नाजुक सुधार के बीच लाखों लोग जोखिम में
बांग्लादेश पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है: विकास धीमा पड़ा है, कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, ऊर्जा की कमी से कारखानों का काम बाधित हो रहा है और बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियां कर्ज उपलब्ध कराने में रुकावट डाल रही हैं। विश्व बैंक का अनुमान है कि राष्ट्रीय गरीबी दर 2022 के 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 22.5 प्रतिशत हो गई और FY2027 में 22.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। करीब 6.2 करोड़ लोग, यानी आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा, गरीबी रेखा के इतने करीब है कि नौकरी छूटने, बीमारी या किसी अन्य झटके से वे इसके नीचे जा सकते हैं।
विषय-सूची
इस दबाव ने गरीबी घटाने के लंबे दौर की कुछ उपलब्धियों को पलट दिया है। 2010 से 2022 के बीच बांग्लादेश ने करीब 3.4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, जिनमें 90 लाख लोग अत्यंत गरीबी से उबरे। हालांकि 2016 के बाद प्रगति धीमी पड़ गई, क्योंकि आर्थिक विकास गरीब परिवारों की आय बढ़ाने में पहले जितना प्रभावी नहीं रहा। नवीनतम अनुमान अधिक गंभीर झटका दिखाते हैं: 3 डॉलर प्रतिदिन की अंतरराष्ट्रीय सीमा के आधार पर अत्यंत गरीबी 2022 के 5.9 प्रतिशत से बढ़कर FY2026 में अनुमानित 10.1 प्रतिशत हो गई।
इस बदलाव का असर रोजमर्रा के खर्चों और कम हुई कमाई में महसूस हो रहा है। चार साल से ऊंची महंगाई ने मजदूरी की क्रय शक्ति घटाई है, जबकि कारखाने बंद होने, काम के घंटे घटने और कमजोर भर्ती से परिवारों की आय कम हुई है। विश्व बैंक का अनुमान है कि अकेले FY2026 में करीब 21 लाख और लोग 3 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे चले गए। कम वेतन वाले श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी में गिरावट जारी रही है, यानी उनकी कमाई कीमतों के साथ कदम नहीं मिला पाई।
इन आंकड़ों को सावधानी से समझने की भी जरूरत है। गरीबी के अनुमान में सर्वेक्षण की जानकारी और आर्थिक मॉडलिंग, दोनों का इस्तेमाल होता है, जबकि 2025 के बाद श्रमबल सर्वेक्षण न होने से हालिया नौकरी छूटने और रोजगार की स्थितियों का पूरा आकलन सीमित है। फिर भी उद्योग, कर्ज और कीमतों के संकेत एक ही दिशा में हैं: कई परिवारों के पास अगले झटके से निपटने के लिए बहुत कम बचत बची है।
विकास की रफ्तार क्यों थमी
विश्व बैंक ने FY2027 के लिए विकास दर का अपना अनुमान घटाकर 3.4 प्रतिशत कर दिया, जो अप्रैल के अनुमान से 1.2 प्रतिशत अंक कम है। बैंक ने FY2026 में भी विकास दर 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया, जिससे आर्थिक गतिविधियों में लगातार तीसरे साल सुस्ती दर्ज हुई। अर्थव्यवस्था के केवल मामूली रूप से सुधरकर FY2028 में 3.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। ये अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम हैं।
