नया हथियार परीक्षण के अहम पड़ाव पर पहुंचा
दक्षिण कोरिया का कहना है कि उसने अपने पहले स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह हथियार उड़ान के दौरान दिशा बदलते हुए ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक रफ्तार से चलने के लिए बनाया गया है। राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने परीक्षण देखा। अधिकारियों ने इसे कोरियाई प्रायद्वीप के लिए नए पारंपरिक प्रतिरोधक हथियार की दिशा में एक कदम बताया।
विषय-सूची
वाहन बूस्टर रॉकेट की मदद से निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचा, उससे अलग हुआ, फिर नीचे उतरते हुए ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दोनों दिशाओं में पैंतरेबाजी की और निर्धारित लक्ष्य पर जा लगा। परीक्षण दक्षिण कोरिया की रक्षा विकास एजेंसी ने किया। अधिकारियों ने स्थान की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं बताई, हालांकि एक रिपोर्ट के अनुसार प्रक्षेपण सियोल के दक्षिण में ताएआन स्थित परीक्षण केंद्र में एक बजरे से किया गया।
परीक्षण ने दिखाया कि वाहन ने हाइपरसोनिक परिस्थितियों में नियोजित उड़ान पूरी की। इससे यह साबित नहीं हुआ कि हथियार परिचालन इस्तेमाल के लिए तैयार है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा कि प्रणाली का विकास अभी जारी है और प्रक्षेपण को ताप-सुरक्षा, मार्गदर्शन और नियंत्रण तथा कम ऊंचाई पर पैंतरेबाजी सहित मुख्य तकनीकों का परीक्षण बताया।
ली ने विकास और तैनाती की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान करते हुए कहा कि देश को अपनी ताकत के दम पर अपनी सुरक्षा करनी चाहिए। परीक्षण देखने के बाद उन्होंने ह्युनमु-5 का भी निरीक्षण किया, जो दक्षिण कोरिया की एक शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल है और मजबूत किलेबंद तथा भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है।
ग्लाइड वाहन किस तरह अलग है?
हाइपरसोनिक का अर्थ है कम से कम मैक 5 की गति, यानी ध्वनि की गति से पांच गुना। केवल गति ही इन हथियारों को हर दूसरे मिसाइल से अलग नहीं करती। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन की खासियत उसका उड़ान मार्ग है: एक रॉकेट बूस्टर उसे ऊंचाई तक ले जाता है, फिर वाहन उससे अलग होकर लक्ष्य की ओर ग्लाइड करता है और इस दौरान पैंतरेबाजी करने की क्षमता बनाए रखता है।
यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल से अलग है, जो प्रक्षेपण के बाद अधिक अनुमानित चाप में आगे बढ़ती है। ग्लाइड वाहन कम ऊंचाई पर उड़ सकता है और दिशा बदल सकता है, जिससे उसका पता लगाना, उस पर नजर रखना और उसे रोकना मुश्किल हो सकता है। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर दक्षिण कोरिया का दावा है कि यह हथियार लक्ष्यों पर अचानक हमला कर सकता है। हालांकि, इससे उसे पहचानना या रोकना असंभव नहीं हो जाता: प्रदर्शन हथियार की वास्तविक उड़ान, सेंसर, चेतावनी के लिए उपलब्ध समय और लक्ष्य की सुरक्षा प्रणालियों पर निर्भर करता है।
दक्षिण कोरिया ने कहा कि गुरुवार का परीक्षण यह जांचने के लिए था कि वाहन हाइपरसोनिक उड़ान की तीव्र गर्मी झेल सकता है या नहीं, मार्गदर्शन के आदेशों का पालन कर सकता है या नहीं और कम ऊंचाई पर अनियमित पैंतरेबाजी कर सकता है या नहीं। ये इंजीनियरिंग की कठिन चुनौतियां हैं। बहुत अधिक गति पर वायुमंडल के साथ घर्षण से वाहन की सतह गर्म हो जाती है, जबकि तेज पैंतरेबाजी के दौरान नियंत्रण प्रणालियों का अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में भरोसेमंद बने रहना जरूरी होता है।
घोषित लक्ष्य पर हमला विकास की एक अहम उपलब्धि है, लेकिन एक परीक्षण यह नहीं दिखा सकता कि अलग-अलग परिस्थितियों में प्रणाली कितनी नियमितता से काम करेगी। इसे तैनात हथियार मानने से पहले और परीक्षण, परिचालन बलों के साथ एकीकरण तथा उत्पादन से जुड़े फैसले लेने होंगे।
बढ़ते तनाव के बीच परीक्षण
