टोक्यो में विदाई, एक नई महत्वाकांक्षा आकार लेती हुई
केई निशिकोरी ने 11 अक्टूबर, 2026 को टोक्यो के एरियाके कोलिज़ियम में विदाई समारोहों का समापन एक ऐसे लक्ष्य के साथ किया, जो उनकी अपनी उपलब्धियों से आगे जाता है: अधिक जापानी और एशियाई खिलाड़ियों को दुनिया की शीर्ष 50 और शीर्ष 30 रैंकिंग तक पहुंचने में मदद करना। दुनिया में चौथे नंबर तक पहुंचे 36 वर्षीय पूर्व खिलाड़ी ने लगभग 9,000 दर्शकों की मौजूदगी वाले यूनिक्लो समारोह के बाद यह बात कही। इस कार्यक्रम में रोजर फेडरर भी उनके साथ कोर्ट पर उतरे।
विषय-सूची
- टोक्यो में विदाई, एक नई महत्वाकांक्षा आकार लेती हुई
- करियर के आंकड़े क्या बताते हैं
- यूएस ओपन का वह सफर जिसने उनकी उम्मीदें बदल दीं
- फेडरर ने भी लौटाई तारीफ
- एक ओलंपिक पदक, जिसका अलग मायने था
- आखिरी सप्ताह और वे लोग जो साथ रहे
- एक ऐसा समारोह जिसने अलग-अलग खिलाड़ियों को साथ लाया
- संन्यास के बाद दर्द का मतलब बदल जाता है
- विदेश में अवसर उनकी योजनाओं का अहम हिस्सा क्यों हैं
- क्या तय है और क्या अभी विचार है
- प्रमुख बिंदु
निशिकोरी का आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला 1 अक्टूबर को किनोशिता ग्रुप जापान ओपन टेनिस चैंपियनशिप के शुरुआती दौर में हुआ था। उनकी संन्यास की घोषणा से पेशेवर खिलाड़ी के रूप में करीब 19 साल का करियर समाप्त हुआ। इस दौरान उन्होंने 12 एटीपी खिताब जीते, टूर स्तर पर 452 मुकाबलों में जीत दर्ज की और ग्रैंड स्लैम एकल फाइनल में पहुंचने वाले पहले एशियाई पुरुष खिलाड़ी बने।
संन्यास की घोषणा वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में निशिकोरी ने बताया कि अपना इतना बड़ा हिस्सा एक ही लक्ष्य के लिए समर्पित करने से उन्हें संतुष्टि मिली। जापानी से अनूदित उनकी टिप्पणियों में उन उपलब्धियों के पीछे किए गए त्याग का भी जिक्र था।
मैं अपनी जवानी का यह बेहद लंबा दौर पूरी तरह टेनिस को दे सका। हर कोई अपनी जिंदगी एक ही चीज़ के लिए समर्पित नहीं कर सकता। मुझे लगता है कि उसमें डूबकर बिताया समय सचमुच बहुत सुखद था।
उनकी अगली भूमिका अभी तय नहीं है। उन्होंने एक अकादमी, टेनिस क्लब और जूनियर खिलाड़ियों को विदेश में प्रशिक्षण के लिए आर्थिक सहायता देने की बात की, लेकिन स्पष्ट किया कि ये अभी विचार हैं, घोषित परियोजनाएं नहीं। फिलहाल, संन्यास से उन्हें प्रतियोगिता के दबाव से राहत मिली है, लेकिन गंभीर मुकाबलों को पीछे छोड़ने का दुख भी है।
करियर के आंकड़े क्या बताते हैं
एटीपी की करियर को श्रद्धांजलि में 12 टूर खिताब और 15 अन्य फाइनल का रिकॉर्ड दर्ज है। इनमें मास्टर्स 1000 टूर्नामेंटों के चार फाइनल शामिल हैं। पुरुषों के टूर्नामेंटों की श्रेणी में ये आयोजन चार ग्रैंड स्लैम से नीचे आते हैं। निशिकोरी ने कोई मास्टर्स 1000 खिताब नहीं जीता, लेकिन बार-बार इन टूर्नामेंटों के फाइनल में पहुंचना दिखाता है कि वह कितनी बार खेल के शीर्ष खिलाड़ियों को चुनौती देने के करीब पहुंचे।
