विस्तार पाता परमाणु उत्पादन नेटवर्क
उत्तर कोरिया ने अपने मुख्य योंगब्योन परमाणु परिसर में यूरेनियम संवर्धन की एक नई दो-मंजिला सुविधा बनाई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इसे गंभीर चिंता का कारण बताया है। उपग्रह तस्वीरों और उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों के आधार पर किए गए आईएईए के आकलन के मुताबिक, इस इमारत में 28 सेंट्रीफ्यूज कैस्केड तक लगाए जा सकते हैं।
विषय-सूची
- विस्तार पाता परमाणु उत्पादन नेटवर्क
- आईएईए को योंगब्योन में क्या मिला
- 28 कैस्केड क्यों अहम हैं
- कांगसोन से बढ़ी दूसरी चिंता
- एजेंसी उत्तर कोरिया की निगरानी कैसे करती है
- किम जोंग उन के शासन में तेज हुआ कार्यक्रम
- प्रतिबंध निर्माण क्यों नहीं रोक पाए
- सियोल ने बातचीत का प्रस्ताव दिया
- नई सुविधाओं का क्या मतलब है
- निष्कर्ष
एजेंसी ने प्योंगयांग के पास कांगसोन संवर्धन केंद्र में विस्तारित एक सहायक इमारत के जनवरी में चालू होने के संकेत भी पाए हैं। दोनों जगहों की गतिविधियों से पता चलता है कि उत्तर कोरिया एक से अधिक स्थानों पर अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बनाने की अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। इससे उसके परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करना और उस पर अंकुश लगाना अधिक कठिन हो जाता है।
आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने कहा कि संवर्धन केंद्रों का लगातार संचालन और विस्तार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है। ये निष्कर्ष ऐसे समय आए हैं जब उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन परमाणु हथियारों को देश की सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय पहचान का केंद्रीय हिस्सा बताते रहे हैं।
आईएईए को योंगब्योन में क्या मिला
योंगब्योन उत्तर कोरिया का सबसे प्रसिद्ध परमाणु परिसर है। लंबे समय से इसे प्लूटोनियम और संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन से जोड़ा जाता रहा है। इन दोनों सामग्रियों का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। माना जा रहा है कि हाल में पहचानी गई इमारत इस केंद्र की दूसरी यूरेनियम संवर्धन सुविधा है।
आईएईए के आकलन के मुताबिक, निर्माण दिसंबर 2024 में शुरू हुआ। बाहरी निर्माण कई महीने बाद पूरा हुआ, जिसके बाद बिजली के उपकरण, आपातकालीन जनरेटर और शीतलन प्रणालियां लगाई गईं। उपग्रह तस्वीरों में इस साल की शुरुआत में कम से कम एक शीतलन इकाई चालू दिखाई दी।
3 जून को किम के इस सुविधा के दौरे की तस्वीरों में इमारत की दोनों मंजिलों पर सेंट्रीफ्यूज कैस्केड दिखाई दिए। कैस्केड कई चरणों में जुड़े सेंट्रीफ्यूज का समूह होता है। हर सेंट्रीफ्यूज यूरेनियम के अन्य रूपों से उसे अलग करके उस यूरेनियम समस्थानिक की सांद्रता बढ़ाता है, जिसकी हथियार उत्पादन के लिए जरूरत होती है।
आईएईए यह पुष्टि नहीं कर पाया है कि वहां कितने सेंट्रीफ्यूज लगे हैं, वे कितनी कुशलता से काम करते हैं या सभी कैस्केड चालू हैं या नहीं। एजेंसी का 28 कैस्केड का अनुमान इमारत की संभावित क्षमता बताता है, न कि उत्पादन की सत्यापित मात्रा।
28 कैस्केड क्यों अहम हैं
इस सुविधा का आकार बाहरी विश्लेषकों को उत्तर कोरिया की उत्पादन क्षमता में संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है। शोध में उद्धृत एक अध्ययन के अनुसार, 28 कैस्केड में लगभग 4,592 सेंट्रीफ्यूज हो सकते हैं। अपेक्षित स्तर पर चलाए जाने पर वे हर साल करीब 85 किलोग्राम हथियार-ग्रेड अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बना सकते हैं।
एक वारहेड के लिए करीब 20 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत के अनुमान के आधार पर, यह मात्रा हर साल लगभग तीन या चार अतिरिक्त परमाणु वारहेड बनाने के लिए पर्याप्त हो सकती है। यह एक अनुमान है, उत्तर कोरिया की उत्पादन दर की पुष्टि नहीं। वास्तविक मात्रा सेंट्रीफ्यूज के डिजाइन और प्रदर्शन, शुरुआती सामग्री की गुणवत्ता, संचालन के समय-सारिणी और प्रत्येक हथियार के लिए जरूरी यूरेनियम की मात्रा पर निर्भर करेगी।
