छात्रा की मौत से जुड़े कथित 93 लाख रुपये के हार्वर्ड प्रवेश घोटाले में गिरफ्तारियां, सीनेट की पड़ताल

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Arrests and Senate Scrutiny Follow Alleged Rs9.3 Million Harvard Admission Fraud Linked to Student's Death

धोखाधड़ी की जांच का दायरा बढ़ने पर पांच दिन की पुलिस हिरासत

इस्लामाबाद की एक अदालत ने लाइबा इजाज की मौत से जुड़े कथित 93 लाख रुपये के शिक्षा और वीज़ा घोटाले के मुख्य संदिग्ध को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इजाज भौतिकी में स्वर्ण पदक विजेता थीं। उनके परिवार ने अमेरिका में पढ़ाई की उनकी योजनाओं के लिए जमीन बेची और गहने गिरवी रखे थे।

विषय-सूची
  1. धोखाधड़ी की जांच का दायरा बढ़ने पर पांच दिन की पुलिस हिरासत
  2. परिवार की बचत से संवरने वाला विज्ञान का करियर
  3. आधिकारिक पद का दावा कर कैसे जीता भरोसा
  4. पैसे की अलग-अलग बताई गई रकम
  5. वे दस्तावेज जिनकी कथित तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी
  6. बार-बार टालमटोल और 12 अक्टूबर की मांग
  7. गिरफ्तारियां, डिजिटल सबूत और अलग-अलग मामले
  8. मंत्री और सीनेट क्या मांग रहे हैं
  9. धोखाधड़ी की बड़ी समस्या, लेकिन कोई साबित संबंध नहीं
  10. मुख्य बातें

12 अक्टूबर 2026 की सुनवाई के ब्यौरे के मुताबिक, न्यायिक मजिस्ट्रेट ज़ुनैरा ज़फ़र ने पुलिस की 10 दिन की हिरासत की मांग के बाद रिमांड मंजूर किया। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने कथित तौर पर जाली छात्रवृत्ति-पत्रों, विश्वविद्यालयों के प्रवेश प्रस्तावों और भुगतान रसीदों को लेकर अलग मामला दर्ज किया है। सीनेट की एक समिति ने भी 15 अक्टूबर को बैठक बुलाई है, जिसमें पुलिस, संघीय जांचकर्ताओं और शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगे जाएंगे।

पंजाब के सरगोधा की रहने वाली इजाज इस्लामाबाद के जी-10 सेक्टर में साप्ताहिक बाजार के पास मृत पाई गई थीं। अधिकांश रिपोर्टों में उनकी मौत की तारीख 9 अक्टूबर बताई गई है। पुलिस संदिग्ध आत्महत्या की जांच कर रही है, लेकिन शुरुआती जांच पर रिपोर्टों में औपचारिक पोस्टमार्टम के नतीजों का इंतजार बताया गया था। उनकी मौत की परिस्थितियां और कथित धोखाधड़ी अब भी जांचकर्ताओं और अदालतों के विचाराधीन हैं।

मुख्य संदिग्ध की पहचान मुहम्मद नौमान के रूप में की गई है। कार्यवाही के ब्यौरों में उनके नाम की वर्तनी नोमान और नौमान भी लिखी गई है। एफआईए के महानिदेशक उस्मान अनवर ने 11 अक्टूबर को उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। बाद की रिपोर्टों में दो महिलाओं की गिरफ्तारी का भी उल्लेख है, हालांकि उनकी पहचान और उनमें से एक नाम उपनाम था या नहीं, इस बारे में ब्यौरे अलग-अलग हैं।

यह मामला केवल विश्वविद्यालय में प्रवेश का वादा करने तक सीमित नहीं है। जांचकर्ता पहचान बदलकर पेश आने, बार-बार पैसे मांगने, फर्जी वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल संदेशों के आरोपों की जांच कर रहे हैं। इनसे परिवार को ऐसी व्यवस्थाओं पर भरोसा हुआ, जिनकी बाद में वे पुष्टि नहीं कर सके।

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परिवार की बचत से संवरने वाला विज्ञान का करियर

