चीन की दुर्लभ स्वीकारोक्ति: यातना और गैरकानूनी हिरासत पर कार्रवाई में निर्णायक मोड़?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचने वाले एक कदम में, चीन के शीर्ष अभियोजन प्राधिकरण सुप्रीम पीपुल्स प्रोक्यूरेटरेट (SPP) ने सार्वजनिक रूप से दुर्लभ स्वीकारोक्ति की है: देश की न्याय व्यवस्था में यातना और गैरकानूनी हिरासत अब भी जारी हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की गैरकानूनी गतिविधियों पर नकेल कसने के वादे के साथ आई यह स्वीकारोक्ति, आधिकारिक बयानबाजी में एक अहम, हालांकि सतर्क, बदलाव है। लेकिन क्या यह ऐसी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव का संकेत है, जिसकी अपारदर्शिता, जबरन इकबालिया बयानों और असंतुष्टों के साथ कठोर व्यवहार के लिए लंबे समय से आलोचना होती रही है?
विषय-सूची
- चीन की दुर्लभ स्वीकारोक्ति: यातना और गैरकानूनी हिरासत पर कार्रवाई में निर्णायक मोड़?
- कार्रवाई की वजह क्या बनी? हालिया मामले और जनाक्रोश
- चीन की हिरासत व्यवस्थाओं को समझना: RSDL, शुआंगगुई और लिउझी
- निर्धारित स्थान पर आवासीय निगरानी (RSDL)
- शुआंगगुई: पार्टी की गुप्त अनुशासन व्यवस्था
- लिउझी: गुप्त हिरासत को संस्थागत रूप देना
- कानूनी सुधार और उनकी सीमाएं: यातना क्यों जारी है?
- इंसानी कीमत: वकील, कार्यकर्ता और आम नागरिक
- अंतरराष्ट्रीय आलोचना और चीन की प्रतिक्रिया
- व्यापक मायने: भ्रष्टाचार-विरोध या राजनीतिक नियंत्रण?
- संक्षेप में
चीन की न्याय व्यवस्था मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और विदेशी सरकारों की दशकों से जांच-पड़ताल का विषय रही है। यातना, मनमानी हिरासत और वकीलों व कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। जून 2024 में SPP ने गैरकानूनी हिरासत, अवैध तलाशी और यातना के जरिए “नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन” करने वाले न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए एक नया जांच विभाग बनाने की घोषणा की। कुछ लोग इसे जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक कदम मान रहे हैं। फिर भी, व्यापक संदर्भ और हालिया इतिहास बताते हैं कि गहरी जड़ें जमाए चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
कार्रवाई की वजह क्या बनी? हालिया मामले और जनाक्रोश
चीन ने अक्सर यातना के आरोपों से इनकार किया है, खासकर संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूहों द्वारा उठाए गए आरोपों से। लेकिन हाल में कई चर्चित मामलों ने, देश के कड़े नियंत्रण वाले मीडिया माहौल के भीतर भी, लोगों में गुस्सा भड़काया है।
अप्रैल 2024 में, बीजिंग स्थित एक मोबाइल गेमिंग कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी की हिरासत में मौत हो गई। उन्हें इनर मंगोलिया में चार महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था। आधिकारिक रिपोर्टों का दावा है कि उन्होंने आत्महत्या की, लेकिन “निर्धारित स्थान पर आवासीय निगरानी” (RSDL) व्यवस्था के तहत उनकी हिरासत की परिस्थितियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। RSDL के तहत अधिकारी संदिग्धों को लंबे समय तक गुप्त रूप से हिरासत में रख सकते हैं, अक्सर बिना आरोप लगाए, वकीलों तक पहुंच दिए या परिवार से संपर्क करने की अनुमति दिए।