शोध में उद्धृत अन्य अनुमानों के अनुसार, उत्तर कोरिया का मौजूदा वार्षिक अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम उत्पादन करीब 215 से 232 किलोग्राम है। अगर योंगब्योन की नई सुविधा अपनी संभावित क्षमता तक पहुंचती है, तो देश का वार्षिक उत्पादन 300 किलोग्राम से अधिक हो सकता है। ये गणनाएं अनिश्चित हैं, क्योंकि उत्तर कोरिया पहुंच सीमित रखता है और अपने परमाणु बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा छिपाता है।
इस विकास का महत्व संभावित नए वारहेड की संख्या से कहीं अधिक है। संवर्धन क्षमता बढ़ने से प्योंगयांग को मौजूदा हथियार भंडार बनाए रखने, हथियारों में इस्तेमाल सामग्री की भरपाई करने और किसी एक केंद्र पर निर्भर हुए बिना अपना भंडार बढ़ाने की अधिक गुंजाइश मिलती है।
कांगसोन से बढ़ी दूसरी चिंता
आईएईए के आकलन में उत्तर कोरियाई राजधानी के पास स्थित संवर्धन परिसर कांगसोन की गतिविधियों का भी जिक्र है। मौजूदा केंद्र के पास 2024 में एक सहायक इमारत बनाई गई थी और एजेंसी को संकेत मिले कि इस साल जनवरी में वहां कामकाज शुरू हुआ।
एजेंसी यह तय नहीं कर पाई कि सहायक इमारत में अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बनाया जा रहा है या नहीं। हालांकि, उसने कहा कि उत्तर कोरिया ने इस केंद्र को हथियार-ग्रेड परमाणु सामग्री बनाने का ठिकाना बताया है और हथियारों के लिए सामग्री बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उपग्रह से किए गए अवलोकनों से यह भी संकेत मिला कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान योंगब्योन का मूल यूरेनियम संवर्धन केंद्र चालू था। आईएईए ने बताया कि खर्च किए गए परमाणु ईंधन से प्लूटोनियम निकालने की पुनर्संसाधन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी हो सकती है। प्लूटोनियम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम अलग-अलग सामग्रियां हैं, लेकिन दोनों का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है।
दो अलग-अलग केंद्रों पर गतिविधि निगरानी और सुरक्षा, दोनों के लिहाज से अहम है। अलग-अलग इलाकों में फैली सुविधाओं से किसी एक केंद्र में व्यवधान का असर कम हो सकता है और बाहरी सरकारों के लिए उत्पादन की पूरी तस्वीर हासिल करना कठिन हो सकता है। ऑक्सफोर्ड के व्याख्याता एडवर्ड हॉवेल ने कहा कि छिपे हुए केंद्र उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के आकलन में एक प्रमुख चिंता हैं।
उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम इतना चिंताजनक इसलिए है क्योंकि उसकी कई सुविधाओं की जानकारी नहीं है, वे छिपी हुई हैं और इस वजह से उन्हें निशाना बनाना कठिन है।
हॉवेल ने योंगब्योन के अलावा कांगसोन समेत अन्य केंद्रों का भी जिक्र किया और कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु सिद्धांत उसकी विदेश और घरेलू, दोनों नीतियों से गहराई से जुड़ा है। यह आकलन उन सरकारों की सीमाओं को दिखाता है जो प्रत्यक्ष निरीक्षण के बजाय दूर से निगरानी पर निर्भर हैं।
एजेंसी उत्तर कोरिया की निगरानी कैसे करती है
2009 में प्योंगयांग द्वारा निरीक्षकों को निष्कासित किए जाने के बाद से आईएईए का कोई निरीक्षक उत्तर कोरिया के भीतर नहीं गया है। अब एजेंसी उपग्रह तस्वीरों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और उत्तर कोरियाई अधिकारियों द्वारा जारी तस्वीरों पर निर्भर है। इस तरीके से निर्माण, इमारतों में बदलाव, वाहनों की आवाजाही, बिजली के इस्तेमाल और शीतलन गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इससे भौतिक निरीक्षण जैसी निश्चितता नहीं मिलती।
इस मामले में एजेंसी ने किम के जून दौरे की तस्वीरों की तुलना निर्माण के दौरान ली गई व्यावसायिक उपग्रह तस्वीरों से की। इस तुलना से इमारत की जगह और उसके संभावित उद्देश्य की पहचान हो सकी। सरकारी मीडिया की तस्वीरों में दोनों मंजिलों पर लगे सेंट्रीफ्यूज कैस्केड भी दिखाई दिए।
कई बातें अब भी अज्ञात हैं। आईएईए मशीनों की सही संख्या, उनकी तकनीकी विशेषताओं, संचालन की दर या उत्पादित संवर्धित यूरेनियम की मात्रा की पुष्टि नहीं कर सकता। वह भंडारण क्षेत्रों का निरीक्षण भी नहीं कर सकता और न ही यह पुष्टि कर सकता है कि सामग्री को दूसरी जगहों पर भेजा गया है या नहीं।