इजाज ने इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद में भौतिकी की पढ़ाई की और स्वर्ण पदक हासिल किया। उनके परिवार ने कहा कि वह अमेरिका में आगे की पढ़ाई कर वैज्ञानिक बनना चाहती थीं। रिश्तेदारों ने यह भी कहा कि उन्हें सऊदी अरब में छात्रवृत्ति का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई की अपनी योजना पर आगे बढ़ने का फैसला किया।

उनकी उम्र और पूरी की गई डिग्री को लेकर ब्यौरे अलग-अलग हैं। कई रिपोर्टें उन्हें 20 वर्षीय और हाल ही में बीएस की पढ़ाई पूरी करने वाली बताती हैं, जबकि कुछ में उनकी उम्र 24 वर्ष दी गई है। उनके पिता के बयान के मुताबिक, उन्होंने भौतिकी में मास्टर डिग्री हासिल की थी। इन जानकारियों में सार्वजनिक रूप से मेल नहीं बैठाया गया है, हालांकि रिपोर्टें लगातार उनके विश्वविद्यालय और शैक्षणिक उपलब्धि की पुष्टि करती हैं।

उनके पिता मोहम्मद ऐजाज़ इस्लामाबाद में दूध और दही बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। रिश्तेदारों ने कहा कि वह 1994 से यह काम कर रहे थे और अपनी सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। इजाज सात बच्चों में सबसे छोटी थीं। उनकी सबसे बड़ी बहन ने छात्रवृत्ति पर चीन में पढ़ाई की थी और बाद में लाहौर में अनुवादक के तौर पर काम किया।

विदेश में पढ़ाई की प्रस्तावित व्यवस्था का खर्च उठाने के लिए उनके पिता ने परिवार के घर के वास्ते खरीदा गया एक प्लॉट बेच दिया। उनकी मां ने अतिरिक्त रकम जुटाने के लिए गहने गिरवी रखे। परिवार के एक ब्यौरे में जमीन बेचने के बाद नकद 21 लाख रुपये दिए जाने का उल्लेख है। लिहाजा परिवार ने ऐसे संसाधन गंवाए जो घर और वित्तीय सुरक्षा के लिए जुटाए गए थे, न कि सिर्फ आवेदन के खर्च के लिए।

आधिकारिक पद का दावा कर कैसे जीता भरोसा

एफआईए के शुरुआती ब्यौरे के मुताबिक, संदिग्ध पंजीकृत वीज़ा एजेंट नहीं था और उसने अपनी पहचान तथा नौकरी के बारे में गलत जानकारी देकर परिवार का भरोसा हासिल किया। जांचकर्ताओं ने उन दावों का जिक्र किया है जिनमें उसने खुद को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में लेखाकार या किसी सरकारी संस्थान का अधिकारी बताया था। इजाज के पिता ने कहा कि उस व्यक्ति ने अपना परिचय सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के रूप में दिया था।

ये संदिग्ध के कथित दावों के ब्यौरे हैं, इस बात का सबूत नहीं कि उसने इनमें से कोई पद संभाला था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उसने इजाज के भाई को सुप्रीम कोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए थे। इससे रिश्ता विदेश में पढ़ाई से आगे भी बढ़ा।

पिता ने कहा कि यह लेन-देन करीब सात महीने तक चलता रहा। शुरुआती संपर्क कैसे हुआ, इस बारे में ब्यौरे अलग-अलग हैं: कुछ में शिक्षा सलाहकार की तलाश का जिक्र है, जबकि अन्य के मुताबिक इजाज की मुलाकात नौमान से इस्लामाबाद के ब्लू एरिया में नौकरी के साक्षात्कार के दौरान हुई थी। बाद के एक जांच-संबंधी ब्यौरे में आरोप है कि उसने फरवरी में एक दोस्त के जरिए उनसे संपर्क किया और अमेरिका में रहने वाले उस दोस्त के भाई की पहचान अपनाई।

एफआईए महानिदेशक उस्मान अनवर ने इस मामले को पहचान बदलकर की गई ठगी बताया। कथित धोखाधड़ी में अमेरिका में मौजूद एक ऐसे संपर्क का दावा शामिल था जो छात्रवृत्ति और प्रायोजन के दस्तावेज हासिल करवा सकता था। उनके मामा, वकील अमजद उर रहमान ने कहा कि परिवार को बताया गया था कि आइज़ा नाम की एक महिला ये कागजात जुटाने में मदद कर सकती है।

