72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: गुजरात में ममूटी, कार्तिक आर्यन और यामी गौतम को मिले प्रमुख सम्मान

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72nd National Film Awards: Mammootty, Kartik Aaryan and Yami Gautam Lead Honours in Gujarat

साझा अभिनय सम्मान और गुजरात में समारोह

गुजरात के एकता नगर में आयोजित कथित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ममूटी और कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का साझा सम्मान मिला, यामी गौतम ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता और दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ये सम्मान प्रदान किए। इनमें 2024 में रिलीज हुई फिल्मों को मान्यता दी गई।

विषय-सूची
  1. साझा अभिनय सम्मान और गुजरात में समारोह
  2. स्थल क्यों मायने रखता है
  3. ममूटी और आर्यन को मिलीं अलग-अलग तरह की भूमिकाओं के लिए पहचान
  4. ‘आर्टिकल 370’ से गौतम को मिला पहला पुरस्कार
  5. धनुष के दो सम्मान किन उपलब्धियों के लिए हैं
  6. ‘अमरन’ और ‘महाराजा’ को फिल्म निर्माण के कई क्षेत्रों में पहचान
  7. हुड्डा की पहली फिल्म और मिश्रा का भावनात्मक जुड़ाव
  8. भाषा पुरस्कार, लोकप्रिय फिल्में और तकनीकी विजेता
  9. अनंत नाग को मिला जीवनपर्यंत सम्मान
  10. मुख्य बातें

समारोह की तारीख 22 सितंबर 2026 बताई गई है। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को हुई थी। ‘आर्टिकल 370’ ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के साथ गौतम के लिए अभिनय पुरस्कार भी जीता, जबकि ‘अमरन’ को निर्देशन, संपादन और पार्श्व संगीत के लिए सम्मान मिला। धनुष को दो सम्मानों से जोड़ा गया: उनके निर्देशन वाली ‘रायन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म और ‘कैप्टन मिलर’ में उनके अभिनय के लिए विशेष उल्लेख।

कार्यक्रम की तस्वीरों और विवरणों में विजेताओं के साथ उनके परिवार और फिल्मी दल भी नजर आए। आर्यन अपने माता-पिता के साथ पहुंचे, जबकि धनुष अपने बेटों यात्रा और लिंगा के साथ दिखे। गौतम और उनके पति, ‘आर्टिकल 370’ के निर्माता आदित्य धर, साथ में और ममूटी का अभिवादन करते हुए तस्वीरों में दिखे।

हालांकि, कुछ विवरणों को लेकर सावधानी जरूरी है। धनुष के पुरस्कारों की सटीक श्रेणियों, ममूटी के पहले के पुरस्कारों की तारीखों और नई दिल्ली से बाहर हुए पहले समारोह को लेकर खबरों में मतभेद हैं। इन विवरणों के साथ कोई आधिकारिक पुरस्कार अधिसूचना या समारोह का बयान नहीं दिया गया है, इसलिए विवादित बातों को पुष्ट तथ्य नहीं मानना चाहिए।

स्थल क्यों मायने रखता है

कार्यक्रम गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित एकता नगर में हुआ, जिसे पहले केवड़िया के नाम से जाना जाता था। खबरों में इस बदलाव को सरकार के उस फैसले का हिस्सा बताया गया है, जिसके तहत भविष्य में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित किए जाएंगे, न कि सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी में।

कुछ विवरण गुजरात के कार्यक्रम को नई दिल्ली से बाहर पहला समारोह बताते हैं। एक अन्य विवरण में इसका अपवाद दिया गया है: 1971 में चेन्नई में आयोजित 17वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह। इन दोनों विवरणों के आधार पर यह निर्विवाद दावा नहीं किया जा सकता कि गुजरात दिल्ली से बाहर पहला आयोजन स्थल था।

अगर चेन्नई से जुड़ा विवरण सही है, तो सितंबर 2026 का समारोह 55 साल बाद राजधानी से बाहर किसी स्थल पर वापसी होगा। यह अंतर मायने रखता है, क्योंकि तब यह बदलाव बिल्कुल नई शुरुआत के बजाय पहले की परंपरा को दोबारा अपनाना होगा।

