लगातार शैक्षणिक दबाव से निपटने का एक छिपा तरीका
चीन के एक तटीय प्रांत में रहने वाली मेधावी छात्रा शियाओमेई के लिए, असफलता के डर से बचने का एक तरीका प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बन गईं। 14 साल की उम्र में, एक बड़े लड़के ने उससे कहा कि खांसी की दवा लेने से उसे आराम मिलेगा। इसके बाद उसने बड़ी मात्रा में यह दवा लेना शुरू कर दिया। शुरुआत में गोलियों से उसे चक्कर आते थे। जल्द ही, सुन्न कर देने वाला एहसास परीक्षाओं, पारिवारिक झगड़ों और स्कूल के सबसे अच्छे छात्रों में बने रहने के दबाव से कुछ समय के लिए बचने का जरिया बन गया।
विषय-सूची
- लगातार शैक्षणिक दबाव से निपटने का एक छिपा तरीका
- दवाएं क्यों बन रही हैं बच निकलने का जरिया?
- नींद की कमी हो सकती है चेतावनी का संकेत
- ऑनलाइन पहुंच ने कैसे खोला रास्ता
- अधिकारी कड़े कर रहे नियंत्रण, जबकि उपयोगकर्ता बदल रहे दवाएं
- आंकड़ों के पीछे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
- पारिवारिक सहारा इस चक्र को तोड़ सकता है
- भावनाओं से निपटने के लिए दवाओं का वैश्विक चलन
- रोकथाम कैसी हो सकती है
- निष्कर्ष
दो साल में उसने ऑनलाइन कई दवाएं खरीदीं, जिनमें से कोई भी उसके या उसके परिवार के किसी सदस्य के लिए डॉक्टर ने नहीं लिखी थी। कुछ दवाओं का इस्तेमाल नसों के दर्द या मिर्गी के इलाज में होता है। कभी वह पांच गोलियां लेती, तो कभी 10 से भी ज्यादा, और अलग-अलग असर की तलाश करती। एक बार 50 गोलियां लेने के बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अपने माता-पिता को बताना पड़ा।
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उसने अपनी वजह बताई।
जब पढ़ाई का दबाव बहुत ज्यादा महसूस होता, परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं आते या माता-पिता से झगड़ा भी हो जाता, तो मैं ये दवाएं लेती थी। मैं हकीकत से भाग रही थी।
उसकी कहानी ऑनलाइन चैट समूहों में सामने आए एक व्यापक चलन का हिस्सा है। वहां चीनी किशोर दवाओं के बारे में सलाह साझा करते हैं, उन्हें हासिल करने के तरीकों पर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि अपनी जिंदगी से अलग-थलग महसूस करने के लिए वे दवाओं का इस्तेमाल कैसे करते हैं। इस व्यवहार का आकलन करना मुश्किल है, क्योंकि नाबालिगों में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के दुरुपयोग पर आधिकारिक आंकड़े सीमित हैं। फिर भी, अधिकारियों और शोधकर्ताओं ने इसे जनस्वास्थ्य की बढ़ती चिंता के रूप में पहचाना है।
दवाएं क्यों बन रही हैं बच निकलने का जरिया?