ऊर्जा की कमी उत्पादन में सीधी बाधा बन गई है। घरेलू गैस उत्पादन घटा है और अब आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) से गैस की कुल मांग का करीब एक-तिहाई पूरा होता है। महेशखाली में तैरते LNG टर्मिनलों के संचालन में बाधा से आपूर्ति और घटी, जिससे बिजली कटौती बढ़ी और कारखानों को क्षमता से कम पर चलना पड़ा या कुछ समय के लिए काम रोकना पड़ा। कारोबारियों ने डीजल जनरेटर का सहारा भी लिया है, जिससे परिचालन लागत बढ़ी है। FY2026 में औद्योगिक उत्पादन केवल 2 प्रतिशत बढ़ा और महामारी के बाद पहली बार तीसरी तिमाही में उद्योग संकुचित हुआ।
इन बाधाओं का असर सिर्फ विनिर्माताओं तक सीमित नहीं है। कारखानों में शिफ्ट घटने या कर्मचारियों की छंटनी होने पर श्रमिक दुकानों और सेवा कारोबारों में कम खर्च करते हैं। आपूर्तिकर्ताओं को कम ऑर्डर मिलते हैं और कंपनियां नए उपकरणों में निवेश या भर्ती करने से हिचकती हैं। ऊर्जा की अनिश्चितता से उत्पादन की योजना बनाना और समय पर माल पहुंचाना भी मुश्किल होता है। कीमत के साथ भरोसेमंद आपूर्ति के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने वाले निर्यातकों के लिए यह खास चिंता का विषय है।
कमजोर मांग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निर्यात पर दबाव है। FY2026 में कुल निर्यात 0.2 प्रतिशत घटा, जबकि यूरोपीय संघ को तैयार कपड़ों का निर्यात 3.3 प्रतिशत कम हुआ। विश्व बैंक की रिपोर्ट में उद्धृत एक सर्वेक्षण में पाया गया कि अमेरिका के जिन फैशन खरीदारों ने बांग्लादेश को आपूर्ति के स्रोत के रूप में चुना, उनका अनुपात एक साल पहले के 88 प्रतिशत से घटकर करीब 78 प्रतिशत रह गया। खरीदार उत्पादन लागत के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता, नियमों के अनुपालन और लचीलेपन को भी अधिक महत्व दे रहे हैं।
विदेश से आने वाले धन ने कुछ सहारा दिया है। FY2026 में प्रेषण 17.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 35.6 अरब डॉलर पहुंचा, जिससे चालू खाते के घाटे को सीमित रखने और अगस्त तक विदेशी मुद्रा भंडार को 32 अरब डॉलर से अधिक पर फिर बनाने में मदद मिली। इससे निवेश और रोजगार सृजन की घरेलू बाधाएं दूर नहीं होतीं, लेकिन बाहरी आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिली है।
बैंकिंग संकट कारोबार के लिए कर्ज रोक रहा है
बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरी आर्थिक गतिविधियों पर एक और बड़ा बोझ है। पूरे बैंकिंग तंत्र में गैर-निष्पादित ऋणों का अनुपात, यानी तय शर्तों के अनुसार जिन कर्जों का भुगतान नहीं हो रहा उनका हिस्सा, दिसंबर 2024 के 20.2 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 में 33.2 प्रतिशत हो गया। पूंजी पर्याप्तता अनुपात, जो नुकसान झेलने की बैंक की क्षमता मापता है, दिसंबर 2025 में गिरकर शून्य से 2.6 प्रतिशत नीचे चला गया, जबकि नियामकीय न्यूनतम स्तर 10 प्रतिशत है।
बताए गए आंकड़े नुकसान का पूरा पैमाना अभी नहीं दिखाते होंगे। प्रावधानों से जुड़े ढीले नियमों के कारण बैंक खराब कर्जों के लिए रकम अलग रखने में देरी कर पाए हैं। बांग्लादेश बैंक ने जून तक कमजोर कर्जदाताओं को बिना जमानत 760 अरब टका की नकदी सहायता दी थी। विश्व बैंक ने चेताया है कि बार-बार आपात सहायता और नियामकीय छूट से नुकसान की पहचान और भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी पुनर्गठन में देरी हो सकती है।
