आधिकारिक कीमत बढ़ी, लेकिन सिलिंडर सस्ते में मिलना आसान नहीं हुआ
बांग्लादेश ने 4 अक्टूबर 2026 को सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले रसोई गैस सिलिंडर की आधिकारिक कीमत बढ़ाकर 1,837 टका कर दी, लेकिन उपभोक्ताओं को दुकानों में सिलिंडर नहीं मिले और उनसे 2,700 टका तक मांगे गए। बांग्लादेश ऊर्जा नियामक आयोग (BERC) ने 12 किलोग्राम के तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलिंडर की कीमत 252 टका बढ़ाई। नई कीमत शाम 6 बजे से लागू हुई, लेकिन आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हुई।
विषय-सूची
- आधिकारिक कीमत बढ़ी, लेकिन सिलिंडर सस्ते में मिलना आसान नहीं हुआ
- किल्लत कैसे बढ़ी
- BERC ने अपनी गणना में क्या बदला
- आयात के आंकड़ों में मेल नहीं
- कुछ ब्रांड बाजार से क्यों गायब हुए
- अग्रिम भुगतान से आपूर्ति की गारंटी नहीं
- कमीशन का विवाद और गायब 100 टका
- जनसुनवाई भी विवाद का मुद्दा बनी
- ढाका की रसोई से आगे भी बढ़ा दबाव
- निरीक्षण, जुर्माने और सुरक्षा की चिंताएं
- क्या अब भी स्पष्ट नहीं है
- मुख्य बातें
बढ़ोतरी के बाद भी कीमत का अंतर काफी है। 2,400 टका में खरीदने पर नियमन वाली कीमत से 563 टका अधिक चुकाने पड़ते हैं, यानी करीब 30.6 प्रतिशत ज्यादा। 2,700 टका पर यह अंतर 863 टका, यानी लगभग 47 प्रतिशत हो जाता है। मीरपुर के पैकपाड़ा में एक खुदरा विक्रेता ने एक निवासी से 2,400 टका मांगे और कहा कि उसे सिलिंडर खरीदने में पहले ही 2,300 टका लगे थे।
मीरपुर के शेवड़ापाड़ा की निवासी तम्मन्ना अख्तर ने 12 किलोग्राम का सिलिंडर घर पहुंचाने के लिए 2,500 टका दिए, जो अक्टूबर की कीमत से 663 टका अधिक थे। अन्य लोगों के मुताबिक खुदरा कीमतें 2,000 से 2,600 टका के बीच रहीं। इससे पता चलता है कि अतिरिक्त वसूली किसी एक तय बाजार भाव के बजाय इलाके, विक्रेता और ब्रांड के हिसाब से बदल रही है।
इस विवाद के केंद्र में आयात के बारे में परस्पर विरोधी दावे, अग्रिम भुगतान के बावजूद आपूर्ति रुकने की शिकायतें और वितरकों का वह कमीशन है जिसे व्यापारी अब अपने खर्चों के लिए अपर्याप्त बताते हैं। बांग्लादेश में LPG के करीब 10 मिलियन ग्राहक हैं और लगभग 80 प्रतिशत इसका इस्तेमाल घरेलू खाना पकाने के लिए करते हैं। उनके लिए घोषित कीमत का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं, जब तक उस कीमत पर सिलिंडर उपलब्ध न हो।
किल्लत कैसे बढ़ी
बोतलबंद गैस पर दबाव एक अलग ईंधन, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), की आपूर्ति बाधित होने के बाद बढ़ा। LNG को फिर से गैस में बदलकर राष्ट्रीय पाइपलाइन नेटवर्क में भेजा जाता है। कॉक्स बाजार के महेशखाली में 21 जुलाई को एक तैरते LNG टर्मिनल में आग लगने से ग्रिड को मिलने वाली आपूर्ति घट गई। पाइप से मिलने वाली गैस की अनियमित आपूर्ति का सामना कर रहे उपभोक्ताओं के लिए LPG, जो आमतौर पर प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, एक विकल्प बन गई।