चीन की शिक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी प्रणालियों में से एक है। राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा, जिसे गाओकाओ कहा जाता है, की तैयारी कर रहे छात्र अक्सर लंबे समय तक पढ़ते हैं और स्कूलों तथा परिवारों की तीव्र अपेक्षाओं का सामना करते हैं। कुछ स्कूल विद्यार्थियों को मेधावी कक्षाओं में बांटते हैं और जिनके नंबर गिरते हैं, उन्हें वहां से हटा देते हैं। खराब नतीजा अस्थायी झटके के बजाय इस बात का सबूत लग सकता है कि विद्यार्थी समाज में अपना स्थान खो चुका है।
शियाओमेई ने बताया कि उसकी मेधावी रसायन विज्ञान की कक्षा के विद्यार्थी जरूरत के मुताबिक पढ़ाई न कर पाने पर खुद को पूरी तरह नाकाम समझते थे और दवाओं की अधिक खुराक लेने की बात करते थे। वे हमेशा आनंद पाने के लिए दवाएं नहीं लेते थे। कई किशोर चिंता कम करने, नींद लाने, भावनात्मक पीड़ा सुन्न करने या निराशाजनक नतीजों की यादों से बचने के लिए उनका इस्तेमाल करते थे। चिकित्सा की भाषा में, यह पेशेवर निगरानी के बिना किसी पदार्थ का इस्तेमाल कर मानसिक तनाव से निपटने की कोशिश है।
2,140 चीनी हाई स्कूल के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों पर हालिया शोध इस संबंध में साक्ष्य देता है। अध्ययन में दक्षिणी चीन के छह सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें प्रमुख और सामान्य, दोनों तरह के स्कूल शामिल थे। इसमें पाया गया कि तनाव का संबंध नींद की समस्याओं और कमजोर सामाजिक जुड़ाव के जरिए प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के इस्तेमाल से था। इन कारकों को ध्यान में रखने के बाद तनाव और दवाओं के इस्तेमाल के बीच सीधा सांख्यिकीय संबंध महत्वपूर्ण नहीं रहा।
इसका मतलब यह नहीं कि शैक्षणिक तनाव हानिरहित है या उसका दवाओं के इस्तेमाल से कोई संबंध नहीं। इससे संकेत मिलता है कि तनाव कई समस्याओं की कड़ी के जरिए असर डाल सकता है। दबाव में रहने वाला विद्यार्थी माता-पिता और दोस्तों से दूरी बना सकता है, उसकी नींद खराब हो सकती है, वह थकान महसूस कर सकता है और फिर राहत के लिए दवाओं का सहारा ले सकता है। शोध में पाया गया कि नींद में बाधाएं प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे मजबूत कारक थीं। इसके बाद विद्यार्थियों की यह धारणा थी कि उनकी नींद खराब है।
नींद की कमी हो सकती है चेतावनी का संकेत
अध्ययन में चर्चित शोध के अनुसार, चीन में हाई स्कूल के अंतिम वर्ष के विद्यार्थी अक्सर रात में छह घंटे से भी कम सोते हैं। नींद की कमी से एकाग्रता कमजोर हो सकती है, चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है और चिंता पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है। जो विद्यार्थी आराम नहीं कर पाते, वे ऐसी गोलियां तलाश सकते हैं जो शांति, ऊर्जा या चिंताओं से मानसिक दूरी का वादा करती हैं।
शोध में पाया गया कि माता-पिता और स्कूल के साथ मजबूत जुड़ाव रखने वाले विद्यार्थियों ने बेहतर नींद और नींद की कम समस्याओं की जानकारी दी। इस जुड़ाव में परिवार से लगाव, स्कूल की परवाह करना और यह मानना शामिल है कि शैक्षणिक लक्ष्यों का उनके लिए निजी महत्व है। नंबर गिरने या परीक्षा नजदीक आने पर ऐसे संबंध भावनात्मक सहारा दे सकते हैं।
अध्ययन में चिकित्सा निदान के बजाय प्रश्नावली का इस्तेमाल किया गया और लंबे समय की लत के बजाय हाल में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के इस्तेमाल को मापा गया। इसके नतीजे यह साबित नहीं कर सकते कि तनाव दवाओं के इस्तेमाल का कारण बनता है। फिर भी, निष्कर्ष बताते हैं कि रोकथाम का ध्यान केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दवाएं हटाने पर क्यों नहीं होना चाहिए। नींद, पारिवारिक संवाद और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी इस समस्या का हिस्सा हैं।