निजी कारोबारों को कर्ज जून में केवल 4.5 प्रतिशत बढ़ा, जो 33 साल में इसकी सबसे धीमी वृद्धि है। इसी दौरान बैंकों से सरकार का कर्ज तेजी से बढ़ा। जब बैंकों के पास सीमित रकम हो और वे जोखिम वाले कारोबारी कर्जों के बजाय सरकार को कर्ज देना चुनें, तो छोटी कंपनियों को वित्त जुटाने में खास मुश्किल हो सकती है। जमा और कर्ज की ब्याज दरों के बीच अंतर पर सीमा लगाने से भी यह दबाव बढ़ सकता है, अगर इससे छोटे कारोबारों को कर्ज देना कम आकर्षक हो जाए।
इसलिए बैंकों की बैलेंस शीट सुधारना रोजगार और निवेश से सीधे जुड़ा है। विश्व बैंक ने परिसंपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा, नुकसान की स्पष्ट पहचान और सक्षम बैंकों का उचित मूल्य पर पुनर्गठन या पुनर्पूंजीकरण करने की मांग की है। विश्वसनीय कदमों के अभाव में कमजोर कर्ज आपूर्ति उत्पादक कारोबारों के विस्तार में बाधा बनी रह सकती है, भले ही मांग में सुधार शुरू हो जाए।
महंगाई और नौकरियों का नुकसान परिवारों पर सबसे भारी
औसत समग्र महंगाई FY2025 के 10 प्रतिशत से घटकर FY2026 में 8.7 प्रतिशत हुई, लेकिन अब भी ऊंची है। विश्व बैंक को FY2027 में औसत महंगाई 8.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है; घरेलू ऊर्जा कीमतें, आपूर्ति की बाधाएं और मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि कीमतों पर दबाव बनाए रखेंगी। गरीब परिवारों के लिए खाद्य कीमतें खास मायने रखती हैं: विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सबसे गरीब पांचवें हिस्से के परिवार अपनी आय का करीब 60 प्रतिशत भोजन पर खर्च करते हैं। इससे परिवहन, किराए, बिजली-पानी या दवाओं के बढ़ते खर्चों के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है।
रोजगार के नुकसान का अनुपातहीन बोझ महिलाओं पर पड़ा है। महिलाओं की श्रमबल भागीदारी 2022 के 42.8 प्रतिशत से घटकर 2024 में 38.4 प्रतिशत हो गई। यह गिरावट बताती है कि खासकर उद्योग और सेवा क्षेत्रों में अवसर कमजोर पड़ने के बाद महिलाएं काम छोड़ रही हैं। गरीबी पर पहले हुए शोध में शिक्षित युवाओं के बीच ऊंची बेरोजगारी भी सामने आई थी, और शहरी क्षेत्रों की युवा महिलाओं के लिए हालात खास तौर पर कठिन पाए गए थे।
श्रम बाजार में इस बदलाव की वजहें व्यापक हैं। 2016 से 2022 के दौरान नई नौकरियों में कृषि का बड़ा हिस्सा रहा और गरीबी में कमी का अधिकांश श्रेय ग्रामीण क्षेत्रों को गया। उद्योग और सेवा क्षेत्रों में रोजगार पहले की तरह नहीं बढ़ा। अब ऊर्जा की कमी और कमजोर निवेश औद्योगिक नौकरियों पर दबाव बढ़ा रहे हैं, जबकि हालिया श्रम सर्वेक्षण के आंकड़े न होने से यह मापना मुश्किल है कि स्थिति कितनी व्यापक हो चुकी है।