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रिपोर्टों में फिल्मों के वर्ष और पुरस्कारों की घोषणा व प्रस्तुति के वर्ष अलग-अलग बताए गए हैं:

  • 2024: प्रतिस्पर्धी फिल्म पुरस्कारों में शामिल फिल्मों का रिलीज वर्ष।
  • 18 जुलाई, 2026: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की कथित घोषणा।
  • 22 सितंबर, 2026: गुजरात के एकता नगर में कथित पुरस्कार समारोह।

रिपोर्टों में देश के अन्य हिस्सों में समारोह आयोजित करने की योजना का जिक्र है, लेकिन अगले आयोजन के स्थल या तारीख की जानकारी नहीं दी गई है।

ममूटी और आर्यन को मिलीं अलग-अलग तरह की भूमिकाओं के लिए पहचान

ममूटी को मलयालम मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में कोडुमोन पोत्ती की भूमिका के लिए सम्मान मिला। फिल्म की छवियों को श्वेत-श्याम में दिखाया गया है। कबीर खान के निर्देशन में बनी हिंदी खेल ड्रामा ‘चंदू चैंपियन’ के लिए आर्यन को पुरस्कार मिला। यह फिल्म भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता और फ्रीस्टाइल तैराक मुरलीकांत पेटकर की कहानी पर आधारित है।

इस साझा पुरस्कार में दो बिल्कुल अलग तरह के अभिनय शामिल थे: एक भयावह कहानी के खौफ पर आधारित भूमिका और एक खिलाड़ी के जीवन का चित्रण। आर्यन ने इस भूमिका के लिए शारीरिक तैयारी और गहन प्रशिक्षण लिया। इसे उनका पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार बताया गया है, जबकि ममूटी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का चौथा सम्मान मिला।

ममूटी के पहले तीन पुरस्कारों से जुड़ी फिल्मों पर रिपोर्टें सहमत हैं: ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’ और ‘मथिलुकल’; ‘पोंथन माडा’ और ‘विधेयन’; तथा ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर’। हालांकि, तारीखों को लेकर मतभेद हैं। एक रिपोर्ट में 1990, 1994 और 1999, जबकि दूसरी में 1989, 1990 और 1994 बताया गया है। यहां आधिकारिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण इन तारीखों का भरोसे के साथ मिलान नहीं किया जा सकता।

‘ब्रह्मयुगम’ को शहनाद जलाल के लिए सिनेमैटोग्राफी का सम्मान भी मिला। यह दूसरा पुरस्कार ममूटी के अभिनय से अलग, फिल्म के दृश्यात्मक पक्ष को मान्यता देता है। एक रिपोर्ट इसे दो पुरस्कार जीतने वाली एकमात्र मलयालम फिल्म बताती है, लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए पूरी आधिकारिक सूची जरूरी होगी।

‘आर्टिकल 370’ से गौतम को मिला पहला पुरस्कार

यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ में खुफिया अधिकारी की भूमिका के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। फिल्म जम्मू-कश्मीर का विशेष संवैधानिक दर्जा हटाए जाने से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार के साथ फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान भी मिला। इसके निर्माता के तौर पर जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज का नाम दिया गया।

निर्माता के तौर पर आदित्य धर ने फिल्म का सम्मान ग्रहण किया। यहां निर्माता और निर्देशक के बीच का अंतर प्रासंगिक है: एक रिपोर्ट धर को निर्देशक बताती है, लेकिन फिल्म के अधिक विस्तृत क्रेडिट में आदित्य सुहास जांभले को निर्देशक बताया गया है। फिल्म में प्रियामणि, अरुण गोविल और किरण करमरकर भी हैं।

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विजेताओं की घोषणा के बाद गौतम ने लिखा कि वर्षों के अभिनय कार्य के बाद यह सम्मान उनके लिए एक खास पड़ाव है:

हर सफर में एक ऐसा पल आता है, जो आपको याद दिलाता है कि आपने हार क्यों नहीं मानी। आज मेरे लिए वही पल है। ‘आर्टिकल 370’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाना ऐसा सम्मान है, जिसे मैं जीवन भर संजोकर रखूंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि यह परियोजना उनके लिए खास मायने क्यों रखती है:

‘आर्टिकल 370’ मेरे लिए कभी सिर्फ एक और फिल्म नहीं थी। यह ऐसी कहानी थी, जिस पर मेरा गहरा विश्वास था। यह हमारी होम प्रोडक्शन फिल्म थी, इसलिए इस सम्मान से जुड़ी भावना और भी गहरी और निजी है।

तस्वीरों में गौतम और आर्यन अपने पुरस्कारों के साथ पोज देते दिखे। धर भी गौतम के साथ, उनसे बातचीत करते हुए और ममूटी से मिलते हुए, तस्वीरों में नजर आए।

धनुष के दो सम्मान किन उपलब्धियों के लिए हैं

पुरस्कारों के विवरण में सबसे ज्यादा विसंगतियां धनुष से जुड़ी हैं। अधिक विस्तृत सूचियों में ‘रायन’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म बताया गया है और ‘कैप्टन मिलर’ में उनके अभिनय के लिए विशेष उल्लेख का जिक्र है। अन्य रिपोर्टों में उन्हें ‘रायन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक या ‘कैप्टन मिलर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिलने की बात कही गई है।

इन श्रेणियों को एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म पुरस्कार भाषा श्रेणी में किसी फिल्म को दिया जाता है। विशेष उल्लेख जूरी की ओर से मान्यता का एक अलग रूप है; यह ममूटी और आर्यन को दिए गए साझा सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जैसा नहीं है। इसी तरह धनुष के निर्देशन वाली फिल्म को मिला सम्मान अपने आप सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार नहीं बन जाता।

धनुष के निर्देशन और अभिनय वाली ‘रायन’ एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अपने परिवार की रक्षा करने की कोशिश में अपराध और बदले की दुनिया में खिंच जाता है। अरुण माथेश्वरन के निर्देशन में बनी और भारत की आजादी से पहले के दौर पर आधारित ‘कैप्टन मिलर’ को राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलने की बात भी दर्ज है।

कार्यक्रम की तस्वीरों में इन उपलब्धियों के साथ एक पारिवारिक पल भी दिखा। धनुष शर्ट, वेष्टी और सैंडल पहने थे, जबकि उनके बेटे यात्रा और लिंगा औपचारिक सूट में थे। उनकी एक तस्वीर में वह आर्यन के बगल में बैठे भी नजर आए।

‘अमरन’ और ‘महाराजा’ को फिल्म निर्माण के कई क्षेत्रों में पहचान

‘अमरन’ को मिले सम्मान सिर्फ कलाकारों तक सीमित नहीं थे। राजकुमार पेरियासामी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन, जी. वी. प्रकाश कुमार को पार्श्व संगीत के लिए संगीत निर्देशन और आर. कलैवन्नन को सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार मिला। तमिल फिल्म में शिवकार्तिकेयन और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

ये तीनों श्रेणियां एक ही निर्माण के अलग-अलग पहलुओं को मान्यता देती हैं। निर्देशन में पूरी फिल्म को आकार देना शामिल है; संपादन में दृश्यों और अभिनय को क्रम में जोड़ना आता है; जबकि पार्श्व संगीत फिल्म के गीतों से अलग, दृश्यों और भावनाओं के साथ बजने वाला संगीत होता है।

‘महाराजा’ को अभिनय और एक्शन, दोनों क्षेत्रों में पुरस्कार मिले। विजय सेतुपति के किरदार की बेटी की भूमिका निभाने वाली सचाना नामीदास ने ‘मिथ्या’ के लिए रूपश्री वार्काडी के साथ सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार साझा किया। ‘महाराजा’ के एक्शन संयोजन के लिए अनल अरासु को सम्मान मिला।