उन्होंने एटीपी फाइनल्स के लिए भी चार बार क्वालिफाई किया, जो सीजन के आखिर में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला टूर्नामेंट है, और दो बार सेमीफाइनल तक पहुंचे। उन्होंने दो सीजन शीर्ष पांच में और दो अन्य सीजन शीर्ष 10 में रहते हुए पूरे किए।
आंकड़ों में उनकी सबसे खास उपलब्धि करीबी मुकाबले जीतने की क्षमता हो सकती है। एटीपी के हवाले से इन्फोसिस एटीपी विन/लॉस इंडेक्स के अनुसार, निशिकोरी ने निर्णायक सेटों में खेले 218 में से 158 सेट जीते, यानी 72.5 प्रतिशत सफलता दर। टूर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड में यह तीसरा स्थान है। उनसे आगे ब्योर्न बोर्ग 73.4 प्रतिशत और जॉन मैकेनरो 72.8 प्रतिशत के साथ हैं।
जब दोनों खिलाड़ियों ने समान संख्या में सेट जीते हों, तो मुकाबला तय करने के लिए खेला जाने वाला आखिरी सेट निर्णायक सेट कहलाता है। पांचवें सेट तक पहुंचे मुकाबलों में निशिकोरी का रिकॉर्ड और बेहतर था: 29 जीत और आठ हार, यानी 78.4 प्रतिशत। ये आंकड़े उनकी विदाई पर सराही गई प्रतिस्पर्धी जुझारूपन की ठोस बानगी हैं।
यूएस ओपन का वह सफर जिसने उनकी उम्मीदें बदल दीं
निशिकोरी की निर्णायक सफलता 2014 यूएस ओपन में मिली। चौथे दौर में उन्होंने मिलोस राओनिच को पांच सेटों में हराया, फिर क्वार्टर फाइनल में स्टैन वावरिंका को भी पांच सेटों में मात दी। इन दोनों मुकाबलों में वह आठ घंटे से अधिक समय तक कोर्ट पर रहे, जिसके बाद उनका सामना दुनिया के नंबर एक नोवाक जोकोविच से हुआ।
उन्होंने जोकोविच को चार सेटों में हराकर ग्रैंड स्लैम एकल फाइनल में पहुंचने वाले पहले एशियाई पुरुष खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। खिताबी मुकाबले में मारिन चिलिच ने उन्हें हरा दिया। इस तरह निशिकोरी उस बड़े खिताब से वंचित रह गए, जिसे जीतने का सपना उन्होंने बचपन से देखा था।
विदाई समारोह में निशिकोरी ने कहा कि यह टूर्नामेंट उनके टेनिस जीवन की सबसे यादगार प्रतियोगिता बनी हुई है। उनकी यादों में फाइनल की हार से ज्यादा इस एहसास को जगह मिली कि वह उस मुकाम तक पहुंच सकते हैं।
इससे मुझे जबरदस्त आत्मविश्वास मिला। मैं फाइनल हार गया, लेकिन इससे मुझे और प्रेरणा मिली। यह जानना कि मैं ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंचने में सक्षम था, आगे की उपलब्धियों का आधार बना।
यह सफलता उस सीजन का हिस्सा थी, जिसमें उन्होंने 54 मैच जीते, 14 हारे और चार खिताब अपने नाम किए। ये चार ट्रॉफियां उनके कुल 12 एटीपी खिताबों का एक तिहाई थीं। वह उसी साल एटीपी फाइनल्स के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले एशियाई पुरुष खिलाड़ी भी बने। इसके बाद मार्च 2015 में उन्होंने अपनी सर्वोच्च रैंकिंग, चौथा स्थान, हासिल किया।
फेडरर ने भी लौटाई तारीफ
फेडरर की मौजूदगी ने टोक्यो की विदाई को निशिकोरी के शुरुआती विकास से निजी तौर पर जोड़ दिया। निशिकोरी ने याद किया कि 16 साल की उम्र में उन्होंने स्विस खिलाड़ी के साथ अभ्यास किया था और उनके शॉट्स की गुणवत्ता के साथ-साथ तैयारी के प्रति उनकी गंभीरता से भी सीखा था।