बाधा से जुड़ी खबरों के मुताबिक सितंबर के मध्य के आसपास LNG की आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन सिलिंडरों की किल्लत और ऊंची कीमतें जारी रहीं। संकट के दौरान उद्धृत पेट्रोबांग्ला के आंकड़ों के अनुसार, देश में गैस की मांग करीब 4,000 मिलियन घन फुट प्रतिदिन थी, जबकि आपूर्ति लगभग 2,600 मिलियन घन फुट थी। यह करीब 35 प्रतिशत की कमी है, जो टर्मिनल में आई अस्थायी बाधा से अलग है।
- 21 जुलाई: महेशखाली LNG टर्मिनल में आग लगने से राष्ट्रीय ग्रिड को गैस की आपूर्ति घट गई।
- सितंबर का मध्य: खबरों के मुताबिक बाधा के बाद LNG आपूर्ति सामान्य स्तर पर लौट आई।
- 20 सितंबर: ईंधन की कीमतें 20 टका प्रति लीटर बढ़ीं; वितरकों ने इस अवधि को आपूर्ति में तेज कटौती की शुरुआत भी बताया।
- 30 सितंबर: ऊर्जा मंत्री ने जिला प्रशासकों को कृत्रिम किल्लत की आशंका की जांच करने और अत्यधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
- 4 अक्टूबर: BERC ने 12 किलोग्राम के सिलिंडर की कीमत 1,585 से बढ़ाकर 1,837 टका की।
- 11 अक्टूबर: उपभोक्ता संरक्षण टीमों ने ढाका और 31 जिलों में निरीक्षण किए।
अक्टूबर की कीमत में बदलाव से पहले ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू और वाणिज्य मंत्री खांडकर अब्दुल मुक्तादिर ने भी LPG आयातकों से मुलाकात की। इन दखलों से यह विवाद तुरंत नहीं सुलझा कि आपूर्ति कहां रोकी जा रही थी।
BERC ने अपनी गणना में क्या बदला
BERC ने कीमत बढ़ाने के पीछे अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात खर्चों का हवाला दिया। अक्टूबर की गणना में सऊदी अनुबंध कीमतें प्रोपेन के लिए 680 डॉलर प्रति टन और ब्यूटेन के लिए 730 डॉलर प्रति टन रखी गईं। 35 प्रतिशत प्रोपेन और 65 प्रतिशत ब्यूटेन के मिश्रण के आधार पर औसत कीमत 712.50 डॉलर प्रति टन आई, जबकि सितंबर में यह 647.75 डॉलर थी।
नियामक ने मालभाड़े और व्यापारियों के प्रीमियम के लिए अपना भत्ता भी 160 से बढ़ाकर 250 डॉलर प्रति टन कर दिया। सऊदी अनुबंध कीमत और इस भत्ते को मिलाकर कुल रकम 807.75 से बढ़कर 962.50 डॉलर प्रति टन हो गई, यानी करीब 19.2 प्रतिशत की वृद्धि। गणना में इस्तेमाल डॉलर विनिमय दर थोड़ी घटकर 123.30 से 123.18 टका हो गई।
इसके परिणामस्वरूप उपभोक्ता कीमत करीब 15.9 प्रतिशत बढ़ी। BERC ने LPG की कीमत 153.06 टका प्रति किलोग्राम तय की और 5.5 से 45 किलोग्राम तक के सिलिंडरों की कीमतें उसी अनुपात में बढ़ाईं। वाहनों में इस्तेमाल होने वाली LPG, यानी ऑटोगैस, की कीमत 73.09 से बढ़कर 84.62 टका प्रति लीटर हो गई।
आयातकों ने अलग से दावा किया कि वास्तविक समुद्री मालभाड़ा 400 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया था। इस दावे को मालभाड़े और व्यापारियों के प्रीमियम के लिए BERC के संयुक्त भत्ते के साथ नहीं मिलाना चाहिए। 160 डॉलर के मानक का जिक्र करने वाली खबरें अक्टूबर की गणना में बताए गए 250 डॉलर के भत्ते से अलग आंकड़े का उल्लेख करती हैं। वास्तविक खर्चों का पता लगाने के लिए इन आंकड़ों को एक-दूसरे के समान मानने के बजाय चालान की जांच जरूरी है।
आयात के आंकड़ों में मेल नहीं