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एक अलग रिपोर्ट में ‘मेयाझगन’ के साउंड मिक्सिंग के लिए सुरेन जी. का पुरस्कार भी दर्ज है। साउंड मिक्सिंग तैयार साउंडट्रैक में संवाद, संगीत और ध्वनि प्रभावों का संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। यह श्रेय हर विजेता सूची में नहीं मिलता, इसलिए इसके आधार पर फिल्म के कुल पुरस्कारों की पूरी संख्या नहीं निकालनी चाहिए।

जी. वी. प्रकाश कुमार के करियर में पुरस्कारों की कुल संख्या को लेकर भी सावधानी जरूरी है। एक रिपोर्ट ‘अमरन’ को उनका तीसरा पुरस्कार बताती है और पहले के पुरस्कारों में ‘सूररई पोट्रु’ तथा ‘वाथी’ का नाम लेती है। मौजूदा पार्श्व संगीत पुरस्कार का जिक्र कई रिपोर्टों में है, लेकिन पहले के पुरस्कारों की संख्या की पुष्टि यहां किसी आधिकारिक रिकॉर्ड से नहीं होती।

हुड्डा की पहली फिल्म और मिश्रा का भावनात्मक जुड़ाव

रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिला। इस जीवनीपरक ड्रामा में उन्होंने अभिनय भी किया और पटकथा लेखन में योगदान दिया। फिल्म विनायक दामोदर सावरकर के जीवन को दर्शाती है और इसमें अंकिता लोखंडे तथा अमित सियाल भी हैं।

पुरस्कार की घोषणा के बाद हुड्डा ने निर्माण में कई भूमिकाएं निभाने की चुनौतियों के बारे में कहा:

‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की घोषणा के बाद भी मैं इसे समझने की कोशिश कर रहा हूं। इस फिल्म ने मुझसे अब तक किए गए किसी भी काम से ज्यादा की मांग की।

‘भक्षक’ में भास्कर सिन्हा की भूमिका के लिए संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। पुलकित के निर्देशन में बनी यह फिल्म पत्रकार वैशाली सिंह की कहानी है, जिसका किरदार भूमि पेडनेकर ने निभाया है। बिहार के एक बालिका आश्रय गृह में दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच के दौरान मिश्रा का किरदार उनके साथ काम करने वाले कैमरामैन का है।

मिश्रा के लिए प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के जरिए पुरस्कार की खबर मिलना उनके दिवंगत पिता से जुड़ाव रखता था, जिन्होंने वहां काम किया था। अभिनेता ने कहा:

सबसे खास बात यह है कि मेरे पिता पीआईबी में काम करते थे। अब वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन यह खबर मुझे उसी दफ्तर के जरिए मिली, जहां उन्होंने कभी सेवा दी थी। मेरे लिए वह बहुत बड़ा पल था।

यह सम्मान सिनेमा में मिश्रा के तीन दशक से अधिक लंबे सफर के बाद मिला। समारोह में हुड्डा को गौतम और धर के साथ बैठे हुए देखा गया।

भाषा पुरस्कार, लोकप्रिय फिल्में और तकनीकी विजेता

‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। निर्माता भूषण कुमार और निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने यह सम्मान ग्रहण किया। राजकुमार राव अभिनीत यह फिल्म उद्यमी श्रीकांत बोल्ला की कहानी है। ‘फेमिनिची फातिमा’ और ‘कमिटी कुरोल्लू’ को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ मलयालम फिल्म और सर्वश्रेष्ठ तेलुगु फिल्म चुना गया।

‘कल्कि 2898 एडी’ ने संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार जीता। यह सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म से अलग श्रेणी है। नितिन जिहानी चौधरी को इसके लिए सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिजाइन का पुरस्कार भी मिला। प्रोडक्शन डिजाइन में फिल्म के भौतिक और दृश्यात्मक परिवेश का निर्माण शामिल है, जिसमें वे जगहें भी आती हैं जहां कहानी घटती है।

