थाईलैंड के हाथी शिविर अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं
थाईलैंड के हाथी शिविर, जहाँ कभी एशिया के सबसे बड़े स्थलीय स्तनधारी के करीब जाने को उत्सुक पर्यटकों की भीड़ लगी रहती थी, अब कई चुनौतियों के एक साथ आ जाने से जूझ रहे हैं। कोविड-19 महामारी, आर्थिक मंदी, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यटकों की बदलती अपेक्षाओं ने इन प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों—खासकर चियांग माई प्रांत के शिविरों—को अपने कारोबारी मॉडल पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। हाथियों और उनकी देखभाल करने वाले समुदायों, दोनों का अस्तित्व अब अधर में है।
विषय-सूची
- थाईलैंड के हाथी शिविर अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं
- मनोरंजन से शिक्षा की ओर: उभरता नया मॉडल
- कई संकटों ने बढ़ाई चुनौती
- अस्तित्व की रणनीतियां: नवाचार, पहुंच और सामुदायिक सहयोग
- पुनर्योजी और नैतिक पर्यटन का उभार
- नैतिक दुविधाएं और मानक तय करने की कोशिश
- व्यापक तस्वीर: संरक्षण और थाईलैंड के हाथियों का भविष्य
- सारांश
दशकों से हाथी पर्यटन थाईलैंड के यात्रा उद्योग का अहम हिस्सा रहा है और हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आमद में भारी गिरावट और पशु कल्याण पर बढ़ती निगरानी के चलते शिविरों को बदलाव अपनाने या बंद होने का जोखिम उठाने के बीच चुनाव करना पड़ा है। उनके नए रूप में ढलने की कहानी दृढ़ता, नवाचार और नैतिक तथा पुनर्योजी पर्यटन की ओर बढ़ते आंदोलन की कहानी है।
मनोरंजन से शिक्षा की ओर: उभरता नया मॉडल
चियांग माई के सबसे पुराने शिविरों में से एक, माए ताएंग एलिफेंट पार्क, इस उद्योग के संघर्ष और बदलाव का उदाहरण है। पहले हाथी की सवारी और शो के लिए मशहूर माए ताएंग ने अपने शैक्षिक कार्यक्रम “हग एलिफेंट” का विस्तार किया है। इसके तहत पर्यटकों को प्रत्यक्ष भागीदारी वाले अनुभव दिए जाते हैं। पर्यटक महावत (हाथी के देखभालकर्ता) के कपड़े पहनते हैं और स्वास्थ्यवर्धक पूरक आहार तैयार करने, हर्बल साबुन बनाने, हाथियों को खाना खिलाने और नहलाने जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। 1,650 बाट की कीमत वाले इस कार्यक्रम में इंसानों के साथ सहज हाथी शामिल हैं। उनमें फू पिंक भी है—एक युवा हाथी हस्ती, जिसके सोशल मीडिया पर 150,000 से अधिक अनुयायी हैं।
माए ताएंग के कॉर्पोरेट संचार प्रबंधक थानाभूमि असोकेत्रकून बदलाव के बारे में बताते हैं:
हमें अपने तौर-तरीकों पर पूरी तरह नए सिरे से विचार करना पड़ा है। मौजूदा हालात में पारंपरिक मॉडल टिकाऊ नहीं है। हमारा ध्यान मनोरंजन के बजाय शिक्षा पर है। पर्यटक महावत के कपड़े पहनते हैं और हाथियों के व्यवहार, खान-पान और देखभाल के तरीकों के बारे में सीखते हैं।
शैक्षिक पर्यटन की ओर यह बदलाव केवल माए ताएंग तक सीमित नहीं है। उत्तरी थाईलैंड के शिविर भी ऐसे ही कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य तमाशे के बजाय पशु कल्याण और पर्यटकों की सीख को प्राथमिकता देते हुए सार्थक और नैतिक अनुभव देना है।
कई संकटों ने बढ़ाई चुनौती
