मंगल की एक आशाजनक चट्टान घर लौटने के इंतजार में
सैफायर कैन्यन नाम की चट्टान का एक टुकड़ा मंगल ग्रह पर नासा के पर्सिवियरेंस रोवर के भीतर सीलबंद रखा है। इसमें ऐसे रासायनिक संकेत हैं जिनकी वैज्ञानिक प्राचीन जीवन के संभावित प्रमाणों के लिए जांच करना चाहते हैं। इसे पृथ्वी पर लाने के लिए बनाया गया अभियान रद्द कर दिया गया है। नासा की मूल मंगल नमूना वापसी योजना की अनुमानित लागत 11 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी और नमूने लौटने की संभावित तारीख खिसककर 2040 हो गई थी।
विषय-सूची
- मंगल की एक आशाजनक चट्टान घर लौटने के इंतजार में
- वैज्ञानिकों की सैफायर कैन्यन में दिलचस्पी क्यों है
- पृथ्वी की प्रयोगशालाएं क्यों अहम हैं
- नमूने वापस लाने की योजना इतनी महंगी कैसे हुई
- प्रतिस्पर्धा को आकार देने वाली तारीखें
- तियानवेन-3 नमूने कैसे जुटाएगा और लौटाएगा
- सुरक्षित लैंडिंग से चीन की खोज के संभावित क्षेत्र सीमित
- वैज्ञानिक क्या जांचेंगे और नमूनों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा
- नासा और यूरोप के लिए अब भी क्या संभव है
- मुख्य बातें
चीन एक अलग रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। चीनी सरकार की तियानवेन-3 अभियान की रूपरेखा के अनुसार, जुलाई 2025 में प्रकाशित इस योजना के तहत अभियान 2028 के आसपास रवाना होगा और करीब 2031 में कम से कम 500 ग्राम मंगल सामग्री पृथ्वी पर लाएगा। ऐसा होने पर मंगल पर नमूने जुटाकर उन्हें पृथ्वी पर लाने वाला चीन पहला देश होगा।
अभियान रद्द होने से पहले नासा अपने नमूना वापसी कार्यक्रम पर करीब 2.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका था। पर्सिवियरेंस 33 ट्यूबों में नमूने रख चुका है। इन्हें जेज़ेरो क्रेटर में वर्षों की खोज के दौरान चुना गया था। तीन अरब साल से भी पहले यहां नदियां एक झील में पानी लाती थीं।
दांव पर सिर्फ यह सवाल नहीं है कि कौन-सा देश पहले पहुंचेगा। चीन का अभियान किसी दूसरी जगह से अपने नमूने जुटाएगा। प्राचीन नदी की धारा के पास धब्बेदार चट्टान से निकाली गई सैफायर कैन्यन मंगल पर ही रहेगी, जब तक कोई दूसरा अभियान उसे वापस न लाए।
नासा प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन ने कहा है कि एजेंसी अंततः नमूने वापस लाने का इरादा रखती है, चाहे रोबोटों के जरिए या अंतरिक्ष यात्रियों की मदद से। कोई समयसीमा या नया अभियान घोषित नहीं किया गया है। इस बीच चीन अपने अंतरिक्ष यान के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों की सैफायर कैन्यन में दिलचस्पी क्यों है
पर्सिवियरेंस ने जुलाई 2024 में नेरेटवा वालिस के पास चयेवा फॉल्स नाम की तीर की नोक जैसी चट्टान से सैफायर कैन्यन का नमूना लिया। यह घाटी उन नदियों ने बनाई थी जो जेज़ेरो की प्राचीन झील में बहती थीं। रोवर ने चॉक के एक टुकड़े के आकार का बेलनाकार हिस्सा ड्रिल करके निकाला और उसे एक ट्यूब में सील कर दिया।
चयेवा फॉल्स ने छोटे-छोटे धब्बों के कारण ध्यान खींचा, जो तेंदुए के निशानों जैसे दिखते हैं। पृथ्वी पर ऐसे ही निशान तब बन सकते हैं जब सूक्ष्मजीव तलछट में दबे कार्बनिक पदार्थों का उपभोग करते हैं। उनकी गतिविधि पास के लौह खनिजों की रासायनिक संरचना बदल देती है और हल्के रंग के धब्बे या घेरे छोड़ जाती है।
