ताइपे का कहना है कि उसके 2.3 करोड़ लोगों को अपना भविष्य तय करना चाहिए
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने फिर दोहराया कि ताइवान और चीन एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं। यह बयान बीजिंग द्वारा राष्ट्रपति लाई चिंग-ते पर 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय दिवस के भाषण में स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और शांति को कमजोर करने का आरोप लगाने के बाद आया। मंत्रालय ने कहा कि ताइवान का भविष्य सामूहिक रूप से उसके 2.3 करोड़ लोगों को तय करना है और चीन को इसमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।
विषय-सूची
- ताइपे का कहना है कि उसके 2.3 करोड़ लोगों को अपना भविष्य तय करना चाहिए
- शांति और स्वतंत्रता पर लाई ने क्या कहा
- यथास्थिति की दो परस्पर विरोधी परिभाषाएं
- रक्षा खर्च विवाद का अहम मुद्दा
- ताइवान के आसपास अभ्यासों का चीन की सेना ने किया बचाव
- राजनीतिक मंशा और युद्धकालीन इतिहास पर आलोचना
- हथियारों के फैसले का इंतजार, वाशिंगटन ने शांति का समर्थन किया
- भाषणों और सैन्य जवाबों का क्रम
- किन फैसलों का अब भी इंतजार
- मुख्य बातें
इस जवाब से ताइवान जलडमरूमध्य में शांति बनाए रखने के अर्थ को लेकर विवाद और गहरा गया। ताइपे स्थित राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर बोलते हुए लाई ने कहा कि मजबूत रक्षा का मकसद युद्ध रोकना और संवाद को बढ़ावा देना है। चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और यही वास्तविक यथास्थिति है।
ताइवान के मंत्रालय ने बीजिंग से जलडमरूमध्य के दोनों ओर की लोकतांत्रिक और सत्तावादी राजनीतिक व्यवस्थाओं के बीच अंतर को स्वीकार करने का आग्रह किया। उसने चीन से तनाव बढ़ाने वाले हमले रोकने और यथास्थिति बदलने के लिए बल प्रयोग छोड़ने को भी कहा।
यह बयानबाजी दोनों नागरिक प्रशासन तक सीमित नहीं रही। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता चेन शी ने ताइवान के आसपास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अभ्यासों का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य अलगाववाद और बाहरी दखल को रोकना है। अमेरिका ने लाई की शांति के प्रति प्रतिबद्धता का स्वागत किया, जबकि एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नियमित भाषण को दबावपूर्ण कार्रवाई का औचित्य बनाने के खिलाफ चेताया।
शांति और स्वतंत्रता पर लाई ने क्या कहा
ताइवान के राष्ट्रपति लाई ने स्वतंत्रता और शांति को ऐसी प्रतिबद्धताओं के रूप में पेश किया जिन पर ताइवान साथ-साथ आगे बढ़ेगा। उनके भाषण में संवाद का निमंत्रण भी था और राजनीतिक अधीनता से इनकार भी।
"ताइवान शांति को संजोता है, लेकिन अपनी स्वतंत्रता नहीं छोड़ेगा। हम संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे," उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि केवल इच्छा से शांति कायम नहीं रह सकती और चीन के बढ़ते सैन्य तथा राजनीतिक दबाव का जिक्र किया। उनके अनुसार, मजबूत रक्षा क्षमताएं ताइवान को संवाद के अवसर बंद करने के बजाय "समानता और गरिमा" के आधार पर बातचीत करने में मदद देंगी।
लाई ने यह भी कहा कि ताइवान के लोगों के अस्तित्व के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने ताइवान की सुरक्षा को इस व्यापक चिंता से जोड़ा कि क्या अंतरराष्ट्रीय नियम बल प्रयोग का सामना कर सकेंगे और क्या शक्तिशाली देश लोगों को अपना भविष्य तय करने के अधिकार से वंचित कर सकते हैं।
उनके शब्द उस आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कथन से अलग थे कि ताइवान जलडमरूमध्य का कोई भी पक्ष दूसरे के अधीन नहीं है। इस भाषण में उन्होंने यह पूरा वाक्य दोहराया नहीं, हालांकि कहा कि ताइवान अधीनता स्वीकार नहीं करेगा। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों के एक-दूसरे के अधीन न होने की बात स्पष्ट रूप से कही।
यथास्थिति की दो परस्पर विरोधी परिभाषाएं