महामारी का थाईलैंड के हाथी शिविरों पर गहरा असर पड़ा है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के 2022 के एक अध्ययन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध और उसके बाद पर्यटन के ध्वस्त होने से कई शिविर बंद हो गए या उन्हें अपनी गतिविधियाँ बहुत कम करनी पड़ीं। कर्मचारियों की छंटनी आम हो गई और महावत तथा हाथियों का अनुपात 1:1 से घटकर 1:2 रह गया। हाथियों की दिनचर्या में भी बड़े बदलाव आए: उनके चलने की दूरी और कामकाज कम कर दिए गए या रोक दिए गए, जबकि निष्क्रियता के कारण उन्हें बांधकर रखने का समय बढ़ गया। भोजन की आपूर्ति घटने से पोषण प्रभावित हुआ और कुछ हाथियों को गांवों में लौटा दिया गया या बेच दिया गया।
प्राकृतिक आपदाओं ने हालात को और बिगाड़ा। 2023 में बाढ़ और भूकंप के कारण पर्यटकों की संख्या 50 प्रतिशत घट गई। मौसमी बदलाव भी असर डालते हैं। संचालकों के बीच “भूख का महीना” कहे जाने वाला सितंबर खास तौर पर मुश्किल होता है, क्योंकि उस दौरान पर्यटक कम आते हैं और संचालन का खर्च अधिक रहता है। हर साल होने वाला धुंध-प्रदूषण भी लगातार समस्या बना हुआ है, हालांकि इस साल जल्दी हुई बारिश से इसमें कुछ राहत मिली है।
शायद सबसे बड़ी चुनौती रोज़मर्रा का खर्च है। हर हाथी को रोज़ लगभग 500 बाट का भोजन चाहिए और वह अपने शरीर के वजन के 10 प्रतिशत तक वनस्पति खा सकता है। 62 हाथियों की देखभाल करने वाले माए ताएंग जैसे शिविरों में केवल भोजन का मासिक खर्च 400,000 बाट तक पहुंच सकता है। पर्यटकों की संख्या चाहे जितनी हो, ये खर्च तय रहते हैं।
अस्तित्व की रणनीतियां: नवाचार, पहुंच और सामुदायिक सहयोग
इन चुनौतियों से निपटने के लिए हाथी शिविरों ने कई मोर्चों पर काम करने वाली अस्तित्व-रणनीति अपनाई है:
- पर्यटन को बढ़ावा: शिविर प्रमुख बाजारों, खासकर चीन, को फिर से आकर्षित करने के लिए थाईलैंड के पर्यटन प्राधिकरण के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। पहले कुल पर्यटकों में चीन का हिस्सा 70 प्रतिशत था।
- अंतरराष्ट्रीय विस्तार: टूर एजेंटों से जुड़ने और ग्राहकों का दायरा बढ़ाने के लिए सिंगापुर, मलेशिया, ताइवान और फिलीपींस समेत करीब 10 देशों में बूथ लगाए जा रहे हैं।
- स्थानीय साझेदारियां: आपसी सहयोग और संसाधनों के साझा उपयोग के लिए चियांग माई की पर्यटन उद्योग परिषद और कारोबारी संघों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
- सांस्कृतिक कूटनीति: हाथी की पीठ पर अमेरिकी जोड़ों की शादी जैसे बड़े आयोजनों की मेजबानी कर अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है और थाई संस्कृति को सामने लाया जा रहा है।
इन प्रयासों के केंद्र में समुदाय पर पड़ने वाला असर है। उदाहरण के लिए, माए ताएंग 300 कर्मचारियों की मदद करता है, जिनमें रेस्तरां कर्मचारी और करेन लंबी गर्दन वाले गांव के समुदाय के सदस्य शामिल हैं। शिविर स्थानीय परिवारों की आजीविका के साथ-साथ हाथियों के कल्याण को सुरक्षित रखने के लिए आवास, बिजली-पानी और चावल उपलब्ध कराता है।
महामारी से पहले, व्यस्त मौसम में माए ताएंग में रोज़ाना 2,700 तक पर्यटक आते थे। आज यह संख्या सप्ताह के दिनों में 200 और व्यस्त मौसम में 700–1,200 रह गई है। घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए शिविर “हाथी इन्फ्लुएंसरों” का सहारा ले रहे हैं और थाई पर्यटकों के लिए खास दरें दे रहे हैं, हालांकि अब भी अधिकांश पर्यटक विदेश से आते हैं।