बांग्लादेश LPG ऑपरेटर्स एसोसिएशन (LOAB) का कहना है कि बांग्लादेश ने सितंबर में 156,000 टन आयात किया, जबकि अगस्त में यह 158,000 टन था। इन आंकड़ों के मुताबिक आयात केवल 2,000 टन, यानी करीब 1.3 प्रतिशत घटा। एसोसिएशन इस मात्रा को मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त मानती है और ऑपरेटरों पर कृत्रिम किल्लत पैदा करने के आरोप खारिज करती है।
एक दूसरा विवरण, जिसे आधिकारिक आयात आंकड़ों पर आधारित बताया गया है, सितंबर का आयात करीब 120,000 टन और अगस्त का लगभग 160,000 टन बताता है। इसका अर्थ करीब 25 प्रतिशत की गिरावट होगा। ऑपरेटरों ने 1 अक्टूबर को ऊर्जा विभाग को भेजे पत्र में इस विवरण पर आपत्ति जताई। एक ही आधार पर महीने की कुल मात्रा के लिए दोनों आंकड़े सही नहीं हो सकते।
कुछ आयातकों पर माल उतारने या बाजार में गैस जारी करने में देरी करने के आरोप भी हैं। ये आरोप हैं, प्रमाणित निष्कर्ष नहीं। अगस्त के करीब कुल आयात बना रहने पर भी इससे यह साबित नहीं होगा कि कितनी गैस बॉटलिंग संयंत्रों, डीलरों या अलग-अलग जिलों तक पहुंची।
BERC ने राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड के आंकड़ों का हवाला देते हुए 12 आयातकों से सितंबर के आयात और बिक्री की जानकारी मांगी। आयोग के अध्यक्ष जलाल अहमद ने कहा कि अनुरोध के बाद वाले रविवार तक पांच कंपनियों ने जानकारी दी थी। आयोग इन दस्तावेजों की जांच कर रहा था, लेकिन आयात के अंतर या आपूर्ति रोकने के आरोपों का समाधान करने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया।
कुछ ब्रांड बाजार से क्यों गायब हुए
खुदरा विक्रेताओं के मुताबिक ढाका की कई दुकानों से छह में से दो कंपनियों के सिलिंडर गायब थे। वितरकों ने कहा कि इन आपूर्तिकर्ताओं ने ऑर्डर लेना बंद कर दिया था। अन्य वितरकों ने मेघना फ्रेश, ओमेरा, आई गैस, जमुना, पेट्रोमैक्स और BM को नियमित आपूर्तिकर्ता बताया, जबकि कहा कि कई दूसरे ऑपरेटर बहुत कम या बिल्कुल आपूर्ति नहीं कर रहे थे।
सक्रिय कारोबारियों की संख्या के अनुमान अलग-अलग हैं। LOAB के प्रतिनिधियों ने छह आयातकों की बात कही; अन्यत्र उद्धृत BERC के आंकड़ों के मुताबिक 32 से 33 लाइसेंस होने के बावजूद आयात करने वाली कंपनियों की संख्या 10 से 12 है। एक अन्य वितरक संघ ने 55 लाइसेंसधारी कारोबारियों, करीब 25 सक्रिय ऑपरेटरों और केवल पांच या छह सक्रिय आयातकों का जिक्र किया। इन आंकड़ों में अलग-अलग गतिविधियों या परिभाषाओं का अंतर हो सकता है; इनसे कोई एक पुष्ट कुल संख्या तय नहीं होती।
ग्रीन LPG का उदाहरण दिखाता है कि दूसरी कंपनियों के आयात जारी रहने के बावजूद बॉटलिंग कंपनी को नुकसान हो सकता है। इसके महाप्रबंधक अहसान हबीब हीरो ने कहा कि कंपनी ने दो साल से गैस आयात नहीं की और इसके बजाय दूसरे ऑपरेटरों से खरीदी। उन्होंने कहा कि सितंबर में 2,000 टन की मांग के मुकाबले कंपनी को केवल 150 टन मिला, जो उसकी जरूरत का 7.5 प्रतिशत है।