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान और चीन के बीच अधीनता का अभाव एक वस्तुनिष्ठ वास्तविकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता देता है और जो ताइवानी लोगों के बीच आम सहमति है। यह ताइवान का आधिकारिक रुख था, न कि इस बात का प्रमाण कि हर सरकार ताइवान को संप्रभु राष्ट्र मानती है।
बीजिंग के ताइवान मामलों के कार्यालय ने यथास्थिति की अलग परिभाषा पेश की। उसका कहना था कि केवल एक चीन है, ताइवान उसका हिस्सा है और जलडमरूमध्य में यही वास्तविक यथास्थिति है। उसने लाई पर तथ्यों की अनदेखी करने, जनता को गुमराह करने और चीन से सैन्य खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया।
यह मतभेद इस बात से भी जुड़ा है कि ताइवान का भविष्य तय करने का अधिकार किसके पास है। ताइपे यह निर्णय ताइवान के 2.3 करोड़ लोगों को देता है। बीजिंग का कहना है कि यह फैसला ताइवान के लोगों समेत सभी चीनी लोगों को मिलकर करना चाहिए। ये राजनीतिक अधिकार को लेकर परस्पर विरोधी दावे हैं, सैन्य गतिविधियों के केवल अलग-अलग वर्णन नहीं।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रीय संप्रभुता और सतत विकास की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ काम जारी रखने का संकल्प जताया। वहीं, बीजिंग ताइवान को मिलने वाले बाहरी समर्थन को उस मामले में दखल मानता है जिसे वह घरेलू विषय कहता है। यह मतभेद बताता है कि एक ही कूटनीतिक या रक्षा पहल को एक पक्ष सुरक्षा और दूसरा खतरे के रूप में क्यों पेश करता है।
रक्षा खर्च विवाद का अहम मुद्दा
लाई ने सैन्य सुधार जारी रखने, असममित युद्ध क्षमताएं मजबूत करने और रक्षा खर्च बढ़ाने का संकल्प जताया। असममित युद्ध का अर्थ है ऐसे साधनों का इस्तेमाल करना जो अधिक शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करने के लिए उपयुक्त हों, न कि हथियार-दर-हथियार उसकी बराबरी करने की कोशिश। ताइवान के सामने चीन की कहीं बड़ी सेना है, जिसके पास आधुनिक लड़ाकू विमान, विमानवाहक पोत और व्यापक मिसाइल बल हैं।
बीजिंग की आलोचना ताइवान की समग्र सामाजिक रक्षा लचीलापन समिति, सैन्य अभ्यासों, नागरिक और सैन्य संगठनों के संयुक्त अभ्यासों, युद्धकालीन प्रतिक्रिया केंद्रों के रूप में चिह्नित नागरिक सुविधाओं और विदेशों से हथियार खरीदने पर भी केंद्रित थी। इस तरह विवाद सशस्त्र बलों से आगे बढ़कर नागरिक संस्थानों से जुड़ी तैयारियों तक पहुंचता है।
नानजिंग विश्वविद्यालय में ताइवान अध्ययन के विशेषज्ञ लियू श्यांगपिंग ने तर्क दिया कि लाई की लचीलेपन की नीति जनकल्याण की कीमत पर सैन्य खर्च बढ़ाने का औचित्य बनाती है। उन्होंने कहा कि यह खर्च सुरक्षा देने के बजाय लोगों को नुकसान पहुंचाता है।
"लोगों की मेहनत की कमाई उनकी आजीविका की कीमत पर सैन्य विस्तार पर लुटाने का नतीजा आखिरकार उलटा पड़ेगा," लियू ने कहा।
लियू ने लाई पर अमेरिका और पश्चिमी देशों को खुश करने की कोशिश का आरोप भी लगाया। उनकी टिप्पणियां लाई के इरादों की एक व्याख्या थीं; उनसे रक्षा उपायों के बजटीय असर की पुष्टि नहीं होती। इस आलोचना के साथ खर्च का कोई विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया।
ताइवान के आसपास अभ्यासों का चीन की सेना ने किया बचाव
चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता चेन शी ने रविवार को लाई के भाषण की आलोचना की। उन्होंने राष्ट्रपति पर सैन्य विस्तार और बाहरी समर्थन के जरिए ताइवान की स्वतंत्रता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा कि सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी स्थिरता की कीमत पर अपने दलगत हित साध रही है।
चेन ने कहा कि ताइवान के आसपास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वतंत्रता की गतिविधियों तथा बाहरी दखल को रोकना और ताइवान के निवासियों की सुरक्षा करना है। उनकी टिप्पणियों में चीनी सैन्य अभियानों को अलगाववाद की प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया गया, जो उन गतिविधियों को दबाव बताने वाले ताइपे के रुख के ठीक विपरीत है।
ताइवान के लोगों से बीजिंग के रुख का समर्थन करने का आग्रह करते हुए चेन ने कहा:
"हमें उम्मीद है कि ताइवान के हमवतन अलगाववादी ताकतों से मुकाबला करने, बाहरी दखल का विरोध करने, शांति की रक्षा करने और राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लाभ साझा करने के लिए मुख्यभूमि के साथ जुड़ेंगे," चेन ने आगे कहा।
इस जवाब में सैन्य अभ्यासों का उद्देश्य बताया गया, लेकिन किसी नए अभियान, तैनाती कार्यक्रम या अभ्यास क्षेत्र की घोषणा नहीं की गई। चीन ने ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। इसलिए सैन्य इरादों को लेकर यह मतभेद बयानों के आदान-प्रदान से आगे व्यावहारिक महत्व रखता है।
राजनीतिक मंशा और युद्धकालीन इतिहास पर आलोचना
चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के ताइवान अध्ययन संस्थान के शोधकर्ता चेन गुईछिंग ने लाई पर शांति और संवाद का समर्थन जताते हुए टकराव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि भाषण में ताइवान की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से बचा गया और यह डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के चुनावी हितों के लिए था।
चेन ने इस आरोप को आगामी स्थानीय चुनावों से जोड़ा, हालांकि उनकी टिप्पणी में चुनाव की कोई तारीख नहीं बताई गई।
लाई के भाषण में ताइवान के सामने मौजूद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को नजरअंदाज किया गया," चेन ने कहा। "यह टिप्पणी जाहिर तौर पर आगामी स्थानीय चुनावों में डीपीपी के हित साधने के लिए थी।
एक अलग आलोचना द्वितीय विश्व युद्ध के बारे में लाई की बातों को लेकर थी। चीन की रेनमिन यूनिवर्सिटी के जलडमरूमध्य-पार संबंध अनुसंधान केंद्र के निदेशक वांग यिंगजिन ने लाई के "युद्ध की समाप्ति" वाले वाक्यांश पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें जापान पर विजय तथा ताइवान की चीन को वापसी का उल्लेख करना चाहिए था।
लाई ने कहा कि वह "द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को विकृत करने की कभी अनुमति नहीं देंगे।" वांग ने उन पर ठीक ऐसा ही करने का आरोप लगाया। इस विवाद ने भाषण की ऐतिहासिक शब्दावली को ताइवान की स्थिति पर परस्पर विरोधी दावों से जोड़ दिया, बजाय इसके कि उसे केवल स्मरण से जुड़ा मामला माना जाए।
रिपोर्टिंग में तारीख को लेकर असंगति है: वांग की आलोचना ताइवान की चीन को वापसी की 80वीं वर्षगांठ का जिक्र करती है, जो 2025 की ओर संकेत करती है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट चेन शी के जवाब की तारीख स्पष्ट रूप से 11 अक्टूबर 2026 बताती है। इन संदर्भों को एक ही पुष्ट समयक्रम नहीं मानना चाहिए।
हथियारों के फैसले का इंतजार, वाशिंगटन ने शांति का समर्थन किया
अमेरिका ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने की लाई की प्रतिबद्धता का स्वागत किया। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी, जिनका नाम नहीं बताया गया, ने भाषण को आक्रामक प्रतिक्रिया का आधार बनाने के खिलाफ चेताया।
"एक नियमित भाषण आक्रामक या दबावपूर्ण कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है"।
औपचारिक कूटनीतिक संबंध न होने के बावजूद अमेरिका ताइवान का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय समर्थक है। उसकी भूमिका में राजनीतिक समर्थन और हथियारों की बिक्री, दोनों शामिल हैं। बीजिंग इन दोनों को बाहरी दखल मानकर आपत्ति जताता है।
ताइवान के लिए 14 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित अमेरिकी हथियार पैकेज को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार बताया गया। इससे पहले 11 अरब अमेरिकी डॉलर के पैकेज की घोषणा रिकॉर्ड सौदे के रूप में की गई थी। प्रस्तावित पैकेज पहले वाले से 3 अरब डॉलर बड़ा है, यानी करीब 27% अधिक, लेकिन इसकी बिक्री को मंजूरी नहीं मिली है।
लाई ने प्रतिद्वंद्विता को संवाद के जरिए संभालने और सैन्य टकराव का जोखिम घटाने के लिए वाशिंगटन और बीजिंग के प्रयासों का भी स्वागत किया। ताइवान के एक अधिकारी ने कहा कि उनकी ये टिप्पणियां पिछले महीने वाशिंगटन में हुए अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन के संदर्भ में थीं। ऐसी बातचीत के लिए लाई का समर्थन, क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के वास्ते हिंद-प्रशांत के लोकतांत्रिक देशों से साथ काम करने की उनकी अपील के साथ था।