पर्ड्यू विश्वविद्यालय के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता और पर्सिवियरेंस की विज्ञान टीम के सदस्य एड्रियन ब्रोज़ ने इस चट्टान पर सितंबर 2025 में प्रकाशित अध्ययन लिखने में मदद की। उन्होंने बताया कि यह खोज खास क्यों लगी:
मुझे लगता है कि यह पहली बार है जब हमें कुछ ऐसा मिला है जिसे 'संभावित जैव-संकेत' कहा जा सकता है
जैव-संकेत ऐसी भौतिक या रासायनिक विशेषता है जो जीवन से बनी हो सकती है। सैफायर कैन्यन की जांच कर रहे वैज्ञानिकों को यह तय करना होगा कि उसके धब्बे सूक्ष्मजीवों ने बनाए या सामान्य रासायनिक प्रतिक्रियाओं से वे बने। आसपास की मडस्टोन चट्टानों में भी ऐसी ही कई विशेषताएं हैं, जिससे शोधकर्ताओं को जांच के लिए व्यापक भूवैज्ञानिक संदर्भ मिलता है।
फरवरी 2021 में पर्सिवियरेंस के पहुंचने से बहुत पहले पानी ने इस भूभाग को आकार दिया था। यहां की प्राचीन नदियों और झील के कारण जेज़ेरो उन चट्टानों की खोज के लिए एक संभावनाशील जगह बना, जिनमें अरबों साल पहले रहे जीवों के निशान सुरक्षित हो सकते हैं।
पृथ्वी की प्रयोगशालाएं क्यों अहम हैं
पर्सिवियरेंस पर ऐसे उपकरण हैं जो चट्टानों की रासायनिक संरचना और बनावट की जांच करते हैं, लेकिन इसके वैज्ञानिक उपकरणों का चयन इस उद्देश्य से भी किया गया था कि पृथ्वी पर आगे अध्ययन के लिए नमूने पहचाने जा सकें। रोवर को सीमित बिजली, वजन और उपकरणों के साथ काम करना होता है। प्रयोगशालाएं उसी नमूने के छोटे टुकड़ों पर कहीं अधिक तरह की जांच कर सकती हैं।
पर्ड्यू विश्वविद्यालय में पृथ्वी, वायुमंडलीय और ग्रह विज्ञान की प्रोफेसर तथा पर्सिवियरेंस टीम की सदस्य ब्रायनी हॉर्गन ने नमूनों की प्रत्यक्ष जांच की जरूरत समझाई:
हम ये अध्ययन जारी रख सकते हैं और ऐसे संकेत जुटा सकते हैं, लेकिन जब तक नमूने वापस नहीं आते, हम कभी पक्के तौर पर नहीं जान पाएंगे।
मंगल का उल्कापिंड एलन हिल्स 84001 दिखाता है कि यह काम कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 1984 में अंटार्कटिका में मिले इस उल्कापिंड की शुरुआती व्याख्या यह थी कि इसमें प्राचीन जीवन के संभावित अवशेष हैं। बाद के अध्ययनों से पता चला कि भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएं भी जैविक निशानों जैसे दिखने वाले लक्षण बना सकती हैं।
इसलिए सैफायर कैन्यन का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों को एक ही व्याख्या का समर्थन करने वाले कई तरह के प्रमाण जुटाने होंगे। वे खनिज संरचनाओं, कार्बनिक अणुओं और रासायनिक बदलावों के चट्टान के इतिहास से संबंधों की जांच कर सकते हैं। पृथ्वी पर नमूना होने से अलग-अलग प्रयोगशालाएं परीक्षण दोहरा सकेंगी और नतीजों की तुलना कर सकेंगी।
नमूने वापस लाने की योजना इतनी महंगी कैसे हुई
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर तैयार नासा के मंगल नमूना वापसी कार्यक्रम में अंतरिक्ष यानों और अभियानों की एक पूरी शृंखला जरूरी थी। एक लैंडर मंगल पर छोटा आरोहण रॉकेट पहुंचाता। पर्सिवियरेंस अपने नमूने लैंडर तक ले जाता, जहां उन्हें एक कंटेनर में रखकर कक्षा में भेजा जाता।