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पैसे की अलग-अलग बताई गई रकम

एफआईए में दर्ज मामले में कथित धोखाधड़ी की रकम 93 लाख रुपये बताई गई है। इसे 9.3 मिलियन पाकिस्तानी रुपये भी कहा गया है। एक लाख का मतलब 100,000 होता है। एजेंसी के शुरुआती ब्योरे के मुताबिक, 29 लाख रुपये इजाज के बैंक खाते से गुजरे और बाकी नकद दिए गए।

इस हिसाब से नकद रकम 64 लाख रुपये होगी। बैंक ट्रांसफर कुल रकम का करीब 31 प्रतिशत और नकद भुगतान करीब 69 प्रतिशत होगा। सबूत के लिहाज से यह अंतर अहम है: बैंक रिकॉर्ड से ट्रांसफर की पुष्टि हो सकती है, जबकि नकद भुगतान के लिए गवाहों, रसीदों और अन्य सहायक रिकॉर्ड की जरूरत पड़ सकती है।

पहले बताई गई रकम अलग है। एफआईए के शुरुआती बयान में हार्वर्ड में प्रवेश के लिए 72 लाख रुपये और उनके भाई को नौकरी दिलाने के लिए 5.5 लाख रुपये का जिक्र था, यानी कुल 77.5 लाख रुपये। एफआईए के निदेशक शहज़ाद नदीम बुखारी ने अलग से प्रवेश के लिए 72 लाख और नौकरी के लिए पांच लाख रुपये का उल्लेख किया था। परिवार के एक अन्य ब्यौरे में नुकसान करीब 87 लाख रुपये बताया गया।

उनके पिता के मुताबिक, प्रवेश के लिए 22 लाख रुपये और बैंक स्टेटमेंट तैयार कराने के लिए 30 लाख रुपये मांगे गए थे। इसके बाद उनकी बेटी को 22 लाख रुपये की एक और मांग भेजी गई। सार्वजनिक ब्यौरों से यह स्पष्ट नहीं होता कि ये सभी रकम आपस में कैसे जुड़ती हैं, नौकरी के लिए दिया गया भुगतान 93 लाख रुपये की कुल रकम में शामिल है या नहीं, अथवा आखिरी मांग का भुगतान हुआ था या नहीं। इन्हें अलग-अलग पुष्ट नुकसान मानकर आपस में नहीं जोड़ना चाहिए।

पिता के बयान में जी-10 में 21 लाख रुपये नकद देने और उनकी बेटी की ओर से 29 लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने का भी जिक्र है। एफआईए की शिकायत में गुलिस्तान प्लाज़ा, जी-10 मरकज़ की एक दुकान पर अतिरिक्त नकद भुगतान का उल्लेख है। जांचकर्ताओं ने भुगतान के सिलसिले की पड़ताल के लिए बैंक रिकॉर्ड हासिल किए हैं।

वे दस्तावेज जिनकी कथित तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी

एफआईए ने कहा कि इजाज और उनके परिवार को धोखा देने के लिए कथित तौर पर जाली छात्रवृत्ति-पत्र, विश्वविद्यालयों के प्रवेश प्रस्ताव और फीस की रसीदें इस्तेमाल की गईं। एक ब्यौरे में ऐसा दस्तावेज दिए जाने का उल्लेख है जिसमें दावा था कि भौतिकी के मास्टर कार्यक्रम की 7,500 डॉलर फीस चुकाई जा चुकी है। उनके पिता ने अलग से आरोप लगाया कि संदिग्ध ने बैंक स्टेटमेंट की जरूरतों के लिए एक खाते में 20,000 डॉलर ट्रांसफर किए जाने की फर्जी रसीद दी थी।

7,500 और 20,000 डॉलर की रकम उन दावों का हिस्सा है जो कथित तौर पर दस्तावेजों में किए गए थे। ये सत्यापित शिक्षण शुल्क, विश्वविद्यालय को किए गए भुगतान या इजाज को मिली रकम नहीं हैं। उनके पिता ने प्रक्रिया के दौरान दी गई बैंक खाते की जानकारी और यात्रा टिकटों पर भी सवाल उठाए।