इन कमियों के कारण सार्वजनिक अनुमान सटीक संख्या के बजाय संभावित दायरे बताते हैं। उत्तर कोरिया की बंद राजनीतिक व्यवस्था और परमाणु केंद्रों को छिपाने का उसका रिकॉर्ड इस कठिनाई को और बढ़ाते हैं। एजेंसी गतिविधि के संकेत पहचान सकती है, लेकिन वह सभी परमाणु सामग्री का स्वतंत्र रूप से हिसाब नहीं लगा सकती और न ही देश के हथियार भंडार का पूरा आकार तय कर सकती है।
किम जोंग उन के शासन में तेज हुआ कार्यक्रम
किम जोंग उन के नेतृत्व में उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियां बढ़ी हैं। उनके शासन में बड़ी संख्या में मिसाइल परीक्षण हुए हैं और परमाणु शक्ति मजबूत करने की बार-बार मांग की गई है। देश ने 2017 से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है। ये संभावित प्रक्षेपण प्रणालियां कोरियाई प्रायद्वीप से बहुत दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए बनाई गई हैं।
उत्तर कोरिया ने छह परमाणु हथियार परीक्षण किए हैं। सबसे हालिया परीक्षण सितंबर 2017 में हुआ था। देश ने 2022 में खुद को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र घोषित किया और कहा कि यह स्थिति अपरिवर्तनीय है। उसने यह भी कहा है कि वह अपने परमाणु हथियार नहीं छोड़ेगा।
उत्तर कोरियाई अधिकारी आईएईए के अधिकार को नहीं मानते। शोध में उद्धृत एक बयान में वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के मिशन ने तर्क दिया कि परमाणु अप्रसार संधि से बाहर के किसी परमाणु हथियार संपन्न देश के आंतरिक मामलों में दखल देने का एजेंसी को कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों के साथ वर्षों तक चले विवाद के बाद उत्तर कोरिया 2003 में इस संधि से बाहर हो गया था।
आईएईए और संयुक्त राष्ट्र उत्तर कोरिया की इस दलील को सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की अनदेखी करने का आधार नहीं मानते। इन प्रस्तावों के तहत देश को परमाणु परीक्षण करने और परमाणु हथियारों से जुड़ी तकनीक विकसित करने की मनाही है। इनमें यूरेनियम संवर्धन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी शामिल हैं।
प्रतिबंध निर्माण क्यों नहीं रोक पाए
उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के कारण उस पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। ये प्रतिबंध व्यापार, वित्तीय गतिविधियों, तकनीक हस्तांतरण और हथियार उत्पादन में काम आने वाले उपकरणों तक पहुंच सीमित करते हैं। इनसे कार्यक्रम की लागत बढ़ी है, लेकिन देश के भीतर निर्माण और अनुसंधान नहीं रुके हैं।
संवर्धन उपकरणों पर नजर रखना कठिन हो सकता है, क्योंकि सेंट्रीफ्यूज के पुर्जे अपेक्षाकृत छोटे होते हैं और उनका उत्पादन या संयोजन गुप्त नेटवर्क के जरिये किया जा सकता है। इमारतों को असैन्य औद्योगिक केंद्रों के रूप में भी पेश किया जा सकता है। बाहरी पहुंच सीमित रखते हुए नए केंद्र बनाने की उत्तर कोरिया की क्षमता दिखाती है कि प्रतिबंधों को लागू करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करना, निरीक्षण और पड़ोसी देशों के बीच सहयोग क्यों जरूरी है।
गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे देश में भी परमाणु कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जाती है। परमाणु अप्रसार पर काम करने वाले एक शोध समूह के 2022 के अनुमान के मुताबिक, उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार भंडार पर सालाना करीब 640 मिलियन डॉलर खर्च करता है। सटीक आंकड़े की पुष्टि करना कठिन है, लेकिन यह खर्च दिखाता है कि प्योंगयांग हथियार विकास के लिए लगातार संसाधन लगा रहा है।
दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के लिए बड़ा हथियार भंडार सैन्य योजना और कूटनीतिक आकलन को प्रभावित कर सकता है। संकट के दौरान गलत आकलन का जोखिम भी बढ़ सकता है, खासकर जब मिसाइल परीक्षण, सैन्य अभ्यास या राजनीतिक तनाव एक ही समय पर चल रहे हों।
सियोल ने बातचीत का प्रस्ताव दिया