किशोरों के लिए उचित इलाज, दवाओं के दुरुपयोग और लत के बीच का फर्क अस्पष्ट हो सकता है। किसी निदान की गई बीमारी के लिए चिकित्सकीय मार्गदर्शन में दवा लेना, निर्धारित मात्रा से ज्यादा लेना, किसी और के नाम पर लिखी दवा का इस्तेमाल करना या दिमाग पर असर पाने के लिए दवा लेना, इन सबसे अलग है। फिर भी, ये व्यवहार एक ही क्रम में आगे बढ़ सकते हैं, खासकर तब, जब विद्यार्थियों को दवाओं की सुरक्षा के बारे में कम जानकारी हो।
ऑनलाइन पहुंच ने कैसे खोला रास्ता
शियाओमेई ने बताया कि वह कुछ ही क्लिक में खांसी की दवा खरीद सकी। उसने अपना राष्ट्रीय पहचान नंबर दर्ज किया, जिसमें उसकी उम्र भी शामिल थी, फिर भी बिक्री पूरी हो गई। कुछ मामलों में 50 गोलियों की कीमत एक अमेरिकी डॉलर से भी कम थी। इसके बाद ऑनलाइन चैट समूहों ने उपयोगकर्ताओं को किसी खास दवा पर अधिकारियों की पाबंदी लगने पर उसके विकल्प पहचानने में मदद की।
बताया जाता है कि किशोर पहचान से बचने के लिए दवाओं के कूट नाम इस्तेमाल करते थे। कुछ उपयोगकर्ता ऐसी दवाएं ढूंढने के निर्देश साझा करते थे जिन पर अभी कड़े नियंत्रण नहीं लगाए गए थे। कुछ दूसरे लोग नई दवाएं हासिल करने के लिए अपने माता-पिता के पुराने नुस्खे नमूने के तौर पर देते थे। बड़ी खुराक लेने के बाद रिकॉर्ड किए गए वॉइस संदेशों में उपयोगकर्ताओं की बोली लड़खड़ाती और उनके लिए शरीर का तालमेल बनाए रखना मुश्किल होता दिखता था, जबकि कुछ लोग उन्हें बस सो जाने की सलाह देते थे।
दुनिया के फार्मास्युटिकल घटकों का एक बड़ा हिस्सा चीन में बनता है और अस्पतालों, फार्मेसियों तथा डिजिटल कारोबार के जरिए दवाएं व्यापक रूप से वितरित होती हैं। लेकिन इससे प्रिस्क्रिप्शन दवाएं यूं ही लेने के लिए सुरक्षित नहीं हो जातीं। इलाज की खुराक में किसी गोली का असर, नशे के लिए ली गई खुराक से बहुत अलग हो सकता है। दवाओं को मिलाकर लेने से भी ऐसे जोखिम पैदा हो सकते हैं जिनका आकलन उपयोगकर्ता ऑनलाइन सलाह से नहीं कर सकते।
12 से 18 साल के चीनी किशोरों पर 2021 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 96.61 प्रतिशत ने किसी न किसी रूप में स्वयं दवा ली थी। इनमें मुख्य रूप से विटामिन, बुखार कम करने वाली दवाएं और दर्दनिवारक जैसे आम उत्पाद शामिल थे। अध्ययन का ध्यान सामान्य स्व-उपचार पर था, न कि नशे के लिए दवाओं के इस्तेमाल पर। फिर भी, इसके निष्कर्ष दिखाते हैं कि किशोरावस्था में दवाओं का इस्तेमाल कितना आम हो सकता है। आसान उपलब्धता और कम कीमत युवाओं को दवाओं को सावधानीपूर्वक मार्गदर्शन की जरूरत वाले पदार्थों के बजाय रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद समझने के लिए प्रेरित कर सकती है।
अधिकारी कड़े कर रहे नियंत्रण, जबकि उपयोगकर्ता बदल रहे दवाएं
चीनी नियामकों ने कई प्रतिबंध लगाकर जवाब दिया है। दिसंबर 2021 में, शियाओमेई द्वारा इस्तेमाल की गई खांसी दबाने वाली दवा डेक्स्ट्रोमेथॉर्फ़न को बिना पर्चे मिलने वाली दवा से केवल प्रिस्क्रिप्शन पर मिलने वाली दवा बना दिया गया। 2022 में इसे ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंधित दवाओं की सूची में शामिल किया गया। बाद में अधिकारियों ने उत्पादन, खरीद और वितरण के नियम और कड़े किए तथा इसे श्रेणी II साइकोट्रोपिक दवाओं की राष्ट्रीय सूची में रखा।
अब निर्माताओं को निर्धारित उत्पादन की मंजूरी लेनी होती है, जबकि अनधिकृत कंपनियां यह दवा नहीं खरीद सकतीं। चिकित्सा संस्थानों और फार्मेसियों को भी दवाओं के भंडार का प्रबंधन मजबूत करने को कहा गया है। ये उपाय उन खबरों के बाद किए गए जिनमें बताया गया था कि किशोर ऑनलाइन विक्रेताओं से डेक्स्ट्रोमेथॉर्फ़न हासिल कर उसे उत्तेजना, उल्लास या मतिभ्रम के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।