ग्रीन LPG के डीलर मोजम्मेल ने कहा कि सितंबर में उन्हें अधिकतम 2,000 सिलिंडर मिले, जबकि उनकी मासिक बिक्री पहले 20,000 तक पहुंची थी। LPG कारोबार सहकारी संघ के कोषाध्यक्ष अबू ताहेर कुरैशी ने एक और बाधा बताई: ग्राहक आमतौर पर खाली सिलिंडर उसी ब्रांड के भरे सिलिंडर से बदलते हैं। कंपनी बदलने का मतलब गैस के साथ एक और सिलिंडर खरीदना भी है, इसलिए किसी ब्रांड का गायब होना सिर्फ दूसरा उत्पाद चुनने से ज्यादा महंगा पड़ता है।
अग्रिम भुगतान से आपूर्ति की गारंटी नहीं
खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि किल्लत से उनका पैसा भी फंस रहा है और स्टॉक भी घट रहा है। स्वामीबाग में बप्पी एंटरप्राइज के मालिक नूर हुसैन बप्पी ने बताया कि उन्होंने डिलीवरी से पहले भुगतान किया, लेकिन उन्हें जरूरी सिलिंडर नहीं मिले।
सिलिंडर खरीदना महंगा है। हम कंपनी के डीलर को अग्रिम भुगतान करते हैं। इसके बाद भी वे हमें सिलिंडर नहीं देते,
कुरैशी ने कहा कि कंपनियों ने अक्टूबर की शुरुआत से होने वाली आपूर्ति पर नई कीमत लागू करने की मांग की, जिसमें पहले किए गए भुगतानों से जुड़ी डिलीवरी भी शामिल थी। LOAB अध्यक्ष मोहम्मद अमीरुल हक ने इस बात से इनकार किया कि ऑपरेटर वितरकों से नियमन वाली दर से ज्यादा वसूल रहे हैं और कहा कि डिलीवरी के भुगतान बैंक के जरिये होते हैं।
हक ने कहा कि गलत काम के सबूत मिलने पर ऑपरेटरों को सजा मिलनी चाहिए:
हमारे सभी लेनदेन बैंकों के जरिए होते हैं। बैंक रसीदों के आधार पर डीलरों को सिलिंडर दिए जाते हैं। ज्यादा कीमत वसूलने वालों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। अगर हम ज्यादा वसूलते हैं, तो सजा स्वीकार करेंगे,
इन बयानों से खरीद के रिकॉर्ड विवाद के केंद्र में आ जाते हैं। खुदरा विक्रेता के ज्यादा भुगतान करने के दावे से यह साबित नहीं होता कि आयातक ने कीमत व्यवस्था का उल्लंघन किया, लेकिन ऑपरेटर का इनकार न पहुंचाए गए ऑर्डर की वजह नहीं बताता। बैंक रसीदों, चालानों, डिलीवरी की तारीखों और वास्तविक मात्रा की जांच से नियामक हर लेनदेन की पड़ताल कर सकते हैं, बजाय इसके कि कारोबार की किसी पूरी श्रेणी को जिम्मेदार ठहराएं।
कमीशन का विवाद और गायब 100 टका
6 अक्टूबर के एक व्यापारी पत्र में 12 किलोग्राम के सिलिंडर के लिए ऑपरेटरों की कीमत 1,740 से 2,000 टका बताई गई। BERC की घोषित थोक दर 1,742 टका थी। वितरक के 50 टका कमीशन को जोड़ने पर खुदरा विक्रेता के लिए अपेक्षित कीमत 1,792 टका बनती है, यानी उपभोक्ता के लिए 1,837 टका की अधिकतम कीमत से पहले 45 टका बचते हैं।
एक विवरण में इसके बजाय खुदरा विक्रेता के लिए 40 टका का मार्जिन बताया गया है। यह आंकड़ा घोषित थोक दर, वितरक कमीशन और अंतिम कीमत के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाता, क्योंकि इनका हिसाब 45 टका का अंतर दिखाता है। इस फर्क को चुपचाप गणना में जोड़ने के बजाय स्पष्ट किया जाना चाहिए।
वितरकों ने गोदाम तक परिवहन के लिए 50 टका, लोडिंग, अनलोडिंग और खुदरा विक्रेताओं तक डिलीवरी के लिए 35 टका, और कर्मचारियों, किराए, बिजली, लाइसेंस तथा अन्य खर्चों के लिए 25 टका का अनुमान दिया। ये खर्च कुल 110 टका हैं। उनका मांगा गया 40 टका लाभ जोड़ने पर कुल 150 टका होता है, जबकि उनके मुताबिक पिछले पांच साल से कमीशन 50 टका पर ही बना हुआ है।