अन्य मामले भी सामने आए हैं। इनमें 2022 में एक संदिग्ध की मौत शामिल है, जिसे कथित तौर पर RSDL के तहत बिजली के झटके और प्लास्टिक के पाइपों से यातना दी गई थी। 2019 की एक घटना में पुलिस अधिकारियों को भूखा रखने और नींद से वंचित करने के लिए जेल भेजा गया था, जिसके चलते एक हिरासत में रखा गया व्यक्ति अचेत अवस्था में पहुंच गया। SPP द्वारा खुद सार्वजनिक किए गए इन मामलों ने सुधार और अधिक पारदर्शिता की मांग को बल दिया है।
चीन की हिरासत व्यवस्थाओं को समझना: RSDL, शुआंगगुई और लिउझी
चीन की न्याय व्यवस्था में यातना के पैमाने और इसके लगातार जारी रहने को समझने के लिए उन तंत्रों को जानना जरूरी है जो इसे संभव बनाते हैं। पिछले दशक में संदिग्धों को अलग-थलग करने, पूछताछ करने और उन पर दबाव डालने के लिए गैरकानूनी या अर्ध-कानूनी हिरासत के कई रूप इस्तेमाल किए गए हैं, जो अक्सर न्यायिक निगरानी के दायरे से बाहर रहते हैं।
निर्धारित स्थान पर आवासीय निगरानी (RSDL)
2012 में शुरू की गई RSDL व्यवस्था के तहत पुलिस लोगों को गुप्त स्थानों पर छह महीने तक हिरासत में रख सकती है। इसे आधिकारिक तौर पर गंभीर अपराधों की जांच का एक साधन बताया जाता है, लेकिन मानवाधिकार वकीलों, कार्यकर्ताओं और असंतुष्टों के खिलाफ इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ है। हिरासत में रखे गए लोगों को अक्सर वकील और परिवार से मिलने नहीं दिया जाता। यातना की खबरें आम हैं, जिनमें नींद से वंचित करना, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना शामिल हैं।
शुआंगगुई: पार्टी की गुप्त अनुशासन व्यवस्था
दशकों तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने “शुआंगगुई” व्यवस्था चलाई। इसके तहत पार्टी का आंतरिक अनुशासन निकाय भ्रष्टाचार या पार्टी के प्रति अवफादारी के संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर सकता था। शुआंगगुई अपनी गोपनीयता, कानूनी सुरक्षा के अभाव और इकबालिया बयान हासिल करने के लिए अक्सर यातना के इस्तेमाल के चलते कुख्यात थी। ह्यूमन राइट्स वॉच और अन्य संगठनों ने इस व्यवस्था के तहत मौतों और गंभीर दुर्व्यवहार के मामले दर्ज किए हैं।
लिउझी: गुप्त हिरासत को संस्थागत रूप देना
2018 में नए राष्ट्रीय निगरानी कानून के तहत शुआंगगुई की जगह “लिउझी” यानी “हिरासत में रखना” व्यवस्था लाई गई। लिउझी ने गुप्त हिरासत का दायरा पार्टी सदस्यों से बढ़ाकर “सार्वजनिक शक्ति” का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति तक फैला दिया, जिनमें सरकारी कर्मचारियों से लेकर कारोबारी अधिकारी तक शामिल हैं। हिरासत में लिए गए लोगों को वकील या परिवार से संपर्क दिए बिना छह महीने तक रखा जा सकता है। यह व्यवस्था नियमित न्यायिक प्रक्रिया से बाहर काम करती है। सेफगार्ड डिफेंडर्स के अनुसार, अकेले 2023 में 26,000 लोगों को लिउझी के तहत रखा गया, यानी औसतन हर दिन 71 लोग।
लिउझी के लिए बनाई गई सुविधाओं में अधिकतम नियंत्रण और निगरानी की व्यवस्था होती है। इनमें गद्देदार कोठरियां, चौबीसों घंटे पहरेदार और आत्महत्या रोकने के सख्त नियम शामिल हैं। फिर भी यातना, जबरन इकबालिया बयान और मानसिक प्रताड़ना की खबरें व्यापक हैं। एक आपराधिक बचाव वकील ने CNN को बताया कि ज्यादातर मुवक्किल “दबाव और पीड़ा के आगे टूट जाएंगे,” जबकि इसका विरोध कर पाने वाले बहुत ही कम होते हैं।
कानूनी सुधार और उनकी सीमाएं: यातना क्यों जारी है?