बाद में अधिकारियों ने बताया कि युवा नसों के दर्द, दौरे और अन्य स्थितियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं समेत दूसरी दवाओं की ओर बढ़े। चीन में हाल के नियंत्रणों में प्रीगैबलिन जैसी दवाएं भी शामिल हैं। इनके उत्पादन पर सीमाएं लगाई गई हैं और ऑनलाइन बिक्री के कई तरीकों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
चीन के व्यापक नशीली दवाओं के आंकड़े कई श्रेणियों में गिरावट दिखाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि 2025 में नाबालिगों से जुड़े नशीली दवाओं के मामलों और नाबालिग आरोपियों की संख्या पिछले साल की तुलना में 32 प्रतिशत कम हुई। मूल रिपोर्ट में उद्धृत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 35 साल से कम उम्र के नए पहचाने गए नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं की संख्या भी तेजी से घटी। फिर भी, 2025 में नाबालिगों से जुड़े आंकड़े 2023 की तुलना में लगभग 1.8 गुना अधिक रहे। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि नए नशे की लत वाले पदार्थ और फार्मेसियों से हटाकर गैरकानूनी इस्तेमाल में लाई जा रही दवाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
नशीली दवाओं से जुड़े अधिकारियों ने पारंपरिक नियंत्रित दवाओं की सूचियों से बाहर के पदार्थों की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिनमें नाइट्रस ऑक्साइड और एटोमिडेट शामिल हैं। कुछ लत लगाने वाले उत्पाद रोजमर्रा की चीजों की शक्ल में छिपाकर या वेपिंग उत्पादों के जरिए बेचे जाते हैं। बदलते बाजार में कानून लागू करना मुश्किल है, खासकर तब जब विक्रेता सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं और प्रतिबंध लगने पर किसी नई दवा की ओर बढ़ जाते हैं।
आंकड़ों के पीछे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
शोधकर्ताओं और चिकित्सकों का कहना है कि केवल कानून लागू करने से यह समस्या हल नहीं हो सकती कि किशोर ये दवाएं क्यों लेते हैं। 2023 की मेंटल हेल्थ ब्लू बुक के एक अध्ययन के अनुमान के अनुसार, चीन में करीब 9.5 करोड़ लोग अवसाद से जूझते हैं, जिनमें 30 प्रतिशत से अधिक 18 साल से कम उम्र के हैं। ये आंकड़े एक बड़ी आबादी को शामिल करते हैं और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के दुरुपयोग को सीधे तौर पर नहीं मापते, फिर भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की बड़ी जरूरत दिखाते हैं।
चीन ने स्कूलों में सेवाओं का विस्तार किया है। राज्य परिषद के आंकड़ों के अनुसार, अब 92 प्रतिशत प्राथमिक स्कूलों और 95 प्रतिशत जूनियर मिडिल स्कूलों में काउंसलर मौजूद हैं। कई शहरों ने मानसिक स्वास्थ्य की कक्षाएं शुरू की हैं। राष्ट्रीय योजनाओं में स्कूलों में परामर्श कक्ष, काउंटी अस्पतालों में मनोरोग सेवाएं और 2030 तक व्यापक संकट सहायता नेटवर्क बनाने का आह्वान किया गया है।
हालांकि, सेवाओं की उपलब्धता समान नहीं है। द लैंसेट में 2020 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुमान के अनुसार, चीन में योग्य बाल मनोचिकित्सकों की संख्या केवल करीब 500 थी। इनमें से कई बीजिंग, शंघाई और दूसरे बड़े शहरों में केंद्रित थे। स्कूल में काउंसलर परेशानी पहचानने में मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर अवसाद, लत या ओवरडोज के जोखिम में विशेषज्ञ, चिकित्सकीय जांच और लगातार इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंथ्रोपोलॉजी के समाजशास्त्री और निदेशक शियांग बियाओ ने बच्चों पर दबाव को पारिवारिक अपेक्षाओं और सामाजिक अलगाव से जोड़ा है। चीन की पूर्व एक-बच्चा नीति के दशकों के बाद कई परिवारों में एक ही बच्चा है, इसलिए माता-पिता सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा की अपनी उम्मीदें उसी विद्यार्थी पर लगा सकते हैं। स्कूल के लंबे घंटे दोस्ती और शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा से बाहर की गतिविधियों के लिए भी कम समय छोड़ते हैं।
