संसाधनों के आवंटन में सुधार पर जोर दिया गया।
जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और जनकल्याण
चर्चित मामलों के अलावा, ऑडिट में जमीनी स्तर के भ्रष्टाचार की भी जांच की गई और ऐसे निचले पदों के अधिकारियों की पहचान की गई जिन्होंने धन का दुरुपयोग कर समुदायों के हितों को नुकसान पहुंचाया। वृद्ध देखभाल, कृषि भूमि विकास और कृषि सब्सिडी जैसे जनकल्याण से सीधे जुड़े क्षेत्रों में लेखा परीक्षकों को भुगतान में देरी से लेकर खुले गबन तक कई तरह की समस्याएं मिलीं।
नियामकीय कार्रवाई: PwC और एवरग्रांडे घोटाला
ऑडिट अभियान का शायद सबसे चर्चित नतीजा दिवालिया हो चुकी रियल एस्टेट दिग्गज एवरग्रांडे के ऑडिट में भूमिका को लेकर प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PwC) के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई थी। चीनी अधिकारियों ने कंपनी की मुख्यभूमि चीन इकाई पर रिकॉर्ड 441 मिलियन युआन (62 मिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाया और छह महीने के लिए उसका कारोबार निलंबित कर दिया। जांच में पाया गया कि कंपनी ने एवरग्रांडे की वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति “आंखें मूंद लीं” और “यहां तक कि उसे बढ़ावा भी दिया।”
चीन प्रतिभूति नियामक आयोग (CSRC) और वित्त मंत्रालय ने पाया कि PwC झोंग तियान एलएलपी ने उचित सावधानी नहीं बरती, ऑडिट की झूठी रिपोर्टें जारी कीं और एवरग्रांडे के वित्तीय विवरणों में महत्वपूर्ण गलतियों का पता लगाने या उनकी रिपोर्ट करने में विफल रही। इसके नतीजे तेजी से सामने आए: सरकारी दिग्गजों समेत प्रमुख ग्राहक PwC से दूर हो गए और कंपनी को कारोबार तथा कर्मचारियों के बाहर जाने का सामना करना पड़ा। इस मामले ने चीन में काम करने वाली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ऑडिट फर्मों को स्पष्ट संदेश दिया: ऑडिट में विफलताओं और धोखाधड़ी में मिलीभगत के प्रति नियामकों की सहनशीलता अब पहले से कहीं कम है।
ऑडिट और लेखा उद्योग पर व्यापक असर
PwC और डेलॉइट जैसी अन्य ऑडिट फर्मों के खिलाफ कार्रवाई (डेलॉइट पर 2023 में 211.9 मिलियन युआन का जुर्माना लगाया गया था और तीन महीने के लिए उसका कामकाज निलंबित किया गया था) ने चीन में वित्तीय निगरानी का परिदृश्य बदल दिया है। अंतरराष्ट्रीय लेखा नेटवर्क चीन में काम करने के जोखिमों का फिर से आकलन कर रहे हैं, क्योंकि अब नियामकीय जुर्माना ऑडिट के काम से होने वाली आय से कहीं अधिक हो सकता है। साथ ही, चीनी कंपनियां—खासकर सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम—तेजी से घरेलू ऑडिट फर्मों का रुख कर रही हैं। इसकी एक वजह नियामकों का अनौपचारिक मार्गदर्शन और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा डेटा नियंत्रण को लेकर चिंताएं हैं।
इन घटनाक्रमों ने पारदर्शिता और चीन के ऑडिट बाजार में विदेशी भागीदारी के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर काम करने वाले ग्राहकों के लिए अंतरराष्ट्रीय फर्में बनी रहेंगी, लेकिन उनकी जगह घरेलू फर्मों को लाने का रुझान साफ है।
ऑडिट निष्कर्षों पर चीन की क्या प्रतिक्रिया है?