दुनिया के पूर्व नंबर एक और 20 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीत चुके फेडरर ने कहा कि युवा निशिकोरी उनके अभ्यास साझेदारों में अलग नजर आते थे। विदाई समारोह में उन्होंने जापानी खिलाड़ी के बैकहैंड की तारीफ की और बताया कि उनके खिलाफ खेलना कितना मुश्किल था।
जब भी मैं तुम्हारे खिलाफ खेला, वह बड़ी चुनौती थी। इस खेल में सफल होने के लिए जरूरी सभी खूबियां तुममें थीं; तुम्हारा टेनिस लगातार आक्रामक होता गया, और मेरा मानना है कि तुम्हारा बैकहैंड इतिहास के सर्वश्रेष्ठ बैकहैंडों में से एक रहा है।
फेडरर ने उनके बीच हुए 11 प्रतिस्पर्धी मुकाबलों में से आठ जीते, जबकि निशिकोरी को तीन जीत मिलीं। एटीपी के रिकॉर्ड के अनुसार, फेडरर, राफेल नडाल और जोकोविच के खिलाफ निशिकोरी की कुल सात जीत थीं: फेडरर के खिलाफ तीन और बाकी दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ दो-दो।
निशिकोरी ने तारीफ का जवाब मजाक में देते हुए कहा कि उसमें से करीब आधी बात चापलूसी थी। उस दौर में खेलने का उनका जिक्र हालांकि ज्यादा गंभीर था: फेडरर, जोकोविच, नडाल और एंडी मरे इतने मजबूत थे कि उनका हिस्सा बनने की कोशिश उनके पीछे आ रहे खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा बन गई थी।
एक ओलंपिक पदक, जिसका अलग मायने था
नडाल के खिलाफ निशिकोरी की दो जीतों में से एक ने 2016 रियो डी जेनेरियो ओलंपिक में कांस्य पदक दिलाया। एटीपी के मुताबिक, यह 96 साल में जापान का पहला ओलंपिक टेनिस पदक था। इसलिए इस उपलब्धि का महत्व किसी बड़े प्रतिद्वंद्वी पर एक और जीत से कहीं बढ़कर था।
विदाई समारोह में निशिकोरी ने ओलंपिक की तुलना सामान्य पेशेवर सर्किट से की, जहां खिलाड़ी पुरस्कार राशि और रैंकिंग अंकों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए खेलना, जिन्हें उनके प्रदर्शन से खुशी मिल सकती है, उन्हें एक अलग तरह की ताकत देता था।
कांस्य पदक के मुकाबले में जीत के पीछे की प्रेरणा बताते हुए निशिकोरी ने कहा:
मेरे मामले में, जब मैंने यह सोचकर खेला कि इससे कुछ लोगों को भी खुशी मिल सकती है या मैं किसी और के लिए खेल रहा हूं, तो मैं अविश्वसनीय रूप से मजबूत हो गया। इससे मुझे एक अहम मौके पर नडाल को हराने और पदक जीतने में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि यह ऐसी जीत थी, जिसके लिए वह खुद को श्रेय दे सकते थे। पांच साल बाद, 2021 टोक्यो ओलंपिक में, अभियान के पहले मैच में पांचवीं वरीयता प्राप्त आंद्रे रुबलेव को हराने के बाद वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे।
ओलंपिक की यादें उनकी अगली महत्वाकांक्षा से भी जुड़ती हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जापान में टेनिस और खेलों का महत्व बढ़ाने की इच्छा जताई। यह उस सार्वजनिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने की कोशिश है, जिसे उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए महसूस किया था।
आखिरी सप्ताह और वे लोग जो साथ रहे
निशिकोरी का संन्यास किसी एक विदाई के बजाय कई अलग-अलग अवसरों के जरिए सामने आया। उनका आखिरी मैच, जापान ओपन का समारोह और यूनिक्लो का जश्न उन्हें अपने टेनिस जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर बात करने का मौका देते रहे।
