सबसे निचले स्थान पर पाकिस्तान: वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2025 के निष्कर्ष
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2025 में 148 देशों में पाकिस्तान को अंतिम स्थान दिया गया है। उसका लैंगिक समानता स्कोर केवल 56.7% रहा। पाकिस्तान के स्कोर में यह लगातार दूसरे वर्ष गिरावट है। 2023 में उसने 57.7% का अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ स्कोर हासिल किया था। जून 2025 में जारी यह रिपोर्ट चार प्रमुख आयामों में लैंगिक समानता का आकलन करती है: आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य और उत्तरजीविता तथा राजनीतिक सशक्तीकरण। सूचकांक में पाकिस्तान का सबसे निचले पायदान पर होना देश में लैंगिक असमानताओं की निरंतरता और उनकी गहरी जड़ों को रेखांकित करता है, खासकर आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में।
विषय-सूची
- सबसे निचले स्थान पर पाकिस्तान: वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2025 के निष्कर्ष
- वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक को समझना
- पाकिस्तान का प्रदर्शन: चारों आयामों पर एक नज़र
- आर्थिक भागीदारी और अवसर: सबसे कमजोर कड़ी
- शैक्षिक उपलब्धि: मामूली सुधार, लेकिन चिंताएं बरकरार
- स्वास्थ्य और उत्तरजीविता: ऊंचे स्कोर, लेकिन जमीनी चुनौतियां
- राजनीतिक सशक्तीकरण: प्रतिनिधित्व है, लेकिन अधिकार नहीं
- क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ: पाकिस्तान की तुलना कैसे होती है?
- समाज की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय
- प्रगति क्यों ठहरी हुई है? संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाएं
- लैंगिक असमानता की आर्थिक और सामाजिक कीमत
- क्या बदलने की जरूरत है? प्रगति के रास्ते
- संक्षेप में
वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक को समझना
वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक पहली बार 2006 में जारी किया गया था। यह लैंगिक आधार पर असमानताओं पर नज़र रखने वाला दुनिया का सबसे पुराना सूचकांक है। इसमें देशों का आकलन चार प्रमुख स्तंभों पर किया जाता है:
- आर्थिक भागीदारी और अवसर: श्रमबल में भागीदारी, वेतन समानता और नेतृत्व के पदों तक पहुंच को मापता है।
- शैक्षिक उपलब्धि: साक्षरता दर और प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा में नामांकन का आकलन करता है।
- स्वास्थ्य और उत्तरजीविता: जीवन प्रत्याशा और जन्म के समय लिंगानुपात को ध्यान में रखता है।
- राजनीतिक सशक्तीकरण: संसद और मंत्रिमंडल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की जांच करता है।
वैश्विक स्तर पर, 2025 की रिपोर्ट के अनुसार औसतन लैंगिक अंतर 68.8% तक कम हुआ है, जो 2024 के 68.4% से मामूली सुधार है। हालांकि, मौजूदा रफ्तार से दुनिया भर में पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने में अनुमानित 123 वर्ष लगेंगे। अब तक किसी भी देश ने पूर्ण लैंगिक समानता हासिल नहीं की है, हालांकि आइसलैंड लगातार 16वें वर्ष सूचकांक में शीर्ष पर है। उसने अपने लैंगिक अंतर का 92% से अधिक पाट दिया है।
पाकिस्तान का प्रदर्शन: चारों आयामों पर एक नज़र
पाकिस्तान का कुल स्कोर भले ही घटा हो, लेकिन रिपोर्ट चार उप-सूचकांकों में एक जटिल तस्वीर पेश करती है। कुछ क्षेत्रों में मामूली प्रगति दिखती है, जबकि अन्य में लंबे समय से बनी चुनौतियां उजागर होती हैं।
आर्थिक भागीदारी और अवसर: सबसे कमजोर कड़ी
आर्थिक भागीदारी और अवसर में पाकिस्तान का स्कोर 1.3 प्रतिशत अंक गिरकर बेहद कम 34.7% पर आ गया। यह उप-सूचकांक देश का सबसे कमजोर प्रदर्शन है और इन बातों को दर्शाता है:
- महिलाओं की श्रमबल में कम भागीदारी: केवल 22.8% महिलाएं कार्यबल का हिस्सा हैं। उनमें से अधिकांश कृषि, घरेलू काम, शिक्षण या चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत हैं।