बांग्लादेश की संवेदनशीलता शहरों और ग्रामीण इलाकों के बीच लंबे समय से चली आ रही असमानताओं से भी जुड़ी है। 2016 से 2022 के दौरान कृषि रोजगार की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी तेजी से घटी, लेकिन 2022 तक बांग्लादेश के हर चार गरीब लोगों में से एक शहर में रहता था। शहरी परिवार अक्सर मजदूरी पर निर्भर होते हैं और उनके पास जमीन या घर में उगाए भोजन तक कम पहुंच होती है। इसलिए महंगाई और काम में रुकावट उनके बजट को तेजी से बिगाड़ सकती है।
सरकारी सहायता अक्सर सबसे गरीबों तक नहीं पहुंचती
बांग्लादेश ऊर्जा और उर्वरक सब्सिडी तथा सामाजिक सुरक्षा पर GDP का करीब 3.5 प्रतिशत खर्च करता है, लेकिन अधिक खर्च से प्रभावी मदद की गारंटी नहीं मिली है। FY2026 में सरकार 25 मंत्रालयों के तहत 90 सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम चला रही थी। पात्रता के अलग-अलग नियम, एक-दूसरे से मिलती लाभार्थी सूचियां और अलग-अलग वितरण व्यवस्थाएं जरूरतमंद परिवारों की पहचान और उन्हें भरोसेमंद तरीके से मदद पहुंचाना मुश्किल बनाती हैं।
विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, गरीब परिवारों के लिए बने कार्यक्रम सबसे गरीब पांचवें हिस्से के 62 प्रतिशत परिवारों को सहायता से बाहर रखते हैं, जबकि सबसे अमीर पांचवें हिस्से के 18 प्रतिशत परिवारों को लाभ मिलता है। एक अन्य तुलना में सबसे गरीब पांचवें हिस्से को सामाजिक सुरक्षा से सालाना औसतन 7,140 टका मिले, जबकि सबसे अमीर पांचवें हिस्से को 10,472 टका मिले। ये अनुमान लाभार्थियों तक पहुंच और औसत सहायता की अलग-अलग माप बताते हैं, लेकिन दोनों से सहायता के लक्षित वितरण में समस्याएं सामने आती हैं।
बिजली सब्सिडी खर्च और गरीबी राहत के बीच के अंतर का उदाहरण है। सबसे अमीर पांचवें हिस्से के परिवारों को बिजली सहायता का 33 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जो सबसे गरीब पांचवें हिस्से तक पहुंचने वाले 15.4 प्रतिशत से दोगुने से भी अधिक है। इसकी बड़ी वजह समान दर वाली सब्सिडी की व्यवस्था है: जो परिवार अधिक बिजली खर्च करते हैं, उन्हें लाभ का बड़ा हिस्सा मिलता है। फिर भी आय के अनुपात में गरीब परिवारों के लिए यह सहायता अधिक महत्वपूर्ण है। अनुमान है कि सबसे गरीब पांचवें हिस्से की कर-पूर्व आय में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ 18.1 प्रतिशत के बराबर है, जबकि सबसे अमीर पांचवें हिस्से के लिए यह 2.3 प्रतिशत है।
बिजली और गैस सब्सिडी FY2014 के 8,580 करोड़ टका से बढ़कर FY2025 में 83,600 करोड़ टका हो गई। बिजली की दरें आपूर्ति की अनुमानित लागत से कम रखी गई हैं, इसलिए अंतर का कुछ हिस्सा सरकार को भरना पड़ता है। उर्वरक सब्सिडी भी तेजी से बढ़ी है। ऐसी सहायता से परिवारों और उत्पादकों की लागत सीमित रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन व्यापक मूल्य सब्सिडी महंगी होती है और जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाने के बजाय खपत बढ़ा सकती है।
बिजली सब्सिडी को बिना किसी वैकल्पिक सहायता के हटाने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। विश्व बैंक के मॉडल के अनुसार, मुआवजे के बिना सब्सिडी पूरी तरह हटाने से गरीबी दर 2.8 प्रतिशत अंक बढ़ सकती है और करीब 47 लाख लोग गरीबी में जा सकते हैं। इसलिए सुधार के सामने लाभों के बंटवारे की चुनौती है: बचत से अधिक लक्षित सहायता के लिए जगह बन सकती है, लेकिन सहायता पहुंचने से पहले कीमतों में अचानक बढ़ोतरी परिवारों और कारोबारों को प्रभावित करेगी।