- अप्रैल 2026: निशिकोरी ने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि टेनिस के प्रति उनका प्यार और बेहतर होने का भरोसा उन्हें बार-बार कोर्ट पर लौटाता रहा।
- 1 अक्टूबर: टोक्यो में जापान ओपन के पहले दौर में उनकी हार के साथ उनका आखिरी आधिकारिक मैच समाप्त हुआ।
- 6 अक्टूबर: जापान ओपन के आयोजन स्थल पर उन्होंने संन्यास भाषण दिया। इसमें जूनियर खिलाड़ियों के सहायक मासाआकी मोरिता और पूर्व कोच माइकल चांग भी मौजूद थे।
- 11 अक्टूबर: एरियाके कोलिज़ियम में यूनिक्लो के विदाई समारोह में करीब 9,000 दर्शक शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने संन्यास की घोषणा वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
6 अक्टूबर के समारोह में निशिकोरी ने अपने माता-पिता, बहन, स्टाफ और समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने पांच साल की उम्र में टेनिस शुरू करने की बात याद की और अपनी बहन को पहला प्रतिद्वंद्वी बताया। उन्होंने अपने पिता की प्रतिबद्धता और मां के सहयोग का भी जिक्र किया।
अमेरिका जाने के समय उनकी उम्र को लेकर विवरण अलग-अलग हैं। निशिकोरी ने समारोह में अपने भाषण में कहा कि वह मोरिता के समर्थन से 13 साल की उम्र में वहां गए थे। एटीपी की श्रद्धांजलि में लिखा है कि वह 14 साल की उम्र में फ्लोरिडा की आईएमजी अकादमी पहुंचे और उन्हें अंग्रेजी नहीं आती थी। दोनों विवरण इस बात पर सहमत हैं कि विदेश में प्रशिक्षण उनके विकास का अहम पड़ाव था।
एक ऐसा समारोह जिसने अलग-अलग खिलाड़ियों को साथ लाया
केई निशिकोरी के साथ यूनिक्लो लाइफवियर डे टोक्यो 2026 का कार्यक्रम करीब चार घंटे चला। लगभग 9,000 दर्शकों को सार्वजनिक लॉटरी के जरिए चुना गया था। निशिकोरी के लंबे समय से प्रायोजक और उस ब्रांड ने इस समारोह का आयोजन किया, जिसके वह वैश्विक एंबेसडर हैं।
फेडरर और निशिकोरी ने प्रदर्शनी मुकाबले में जापान के पूर्व खिलाड़ियों गो सोएदा और सातोशी इवाबुची की जोड़ी का सामना किया। एक अन्य मैच में निशिकोरी ने व्हीलचेयर टेनिस चैंपियन शिंगो कुनिएदा के साथ मिलकर फेडरर और गॉर्डन रीड के खिलाफ खेला। आर्थर रिंडरकनेश ने भी दिन की टेनिस गतिविधियों में हिस्सा लिया।
अलग-अलग जोड़ियों के साथ हुए मुकाबलों ने विदाई समारोह को भाषणों की श्रृंखला से बढ़कर बना दिया। निशिकोरी किशोरावस्था में अपने आदर्श रहे खिलाड़ी के साथ खेल सके और जापानी टेनिस तथा व्हीलचेयर टेनिस की हस्तियों के साथ भी कोर्ट साझा किया।
दर्शकों को संबोधित करते हुए निशिकोरी ने उनके समर्थन के साथ करियर खत्म कर पाने के लिए आभार जताया। उनकी सार्वजनिक विदाई में संतोष झलकता था, हालांकि इससे पहले के समारोह में उन्होंने उन नतीजों को लेकर अफसोस भी जताया था, जिन्हें वह हासिल करना चाहते थे।
इन भावनाओं में कोई विरोधाभास नहीं है। वह अपनी मेहनत से संतुष्ट हो सकते थे और साथ ही ग्रैंड स्लैम खिताब, ऊंची रैंकिंग या खेलने के लिए अधिक समय की इच्छा भी रख सकते थे। अप्रैल में संन्यास की घोषणा करते हुए उन्होंने पहले ही कहा था कि वह खेलना जारी रखना चाहते थे, लेकिन गर्व से कह सकते थे कि उन्होंने अपना सब कुछ दिया।
