इंडोनेशियाई स्कूलों में जानलेवा बुलिंग: गहराता संकट तत्काल कार्रवाई की मांग करता है

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School bullying - Humanium

इंडोनेशियाई स्कूलों में जानलेवा बुलिंग: गहराता संकट तत्काल कार्रवाई की मांग करता है

इंडोनेशिया के शैक्षणिक संस्थानों में, प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक, जानलेवा बुलिंग के मामलों में चिंताजनक उछाल देखा जा रहा है। बुलिंग के कथित नतीजे के रूप में छात्रों की हालिया चर्चित मौतों ने देश को झकझोर दिया है और स्कूलों के माहौल, नियामक प्रणालियों तथा हिंसा के प्रति सांस्कृतिक रवैये से जुड़ी गहरी समस्याओं को उजागर किया है। इस लेख में दुखद घटनाओं, इंडोनेशिया में बुलिंग की व्यापक पृष्ठभूमि, सरकार की प्रतिक्रिया और व्यवस्थागत बदलाव की तत्काल आवश्यकता की पड़ताल की गई है।

विषय-सूची
  1. इंडोनेशियाई स्कूलों में जानलेवा बुलिंग: गहराता संकट तत्काल कार्रवाई की मांग करता है
  2. बुलिंग के हालिया जानलेवा मामले: वे त्रासदियां जिन्होंने देशभर में आक्रोश पैदा किया
  3. प्राथमिक स्कूलों से आगे बुलिंग: एक व्यवस्थागत समस्या
  4. आंकड़े: बिगड़ते हालात
  5. इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग इतनी आम क्यों है?
  6. बुलिंग का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक असर
  7. सरकार की प्रतिक्रिया: नियम और उनकी सीमाएं
  8. उच्च शिक्षा में बुलिंग: मेडिकल स्कूलों का संकट
  9. शिक्षक और स्कूल कर्मचारी: समाधान का हिस्सा या समस्या का?
  10. समुदाय और परिवार की भागीदारी: सहानुभूति और रोकथाम की संस्कृति बनाना
  11. क्या बदलने की जरूरत है? भविष्य के लिए सुझाव
  12. संक्षेप में

बुलिंग के हालिया जानलेवा मामले: वे त्रासदियां जिन्होंने देशभर में आक्रोश पैदा किया

मई 2024 में प्राथमिक स्कूल के दो छात्रों—रियाउ में आठ वर्षीय ख्रिस टोपाल बुतारबुतार और दक्षिण सुलावेसी में 15 वर्षीय मुहम्मद राजा अफनान—की अपने साथियों के कथित हमलों के बाद मौत हो गई। एसडीएन 12 बुलुह रामपाई राजकीय प्राथमिक स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र ख्रिस को कथित तौर पर उसके धर्म और जातीयता के कारण बार-बार बुलिंग का सामना करना पड़ा। बड़े छात्रों की मारपीट के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसके पिता, गिम्सन बुतारबुतार ने बताया:

शुरू में उसने मुझे नहीं बताया कि उसकी तबीयत किस वजह से खराब हो रही थी, लेकिन जब मैंने उसके दोस्तों से बात की, तो उन्होंने कहा कि करीब एक हफ्ते पहले चार बड़े छात्रों ने उसे पीटा था।

एक हफ्ते से भी कम समय बाद, मकास्सर के एसडीएन माचिनी सावाह राजकीय प्राथमिक स्कूल में छठी कक्षा के छात्र राजा की पांच दिन अस्पताल में रहने के बाद मौत हो गई। उसके परिवार ने बताया कि उसके शरीर पर कई चोटों के निशान और जलने के दाग थे। राजा ने आखिरकार बताया कि प्राथमिक स्कूल के दो छात्रों और जूनियर हाई स्कूल के एक छात्र ने उस पर हमला किया था। दोनों मामलों की पुलिस जांच कर रही है। अधिकारी कई गवाहों से पूछताछ कर रहे हैं और मौतों के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम कराए जा रहे हैं।