भाषणों और सैन्य जवाबों का क्रम
ताजा विवाद राष्ट्रीय दिवस के उन पिछले भाषणों के बाद सामने आया जिन पर चीन की सैन्य प्रतिक्रिया अलग-अलग रही। घटनाओं का बताया गया क्रम अहम है, क्योंकि बीजिंग की किसी भाषण की निंदा अपने आप यह साबित नहीं करती कि सैन्य अभ्यासों का नया दौर शुरू हो गया है।
- 2024 में राष्ट्रपति के रूप में लाई के पहले राष्ट्रीय दिवस भाषण के कुछ ही समय बाद चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास किए।
- 2025 के राष्ट्रीय दिवस संबोधन के आसपास चीन ने उसी तरह के अभ्यास नहीं किए।
- दिसंबर 2025 के आखिर में 11 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी हथियार सौदे की खबर के बाद चीन ने ताइवान के पास अभ्यास किए।
- शनिवार, 10 अक्टूबर को लाई ने ताइपे स्थित राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर ताजा विवाद के केंद्र में रहा भाषण दिया।
- 11 अक्टूबर 2026 की तारीख वाली एक रिपोर्ट में चेन शी के रक्षा मंत्रालय के जवाब का दिन रविवार बताया गया है।
शनिवार और रविवार के ये संदर्भ 10 और 11 अक्टूबर 2026 से मेल खाते हैं। हालांकि, 80वीं वर्षगांठ का अलग उल्लेख पिछले वर्ष की ओर संकेत करता है। इसलिए मुख्य घटनाक्रम में इस असंगति को बरकरार रखा गया है, न कि हर उद्धृत आलोचना को निर्विवाद तारीख से जोड़ दिया गया है।
इस आदान-प्रदान से जुड़ी रिपोर्टिंग में दिसंबर 2025 के आखिर के अभ्यासों को सबसे हालिया बताया गया है। रक्षा मंत्रालय की ताजा टिप्पणियों के साथ किसी नए अभ्यास की घोषणा या उसके बाद की परिचालन जानकारी नहीं दी गई।
किन फैसलों का अब भी इंतजार
बयानों के बाद कई ठोस मामले अब भी अनसुलझे हैं। प्रस्तावित 14 अरब अमेरिकी डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी का इंतजार है और फैसले की कोई समयसीमा नहीं बताई गई। बीजिंग की ताजा आलोचना में नई सैन्य कार्रवाई का कोई कार्यक्रम नहीं है, जबकि ताइपे की संवाद की अपील के साथ किसी बैठक या वार्ता प्रक्रिया की घोषणा नहीं हुई।
मुख्य मतभेद ताइवान की राजनीतिक पसंद के दायरे को लेकर है। ताइपे कहता है कि उसके लोगों को ही अपना भविष्य तय करना चाहिए और मजबूत रक्षा इस अधिकार की रक्षा करती है। बीजिंग कहता है कि ताइवान चीन का हिस्सा है और एकीकरण का विरोध तथा विदेशी समर्थन शांति के लिए खतरा हैं।
दोनों सरकारें स्थिरता की बात करती हैं, लेकिन उनके घोषित उद्देश्य अलग हैं। ताइवान का मंत्रालय संप्रभुता बनाए रखना और जबरन बदलाव का विरोध करना चाहता है। बीजिंग ताइवान पर अपना दावा जताता है और अलगाववाद को रोकने के उपाय के रूप में सैन्य दबाव का बचाव करता है। अमेरिकी प्रतिक्रिया शांतिपूर्ण आचरण का समर्थन करती है, लेकिन इस बुनियादी टकराव का समाधान नहीं करती।
मुख्य बातें
- ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ताइवान और चीन एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं और ताइवान के 2.3 करोड़ लोगों को अपना भविष्य तय करना चाहिए।
- लाई ने कहा कि ताइवान अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करेगा और संवाद तथा बातचीत के लिए खुला रहेगा।
- बीजिंग ने भाषण को खारिज करते हुए कहा कि ताइवान का एक चीन का हिस्सा होना ही वास्तविक यथास्थिति है।
- चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता चेन शी ने अलगाववाद और बाहरी दखल को रोकने के उपाय के रूप में सैन्य अभ्यासों का बचाव किया।
- अमेरिका ने लाई की शांति के प्रति प्रतिबद्धता का स्वागत किया; 14 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित हथियार पैकेज को अब तक मंजूरी नहीं मिली है।
- रिपोर्टों में तारीख की असंगति है: एक जवाब अक्टूबर 2026 का है, जबकि वर्षगांठ का उल्लेख 2025 की ओर संकेत करता है।
- नए सैन्य अभ्यासों की समय-सारणी, संवाद बैठक या हथियार सौदे की मंजूरी की समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई।