संन्यास के बाद दर्द का मतलब बदल जाता है
प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बदलाव की अधिक निजी झलक मिली। निशिकोरी ने कहा कि जापान ओपन के बाद भी उन्हें दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन अब उन्हें हर तकलीफ को अगले दिन के मैच की जरूरतों के हिसाब से परखना नहीं पड़ता।
ऐसे खिलाड़ी के लिए, जिसके बाद के करियर में चोटों के कारण बार-बार खेलना रुका, यह बड़ा बदलाव था। उन्होंने लगातार बनी रहने वाली इस चिंता से मुक्ति मिलने की बात कही; यह दावा नहीं किया कि संन्यास से उनकी शारीरिक समस्याएं खत्म हो गई हैं।
निशिकोरी ने यह भी बताया कि खेलते समय डोपिंग जांच की चिंता का असर इस बात पर पड़ता था कि वह दवा कैसे लेते थे। उन्होंने कहा कि सर्दी-जुकाम होने पर भी आम तौर पर अस्पताल जाते और उपयुक्त दवा लिखवाते थे। अब दवा की दुकान से दवा खरीद पाना रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाता है। यह उनकी अपनी सावधानियों का विवरण था, यह दावा नहीं कि फार्मेसी की हर दवा खिलाड़ियों के लिए प्रतिबंधित है।
कुछ दूसरी आजादियां छोटी और सुखद थीं: दोपहर के भोजन में दो मिठाइयां मंगाना और जापान में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की उम्मीद रखना। फिर भी उन्होंने कहा कि गंभीर प्रतिस्पर्धा छोड़ने का एहसास हर दिन के साथ और ठोस होता जा रहा था।
एटीपी के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी प्रतिस्पर्धी भावना कितने समय तक बनी रही। 2025 में 35 साल की उम्र में वह हांगकांग फाइनल तक पहुंचे। ब्रिस्बेन में अपने पिछले एटीपी खिताब के छह साल बाद उन्होंने इस सफर में तीसरी वरीयता प्राप्त करेन खाचानोव को भी हराया।
विदेश में अवसर उनकी योजनाओं का अहम हिस्सा क्यों हैं
जूनियर खिलाड़ियों को समर्थन देने के निशिकोरी के विचार उनके जापान छोड़ने के अपने अनुभव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि पेशेवर टेनिस के मुख्य केंद्र यूरोप और अमेरिका में हैं और युवा खिलाड़ियों को वहां के प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलना चाहिए, ताकि वे ऊंचे स्तर पर जरूरी मानसिक मजबूती विकसित कर सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि एशिया में ही रहने से आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है। उनके आकलन में, एशिया के कुछ टूर्नामेंटों में प्रतिस्पर्धा का स्तर यूरोप या अमेरिका में समान पुरस्कार राशि वाले आयोजनों से कमजोर होता है। यह खिलाड़ी विकास की चुनौती को लेकर उनका नजरिया था, एटीपी की ओर से प्रकाशित टूर्नामेंट रैंकिंग नहीं।
व्यावहारिक समस्या खर्च है। निशिकोरी ने माना कि विदेश में प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा महंगी और चुनौतीपूर्ण है और हर परिवार उनके अपनाए रास्ते पर नहीं चल सकता। उनकी प्रस्तावित अकादमी, क्लब, फाउंडेशन या फंड इस कमी को कुछ हद तक दूर करने की कोशिश करेगा।