इस तरह दावा किया गया घाटा प्रति सिलिंडर 100 टका है, जिसमें इच्छित लाभ भी शामिल है। यह अपने आप में उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे 363 से 863 टका अतिरिक्त मूल्य की वजह नहीं बताता। ऑपरेटरों की ऊंची कीमतों, परिवहन के आगे के खर्चों और वितरण के अन्य चरणों के मार्जिन के आरोप भी हैं, लेकिन उनकी अलग से पुष्टि जरूरी है।
कमीशन बढ़ाने का अनुरोध ऊर्जा और वाणिज्य मंत्रालयों, उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों और जिला प्रशासकों को भेजा गया। व्यापारियों ने मांग के समर्थन में आगे के कार्यक्रम पर चर्चा की; कुछ ने बिक्री रोकने पर विचार करने की बात कही। बिक्री रोकने या कमीशन बढ़ाने की कोई पुष्टि नहीं हुई।
जनसुनवाई भी विवाद का मुद्दा बनी
बांग्लादेश उपभोक्ता संघ (CAB) के ऊर्जा सलाहकार एम शम्सुल आलम ने अक्टूबर के फैसले को प्रक्रिया के आधार पर चुनौती दी। उन्होंने 25 अगस्त 2020 के हाई कोर्ट के निर्देश का हवाला दिया, जिसमें LPG की कीमतें जनसुनवाई के जरिए तय करने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2021 के बाद सुनवाई बंद हो गई।
BERC अध्यक्ष जलाल अहमद ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि अप्रैल और अक्टूबर 2021 में सुनवाई हुई थी और उसी में मासिक कीमत तय करने की व्यवस्था बनी थी। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों, मालभाड़े, विनिमय दरों और ईंधन खर्चों में हर बदलाव पर नई सुनवाई जरूरी नहीं है।
यह मतभेद इसलिए अहम है क्योंकि सुनवाई में उपभोक्ता प्रतिनिधि बताए गए खर्चों पर सवाल उठा सकते हैं। आलम ने याद दिलाया कि 2021 में कंपनियों ने करीब 120 डॉलर प्रति टन के मालभाड़े के चालान दिए थे, जबकि CAB ने मोंगला की एक खेप का 69 डॉलर का दस्तावेज पेश किया था। ये पुराने आंकड़े आज की मालभाड़ा दर साबित नहीं करते, लेकिन दिखाते हैं कि मूल दस्तावेजों की जांच विवाद का विषय क्यों है।
अहमद ने कहा कि आयोग द्वारा कीमतों में संशोधन के लिए समीक्षा करने पर सुनवाई जरूरी होगी:
अगर हम इनमें संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे, तो निश्चित रूप से जनसुनवाई करेंगे,
आलम ने 21 सितंबर को वितरकों की उस शिकायत का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि निर्धारित 1,475 टका के मुकाबले आपूर्तिकर्ताओं ने 1,550 से 1,720 टका वसूले। CAB ने BERC कानून की धारा 11 के तहत जांच की मांग की। सुनवाई विवाद को सुलझाने वाला कोई नया न्यायिक फैसला या आयोग की सुनवाई की तारीख सामने नहीं आई।
ढाका की रसोई से आगे भी बढ़ा दबाव
फरीदपुर के उपभोक्ताओं ने सिलिंडर की कीमत 2,000 से 2,500 टका बताई। नागरकांदा, साल्था और मधुखाली के दूरदराज के बाजारों में कीमतें इससे भी ज्यादा थीं। वहां 200 से 500 टका अतिरिक्त वसूली की बात कहने वाली खबरों के आंकड़े पूरी बताई गई मूल्य सीमा से मेल नहीं खाते: 1,837 टका की कीमत के मुकाबले ये भाव 163 से 663 टका तक के अंतर का संकेत देते हैं।