मंगल के ऊपर इंतजार कर रहा यूरोपीय अंतरिक्ष यान कंटेनर को पकड़कर पृथ्वी की ओर ले जाता और सुरक्षित उतर सकने वाला कैप्सूल छोड़ता। मंगल से सामग्री को प्रक्षेपित करना और फिर उसे कक्षा में पकड़ना, दोनों ही अंतरिक्ष अन्वेषण में पहली बार होता।
इंजीनियरिंग की चुनौती यह है कि पर्याप्त उपकरण और ईंधन ले जाते हुए अंतरिक्ष यान को इतना हल्का रखा जाए कि उसे प्रक्षेपित और उतारा जा सके। नासा की रिले योजना में ये काम कई यानों में बांटे गए थे। इससे ऐसे कई बिंदु भी बने जहां देरी या तकनीकी समस्या पूरे अभियान को प्रभावित कर सकती थी।
पृथ्वी और मंगल के बीच प्रक्षेपण के अनुकूल अवसर लगभग हर 26 महीने में आते हैं। एक अवसर चूकने पर समयसारिणी में करीब दो साल जुड़ सकते हैं, इसलिए अंतरिक्ष यान के विकास की समयसीमाएं खास तौर पर अहम होती हैं।
मूल योजना की अधिकतम अनुमानित लागत 11 अरब डॉलर थी। 2024 में संशोधित तरीके की अनुमानित लागत करीब 7 अरब डॉलर थी, लेकिन इसके वहनीय होने और कम अनुमानित लागत में इसे पूरा कर पाने पर सवाल बने रहे। वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुरोध में नासा ने मंगल नमूना वापसी कार्यक्रम खत्म करने का प्रस्ताव दिया और जनवरी में कांग्रेस ने इसे रद्द करने की मंजूरी दे दी।
2011 में मंगल नमूना वापसी को नासा की सर्वोच्च ग्रह विज्ञान प्राथमिकता घोषित किया गया था। इसके रद्द होने से वैज्ञानिक रूप से मूल्यवान चट्टानें जुटाने और उनकी सीधे जांच करने के साधनों के बीच एक खालीपन रह गया है।
प्रतिस्पर्धा को आकार देने वाली तारीखें
वापसी की योजना अधिक जटिल होती गई और नासा की योजनाएं बार-बार बदलीं। चीन ने अपने मंगल पर उतरने और चंद्रमा से नमूने लाने के अभियानों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए नमूना संग्रह और वापसी को एक ही अभियान में जोड़ा है।
दोनों प्रयासों की मौजूदा स्थिति तक पहुंचने की मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं:
- फरवरी 2021: पर्सिवियरेंस प्राचीन पर्यावरणों की जांच और नमूने जुटाने के लिए जेज़ेरो क्रेटर में उतरा।
- मई 2021: चीन का तियानवेन-1 अभियान मंगल पर उतरा और झुरोंग रोवर को तैनात किया।
- 2022: नासा ने नमूना वापसी की योजना में बदलाव किया। पर्सिवियरेंस को नमूने पहुंचाने थे और बैकअप के तौर पर हेलीकॉप्टरों से उन्हें लाने का विकल्प रखा गया। वापसी की संभावित तारीख 2033 हो गई।
- 2024: चीन ने छांग-अ 6 के जरिए चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से नमूने पृथ्वी पर लाए। नासा ने मंगल नमूना वापसी कार्यक्रम का फिर आकलन किया और पर्सिवियरेंस ने जुलाई में सैफायर कैन्यन का नमूना जुटाया।
- जुलाई 2025: चीन की सरकार ने तियानवेन-3 को 2028 के आसपास प्रक्षेपित करने और नमूने करीब 2031 में वापस लाने की योजना बताई।
- जनवरी: वित्त वर्ष 2026 में कार्यक्रम खत्म करने के प्रस्ताव के बाद कांग्रेस ने नासा के मंगल नमूना वापसी कार्यक्रम को रद्द करने की मंजूरी दी।
- मार्च 2026: तियानवेन-3 के मुख्य डिजाइनर लियू जिझोंग ने कहा कि परियोजना 2026 के दौरान उड़ान हार्डवेयर का विकास शुरू करेगी।