बियाओ ने बताया कि बच्चों पर लगातार ध्यान दिया जा सकता है, फिर भी उन्हें उस तरह का भावनात्मक सहारा न मिले जिसकी उन्हें जरूरत है।
कई बच्चों को बहुत ध्यान मिलता है, लेकिन वे चाहते हैं कि उनसे पूछा जाए कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं। क्या वे अकेला या तनावग्रस्त महसूस करते हैं? चीन में माता-पिता अक्सर इस बात को टाल देते हैं और कहते हैं कि तुम्हें बस और मजबूत बनना है।
पारिवारिक सहारा इस चक्र को तोड़ सकता है
ओवरडोज के बाद अस्पताल में इलाज मिलने से शियाओमेई के अनुभव में बदलाव आया। उसके माता-पिता ने उसे डांटा नहीं। उन्होंने उसकी बात सुनी, बताया कि उसे तकलीफ में देखकर उन्हें कितना दुख होता है और उससे ज्यादा खुलकर बात करने लगे। उसने कहा कि यह जानना कि कोई उसके साथ खड़ा है, बहुत मायने रखता था। बाद में उसने प्रवेश परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे वह डरती थी।
उसके ठीक होने का मतलब यह नहीं कि चिकित्सा देखभाल की जरूरत नहीं है या केवल पारिवारिक सहारा लत का इलाज कर सकता है। इससे यह जरूर दिखता है कि शांत प्रतिक्रिया से किशोर के लिए एक और ओवरडोज से पहले दवाओं के इस्तेमाल के बारे में बताना आसान हो सकता है। माता-पिता नींद, मनोदशा, याददाश्त, स्कूल में उपस्थिति और सामाजिक व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दे सकते हैं। साथ ही, वे ऐसी धमकियों से बच सकते हैं जो बच्चे को और ज्यादा छिपने पर मजबूर कर सकती हैं।
युवाओं को चिंता, अवसाद और खुद को नुकसान पहुंचाने के बारे में बात करने के लिए भी सुरक्षित माहौल चाहिए। बीबीसी को कुछ चैट रूम में ऐसे संदेश मिले जो उपयोगकर्ताओं को कुछ महसूस करने के लिए खुद को चोट पहुंचाने के लिए उकसाते थे। इस संबंध के कारण मामला और जरूरी हो जाता है, क्योंकि नशीली दवाओं का दुरुपयोग अवसाद, अलगाव और आत्महत्या के विचारों के साथ भी दिख सकता है।
22 वर्षीय लू जिंगचान कई साल तक अवसाद से जूझे और चार से अधिक बार ओवरडोज का शिकार हुए। अब वह सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को आगाह करते हैं। उन्होंने प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के असर को सख्त शब्दों में बताया।
दवाओं ने मुझे पागलपन की कगार पर पहुंचा दिया। आप लत की खाई में डूबने और अपनी सेहत बर्बाद करने का जोखिम उठाते हैं।
उन्होंने प्रिस्क्रिप्शन दवाएं लेना बंद कर दिया है और किशोरों से खुद को सुन्न करने के लिए दवाएं लेने के बजाय मदद मांगने की अपील करते हैं। उनका अनुभव यह भी दिखाता है कि निर्भरता तब भी विकसित हो सकती है, जब कोई व्यक्ति नशे के बजाय भावनात्मक पीड़ा से बचने की कोशिश के साथ इसकी शुरुआत करता है।
भावनाओं से निपटने के लिए दवाओं का वैश्विक चलन
चीन का अनुभव एक व्यापक चलन का हिस्सा है। ब्रिटेन में कुछ युवा वयस्क पार्टियों, डेट या काम की बैठकों से पहले प्रीगैबलिन और प्रोप्रानोलोल जैसी दवाएं लेने लगे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इनसे सामाजिक चिंता कम होती है और अगले दिन शराब जैसे असर भी नहीं होते। सोशल मीडिया उपयोगकर्ता कभी-कभी दवाओं के मिश्रण को एक साथ लेने की सलाह देते हैं और उसे तनावमुक्त होने का ज्यादा साफ-सुथरा या सेहतमंद तरीका बताते हैं।
यह तुलना भ्रामक हो सकती है। प्रीगैबलिन का इस्तेमाल मिर्गी और नसों के दर्द के इलाज में होता है, जबकि प्रोप्रानोलोल तेज धड़कन जैसे चिंता के शारीरिक लक्षण कम कर सकता है। चिकित्सकीय निगरानी के बिना या बड़ी मात्रा में लेने पर इनसे चक्कर, बेहोशी, निर्णय लेने की क्षमता में कमी और निर्भरता हो सकती है। दवा छोड़ने पर चिंता, अनिद्रा, अवसाद या आत्महत्या के विचार पैदा हो सकते हैं। ऑनलाइन खरीदी गई दवाएं नकली, दूषित या गलत लेबल वाली भी हो सकती हैं।