ऑडिट में सामने आए खुलासों पर सरकार की प्रतिक्रिया कई पहलुओं वाली और व्यापक रही है। मार्च 2024 के अंत तक अधिकारियों ने वित्तीय शासन की खामियों को दूर करने के लिए 1,700 से अधिक आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं में संशोधन किया या उन्हें स्थापित किया। जवाबदेही के लिए “क्लोज्ड-लूप” व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें समस्या की पहचान, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग शामिल है।
प्रमुख विभागों ने लक्षित सुधारों के लिए विशेष कार्यदल बनाए हैं, जिससे कार्रवाई में लगने वाला समय काफी कम हुआ है। मई 2024 से अब तक अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई के 430 से अधिक गंभीर मामले सामने आए हैं और उन्हें संबंधित अधिकारियों के पास भेजा गया है। इनमें 1,400 से अधिक लोग और दुरुपयोग की गई 63 अरब युआन की राशि शामिल है। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय ने ऑडिट किए गए संस्थानों से प्रतिक्रिया मांगी है और सुधार के आदेश जारी किए हैं। उसने साल के अंत तक सुधारों की प्रगति पर नजर रखने और पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट देने की प्रतिबद्धता जताई है।
क्षेत्र-विशेष सुधार और व्यवस्थागत बदलाव
ऑडिट के बाद कई मंत्रालयों और एजेंसियों ने नए दिशानिर्देश जारी किए और कमजोर क्षेत्रों में निगरानी कड़ी की। उदाहरण के लिए, छह केंद्रीय प्राधिकरणों ने प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में खाद्य सुरक्षा और भोजन संबंधी निधि के प्रबंधन तथा निगरानी को मजबूत करने के उपाय संयुक्त रूप से जारी किए। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रांतों ने धोखाधड़ी से हासिल की गई सब्सिडी वापस ली है और भविष्य में दुरुपयोग रोकने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार किया है।
ऑडिट ने राजकोषीय और कर सुधारों के नए दौर, बेहतर कर्ज प्रबंधन और एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार को गति देने की मांगों को भी बल दिया। सरकार से अपेक्षा है कि वह स्थानीय विशेष बॉन्ड निधि के लिए पात्र क्षेत्रों का दायरा बढ़ाएगी और उत्पादक निवेश तथा सामाजिक कल्याण पर खर्च के लिए सरकारी उधारी के नए तरीकों पर विचार करेगी।
चीन की अर्थव्यवस्था और समाज के लिए यह क्यों अहम है?
2024 की ऑडिट रिपोर्ट चीन के लिए बेहद अहम मोड़ पर आई है। देश कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है: संपत्ति बाजार में मंदी, स्थानीय सरकारों पर बढ़ता कर्ज, बाहरी व्यापार का दबाव और सामाजिक कल्याण में सुधार करते हुए आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की जरूरत। ऑडिट के निष्कर्ष इस बात को रेखांकित करते हैं कि कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और कमजोर निगरानी से न केवल सार्वजनिक वित्त, बल्कि आर्थिक स्थिरता और सामाजिक समानता के व्यापक लक्ष्य भी जोखिम में पड़ते हैं।
इन समस्याओं को उजागर कर उनका समाधान करते हुए सरकार का लक्ष्य जनता का भरोसा बहाल करना, यह सुनिश्चित करना कि धन अपने लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे, और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह व्यवस्था बनाना है। ऑडिट में विफलताओं और वित्तीय धोखाधड़ी पर कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि चीन के वित्तीय क्षेत्र में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों पक्षों के लिए नियमों का सख्त पालन और ऊंचे मानक लागू करने की दिशा में बदलाव हो रहा है।
विशेषज्ञों की राय: सुधार, निरोध और आगे की राह
विशेषज्ञ ऑडिट अभियान को एक ओर निवारक कदम और दूसरी ओर सुधारों का प्रेरक मानते हैं। पेकिंग विश्वविद्यालय में सरकारी ईमानदारी निर्माण अनुसंधान केंद्र के उपनिदेशक झुआंग देशुई ने कहा कि सुधारों की सख्ती और दंडित लोगों की संख्या जमीनी स्तर पर मजबूत निवारक प्रभाव पैदा करती है और ऑडिट सुधारों के अधिकार को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऑडिट का मकसद केवल समस्याओं की पहचान करना नहीं, बल्कि कमियों को भरना और व्यवस्थागत खामियों का पता लगाना भी है, ताकि संबंधित विभाग समय रहते उनका समाधान कर सकें।
चीन में यूरोपीय संघ के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जेन्स एस्केलुंड ने कारोबारी माहौल में पूर्वानुमेयता और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सख्त निगरानी सकारात्मक कदम हो सकती है, बशर्ते इसे सभी उद्यमों पर समान रूप से लागू किया जाए।
सारांश
- चीन की 2024 की ऑडिट रिपोर्ट में 654 अरब युआन से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के निपटारे और 4,100 से अधिक लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का खुलासा हुआ।
- पेंशन निधि, बुनियादी ढांचे में निवेश, शिक्षा निधि और सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों के वित्तीय प्रबंधन में बड़ी समस्याएं मिलीं।
- ऑडिट में विफलताओं पर नियामकीय कार्रवाई—जिसका उदाहरण एवरग्रांडे मामले में भूमिका के लिए PwC पर लगाया गया रिकॉर्ड जुर्माना और निलंबन है—चीन में वित्तीय निगरानी के नए दौर का संकेत देती है।
- सरकार ने सार्वजनिक धन के भविष्य में दुरुपयोग को रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधार लागू किए, आंतरिक नियमों में संशोधन किया और जवाबदेही के नए तंत्र स्थापित किए हैं।
- ये कदम राजकोषीय शासन को मजबूत करने, जनता का भरोसा बहाल करने और आर्थिक वृद्धि को टिकाऊ तथा समानतापूर्ण बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
- ऑडिट के निष्कर्षों और सरकार की प्रतिक्रिया का चीन की अर्थव्यवस्था, ऑडिट एवं लेखा उद्योग तथा जनकल्याण और सामाजिक स्थिरता के प्रति देश के दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है।