लक्षित सहायता की कसौटी बनेगा फैमिली कार्ड
विश्व बैंक के अनुसार, सरकार की फैमिली कार्ड नकद हस्तांतरण पहल परिवारों को सहायता देने के लिए एक साझा मंच मुहैया करा सकती है। इसका असर इस पर निर्भर करेगा कि यह लाभार्थियों के चयन की मौजूदा गलतियों को सुधारती है या उन्हें दोहराती है। कार्यक्रम की सफलता के लिए ऐसा रजिस्टर अहम होगा जो पात्र परिवारों की पहचान करे, गरीबी के स्पष्ट मानदंड अपनाए और रिकॉर्ड अद्यतन रखे।
उदाहरण के तौर पर किए गए मॉडल-आधारित अनुमानों में, मौजूदा नकद कार्यक्रमों जैसी लक्षित चयन की गलतियों के साथ फैमिली कार्ड जोड़ने से गरीबी दर 0.95 प्रतिशत अंक और घट सकती है और करीब 15.8 लाख लोगों को मदद मिल सकती है। कार्ड के साथ बेहतर लक्षित वृद्धावस्था और विधवा भत्ते तथा एकीकृत खाद्य सहायता कार्यक्रम जोड़ने से गरीबी दर 1.72 प्रतिशत अंक, यानी करीब 28.5 लाख लोगों के लिहाज से, घट सकती है। इसके लिए अतिरिक्त लागत GDP के अनुमानित 0.21 प्रतिशत के बराबर होगी।
ये मॉडल के नतीजे हैं, सुनिश्चित परिणाम नहीं। सहायता का वितरण परिवारों के सटीक आंकड़ों, सुलभ आवेदन प्रक्रिया और पात्र लोगों तक समय पर भुगतान पहुंचने पर निर्भर करता है। खाद्य कार्यक्रमों को एकीकृत करने से सहायता के वितरण और सबसे ज्यादा जरूरत वाले इलाकों के बीच की खाई पाटने में भी मदद मिल सकती है, जिसमें कम आय वाले शहरी समुदाय शामिल हैं।
नीति का केंद्रीय सवाल सिर्फ यह नहीं है कि खर्च बढ़ाया जाए या घटाया जाए। सवाल यह है कि सीमित सार्वजनिक धन का इस्तेमाल कैसे हो, ताकि मदद जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और बर्बादी कम हो। सीधे नकद हस्तांतरण को व्यापक ऊर्जा मूल्य कटौती के मुकाबले अधिक सटीक तरीके से लक्षित किया जा सकता है, लेकिन उपयोगिता की ऊंची लागत से परिवारों को बचाने के लिए सहायता पर्याप्त और भरोसेमंद होनी चाहिए। इस बदलाव में गरीब किसानों और सब्सिडी वाले संसाधनों या बिजली पर निर्भर छोटे कारोबारों का भी ध्यान रखना होगा।
निकट भविष्य की दिशा तय करेंगे तीन सुधार
विश्व बैंक ने बैंकिंग स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू राजस्व जुटाने को तत्काल प्राथमिकता बताया है। बैंकिंग निगरानी मजबूत करने और खराब कर्जों का विश्वसनीय निपटारा करने से कर्ज देना बहाल करने में मदद मिल सकती है। ऊर्जा क्षेत्र का बेहतर प्रशासन, ईंधन आपूर्ति और पारेषण तथा वितरण नेटवर्क व्यवधान कम कर सकते हैं। कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और कर आधार बढ़ाना सामाजिक सहायता तथा उत्पादक निवेश के लिए सरकार की क्षमता बढ़ा सकता है।
FY2026 में राजस्व GDP का अनुमानित 8.3 प्रतिशत रहा, जो बेहद कम है। कर अनुपालन कमजोर होना, नीतिगत कमियां और सीमित प्रशासनिक क्षमता, परिवारों या उद्योगों पर संकट आने पर सरकार की प्रतिक्रिया को बाधित करते हैं। इस बीच, सब्सिडी लागत, ब्याज भुगतान और बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की जरूरतों के कारण राजकोषीय घाटा FY2026 के GDP के 3.9 प्रतिशत से बढ़कर FY2027 में 4.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। ये खर्च सार्वजनिक निवेश के लिए उपलब्ध धन से प्रतिस्पर्धा करते हैं।