ये अकेली घटनाएं नहीं हैं। फरवरी 2024 में, पूर्वी जावा के एक इस्लामी आवासीय विद्यालय (पेसान्ट्रेन) में वरिष्ठ छात्रों ने 14 वर्षीय बिंतांग बल्किस मौलाना को तीन दिन तक पीटा, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस मामले ने सोशल मीडिया पर आक्रोश पैदा किया और धर्मनिरपेक्ष तथा धार्मिक, दोनों तरह के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की असुरक्षा को उजागर किया।

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प्राथमिक स्कूलों से आगे बुलिंग: एक व्यवस्थागत समस्या

इंडोनेशिया में बुलिंग केवल छोटे बच्चों या सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। इस्लामी आवासीय विद्यालयों, जूनियर हाई स्कूलों और यहां तक कि विश्वविद्यालयों में भी जानलेवा मामलों की खबरें आई हैं। अगस्त 2024 में, मध्य जावा के सेमारांग स्थित डिपोनेगोरो विश्वविद्यालय में 30 वर्षीय मेडिकल रेजिडेंट की आत्महत्या ने उच्च शिक्षा में बुलिंग और रैगिंग की विषाक्त संस्कृति की ओर ध्यान खींचा। स्वास्थ्य मंत्री बुड़ी गुनादी सादिकिन ने माना:

देश के मेडिकल स्कूलों में बुलिंग एक गहरी जड़ें जमा चुकी समस्या बन गई थी, क्योंकि उन्हें ऐसी प्रथाओं के बारे में कई शिकायतें मिली थीं।

मेडिकल रेजिडेंट्स के बीच किए गए सर्वेक्षणों से पता चला कि हर पांच में से एक अवसाद से जूझ रहा था और बड़ी संख्या में लोगों के मन में आत्महत्या के विचार आए थे। मेडिकल प्रशिक्षण में कठोर पदानुक्रम और वरिष्ठता की संस्कृति अक्सर जूनियर डॉक्टरों के साथ मौखिक दुर्व्यवहार, अत्यधिक काम के बोझ और वरिष्ठों द्वारा वित्तीय शोषण का कारण बनती है।

आंकड़े: बिगड़ते हालात

कई स्रोतों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग और हिंसा बढ़ रही है:

  • एजुकेशन वॉच इंडोनेशिया नेटवर्क (जेपीपीआई) ने 2023 में स्कूलों और इस्लामी आवासीय विद्यालयों में बुलिंग के 573 मामले दर्ज किए, जो 2022 में दर्ज 285 मामलों से दोगुने से भी अधिक हैं।
  • इंडोनेशियाई बाल संरक्षण आयोग (केपीएआई) के अनुसार, 2024 में करीब 21,000 बच्चे हिंसा के शिकार हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इनमें से 17 प्रतिशत मामले शैक्षणिक संस्थानों में हुए, जबकि 9 प्रतिशत में साथियों द्वारा बुलिंग शामिल थी।
  • 2018 के अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (पीआईएसए) सर्वेक्षण में पाया गया कि इंडोनेशिया के 41 प्रतिशत छात्रों ने महीने में कम से कम कई बार बुलिंग का शिकार होने की बात कही। यह ओईसीडी देशों के 23 प्रतिशत औसत से लगभग दोगुना है।
  • इंडोनेशियाई शिक्षक संघ महासंघ (एफएसजीआई) ने 2023 में बुलिंग के 30 मामले दर्ज किए, जबकि 2022 में ऐसे 21 मामले थे। प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल, दोनों स्तरों पर मौतों की खबरें आईं।

इन आंकड़ों में समस्या का वास्तविक पैमाना संभवतः कम दिखता है, क्योंकि डर, सामाजिक कलंक या अधिकारियों पर भरोसे की कमी के चलते कई मामलों की शिकायत नहीं की जाती।

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इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग इतनी आम क्यों है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सांस्कृतिक, संस्थागत और व्यवस्थागत कारकों का मेल इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग और हिंसा की ऊंची दरों के लिए जिम्मेदार है:

  • शक्ति का असंतुलन: बुलिंग के कई मामलों में बड़े या अधिक ताकतवर छात्र छोटे या अधिक असुरक्षित साथियों को निशाना बनाते हैं। स्कूलों के पदानुक्रम और प्रभावी निगरानी की कमी से शक्ति का यह असंतुलन अक्सर और मजबूत होता है।
  • पारिवारिक और सामाजिक गतिशीलता: परिवार का अस्वस्थ माहौल, सख्त या अत्यधिक छूट देने वाली परवरिश और घरेलू हिंसा का सामना करने से बच्चों के बुली या पीड़ित बनने का जोखिम बढ़ सकता है। माता-पिता को खोने या तलाक जैसी पीड़ादायक घटनाएं भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
  • स्कूल की संस्कृति और शिक्षकों का रवैया: कुछ शिक्षक और स्कूल प्रशासक बुलिंग की गंभीरता नहीं समझते; वे इसे नुकसानरहित छेड़छाड़ कहकर टाल देते हैं या पीड़ितों को उनकी स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। कुछ मामलों में शिक्षक खुद हिंसा करते हैं, जैसा कि अत्यधिक सजा से जुड़ी जानलेवा घटनाओं में देखा गया है।
  • धार्मिक और आवासीय विद्यालय: इस्लामी आवासीय विद्यालय (पेसान्ट्रेन) बुलिंग के कई जानलेवा मामलों का स्थल रहे हैं। निगरानी की कमी, अपंजीकृत संस्थान और धार्मिक स्थलों में हस्तक्षेप करने से अधिकारियों की हिचकिचाहट, दंड से बच निकलने की संस्कृति को बढ़ावा देती है।
  • शिकायत करने में बाधाएं: पीड़ितों को अक्सर बदले की कार्रवाई का डर रहता है या वे बोलने में बहुत शर्म महसूस करते हैं। 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि बुलिंग का सामना कर रहे केवल 13.54 प्रतिशत छात्रों ने इसकी शिकायत करने का साहस जुटाया।

बुलिंग का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक असर

बुलिंग के नतीजे शारीरिक चोटों से कहीं आगे तक जाते हैं। पीड़ित अक्सर अवसाद, चिंता, कम आत्मसम्मान और सामाजिक अलगाव से जूझते हैं। गंभीर मामलों में बुलिंग आत्महत्या या लंबे समय तक रहने वाले मनोवैज्ञानिक आघात का कारण बन सकती है। बुलिंग करने वाले भी अपनी असुरक्षाओं, पारिवारिक समस्याओं या भावनात्मक पीड़ा से जूझ रहे हो सकते हैं। वे नियंत्रण जताने या मान्यता पाने के गलत तरीके के रूप में बुलिंग का सहारा लेते हैं।

ब्रॉनफेनब्रेनर का पारिस्थितिक सिद्धांत बताता है कि परिवार, स्कूल और साथियों के समूह सहित बच्चे का परिवेश उसके व्यवहार को आकार देता है। परिवार में अस्वस्थ परिस्थितियां, संवाद की कमी और भावनात्मक सहारे का अभाव, बुलिंग करने वालों और पीड़ितों, दोनों में बुलिंग के व्यवहार के विकास में योगदान दे सकते हैं।

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सरकार की प्रतिक्रिया: नियम और उनकी सीमाएं

हिंसा के बढ़ते मामलों के जवाब में इंडोनेशियाई सरकार ने स्कूलों में बुलिंग रोकने के लिए कई नियम लागू किए हैं। 2023 में शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा रोकथाम और निपटान दल (टीपीपीके) गठित करना अनिवार्य किया। इन दलों का उद्देश्य छात्रों की रक्षा करना, घटनाओं की जांच करना और पीड़ितों को सहायता देना है।

हालांकि, नियमों का क्रियान्वयन असंगत रहा है और अक्सर प्रभावी नहीं होता। कई स्कूलों ने टीपीपीके गठित नहीं किए हैं, जबकि जो दल बने हैं, वे चर्चित मामलों के सामने आने के बाद ही अक्सर सक्रिय होते हैं। राष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार एजेंसी (बीआरआईएन) के शिक्षा विशेषज्ञ अंग्गी अफ्रियानस्याह ने कहा:

कई स्कूलों ने टीपीपीके गठित नहीं किए हैं। दूसरी ओर, स्कूलों में बने कई टीपीपीके स्कूलों में हिंसा रोकने में प्रभावी नहीं हैं, क्योंकि वे बुलिंग के मामले सामने आने पर ही सक्रिय होते हैं।