- आय और वेतन का बढ़ता अंतर: रिपोर्ट में आय असमानता में मामूली बढ़ोतरी और पिछले साल से वेतन असमानता की धारणा में चार प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- नेतृत्व में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व: प्रबंधकीय या निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाएं अब भी बहुत कम हैं। सांस्कृतिक मानदंड अक्सर महिलाओं को नौकरी या नेतृत्व के पद तलाशने से हतोत्साहित करते हैं।
विश्व बैंक की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं को लगातार कम वेतन देना और उन्हें कम वेतन वाले क्षेत्रों में केंद्रित रखना आर्थिक असमानता को और बढ़ाता है। कई नियोक्ता यह मानकर महिलाओं को कम वेतन देते हैं कि वे परिवार की मुख्य कमाने वाली नहीं हैं। इससे आर्थिक निर्भरता और सीमित आर्थिक गतिशीलता का चक्र जारी रहता है।
शैक्षिक उपलब्धि: मामूली सुधार, लेकिन चिंताएं बरकरार
शिक्षा ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जिसमें पाकिस्तान ने 2025 में सुधार दर्ज किया। शैक्षिक उपलब्धि उप-सूचकांक 1.5 प्रतिशत अंक बढ़कर 85.1% पर पहुंच गया। इसकी वजहें थीं:
- महिला साक्षरता दर में 46.5% से 48.5% तक की वृद्धि।
- उच्च शिक्षा में समानता के स्तर में अपेक्षाकृत सुधार, हालांकि इसका बड़ा हिस्सा महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि के बजाय पुरुषों के नामांकन में गिरावट के कारण था।
इन सुधारों के बावजूद, शैक्षिक उपलब्धि में पाकिस्तान 148 देशों में 137वें स्थान पर है। यह सुधार नाजुक है, क्योंकि इसमें महिलाओं की प्रगति के साथ-साथ पुरुषों के लिए आई गिरावट भी झलकती है। इसके अलावा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच असमान बनी हुई है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। कई लड़कियों को कम उम्र में शादी, गरीबी और सांस्कृतिक पाबंदियों जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
स्वास्थ्य और उत्तरजीविता: ऊंचे स्कोर, लेकिन जमीनी चुनौतियां
स्वास्थ्य और उत्तरजीविता में पाकिस्तान का उप-सूचकांक स्कोर सबसे बेहतर 95.9% है। यह जीवन प्रत्याशा और जन्म के समय लिंगानुपात में लगभग समानता का संकेत देता है। हालांकि, इस आंकड़े के पीछे जमीनी स्तर की कई गंभीर चुनौतियां छिपी हैं:
- मातृ मृत्यु दर ऊंची है, खासकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में।
- घरेलू हिंसा व्यापक है और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
- महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति संस्थागत उदासीनता है।
आंकड़े भले ही आशाजनक लगें, लेकिन कई पाकिस्तानी महिलाओं के वास्तविक अनुभव एक अलग कहानी बयां करते हैं। गरीबी, बुनियादी ढांचे की कमी और सामाजिक कलंक के कारण अक्सर उनके स्वास्थ्य संबंधी नतीजे प्रभावित होते हैं।
राजनीतिक सशक्तीकरण: प्रतिनिधित्व है, लेकिन अधिकार नहीं
राजनीतिक सशक्तीकरण पाकिस्तान के लिए अब भी बड़ी बाधा बना हुआ है। इस क्षेत्र में देश का स्कोर 2024 के 12.2% से घटकर 2025 में 11% रह गया। प्रमुख निष्कर्षों में शामिल हैं:
- संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 1.2 प्रतिशत अंक बढ़ा, लेकिन इसकी मुख्य वजह सीधे चुनावों के बजाय आरक्षित सीटें हैं।
- मंत्रिमंडल में महिलाओं की हिस्सेदारी 5.9% से घटकर शून्य हो गई। इसके चलते पाकिस्तान उन देशों में शामिल हो गया है जहां मंत्रिमंडल में केवल पुरुष हैं।
- संघीय मंत्रिमंडल के 31 मंत्रियों में केवल एक महिला है और राजनीति में आने वाली ज्यादातर महिलाएं स्थापित राजनीतिक परिवारों से हैं।
प्रतिनिधित्व की यह कमी केवल प्रतीकात्मक नहीं है; इसके वास्तविक परिणाम होते हैं। जब महिलाओं को नीति निर्माण से बाहर रखा जाता है, तो कार्यस्थल पर उत्पीड़न, कम उम्र में शादी और मातृत्व अवकाश जैसे मुद्दों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है या उन पर कार्रवाई टाल दी जाती है। राजनीतिक क्षेत्र भी महिलाओं के लिए प्रतिकूल है। उन्हें उत्पीड़न, चरित्र हनन और यहां तक कि जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ: पाकिस्तान की तुलना कैसे होती है?