पुनर्योजी और नैतिक पर्यटन का उभार
सिर्फ अस्तित्व बचाने से आगे बढ़कर, थाईलैंड के हाथी शिविर पुनर्योजी यात्रा की वैश्विक दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह ऐसा आंदोलन है जो टिकाऊपन से आगे बढ़कर पारिस्थितिकी तंत्र को सक्रिय रूप से बहाल करने और स्थानीय समुदायों को सहारा देने पर केंद्रित है। Booking.com की 2024 सस्टेनेबल ट्रैवल रिपोर्ट के अनुसार, अब 71 प्रतिशत यात्री चाहते हैं कि वे जिन जगहों पर जाएं, उन्हें पहले से बेहतर स्थिति में छोड़ें। 2023 में यह आंकड़ा 66 प्रतिशत था। उपभोक्ताओं की इस मांग से उद्योग का स्वरूप बदल रहा है।
हाथी क्षेत्र में पुनर्योजी पर्यटन का मतलब शोषणकारी तौर-तरीकों के बजाय पशु कल्याण, संरक्षण और शिक्षा को प्राथमिकता देना है। खाओ सोक स्थित एलिफेंट हिल्स और पटाया एलिफेंट सैंक्चुअरी जैसे शिविरों ने हाथियों को जंजीर, अंकुश और सवारी से मुक्त अनुभव देकर नए मानक स्थापित किए हैं। हाथियों को खुले में घूमने दिया जाता है और पर्यटकों का उनसे संपर्क देखने, खाना खिलाने और प्राकृतिक माहौल में उनके व्यवहार के बारे में सीखने तक सीमित रहता है।
पशु कल्याण ऑडिटिंग में विशेषज्ञ संस्था ग्लोबल स्पिरिट की प्रबंध निदेशक हेली लिनाग ने एलिफेंट हिल्स के तौर-तरीकों की सराहना की:
एलिफेंट हिल्स बुनियादी मानदंडों को पूरा करता है, सभी प्रासंगिक मानदंडों पर अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन करता है और संचालन के कई क्षेत्रों में सर्वोत्तम तौर-तरीकों को अपनाता है।
इसी तरह, एलिफेंट जंगल सैंक्चुअरी ने नैतिक पर्यटन और संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया है। यह हाथियों को सुरक्षित माहौल देता है और रोजगार सृजन तथा वन्यजीव संरक्षण की पहलों के जरिए स्थानीय समुदायों को समर्थन देता है। पर्यटक हाथियों को खाना खिलाने और नहलाने की गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, लेकिन जोर सीखने और उनके प्राकृतिक व्यवहार का सम्मान करने पर रहता है।
नैतिक दुविधाएं और मानक तय करने की कोशिश
थाईलैंड के हाथी पर्यटन उद्योग में बदलाव विवादों से अछूता नहीं रहा है। “सैंक्चुअरी” शब्द का इस्तेमाल अक्सर ढीले-ढाले ढंग से होता है और इसके लिए कोई सर्वमान्य मानक या नियम नहीं हैं। कुछ जगहों पर अब भी हाथियों को सीधे छूने दिया जाता है, उन्हें फिर से जंगल में बसाने की योजना के बिना कैद में प्रजनन कराया जाता है या शोषणकारी उद्योगों के लिए युवा हाथी मुहैया कराए जाते हैं। थाईलैंड का पर्यटन प्राधिकरण इस अस्पष्टता को स्वीकार करता है और बताता है कि कोई भी व्यवसाय पशु कल्याण के मानदंड पूरे किए बिना “सैंक्चुअरी” नाम से पंजीकरण करा सकता है।
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन जैसे वन्यजीव गैर-सरकारी संगठन लंबे समय से सख्त मानकों की मांग कर रहे हैं। वे यात्रियों से हाथी की सवारी या प्रदर्शन कराने वाली जगहों से दूर रहने और केवल उन जगहों का समर्थन करने की अपील करते हैं जहाँ हाथियों को देखने और संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। जी एडवेंचर्स के ईएमईए क्षेत्र के प्रबंध निदेशक ब्रायन यंग जिम्मेदार यात्रा विकल्पों के महत्व पर जोर देते हैं:
हम उन शुरुआती संचालकों में थे जिन्होंने माना कि हाथी की सवारी गलत है और क्रूर व्यवहार के बिना उन्हें ‘वश में’ नहीं किया जा सकता। हमने वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन की एलिफेंट फ्रेंडली प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किए और हाथियों का मनोरंजन कराने वाले आकर्षणों को न बेचने या बढ़ावा न देने का संकल्प लिया। अब हम अपने यात्रियों को बताते हैं कि उन्हें हाथियों की सवारी क्यों नहीं करनी चाहिए और ऐसी गतिविधि कराने वाले कारोबारों में क्यों नहीं जाना चाहिए।
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे सैंक्चुअरी के बारे में अच्छी तरह जानकारी जुटाएं, स्वतंत्र समीक्षाएं देखें और संचालकों से उनकी पशु कल्याण नीतियों के बारे में पारदर्शिता की मांग करें। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन से होने वाली कमाई वास्तविक संरक्षण प्रयासों को सहारा दे, न कि नुकसानदायक तौर-तरीकों को जारी रखे।
व्यापक तस्वीर: संरक्षण और थाईलैंड के हाथियों का भविष्य
दुनिया के बचे हुए जंगली एशियाई हाथियों में से लगभग 15 प्रतिशत थाईलैंड में हैं। देश के 69 संरक्षित क्षेत्रों में 3,100 से 3,600 हाथी रहते हैं। हालांकि, अब जंगली हाथियों की संख्या कैद में रहने वाले हाथियों से कम हो गई है। देशभर के पर्यटन स्थलों में करीब 2,800 हाथी रहते हैं और एशिया में कैद हाथियों में से लगभग 75 प्रतिशत का इस्तेमाल पर्यटकों के मनोरंजन के लिए होता है।
यह गंभीर स्थिति पुनर्योजी यात्रा और नैतिक पर्यटन के महत्व को रेखांकित करती है। कल्याण, संरक्षण और शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले शिविरों का समर्थन करके पर्यटक उद्योग को अधिक टिकाऊ और मानवीय भविष्य की ओर ले जाने में मदद कर सकते हैं। उम्मीद है कि महामारी से उबरने के साथ उद्योग के ये नए मॉडल ऊंचे मानक तय करेंगे और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उससे आगे भी व्यापक बदलाव को प्रेरित करेंगे।
सारांश
- महामारी, आर्थिक मंदी और प्राकृतिक आपदाओं ने थाईलैंड के हाथी शिविरों को बुरी तरह प्रभावित किया है और उन्हें अपने कारोबारी मॉडल बदलने के लिए मजबूर किया है।
- कई शिविर मनोरंजन-केंद्रित गतिविधियों से हटकर शैक्षिक और नैतिक पर्यटन की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ पशु कल्याण और पर्यटकों की सीख पर जोर है।
- संचालन का खर्च अब भी बहुत अधिक है। पर्यटकों की संख्या चाहे जितनी हो, हाथियों के भोजन और देखभाल पर भारी रकम खर्च होती है।
- पुनर्योजी पर्यटन बढ़ रहा है और यात्री ऐसे अनुभव चाहते हैं जो वन्यजीवों तथा स्थानीय समुदायों को वास्तविक लाभ पहुंचाएं।
- “सैंक्चुअरी” के लिए स्पष्ट मानकों का अभाव अब भी चुनौती है, लेकिन गैर-सरकारी संगठन और जिम्मेदार संचालक अधिक पारदर्शिता तथा बेहतर पशु कल्याण के लिए प्रयास कर रहे हैं।
- हाथी पर्यटन का भविष्य तय करने में पर्यटकों की अहम भूमिका है। वे सोच-समझकर नैतिक विकल्प चुन सकते हैं।
- थाईलैंड के हाथी शिविरों का अस्तित्व और हजारों हाथियों का कल्याण निरंतर नवाचार, सामुदायिक सहयोग तथा नैतिक और टिकाऊ तौर-तरीकों के प्रति प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है।