चट्टोग्राम में कीमतें कम, 1,950 से 2,100 टका बताई गईं, लेकिन उपलब्धता की समस्या बनी रही। चंदनाइश के एक खुदरा विक्रेता ने कहा कि बिक्री 60 प्रतिशत से अधिक गिर गई। ढाका की अलग-अलग खबरों में केवल एक किलोमीटर के भीतर 400 टका का मूल्य अंतर बताया गया, जो इस बात का और संकेत है कि खरीदारों को अलग-अलग इलाकों में काफी भिन्न हालात का सामना करना पड़ा।
रेस्तरां का खर्च और बढ़ता है, क्योंकि वे बड़े सिलिंडर इस्तेमाल करते हैं और बार-बार खरीदते हैं। मयमनसिंह के एक रेस्तरां को महीने में करीब 20 बड़े सिलिंडर चाहिए थे। प्रति सिलिंडर कथित 1,200 टका अतिरिक्त खर्च के हिसाब से उसका मासिक खर्च 24,000 टका बढ़ गया।
वाहन चालकों को भी बाधा का सामना करना पड़ा। बांग्लादेश पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन का अनुमान था कि करीब 1,000 ऑटोगैस स्टेशनों में से 70 से 80 प्रतिशत एक महीने से बंद थे। LPG फिलिंग स्टेशन ओनर्स एसोसिएशन के महासचिव हसीन परवेज ने कहा कि महीने में 30 टन की जरूरत वाले स्टेशन को केवल पांच से छह टन मिल रहा था, यानी मांग का करीब 17 से 20 प्रतिशत।
अन्य खबरों में कीमत बदलने के बाद कुछ स्टेशनों पर आपूर्ति लौटने की बात कही गई। इससे देशव्यापी बहाली साबित नहीं होती। ऑटोगैस क्षेत्र के प्रतिनिधि सिराजुल मौला ने मासिक मांग 20,000 टन बताई और कहा कि स्टेशनों का कामकाज बहाल होने में तीन सप्ताह तक लग सकते हैं। यह अनुमान है, पक्की समय-सीमा नहीं।
निरीक्षण, जुर्माने और सुरक्षा की चिंताएं
राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार संरक्षण निदेशालय ने बताया कि 2 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच LPG के 242 निरीक्षण किए गए और 478 वितरक तथा खुदरा कारोबारियों पर कुल 1,125,000 टका का जुर्माना लगाया गया। निदेशक आतिया सुल्ताना ने कार्रवाई जारी रहने के दौरान ये आंकड़े दिए।
11 अक्टूबर को 46 निगरानी दलों ने ढाका और 31 जिलों के बाजारों का निरीक्षण किया और 87 कारोबारियों पर 771,500 टका का जुर्माना लगाया। इस कार्रवाई में LPG, खाद्य तेल और दूसरी वस्तुओं की जांच भी शामिल थी, इसलिए पूरे जुर्माने को गैस सिलिंडर के उल्लंघनों की सजा के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
अधिकारियों ने आपूर्ति, कीमतों, कृत्रिम किल्लत की आशंका, प्रदर्शित मूल्य सूचियों और खरीद के रिकॉर्ड की जांच की। प्रधानमंत्री के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने कहा कि आधिकारिक कीमतें लागू कराने के लिए जिला प्रशासकों को निर्देश दिए जाएंगे। फरीदपुर की अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सुस्मिता साहा ने कहा कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को पहले ही LPG की कीमतों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया था।
मोबाइल रिचार्ज, सीमेंट, हार्डवेयर और किराने की दुकानों में भी सिलिंडर बिकते दिखे। ऐसी बिक्री से यह साबित नहीं होता कि हर दुकान बिना अनुमति के काम कर रही थी, लेकिन LPG विक्रेताओं को अग्निशमन सेवा और नागरिक सुरक्षा विभाग समेत सरकारी एजेंसियों से लाइसेंस लेना होता है, क्योंकि यह गैस अत्यधिक ज्वलनशील है।