पड़ोसी देशों और वैश्विक समकक्षों से तुलना करने पर पाकिस्तान का अंतिम स्थान और भी चौंकाने वाला है। दक्षिण एशिया में बांग्लादेश वैश्विक स्तर पर 24वें स्थान पर है, जबकि भारत 131वें स्थान पर है। सूडान और ईरान जैसे युद्ध या गंभीर सामाजिक पाबंदियों का सामना कर रहे देश भी पाकिस्तान से ऊपर हैं। सूचकांक के शीर्ष 10 देशों, जिनमें आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे शामिल हैं, ने अपने लैंगिक अंतर का कम से कम 80% पाट दिया है। यह दिखाता है कि निरंतर प्रतिबद्धता और नीतिगत कार्रवाई से प्रगति संभव है।
समाज की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञों की राय
रिपोर्ट के निष्कर्षों ने पाकिस्तान में व्यापक बहस और चिंता को जन्म दिया है। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं, शिक्षाविदों और पूर्व सांसदों ने इस रैंकिंग को “बेहद चिंताजनक” और नीति-निर्माताओं तथा पूरे समाज के लिए “जागने की चेतावनी” बताया है।
महिला अध्ययन में पीएचडी कर चुकी नायाब बुखारी ने इस रैंकिंग को बेहद चिंताजनक और शर्मनाक बताया। “पाकिस्तान की आबादी का लगभग आधा हिस्सा महिलाएं हैं। उन्हें बढ़ती संरचनात्मक बाधाओं और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान सूची में सबसे निचले स्थान पर है।”
नेशनल असेंबली की पूर्व सदस्य महनाज़ अज़ीज़ ने निराशा जताते हुए कहा:
148 देशों में पाकिस्तान के 148वें स्थान पर आने से हमारा सिर शर्म से झुक गया है। यह आपातकालीन स्थिति है और सभी दलों को इस संकट को समझकर कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
कई टिप्पणीकारों ने पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के पीछे जड़ जमा चुकी पितृसत्ता, राजनीतिक निष्क्रियता और सुधारों के प्रति सामाजिक प्रतिरोध को प्रमुख कारण बताया है। औरत मार्च जैसे नारीवादी आंदोलनों के खिलाफ विरोध तथा घरेलू हिंसा और बाल विवाह पर महत्वपूर्ण कानून पारित करने में विफलता को व्यवस्थागत उपेक्षा के सबूत के तौर पर पेश किया गया है।
प्रगति क्यों ठहरी हुई है? संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाएं
शिक्षा में कुछ प्रगति के बावजूद, संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाओं के मेल के कारण पाकिस्तान में कुल लैंगिक अंतर अब भी लगातार बना हुआ है:
- पितृसत्तात्मक मानदंड: समाज में गहराई से जमी धारणाएं महिलाओं की आवाजाही, स्वायत्तता और अवसरों तक पहुंच को सीमित करती हैं।
- कानून और नीतियों में कमियां: महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों का असंगत क्रियान्वयन और घरेलू हिंसा व बाल विवाह रोकने वाले कानूनों जैसे सुधारों का विरोध।
- आर्थिक बहिष्करण: महिलाओं के लिए ऋण, संपत्ति के अधिकार और औपचारिक रोजगार तक सीमित पहुंच।
- राजनीतिक हाशियाकरण: वास्तविक राजनीतिक सशक्तीकरण के बजाय आरक्षित सीटों पर निर्भरता और निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की कमी।
सुरक्षा संबंधी चिंताएं, सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों की कमी और हिंसा का खतरा इन बाधाओं को और बढ़ाते हैं। ये सभी बातें महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में पूरी तरह भाग लेने से हतोत्साहित करती हैं।
लैंगिक असमानता की आर्थिक और सामाजिक कीमत