यातना और गलत दोषसिद्धियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से चीन ने कई कानूनी सुधार किए हैं। आपराधिक प्रक्रिया कानून में 2012 के संशोधन के तहत यातना से हासिल किए गए इकबालिया बयानों को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट ने आपराधिक न्याय सुधारों की मांग की है और पुलिस के दुराचार को रोकने के लिए साक्ष्य को बाहर रखने के नियम लागू किए गए हैं।
हालांकि, कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि इन सुधारों का असर सीमित रहा है। चाइना लॉ ट्रांसलेट के अनुसार, साक्ष्य को बाहर रखने के इन नियमों में अन्य कानूनी व्यवस्थाओं में मौजूद “विषैले पेड़ के फल” का सिद्धांत शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि जबरन हासिल किए गए इकबालिया बयान को भले ही सबूत से हटा दिया जाए, लेकिन उससे मिले साक्ष्य का इस्तेमाल फिर भी किया जा सकता है। बचाव पक्ष के वकीलों को अक्सर अहम सबूत हासिल करने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जैसे चिकित्सकीय जांच के रिकॉर्ड या पूछताछ की रिकॉर्डिंग। दुराचार के आरोपों का जवाब देने के लिए जांचकर्ता भी अदालत में शायद ही कभी गवाही देते हैं।
इसके अलावा, आपराधिक मामलों में इकबालिया बयानों पर अत्यधिक निर्भरता और 99% से अधिक दोषसिद्धि दर, कानून प्रवर्तन एजेंसियों को किसी भी तरह से अपराध स्वीकार करवाने के लिए मजबूत प्रोत्साहन देती है। संयुक्त राष्ट्र की यातना के खिलाफ समिति ने चीन में यातना और दुर्व्यवहार के “गहराई तक जड़ जमाए” चलन की बार-बार आलोचना की है। समिति का कहना है कि सुधार पूरी तरह लागू या प्रभावी नहीं हुए हैं।
इंसानी कीमत: वकील, कार्यकर्ता और आम नागरिक
यातना और गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ कार्रवाई महज कानूनी प्रक्रिया का मामला नहीं है, इसके गहरे मानवीय परिणाम हैं। 2015 से चीन ने मानवाधिकार वकीलों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है, जिसे “709 कार्रवाई” के नाम से जाना जाता है। सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया, वकालत से प्रतिबंधित किया गया या जेल भेजा गया। उन पर अक्सर “राज्य सत्ता को कमजोर करने” के आरोप लगाए गए।
निशाना बनाए गए कई लोगों ने हिरासत के दौरान यातना और दुर्व्यवहार की शिकायत की है। प्रमुख मानवाधिकार वकील डिंग जियाशी को लंबे समय तक नींद से वंचित रखा गया, कई दिनों तक “टाइगर बेंच” पर बैठने को मजबूर किया गया और तेज आवाज में लगातार प्रचार सामग्री सुनाई गई। उनकी पत्नी सोफी लुओ ने इस यातना और उनके परिवार पर पड़े असर का जिक्र किया:
डिंग जियाशी की पत्नी सोफी लुओ अपने पति के संकल्प को याद करते हुए कहती हैं: “आपने अपना जीवन चीन के लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन इस सरकार को इसकी बिल्कुल कद्र नहीं… आपकी देशभक्ति के बदले वे आपको यातना देते हैं और जेल में डालते हैं। क्या आप चीन छोड़कर कोई दूसरी जिंदगी चुनने पर विचार कर सकते हैं?”
अन्य चर्चित मामलों में लेखक यांग हेंगजुन और नागरिक पत्रकार झांग झान की हिरासत और कथित यातना शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई नागरिक यांग को पर्याप्त भोजन और चिकित्सा देखभाल नहीं दी गई है, जबकि झांग ने बार-बार भूख हड़ताल की है और उन्हें जबरन खाना दिया गया है। मानवाधिकार समूह इसे यातना मानते हैं।
असंतुष्टों का बचाव करने या दुर्व्यवहार उजागर करने वाले वकीलों को अक्सर उत्पीड़न, वकालत से प्रतिबंध और यहां तक कि खुद जेल का सामना करना पड़ता है। कानूनी पेशे और नागरिक समाज पर इसका गहरा दबाव पड़ा है। कई लोग संवेदनशील मामलों को लेने या अन्याय के खिलाफ बोलने से कतराते हैं।
अंतरराष्ट्रीय आलोचना और चीन की प्रतिक्रिया
यातना और मनमानी हिरासत को लेकर चीन के रिकॉर्ड की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने बार-बार निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र की यातना के खिलाफ समिति ने अपनी हालिया समीक्षा में “लगातार मिल रही उन खबरों पर गंभीर चिंता जताई, जिनसे संकेत मिलता है कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में यातना और दुर्व्यवहार का चलन अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है।” समिति ने गुप्त जेलों को बंद करने और वकीलों व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई खत्म करने की भी मांग की।
इन आलोचनाओं के बावजूद, चीनी अधिकारियों ने लगातार देश की कानूनी व्यवस्था का बचाव किया है। 2024 की एक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, “हाल के वर्षों में चीन कानून के शासन को बढ़ावा दे रहा है और यातना के विरोध समेत सभी क्षेत्रों में बड़े प्रयास कर रहा है।” हालांकि, पारदर्शिता, स्वतंत्र निगरानी और दुर्व्यवहार के लिए जवाबदेही की कमी ऐसे दावों की विश्वसनीयता को लगातार कमजोर करती है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते कभी-कभी चर्चित बंदियों को रिहा किया गया है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव अब तक दूर की बात बना हुआ है। मानवाधिकार समर्थकों का कहना है कि विदेशी सरकारों को जवाबदेही की मांग अधिक मजबूती से करनी चाहिए और राजनयिक या आर्थिक संबंधों को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ना चाहिए।
व्यापक मायने: भ्रष्टाचार-विरोध या राजनीतिक नियंत्रण?
राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान उनके शासन की एक प्रमुख पहचान रहा है। इसके तहत सैकड़ों हजार अधिकारियों को हिरासत में लिया गया और सजा दी गई। आधिकारिक तौर पर इस अभियान को पार्टी और सरकार को साफ-सुथरा बनाने की मुहिम बताया जाता है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को हटाने और सत्ता मजबूत करने के लिए भी होता है।
लिउझी और हिरासत की अन्य व्यवस्थाओं का दायरा समाज के बड़े हिस्से तक बढ़ाया गया है। इसमें कारोबारी नेता, शिक्षक और अस्पताल प्रशासक भी शामिल हैं। यह सार्वजनिक जीवन के हर पहलू पर नियंत्रण रखने के पार्टी के इरादे को दर्शाता है। न्यायिक निगरानी का अभाव और गुप्त हिरासत का इस्तेमाल, दुर्व्यवहार, जबरन वसूली और असहमति दबाने की आशंकाएं बढ़ाते हैं।
कानूनी विद्वानों का कहना है कि “कानून के शासन” की आड़ में भी गैरकानूनी हिरासत को संस्थागत रूप देना, न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को और कमजोर करने तथा नागरिकों के अधिकारों को चोट पहुंचाने का जोखिम पैदा करता है। चीन के एक कानूनी विशेषज्ञ ने CNN से कहा, “पहले यह कानून से बाहर था। अब कुछ आलोचक इसे ‘कानूनी रूप से गैरकानूनी’ कहते हैं।”
संक्षेप में
- चीन के सुप्रीम पीपुल्स प्रोक्यूरेटरेट ने न्याय व्यवस्था में यातना और गैरकानूनी हिरासत के अस्तित्व को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए दुर्व्यवहार पर कार्रवाई का वादा किया है।
- हाल के चर्चित मामलों में हिरासत के दौरान मौतें और गंभीर दुर्व्यवहार शामिल हैं, जिनसे जनाक्रोश और सुधार की मांग बढ़ी है।
- RSDL, शुआंगगुई और लिउझी जैसी गुप्त हिरासत व्यवस्थाएं लंबे समय तक बिना संपर्क के हिरासत को संभव बनाती हैं। इनमें अक्सर कानूनी सुरक्षा या निगरानी नहीं होती।
- कानूनी सुधार किए गए हैं, लेकिन खामियों, अमल की कमी और बचाव पक्ष के वकीलों के सामने आने वाली बाधाओं के कारण उनका असर सीमित है।
- मानवाधिकार वकीलों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को अब भी यातना, उत्पीड़न और मनमानी हिरासत का सामना करना पड़ता है, जिससे नागरिक समाज पर दबाव पड़ता है।
- संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चीन के रिकॉर्ड की निंदा की है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव अब भी सीमित है।
- भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान और गुप्त हिरासत का विस्तार, भ्रष्टाचार से निपटने के प्रयासों के साथ राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की कोशिशों को भी दर्शाते हैं।
- अधिक पारदर्शिता, स्वतंत्र निगरानी और जवाबदेही के बिना चीन में यातना और गैरकानूनी हिरासत खत्म होने की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं।