आशुलिया में एक निरीक्षण के दौरान अत्यधिक कीमत वसूलने, बड़े सिलिंडरों से छोटे सिलिंडरों में गैस भरने और सिलिंडरों में पानी डालने समेत कई आरोपों पर 200,000 टका का जुर्माना लगाया गया। उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों ने खरीदारों को रसीदें संभालकर रखने और अधिक कीमत वसूले जाने या अन्य गड़बड़ियों की शिकायत हेल्पलाइन 16121 पर करने की सलाह दी।
क्या अब भी स्पष्ट नहीं है
मुख्य अनसुलझा सवाल यह है कि गैस आयात के स्तर पर कम पड़ रही है, आयातकों और बॉटलिंग कंपनियों के बीच रोकी जा रही है, या डीलरों तक ऐसी कीमतों पर पहुंच रही है जो नियमन वाली कीमत व्यवस्था को कमजोर करती हैं। आयातकों के रिकॉर्ड की BERC की जांच इन संभावनाओं में फर्क कर सकती है, लेकिन अंतिम नतीजे या उसे जारी करने की समय-सीमा की जानकारी नहीं दी गई।
कीमतों का पुराना रिकॉर्ड भी अलग-अलग आंकड़े देता है। दो विवरण जनवरी में 12 किलोग्राम के सिलिंडर की कीमत 1,306 टका बताते हैं, जिससे अक्टूबर की कीमत 531 टका, यानी करीब 40.6 प्रतिशत ज्यादा होती है। एक अन्य विवरण जनवरी की कीमत 1,253 टका बताता है और 1,940 टका की ऊंची कीमत को मई के बजाय अप्रैल में रखता है। सभी विवरण सितंबर की 1,585 टका और अक्टूबर की 1,837 टका की कीमत पर सहमत हैं, इसलिए हालिया बढ़ोतरी की तुलना अधिक भरोसेमंद है।
सरकारी आपूर्ति इतनी कम है कि वह व्यापक रूप से उपलब्ध विकल्प नहीं दे सकती। खबरों के मुताबिक निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 98 से 99 प्रतिशत है, लेकिन सरकारी कंपनी के 12.5 किलोग्राम सिलिंडर की कीमत पर मतभेद है: एक विवरण में 777 टका और दूसरे में 825 टका बताया गया। ये आंकड़े निजी क्षेत्र के 12 किलोग्राम उत्पाद से अलग आकार के सिलिंडर से जुड़े हैं।
बांग्लादेश इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर इयाज हुसैन ने सरकारी बफर स्टॉक या कीमत स्थिरीकरण कोष की वकालत की। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन से LPG का बड़ा हिस्सा आयात कराने की मांग प्रस्ताव हैं, घोषित कदम नहीं। LOAB प्रतिनिधियों ने अधिक आयातकों, आयात कोटा खत्म करने और लाइसेंस मंजूरियों की संख्या घटाने की भी मांग की। इनमें से कोई भी उपाय आधिकारिक कीमत पर सिलिंडर मिलने की तत्काल गारंटी नहीं देता।
मुख्य बातें
- निजी क्षेत्र के 12 किलोग्राम LPG सिलिंडर की अक्टूबर में आधिकारिक कीमत 1,837 टका है, जो 4 अक्टूबर को शाम 6 बजे से लागू हुई।
- खुदरा कीमतें 2,700 टका तक बताई गईं, जो इस अधिकतम कीमत से करीब 47 प्रतिशत ज्यादा है।
- LOAB का कहना है कि सितंबर में 156,000 टन आयात हुआ; दूसरे विवरण में यह मात्रा करीब 120,000 टन बताई गई है।
- BERC ने 12 आयातकों से आयात और बिक्री के रिकॉर्ड मांगे; कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया।
- वितरक कमीशन की समीक्षा चाहते हैं, जबकि BERC का कहना है कि बदलाव के लिए जनसुनवाई जरूरी है।
- घरों, रेस्तरां और ऑटोगैस स्टेशनों को अब भी अनियमित आपूर्ति की शिकायत है।
- उपभोक्ता अधिक कीमत वसूले जाने और अन्य गड़बड़ियों की शिकायत हेल्पलाइन 16121 पर कर सकते हैं।