अमजद उर रहमान ने कहा कि रिश्तेदारों ने सीधे हार्वर्ड से संपर्क किया और इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में अपने परिचितों के जरिए भी पूछताछ की। उनके मुताबिक, दोनों संस्थान दस्तावेजों की पुष्टि नहीं कर सके। अन्य ब्यौरों में कहा गया है कि वीज़ा साक्षात्कार के दौरान इजाज इन कागजात की पुष्टि कराने में नाकाम रहीं। इन रिपोर्टों में हार्वर्ड या दूतावास का कोई प्रत्यक्ष सार्वजनिक बयान शामिल नहीं है, इसलिए दस्तावेजों की पुष्टि संबंधी नतीजे रिश्तेदारों और जांचकर्ताओं के हवाले से ही दिए गए हैं।

इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि इजाज को हार्वर्ड में वास्तविक प्रवेश या असली छात्रवृत्ति मिली थी। आरोप विश्वविद्यालय के नाम का इस्तेमाल कर प्रवेश, वित्तीय सहायता और अमेरिकी वीज़ा के वादे करने से जुड़े हैं।

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बार-बार टालमटोल और 12 अक्टूबर की मांग

इजाज के बहनोई ज़ैद बिन अफज़ल ने कहा कि नौमान उनके कथित वीज़ा साक्षात्कार बार-बार टालता था। तीन-चार बार उसने कथित तौर पर मुलाकात से एक रात पहले फोन कर कहा कि वह रद्द हो गई है। अफज़ल के मुताबिक, आखिरकार संदिग्ध ने दावा किया कि अगला साक्षात्कार 12 अक्टूबर को होगा और उससे पहले 22 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की।

उनके पिता ने इतनी ही रकम मांगने और बदले में नए दस्तावेज देने का संदेश मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि संदिग्ध के फोन उठाना बंद करने के बाद परिवार पांच से छह दिन तक गहरे तनाव में रहा। रिश्तेदारों ने इस तनाव को कथित धोखाधड़ी का पता चलने से जोड़ा, लेकिन उनकी मौत से जुड़े चिकित्सकीय और कानूनी नतीजे अभी लंबित थे।

बताई गई घटनाओं में कई तारीखें हैं, जिन्हें अलग-अलग समझना जरूरी है:

  • फरवरी: बाद के एक जांच-संबंधी ब्यौरे में संदिग्ध के इजाज से शुरुआती संपर्क को इसी महीने का बताया गया है।
  • 9 अक्टूबर: अधिकांश रिपोर्टों के मुताबिक, इजाज जी-10 के साप्ताहिक बाजार के पास मृत पाई गई थीं।
  • 10 अक्टूबर: रिपोर्टों में आपराधिक मामले दर्ज किए जाने और गृह मंत्री मोहसिन नक़वी तथा गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी के दौरे का उल्लेख है।
  • 11 अक्टूबर: एफआईए महानिदेशक उस्मान अनवर ने मुख्य संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि की।
  • 12 अक्टूबर 2026: अदालत की सुनवाई के ब्यौरे के मुताबिक, इसी दिन पांच दिन की पुलिस हिरासत मंजूर हुई। वीज़ा साक्षात्कार की अगली तारीख कथित तौर पर 12 अक्टूबर ही बताई गई थी।
  • 15 अक्टूबर: सीनेट की मानवाधिकार संबंधी स्थायी समिति ने मामले की पड़ताल के लिए बैठक बुलाई।

समय-क्रम के कुछ ब्यौरों में विरोधाभास है। बुखारी के मुताबिक, इजाज ने परिवार को इस बारे में बताने की 12 अक्टूबर की योजना से दो दिन पहले फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र का पता लगाया था। इससे पता चल सकता है कि उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता 10 अक्टूबर को चला, जबकि उनकी मौत की व्यापक रूप से बताई गई तारीख इससे पहले की है। 11 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में भी उन्हें एक दिन पहले मृत पाए जाने का जिक्र है। ये विसंगतियां अब भी दूर नहीं हुई हैं।

गिरफ्तारियां, डिजिटल सबूत और अलग-अलग मामले

रिपोर्टों के मुताबिक, नौमान को इस्लामाबाद के एच-13 सेक्टर में छापे के दौरान गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं ने कहा कि वह किराये के एक कमरे में रह रहा था। बाद की रिपोर्टों में गिरफ्तार महिलाओं की पहचान फातिमा सरवर और आइज़ा के रूप में की गई है। एफआईए मामले के एक अन्य ब्यौरे में फातिमा सरवर उर्फ आइज़ा का नाम है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि यह जिक्र एक ही महिला का है या दो अलग-अलग लोगों का।