उनका लक्ष्य किसी एक उत्तराधिकारी को तैयार करने से कहीं व्यापक है। वह कई खिलाड़ियों को शीर्ष 50 या शीर्ष 30 तक पहुंचने में मदद करना चाहते हैं। यह फर्क अहम है: उनका मकसद एक असाधारण करियर पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों का बड़ा समूह तैयार करना है।
निशिकोरी ने चोट से उबरने के सबक आगे पहुंचाने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में लौटने के लिए जरूरी शांत, दोहराव भरा अभ्यास उन्हें आगे बढ़ने में मददगार रहा और वह इस अनुभव को युवा पीढ़ी के साथ साझा करना चाहते हैं।
क्या तय है और क्या अभी विचार है
निशिकोरी ने किसी अकादमी, वित्तीय सहायता कार्यक्रम या फाउंडेशन की शुरुआत की घोषणा नहीं की है। उन्होंने जूनियर खिलाड़ियों की मदद के लिए कोई शुरुआत की तारीख, स्थान, बजट या चयन प्रक्रिया नहीं बताई। उन्होंने कहा कि मदद का सबसे असरदार तरीका तय करने के लिए वह अलग-अलग लोगों से सलाह लेना चाहते हैं।
यह पूछे जाने पर कि वह किससे बात करना चाहेंगे, उन्होंने मजाक में प्रधानमंत्री साने ताकाइची का नाम लिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर हंसी गूंजी, लेकिन यह किसी बैठक, सरकारी भागीदारी या सार्वजनिक धन की घोषणा नहीं थी।
जापान की उम्मीदों का भार उठाने की बात करते हुए उन्होंने नाओमी ओसाका का भी जिक्र किया और नए खिलाड़ियों में रेई सकामोतो को ऐसे खिलाड़ी के रूप में बताया, जिनकी प्रगति में वह मदद करना चाहेंगे। एटीपी की श्रद्धांजलि में सकामोतो का यह बयान शामिल है कि वह निशिकोरी को खेलते देखकर बड़े हुए। यह दिखाता है कि 2014 की सफलता अगली पीढ़ी तक पहुंची।
जापान के युवा खिलाड़ी सकामोतो, जिन्होंने बाद में यूएस ओपन क्वालिफाइंग में निशिकोरी को हराया, ने एटीपी से कहा:
उनकी वजह से [जापान के] बहुत से लोग टेनिस को फॉलो करते हैं। वह सुपरस्टार हैं।
निशिकोरी की फिलहाल की प्राथमिकता आराम करना और फिर यह जानना है कि वह टेनिस से जुड़े कैसे रह सकते हैं। उनके संन्यास से पेशेवर खिलाड़ी के रूप में खिताबों की दौड़ खत्म हो गई है। उनका अगला योगदान किस रूप में होगा, यह अभी तय नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं: जापानी और एशियाई टेनिस को मजबूत करना, विदेश में प्रतिस्पर्धा के अवसर देना और अधिक खिलाड़ियों को शीर्ष रैंकिंग के करीब पहुंचाना।
प्रमुख बिंदु
- 36 वर्षीय निशिकोरी ने 1 अक्टूबर, 2026 को जापान ओपन में अपना आखिरी आधिकारिक मैच खेला।
- 11 अक्टूबर को एरियाके कोलिज़ियम में उनकी विदाई में करीब 9,000 प्रशंसक शामिल हुए। प्रतिभागियों में फेडरर भी थे।
- उनके करियर में 12 एटीपी खिताब, टूर स्तर पर 452 जीत और सर्वोच्च चौथी रैंकिंग शामिल है।
- वह 2014 यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचे और 2016 में रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता।
- एटीपी के रिकॉर्ड में निर्णायक सेटों में उनकी सफलता दर 72.5 प्रतिशत है, जो ऐतिहासिक रैंकिंग में तीसरा स्थान है।
- वह अधिक जापानी और एशियाई खिलाड़ियों को शीर्ष 50 और शीर्ष 30 तक पहुंचने में मदद करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने किसी कार्यक्रम या शुरुआत की तारीख की घोषणा नहीं की है।