ऊर्जा सुधार खास तौर पर संवेदनशील है। विश्व बैंक का कहना है कि बेहतर लक्षित सहायता से सरकार कीमतें बढ़ने पर सबसे गरीब 40 प्रतिशत आबादी को मुआवजा दे सकती है और साथ ही राजकोषीय बचत भी बनाए रख सकती है। बैंक ने बेहतर पारेषण, पारदर्शी मूल्य निर्धारण, सुशासन और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल की भी बात कही है। प्रस्तावित रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र ग्रिड में बिजली जोड़ सकता है, हालांकि केवल नया बिजली उत्पादन ईंधन, पारेषण या प्रशासन की समस्याएं हल नहीं कर सकता।
आखिरकार, यह रोजगार ही तय करेगा कि विकास का लाभ जोखिमग्रस्त परिवारों तक पहुंचेगा या नहीं। विश्व बैंक के गरीबी आकलन में बेहतर बुनियादी ढांचे और परिवहन संपर्क, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा, वेतन वाले काम में महिलाओं की भागीदारी को समर्थन, व्यापार और लाइसेंस के नियमों को सरल बनाना तथा कृषि में अधिक निवेश करने की मांग की गई है। जलवायु के प्रति लचीलापन भी अहम है: आकलन में चेताया गया है कि आशावादी परिदृश्यों में भी 2050 तक जलवायु प्रभाव कृषि GDP को एक-तिहाई घटा सकते हैं और 1.33 करोड़ लोगों को विस्थापित कर सकते हैं।
बांग्लादेश में पहले गरीबी घटने का अनुभव दिखाता है कि लगातार रोजगार सृजन और जरूरी सेवाओं तक पहुंच से जीवन स्तर बेहतर हो सकता है। मौजूदा उलटफेर के पीछे तात्कालिक झटकों और ढांचागत बाधाओं का मिला-जुला असर है। कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने से दबाव कम हो सकता है, लेकिन टिकाऊ सुधार इस पर निर्भर करेगा कि वित्तीय, राजकोषीय और सार्वजनिक सहायता व्यवस्थाएं उत्पादक निवेश तथा सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की ओर संसाधन पहुंचा पाती हैं या नहीं।
मुख्य बातें
- राष्ट्रीय गरीबी दर 2022 के 18.7 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में अनुमानित 22.5 प्रतिशत हो गई; करीब 6.2 करोड़ लोग गरीबी में जाने के जोखिम में हैं।
- विश्व बैंक ने FY2027 में GDP वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत और FY2028 में 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
- महंगाई, ऊर्जा की कमी और कमजोर भर्ती परिवारों की क्रय शक्ति घटा रहे हैं; नौकरी के अनुपातहीन नुकसान का सामना करने वालों में महिलाएं भी शामिल हैं।
- बैंकिंग संकट और निजी कर्ज की धीमी वृद्धि कारोबारों के निवेश और रोजगार को सीमित कर रही है।
- व्यापक सब्सिडी और बिखरे हुए सामाजिक कार्यक्रम अक्सर गरीब परिवारों तक नहीं पहुंचते; बेहतर लक्षित सहायता से अनुमानित 28.5 लाख लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जा सकता है।
- विश्व बैंक की प्राथमिकताएं हैं: बैंकों की स्थिति सुधारना, ऊर्जा आपूर्ति और प्रशासन मजबूत करना तथा राजस्व संग्रह बेहतर बनाना।