चीन के युवाओं पर अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने भी ऐसा ही चलन पाया, जिसमें चिंता, नींद की कमी और परीक्षा के तनाव से निपटने के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया गया। दोनों जगह एक समान बात यह है कि जब निपटने के सामान्य तरीके उपलब्ध न लगें, तो गोली से तेजी से हालात संभलने की उम्मीद की जाती है। थोड़े समय के लिए मिलने वाली राहत इस व्यवहार को मजबूत कर सकती है और व्यक्ति का यह भरोसा कम कर सकती है कि वह दवाओं के बिना परीक्षाओं, सामाजिक स्थितियों या पारिवारिक टकराव का सामना कर सकता है।
रोकथाम कैसी हो सकती है
रोकथाम के लिए कई स्तरों पर काम करना होगा। स्कूल निजी तौर पर तनाव, नींद की समस्याओं, अवसाद और दवाओं के इस्तेमाल की जांच कर सकते हैं और फिर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित पेशेवरों के पास भेज सकते हैं। नींद संबंधी शिक्षा में नियमित आराम, शाम की दिनचर्या और अनिद्रा के इलाज पर ध्यान देना चाहिए, न कि थकान को सफलता की सामान्य कीमत के रूप में पेश करना चाहिए।
स्कूल और स्थानीय अधिकारी सहपाठी मार्गदर्शन, शिक्षकों के सलाह समूहों और ऐसी गतिविधियों के जरिए रिश्ते मजबूत कर सकते हैं, जो विद्यार्थियों को नंबरों से परे अपनापन महसूस कराएं। माता-पिता को सुनने, दवाओं के जोखिम पर बात करने और घर में प्रिस्क्रिप्शन दवाएं सुरक्षित रखने के बारे में मार्गदर्शन की जरूरत है।
डिजिटल मंचों पर नियम लागू करना भी जरूरी है। ऑनलाइन फार्मेसियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रिस्क्रिप्शन की पुष्टि करनी चाहिए, कूट भाषा इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं की जांच करनी चाहिए और नियंत्रित दवाओं के विज्ञापन हटाने चाहिए। चीन में ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री के लिए पहले से पर्चे की असलियत की पुष्टि और वास्तविक नाम प्रणाली जरूरी है। फिर भी, आसानी से दवाएं मिलने की खबरें बताती हैं कि नियम लागू करने में कमियां बनी हुई हैं।
शोधकर्ता चेताते हैं कि उपलब्ध साक्ष्यों की सीमाएं हैं। हाई स्कूल के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों पर हालिया अध्ययन में एक क्षेत्र के विद्यार्थियों के स्वयं दिए गए जवाबों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें एक ही समय पर मापा गया। इससे लत साबित नहीं हुई और न ही कारण-परिणाम का क्रम साबित हुआ। भविष्य के शोध में कई वर्षों तक विद्यार्थियों पर नजर रखनी चाहिए और साथियों के प्रभाव, तनाव से निपटने के कौशल, पारिवारिक आय, क्षेत्रीय अंतर तथा पेशेवर देखभाल तक पहुंच की जांच करनी चाहिए।
निष्कर्ष
- चीनी किशोर परीक्षा के तनाव, चिंता, नींद की समस्याओं और भावनात्मक पीड़ा से बचने के लिए प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- डेक्स्ट्रोमेथॉर्फ़न और दूसरी दवाओं के उत्पादन, बिक्री और प्रिस्क्रिप्शन पर कड़े नियम लगाए गए हैं।
- हाई स्कूल के अंतिम वर्ष के 2,140 विद्यार्थियों पर हुए शोध में दवाओं के इस्तेमाल का संबंध खराब नींद और कमजोर सामाजिक जुड़ाव से पाया गया।
- आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में नाबालिगों से जुड़े नशीली दवाओं के मामले घटे, लेकिन नए पदार्थ और गैरकानूनी इस्तेमाल में लाई गई दवाएं चिंता बनी हुई हैं।
- दवाओं के असुरक्षित इस्तेमाल को रोकने में स्कूलों, परिवारों, स्वास्थ्य सेवाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सभी की भूमिका है।
- समय रहते बातचीत और संवेदनशील सहयोग किशोरों को दवाओं का दुरुपयोग निर्भरता में बदलने से पहले इलाज लेने में मदद कर सकते हैं।