शिक्षकों को अक्सर बुलिंग के शुरुआती संकेत पहचानने या उचित तरीके से हस्तक्षेप करने का प्रशिक्षण नहीं मिलता। कुछ लोग अब भी बुलिंग को बचपन का सामान्य व्यवहार मानते हैं या पीड़ितों को उनके साथ हुई घटना के लिए दोषी ठहराते हैं। इंडोनेशिया का विशाल आकार और विविधता, जिसमें कई संस्कृतियां और दूरदराज के इलाके शामिल हैं, बुलिंग-रोधी नीतियों को समान रूप से लागू करना और मुश्किल बनाती है।

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उच्च शिक्षा में बुलिंग: मेडिकल स्कूलों का संकट

बुलिंग की समस्या प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में इंडोनेशिया के मेडिकल स्कूलों और रेजिडेंसी कार्यक्रमों से कई जानलेवा मामलों की खबरें आई हैं। डिपोनेगोरो विश्वविद्यालय की जूनियर डॉक्टर डॉ. औलिया रिस्मा लेस्तारी की मौत और एयरलांगा विश्वविद्यालय में अल्बर्टस बेरफान से जुड़ा इससे पहले का मामला मेडिकल प्रशिक्षण में रैगिंग, मौखिक दुर्व्यवहार और वित्तीय शोषण की विषाक्त संस्कृति को उजागर करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षणों में पाया गया कि 22 प्रतिशत से अधिक मेडिकल रेजिडेंट अवसाद से जूझ रहे थे और बड़ी संख्या में लोगों ने आत्महत्या के बारे में सोचा था। मेडिकल शिक्षा का पदानुक्रमित ढांचा, लंबे कामकाजी घंटे और वित्तीय दबाव मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं जहां बुलिंग सामान्य मानी जाती है और पीड़ित बोलने से हिचकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री बुड़ी गुनादी सादिकिन ने वरिष्ठता की विषाक्त संस्कृति खत्म करने की मांग की है और बुलिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया है। मंत्रालय ने बुलिंग की शिकायत दर्ज कराने के लिए कॉल सेंटर भी शुरू किया है और दर्जनों आरोपियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक बदलाव के लिए पारदर्शिता, समस्या को स्वीकार करना और संस्थागत संस्कृति में बदलाव जरूरी है।

शिक्षक और स्कूल कर्मचारी: समाधान का हिस्सा या समस्या का?

बुलिंग को बढ़ावा देने या रोकने, दोनों में शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। कुछ दुखद मामलों में शिक्षक खुद जानलेवा हिंसा करने वाले रहे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर सुमात्रा में 14 वर्षीय एक छात्र की 100 बार उठक-बैठक करने की सजा दिए जाने के बाद मौत हो गई। वहीं, ब्लितार में पेसान्ट्रेन के 13 वर्षीय एक छात्र की शिक्षक द्वारा लकड़ी के तख्ते से मारने के बाद मौत हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि काम का भारी बोझ, कम वेतन और नौकरी की असुरक्षा के कारण कई शिक्षक काफी तनाव में रहते हैं। इससे हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह शिक्षकों को बेहतर सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य संसाधन देने की जरूरत को रेखांकित करता है। एफएसजीआई के सलाहकार बोर्ड की प्रमुख रेत्नो लिस्त्यार्ती ने कहा:

ऐसे कानून हैं जो बच्चों के खिलाफ हिंसा पर स्पष्ट रूप से रोक लगाते हैं, लेकिन यह जारी है क्योंकि समस्या मानसिकता की है। इनमें से कई शिक्षक बड़े होते समय खुद हिंसा के शिकार रहे, लेकिन उन्हें एहसास नहीं होता कि यह समस्या है।

शिक्षकों की नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच, छात्रों के लिए शिकायत के स्पष्ट माध्यम और हिंसा की रोकथाम पर लगातार प्रशिक्षण, स्कूलों को सुरक्षित बनाने की दिशा में जरूरी कदम हैं।

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समुदाय और परिवार की भागीदारी: सहानुभूति और रोकथाम की संस्कृति बनाना