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने अगस्त में उत्तर कोरिया के साथ दोनों देशों के बीच युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त करने पर बातचीत का प्रस्ताव दिया। कोरियाई युद्ध 1953 में शांति संधि के बजाय युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ था। इसलिए तकनीकी रूप से दोनों पक्ष अब भी युद्ध की स्थिति में हैं।
ली ने कहा कि संघर्ष को औपचारिक रूप से समाप्त करने पर चर्चा में उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमताओं की बढ़ोतरी रोकने के तरीकों पर भी बात हो सकती है। प्योंगयांग ने इस प्रस्ताव का जवाब नहीं दिया है। उत्तर कोरिया पहले भी उन वार्ताओं को ठुकरा चुका है जिन्हें वह अपना हथियार भंडार छोड़ने के लिए दबाव बनाने की कोशिश मानता था।
ली ने यह भी कहा है कि वह किम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐसे समझौते का समर्थन करेंगे, जिससे उत्तर कोरिया का परमाणु उत्पादन रुक जाए। उत्पादन रोकने का समझौता पूर्ण निरस्त्रीकरण से कम होगा, लेकिन अगर निरीक्षकों को शर्तों की पुष्टि करने दी जाए तो इससे हथियार भंडार की बढ़ोतरी सीमित हो सकती है।
आईएईए के हालिया निष्कर्ष ऐसे समझौते पर बातचीत को और कठिन बनाते हैं। नई इमारतों और विस्तारित केंद्रों से नए सवाल उठते हैं: समझौते में किन चीजों को शामिल करना होगा, मौजूदा सामग्री का हिसाब कैसे रखा जाएगा और क्या अघोषित केंद्रों का पता लगाकर उनकी निगरानी की जा सकेगी।
नई सुविधाओं का क्या मतलब है
योंगब्योन की इमारत और कांगसोन की सहायक इमारत से अपने आप यह तय नहीं होता कि उत्तर कोरिया के पास कितने परमाणु हथियार हैं। आम अनुमानों के मुताबिक, देश के पास दर्जनों वारहेड हैं, जबकि सालाना उत्पादन के आकलन में काफी अंतर है। नए साक्ष्य से यह जरूर पता चलता है कि प्योंगयांग इस संख्या को बढ़ाने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखे हुए है।
ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी के निष्कर्ष सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का लगातार उल्लंघन दर्शाते हैं। उनकी चेतावनी एक व्यापक समस्या की ओर भी इशारा करती है: जमीन पर निरीक्षक न होने के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय को विस्तार का पता तब चल सकता है जब इमारतें पूरी हो चुकी हों और उपकरण लग चुके हों।
किम के दौरे के दौरान सुविधा के कुछ हिस्सों को दिखाने के उत्तर कोरिया के फैसले के कई उद्देश्य हो सकते हैं। इससे घरेलू दर्शकों के सामने तकनीकी प्रगति दिखाई जा सकती थी, विदेशी सरकारों को ताकत का संकेत दिया जा सकता था और प्रतिबंधों के बावजूद परमाणु क्षमता बढ़ाने के किम के दावे को बल मिल सकता था। इन तस्वीरों से विश्लेषकों को ऐसे मूल्यवान साक्ष्य भी मिले जो अन्यथा उपलब्ध नहीं होते।
उम्मीद है कि आईएईए वियना में अपने आम सम्मेलन के एजेंडे में उत्तर कोरिया का मुद्दा बनाए रखेगा। एजेंसी के आकलन निर्माण रोक नहीं सकते, लेकिन वे गतिविधियों का सार्वजनिक रिकॉर्ड देते हैं और सरकारों को प्योंगयांग के कार्यक्रम का पैमाना और दिशा समझने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष
- उत्तर कोरिया ने योंगब्योन में यूरेनियम संवर्धन की दो-मंजिला सुविधा बनाई है।
- इस इमारत में 28 तक सेंट्रीफ्यूज कैस्केड लगाए जा सकते हैं, हालांकि चालू कैस्केड की सटीक संख्या अज्ञात है।
- आईएईए को संकेत मिले हैं कि कांगसोन में विस्तारित सहायक इमारत जनवरी में चालू हुई।
- आईएईए निरीक्षक 2009 से उत्तर कोरिया में नहीं हैं, इसलिए उपग्रह तस्वीरों और सरकारी मीडिया की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- विश्लेषकों का अनुमान है कि योंगब्योन की नई सुविधा हर साल तीन या चार वारहेड के लिए पर्याप्त अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम बना सकती है।
- उत्तर कोरिया का कहना है कि उसकी परमाणु हथियार संपन्न स्थिति अपरिवर्तनीय है, जबकि आईएईए के मुताबिक उसका परमाणु विस्तार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करता है।
- दक्षिण कोरिया ने ऐसी बातचीत का प्रस्ताव दिया है जिसमें उत्तर कोरिया के परमाणु उत्पादन की बढ़ोतरी रोकने के उपाय शामिल हो सकते हैं।