‘पुष्पा: द रूल पार्ट 2’ को बंदरेड्डी सुकुमार के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा और दीपली नूर तथा शीतल शर्मा को साझा रूप से सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा डिजाइन का पुरस्कार मिला। पटकथा लेखन के अन्य रिपोर्ट किए गए पुरस्कार ‘स्वर्गंधर्व सुधीर फड़के’ के लिए योगेश देशपांडे और ‘लकी भास्कर’ के संवादों के लिए वेंकी अटलुरी को दिए गए।

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‘स्त्री 2’ के ‘आज की रात’ गीत के लिए विजय गांगुली को सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन का पुरस्कार मिला। उनकी बहन और अभिनेत्री रूपाली गांगुली समारोह में पहुंचीं और उनकी उपलब्धि का जश्न मनाया। ‘भूल भुलैया 3’ को मानस चौधरी के लिए सर्वश्रेष्ठ ध्वनि डिजाइन का पुरस्कार मिलने की बात दर्ज है।

संगीत पुरस्कारों के विवरण अलग-अलग हैं। शाश्वत सचदेव को ‘आर्टिकल 370’ के लिए संगीत पुरस्कार दिया गया है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट उनके सम्मान को ‘कल्कि 2898 एडी’ से भी जोड़ती है। वैकोम विजयलक्ष्मी को सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के विजेता के तौर पर नामित किया गया है, लेकिन गीत या फिल्म का नाम नहीं दिया गया। इन जानकारियों के अभाव में संगीत की सभी श्रेणियों का सटीक ब्योरा देना संभव नहीं है।

अनंत नाग को मिला जीवनपर्यंत सम्मान

अनंत नाग को 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला। यह पांच दशक से अधिक लंबे उनके करियर को मान्यता देता है, खास तौर पर कन्नड़ सिनेमा और अन्य भारतीय भाषाओं में उनके योगदान को। अलग-अलग फिल्मों और अभिनय के लिए दिए जाने वाले प्रतिस्पर्धी पुरस्कारों से इतर, यह सम्मान भारतीय सिनेमा में किसी व्यक्ति के जीवनभर के योगदान को मान्यता देता है।

यह पुरस्कार 1969 में शुरू किया गया था और इसकी पहली विजेता देविका रानी थीं। फिल्म पुरस्कारों के साथ इसकी प्रस्तुति से एक स्थापित करियर को उस विशेष रिलीज वर्ष की उपलब्धियों के साथ सम्मानित किया जाता है, जिसके लिए पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

बताए गए नतीजों में फीचर फिल्मों के अलावा भी कई श्रेणियां शामिल हैं। ‘भंगार’ ने सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म, ‘राम-नामी’ ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी - एकता का प्रतीक’ ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार जीता। इसके लिए आनंद एल. राय को विजेता बताया गया।

ये नतीजे उस व्यापक कामकाज को सामने लाते हैं, जिसे सिर्फ चर्चित कलाकारों की तस्वीरें नहीं दिखा पातीं। अभिनय, फिल्म निर्माण, संगीत, संपादन, एक्शन, डिजाइन और डॉक्यूमेंट्री निर्माण, सभी को पुरस्कारों में जगह मिली। हालांकि, श्रेणियों के सटीक नाम और इतिहास से जुड़े अनसुलझे विवरणों की पुष्टि के लिए आधिकारिक पुरस्कार सूची जरूरी है।

मुख्य बातें

  • खबरों के अनुसार, समारोह 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में हुआ और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार प्रदान किए।
  • ‘ब्रह्मयुगम’ और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए ममूटी और कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का साझा पुरस्कार मिला।
  • ‘आर्टिकल 370’ के लिए यामी गौतम ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान भी मिला।
  • ‘रायन’ को सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म चुना गया, जबकि ‘कैप्टन मिलर’ के लिए धनुष को विशेष उल्लेख मिला।
  • ‘अमरन’ को निर्देशन, संपादन और पार्श्व संगीत के लिए पुरस्कार मिले।
  • अनंत नाग को 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला।
  • कुछ पुरस्कार श्रेणियों, पहले के पुरस्कारों की तारीखों और दिल्ली से बाहर समारोहों के इतिहास को लेकर रिपोर्टों में मतभेद हैं।
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