- 2026 के अंत तक: चीन की विज्ञान टीम उतरने के तीन अंतिम संभावित स्थलों का चयन करने की योजना बना रही है।
मार्च में घोषित चीन का हार्डवेयर विकास की ओर बढ़ना प्रोटोटाइप के काम से आगे का कदम है। इसकी आधिकारिक समयसारिणी अब भी 2028 के आसपास प्रक्षेपण और करीब 2031 में वापसी की है; 2031 में प्रक्षेपण की खबर इस समयसारिणी से मेल नहीं खाती।
तियानवेन-3 नमूने कैसे जुटाएगा और लौटाएगा
चीन के हैनान द्वीप पर वेनचांग से 2028 के अंत में दो लॉन्ग मार्च 5 रॉकेट प्रक्षेपित करने की योजना है। एक रॉकेट लैंडर और आरोहण उपकरण ले जाएगा। दूसरे में ऑर्बिटर और नमूनों को पृथ्वी पर लाने की प्रणाली होगी।
चीन की सरकार के मुताबिक मंगल तक की यात्रा में सात से आठ महीने लगेंगे और उसके बाद वहां करीब एक साल तक अभियान चलेगा। इस व्यापक समयसारिणी के भीतर लैंडर का मुख्य सतही नमूना संग्रह अभियान करीब 70 दिन चलने की उम्मीद है।
तियानवेन-3 नमूने जुटाने के तीन तरीके अपनाएगा: सतह से सामग्री उठाना, 2 मीटर तक ड्रिल करना और अतिरिक्त सामग्री जुटाने के लिए ड्रोन भेजना। इसमें रोवर नहीं होगा। अभियान के मुख्य वैज्ञानिक और चीनी विज्ञान अकादमी के सदस्य हौ ज़ेंगचियान के मुताबिक ड्रोन उतरने की जगह से कई सौ मीटर के दायरे में स्थित जगहों तक पहुंचेगा।
ड्रिलिंग प्रणाली सतह के नीचे से सामग्री जुटा सकेगी, जबकि ड्रोन लैंडर के आसपास के क्षेत्र से आगे तक नमूने लेने में मदद करेगा। इन तरीकों का संयुक्त उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान के पास से सामग्री उठाने की तुलना में अधिक विविध नमूने जुटाना है।
नमूने जुटाने के बाद एक आरोहण यान कम से कम 500 ग्राम सामग्री वाला सीलबंद कंटेनर मंगल की कक्षा में भेजेगा। वहां इंतजार कर रहा ऑर्बिटर उसे अपने साथ लेकर पृथ्वी की ओर रवाना होगा। चीन के चंद्र अभियानों का अनुभव उपयोगी होगा, लेकिन मंगल से उड़ान भरने और कक्षा में दूसरे यान से मिलने के लिए अब भी नई क्षमताओं की जरूरत होगी।
सुरक्षित लैंडिंग से चीन की खोज के संभावित क्षेत्र सीमित
हौ की जुलाई 2025 में जारी आधिकारिक रूपरेखा के अनुसार तियानवेन-3 की विज्ञान टीम ने उतरने के 80 से अधिक शुरुआती संभावित स्थलों में से 19 चुने हैं। 2026 के अंत तक तीन अंतिम स्थल तय किए जाने हैं। वैज्ञानिक ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देते हैं जहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां रही हों और उसके निशान सुरक्षित रह सके हों।
इंजीनियर भी कड़ी सीमाएं तय करते हैं। स्थल 17 से 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच होना चाहिए। अभियान के विवरण के अनुसार भूभाग मंगल की औसत ऊंचाई से कम से कम 3 किलोमीटर नीचे होना चाहिए, ताकि उतरते समय अंतरिक्ष यान अधिक वायुमंडल से गुजरे और उसकी गति धीमी हो सके।
उतरने का संभावित दीर्घवृत्ताकार क्षेत्र, यानी वह इलाका जहां अंतरिक्ष यान उतर सकता है, करीब 50 गुणा 20 किलोमीटर का है। ड्रोन की नमूना संग्रह पहुंच के मुकाबले यह काफी बड़ा क्षेत्र है। इसलिए अभियान को ऐसा इलाका चाहिए जहां उपयोगी सामग्री एक छोटी चट्टानी जगह के बजाय बड़े क्षेत्र में उपलब्ध हो।