यह प्रक्षेपण दोनों कोरियाई देशों के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव के बीच हुआ। दक्षिण कोरिया के परीक्षण से कुछ दिन पहले उत्तर कोरिया ने अपना हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण किया था। प्योंगयांग ने कहा कि उसकी मिसाइल ने 1,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की और उड़ान में मदद के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया, जबकि दक्षिण कोरिया और जापान के अनुमान इससे कम थे। जापान ने कहा कि मिसाइल उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर, देश के पास समुद्र में गिरी।
दूरी के अलग-अलग अनुमानों को लेकर विवाद भी हुआ। उत्तर कोरियाई नेता की बहन किम यो जोंग ने तर्क दिया कि अनुमानों में अंतर दिखाता है कि सियोल और टोक्यो मिसाइल को रोकने के लिए पर्याप्त सटीकता से उस पर नजर नहीं रख सकते। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने कहा कि सहयोगियों की मौजूदा रक्षा प्रणालियों से मिसाइल का पता लगाकर उसे रोका जा सकता है। किसी भी पक्ष के सार्वजनिक दावे अपने आप यह साबित नहीं करते कि वास्तविक अवरोधन कैसा होगा।
सीमा पर हुई घटनाओं ने तनाव और बढ़ाया है। भारी हथियारों से लैस अंतर-कोरियाई सीमा के पास बारूदी सुरंगों के विस्फोट में दक्षिण कोरिया के तीन सैनिक घायल हुए। दक्षिण कोरियाई सेना और अमेरिकी नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान ने निष्कर्ष निकाला कि विस्फोट उत्तर कोरियाई सैनिकों द्वारा बिछाई गई सुरंगों से हुए। प्योंगयांग ने जिम्मेदारी से इनकार किया और सियोल द्वारा जवाबी कदमों पर विचार करने के बीच तनाव बढ़ गया। दक्षिण कोरिया में इस परीक्षण को व्यापक रूप से संकल्प प्रदर्शित करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा माना गया, हालांकि राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे सीधे तौर पर उस घटना का जवाब नहीं बताया।
नेता किम जोंग उन के देश के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम आगे बढ़ाने के साथ उत्तर कोरिया ने हथियारों के परीक्षण बढ़ाए हैं। वॉशिंगटन के साथ कूटनीतिक प्रयास भी 2019 में बातचीत टूटने के बाद से ठप हैं। प्योंगयांग ने अमेरिका से वह नीति खत्म करने को कहा है जिसे वह शत्रुतापूर्ण बताता है, और बातचीत की शर्त के रूप में परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग छोड़ने को कहा है।
आत्मनिर्भर रक्षा पर ली का संदेश
परीक्षण में ली की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को असाधारण राजनीतिक महत्व दिया। उनके कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा दक्षिण कोरिया की अपनी ताकत से सुनिश्चित होनी चाहिए और उन्नत हथियारों के विकास के लिए सरकार के समर्थन का वादा किया। राष्ट्रपति ने मजबूत पारंपरिक सैन्य बलों का भी आह्वान किया है और अमेरिका के साथ गठबंधन में दक्षिण कोरिया की बड़ी भूमिका की पैरवी की है।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका की संयुक्त रक्षा व्यवस्था है, लेकिन युद्धकाल में दक्षिण कोरियाई बलों का परिचालन नियंत्रण अमेरिकी नेतृत्व वाली संयुक्त बल कमान के पास रहता है। सियोल ने 1994 में शांतिकाल का परिचालन नियंत्रण वापस हासिल किया था और अब युद्धकालीन अधिकारों को शर्तों के आधार पर हस्तांतरित करने की दिशा में काम कर रहा है। ली ने 2030 में समाप्त होने वाले अपने कार्यकाल के दौरान यह हस्तांतरण पूरा करने का वादा किया है।
दक्षिण कोरियाई सैन्य अधिकारियों ने दक्षिण कोरिया के नेतृत्व वाली रक्षा व्यवस्था को सहारा देने के लिए जरूरी क्षमताओं में उच्च क्षमता वाली मिसाइलों और मध्यम ऊंचाई पर उड़ने वाले टोही विमानों को शामिल किया है। हाइपरसोनिक हथियार देश की मौजूदा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ, समय-संवेदनशील या भारी सुरक्षा वाले ठिकानों पर हमला करने का एक और साधन बन सकता है। इसलिए यह परीक्षण एक विशिष्ट हथियार कार्यक्रम को उन क्षमताओं के निर्माण के सियोल के व्यापक प्रयास से जोड़ता है, जिन्हें वह अधिक परिचालन स्वतंत्रता के लिए जरूरी मानता है।
इस प्रयास का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका के साथ गठबंधन छोड़ा जा रहा है। ली ने कुछ क्षेत्रों में निर्भरता घटाने की पैरवी की है, फिर भी दक्षिण कोरिया प्रतिरोध और रक्षा के लिए वॉशिंगटन के साथ सहयोग पर निर्भर है। राष्ट्रीय क्षमता और गठबंधन के समन्वय के बीच संतुलन देश की सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा है।