बुलिंग से निपटने के लिए परिवारों, स्कूलों, समुदायों और सरकार की भागीदारी वाला समग्र दृष्टिकोण जरूरी है। माता-पिता को बच्चों के साथ खुला संवाद बढ़ाना चाहिए, उनमें नैतिक मूल्य विकसित करने चाहिए और उनकी सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। स्कूलों को बुलिंग के खिलाफ सख्त नीतियां लागू करनी चाहिए, छात्रों और कर्मचारियों, दोनों को इसके खतरों के बारे में जागरूक करना चाहिए और पीड़ितों के लिए सहयोगी माहौल बनाना चाहिए।

सहपाठी परामर्शदाता—अपने सहपाठियों की मदद के लिए प्रशिक्षित छात्र—भावनात्मक सहारा देने और जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। समुदाय के संगठनों और मीडिया की भी जिम्मेदारी है कि वे हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति को चुनौती दें और सहानुभूति तथा सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा दें।

क्या बदलने की जरूरत है? भविष्य के लिए सुझाव

विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग से होने वाली मौतों के संकट से निपटने के लिए कई उपाय सुझाए हैं:

  • नियमों का सख्त पालन: सुनिश्चित करें कि धार्मिक और आवासीय संस्थानों सहित सभी स्कूल बुलिंग-रोधी नीतियों का पालन करें और प्रभावी रोकथाम दल गठित करें।
  • शिक्षकों का प्रशिक्षण और सहयोग: शिक्षकों को बुलिंग पहचानने और उसका जवाब देने के लिए नियमित प्रशिक्षण दें तथा तनाव कम करने और हिंसा रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य संसाधन उपलब्ध कराएं।
  • पारदर्शी शिकायत व्यवस्था और जवाबदेही: छात्रों और अभिभावकों के लिए बुलिंग की शिकायत के सुरक्षित और सुलभ माध्यम बनाएं तथा बच्चों की रक्षा करने में नाकाम रहने पर व्यक्तियों और संस्थानों, दोनों को जवाबदेह ठहराएं।
  • समुदाय में जागरूकता: बुलिंग के खतरों और सहानुभूति, सम्मान तथा अहिंसा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए जन अभियान शुरू करें।
  • अनुसंधान और आंकड़ों का संकलन: बुलिंग के प्रसार, कारणों और परिणामों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अनुसंधान में निवेश करें और नीतियों व कार्यप्रणाली को दिशा देने के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल करें।

संक्षेप में

  • इंडोनेशियाई स्कूलों में बुलिंग से होने वाली मौतों के मामले बढ़े हैं। धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक, दोनों तरह के संस्थानों में छात्रों की हालिया मौतों ने देशभर में चिंता पैदा की है।
  • बुलिंग एक व्यवस्थागत समस्या है, जो विश्वविद्यालयों और मेडिकल स्कूलों सहित शिक्षा के सभी स्तरों को प्रभावित करती है।
  • आंकड़ों से दर्ज मामलों में तेज बढ़ोतरी दिखती है, लेकिन डर और सामाजिक कलंक के कारण कई घटनाएं सामने नहीं आतीं।
  • सांस्कृतिक, संस्थागत और पारिवारिक कारक बुलिंग के प्रसार में योगदान देते हैं। पीड़ित और बुलिंग करने वाले, दोनों अक्सर मनोवैज्ञानिक आघात से जूझते हैं।
  • सरकारी नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन असंगत है और कई स्कूलों में रोकथाम तथा प्रतिक्रिया के प्रभावी तंत्र नहीं हैं।
  • बुलिंग को पहचानने और उससे निपटने के लिए शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण तथा सहयोग की जरूरत है। उनके अपने मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • सभी बच्चों के लिए सुरक्षित और सहयोगी शिक्षण वातावरण बनाने के लिए परिवारों, समुदायों और सरकार को शामिल करने वाले समग्र समाधान जरूरी हैं।
  • हिंसा का चक्र तोड़ने और यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है कि इंडोनेशियाई स्कूल सीखने, आगे बढ़ने और सुरक्षित रहने के अपने वादे को पूरा करें।
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