पर्सिवियरेंस ने अलग तरीका अपनाया है। वह जेज़ेरो में घूमता रहा और चट्टानों का चयन उनके भूवैज्ञानिक संदर्भ को सावधानी से दर्ज करके किया। वैज्ञानिक जानते हैं कि हर नमूना कहां से आया और उसका आसपास की परतों तथा पानी से बनी प्राचीन संरचनाओं से क्या संबंध है। तियानवेन-3 वर्षों की रोवर खोज के बिना, एक सीमित क्षेत्र से सामग्री जुटाएगा।
जेज़ेरो चीन की पहचानी गई संभावित जगहों में शामिल नहीं है। तियानवेन-3 के सफल नमूना वापसी अभियान से मंगल के बारे में एक नई जानकारी मिलेगी, जबकि सैफायर कैन्यन अपने अलग वापसी अभियान का इंतजार करेगी। दोनों जगहों के नमूने ग्रह के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े अलग सवालों के जवाब देंगे।
वैज्ञानिक क्या जांचेंगे और नमूनों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा
तियानवेन-3 के वैज्ञानिक लक्ष्यों में जीवन के संभावित संकेत खोजना, मंगल पर जीवन को सहारा देने की क्षमता में आए बदलावों का अध्ययन करना और उसके भूवैज्ञानिक इतिहास की जांच करना शामिल है। इन लक्ष्यों के तहत जैविक सवाल को ग्रह के पानी, वायुमंडल और चट्टानों से जोड़ा जाएगा।
इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने में शामिल हांगकांग विश्वविद्यालय के खगोलजीवविज्ञान के प्रोफेसर ली यिलियांग ने जांच के कई संभावित तरीके बताए। शोधकर्ता जैविक कामकाज से जुड़े अणुओं, सूक्ष्म जीवाश्मों के निशानों और समस्थानिक अनुपातों में बदलाव खोजेंगे।
समस्थानिक एक ही रासायनिक तत्व के ऐसे रूप होते हैं जिनका द्रव्यमान अलग-अलग होता है। जीवित प्रक्रियाएं एक रूप को दूसरे के मुकाबले प्राथमिकता दे सकती हैं। पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण में हल्के कार्बन का इस्तेमाल अधिक होता है, जिससे कार्बन समस्थानिकों के अनुपात में मापे जा सकने वाले बदलाव रह जाते हैं। शोधकर्ता मंगल के किसी भी ऐसे पैटर्न की जांच नमूने के खनिजों और अन्य रासायनिक गुणों के साथ करेंगे।
चीन अत्यंत स्वच्छ कार्यस्थलों और जैविक सुरक्षा सुविधाओं से लैस एक सुरक्षित प्रयोगशाला बनाने की भी योजना रखता है। हौ के मुताबिक नमूनों की पूरी प्रक्रिया में संग्रह, सील करना, परिवहन, प्रसंस्करण और जैविक जोखिम का आकलन शामिल होगा। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष अनुसंधान समिति द्वारा तय ग्रह सुरक्षा नीतियों के तहत चलेगी।
ग्रह सुरक्षा के दो उद्देश्य हैं: पृथ्वी के जीवों को मंगल को दूषित करने से रोकना और दूसरी दुनिया से लाई गई सामग्री को सुरक्षित रूप से अपने भीतर सीमित रखना। सावधानी से नमूने संभालने से वैज्ञानिक यह भी पता लगा सकते हैं कि कोई रासायनिक निशान मंगल पर मौजूद था या नमूना जुटाने और जांच के दौरान उसमें आया।
हौ का कहना है कि सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करने पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक लौटाई गई सामग्री का अध्ययन कर सकेंगे। कई प्रयोगशालाओं में जांच से परीक्षणों का दायरा बढ़ेगा और शोधकर्ता एक-दूसरे के निष्कर्षों की पुष्टि कर सकेंगे।