पुलिस ने संदिग्ध से बरामद फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है और बैंक रिकॉर्ड हासिल किए हैं। जांच-संबंधी ब्यौरों में फर्जी ईमेल पते, अपनाई गई नकली पहचान और बरामद चैट का जिक्र है। एक आरोप है कि फर्जी छात्र वीज़ा दस्तावेज तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया गया। इस आरोप की पुष्टि में कोई प्रकाशित फॉरेंसिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

बाद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पूछताछ के दौरान नौमान ने अपना जुर्म कबूल किया। पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामा अदालत का दोषी ठहराने वाला फैसला नहीं होता। जांचकर्ताओं को कथित तौर पर फोन में अन्य धोखाधड़ी की योजनाओं और महिलाओं को ब्लैकमेल करने के संकेत देने वाली सामग्री भी मिली। इन अलग आरोपों की जांच जारी है।

पिता की शिकायत के बाद इस्लामाबाद पुलिस ने रमना थाने में पाकिस्तान दंड संहिता की धाराओं 322 और 34 के तहत मामला दर्ज किया। धारा 322 गैरकानूनी कृत्य से, हत्या की मंशा के बिना, मौत का कारण बनने पर सजा से संबंधित है। धारा 34 ऐसे कृत्यों से जुड़ी है जिन्हें कई लोग साझा मंशा से अंजाम देते हैं। शिकायत में दर्ज धाराएं किसी को दोषी साबित नहीं करतीं।

अमजद उर रहमान की शिकायत के बाद एफआईए ने अलग मामला दर्ज किया। रिपोर्टों में धोखाधड़ी, बेईमानी से संपत्ति दिलवाने के लिए प्रेरित करने और उकसाने के आरोपों के साथ उत्प्रवास अध्यादेश के प्रावधानों का उल्लेख है। पांच दिन की पुलिस हिरासत आगे की जांच के लिए पुलिस को हिरासत में रखने की अनुमति देती है; यह सजा या फैसला नहीं है।

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मंत्री और सीनेट क्या मांग रहे हैं

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयानों के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस्लामाबाद के पुलिस महानिरीक्षक और मुख्य आयुक्त को संदिग्ध को हिरासत में लेने का निर्देश दिया। तलाल चौधरी ने भी एफआईए को कार्रवाई करने को कहा। गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के साथ परिवार के पैसे वापस दिलाना भी प्राथमिकता है।

शोकग्रस्त परिवार से मुलाकात के दौरान नक़वी ने जांच को धोखाधड़ी के मामलों में अधिकारियों की कार्रवाई की कसौटी बताया:

यह हमारे लिए परीक्षा का मामला है।

उन्होंने कार्यवाही पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखने का वादा भी किया:

मैं कह सकता हूं कि मैं व्यक्तिगत रूप से उनके मामले को आगे बढ़ाऊंगा।

सीनेटर समीना मुमताज़ ज़हरी की अध्यक्षता वाली सीनेट की मानवाधिकार संबंधी स्थायी समिति ने 15 अक्टूबर की बैठक बुलाई और इस्लामाबाद के पुलिस प्रमुख, एफआईए महानिदेशक तथा उच्च शिक्षा आयोग के अध्यक्ष को रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया। समिति ने मामलों, गिरफ्तारियों और जांच की प्रगति का ब्यौरा मांगा।

समिति ने कथित फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वाले सलाहकार का लाइसेंस रद्द करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा। इस मांग पर गौर करते समय एफआईए का पहले का बयान ध्यान में रखना होगा कि संदिग्ध पंजीकृत वीज़ा एजेंट नहीं था। उपलब्ध ब्यौरों से यह स्थापित नहीं होता कि उसके पास कोई लाइसेंस था या नहीं।

पुलिस ने दस्तावेज और फॉरेंसिक नमूने जुटाए, जबकि शुरुआती ब्यौरों में औपचारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट लंबित बताई गई थी। जब पूछा गया कि क्या जांचकर्ता हत्या की आशंका पर विचार कर रहे हैं, तो नक़वी ने टिप्पणी से इनकार किया और कहा कि तथ्यों का पता लगाने के लिए पुलिस को काम करने देना चाहिए। पैसे की पूरी वसूली या अदालत का अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट की गई कार्यवाही में सामने नहीं आया।