प्रतिरोध और तनाव बढ़ने का जोखिम
दक्षिण कोरियाई अधिकारी ग्लाइड वाहन को प्रतिरोधक हथियार बताते हैं: ऐसी क्षमता जिसका उद्देश्य आक्रामकता की संभावित कीमत बढ़ाकर विरोधी को हमला करने से रोकना है। महत्वपूर्ण लक्ष्यों की ओर तेजी से पैंतरेबाजी कर सकने वाला हथियार प्रतिद्वंद्वी की योजना को जटिल बना सकता है। उसकी उपयोगिता इस पर निर्भर करेगी कि उसका उत्पादन, तैनाती, नियंत्रण और इस्तेमाल कितनी भरोसेमंद ढंग से किया जा सकता है, न कि केवल उसकी गति पर।
हमले की नई क्षमताएं क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को भी तेज कर सकती हैं। उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के कार्यक्रम को बढ़ते खतरे के सबूत के तौर पर देख सकता है, ठीक वैसे ही जैसे सियोल प्योंगयांग के मिसाइल परीक्षणों को अपनी रक्षा मजबूत करने की वजह मानता है। यह स्थिति दोनों पक्षों को और परीक्षण तथा निवेश के लिए प्रेरित कर सकती है। हालात इसलिए भी खास तौर पर संवेदनशील हैं क्योंकि दोनों कोरियाई देश तकनीकी रूप से अब भी युद्धरत हैं। 1953 के युद्धविराम ने बड़े पैमाने पर लड़ाई रोक दी थी, लेकिन उसकी जगह कोई शांति संधि नहीं हुई।
अधिकारियों ने परीक्षण की सटीक दूरी, वाहन के आकार या उसकी प्रस्तावित तैनाती के कार्यक्रम जैसी जानकारी जारी नहीं की है। इन आंकड़ों के बिना प्रणाली की संभावित पहुंच या परिचालन भूमिका का आकलन संभव नहीं है। सार्वजनिक जानकारी से पुष्टि होती है कि परीक्षण वाहन बूस्टर से अलग हुआ, उसने पैंतरेबाजी की और लक्ष्य पर लगा; लेकिन कार्यक्रम कितना विकसित हो चुका है, इस बारे में अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।
कार्यक्रम में आगे क्या?
दक्षिण कोरिया के बयानों से संकेत मिलता है कि ग्लाइड वाहन को भरोसेमंद रणनीतिक क्षमता बनाने से पहले उसमें और सुधार किया जाएगा। विकास के लिए संभवतः बार-बार परीक्षण करने होंगे, ताकि ताप-प्रतिरोधी सामग्री और मार्गदर्शन प्रणालियों के लगातार भरोसेमंद काम करने की पुष्टि हो सके। इसके अलावा हथियार को सेना की कमान और लक्ष्य निर्धारण प्रणालियों से जोड़ने पर भी काम करना होगा। अधिकारियों ने तैनाती की समय-सीमा घोषित नहीं की है।
यह परीक्षण ह्युनमु-5 और अन्य उन्नत प्रणालियों की योजनाओं सहित व्यापक आधुनिकीकरण प्रयास का भी हिस्सा है। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन के परीक्षण के साथ उस मिसाइल का निरीक्षण करके ली ने पारंपरिक हमला करने की क्षमता पर सरकार का ध्यान रेखांकित किया, जबकि उत्तर कोरिया के खतरे में परमाणु हथियार भी शामिल हैं। दक्षिण कोरिया इन हथियारों को प्रतिरोध के साधन बताता है, जबकि किसी संकट में उनकी भूमिका राजनीतिक और सैन्य नेताओं के फैसलों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल, इस सफल उड़ान को पूरी तरह परिचालन योग्य हथियार का प्रमाण नहीं, बल्कि तकनीकी उपलब्धि के तौर पर देखना सबसे उचित है। इससे पता चलता है कि बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया ने स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड प्रणाली के अहम पहलुओं का प्रदर्शन किया है, जबकि कार्यक्रम की समय-सीमा, क्षमताओं और भविष्य की तैनाती की जानकारी अभी जारी नहीं की गई है।
मुख्य बिंदु
- दक्षिण कोरिया का पहला स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन परीक्षण उड़ान पूरी करके निर्धारित लक्ष्य पर लगा।
- वाहन बूस्टर से अलग हुआ, फिर हाइपरसोनिक गति से ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज पैंतरेबाजी की।
- अधिकारियों ने कहा कि परीक्षण में ताप-सुरक्षा, मार्गदर्शन, नियंत्रण और कम ऊंचाई पर पैंतरेबाजी की जांच की गई।
- हथियार का विकास जारी है; परिचालन तैनाती की तारीख घोषित नहीं की गई।
- यह प्रक्षेपण उत्तर कोरिया के हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण के बाद और सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच हुआ।
- राष्ट्रपति ली ने इस कार्यक्रम को मजबूत पारंपरिक रक्षा क्षमताओं और अधिक आत्मनिर्भरता से जोड़ा।