लैंगिक असमानता के परिणाम अलग-अलग महिलाओं तक सीमित नहीं हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि केवल महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने से पाकिस्तान की जीडीपी में 60% तक की वृद्धि हो सकती है। राजनीति और समाज में महिलाओं की अधिक भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन के नतीजे भी बेहतर होंगे।
विश्व आर्थिक मंच की प्रबंध निदेशक सादिया ज़ाहिदी ने आर्थिक विकास के लिए लैंगिक समानता के महत्व पर जोर दिया:
जो अर्थव्यवस्थाएं अपनी प्रतिभा और मानव पूंजी के पूरे दायरे का लाभ उठाती हैं, वे बदलाव के दौर का सामना करने और उत्पादकता व समृद्धि को तेज़ी से बढ़ाने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होती हैं। फिर भी, अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं विकास के इस रास्ते का पूरा लाभ नहीं उठा रही हैं।
महिलाओं को सशक्त बनाने में विफल रहकर पाकिस्तान न केवल अन्याय को जारी रख रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपने विकास और प्रतिस्पर्धा को भी कमजोर कर रहा है।
क्या बदलने की जरूरत है? प्रगति के रास्ते
पाकिस्तान में लैंगिक अंतर को पाटने के लिए सरकार, नागरिक समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ बहुआयामी प्रयास जरूरी हैं। प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं:
- कानूनी सुधार: महिलाओं को हिंसा, भेदभाव और बाल विवाह से बचाने वाले कानून बनाएं और उन्हें लागू करें।
- आर्थिक सशक्तीकरण: महिलाओं की शिक्षा, ऋण और औपचारिक रोजगार तक पहुंच बढ़ाएं; महिला उद्यमिता को समर्थन दें; और समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करें।
- राजनीतिक समावेशन: आरक्षित सीटों से आगे बढ़कर राजनीति और नीति निर्माण में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहित करें।
- सामाजिक बदलाव: शिक्षा, मीडिया और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पितृसत्तात्मक मानदंडों को चुनौती दें; महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करने वाले जमीनी आंदोलनों का समर्थन करें।
- संस्थागत जवाबदेही: लैंगिक भेदभाव और उत्पीड़न के लिए सार्वजनिक और निजी संस्थानों को जवाबदेह ठहराएं।
अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं और विकास साझेदारों की भी भूमिका है। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सहायता और आर्थिक समर्थन से महिलाओं को लाभ मिले और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिले।
संक्षेप में
- WEF की वैश्विक लैंगिक अंतर रिपोर्ट 2025 में 148 देशों में पाकिस्तान अंतिम स्थान पर रहा। उसका स्कोर 56.7% था।
- देश में आर्थिक भागीदारी और राजनीतिक सशक्तीकरण में गिरावट आई। शिक्षा में मामूली सुधार मुख्य रूप से पुरुषों के नामांकन में कमी के कारण हुआ।
- कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 22.8% है और नेतृत्व तथा राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व कम है।
- पितृसत्तात्मक मानदंडों और कमजोर कानूनी सुरक्षा समेत संरचनात्मक और सांस्कृतिक बाधाएं प्रगति में लगातार रुकावट डाल रही हैं।
- विशेषज्ञों का कहना है कि लैंगिक असमानता केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि भारी आर्थिक और सामाजिक कीमत वाला राष्ट्रीय संकट है।
- लैंगिक अंतर पाटने और पाकिस्तान की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए व्यापक सुधार और सामाजिक बदलाव जरूरी हैं।