धोखाधड़ी की बड़ी समस्या, लेकिन कोई साबित संबंध नहीं

इस मामले से दस्तावेजों में अन्य कथित धोखाधड़ी की ओर भी ध्यान गया है, लेकिन सबूत के बिना उन जांचों को इसी गिरोह की गतिविधि नहीं मानना चाहिए। एक अलग जांच में एफआईए ने इस्लामाबाद की शिक्षा सलाहकार और कूरियर कंपनियों के दफ्तरों पर छापों के बाद 22 लोगों को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में विदेश मंत्रालय के छह अधिकारी भी शामिल थे।

उस जांच में कथित तौर पर नकली एपोस्टिल स्टिकर, जाली मुहरों और त्वरित सेवा के लिए भुगतान का मामला था। एपोस्टिल ऐसा प्रमाणपत्र है जिसका इस्तेमाल विदेश में किसी सार्वजनिक दस्तावेज़ की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए किया जाता है; इससे अपने आप किसी विश्वविद्यालय में प्रवेश या वीज़ा पात्रता साबित नहीं होती। उन गिरफ्तारियों और इजाज के मामले के बीच किसी स्थापित संबंध की खबर नहीं है।

अलग आरोपों में एक साल के दौरान करीब आठ लाख दस्तावेजों की प्रक्रिया के लिए अनौपचारिक रूप से 12 अरब रुपये वसूलने की बात कही गई है। ये आंकड़े किसी सत्यापित ऑडिट का कुल योग नहीं हैं और इजाज के मामले में हुए नुकसान का माप नहीं बताते।

नक़वी ने राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी में कर्मचारियों की कमी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में एजेंसी के 61 कर्मचारी थे, जबकि उसे रोज़ाना करीब 3,000 शिकायतें मिलती थीं। ये आंकड़े अलग एजेंसी से संबंधित हैं, इजाज के मामले की जांच कर रही एफआईए टीम से नहीं। फिर भी, वे उनके इस वादे की ठोस पृष्ठभूमि देते हैं कि शिकायतकर्ताओं को सिर्फ शिकायत दर्ज होने की सूचना नहीं, बल्कि जवाब और जानकारी भी मिलनी चाहिए।

इजाज के परिवार के लिए फिलहाल कुछ सीधे सवाल अहम हैं: पैसा किसने लिया, क्या इसमें और लोग शामिल थे, दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच का नतीजा क्या है, और कितनी रकम वापस मिल सकती है। उनके पिता ने छात्रों और माता-पिता से एजेंटों, प्रवेश प्रक्रियाओं और कागजात की पुष्टि सीधे संबंधित संस्थानों से करने की अपील की। यह अपील कथित धोखाधड़ी करने के आरोपियों की जिम्मेदारी को कम नहीं करती।

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मुख्य बातें

  • इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद से भौतिकी में स्वर्ण पदक पाने वाली लाइबा इजाज इस्लामाबाद के जी-10 साप्ताहिक बाजार के पास मृत पाई गई थीं।
  • एफआईए के मामले में 93 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। इसमें 29 लाख रुपये उनके खाते से ट्रांसफर हुए और बाकी नकद दिए गए।
  • परिवार ने अमेरिका में पढ़ाई की बताई गई व्यवस्था के लिए जमीन बेची और गहने गिरवी रखे।
  • मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार कर पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। बाद की रिपोर्टों में दो और गिरफ्तारियों का जिक्र है।
  • जांचकर्ता कथित फर्जी प्रवेश-पत्रों, छात्रवृत्ति दस्तावेजों, भुगतान रसीदों और डिजिटल संदेशों की जांच कर रहे हैं।
  • इजाज की उम्र, डिग्री, कुछ भुगतान राशियों, तारीखों और कथित सहयोगियों की पहचान को लेकर रिपोर्टें अलग-अलग हैं।
  • सीनेट की मानवाधिकार समिति ने 15 अक्टूबर की बैठक बुलाई। रिपोर्ट की गई कार्यवाही में अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष, अदालत का फैसला और रकम की वसूली स्थापित नहीं हुई थी।
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