नासा और यूरोप के लिए अब भी क्या संभव है
नासा का कहना है कि वह नमूने वापस लाने के सरल और कम खर्चीले विकल्पों की जांच कर रहा है, जिनमें व्यावसायिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शामिल हैं। लॉकहीड मार्टिन ने इनसाइट मंगल लैंडर और ओसीरस-रेक्स क्षुद्रग्रह नमूना अभियान के अनुभव के आधार पर 3 अरब डॉलर से कम की तय कीमत पर 30 पर्सिवियरेंस नमूने 2037 तक वापस लाने का प्रस्ताव दिया है।
कंपनी की घोषित अधिकतम कीमत, मूल 11 अरब डॉलर की अधिकतम अनुमानित लागत के तीन-ग्यारहवें हिस्से से भी कम है। प्रस्तावित वापसी तारीख चीन के 2031 के लक्ष्य से छह साल बाद है। नासा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
कांग्रेस के समझौता बजट विधेयक में मंगल के भावी अभियानों के लिए 110 मिलियन डॉलर शामिल हैं। इस काम से उतरने की बेहतर तकनीकों और भविष्य के अन्वेषण के लिए उपयोगी अन्य क्षमताओं को समर्थन मिल सकता है, जिनमें आगे चलकर नमूने वापस लाने का अभियान भी शामिल है।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी इस संभावना की जांच कर रही है कि उसका अर्थ रिटर्न ऑर्बिटर, जिसका विकास नमूने लाने वाले लैंडर से अधिक आगे है, मंगल की कक्षा से अध्ययन करने के लिए नए काम में लगाया जा सकता है। जापान मंगल के एक चंद्रमा फोबोस से नमूने जुटाने की भी कोशिश कर रहा है। क्षुद्रग्रहों के टकराने से मंगल की जो सामग्री उछलकर फोबोस तक पहुंची होगी, वह इन नमूनों में हो सकती है।
पर्सिवियरेंस और क्यूरियोसिटी अपने साथ मौजूद उपकरणों से जांच जारी रखेंगे। पर्सिवियरेंस के सीलबंद नमूने भविष्य के अभियान के लिए सुरक्षित रह सकते हैं और रोवर के पास आगे की खोजों के लिए कुछ अप्रयुक्त ट्यूब अब भी हैं।
नासा के मंगल अन्वेषण कार्यक्रम विश्लेषण समूह की अध्यक्ष विक्टोरिया हैमिल्टन ने कार्यक्रम रद्द होने का वैज्ञानिक समुदाय पर असर बताते हुए कहा:
यह बेहद निराशाजनक है।
नासा आशाजनक चट्टानों की खोज और उन्हें जुटाने का कठिन काम पहले ही पूरा कर चुका है। अब चीन के पास नए नमूने वापस लाने का अधिक स्पष्ट रास्ता है। वैज्ञानिकों का मूल लक्ष्य अब भी ऐसी सामग्री हासिल करना है जो मंगल के इतिहास और उसमें जीवन की किसी भूमिका के बारे में बता सके।
मुख्य बातें
- बढ़ती लागत और देरी के बाद नासा का मंगल नमूना वापसी कार्यक्रम रद्द कर दिया गया, जिससे पर्सिवियरेंस के जुटाए नमूने मंगल पर ही रह गए हैं।
- सैफायर कैन्यन में ऐसे धब्बे हैं जिनकी संभावित जैविक उत्पत्ति की वैज्ञानिक जांच करना चाहते हैं।
- चीन का आधिकारिक लक्ष्य तियानवेन-3 को 2028 के आसपास प्रक्षेपित करना और कम से कम 500 ग्राम नमूने करीब 2031 में वापस लाना है।
- तियानवेन-3 की योजना में सतह से सामग्री उठाना, 2 मीटर तक ड्रिलिंग और ड्रोन से नमूना जुटाना शामिल है; इसमें रोवर नहीं होगा।
- चीन 2026 के अंत तक उतरने के तीन अंतिम संभावित स्थलों का चयन करना चाहता है। जेज़ेरो पहचाने गए संभावित स्थलों में शामिल नहीं है।
- लॉकहीड मार्टिन के नमूना वापसी अभियान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया है और नासा ने कोई नई समयसारिणी घोषित नहीं की है।






